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                <title>increasing - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कैंसर की गिरफ्त में ‘भारत’, मांस और नशा दे रहा जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[ ग्लोबोकॉन के अनुसार अब 55 नहीं 40 साल में ही स्तन कैं सर से ग्रस्त हो रहे नागरिक | Cancer शाकाहारी महिलाओं में स्तन कैं सर की संभावनाएं 40 फीसदी कम स्तन कैंसर से बढ़ रही मृत्युदर को कम करने के लिए जागरुकता जरूरी सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। मंगलवार को हम विश्व कैंसर दिवस मना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-cancer-in-india/article-12925"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/cancer-1.jpg" alt=""></a><br /><h2> ग्लोबोकॉन के अनुसार अब 55 नहीं 40 साल में ही स्तन कैं सर से ग्रस्त हो रहे नागरिक |<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> Cancer </span></span></h2>
<ul>
<li><strong>शाकाहारी महिलाओं में स्तन कैं सर की संभावनाएं 40 फीसदी कम</strong></li>
<li><strong>स्तन कैंसर से बढ़ रही मृत्युदर को कम करने के लिए जागरुकता जरूरी</strong></li>
</ul>
<h4>सच कहूँ/संजय मेहरा</h4>
<p><strong>गुरुग्राम।</strong> मंगलवार को हम विश्व कैंसर दिवस मना रहे हैं। इस मंगल के दिन एक अमंगल खबर यह है कि विश्वस्तर पर कैंसर से होने वाली मौतों का मुख्य कारण स्तन कैंसर है। हरियाणा में भी कैंसर के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ग्लोबोकैन-2018 की हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में स्तन कैंसर से ग्रस्त महिलाओं की सबसे बड़ी संख्या भारत की है। रिपोर्टानुसार अब कैंसर से ग्रस्त होने की उम्र 55 साल से घटकर 40 साल हो गई है। आईसीएमआर-2018 के आंकड़ों की माने तो भारत में पिछले साल स्तन कैं सर के 1.5 लाख नए मामले दर्ज किए गए हैं।</p>
<p>गुरुग्राम स्थित सीके बिरला हॉस्पिटल फॉर वुमन के स्तन कैंसर सर्जन डॉ. रोहन खंडेलवाल के मुताबिक भारत में 25 में से एक नागरिक में स्तन कैंसर की पहचान होती है, जो अमेरिका या यूके जैसे विकसित देशों की तुलना में कम है। विकसित देश बीमारियों के बारे में अधिक जागरुक रहते हैं, इसलिए शुरूआती चरण में बीमारी के निदान और इलाज के साथ उनका सर्वाइवल रेट बेहतर होता है। यदि भारत की बात करें तो जागरुकता में कमी के कारण यहां का सर्वाइवल रेट बहुत कम है। दो में से एक मरीज निदान के पांच सालों के भीतर ही मर जाता है, जो 50 फीसदी मृत्युदर को दर्शाता है।</p>
<h2>खराब जीवनशैली और नशा मुख्य कारण |<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Cancer </span></span></h2>
<p>विश्वस्तर पर 40 साल से कम उम्र की 7 फीसदी आबादी स्तन कैंसर से ग्रस्त है। जबकि भारत में 15 फीसदी के साथ यही आंकड़े दोगुने हो जाते हैं, जिसमें एक फीसदी आबादी पुरुषों की शामिल है। अनुवांशिक कारणों के अलावा खराब जीवनशैली, शराब का अत्यधिक सेवन, युवाओं में बढ़ता मोटापा, तनाव और खराब डाइट आदि कारण महिलाओं में स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। एक अध्ध्यन के अनुसार शाकाहारी महिलाओं में स्तन कैंसर की संभावनाएं 40 फीसदी कम होती हैं।</p>
<h2>दुनियाभर में मुंह के कैंसर की राजधानी के रूप में जाना जाता है भारत | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Cancer </span></span></h2>
<p>चीन और संयुक्त राज्य (अमेरिका) के बाद कैं सर के मरीजों के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। यहां पर मुंह के कैंसर का 90 प्रतिशत कारण तंबाकू है। इसे रोककर ही हम तंबाकू के खतरे से मुकाबला कर सकते हैं। संबंध हेल्थ फाउंडेशन के ट्रस्टी संजय सेठ के मुताबिक अब भारत को दुनियाभर में मुंह के कैंसर की राजधानी के रूप में जाना जाने लगा है। सर्वाइकल कैंसर के बारे में लैंसेट ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन में कहा गया है कि वर्ष 2018 में इससे भारत में सबसे अधिक लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि मुंह और फेफड़ों के कैंसर के कारण 25 प्रतिशत से अधिक पुरूषों की मृत्यु होती है। जबकि मुंह और स्तन के कैंसर में 25 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की मृत्यु होती है।</p>
<h2>हरियाणा में 46.84 लाख लोगों तंबाकू की शिकंजे में</h2>
<ul>
<li><strong>ग्लोबल एडल्ट टोबेका सर्वे के मुताबिक हरियाणा में 23.6 प्रतिशत लोग तंबाकू का उपयोग करते हैं। </strong></li>
<li><strong>इनमें से 39 लाख (19.7 प्रतिशत) लोग धु्रमपान का सेवन करते हैं। </strong></li>
<li><strong>प्रदेश में 15.5 प्रतिशत बीड़ी, 7.6 प्रतिशत हुक्का और 2.6 प्रतिशत सिगरेट का सेवन करने वाले शामिल है।</strong></li>
<li><strong> यहां 15 से 17 वर्षं में तंबाकू सेवन करने वाले 4 प्रतिशत उपयोगकर्ता बढ़े है। </strong></li>
<li><strong>तंबाकू जनित पदार्थों के उपयोग से प्रदेश में सालाना अनुमानित 28 हजार लोगों की मौत हो जाती है।</strong></li>
</ul>
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<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Increasing, Cancer, India</span></span></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2020 12:36:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीडीपी एवं रोजगार बढ़ाने में बैंकिंग सेक्टर की अहम भूमिका : Ashok Gehlot</title>
                                    <description><![CDATA[इसी के साथ बाड़मेर में रिफाइनरी सह पेट्रोकैमिकल कॉम्प्लेक्स पर भी तेजी से काम चल रहा है। से में नाबार्ड एवं बैंकों की प्रदेश में भूमिका और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने पहले भी राज्य के विकास में आगे बढ़कर सहयोग किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/banking-sector-plays-an-important-role-in-increasing-gdp-and-employment-ashok-gehlot/article-12676"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/ashok-gehlot-2.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">बाड़मेर में रिफाइनरी सह पेट्रोकैमिकल कॉम्प्लेक्स पर भी तेजी से काम चल रहा है (Ashok Gehlot)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने वर्तमान आर्थिक हालातों के मद्देनजर अर्थव्यवस्था में सुधार हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होने पर बल देते हुए कहा है कि बैंकिंग सेक्टर देश की जीडीपी और रोजगार वृद्धि में बड़ा योगदान दे सकता हैं। गहलोत बुधवार को नाबार्ड की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक हालातों को देखते हुए अर्थव्यवस्था में सुधार हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैंकिंग सेक्टर की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। बैंक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लक्ष्य के अनुरुप ऋण प्रदान कर देश की जीडीपी और रोजगार वृद्धि में बड़ा योगदान दे सकते हैं।</p>
<h3>नाबार्ड ने पहले भी राज्य के विकास में आगे बढ़कर सहयोग किया है</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कृषि, पशुपालन, डेयरी, हस्तशिल्प, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास एवं स्वरोजगार सहित अन्य क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। नाबार्ड सहित अन्य बैंकिंग संस्थाएं इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाकर देश एवं प्रदेश के विकास में अह्म भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, उद्योग, कृषि प्रसंस्करण तथा एमएसएमई सेक्टर के विकास के लिए नई नीतियां लेकर आई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसी के साथ बाड़मेर में रिफाइनरी सह पेट्रोकैमिकल कॉम्प्लेक्स पर भी तेजी से काम चल रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">से में नाबार्ड एवं बैंकों की प्रदेश में भूमिका और बढ़ेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने पहले भी राज्य के विकास में आगे बढ़कर सहयोग किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">आशा है आगे भी नाबार्ड इसी तरह अपनी भूमिका का निर्वहन करेगा।</li>
