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                <title>Cause - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>विश्व में होने वाली मौतों का वायु प्रदूषण पांचवा बड़ा कारण</title>
                                    <description><![CDATA[अब कंपनी ने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए एक विशेष वाहन के भीतर कुछ लैंप लगाए हैं जिसके चारों तरफ पर नमक की एक परत है और इसमें विशेष लैंपों के जरिए इसे बहुत कम गर्म कर वाष्प में बदला जाता है और यह सांस के जरिए भीतर जाकर सांस नलिकाओं को खोल देता है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pollution-is-the-fifth-largest-cause-of-deaths-in-the-worldpollution-is-the-fifth-largest-cause-of-deaths-in-the-world/article-12358"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/pollution.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">देश में वायु प्रदूषण की भयावहता को देखते हुए अब देशी तरीके से इससे निपटने की मुहिम शुरू की है</h2>
<ul>
<li style="text-align:center;">
<h3 style="text-align:left;">चिंताजनक: स्टेट आफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2019 में हुआ खुलासा (Pollution )</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विश्व में होने वाली मौतों में सबसे बड़ा पांचवा कारण (Pollution ) वायु प्रदूषण है और यह कुपोषण तथा शराब से होने वाली मौतों के आंकडे को भी पार कर गया है। स्टेट आफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2019 में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण अब युवा वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहा है और उनमें अस्थमा तथा कैंसर के मामले भी सामने आ रहे हैं। देश के अग्रणी संस्थान टाटा केमिकल्स लिमिटेड ने देश में वायु प्रदूषण की भयावहता को देखते हुए अब देशी तरीके से इससे निपटने की मुहिम शुरू की है और नमक के इस्तेमाल से लोगों को प्रदूषण का मुकाबला करने का अभियान शुरू किया है। टाटा ने इस अनूठे प्रयोग को ‘साल्ट थैरेपी’ का नाम दिया है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">टाटा केमिकल्स के विपणन, उपभोक्ता कारोबार के प्रमुख सागर बोके ने गुरुवार को बताया।</li>
<li style="text-align:justify;"> यह साल्ट थैरेपी सदियों से घरों में इस्तेमाल की जा रही थी ।</li>
<li style="text-align:justify;">और लोगों के गले और सीने में जब भी कोई दिक्कत होती थी।</li>
<li style="text-align:justify;">तो वे नमक के पानी के गरारे करते थे ।</li>
<li style="text-align:justify;">और अब नमक के इसी प्राकृतिक गुण को टाटा ने घर घर तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">थैरेपी में मरीजों को नमक का इस्तेमाल करके उन्हें भाप के रूप में लेना पड़ता है</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इस थैरेपी में मरीजों को नमक का इस्तेमाल करके उन्हें भाप के रूप में लेना पड़ता है और जिन मरीजों की छाती में बलगम अधिक जम जाता है यह वाष्प युक्त नमक उनकी सांस की नलियों को खोल देता है। अब कंपनी ने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए एक विशेष वाहन के भीतर कुछ लैंप लगाए हैं जिसके चारों तरफ पर नमक की एक परत है और इसमें विशेष लैंपों के जरिए इसे बहुत कम गर्म कर वाष्प में बदला जाता है और यह सांस के जरिए भीतर जाकर सांस नलिकाओं को खोल देता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस तरह का एक वाहन आम लोगों के लिए निशुल्क बुधवार को लाजपत नगर में लगाया गया था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसी कड़ी में यह हौज खास में लगाया गया जहां स्थानीय लोगों ने जाकर इस थैरेपी का आनंद निशुल्क उठाया।</li>
