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                <title>Policy Rates - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आरबीआई का महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास पर फोकस, नीतिगत दरें रखीं यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आसमान छूती महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास दर को तेज बनाए रखने के उद्देश्य से रिवर्स रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपनी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/rbi-focus-on-inflation-control-and-economic-growth-kept-policy-rates-unchanged/article-32201"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/rbi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आसमान छूती महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास दर को तेज बनाए रखने के उद्देश्य से रिवर्स रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपनी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की चालू वित्त वर्ष की आज समाप्त पहली द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद कहा, यूरोप में युद्ध की शुरूआत के साथ हम नई और विशाल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यूरोप में संघर्ष से वैश्विक अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है। ऐसे परिदृश्य में महंगाई को नियंत्रित करने और विकास दर में तेजी बनाए रखने के लिए एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तरलता सुनिश्चित करने के लिए हालांकि रिवर्स रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा अन्य दरों को पूर्व के स्तर पर यथावत रखा गया है। आरबीआई ने प्रमुख मौद्रिक नीतिगत दर रेपो रेट को चार प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है। गर्वनर ने कहा कि आरबीआई के लिए कोरोना महामारी के दौरान लंबे समय से आपूर्ति का बाधित होना चिंताजनक रहा है। इसने जिंस और वित्तीय बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। रिवर्स रेपो दर को 40 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 फीसदी कर दिया गया है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई अनुमान फरवरी की मौद्रिक नीति समीक्षा के 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत और विकास दर अनुमान 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि एमपीसी ने कच्चे तेल की कीमत को 100 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 16.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत और चौथी एवं अंतिम तिमाही में चार प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। खाद्य तेल की कीमतें निकट अवधि में ऊंची रहने की संभावना है। फरवरी के अंत से कच्चे तेल में तेजी महंगाई के बढ़ने का एक प्रमुख कारक रही है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2022-23 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर के 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई 6.3 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.0 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.1 प्रतिशत रह सकती है।</p>
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                <pubDate>Fri, 08 Apr 2022 12:49:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास अनुमान 9.5 प्रतिशत पर यथावत : आरबीआई</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव कम होने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने, खरीफ की सामान्य बुवाई से ग्रामीण मांग में उछाल रहने और त्यौहारी सीजन में संपर्क सेवाओं की मांग बढ़ने जैसे सकारात्मक संकेतों के बीच सेमी कंडक्टर की कमी, जिंसों के महंगा होने और वैश्विक वित्तीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/economy-back-on-track-no-change-in-policy-rates/article-27498"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/bank-rbi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव कम होने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने, खरीफ की सामान्य बुवाई से ग्रामीण मांग में उछाल रहने और त्यौहारी सीजन में संपर्क सेवाओं की मांग बढ़ने जैसे सकारात्मक संकेतों के बीच सेमी कंडक्टर की कमी, जिंसों के महंगा होने और वैश्विक वित्तीय बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर अनुमान को 9.5 प्रतिशत पर यथावत रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने उनकी अध्यक्षता में केन्द्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की आज समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद बताया कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव में गिरावट से घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है। आगे सामान्य खरीफ बुवाई को देखते हुए ग्रामीण मांग में उछाल बनाए रखने की संभावना है। वहीं, रबी पैदावार के भी बेहतर रहने की उम्मीद हैं। कोरोना टीकाकरण की गति में पर्याप्त तेजी, संक्रमण के नए मामलों में निरंतर कमी और आगामी त्यौहारी सीजन में संपर्क गहन सेवाओं की मांग में तेजी वृद्धि हो सकती है। साथ ही गैर-संपर्क गहन सेवाओं की मांग के भी मजबूत रहने से शहरी मांग भी बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मौद्रिक एवं वित्तीय स्थितियां आसान बनी हुई है, जो विकास के लिए सहायक होती हैं। देश में क्षमता उपयोग के साथ ही कारोबार परिदृश्य एवं उपभोक्ताओं के भरोसे में सुधार हो रहा है। