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                <title>मोटर व्हीकल एक्ट से बढ़ता विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[मोटर व्हीकल एक्ट इन दिनों केंद्र और राज्यों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। हाल ही में केंद्र सरकार ने 1988 के मोटर व्हीकल एक्ट में कुछ नए प्रावधानों को जोड़ा है। जिसमें लाइसेंसिंग सिस्टम में सुधार, तकनीकी का प्रयोग, दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को सुरक्षा और विशेषकर ट्रैफिक नियमों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/increasing-controversy-over-motor-vehicle-act/article-10391"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/improvement-technical-accident-controversy-over-motor-vehicle-act.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मोटर व्हीकल एक्ट इन दिनों केंद्र और राज्यों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। हाल ही में केंद्र सरकार ने 1988 के मोटर व्हीकल एक्ट में कुछ नए प्रावधानों को जोड़ा है। जिसमें लाइसेंसिंग सिस्टम में सुधार, तकनीकी का प्रयोग, दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को सुरक्षा और विशेषकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी भरकम जुर्माने आदि कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। जिनमें भारी भरकम जुर्माने विवाद के केंद्र में है। इससे असहमत होकर कुछ राज्यों में इस कानून को अपने यहां लागू करने से मना कर दिया है। जिसमें मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। इनके अतिरिक्त कुछ बीजेपी शासित राज्य भी हैं, जो इस कानून पर अपनी असहमति व्यक्त कर चुके हैं। भारत में एक संघीय ढांचा है जिसके द्वारा केंद्र और राज्य में विधाई शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके लिए संविधान में तीन सूचियों की चर्चा की गई है। जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची प्रमुख हैं। केंद्र सरकार ने समवर्ती सूची द्वारा प्राप्त शक्तियों के माध्यम से मोटर व्हीकल एक्ट में नए प्रावधानों को जोड़ा है। समवर्ती सूची के अंतर्गत राज्य और केंद्र दोनों ही सूची में अंकित विषयों पर कानून बना सकते हैं। लेकिन यदि एक ही विषय पर केंद्र और राज्य दोनों ने कानून बनाया है। तो केंद्र का कानून लागू होगा और राज्यों का कानून शून्य माना जाएगा। लेकिन यहां पर राज्यों के लिए भी कुछ प्रावधान किए गए हैं। जिनके माध्यम से राज्य केंद्र द्वारा बनाए गए कानूनों पर एक नया कानून बना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इसकी प्रक्रिया जटिल है। इसके लिए राज्य सरकारों को सर्वप्रथम किए गए संशोधनों को विधानसभा में पास कराने के बाद केंद्र सरकार को भेजना होगा और केंद्र सरकार विवेचना के बाद उसको राष्ट्रपति के पास भेजेगी। यदि राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो राज्यों द्वारा बनाया गया कानून अस्तित्व में आ जाएगा। इस मोटर व्हीकल कानून में कुल 93 प्रावधान हैं। जिसमें 63 केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन द्वारा ही राज्यों पर लागू हो जाते हैं। बाकी के प्रावधान तभी लागू हो सकेंगे जब राज्य सरकारें उसके लिए नोटिफिकेशन जारी करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जो विवादित विषय कठोर जुमार्ने का है। वह तभी लागू हो सकता है जब राज्य सरकारें उसके लिए नोटिफिकेशन जारी करें। राज्य सरकारों ने इसको ना लागू करने के लिए अपने तर्क दिए हैं। जिनमें भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुख है। संविधान विश्लेषकों को यह विरोध राजनीति से प्रेरित लगता है। क्योंकि लगभग एक माह पहले ही इसके लागू करने की तिथि की घोषणा की जा चुकी थी उस समय इसका विरोध नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन यह भी सार्वभौमिक सत्य है कि जुर्माने राशि के बढ़ने से जरूरी नहीं है की सभी इसको स्वीकार करने लगे। यदि आप जुमार्ने की राशि बढ़ाते हैं तो सड़कों की गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए। हाईवे पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता उच्च होनी चाहिए। इसके साथ सभी राज्य एक जैसे नहीं हैं। कुछ राज्य अभी भी काफी पिछड़े हुए हैं। जहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, लोग अपनी दैनिक जरूरतों को भी पूरा करने में असमर्थ हैं। ऐसे में