<li style="text-align:justify;">कंपनी इस तरह के वाहन का इस्तेमाल 14 जनवरी तक विभिन्न क्षेत्रों में करेगी।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी गंभीर</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इन दिनों राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी गंभीर हो गया है और अगर कोई व्यक्ति खुले में एक घंटा किसी चौराहे पर खड़ा हो जाए तो वह 30 सिगरेटों के बराबर प्रदूषक तत्व अपने भीतर ले जाता है और लंबे समय तक वायु प्रदूषण के कारण जीवन के कम से कम चार पांच साल कम हो जाते हैं। कईं शोधों से यह बात सामने आई है कि नमक का इस्तेमाल शरीर की कोशिकाओं की सूजन और संक्रमण को कम करता है और नमक के इसी प्राकृतिक गुण को आम लोगों तक पहुंचाया जाना जरूरी है। गौरतलब है कि नमक का रासायनिक संघटन सोडियम क्लोराइड है और हर स्थान पर पाए जाने वाले नमक में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2020 16:56:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल जल प्रलय का कारण मानवीय हस्तक्षेप भी</title>
                                    <description><![CDATA[केरल को ईश्वर का घर कहा जाता है,लेकिन अब इसी केरल में () बाढ़ और इससे हुई तबाही के कारण हाहाकार मचा हुआ है। 8 अगस्त से अब तक यहाँ पर 375 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। केवल गुरुवार को ही केरल में सरकारी आकड़ों के अनुसार 106 से ज्यादा लोग मारे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-cause-of-the-kerala-water-fallout-is-also-the-human-intervention/article-5460"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/artical2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केरल को ईश्वर का घर कहा जाता है,लेकिन अब इसी केरल में () बाढ़ और इससे हुई तबाही के कारण हाहाकार मचा हुआ है। 8 अगस्त से अब तक यहाँ पर 375 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। केवल गुरुवार को ही केरल में सरकारी आकड़ों के अनुसार 106 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकारों का जोर यहाँ पर मदद पहुँचाने का है। केरल को जब भी याद करते हैं,तो हरियाली और पानी अवश्य याद आती है। बैकवाटर्स में तैरती हाउसबोर्ड कितनी सुंदर लगती है। ऐसा लगता है कि केरल में जिंदगी पानी के साथ कदम ताल मिलाकर चलती है। पानी और केरल के इस अनोखे संगम में आखिर इतनी भीषण बाढ़ कैसे आ गई है?पिछले कुछ दशकों में केरल में कभी बाढ़ की बात सुनी भी नहीं गई। केरल में इससे पहले 1924 में बाढ़ आई थी,जिसमें 1 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्य बारिश करके आगे बढ़ जाता था,लेकिन इस बार ऐसा क्या हो गया कि मानसूनी बादल जरूरत से ज्यादा बारिश कर रहे हैं। फिर राज्य के 80% इलाकों में जल प्लावन की स्थिति आ गई। केरल के इतिहास में पहली बार सूबे के सबसे बड़े बाँध इदुक्की हाइड्रोलॉजिकल प्रोजेक्ट के पाँचों गेट खोलने पड़े। यहाँ से हर सेकेंड 5 लाख लीटर पानी छोड़ा जा रहा है,जिससे राज्य की सबसे बड़ी पेरियार नदी के आस-पास के इलाकों में भारी बाढ़ आ गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस भयावह बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण भी किया है तथा कोच्चि में उच्चस्तरीय बैठक कर राहत कार्यों का समीक्षा भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने हालात से निपटने के लिए केरल को 500 करोड़ की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। वहीं राज्य सरकार ने 2000 करोड़ रुपए की सहायता मांगी है। राज्य में एनडीआरएफ,जल थल और वायु सेना व्यापक राहत कार्य में लगी हुई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">