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास, परिसंपत्ति मुद्रीकरण, कराधान, दूरसंचार क्षेत्र और बैंकिंग क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने वाले व्यापक सुधारों से निवेशकों का विश्वास भी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना घरेलू विनिर्माण और निर्यात के लिए शुभ संकेत है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, वैश्विक स्तर पर सेमी कंडक्टर की कमी, जिंसों की कीमतों एवं इनपुट लागत में वृद्धि और वैश्विक वित्तीय बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव के साथ ही भविष्य में कोविड-19 महामारी की अनिश्चितता अर्थव्यवस्था के विकास की संभावनाओं के लिए प्रमुख जोखिम हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि का अनुमान 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। इसमें चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर 7.9, तीसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान शामिल है। इसके अगले वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक जीडीपी विकास दर के 17.2 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान वास्तविक जीडीपी में सालाना आधार पर 20.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई लेकिन कारोना की दूसरी लहर ने आर्थिक विकास की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी का स्तर दो साल पहले महामारी शुरू होने के पूर्व के स्तर से 9.2 प्रतिशत कम था। मांग पक्ष की बात करें तो पहली तिमाही में जीडीपी के लगभग सभी घटकों ने साल-दर-साल मजबूत वृद्धि दर्ज की। आपूर्ति पक्ष पर वास्तविक सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) की वृद्धि दर 18.8 प्रतिशत रही।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी, प्रतिबंधों में ढील और टीकाकरण की गति में तेजी से इस वर्ष अगस्त-सितंबर में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगस्त में शांत रहने के बाद सितंबर में तेज होने से खरीफ की बुवाई पिछले वर्ष के स्तर से अधिक हो गई। पूर्व के अग्रिम अनुमान के अनुसार, 15 करोड़ पांच लाख टन का रिकॉर्ड खरीफ खाद्यान्न उत्पादन समग्र कृषि क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है। सितंबर के अंत तक जलाशय का स्तर पूरे जलाशय स्तर के 80 प्रतिशत पर था, जो पिछले दस साल के औसत स्तर से अधिक है, जिससे रबी उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>मौद्रिक नीति की मुख्य बातें</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार आठवीं बार प्रमुख नीतिगत दर (रेपो) को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसके परिणामस्वरूप रिवर्स रेपो भी 3.35 प्रतिशत पर कायम।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर बरकरार।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये मौद्रिक नीति के रुख को समायोजन वाला बनाये रखेगा।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 2021-22 में 5.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5.2 प्रतिशत पर आने की संभावना।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>रिजर्व बैंक ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कोविड महामारी के बाद से आरबीआई ने उसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिये 100 से अधिक उपायों की घोषणा की।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 6 से 8 दिसंबर को होगी।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 11:15:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>न ब्याज दरें घटी, न ईएमआई पर असर, नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को यथावत् रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नी​ति समीति की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/no-change-in-policy-rates-2/article-24154"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/no-change-in-policy-rates.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को यथावत् रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नी​ति समीति की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा। बैठक के बाद दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। विदेशों से भी मांग आ रही है। साथ ही मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण भी गति पकड़ेगा। ये सभी कारक अर्थव्यवस्था को गति देंगे। हालांकि टूरिज्म एवं हॉस्पिटलिटी सेक्टर को अब रिजर्व बैंक के माध्यम से राहत देने की बात कही गई है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि बैंक होटल, टूर आॅपरेटर, प्राइवेट बस, रेस्टोरेंट, एविएशन, सलोन, एंसिलियरी सेवा आॅपरेटर आदि को किफायती लोन देने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये की नकदी की व्यवस्था बैंकों को जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 28 मई को समाप्त सप्ताह में 598.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया और आज समाप्त हो रहे सप्ताह में इसके 600 अरब डॉलर के पार पहुंचने के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि संकेत हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार इस सप्ताह 600 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है, लेकिन हमें आंकड़ों की पुष्टि का इंतजार करना होगा। इस सप्ताह के आंकड़े अगले शुक्रवार को जारी किये जायेंगे। यह किसी भी वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में चुनौति का सामना करने का आत्मविश्वास प्रदान करता है। उल्लेखनीय है कि 21 मई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 592.9 अरब डॉलर पर रहा था। इस प्रकार 28 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान इसमें 5.3 अरब डॉलर की जबरदस्त वृद्धि रही है। इस समय सिर्फ चीन, जापान, स्विटजरलैंड और रूस के पार 600 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। 3,198 अरब डॉलर के साथ चीन पहले स्थान पर है जबकि 605 अरब डॉलर के साथ रूस भारत से कुछ ही आगे है।</p>