</ul>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jan 2020 16:24:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बठिंडा : लसाड़ा ड्रेन के पानी ने पथराला निवासियों की उड़ाई नींद</title>
                                    <description><![CDATA[बठिंडा-डबवाली राष्टÑीय मार्ग पर स्थित गांव पथराला के नजदीक से गुजरते लसाड़ा ड्रेन ने गांववासियों की नींद उड़ाई हुई है।
खाली रहने वाला लसाड़ा ड्रेन इस समय पानी के साथ पूरा भरा हुआ है ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/lassara-drain-water-level-is-increasing-every-day/article-12106"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/lassara-drain-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">प्रतिदिन बढ़ रहा पानी का स्तर, किसी समय भी टूट कर गांव में दाखिल हो सकता है पानी | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Lassara Drain</span></span></h1>
<ul>
<li><strong>किसानों को सताने लगा ड्रेन टूटने से फसलों के खराब होने का डर</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा/संगत मंडी (सच कहूँ/मनजीत नरूआणा)।</strong> बठिंडा-डबवाली राष्टÑीय मार्ग पर स्थित गांव पथराला के नजदीक से गुजरते <strong>(Lassara Drain)</strong> लसाड़ा ड्रेन ने गांववासियों की नींद उड़ाई हुई है। खाली रहने वाला लसाड़ा ड्रेन इस समय पानी के साथ पूरा भरा हुआ है । और पानी का स्तर हर रोज बढ़ रहा है यदि पानी का स्तर इसी तरह ही बढ़ता रहा तो यह ड्रेन गांव में टूट जायेगी। जिस कारण बड़े स्तर पर घरों व फसलों का नुक्सान होगा। प्रशासन की ओर से भी इस पर तीखी नजर रखी जा रही है। जानकारी अनुसार यह लसाड़ा ड्रेन के बाद पटियाला की तरफ से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव पथराला से आगे हरियाणा में गांव जोगेवाला में यह ड्रेन पहुंचती है । जहाँ यह चौटाला सरकार समय ड्रेन को बांध लगा कर बंद कर दिया गया था । और जमीन को जुताई के योग्य बना कर खेती की जाने लगी। आगे पानी न जाने कारण और पीछे से पानी लगातार आने पर अब पथराला के पास ही पानी का स्तर हर रोज बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लसाड़ा ड्रेन में इस समय पानी कहां से आ रहा है इसका किसी को कुछ नहीं पता। अंदाजा लगाया जा रहा है कि अधिक ठंड होने के कारण और गेहूं छोटी होने के कारण किसानों की तरफ से फसलों को पानी बहुत कम लगाया जा रहा है। जिस पर नहरी विभाग की ओर से भी किसानों को पानी की कोई जरूरत न होने के चलते रजबाहों के टूटने के डर से इसमें पानी छोड़ दिया गया हो, जिस कारण पानी का स्तर हर रोज तेजी के साथ बढ़ रहा है।</p>
<h2>प्रशासन की ओर से नहीं दिया जा रहा इस और ध्यान | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Lassara Drain</span></span></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>लसाड़ा ड्रेन की साफ सफाई की तरफ प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जाता। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हर बार गांववासियों की तरफ से ही अपने स्तर पर ड्रेन के किनारों को मिट्टी डाल कर मजबूत किया जाता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> गांववासी पूर्व सरपंच जगतार सिंह और पूर्व पंच जगसीर सिंह ने बताया कि लसाड़ा ड्रेन इस समय पूरी पानी से भरी हुई है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हर रोज पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने बताया कि यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यह ड्रेन किसी समय भी गांव की तरफ टूट सकती है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> जिस कारण पानी घरों में दाखिल होने के कारण लोगों का बहुत नुक्सान होगा।</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">डिप्टी कमिशनर को अवगत करवाया ड्रेन का मामला : नायब तहसीलदार</h2>
<p style="text-align:justify;">संगत मंडी सब तहसील के नायब तहसीलदार कमलदीप सिंह बराड़ का कहना था लसाड़ा ड्रेन का पूरा मामला उनके ध्यान में है। उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से इस संबंधी बठिंडा के डिप्टी कमिशनर को अवगत करवा दिया है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/lassara-drain-water-level-is-increasing-every-day/article-12106</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2019 20:00:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में बढती तेजाब की घटनाएं एक संगीन अपराध: जिम्मेवार कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[देश में तेजाब की संगीन वारदातों ने जनमानस को झझकोर दिया है कि कुछ बीमार मानसिकता के चंद मुठठी भर दरिदें व अपराधी आज भी निडरता से तेजाब जैसे बर्बर हमले कर रहे हैं माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा एंटी रेप विधेयक मे तेजाबी हमला करने वालों को दस साल की सजा का प्रावधान किया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">देश में तेजाब की संगीन वारदातों ने जनमानस को झझकोर दिया है कि कुछ बीमार मानसिकता के चंद मुठठी भर दरिदें व अपराधी आज भी निडरता से तेजाब जैसे बर्बर हमले कर रहे हैं माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा एंटी रेप विधेयक मे तेजाबी हमला करने वालों को दस साल की सजा का प्रावधान किया गया है। गाहे-बगाहे देश में ऐसे वीभस्त मामले विचलित करते रहते हैं। ऐसे में सवाल यह उठना लाजिमी है कि इन पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है। समाज में घटित इन हादसों से एक भयानकता की तस्वीर दिख रही है दरिदों द्वारा कानून का सरेआम उल्लधन किया जा रहा है। अगर इन दरिदों को सजा दी जाए तों यह मामले रुक सकते है। तेजाब के हमलों में बेतहाशा वृ़िद्ध होती जा रही है। भारत के हर राज्य में ऐसे मामले निरंतर होते रहतें है। अपराधियों को गवाहों के अभाव में जमानतों पर छोड़ दिया जाता है। तेजाब फैकने वाले अपराधियों को उम्रकैद की सजा देनी चाहिए ताकि जेलों में तिल-तिल मर सके। देश में जिस प्रकार महिलाओं व लडकियों पर तेजाब फैंकने की घटनाएं बढ रही हैं बेहद चिन्ताजनक है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। प्रतिदिन देश में संगीन अपराध हो रहे है। आखिर कब इन मामलों पर रोक लगेगी। एक समाचार के अनुसार 9 नवबंर 2018 को बरेली में कोल्हू पर पानी नीने आई तीन महिलाओं पर कोल्हू मालिक ने तेजाब फैंक दिया जिससे तीनों बुरी तरह से झुलस गई। कोल्हू के मालिक ने एक महिला से कथित दुष्कर्म करने का प्रयास किया था तथा महिला के कपड़े फाड़ दिए जब महिला की चीख सुनकर जब दो महिलाओं ने उसे बचाने का प्रयास किया तो दरिदें ने तेजाब फैंक दिया। तेजाब फैंकने वाले बहशी दरिदे को गिरफतार कर लिया है। तेजाब हमले में गंभीर रुप से झुलसी तीनों महिलाओं का बरेली के अस्पताल में इलाज चल रहा है। तेजाबी हमलों को रोकना होगा। गत वर्ष वाराणसी में एक दोस्त के घर ठहरी रुसी युवती पर उसी के दोस्त ने तेजाब फेंक दिया था जिससे युवती 45 प्रतिशत झुलस गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी ही घटना मेरठ में घटित हुई थी जहां एक पति द्वारा अपनी पत्नी, सास-ससुर व सात अन्यो पर तेजाब फैंककर घायल कर दिया था। पत्नी द्वारा दुष्कर्म व दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने से नाराज पति ने तेजाब फैंककर घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। तेजाबी हमले की चपेट में एक छह माह का बच्चा भी झुलस गया था और उसकी तीन बेटियां भी झुलस गई थी जब यह हमला हुआ यह लोग घर की छत पर सोए थे। देश में तेजाबी हमलों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले सैकड़ो मामले हो चुके है पर यह रुकने के बजाए बढ़ते ही जा रहे है। आकड़ों के अनुसार 2 अप्रैल 2013 को पश्चिमी उतरप्रदेश के शामली जिले में दो युवकों द्वारा चार सगी बहनों पर पिचकारी से तेजाब फैंकने की दर्दनाक घटना घटित हुई थी। पेशे से शिक्षक चारों सगी बहनें बोर्ड की डयूटी करके घर लौट रही थी तभी रास्ते में मोटरसाईकल सवार दो युवकों नें उन पर तेजाब फैंक दिया जिससे एक युवती गंभीर रूप से झुलस गई ऐसी ही घटना में छतीसगढ में एक अज्ञात युवक द्वारा चार नाबालिग बहनों पर तेजाब फैक दिया जिससे वे बुरी तरह झुलस गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में भी एक अज्ञात युवक ने एक पत्रकार व उसके परिवार के सदस्यों पर तेजाब फैक कर घायल कर दिया था। इन घटनाओं ने एक बार फिर पूरे में दहशत फैला दी है। लगभग 14 साल पहले वर्ष 2004 में हिमाचल प्रदेश के मण्डी में भी मुजफरनगर के एक युवक ने बस में सवार एक लडकी पर तेजाब फैंक कर बुरी तरह घायल कर दिया था। तेजाब के छींटों से बस में बैठी अन्य सवारियां भी झुलस गई थी।