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                <title>Economic Damage - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Economic Damage RSS Feed</description>
                
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                <title>नोटबंदी से देश को आर्थिक नुकसान: शिव सेना</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। शिवसेना (Shiv Sena) ने कहा है कि नोटबंदी का निर्णय देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने वाला फैसला था जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी मुहर लगा दी है। शिव सेना ने पार्टी के मुख पत्र सामना के शुक्रवार के संपादकीय में लिखा है कि नोटबंदी करते समय दावा किया गया था […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/economic-damage-to-the-country-by-demonetization-shiv-sena/article-5631"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/shiv-sena.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> शिवसेना <strong>(Shiv Sena)</strong> ने कहा है कि नोटबंदी का निर्णय देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने वाला फैसला था जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी मुहर लगा दी है।</p>
<p>शिव सेना ने पार्टी के मुख पत्र सामना के शुक्रवार के संपादकीय में लिखा है कि नोटबंदी करते समय दावा किया गया था कि इससे भ्रष्टाचार, कालाधन और फर्जी नोटों की दुकान बंद हो जायेगी लेकिन ये दुकानें पिछले दो वर्ष में पहले की तुलना में और अधिक बढ़ गयीं।</p>
<p>यह दावा भी खोखला साबित हुआ कि नोटबंदी के कारण कश्मीर के आतंकवादियों को मिलने वाली रसद बंद हो जायेगी और कश्मीर में शांति स्थापित हो जायेगी। नोटबंदी के कारण देश के लघु उद्योग समाप्त हो गये। सेवा क्षेत्र संकट में आ गया।</p>
<p>गृह निर्माण क्षेत्र पर भी बिजली गिर पड़ी। छोटे और मझोले किसानों को नुकसान हुआ। बैंकों के सामने आम लोगों को दो माह तक लाइनें लगानी पड़ीं।</p>
<p>पुराने नोटों को रद्द कर नये नोटों को छापने के लिए पिछले दो वर्ष में 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गये। इसके बावजूद सत्ताधारी दल विकास-विकास की रट लगाये हुए हैं।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Aug 2018 17:34:51 +0530</pubDate>
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                <title>तनाव से चीन का ही आर्थिक नुकसान होगा</title>
                                    <description><![CDATA[डोकलाम के मसले को जिस तरह चीन नाक का सवाल बनाकर युद्ध का माहौल निर्मित कर रहा है और अगर भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सर्वाधिक खामियाजा भी चीन को ही भुगतना होगा। हालांकि भारत संयम का परिचय देते हुए हरसंभव कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/stress-will-cause-economic-damage/article-2763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/china-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डोकलाम के मसले को जिस तरह चीन नाक का सवाल बनाकर युद्ध का माहौल निर्मित कर रहा है और अगर भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सर्वाधिक खामियाजा भी चीन को ही भुगतना होगा। हालांकि भारत संयम का परिचय देते हुए हरसंभव कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की नौबत न आए। लेकिन इसके बावजूद भी अगर सीमा पर तनातनी बढ़ती है, तो उसके लिए पूर्णत: चीन जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन को समझना होगा कि उसके इस रवैये से भारत में उसके उत्पादों के बहिष्कार का माहौल बनना शुरु हो गया है और अगर चीन चेतता नहीं है, तो उसे भारी कारोबारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लोग न सिर्फ चीन के अड़ियल रवैये से नाराज हैं, बल्कि इससे भी अवगत हैं कि वह मैन्युफैक्चरिंग में घटिया कच्चे माल का इस्तेमाल कर अपना घटिया व सस्ता माल भारत में उतार रहा है। यही वजह है कि उसके उत्पादों की मांग भारत में तेजी से घटने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों पर ध्यान दें तो विगत दो दशकों में चीन का भारत में व्यापार कई गुना बढ़ा है। 1984 में दोनों देशों द्वारा ‘सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र’ यानी एमएफएन पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारत की अपेक्षा चीन कई गुना ज्यादा फायदे में रहा है। सन् 2000 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.9 अरब डॉलर था, जोकि आज 2016 में बढ़कर 75 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। इस अर्थ में चीन भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझीदार देश बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच कारोबार का सर्वाधिक फायदा चीन के पक्ष में गया है। भारत चीन को निर्यात के मुकाबले 50 अरब डॉलर का आयात ज्यादा करता है। लाभ की जोरदार संभावनाओं के कारण पिछले 3-4 वर्षों से चीन की कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाना शुरु कर दिया है। सालाना आधार पर वर्ष 2015 में यह छह गुना बढ़कर 87 करोड़ डॉलर हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की कंपनियों पर प्रतिबंधों में ढील और अनुकूल टैक्स दरों के चलते और निवेश की संभावना बढ़ गयी है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने पिछले वर्ष से ‘मेक इन इंडिया’ कंपेने में चीन का ज्यादा से ज्यादा निवेश हासिल करने के प्रयास किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2011 में चीन को भारतीय निर्यात 23.41 अरब डॉलर का था, जबकि भारत को चीन का निर्यात 50.49 डॉलर रहा। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच 75 अरब डॉलर का व्यापार रहा, लेकिन भारत को व्यापार घाटे से गुजरना पड़ा। यह सच्चाई है कि आज भारत का व्यापार घाटा का बड़ा हिस्सा चीन की वजह से है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा पिछले साल 46.56 अरब डॉलर पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी 2015 के 100 अरब डॉलर के लक्ष्य से नीचे रहा। वर्ष 2016 में 70.08 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2015 के 71.63 बिलियन डॉलर से 2.2 प्रतिशत कम था।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि चीन इस स्थिति से अवगत नहीं है। अभी पिछले दिनों ही चीन की सरकारी मीडिया ने अपनी कंपनियों को सावधान किया है कि वे भारत में निवेश को लेकर सतर्क रहे। दरअसल चीन को डर है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो उसके हितों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। चीन को समझना होगा कि अगर ऐसी स्थिति उत्पन होती है तो उसके लिए स्वयं जिम्मेदार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक भारत का सवाल है तो वह चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते को लेकर बेहद संवेदनशील है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि पिछले वर्ष चालू वित्त वर्ष में भारत ने पहली बार चीन से 18000 टन पेट्रोल और 39000 टन डीजल का आयात किया है। अब चीन को तय करना है कि वह भारत के साथ तनाव चाहता है या शांति।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अरविंद जयतिलक</strong></p>
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</p><p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 23:15:49 +0530</pubDate>
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