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                <title>Supreme Court : उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दे राजनीतिक दल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 4 आम चुनावों में दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/detail-candidates-criminal-history-on-sites-social-media-supreme-court/article-13011"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirbhaya-case-supreme-court-dismisses-akshays-curative-petition.jpg" alt=""></a><br /><h3>प्रत्याशियों के खिलाफ दायर मामलों की जानकारी अगले 72 घंटे में जाए |<strong>Supreme Court</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट <strong>(Supreme Court)</strong> ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 4 आम चुनावों में दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है। कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव सुधारों को लेकर अहम फैसले में कहा- सभी राजनीतिक दल अपनी वेबसाइट पर आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के चयन की वजह बताएं और उनके खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी अपलोड करें। साथ ही प्रत्याशियों के खिलाफ दायर मामलों की जानकारी अगले 72 घंटे में चुनाव आयोग को दी जाए।</p>
<h2>राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित कराएं और फेसबुक-ट्विटर पर भी करें साझा</h2>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आदेश का पालन न होने पर चुनाव आयोग अपने अधिकार के मुताबिक राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही पार्टियां प्रत्याशियों के आपराधिक मामलों की जानकारी क्षेत्रीय-राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित कराएं और फेसबुक-ट्विटर पर भी साझा करें। भाजपा नेता और वकील अश्वनी उपाध्याय ने राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने 2 माह पहले भी आदेश दिया था</h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए आदेश पारित करे। ताकि तीन महीने के अंदर राजनीतिक दलों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट देने से रोका जा सके। तब सीजेआई एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह आदेश दिया था। उपाध्याय की मांग थी कि पार्टियों को अपराधिक छवि वाले लोगों को चुनाव के टिकट देने से रोका जाए। साथ ही उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड अखबारों में प्रकाशित कराने का आदेश दिया जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जनहित याचिका में क्या था ?</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार भारत में राजनीति के अपराधीकरण में बढ़ोतरी हुई है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और 24% सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>2009 के लोकसभा चुनाव में 15% प्रत्याशियों  ने आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इन प्रत्याशियों में से 610 या 8% के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले दर्ज थे।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसी तरह, 2014 में 8,163 प्रत्याशियों में से 1398 ने आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और इसमें से 889 के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले लंबित थे।</strong></li>
</ul>
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<p>Detail, Candidates, Criminal, History, Sites, Social, Media, Supreme Court</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 12:11:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव प्रत्याशी: अनिवार्य घोषणाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायधीश ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विधायी निकायों में जन प्रतिनिधियों के लिए योग्यताएं निर्धारित करने की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय की इस महतवपूर्ण सिफारिश की ओर लोगों का ध्यान उतना नहीं गया जितना जाना चाहिए क्योंकि इस विषय को उतना महत्व नहीं दिया जाता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/election-candidates-compulsory-announcements/article-6353"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायधीश ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विधायी निकायों में जन प्रतिनिधियों के लिए योग्यताएं निर्धारित करने की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय की इस महतवपूर्ण सिफारिश की ओर लोगों का ध्यान उतना नहीं गया जितना जाना चाहिए क्योंकि इस विषय