इस हादसे में लडकी की दोनों आखों की रोशनी खत्म हो गई थी। शिमला में भी एक युवक ने एक युवती पर तेजाब फैका था जिससे उसका चेहरा बुरी तरह जल गया था। उतराखंड के देहरादून में भी एक कालेज छा़त्रा पर एक युवक ने मुंह पर तेजाब फैक कर जला दिया था। पंजाब के बठिंडा में भी एक 24 वर्षीय लड़की पर तेजाब फैंक कर बुरी तरह से चेहरा जला दिया था उसका 31 जनवरी 2010 से आज तक इलाज चल रहा है अब तक उसकी 13 सर्जरियां हो चुकी है। अब समय आ गया है कि गहन निद्रां में सोये प्रशासन को अपनी कुम्भकरणी नींद तोडनी होगी । ऐसे लोगों को सबक सिखाना होगा। सरकार को तेजाब पीडिताओं का पूरा इलाज करवाना चाहिए ।जल चुकी व खराब हो चुकी आखों का आपरेशन का प्रावधान करवाना चाहिए ।सर्जरी बगैरा का खर्चा भी देना चाहिए।मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए। अपराधियों पर कानूनी धाराएं लगानी चाहिए ।तेजाब बेचने वालों पर शिकंजा कसना चाहिए। ताकि ऐसे हादसे रूक सकें और मां, बहन, बेटियां सुरक्षित हो सकें। अगर अब भी लापरवाही बरती तो आने वाले कल को फिर से दरिदें जघन्य वारदातों को अंजाम देते रहेगें। वक्त अभी संभलनें का है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>नरेन्द्र भारती</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Nov 2018 13:32:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजनीति में बढ़ता अपराधों को सरंक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति के अपराधीकरण का मसला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चिंता जताई है वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सर्वोच्च अदालत को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र सरकार की इस दलील के पीछे तर्क यह है कि अधिकांश मामलों में नेता बरी हो जाते हैं। यानि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protection-of-increasing-crimes-in-politics/article-5916"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/protection-of-increasing-crimes-in-politics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राजनीति के अपराधीकरण का मसला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चिंता जताई है वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सर्वोच्च अदालत को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र सरकार की इस दलील के पीछे तर्क यह है कि अधिकांश मामलों में नेता बरी हो जाते हैं। यानि केवल आरोपों के आधार पर उन्हें अयोग्य घोषित कर देना गलत होगा। दूसरी ओर न्यायाधीशों की राय भी इस मामले में बंटी हुई है। मसलन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का मानना है कि चुनाव आयोग खुद ही यह नियम बना सकता है कि आपराधिक मामलों में लिप्त उम्मीदवार को पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं दिया जाएगा। दो अन्य न्यायाधीश भी चीफ जस्टिस के इस मत का समर्थन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन एक अन्य न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा का कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग हो सकता है। यानि विपक्षी नेता उम्मीदवारों पर गलत आरोप लगा सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन आशंकाओं के मद्देनजर राजनीति के अपराधीकरण से आंखें मींच ली जाएं? सरकार की ओर से अटार्नी जनरल कहते हैं कि इस मसले पर न्यायपालिका संसद के अधिकार क्षेत्र को अपने हाथ में ले रही है यानि विधायिका के अधिकार पर अतिक्रमण कर रही है। जबकि प्रधान न्यायाधीश का कहना है कि संसद जब तक कानून नहीं बनाए तब तक क्या अदालत को हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए। जाहिर तौर पर राजनीति की मंशा इस मसले पर पारदर्शी नहीं दिखती।</p>
<p style="text-align:justify;">अपराध मुक्त राजनीति को लेकर संसद और सड़क पर बड़े-बड़े नेताओं ने बड़ी-बड़ी बातें कहीं। लेकिन अदालत में अटार्नी जनरल द्वारा रखा गया पक्ष इस बात की तस्दीक करता है वे सिर्फ बातें थीं, इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं। ऐसे में यदि सर्वोच्च अदालत कोई फैसला सुना भी दे तो उसका पालन होने में संदेह है। न्यायपालिका के कई फैसले ऐसे हैं जिनका पालन होने में लापरवाही बरती जा रही है। दरअसल कानून चाहे संसद बनाए चाहे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश में कोई नियम लागू हो, उसका पालन होने में तब तक संदेह बना ही रहेगा जब तक पालन करवाने वाला इच्छाशक्ति नहीं दिखाएगा। संविधान में छुआछूत को गैरकानूनी घोषित किया गया है और सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं लेकिन क्या आजादी के 71 साल बाद भी समाज से छुआछूत मिट सकी है? क्या महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी मिल सकी है? ऐसे में जब सरकार खुद ही सुप्रीम कोर्ट को इस मसले से दूर रहने की सलाह दे तो लगता है सियासत खुद अपराधमुक्त नहीं होना चाहती।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 13:29:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तान में परमाणु हथियारों की बढ़ती संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाले लेखकों के दल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास इस समय 140 से 150 परमाणु हथियार हैं। यदि परमाणु अस्त्र-शस्त्र निर्माण करने की उसकी यही गति जारी रही तो 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 220 से 250 हो जाएगी। यदि यह संभव हो जाता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-number-of-nuclear-weapons-in-pakistan/article-5854"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/pak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाले लेखकों के दल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास इस समय 140 से 150 परमाणु हथियार हैं। यदि परमाणु अस्त्र-शस्त्र निर्माण करने की उसकी यही गति जारी रही तो 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 220 से 250 हो जाएगी। यदि यह संभव हो जाता है तो पाक दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा परमाणु हथियार संपन्न देश हो जाएगा। इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक एम क्रिस्टेनसेन, जुलिया डायमंड और रॉबर्ट एस नोरिस ने दी है, जो वाशिंगटन डीसी में स्थित ‘फेडरेशन आॅफ अमेरिकन साइंटिस्ट’ के परमाणु सूचना परियोजना निदेशक है। जबकि अमेरिका की ही रक्षा खुफिया एजेंसी ने 1999 में अनुमान लगाया था कि 2020 में पाकिस्तान के पास 60 से 80 परमाणु हथियार ही तैयार हो पाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी गुप्तचर संस्था सीआईए के पूर्व वरिष्ठ खुफिया अधिकारी केविन हलबर्ट की बात मानें तो पाकिस्तान दुनिया के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक देशों