<strong>केरल के प्रभावित हिस्से:</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">राज्य के 14 में से 13 जिले बारिश से प्रभावित हैं। इस तरह पूरे राज्य में भारी वर्षा हुई है,लेकिन कुछ जिले हैं,जहाँ बाढ़ की समस्या गंभीर है। ये हैं-इदुक्की,कोझीकोड, मलाप्पुरम,कन्नूर और वायनाड। ये जिले उत्तर और मध्य केरल के हैं,ज्यादातर पश्चिमी घाट से लगे हुए हैं। कोझीकोड में आईआईएम है, तो इदुक्की और वायनाड में कई मशहूर टूरिस्ट रिजॉर्ट हैं। हालत ज्यादातर खराब इदुक्की और वायनाड के पहाड़ी इलाकों में है। इदुक्की जिले में इदुक्की डैम का पानी ठहरा हुआ है। बाँध को जिन इलाकों से पानी मिलता है,वहाँ काफी वर्षा होने से बाँध पानी से पूरी तरह भर गया है और बाँध से पानी छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है। वायनाड में बसे मथनवडी और विथिरी से संपर्क पूर्णत: कट गया है,क्योंकि सड़कें बह गई है और कई जगह लैंड स्लाइड हुआ है। इदुक्की में 44%,कोट्टायम में 47% और एनार्कुलम में 44% ज्यादा वर्षा हुई है। केरल में इस आपदा से 3.5 लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं तथा अब तक 3 लाख से ज्यादा लोगों को 1500 रिलीफ कैंपों में शिफ्ट किया जा चुका है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>नुकसान कितने का?</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">केरल बाढ़ की भयावहता इससे ही समझी जा सकती है कि अब तक 375 लोग मार चुके हैं,साथ ही इस आँकड़े के आगे जाने की भी संभावना है। राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अनुसार प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 20,000 करोड़ का नुकसान हुआ है।<br />
बाँध और जलाशयों की स्थिति: 37 में से 34 बाँधों को खोलना पड़ा है,जो केरल में इससे पहले कभी नहीं हुआ। 39 में 35 रिजर्ववायर्स के गेट खोलने पड़े हैं। इसमें कई रिजर्ववायर्स ऐसे हैं,जो पिछले कई सालों से भर नहीं पाते थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">
<strong>केरल में बाढ़ का कारण</strong>:</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत के मौसम विभाग के अनुसार केरल में इस वर्ष का मानसून काफी तगड़ा था। पिछले वर्ष 1 जून से 30 सितंबर के बीच 1855.9 मिमी वर्षा हुई थी,लेकिन इस बार 1 जून से 10 अगस्त के बीच 1840.52 मिमी वर्षा हो गई अर्थात कम वक्त में ज्यादा वर्षा। पूरे देश की तरह केरल में भी दक्षिण पश्चिम मानसून ही मुख्य तौर पर बारिश लाता है। अरब सागर में बनने वाली मानसूनी हवाएँ जून के मध्य या आखिर तक केरल के तटीय इलाकों को छूती हैं। आमतौर पर केरल के उत्तरी और दक्षिणी इलाकों में दक्षिणी पश्चिमी मानसून ही बारिश करता है। हर बार केरल में प्रवेश करने वाली ये मानसूनी हवाएँ केवल सामान्य वर्षा करती थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">
इस बार भारी वर्षा क्यों हुई?</h2>
<p style="text-align:justify;">दरअसल केरल में इस बार काफी बड़े एरिया में चक्रवर्ती सकुर्लेशन की स्थिति बनी हुई थी। फिर बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र होने से मानसूनी हवाएँ बजाए आगे बढ़ने के केरल में रुकी रही और वहाँ बारिश कर रही थी। साथ ही कर्नाटक और केरल में समुद्रीय ज्वार भाटे की स्थिति ने इसमें इजाफे का काम किया। लिहाजा केरल में इतनी बारिश हुई,जो हाल के वर्षों में नहीं देखी गई थी। चूँकि अब कम दबाव का क्षेत्र बदलकर गुजरात की ओर पहुँच चुका है,लिहाजा केरल की स्थिति में बदलाव शुरू हो चुका है और वहाँ एक दो दिनों में वर्षा कम हो जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">