को उतना महत्व नहीं दिया जाता है जितना दिया जाना चाहिए। यह निर्णय प्रत्याशी की स्वास्थ्य दशा के बारे में प्रमाणिक सूचना देने के बारे में दिया गया था। याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह तमिलनाडू में स्थानीय निकायों के चुनाव लड रहे प्रत्याशियों को चिकित्सा प्रमाण पत्र सहित स्वास्थ्य का ब्यौरा देने पर बल दें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस याचिका पर निर्णय को लोक सभा और विधान सभा चुनावों में भी लागू किया जा सकता है। न्यायलाय ने केन्द्र सरकार निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, राज्य सरकार और राज्य विधि आयोग को इस मामले में पक्षकार बनाया और इस पर उनका उत्तर मांगा। प्रत्याशियों की स्वास्थ्य दशा के बारे में घोषणा उतनी ही महत्वपूर्ण घोषणा है जितनी की उनकी संपत्ति और अपाराधिक पृृष्ठभूमि के बारे में घोषणा है।इस याचिका को दायर करने की प्रेरणा तमिलनाडू की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मत्यु से मिली जिनकी मृत्यु पद धारण करने के सात माह के भीतर हो गयी थी। न्यायधीश की राय थी कि यदि उनके नामांकन पत्र में उनकी स्वास्थ्य की दशा के बारे में घोषणा की जाती तो उनकी मृत्यु और उपचार के बारे में जांच के लिए आयोग के गठन की आवश्यकता नहीं पड़ती।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायधीश का मत था कि अनेक बार मतदाता नेतृत्व के लिए मतदान करते हैं इसलिए मतदाताओं को यह जानने का हक है कि क्या वह व्यक्ति पांच वर्ष तक के लिए नेतृत्व करने के योग्य है। राजनीतिक पदों पर कार्य का दबाव अत्यधिक होता है और इन पदों पर नियुक्तियां निर्वाचित व्यक्तियों को दबाव और तनाव सहने के लिए असाधारण क्षमता की आवश्यकता होती है। इस बारे में निर्वाचन आयोग का कहना था कि यह व्यक्ति की निजता से जुड़ा मामला है इसलिए यह एक बहुत संवेदनशील विषय है। निर्वाचन आयोग के अनुसार उसे संविधान के अनुचछेद 324 के अंतर्गत चुनाव के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्तियां प्राप्त हैं और वह चिकित्सा प्रमाण पत्र की अपेक्षा पर बल नहीं दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की स्वास्थ्य दशा का मुददा पहली बार उठाया गया है। किसी भी देश में इस आधार पर किसी उम्मीदवार के नामांकन पत्रों को रद्द नहीं किया गया है। स्वास्थ्य के बारे में घोषणा एक निजी मामला है किंतु जब सत्ता से जुड़े सार्वजनिक व्यक्तियों के मामले में स्वास्थ्य घोषणा की बात आती है तो यह सार्वजनिक विषय बन जाता है और उसे सार्वजनिक विनिमयों के अंतर्गत आना चाहिए। इसलिए कहा जा सकता है कि लोक हित में मतदाताओं को प्रत्याशियों की चिकित्सा दशा के बारे में जानने का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक विधायी निकायों के सदस्यों की योग्यता के बारे में चिकित्सा प्रमाण के बारे में चर्चा नहीं हुई है। यह राजनीतिक दलों के अधिकार क्षेत्र में है कि वह शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्तियों को टिकट दे। अनेक देशों में मानसिक और मनोचिकित्सा विकृतियों वाले लोगों को चुनाव लडने का अधिकार नहीं है। ब्रिटेन में संसद सदस्यों को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1983 के अंतर्गत ऐसे सदस्यों को दो विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद छह माह के भीतर अपना पद खाली करना पड़ता है। इस मामले में न्यायाधीश ने कानून निमार्ताओं की योग्यता और अयोग्यता के बारे में एक बड़े प्रश्न को उठा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होने कुछ सदस्यों की अंग्रेजी दक्षता पर भी प्रश्न उठाया है कि इसके कारण वे संसद में जनता के मुद्दे नहीं उठा पाते हैं और निर्वाचन आयोग से कहा है कि जन प्रतिनिधियों के लिए योग्यता के संबंध में व्यापक दिशा निर्देश बनाए। किंतु हमारे जैसे बहुभाषी राष्ट्र में भाषा का मुद्दा उठाना खतरनाक है। ज्ञान और क्षमता की बातें की जा सकती हैं ताकि सदस्य राजनीतिक आर्थिक और सामाजिक मामलों में अपने विचार व्यक्त कर सकें और कानून निर्माण में योगदान दे सकें। निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने का मुद्दा कुछ राज्यों में उठा है। राजस्थान और हरियणा में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं पास तथा महिलाओं और अनुसूचित जातियों के मामले में 8वीं पास निर्धारित की गई है। भूटान, लीबिया, केनिया, नाइजीरिया आदि कुछ विकासशील देशों में ऐसे प्रावधान पहले से हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी के घर में शौचालय का होना आवश्यक है। लोकतंत्र में राजनीतिक पद सबके लिए खुले हुए हैं, किंतु उसमें किसी तरह की योग्यता मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं। योग्यताएं निर्धारित की गयी हैं, अयोग्यता सूचीबद्ध की गयी है और आवश्यक घोषणाओं का प्रावधान किया गया है। विश्व भर के लोकतंत्रिक देशों में चुनाव लड़ने के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि को अयोग्यता बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