में से एक है। पाकिस्तान की यह खुंखार और डरावनी सूरत इसलिए बन गई है, क्योंकि तीन तरह के जोखिम इस देश में खतरनाक ढंग से बढ़ रहे हैं। हालांकि अब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच सौहार्द्रपूर्ण स्थिति बन गई है। नतीजतन उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए समयसीमा तय कर दी है। उम्मीद है यह प्रक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इसी कार्यकाल में पूरी हो जाएगी। मानव स्वभाव में प्रतिशोध और ईर्ष्या दो ऐसे तत्व हैं, जो व्यक्ति को विवेक और संयम का साथ छोड़ देने को मजबूर कर देते हैं। इस स्वभाव को क्रूरतम परिणित में बदलते हम अमेरिका द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी पर किए परमाणु हमलों के रूप में देख चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने हमले का जघन्य अपराध उस नाजुक परिस्थिति में किया था, जब जापान इस हमले के पहले ही लगभग पराजय स्वीकार कर चुका था। इस दृश्टि से पाकिस्तान और उत्तर कोरिया पर भरोसा कैसे किया जाए ? पाकिस्तान दुनिया के लिए खतरनाक देश हो अथवा न हो, लेकिन भारत के लिए वह खतरनाक है, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है। दशकों से वह भारत पर हमला करने के लिए आतंकियों के इस्तेमाल को सही ठहराता रहा है। पाक भारत के खिलाफ युद्ध के लिए कट्रपंथी मुस्लिम अतिवादियों को खुला समर्थन दे रहा है। मुंबई और संसद पर हमले के दिमागी कौशल रखने वाले योजनाकार दाऊद और हाफिज सईद को पाक ने शरण दे रखी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा वह सीमा पर युद्ध जारी रखे हुए है और कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराकर भारत की नाक में दम किए हुए है। यही नहीं भारत के खिलाफ आतंकी रणनीतियों को प्रोत्साहित व सरंक्षण देने का काम पाक की गुप्तचर संस्थाएं और सेना भी कर रही हैं। हालांकि पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को सरंक्षण देने के उपाय अब उसके लिए भी संकट बन रहे हैं। आतंकी संगठनों का संघर्ष शिया बनाम सुन्नी मुस्लिम अतिवादियों में तब्दील होने लगा है। इससे पाक में अंतर्कलह और अस्थिरता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लूचिस्तान और सिंध प्रांत में इन आतंकियों पर नियंत्रण के लिए सैन्य अभियान चलाने पड़े हैं। बावजूद, पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी सेना और खुफिया तंत्र तालिबान, अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मौहम्मद जैसे आतंकी गुटों को खतरनाक नहीं मानते। इन आतंकियों को अच्छे सैनिक माना जाता है, जो धर्म के लिए अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। आज पाक में आतंकी इतने वर्चस्वशाली हो गए हैं कि लश्कर-ए-झांगवी, पाकिस्तानी तालिबान, आफगान तालिबान और कुछ अन्य आतंकवादी गुट पाकिस्तान की निर्वाचित सरकार को भी चुनौती बन गए हैं। ये चुनी हुई सरकार को गिराकर देश की सत्ता पर सेना के साथ अपना नियंत्रण चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वाई दवे ऐसा हो जाता है और परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ लग जाते हैं, तो तय है, पाक को दुनिया के लिए खतरनाक देश बन जाने में देर नहीं लगेगी? इस नाजुक परिस्थिति में सबसे ज्यादा जोखिम भारत को उठाना होगा, क्योंकि भारत पाक सेना और आतंकी संगठनों के लिए दुश्मन देशों में पहले नबंर पर है। पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान की आतंक पर नकेल कसने की क्या दृश्टि रहती है, इसका पता भविष्य में चलेगा।<br />
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा पर 6 अगस्त और नागासाकी पर 9 अगस्त 1945 को परमाणु बम गिराए थे। इन बमों से हुए विस्फोट और विस्फोट से फूटने वाली रेडियोधर्मी विकिरण के कारण लाखों लोग तो मरे ही, हजारों लोग अनेक वर्र्षोंं तक लाइलाज बीमारियों की भी गिरफ्त में रहे। विकिरण प्रभावित क्षेत्र में दशकों तक अपंग बच्चों के पैदा होने का सिलसिला जारी रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">अपवादस्वरूप आज भी इस इलाके में लगड़े-लूल़े बच्चे पैदा होते हैं। अमेरिका ने पहला परीक्षण 1945 में किया था। तब आणविक हथियार निर्माण की पहली अवस्था में थे,किंतु तब से लेकर अब तक घातक से घातक परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में बहुत प्रगति हो चुकी है। लिहाजा अब इन हथियारों का इस्तेमाल होता है तो बर्बादी की विभीषिका हिरोशिमा और नागासाकी से कहीं ज्यादा भयावह होगी ? इसलिए कहा जा रहा है कि आज दुनिया के पास इतनी बड़ी मात्रा में परमाणु हथियार हैं कि समूची धरती को एक बार नहीं, अनेक बार नष्ट-भ्रष्ट किया जा सकता है।जापान के आणविक विध्वंस से विचलित होकर ही 9 जुलाई 1955 को महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन और प्रसिद्ध ब्रिटिश दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी करके आणविक युद्ध से फैलने वाली तबाही की ओर इशारा करते हुए शांति के उपाय अपनाने का संदेश देते हुए कहा था, यह तय है कि तीसरे विश्व-युद्ध में परमाणु हथियारों का प्रयोग निश्चित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कारण मनुष्य जाति के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो जाएगा। किंतु चैथा विश्व-युद्ध लाठी और पत्थरों से लड़ा जाएगा। इसलिए इस विज्ञप्ति में यह भी आगाह किया गया था कि जनसंहार की आशंका वाले सभी हथियारों को नश्ट कर देना चाहिए। तय है, भविष्य में दो देशों के बीच हुए युद्ध की परिण्ति यदि विश्व-युद्ध में बदलती है और परमाणु हमले शुरू हो जाते हैं तो हालात कल्पना से कहीं ज्यादा डरावने होंगे दुनिया में फिलहाल 9 परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ये हैं, अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया। इनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन के पास परमाणु बमों का इतना बड़ा भंडार है कि वे दुनिया को कई बार नश्ट कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि ये पांचों देश परमाणु अप्रसार संधि में शामिल हैं। इस संधि का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियार व इसके निर्माण की तकनीक को प्रतिबंधित बनाए रखना है। हालांकि ये देश इस मकसद पूर्ति में सफल नहीं रहे। पाकिस्तान ने ही तस्करी के जरिए उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार निर्माण तकनीक हस्तांरित की और वह आज परमाणु शक्ति संपन्न नया देश बन गया है। परमाणु हमलों का खतरा केवल पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया की ही तरफ से नहीं है, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड केमरून भी कह चुके हैं कि युद्ध की स्थिति में परमाणु विकल्प का बेखौफ इस्तेमाल करेंगे। भारत को आंख दिखाते हुए पाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी कह चुके हैं कि उनके परमाणु हथियार महज शोपीस नहीं हैं। गोया, तय है कि पाकिस्तान के पास वास्तव में परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ रहा है तो यह भारत ही नहीं, दुनिया के लिए खतरनाक है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>प्रमोद भार्गव</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 10 Sep 2018 10:53:15 +0530</pubDate>