प्रकृति से छेड़छाड़ जैसे मानवीय हस्तक्षेप भी है जिम्मेदार:</h2>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान उन जगहों पर हुआ है जो इकोलॉजिकली संवेदनशील जोन में थे। उन क्षेत्रों में लोगों ने धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर निर्माण किया गया है। इन जगहों पर ही सबसे ज्यादा भूस्खलन भी हुआ है। इसके अतिरिक्त अनेक पर्यावरणविदों ने चैकडैम को भी इसका कारण माना है। इस बार काफी वर्षा हुई है,लेकिन यदि संवेदनशील क्षेत्रों में जमकर निर्माण नहीं होता,तो यह नौबत नहीं आती। उदाहरण के लिए कोच्चि एयरपोर्ट भी बाढ़ से जलमग्न हो गया था। कोच्चि एयरपोर्ट भी पेरियार नदी के ट्रिब्यूटरी पर ही बना है। आपको बता दें कि इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन में निर्माण करने की इजाजत नहीं है। अवैध निर्माण की वजह से पानी के निकलने के मार्ग लगातार बाधित होते चले गए,जिसकी वजह से बाढ़ आई और तबाही देखने को मिली। लेकिन यदि उन क्षेत्रों पर नजर डालेंगे जहाँ भूस्खलन ज्यादा हुआ है तो पता चलता है कि यह वही जगह है,जहाँ पर निर्माण की इजाजत नहीं है,फिर भी चेकडैम बनाए गए हैं या फिर इमारतें खड़ी की गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
गाडगिल कमेटी की रिपोर्ट में यह साफतौर पर कहा गया है कि इन क्षेत्रों में निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन सरकारें रिपोर्ट से इतर काम करती रही। यह कमेटी 2010 में बनी थी। 2010 में व्यापक स्तर पर यह चिंता फैली कि भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर वर्षा के बादलों को तोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाला पश्चिमी घाट मानवीय हस्तक्षेप के कारण सिकुड़ रहा है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने गाडगिल कमेटी का गठन किया था। चेन्नई में पिछली बार हम लोग इसी तरह के मानव निर्मित बाढ़ को देख चुके हैं। जहाँ तक केरल की भौगोलिक स्थिति का सवाल है,तो आपको बता दें कि केरल से 41 नदियाँ निकलती है। केरल में हो रहे बदलाव को इस तरह से भी देखा जा सकता है कि कृषि के विकास के लिए यहाँ वनों का दोहन दोगुना हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका सीधा असर यहाँ के वनक्षेत्रों पर पड़ रहा है। वन क्षेत्रों का कम होना स्वयं ही भूस्खलन को आमंत्रित करना है। इससे बचाव का सीधा सा उपाय यह है कि हम बदलते समय के लिहाज से खुद को कैसे तैयार करें। इसके लिए इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन में निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगे। विकास को एक नए दृष्टि प्रकृति से तादात्म्य से जोड़कर देखना पड़ेगा। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को लघु अवधि एवं दीर्घावधि नीतियों के निर्माण की भी आवश्यकता है। पूर्व में 2013 में केदारनाथ और 2014 में जम्मू कश्मीर में बाढ़ से तबाही को राष्ट्रीय आपदा का दर्जा दिया गया था। अभी वर्तमान में आवश्यक है कि केंद्र सरकार केरल आपदा को भी शीघ्र ही राष्ट्रीय आपदा घोषित करे।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Aug 2018 20:34:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अफवाहों व सोशल मीडिया का दुरुपयोग बन रहे तनाव का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[अनपढ़ता और अफवाहें जब मिल जाएं तो यह उथल-पुथल मचा देती हैं। सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख लगा दिए हैं। असम में दो युवाओं को बच्चे उठाने वाले समझकर गांववासियों ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। पिछले कई दिनों से असम में बच्चों को उठाने संबंधी अफवाहें फैल रहीं थी। दूसरी तरफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">अनपढ़ता और अफवाहें जब मिल जाएं तो यह उथल-पुथल मचा देती हैं। सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख लगा दिए हैं। असम में दो युवाओं को बच्चे उठाने वाले समझकर गांववासियों ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। पिछले कई दिनों से असम में बच्चों को उठाने संबंधी अफवाहें फैल रहीं थी। दूसरी तरफ प्रशासन व पुलिस तंत्र इतना सुस्त है कि ऐसी अफवाहों पर तब ध्यान देता है जब कोई बड़ा हादसा घटित हो जाए। पिछड़ापन इतना ज्यादा है कि जनता और प्रशासन के बीच बड़ी खाई पैदा हो गई है। (Artical)</p>
