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                <title>EVM - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ईवीएम पर उठे सवालों का जवाब दे आयोग: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Congress: कांग्रेस ने कहा है कि हाल में हुए आम चुनाव के परिणामों को लेकर एक विश्लेषण सामने आया है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी की बात कही गई है और इस पर उठे सवालों का चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने शनिवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/commission-should-answer-the-questions-raised-on-evm-congress/article-60663"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/delhi-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Congress: कांग्रेस ने कहा है कि हाल में हुए आम चुनाव के परिणामों को लेकर एक विश्लेषण सामने आया है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी की बात कही गई है और इस पर उठे सवालों का चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनाव आयोग ईवीएम के परिणामों को लेकर किसी भी संदेह से इनकार करता है और वोटिंग मशीन में गड़बड़ी नहीं होने का दावा करता है, लेकिन हाल में सामने आए विश्लेषण से शुरूआती और आखिरी चुनाव परिणाम में अंतर मिला है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">जो इवीएम पर सवाल खड़े करता है। दीक्षित ने कहा ‘वॉइस आॅफ डेमोक्रेसी’ नाम की संस्था ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव परिणामों पर एक विश्लेषण किया है। विश्लेषण के मुताबिक शुरूआती चरण में घोषित आंकड़ों और आखिरी चरण के फाइनल आंकड़ों में अंतर है। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू के और आखिरी आंकड़ों में यदि छह प्रतिशत का अंतर है तो क्या ये नतीजे सही थे। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग ने हर फेज से कई दिन बाद तक फाइनल आंकड़ें दिए। ये तब है, जब कहा जाता है कि ईवीएम से बेहतर कुछ नहीं है, ईवीएम से हर चीज पता चल जाती है। ईवीएम से जब वोटिंग चालू होती है तो हर दो घंटे में चुनाव आयोग को आंकड़ें भेजने होते हैं कि बूथ पर कितनी वोटिंग हुई है। अगर हम राज्यों के स्तर पर देखें तो पता चलेगा कि आश्चर्यजनक तरीके से आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 12.5 प्रतिशत वोट बढ़ जाता है। संयोग है कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भाजपा और उसके गठबंधन ने चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन ईवीएम के इस जमाने में यदि आंकड़ों में ऐसा अंतर है तो यह पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षित के अनुसार इस बारे में चुनाव आयोग से पूछा गया तो आयोग ने जवाब में कहा, ‘इंटरनेट जैसी समस्याओं के कारण पूरी जानकारी नहीं दे पाते थे, लेकिन चुनाव आयोग ने एक और आंकड़ा जारी किया था जिसका जवाब ही उन पर सवाल खड़े करता है। चुनाव आयोग ने कहा कि 2019 में भी हम कुछ फेज में देरी से डेटा दे पाए थे, लेकिन उस समय भी सात बजे जारी किए गए डेटा और फाइनल डेटा में एक प्रतिशत से भी कम का अंतर था। आयोग संवैधानिक संस्था है और अगर संवैधानिक संस्था के काम लोकतंत्र पर सीधे असर करते हैं तो उन्हें अपना पक्ष रखने की जिम्मेदारी बनती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी होती है और सब मानते हैं कि मशीनों में गड़बड़ी है, लेकिन चुनाव आयोग कहता है कि मशीनों में कोई गड़बड़ी नहीं है तो फिर ऐसा क्यों होता है कि जहां 907 वोट पड़ते हैं तो वहां 970 वोट कैसे हो जाते हैं और जहां 970 पड़ते हैं वहां 960 कैसे दिखते हैं। दीक्षित ने कहा, ‘इस रिपोर्ट में कई तरीके से विश्लेषण किया गया है। इसमें दिखाया गया है कि कौन कितने अंतर से जीता है और कहां कितना वोट प्रतिशत बढ़ा है। चुनाव आयोग से हमारा ये कहना है कि वे इस रिपोर्ट पर जवाब दें क्योंकि उन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि चुनाव आयोग इस रिपोर्ट पर संतोषजनक जवाब नहीं देता है तो यह गंभीर प्रश्न बनेगा। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="IC 814 The Kandahar Hijack: नेटफ्लिक्स की फिल्म आईसी 814 द कंधार हाइजैक का टीजर रिलीज" href="http://10.0.0.122:1245/ic-814-kandahar-hijack-teaser-released/">IC 814 The Kandahar Hijack: नेटफ्लिक्स की फिल्म आईसी 814 द कंधार हाइजैक का टीजर रिलीज</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Aug 2024 17:11:59 +0530</pubDate>