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                <title>बढ़ रही भीड़तंत्र की हिंसा</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increasing-mob-violence/article-5553"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/increasing-mob-violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत मे भीड़ हिंसा इन दिनों चरम पर है। भीड़ हिंसा में बढ़ावा को देखते हुए <strong>(Increasing Mob Violence)</strong> सरकार ने कड़े नियम लगाने की पेशकश की है। लेकिन अभी भी ऐसे घटनाएं दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। भीड़ तंत्र का भयवाह रूप होना उसके भीड़ को दर्शाती है। एक साथ कई लोगों का जमाव होकर किसी को अपराधी कह कर पीट-पीट कर मार देना ही भीड़तंत्र कहलाता है। लोग कानून को हाथ मे लिए हुए कई बड़े बड़े अपराधों को जन्म दे देते हैं। जिसका शिकार बने व्यक्ति को अपनी हाथ से जान गवांकर चुकानी पड़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बढ़ने का कारण यह है कि कानून इसमें अपराधी को चिन्हित नही कर पाती है। जिससे ऐसे घटनाओं का प्रसार दिन ब दिन बढ़ता चला जा रहा है। जो हर बार मानवता को शर्मसार करते हुए प्रतीत होती है। ऐसे ही एक घटना बिहार के भोजपुर से प्रकाश में आयी है। जो मानवता को बहुत अधिक शर्मसार करती है। बीते सोमवार को बिहार के भोजपुर जिले में एक युवक की हत्या हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">आपकों बता दें कि बिहार में रेलवे स्टेशन के पास सोमवार सुबह विमलेश कुमार नाम के युवक का शव बरामद हुआ था। लोगों को आशंका थी कि विमलेश कुमार की हत्या कर दी गयी है। विमलेश के नजदीकी लोगों ने बिहियां रेलवे स्टेशन के पास रहने वाली एक महिला पर हत्या कराने का शक जताया। इसके बाद सैकडों की तादाद में लोग इकट्ठा हो गए। भीड ने महिला के घर पर हमला बोल दिया और उसके घर को जला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद महिला को खींच कर सड़क पर निकाला गया। सरेआम उसके कपड़े फाड़े गये और उसे निर्वस्त्र कर दिया गया इस युवक के हत्या के आरोप में एक महिला को निवस्त्र घुमाया गया है। सबसे निंदनीय बात यह है कि इस पूरे घटना का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। घटना जितना निंदनीय है उतना शर्मनाक भी। यह घटना ज्यादा झकझोरने वाली इस लिए है क्योंकि एक और जहां हम महिलाओं के प्रति बढ़ रहे शोषण में पूरा भारतीय समाज एक हो रहे हैं। किसी की घटना जो महिलाओं के शोषण को दर्शाती है, ऐसे घटनाओं में पूरा भारतीय समाज एक होकर लड़ता दिखता है। चाहे वो कश्मीर में हो या कन्याकुमारी उसकी उन घटनाओं के प्रति गुस्सा हर राज्य में प्रकट होती देखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में किसी महिला के शोषण का गुस्सा झारखण्ड के एक जिले में दिखती है। जिससे पता चलता है कि भारतीय समाज अब महिलाओं के प्रति जागरूक हो रहा है और उनकी दर्द समझ रहा है। वहीं बिहार की ऐसे घटना में विचारनीय प्रशन उठना लाजमी है। एक और जहां हम मूर्ति के देवियों को वस्त्र पहनना लोग खुशी की बात समझते हैं वहीं दूसरी और महिलाओं को निर्वस्त्र करना शर्म की बात है। अभी तक असम में 15, झारखंड में 11, महाराष्ट्र में 10, आंध्र-तेलंगाना में 8, त्रिपुरा में 3, मेघालय में 8, नगालैंड में 2, बंगाल में 4, उप्र में 4, राजस्थान में 4 मौतें सिर्फ भीड़ की हिंसा के कारण हुई हैं। ये कुछ आंकड़े बताने का मकसद है कि लगभग पूरे देश में हत्यारी भीड़ के उग्र प्रदर्शन जारी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को भड़काने में सोशल मीडिया को जरिया बनाया जा रहा है। जिनमे लोग आसानी से फंसते चले जा रहे हैं। फिर इन फर्जी खबरों का बड़े क्षेत्र में फैलाया जाता है। इनदिनों ऐसे ही घटना चरम पर है। अखबारों में खबर आती रहती है बच्चों को पकड़ने वाले को भीड़ ने मार डाला। आदमखोर कह कर भीड़ ने व्यक्ति को मारा। इन घटनाओं से मानवता शर्मसार होती है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Aug 2018 13:24:44 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यावरण: घटती हरियाली, बढ़ता प्रदूषण</title>
                                    <description><![CDATA[देश की राजधानी दिल्ली में सरकार द्वारा हजारों पेड़ काटने की अनुमति प्रदान किए जाने को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद अंतत: दिल्ली सरकार द्वारा यह तर्क देते हुए राजधानी में पेड़ काटने के सभी आदेश रद्द कर दिए गए हैं कि पेड़ काटने के नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/environment-decreasing-greenery-increasing-pollution/article-5001"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की राजधानी दिल्ली में सरकार द्वारा हजारों पेड़ काटने की अनुमति प्रदान किए जाने को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद अंतत: दिल्ली सरकार द्वारा यह तर्क देते हुए राजधानी में पेड़ काटने के सभी आदेश रद्द कर दिए गए हैं कि पेड़ काटने के नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा भी दक्षिणी दिल्ली की कालोनियों के पुनर्विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई पर अस्थायी रोक लगाई जा चुकी है तथा दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए सरकार से सवाल किए हैं कि क्षतिपूरक वनीकरण नीति के तहत लगाए जाने वाले 10 छोटे पौधे एक बड़े पेड़ की बराबरी कैसे कर सकते हैं? कड़ी फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट द्वारा दो टूक शब्दों में कहा गया कि दक्षिणी दिल्ली की सरकारी आवासीय कालोनियों के पुनर्निर्माण के नाम पर 16500 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव इस शहर को मरने के लिए छोड़ देने जैसा है। वैसे सरकारी परियोजनाओं के तहत 3300 पेड़ अब तक काटे भी जा चुके हैं। कैग की एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो दिल्ली पहले से ही करीब नौ लाख पेड़ों की कमी से जूझ रही है और दूसरी ओर शहरीकरण की कीमत पर सरकारी आदेशों पर साल दर साल हजारों हरे-भरे विशालकाय वृक्षों का सफाया किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 5-6 वर्षों के दौरान दिल्ली में नए आवासीय परिसर, भूमिगत पार्किंग, व्यापारिक केन्द्र खोलने और मार्गों को चौड़ा करने के लिए करीब बावन हजार छायादार वृक्षों का अस्तित्व मिटाया जा चुका है और इन्हीं पांच वर्षों के प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि इस दौरान हरियाली घटने से दिल्ली में वायु प्रदूषण करीब चार सौ फीसदी बढ़ा है। अब मौसम चक्र तेजी से बदल रहा है, जलवायु संकट गहरा रहा है और इन पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने का एक ही उपाय है वृक्षों की अधिकता। वायु प्रदूषण हो या जल प्रदूषण अथवा भू-क्षरण, इन समस्याओं से केवल ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर ही निपटा जा सकता है लेकिन इसके बावजूद दिल्ली में प्रदूषण की भयावह स्थिति होने पर भी साढ़े सोलह हजार वृक्षों को काटने का निर्णय सरकारी नीतियों पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संभवत: इसीलिए दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पेड़ काटे जाने की मंजूरी देने पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या दिल्ली इस हालत में है कि वो इतने वृक्षों का विनाश झेल लेगी और क्या आवासीय परियोजना के लिए राजधानी में हजारों पेड़ काटे जाने को देश बर्दाश्त करेगा? पिछले कुछ समय में पर्यावरण संबंधी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई रिपोर्टों में स्पष्ट हो चुका है कि दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार है। हर साल दिल्ली में करीब पांच हजार लोग वायु प्रदूषण के कारण दम तोड़ देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की योजना के विरोध में स्वर बुलंद होने पर सरकारी एजेंसियों द्वारा तर्क दिया गया कि जितने पेड़ काटे जाने हैं, उसके बदले 10 गुना वृक्ष लगाए जाएंगे किन्तु वृक्षारोपण के मामले में सरकारी निष्क्रियता के मामले किसी से छिपे नहीं हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार 2015-17 के बीच दिल्ली में 13018 वृक्ष काटे गए थे और उसके बदले 65090 पौधे लगाए जाने थे किन्तु लगाए गए मात्र 21048 पौधे और इनमें भी बहुत सारे सजावटी पौधे लगाकर खानापूर्ति कर दी गई। मामला सामने आने पर शहरी विकास मंत्रालय द्वारा रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया गया कि मंत्रालय कम पेड़ लगाने के मामले की जांच कराएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मैट्रो निर्माण के दौरान भी हजारों पेड़ काटे गए थे किन्तु उसके बदले नए पौधे लगाने के दावों के बावजूद पौधे नहीं लगाए गए। वैसे भी पेड़ों को काटने के बदले जो पौधे लगाए जाते हैं, उनमें से महज दस फीसदी ही बचे रह पाते हैं और ये छोटे-छोटे पौधे प्रदूषण से निपटने तथा वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में मददगार साबित नहीं होते। इन पौधों को वृक्ष का रूप लेने में 8-10 साल लग जाते हैं और नीम, बरगद तथा पीपल जैसे वृक्षों को फलने-फूलने में तो 25-30 साल का समय लग जाता है, तब तक पर्यावरण के साथ क्या होगा? ऐसे में पहले से ही पर्यावरण प्रदूषण से बुरी तरह जूझ रही दिल्ली में हजारों छायादार पेड़ काटे जाने से आपातकालीन स्थिति पैदा हो सकती है। किसी भी क्षेत्र में वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए वहां वन क्षेत्र 33 फीसदी होना चाहिए किन्तु दिल्ली में यह सिर्फ 11.88 फीसदी है और दिल्ली से सटे इलाकों फरीदाबाद, नोएडा तथा गाजियाबाद की हालत तो बहुत बुरी है, जहां वन क्षेत्र क्रमश: 4.32, 2.43 तथा 1.89 फीसदी ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