कुछ देशों में भ्रष्टाचार को भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्यता बनाया गया है। अमरीका और स्वीडन में केवल आयु निर्धारित की गयी है और अयोग्यता के मानदंड नहीं बनाए गए हैं। फिनलैंड में भी यही स्थिति है किंतु इस बारे में वहां की संसद निर्णय कर सकती है। आस्टेÑलिया, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, न्यूजीलैंड स्पेन और ब्रिटेन में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है तथा कनाडा फ्रांस और ब्रिटेन में भ्रष्टाचार को भी अयोग्यता की सूची में शामिल किया गया है। अयोग्यता की अवधि कानून द्वारा प्रत्येक मामले के आधार पर निर्धारित की जाती है। कनाडा में भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्ध होने पर सात साल तक चुनाव नहीं लड़ पाते हैं। स्पेन तथा आयरलैंड में दंड की अवधि तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ब्राजील में निर्वाचित प्रतिनिधि की योग्यता और अयोग्यता को गंभीरता से लिया गया है। राज्यों और नगर निकायों को सार्वजनिक पदों पर नियुक्ति तथा न्यासों में नियुक्ति के लिए अपने कानून बनाने की अनुमति दी गई है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉॅ. एस सरस्वती</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Oct 2018 09:19:04 +0530</pubDate>
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                <title>जेबीटी में चयनित उम्मीदवारों में फर्जीवाड़े को लेकर हाईकोर्ट ने दिए आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[एचटेट-2011 परीक्षा का रिकार्ड होगा सील भिवानी(सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा वर्ष 2011 में संचालित की गई हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा यानी एचटेट का पूरा रिकार्ड सीज व सील किया जाएगा। बोर्ड अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने आयोजित करवाई थी परीक्षा बोर्ड द्वारा संचालित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">एचटेट-2011 परीक्षा का रिकार्ड होगा सील</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी(सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा वर्ष 2011 में संचालित की गई हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा यानी एचटेट का पूरा रिकार्ड सीज व सील किया जाएगा। बोर्ड अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने आयोजित करवाई थी परीक्षा</h3>
<p style="text-align:justify;">बोर्ड द्वारा संचालित की गई साल 2011 की एचटेट परीक्षा का रिकार्ड भी अब सील किए जाने की तैयारी है। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2008-09 में आयोजित की गई एचटेट परीक्षा के रिकार्ड को भी बोर्ड के द्वारा सील किया गया था तथा उसकी वजह जेबीटी में चयनित उम्मीदवारों के द्वारा एचटेट परीक्षा पास करने में किए गए फर्जीवाड़े को बताया गया था। दरअसल 2011 में चयनित जेबीटी अध्यापकों के चयन को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में इस बिनाह पर चुनौती दी गई थी कि चयनित उम्मीदवारों में से कई की एचटेट परीक्षा दूसरे उम्मीदवारों के द्वारा दी गई थी, जिनके मिलान की प्रक्रिया भी बाद में अपनाई गई थी। इन उम्मीदवारों ने वर्ष 2008-09 में एचटेट परीक्षा दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला अभी भी चल ही रहा था कि अब साल 2011 में आयोजित अध्यापक पात्रता परीक्षा यानी एचटेट का रिकार्ड भी सील किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। 2011 में पांच लाख उम्मीदवारों ने एचटेट परीक्षा के लिए आवेदन किया था, जिनमें से करीब साढ़े चार लाख ने परीक्षा दी थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिकार्ड सील की तैयारी है: बोर्ड अध्यक्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें सरकारी वकील की ओर से अभी जानकारी मिली है कि रिकार्ड को सीज एवं सील किया जाए। हालांकि हाईकोर्ट की ओर से कोई आधिकारिक आदेश अभी नहीं मिले हैं, मगर बोर्ड ने रिकार्ड सील करने की तैयारी कर ली है।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/high-court-orders-on-fraud-against-selected-jbt-candidates/article-2803</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 08:28:37 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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