<p style="text-align:justify;">खासकर बंगाल, बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों में ग्रामीण क्षेत्र अनपढ़ता व अफवाहों के कारण बदतर परिस्थितियों से गुजर रहा है। पिछले महीनों में चोटी काटने की अफवाहों ने तब कई जानें ले ली जब किसी अज्ञात वृद्ध महिला की तरफ से चोटी काटने की अफवाह फैला दी गई। सोशल मीडिया ने ऐसी अफवाहों का प्रभाव कई गुणा बढ़ा दिया। सोशल मीडिया बुरा नहीं पर इसका दुरुपयोग बुरा है। यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह समझाए की मीडिया की आजादी व समाज की सुरक्षा के बीच किस तरह संतुलन रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:सन्देह अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ कानूनन सजा का प्रावधान है लेकिन सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों की बड़ी गिनती इन कानूनों से ही अनभिज्ञ है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने संबंधी ऐसा कोई प्रबंध होना चाहिए कि इंटरनेट का कनैक्शन देने या मोबाइल फोन की खरीदारी के समय कानून संबंधी जानकारी लिखित रूप में दी जाए ताकि लोगों में जागरुकता के साथ-साथ कानून का भय भी पैदा हो। (Artical)</p>
<p style="text-align:justify;">कई पिछड़े क्षेत्रों में अनपढ़ता के कारण हिंसा इतनी ज्यादा बढ़ रही है कि लोग आरोपी को कानून के हवाले करने की बजाय कबीलाई सोच अपनाकर सजा देने लगे हैं। कई जगहों पर निर्दोष व्यक्तियों को चोर समझकर मार दिया गया। भड़की जनता बेगुनाह लोगों की जान ले लेती है। भीड़ पर कोई कार्रवाई नहीं होती, मामला रफा-दफा हो जाता है। भीड़ की आड़ में असामाजिक तत्व अपराध कर जाते हैं। ऐसी घटनाएं भारतीय सभ्यता, कानून और सरकार के नाम पर कलंक हैं। इस विष य में प्रभावी शिक्षाा व कानून व्यवस्था के प्रबंध किए जाने आवश्यक हैं। (Artical)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Jun 2018 09:36:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जोहड़ पायतन बना लोगों के लिए परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[लोगो का आरोप विधायक कस्बे के विकास में नहीं है गंभीर? केसरीसिंहपुर (बाबू लाल, सच कहूं न्यूज)। कस्बे के वार्ड 5 में स्थित जोहड़ पायतन लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। इस के समीप बसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि एक तरफ यहां मच्छरों की भरमार रहती है जिससे अनेक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/johad-makes-the-cause-of-trouble-for-the-people/article-3819"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/johad.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">लोगो का आरोप विधायक कस्बे के विकास में नहीं है गंभीर?</h2>
<p><strong>केसरीसिंहपुर (बाबू लाल, सच कहूं न्यूज)। </strong>कस्बे के वार्ड 5 में स्थित जोहड़ पायतन लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। इस के समीप बसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि एक तरफ यहां मच्छरों की भरमार रहती है जिससे अनेक बीमारियां फैल रही है वहीं दूसरी ओर बच्चों बूढ़ों आदि का इसके अंदर गिरकर मरना एक आम सी बात हो गई है वही इसके समीप बसे लोगों को इतनी दुर्गंध में रहना उनके लिए जी का जंजाल बना हुआ है क्योंकि यह आबादी क्षेत्र में है और इसके समीप अनेक लोग रहते हैं जिनके लिए यहां रहना परेशानी का सबब है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं मौसम विभाग द्वारा श्रीगंगानगर जिले में भारी बरसात की चेतावनी दी गई है बरसात के चलते पायतन पूरी तरह से पानी से भर जाता जिसके चलते पानी लोगों के घरों में घुस जाते हैं वह लोगों के लिए यह एक आफत से कम नहीं है गत दिनों में विधायक सुरेंद्र पाल सिंह टीटी कस्बे में अनेक विकास कार्यों शिलान्यास व लोकापर्ण करने पहुंचे तो विधायक अपने संबोधन में विकास की गाथा गाते दिख रहे थे</p>