ऊंचे और पुराने वृक्ष काटे जाने से दिल्ली में पक्षियों की 15 प्रजातियों का जीवन भी खतरे में है। दरअसल दिल्ली में स्पॉटेड आउलेट, कॉपरस्मिथ बारबेट, ब्राउन हेडेड बारबेट, अलेवजेंडर पैराकीट, रोडविंग पैराकीट, ग्रेटर प्लेनबैक वुडपैकर, ग्रे हॉर्नबिल, ब्लैक काइट, ब्लैक शोल्डर काइट, एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर इत्यादि पक्षियों की 15 प्रजातियां ऐसी हैं, जो ऊंचे दरख्तों पर घोंसला बनाते हैं और अपने खान-पान तथा रहन-सहन की आदतों के चलते ऊंचे पेड़ों पर ही रहना पसंद करते हैं, इनमें कुछ प्रजातियां दुर्लभ पक्षियों की भी हैं। ऐसे ऊंचे वृक्ष काटे जाने से इन पक्षियों का घर भी उजड़ता है और पक्षी विज्ञानियों का कहना है कि ऊंचे दरख्तों की कमी की वजह से पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पक्षियों की कई प्रजातियां दिल्ली का रूख करने से कतराने लगी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी हाल ही में अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि दिल्ली कभी पक्षियों की आबादी को लेकर मशहूर हुआ करती थी किन्तु आज स्थिति विपरीत है, पेड़-पौधों व पक्षियों के लिए यहां जगह कम होती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
सुखद स्थिति यह है कि आम जन अब पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के महत्व को लेकर जागरूक हुआ है और दिल्ली में भी उत्तराखण्ड के करीब पांच दशक पुराने चिपको आन्दोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपककर इन्हें जीवनदान देने के लिए आन्दोलन शुरू हुआ। हम इन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि दिल्ली में यहां की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से नौ लाख पेड़ों की कमी है और यहां स्वस्थ जीवन के लिए प्राणवायु अब बहुत कम बची है। स्वच्छ प्राणवायु के अभाव में लोग तरह-तरह की भयानक बीमारियों के जाल में फंस रहे हैं, उनकी प्रजनन क्षमता पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है, उनकी कार्यक्षमता भी इससे प्रभावित हो रही है। कैंसर, हृदय रोग, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का संक्रमण, न्यूमोनिया, लकवा इत्यादि के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा इन बीमारियों के इलाज पर ही खर्च हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हम प्रकृति से अपने हिस्से की आॅक्सीजन तो ले लेते हैं किन्तु प्रकृति को उसके बदले में लौटाते कुछ भी नहीं। दरअसल एक पेड़ सालभर में लगभग सौ किलो आॅक्सीजन देता है जबकि एक व्यक्ति को वर्षभर में साढ़े सात सौ किलो आॅक्सीजन की जरूरत होती है। नीम, बरगद, पीपल जैसे बड़े छायादार वृक्ष, जो 50 साल या उससे ज्यादा पुराने हों, उनसे तो प्रतिदिन 140 किलो तक आॅक्सीजन मिलती है। इस हिसाब से अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि ऐसे छायादार पुराने वृक्ष काटने से पर्यावरण को कितनी भारी क्षति पहुंचती है और यही वजह है कि ऐसे छायादार वृक्ष अपने आसपास के परिवेश में लगाने की प्राचीन भारतीय परम्परा रही है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jul 2018 05:02:01 +0530</pubDate>
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                <title>चिंता बढ़ाते पाक-मालदीव संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[सार्क के सदस्य देश मालदीव ने भारत के पारम्परिक शत्रु पाकिस्तान के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में समझौता कर भारत के लिए चिंता का नया द्वार खोल दिया हैं। मालदीव की सरकारी विद्युत कंपनी स्टेलको ने पिछले दिनों देश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ यह समझौता किया है। मालदीव में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/pak-maldives-relations-increasing-anxiety-2/article-4830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/pak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सार्क के सदस्य देश मालदीव ने भारत के पारम्परिक शत्रु पाकिस्तान के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में समझौता कर भारत के लिए चिंता का नया द्वार खोल दिया हैं। मालदीव की सरकारी विद्युत कंपनी स्टेलको ने पिछले दिनों देश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ यह समझौता किया है। मालदीव में चीन के निरंतर बढ़ रहे प्रभाव से भारत पहले ही चिंतित है, ऐसे में पाक-मालदीव की जुगलबंदी से नई दिल्ली की परेशानी और बढ़ेगी। हेलीकॉप्टर और वर्क परमिट के मुद्दे पर जारी तनाव के बीच मालदीव ने पाकिस्तान के साथ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में समझौता कर यह साफ कर दिया है कि मालदीव भारत के हितों से कोई सरोकार नहीं रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
विशिष्ट भौगोलिक एवं सामरिक संरचना के चलते मालदीव भारत के लिए खासा महत्वपूर्ण है। तटीय प्रदेश केरल से केवल तीन सौ किमी की दूरी पर स्थित होने के कारण मालदीव जैसे देश में पाकिस्तान की पैठ बढ़ती है तो भारत को उत्तरी-पूर्वी राज्यों के साथ-साथ दक्षिण से नई सामरिक चुनौतियों का सामना करना पडेÞगा। हिन्द महासागार के रास्ते पश्चिम एशिया से चीन और पूर्वी एशिया की ओर जाने वाला मार्ग इसी द्वीप क्षेत्र से होकर निकलता हैं। इस क्षेत्र का उपयोग भारत व्यापारिक यात्राओं के लिए भी करता है, ऐसे में हिन्द महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए मालदीव के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना भारत के लिए जरूरी भी है। साल 2000 में चीन द्वारा यहां सैन्यबेस बनाए जाने का मुद्दा भी उठा था। बीच में ऐसी खबर भी आई थी कि चीन ने तत्कालीक राष्ट्रपति अब्दुल गयूम के सामने पनडुब्बियों के सैनिक अड्डे के निर्माण हेतू कुछ द्वीपों के खरीद किए जाने का प्रस्ताव रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन भारत की कड़ी आपत्ति के चलते मालदीव चीन के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ा। देखा जाए तो मालदीव में भारत की नीति हमेशा से ही ढुलमुल रवैये वाली रही है । पड़ोसी पहले की नीति पर चलने वाली मोदी सरकार ने भी अपने चार साल के कार्यकाल में मालदीव की लगभग उपेक्षा ही की है। साल 2012 में भारत समर्थक मोहम्मद नशीद की लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार के विरूद्ध जब प्रदर्शनों और विरोध का सिलसिला शुरू हुआ तब नशीद भारत से सहयोग की उम्मीद लगाए हुए थे उस वक्त भारत ने नशीद का सहयोग करने के बजाए इसे मालदीव का आंतरिक मामला कहकर चुप्पी साध ली।भारत ने नाशीद की बर्खास्तगी की आलोचना करने के बजाए मोहम्मद वहीद हसन की सरकार को बधाई देकर न केवल नाशीद के जख्मों पर नमक छिड़का बल्कि मालदीव में हुए अलोकतांत्रिक सत्ता परिर्वतन पर भी अपनी मुहर लगा दी। इसी प्रकार जब मालदीव में कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू संग्राहलय को तोड़ा गया तब भी भारतीय नेतृत्व चुप्पी साधे रहा। भारत की चुप्पी का परिणाम यह हुआ कि मालदीव ने भारत की नराजगी की परवाह किये बिना माले स्थित इब्राहिम नासीर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को विकसित किए जाने संबंधित समझौता बिना किसी कारण के रद्द कर दिया। पिछले दिनों भी मालदीव के एक अखबार ने भारत को सबसे बड़ा दुश्मन बताया और कहा कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