भारी-भरकम जुर्माने सभी राज्यों में तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता। केंद्र सरकार का तर्क है कि दिन प्रतिदिन सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है, गाड़ियां बढ़ रही हैं। इसलिए ऐसा करना आवश्यक था। यह तर्क भी सभी राज्यों के लिए सही नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि पिछड़े राज्यों में अभी भी कनेक्टिविटी का अभाव है, सड़कों पर दबाव और गाड़ियों की संख्या अभी भी वहां पर विकसित राज्यों की तुलना में कम है। इसलिए कठोर जुमार्ने के प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से सर्वप्रथम विकसित राज्यों से शुरू करना तर्कसंगत था। मौजूदा समय में जिस प्रकार से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा तकनीकी का प्रयोग करना होगा हमें चालान में मैनुअल चालान को समाप्त करना होगा। इसके साथ कई अन्य आवश्यक कदम भी उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सड़क परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राज्यों के पास मोटर व्हीकल कानून को लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अन्यथा उनको आर्थिक पाबंदियो से गुजरना होगा और कैग आॅडिट के माध्यम से जुमार्ने ना लगाने से हुई आर्थिक हानि के बराबर केंद्र सरकार रेवेन्यू शेयर में कटौती कर सकती है। यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि पेनाल्टी नियमित आय का साधन नहीं है। यदि इस विषय पर राज्य और केंद्रों के बीच मतभेद हैं तो केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए और बातचीत के माध्यम से राज्य सरकार की चिंताओं को दूर किया जाना चाहिए। इसके साथ यदि राज्य सरकारें इस विषय पर अपना कानून बनाना चाहती हैं तो उनके पास भी संवैधानिक विकल्प उपलब्ध हैं, जिनका उन्हें प्रयोग करना चाहिए। क्योंकि नागरिकों को सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना राज्य का कर्तव्य है। जिससे समस्त नागरिक एक स्वस्थ और सुरक्षित माहौल में अपने गंतव्य स्थल तक जा सके।<br />
<strong><em>-कुलिन्दर सिंह यादव</em></strong></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2019 13:45:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चीन दुनियाभर में अपने परमाणु तकनीकी मानकों को करेगा प्रोत्साहित</title>
                                    <description><![CDATA[शंघाई(एजेंसी)। चीन ने कहा है कि वर्ष 2027 के अंत तक वैश्विक परमाणु मानकों में अग्रणी भूमिका हासिल करने के लिए वह अपने परमाणु उद्योग के तकनीकी मानकों का दुनियाभर में प्रचार-प्रसार करेगा ।कैबिनेट के नये दिशानिर्देशों के अनुसार चीन के परमाणु तकनीकी मानकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। चीन के दो बड़े परमाणु परियोजना डेवलपर्स, चाइना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/china-will-encourage-nuclear-technical-standards/article-5296"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/cinaa.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>शंघाई(एजेंसी)। </strong>चीन ने कहा है कि वर्ष 2027 के अंत तक वैश्विक परमाणु मानकों में अग्रणी भूमिका हासिल करने के लिए वह अपने परमाणु उद्योग के तकनीकी मानकों का दुनियाभर में प्रचार-प्रसार करेगा ।कैबिनेट के नये दिशानिर्देशों के अनुसार चीन के परमाणु तकनीकी मानकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। चीन के दो बड़े परमाणु परियोजना डेवलपर्स, चाइना नेशनल न्यूक्लियर कार्पोरेशन (सीएनएनसी) और चाइना जनरल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट कार्पोरेशन (सीजीएन) मिलकर आधुनिक तीसरी पीढ़ी के परमाणु संयंत्र हुलांग वन का विदेशों में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।</p>
<h2>वैश्विक परमाणु उद्योगों पर अपना दबदबा कायम करना चाहता है चीन</h2>