<p style="text-align:justify;">पर इस समस्या की ओर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया और ना ही इसका साढे चार वर्षों में कोई समाधान कर सके जबकि कस्बेवासियों द्वारा समय-समय पर विधायक को इस समस्या से अवगत कराया गया है पिछले विधानसभा चुनाव में जब टीटी कस्बे में प्रचार करने के लिए पहुंचे तो उनके सामने यह समस्या उठाएगी तो उन्होंने आश्वासन दिया कि मैं विधायक बनते ही इस समस्या को हल करवाऊंगाऔर व मंत्री भी बन गए पर आज साढे चार वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या का हल होता नहीं दिख रहा वह जोहड़ पायतन वही का वही आबादी क्षेत्र में स्थित है</p>
<p style="text-align:justify;">गत महीनों में वार्डवासियों द्वारा नगरपालिका में जाकर इस समस्या के बारे में पालिकाध्यक्ष से बात की तो पालिकाध्यक्ष ने कहा की नगरपालिका इस समस्या का समधान करने के लिए अपने स्तर पर कार्य कर रही है पर लोगों को संतुष्ट जनक जवाब नहीं मिला जिस कारण वार्ड के बीजेपी कार्यकर्ता बीजेपी पार्टी व विधायक का विरोध करते नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टीटी के कार्यक्रमो में वार्डवासी व बीजेपी कार्यकर्ता का ना जाना कस्बे में टीटी के विरोध का उदहारण है मंडी में टीटी अपने कार्यक्रमों में भीड़ नही जुटा पा रहे है। चुनावी वर्ष है अगर इसी तरह टीटी का विरोध जारी रहा तो करनपुर विधानसभा सीट का बीजेपी को सोचना होगा। कार्यकर्ता किसी भी पार्टी की रीढ़ की हड्डी होता है पर व कार्यकर्ता आज बीजेपी से नाखुश नजर आ रहे है। यह जोहड़ पायतन आबादी क्षेत्र से बाहर होना चाहिए यह बीमारियों का घर है। यह वार्ड के लिए सबसे बड़ी समस्या है इसका समाधान होना चाहिए।</p>
<p><em>वीरू पार्षद वार्ड 5 नगरपालिका के पास धन की कोई कमी नहीं है नगर पालिका अपने स्तर पर इस समस्या का समाधान करने में लगी हुई है। अगर मंडवासी नगर पालिका को तीन नंबर चुंगी जोहड़ पायतन से लेकर राधा स्वामी डेरे तक सीधा खाला निकालने की अनुमति दें तो जोहड़ पायतन के आधे गंदे पानी की निकासी नगर पालिका को मिल रही भूमि में की जा सकती है। यह मंडीवासियों के सहयोग से ही सम्भव हैं।</em><br />
<em><strong>-कालूराम बाजीगर नगर पालिका अध्यक्ष</strong></em></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 09:30:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>तनाव से चीन का ही आर्थिक नुकसान होगा</title>
                                    <description><![CDATA[डोकलाम के मसले को जिस तरह चीन नाक का सवाल बनाकर युद्ध का माहौल निर्मित कर रहा है और अगर भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सर्वाधिक खामियाजा भी चीन को ही भुगतना होगा। हालांकि भारत संयम का परिचय देते हुए हरसंभव कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/stress-will-cause-economic-damage/article-2763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/china-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डोकलाम के मसले को जिस तरह चीन नाक का सवाल बनाकर युद्ध का माहौल निर्मित कर रहा है और अगर भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सर्वाधिक खामियाजा भी चीन को ही भुगतना होगा। हालांकि भारत संयम का परिचय देते हुए हरसंभव कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की नौबत न आए। लेकिन इसके बावजूद भी अगर सीमा पर तनातनी बढ़ती है, तो उसके लिए पूर्णत: चीन जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन को समझना होगा कि उसके इस रवैये से