देखा जाए तो साल 2012 में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही मालदीव में भारत विरोधी भावनाओं का विस्तार होने लगा है। मौजूदा राष्ट्रपति अबदुल्ला यामीन की कार्यशैली पूरी तरह भारत विरोधी रही है। यामीन के बारे में यहां तक कहा जा रहा है कि वह अपने देश में भारत की किसी तरह की भागीदारी पंसद नहीं करते हैं। पिछले दिनों उन्होंने भारतीयों के लिए वर्क परमिट जारी करना बंद कर दिया था जिसकी वजह से वहां उन परियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है, जिसमें भारत की भागीदारी है। वर्क परमिट, डॉर्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट और नौसेना के हेलीकॉपटर से जुड़े मुद्दों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। डार्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट की तैनाती के भारत के प्रस्ताव को यामीन सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने के पीछे एक वजह पाकिस्तान को भी बताया जा रहा है। पाकिस्तान ने उसे इसी तरह के एयरक्राफ्ट मुहैया कराने का प्रस्ताव किया है। साल 2013 में भारत की ओर से उपहार में दिए गए दो धु्रव एडवांस लाईट हेलिकॉप्टर को रखने की समय सीमा बढाने से इंकार कर दिया था। यामीन ने इस साल के आंरभ में ही साफ कह दिया था कि भारत अपने हेलिकॉप्टर और पायलटों को वापस बुला ले।</p>
<p style="text-align:justify;">
पाक-मालदीव का ताजा ऊर्जा समझौता ऐसे वक्त में हुआ है, जबकि सटेलको की बहुत सी परियोजनाओं का संचालन चीनी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि मालदीव को पाकिस्तान के साथ समझौता करने की जरूरत क्यों आन पड़ी। दूसरा, पाकिस्तान वित्तीय रूप से भी मालदीव को किसी तरह की मदद पहुंचाने की स्थिति में नहीं है। उसके खुद की अर्थव्यवस्था अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। ऐसे में मालदीव भारत की शर्त पर पाकिस्तान से संबंध बढ़ा कर वहां से क्या हासिल करना चाहता है? तृतीय, सबसे बड़ा प्रश्न समझौते के वक्त को लेकर उठ रहा है। मालदीव ने पाकिस्तान के साथ समझौता ऐसे वक्त में किया है जबकि भारत के न केवल पाकिस्तान के साथ बल्कि मालदीव के साथ भी संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गए है। पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा उरी में किए गए आतंकी हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन को रद्द करने की मांग की थी तो केवल मालदीव ही ऐसा देश था जिसने भारत के निर्णय का विरोध किया था। ऐसे विपरीत वक्त में पाकिस्तान के साथ मालदीव का बिजली समझौता भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है। भारत की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि मालदीव का उपयोग पाकिस्तान भारत के खिलाफ जासूसी के लिए कर सकता है, जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और भी जटील हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
उक्त हालात इस लिए भी चिंताजनक है क्यों कि संकट के समय भारत ने मालदीव की मदद की। साल 1988 में जब पिपुल्स लिबरेशन आगेर्नाइजेशन आॅफ तमिल इल्म से जुडे आतंकवादियों ने मालदीव पर हमला किया तो तात्कालिक राष्ट्रपति अब्दुल गयूम ने भारत सरकार से सहायता की याचना की। इस पर भारत सरकार ने ‘आॅपरेशन कैक्टस’ के तहत सेना भेजकर आतंकवादियों को खदेड़ने में मालदीव की मदद की है।उसके समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भारत वहां नेशनल पुलिस एकेडमी के निर्माण में सहयोग कर रहा है। इसके अलावा समुद्री डाकुओं से सुरक्षा के लिए भारत ने वहां अपने युु़द्ध पोत तैनात कर रखे हैं।  इससे पहले साल 2015 में भी मालदीव की संसद ने विदेशी नागरिकों को अपने देश में भूमि खरीदने संबंधी अधिकार देकर भारत के सामने एक तरह का खतरा पैदा कर दिया है। इस अधिकार के तहत कोई भी विदेशी नागरिक मालदीव की अर्थव्यवस्था में एक अरब डॉलर का निवेश करके भूमि का स्थाई मालिक बन सकता है। प्रर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण मालदीव ने आयात-निर्यात नियमों में कई प्रकार की ढील दे रखी हैं। इसकी आड़ में जिहादी तत्व बेनामी व फर्जी कंपनियों के मार्फत मालदीव में धन एकत्रित करते हैं। बाद में इसी धन का प्रयोग श्रीलंका, केरल और तमिलनाडू में विध्वसंक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे अलावा मालदीव में एक हजार से अधिक ऐसे द्वीप हंै, जो पूरी तरह निर्जन और विरान है। जिनकी निगरानी और सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम मालदीव सरकार ने नहीं कर रखा है। ऐसी स्थिति में भारत का चिंतित होना लाजमी है। कोई संदेह नहीं कि मालदीव से भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ रही हैं। पाक-मालदीव के बीच बढ़ते संबंध भारत के सामने नई मुश्किल पैदा करेगे इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी, इस तथ्य को नहीं भुलना चाहिए कि मालदीव सार्क का महत्वपूर्ण सदस्य है, दक्षिण एशिया में अगर भारत को अपना प्रभुत्व बनाए रखना है तो उसे हर हाल में मालदीव को साथ रखना ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>एन.के. सोमानी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/pak-maldives-relations-increasing-anxiety-2/article-4830</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Jul 2018 06:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>समर्थन मूल्य बढ़ाना संकट का हल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने खरीफ की फसलों के खासकर धान के भाव में 200 रुपये का रिकार्ड वृद्धि कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। बेशक यह दुरुस्त कदम है पर ऐसे कदम पहले ही उठाए जाने की जरूरत थी। पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने फसलों के न्यूनतम भावों में मामूली सी बढ़ोत्तरी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increasing-support-costs-is-not-a-crisis-solution/article-4762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/dhan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने खरीफ की फसलों के खासकर धान के भाव में 200 रुपये का रिकार्ड वृद्धि कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। बेशक यह दुरुस्त कदम है पर ऐसे कदम पहले ही उठाए जाने की जरूरत थी। पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने फसलों के न्यूनतम भावों में मामूली सी बढ़ोत्तरी की थी। भले ही इस बढ़े भाव के पीछे अगले लोकसभा चुनाव मुख्य कारण हंै फि र भी इसे कृषि संकट का हल नहीं माना जा सकता। यह भी तथ्य हैं कि स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने से भी कृषि संकट हल नहीं होता। कमिशन की सिफारिशें खर्चे व मुनाफे पर आधारित हैं। आज का संकट सिर्फ कृषि का घाटा होने तक ही सीमित नहीं बल्कि कृषि का अस्तित्व खत्म होने का है। यदि किसान को धान का भाव ज्यादा मिल भी गया तो वह भूजल के खत्म होने की हालत में कृषि कैसे करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">धान की कीमत बढ़ने से किसान के लिए फायदेमंद हो या ना हो लेकिन यह भूजल के संकट को और अधिक गंभीर करेगा। केंद्र सरकार ने भाव तय करते समय फसली विभिन्नता को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया है। धान के साथ-साथ मक्की तथा अन्य फसलों की