<p>सीजीएन ब्रिटेन के ब्रैडवेल में प्रस्तावित परमाणु परियोजना के लिए तकनीक प्रदान करेगा।चीन का लक्ष्य अपनी परमाणु क्षमता को वर्ष 2020 तक 58 गिगावॉट और वर्ष 2030 तक 200 गिगावॉट तक बढ़ाने का है। फिलहाल जून महीने के अंत में चीन की परमाणु क्षमता 37 गिगावॉट है। चीन अपनी स्वदेशी परमाणु तकनीक के माध्यम से वैश्विक परमाणु उद्योगों पर अपना दबदबा कायम करना चाहता है।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Aug 2018 09:36:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नौकरी खोजने में आपके लिए मददगार हैं ये 5 जॉब सर्च एप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। ग्रेजुएशन और प्रोफेशनल डिग्री हासिल करने के बाद आमतौर पर कुछ लोगों की नौकरी लग जाती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें नौकरी तलाशने के लिए ऑनलाइन वेबसाइट पर सर्च करने के साथ-साथ कंपनियों के दफ्तरों में भी चक्कर लगाने होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजगार की तलाश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/these-5-job-search-apps-are-helpful-for-you-to-find-a-job/article-3426"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/app.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> ग्रेजुएशन और प्रोफेशनल डिग्री हासिल करने के बाद आमतौर पर कुछ लोगों की नौकरी लग जाती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें नौकरी तलाशने के लिए ऑनलाइन वेबसाइट पर सर्च करने के साथ-साथ कंपनियों के दफ्तरों में भी चक्कर लगाने होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजगार की तलाश में रहने वाले लाखों युवाओं के लिए कुछ खास एप्स भी प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं जो उनके लिए मददगार साबित हो सकती हैं। हम अपनी इस खबर में आपको कुछ ऐसी ही ऑनलाइन जॉब सर्च एप के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके करियर को सही मुकाम दिलाने में मददगार होंगी। आप इन एप्स को आप फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">1. ग्लासडोर</h2>
<p style="text-align:justify;">ग्लासडोर जॉब काफी पॉपुलर एप है। इस एप में आपको कई खास फीचर्स दिए गए है। इस एप के जरिए आपको अलग-अलग क्षेत्र के जॉब मिलेंगे। इसके अलावा, एप के जरिए आप लेटेस्ट जॉब की जानकारी पा सकते हैं। आप इसके जरिए कंपनी रि‍व्यू और सैलरी पैकेज के बारे में जानकारी भी चेक कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. गूगल सर्च</h3>
<p style="text-align:justify;">गूगल सर्च इंजन के जरिए आप अपनी पसंद की जॉब प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ गूगल सर्च में जाकर अपनी जरुरत के मुताबिक जॉब सर्च करना होगा, जिसके बाद गूगल उनसे जुड़ी नौकरी की जानकारी आपको दे देगा। इसके अलावा, यह किसी भी ब्राउजर एप या गूगल एप में उपलब्ध है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. इंडीड</h4>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सालों में इंडीड जॉब सर्च को यूजर्स की ओर से काफी अच्छा रेस्पॉन्स मिला है। इसके अभी तक 100 मिलियन यूजर बन चुके हैं। साथ ही, यह एप 50 देशों में 28 भाषाओं में उपलब्ध है। इस एप में आप अपनी अपडेट की हुई रेज्यूम डाल सकते हैं, जिसमें आपको अलग-अलग कैटेगरी की जॉब मिलेगी। इसके अलावा, आप एक के जरिए ही जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. लिंक्ड-इन प्रोफेशनल</h3>
<p style="text-align:justify;">लिंक्ड-इन प्रोफेशनल लोगों के लिए एक सोशल नेटवर्क है। एप की मदद से आप नई नौकरी की तलाश भी कर सकते हैं। इस एप के जरिए आप लेटेस्ट जॉब की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसमें कई सारे बेसिक फीचर्स मौजूद हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5. स्नैगाजॉब</h3>
<p style="text-align:justify;">स्नैगाजॉब एक सर्च एप है जिसकी मदद से आप अपनी पसंद की जॉब को सर्च कर सकते हैं। साथ ही, एप के जरिए जॉब के लिए अप्लाई भी कर सकते हैं। इसके अलावा, यह एप यूजर को डेली जॉब नोटिफिकेशन भी भेजता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2017 05:24:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>देना होगा भारत को रणनीतिक कौशल का परिचय</title>
                                    <description><![CDATA[बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ अर्थात् बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन नेपाल की राजधानी काठमांडू में हो रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जबकि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर गंभीर तनाव बरकरार है और डोकलाम को लेकर चीन बार-बार भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/india-will-introduce-strategic-ills/article-3021"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sushma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ अर्थात् बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन नेपाल की राजधानी काठमांडू में हो रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जबकि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर गंभीर तनाव बरकरार है और डोकलाम को लेकर चीन बार-बार भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है। ऐसे में बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों का नेपाल में एकत्रित होना न केवल भारत के नजरिये से महत्वपूर्ण है, बल्कि चीन के लिए भी इसके निष्कर्ष मायने रखेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">डोकलाम को लेकर दोनों देशों की रणनीति काफी हद तक इस सम्मेलन के परिणामोें पर निर्भर करेगी। ऐसा कहना इसलिए बेजा नहीं है कि बिम्सटेक के दो महत्वपूर्ण देश नेपाल और श्रीलंका पर चीन लगातार डोरे डाल रहा है। अगर चीन भारत के इन दो प्रमुख पड़ोसियों को अपने पक्ष में करने में सफल हो जाता है, तो दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति उसके अनुकूल हो जाएगी, जिसका उपयोग वह भारत को धमकाने या झुकाने में करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बिम्सटेक (बे आॅफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-आॅपरेशन) सात देशों का एक उपक्षेत्रीय मंच है, जिसका गठन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि यह आर्थिक गतिविधियों के द्वारा दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने का काम करेगा। वर्ष 1994 में थाईलैण्ड ने बांग्लादेश-भारत-श्रीलंका (बिम्सटेक) सहयोग समूह गठित करने की दिशा में पहल की जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से सटे दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण एशियाई देशों में उप-क्षेत्रीय आधार पर आर्थिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाना था। द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में कार्य करने के उदेश्य से 6 जून 1997 को बैंकॉक (थाईलैण्ड) में बिम्सटेक की स्थापना की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">दिसंबर 1997 में म्यांमार और फरवरी 2004 को नेपाल तथा भूटान के शामिल होने के साथ ही इसकी सदस्य संख्या सात हो गयी है। इसका लक्ष्य व्यापार, निवेश, उद्योग, तकनीक, मानव संसाधनों का विकास, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, मूल आर्थिक ढांचा और परिवहन के क्षेत्र में विशिष्ट सहयोगी परियोजनाओं की पहचान करना है। यद्यपि सदस्य देशों में घनिष्ठ, सांस्कृतिक, सामाजिक, और आर्थिक संबंधों का इतिहास रहा है। फिर भी सार्क व नाम की तरह इसके सदस्य देशों में भी आपसी मतभेद व मनमुटाव पाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जबकि नेपाल मेंं अस्थिरता का माहौल है। स्वराज की यात्रा के करीब दो सप्ताह बाद ही नेपाल के नए प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा 23 अगस्त को दिल्ली आ रहे हैं। वे पांच दिन यहां रहेंगे। इस यात्रा के दौरान उनका प्रधानमंत्री देउबा से मिलने का भी कार्यक्रम है। देउबा की भारत यात्रा से पहले 14 अगस्त को चीन के उपप्रधानमंत्री वांग यांग भी नेपाल पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्वराज को अपने ओजस्वी विचार और वाणी से नेपाली नेतृत्व को विश्वास दिलाना होगा कि भारत, नेपाल के महत्व को अच्छे से समझता है, वह कभी नेपाली हितों की अनदेखी नहीं कर सकता है। चीन की नेपाल में दिलचस्पी बढ़ना भारत के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। पिछले दिनों नेपाल ने चीन के नए सिल्क रूट योजना में शामिल होने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर कर भारत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेपाल के साथ हुए समझौते के बाद चीन काठमांडू से तिब्बत के ल्हासा तक रेलवे नेटवर्क सहित कई अन्य परियोजनाओं में भारी निवेश करना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती स्वराज को इस दिशा में भी प्रयास करना होगा कि वे बिम्सटेक के बाकी सदस्य देशों को भी चीनी प्रभाव क्षेत्र से निकाल कर भारत के पाले में खड़ा कर सकें। बांग्लादेश में भी चीन ने रूचि लेना शुरू कर दिया है। हाल ही में चीन ने बांग्लादेश को चार प्रशिक्षण विमान दिये हैं। दो पनडुब्बियों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। इसके अतिरिक्त बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश के लिए एक तेल