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                <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 11:21:53 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं मिला त्योहारी तोहफा, नीतिगत दरें यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था में हुयी गिरावट और त्योहारी सीजन के मद्देनजर मांग बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कमी किये जाने की उम्मीद लगाये लोगों को शुक्रवार को उस समय निराशा हाथ लगी जब रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया। हालांकि समिति ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/not-received-festive-gift-policy-rates-remain-same/article-19085"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/percent-reduction-in-policy-rate.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था में हुयी गिरावट और त्योहारी सीजन के मद्देनजर मांग बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कमी किये जाने की उम्मीद लगाये लोगों को शुक्रवार को उस समय निराशा हाथ लगी जब रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया। हालांकि समिति ने चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में एकोमोडेटिव रूख बनाये रखने का फैसला किया है जिससे आगे ब्याज दरों में कटौती किये जाने की उम्मीद बनी हुयी है। मौद्रिक नीति समिति की यह तीसरी बैठक पहले 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक होनी थी लेकिन समिति के तीन बाहरी बाहरी सदस्यों के रूप में नियुक्त डॉ़ चेतन घाटे, डॉ़ पम्मी दुआ और डॉ़ रवीन्द्र ढोलकिया का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा था जिसके कारण इनके स्थान पर नये सदस्यों की नियुक्ति तक बैठक टाल दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई के इंदिरा गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च की प्रोफेसर डॉ़ असीमा गोयल, अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान के वित्त प्रोफेसर डाॅ़ जयंत आर. वर्मा और दिल्ली के नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाईड इकोनॉमी रिसर्च के अनुसंधान कार्यक्रम के वरिष्ठ सलाहकार डॉ़ शशांक भिडे की चार वर्षाें के लिए नियुक्ति के बाद समिति की तीन दिवसीय बैठक सात अक्टूबर को शुरू हुयी थी। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुयी इस बैठक में समिति ने नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया। बैठक में लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुये दास ने कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, बैंक दर को 4.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैस्लीलिटी (एमएसएफ) को 4.25 प्रतिशत पर यथावत रखा गया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Oct 2020 11:35:06 +0530</pubDate>
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                <title>नीतिगत दरें यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों को यथावत रखने का निर्णय लेते हुये आज कहा कि महँगाई को लक्षित दायरे में रखने और कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को उबरने तक उसका रुख एकोमोडेटिव बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष में समिति की तीन दिवसीय दूसरी बैठक के आज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों को यथावत रखने का निर्णय लेते हुये आज कहा कि महँगाई को लक्षित दायरे में रखने और कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को उबरने तक उसका रुख एकोमोडेटिव बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष में समिति की तीन दिवसीय दूसरी बैठक के आज समाप्त होने के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि समिति ने बहुमत से यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, बैंक दर को 4.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैस्लीलिटी (एमएसएफ) को 4.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2020 12:54:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसदी की कटौती</title>
                                    <description><![CDATA[ऋण सस्ता होने की बनी उम्मीद नई दिल्ली। महंगाई में नरमी आने के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों रेपो और रिवर्स रेपो दर में एक चौथाई फीसदी की कटौती करने की बुधवार को घोषणा की, जिससे व्यक्तिगत ऋण के साथ ही आवास एवं कार ऋण के भी सस्ते होने की उम्मीद बनी है। मौद्रिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/0-25-percent-reduction-in-policy-rates/article-2796"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bank-rbi.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ऋण सस्ता होने की बनी उम्मीद</h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> महंगाई में नरमी आने के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों रेपो और रिवर्स रेपो दर में एक चौथाई फीसदी की कटौती करने की बुधवार को घोषणा की, जिससे व्यक्तिगत ऋण के साथ ही आवास एवं कार ऋण के भी सस्ते होने की उम्मीद बनी है। मौद्रिक नीति समिति की दो दिवसीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल सहित पांच सदस्यों ने इस कटौती के पक्ष में मतदान किया जबकि एक सदस्य ने इसमें आधी फीसदी की कटौती करने का और एक सदस्य ने यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में मत दिया।</p>
<p>बैठक के बाद जारी बयान में पटेल ने कहा कि महंगाई में आई नरमी के मद्देनजर नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसदी की कटौती की गई है। अब रेपो दर 6.25 प्रतिशत से घटकर 6.0 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 6.0 प्रतिशत से घटकर 5.75 प्रतिशत हो गई है। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसी तरह से मार्जिनल स्टैंडिंग फैसेलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर भी 6.50 प्रतिशत से घटकर 6.25 प्रतिशत हो गई है। हालांकि समिति ने चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान को 7.3 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।</p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 06:22:17 +0530</pubDate>
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