भारत में उसके उत्पादों के बहिष्कार का माहौल बनना शुरु हो गया है और अगर चीन चेतता नहीं है, तो उसे भारी कारोबारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लोग न सिर्फ चीन के अड़ियल रवैये से नाराज हैं, बल्कि इससे भी अवगत हैं कि वह मैन्युफैक्चरिंग में घटिया कच्चे माल का इस्तेमाल कर अपना घटिया व सस्ता माल भारत में उतार रहा है। यही वजह है कि उसके उत्पादों की मांग भारत में तेजी से घटने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों पर ध्यान दें तो विगत दो दशकों में चीन का भारत में व्यापार कई गुना बढ़ा है। 1984 में दोनों देशों द्वारा ‘सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र’ यानी एमएफएन पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारत की अपेक्षा चीन कई गुना ज्यादा फायदे में रहा है। सन् 2000 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.9 अरब डॉलर था, जोकि आज 2016 में बढ़कर 75 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। इस अर्थ में चीन भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझीदार देश बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच कारोबार का सर्वाधिक फायदा चीन के पक्ष में गया है। भारत चीन को निर्यात के मुकाबले 50 अरब डॉलर का आयात ज्यादा करता है। लाभ की जोरदार संभावनाओं के कारण पिछले 3-4 वर्षों से चीन की कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाना शुरु कर दिया है। सालाना आधार पर वर्ष 2015 में यह छह गुना बढ़कर 87 करोड़ डॉलर हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की कंपनियों पर प्रतिबंधों में ढील और अनुकूल टैक्स दरों के चलते और निवेश की संभावना बढ़ गयी है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने पिछले वर्ष से ‘मेक इन इंडिया’ कंपेने में चीन का ज्यादा से ज्यादा निवेश हासिल करने के प्रयास किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2011 में चीन को भारतीय निर्यात 23.41 अरब डॉलर का था, जबकि भारत को चीन का निर्यात 50.49 डॉलर रहा। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच 75 अरब डॉलर का व्यापार रहा, लेकिन भारत को व्यापार घाटे से गुजरना पड़ा। यह सच्चाई है कि आज भारत का व्यापार घाटा का बड़ा हिस्सा चीन की वजह से है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा पिछले साल 46.56 अरब डॉलर पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी 2015 के 100 अरब डॉलर के लक्ष्य से नीचे रहा। वर्ष 2016 में 70.08 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2015 के 71.63 बिलियन डॉलर से 2.2 प्रतिशत कम था।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि चीन इस स्थिति से अवगत नहीं है। अभी पिछले दिनों ही चीन की सरकारी मीडिया ने अपनी कंपनियों को सावधान किया है कि वे भारत में निवेश को लेकर सतर्क रहे। दरअसल चीन को डर है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो उसके हितों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। चीन को समझना होगा कि अगर ऐसी स्थिति उत्पन होती है तो उसके लिए स्वयं जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक भारत का सवाल है तो वह चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते को लेकर बेहद संवेदनशील है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि पिछले वर्ष चालू वित्त वर्ष में भारत ने पहली बार चीन से 18000 टन पेट्रोल और 39000 टन डीजल का आयात किया है। अब चीन को तय करना है कि वह भारत के साथ तनाव चाहता है या शांति।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अरविंद जयतिलक</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 23:15:49 +0530</pubDate>
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