बिजाई बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है। जहां तक कृषि लागत खर्चों की बात है डीजल का रेट लगातार बढ़ रहा है, जिससे धान के रेट में बढ़ोत्तरी किसानों के लिए कोई बड़ी राहत नहीं है। खादों पर सब्सिडी लगातार घटाई जा रही है। बीज, कृषि के औजार मंहगे हो रहे हैं। इसलिए कृषि का संकट महज कम खरीद मूल्य की देन नहीं बल्कि जमीन की सेहत तथा पानी की शुद्धता की आवश्यक उपलब्धता पर भी निर्भर है। देश का भला किसानों की आर्थिक खुशहाली के साथ भविष्य में धरती पर पानी की बचत में है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कृषि संबंधी नीतियां राजनीतिक चुनावी मत्था पच्ची में घिर गई हैं। खेती विशेषज्ञों की रिपोर्टों को पढ़ा तक नहीं जाता। कहीं ऐसा ना हो कि कृषि की एक कमी को दूर करने के लिए कोई दूसरी गलती हो जाए। स्वामीनाथन की सिफारिशें जायज हैं, जिन्हें पूरा करने के साथ-साथ मौजूदा परिस्थितियों पर भी विचार करना होगा जो आज की वास्तविकता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jul 2018 06:14:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जनता की आकांक्षायें पूरा करना हमारा लक्ष्य: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[ सरकार की योजनाओं और आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने पर की चर्चा धरने पर बैठे केजरीवाल नीति आयोग की बैठक में नहीं पहुंचे नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दोहरे अंकों में पहुंचाने को एक बड़ी चुनौती करार देते हुए रविवार को कहा कि जनता की आकांक्षायें पूरा करना केंद्र और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/discussion-on-meeting-of-policy-commission-increasing-economic-growth/article-4252"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;"> सरकार की योजनाओं और आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने पर की चर्चा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>धरने पर बैठे केजरीवाल नीति आयोग की बैठक में नहीं पहुंचे</strong><br />
<strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दोहरे अंकों में पहुंचाने को एक बड़ी चुनौती करार देते हुए रविवार को कहा कि जनता की आकांक्षायें पूरा करना केंद्र और राज्य सरकारों का लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक भवन में नीति आयोग की संचालन परिषद की चौथी बैठक के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2017 – 18 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गयी है लेकिन अब इसे दोहरे अंकों तक ले जाना एक बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। प्रधानमंत्री ने वस्तु एवं सेवाकर को लागू करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण है। जटिल मुद्दों पर ‘टीम इंडिया’ की भावना परिलक्षित हुई है। मुख्ममंत्रियों की विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वच्छ भारत अभियान, डिजीटल लेन देन और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर बनी समिति और उपसमितियो के सुझावों को केंद्र सरकार और विभिन्न मंत्रालयों ने लागू किया है। संचालन परिषद देश में ऐितहासिक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;"> सरकार की योजनाओं के बारे में भी बताया</h1>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 1.5 लाख हेल्थ सेंटर खोले गए हैं। 10 करोड़ गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा। – समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकार सभी बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है। मुद्रा योजना, जन-धन योजना और स्टेंड अप इंडिया जैसी योजनाओं का भी लोगों को लाभ मिला है।<br />
ग्राम स्वराज अभियान को नए तरह से लागू किया गया है। इसमें 45 हजार गांवों को शामिल किया गया है</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 16:10:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>विदेशी फामूला बनाएगा किसानों को माला-माल, बढ़ेगी आय</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सकब)। अब किसानों की माला माल करने के लिए विदेश फामूला इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में इजरायल और लंदन गए कृषि विशेषज्ञों ने जहां न्यूनतम पानी का इस्तेमाल कर अधिकतम उत्पादन लेने की तकनीकों का अध्ययन किया, वहीं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने करीब आधा दर्जन देशों का दौरा कर खेती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-income-of-farmers-by-israeli-technology/article-3749"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/kisahan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सकब)। </strong>अब किसानों की माला माल करने के लिए विदेश फामूला इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में इजरायल और लंदन गए कृषि विशेषज्ञों ने जहां न्यूनतम पानी का इस्तेमाल कर अधिकतम उत्पादन लेने की तकनीकों का अध्ययन किया, वहीं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने करीब आधा दर्जन देशों का दौरा कर खेती में सुधारों पर टिप्स लिए। अब महकमे के अफसर इन अनुभवों को हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार लागू करने के तरीकों पर मंथन में जुटे हैं।ब्राजील, अर्जेंटीना और इजरायल की मदद से गायों की नस्ल सुधारने के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनाने का प्रोजेक्ट कारगर होगा। हालैंड के सहयोग से गुरुग्राम में दुनिया की सबसे बड़ी फूल मंडी बनने से किसानों को निकट में ही बड़ा बाजार मिल जाएगा। इसके अलावा सोनीपत के गन्नौर में बन रही अंतरराष्ट्रीय फल एवं सब्जी मंडी में अर्जेंटीना की मेरकाडो सेंट्रल मंडी और स्पेन की मेरकाबारना मंडी की तर्ज पर किसानों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बूंद-बूंद का होगा इस्तेमाल</h3>
<p style="text-align:justify;">स्पेन की मदद से प्रदेश में खट्टे फलों के बाग लगाने से बागवानी किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। स्पेन ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई अन्य क्षेत्रों में भी मदद की पेशकश की है। स्पेन का प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर या नवंबर में हरियाणा का दौरा करेगा जिसके बाद नींबू-संतरे के बाग लगाने, जैतून की खेती व फूड प्रोसेसिंग को आगे बढ़ाने के लिए समझौता होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इजरायल तकनीक का होगा इस्तेमाल</h3>
<p style="text-align:justify;">खेतों में न्यूनतम लागत से अधिकतम पैदावार लेने में इजरायल का कोई जवाब नहीं। इजरायल ने खासकर सूक्ष्म सिंचाई विधि से पानी बचाने, पानी के पुनर्भरण और जल संरक्षण की तकनीक साझा करने के साथ ही प्रदेश में कुछ और उत्कृष्टता केंद्र बनाने की पेशकश की है। वहां की कई कंपनियां जल संरक्षण और कृषि उद्देश्य के लिए पानी के पुनर्भरण में नवीनतम तकनीक हरियाणा के अफसरों से साझा करेंगी। वैज्ञानिक तरीके से तालाबों का पानी खेती के काम आएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक में दक्ष होंगे किसान</h3>
<p style="text-align:justify;">विदेश दौरे पर गए प्रतिनिधिमंडलों में शामिल रहे कृषि सचिव अभिलक्ष लिखी और मार्केटिंग बोर्ड के प्रशासक मंदीप बराड़ के मुताबिक खेती को लेकर विदेश में काफी काम हुआ है। दौरे के दौरान टीम ने कई नवीनतम तकनीकें जानी। यह निश्चित रूप से किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होंगी। हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार इन तकनीकों को अपनाया जाएगा। किसानों को फसल उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक में दक्ष बनाने पर विभाग का फोकस है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 10:35:18 +0530</pubDate>
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