पाइपलाइन लगाने की योजना पर काम कर रहा है। कुल मिलाकर चीन चारों ओर से भारत को घेरने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में उसने श्रीलंका के साथ दक्षिण समुद्री बंदरगाह हम्बनटोटा को लेकर 1.1 अरब डॉलर का समझौता किया है। हम्बनटोटा बंदरगाह को हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती रूचि के तौर पर देखा जा रहा है। आशंका इस बात की भी है कि चीन की वन बेल्ट वन रोड योजना को आगे बढ़ाने में हम्बनटोटा बंदरगाह की अहम् भूमिका हो सकती। यह समझौता पिछले कई महीनों से अधरझूल में था। श्रीलंका की ओर से इस बात की चिंता जताई जा रही थी कि कहीं इस बंदरगाह का इस्तेमाल चीन अपने सामरिक उदेश्यों के लिए न करने लगे। लेकिन अब चीन की ओर से इस बात का आश्वासन दिये जाने के बाद कि वह बंदरगाह का प्रयोग केवल व्यावसायिक उदेश्यों के लिए ही करेगा तथा किसी भी बाहरी शक्ति को यहां नोसेना का बेस बनाने की इजाजत नहीं देगा। इस आश्वासन के बाद दोनों देशों के बीच यह समझौता हो सका।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए चिंता की बात यह है कि चीन दक्षिण में उसके और करीब आ गया है। कुल मिलाकर बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की इस बैठक में भारत को बडेÞ रणनीतिक कौशल से अपने पड़ौसियों को अपने अनुकूल करना होगा। देखना यह है कि तेज तर्रार और ओजस्वी वक्ता के रूप में देश और दुनिया में पहचान रखने वाली भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज काठमांडू से क्या ला पाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
<strong>–<em>एनके सोमानी</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2017 03:16:16 +0530</pubDate>
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                <title>अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट करार देने के प्रस्ताव पर चीन ने फिर लगाया अड़ंगा</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने 3 महीने के लिए तकनीकी रोक लगायी नई दिल्ली। पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी घोषित कराने के प्रस्ताव के खिलाफ चीन ने फिर अड़ंगा लगा दिया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने आतंकी अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/china-again-stop-the-proposal-of-global-terrorist-azhar/article-2832"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/azher.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चीन ने 3 महीने के लिए तकनीकी रोक लगायी</h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी घोषित कराने के प्रस्ताव के खिलाफ चीन ने फिर अड़ंगा लगा दिया है।<br />
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने आतंकी अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने 3 महीने के लिए तकनीकी रोक लगा दी।<br />
इससे पहले फरवरी में भी चीन ने अजहर को ग्लोबल आतंकवादियों की लिस्ट में मसूद का नाम शामिल करने पर आपत्ति जताई थी।</p>
<p>पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी घोषित कराने के प्रस्ताव के खिलाफ चीन ने फिर अड़ंगा लगा दिया है। चीन ने तीन महीनों के लिए इस प्रस्ताव पर टेक्निकल होल्ड को बढ़ा दिया है।</p>
<p>बता दें कि आतंकियों और आतंकी संगठनों पर बैन लगाने का फैसला यूएनएससी की 1267 कमेटी ही करती है। अक्टूबर 1999 में यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने 1267 रेजोल्यू्शन पास किया था। इसी के तहत ओसामा बिन लादेन को आतंकी घोषित करने के बाद उस पर और उसके संगठन अल कायदा पर बैन लगाया गया था।</p>
<p>भारत ने पिछले साल मार्च में अजहर पर बैन लगाने के लिए यूनाइटेड नेशंस में प्रपोजल रखा था। उस वक्त चीन ने इसे 6 महीने (सितंबर तक ) के लिए रोक दिया था।</p>
<ul>
<li>मंत्रालय ने पहले भी एक लिखित जवाब में कहा था, ‘‘हमने कई बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति को चीन के रूख से अवगत कराया है।’’</li>
</ul>
<p>चीन यह कहकर भारत के कदम का विरोध कर रहा है कि यूएनएससी 1267 में इसपर कोई सहमति नहीं है। यूएनएससी 1267 आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं पर वैश्विक प्रतिबंध लगाती है। जेईएम पहले ही प्रतिबंधित सूची में है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 03:30:38 +0530</pubDate>
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