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                <title>महापौर पद के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली EVM के लिए नीला पेपर होगा इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। दिल्ली से सटे गाजियाबाद मैं नगर निकाय चुनाव में EVM और बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा। नगर निगम के सौ वार्डो व लोनी नगर पालिका का चुनाव ईवीएम से होगा लेकिन जिले की चार नगर पालिका व 4 नगर पंचायत का चुनाव बैलेट पेपर से होगा। चुनाव आयोग ने अध्यक्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/blue-paper-will-be-used-for-evm-used-for-the-post-of-mayor/article-46197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/untitled-7-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)।</strong> दिल्ली से सटे गाजियाबाद मैं नगर निकाय चुनाव में EVM और बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा। नगर निगम के सौ वार्डो व लोनी नगर पालिका का चुनाव ईवीएम से होगा लेकिन जिले की चार नगर पालिका व 4 नगर पंचायत का चुनाव बैलेट पेपर से होगा। चुनाव आयोग ने अध्यक्ष व सदस्य पद के लिए बैलेट पेपर के रंग निर्धारित कर दिए हैं। नगर पंचायत एवं नगर पालिका परिषद के सदस्य पद के लिए गुलाबी रंग के बैलेट से मतदान कराया जाएगा। नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सफेद रंग के बैलेट पेपर का इस्तेमाल होगा। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए हरे रंग के बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं नगर निगम के महापौर पद के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली EVM के लिए नीला पेपर इस्तेमाल किया जाएगा। मोदीनगर नगर पालिका के 34 वार्डो के लिए 46 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं वह 199मतदेय स्थल होंगे। जहां बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाएगा। इसी तरह मुरादनगर के 25 वार्डो के लिए 28 मतदान केन्द्र व 108 मतदेय स्थल होंगे।, खोडा नगर पालिका के 34 वार्डो के लिए 46 मतदान केन्द्र पर 177 मतदेय स्थल होंगे। निवाडी नगर पंचायत के 10 वार्डो के लिए 4 मतदान केन्द्र व 10 मतदेयस्थल, पतला नगर पंचायत के 10 वार्डो के लिए 3 मतदान केन्द्र व 10 मतदेय स्थल, फरीदनगर नगर पंचायत के 11 वार्ड के लिए 4 मतदान केन्द्र व 13 मतदेय स्थल और डासना नगर पंचायत के 15 वार्डो के लिए 9 मतदान केन्द्र व 36 मतदेय स्थल बनाए गए हैं जहां बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाएगा।</p>
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                <pubDate>Sun, 16 Apr 2023 12:09:36 +0530</pubDate>
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                <title>आरवीएम के परीक्षण से पूर्व ही क्या उचित है हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीतिक दल किस तरह ईवीएम पर निशाना साधने और अपनी विफलताओं का ठीकरा उस पर फोड़ने के लिए उतावले रहते हैं, इसका ताजा उदाहरण है बसपा प्रमुख मायावती की यह मांग की हर चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के स्थान पर मत पत्र से कराए जाएं। उन्होंने यह मांग एक ऐसे समय की, जब चुनाव आयोग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/political-party-target-on-evm/article-42511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/evm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राजनीतिक दल किस तरह ईवीएम पर निशाना साधने और अपनी विफलताओं का ठीकरा उस पर फोड़ने के लिए उतावले रहते हैं, इसका ताजा उदाहरण है बसपा प्रमुख मायावती की यह मांग की हर चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के स्थान पर मत पत्र से कराए जाएं। उन्होंने यह मांग एक ऐसे समय की, जब चुनाव आयोग ने रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (आरवीएम) से मतदान का परीक्षण कर लिया है। इसका उद्देश्य देश में अपने गृह जिलों से दूर रहने वाले मतदाताओं को वहीं से वोट करने की सुविधा देना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनाव आयोग की इस पहल का उद्देश्य अच्छा है। रिमोट ईवीएम के उपयोग की पहल चुनाव सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके माध्यम से प्रवासी भारतीय मतदाताओं को वोट देने में समर्थ बनाया जा सकेगा। इससे उन करोड़ों मतदाताओं की चुनाव में सहभागिता हो सकेगी, जो नौकरी, व्यापार, शिक्षा एवं अन्य कारणों से अपने घर से दूर रहने के कारण चाहकर भी मतदान में हिस्सा नहीं ले पाते। 2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में ऐसे वोटरों की संख्या 45.36 करोड़ है, जो अपने गृह जिलों से बाहर रहते हैं। देश की कुल आबादी के मुकाबले यह संख्या करीब 37 फीसदी है। 2019 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो उसमें 67.4 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि कम मतदान प्रतिशत का एकमात्र कारण इन मतदाताओं का वोटिंग से दूर रहना है, लेकिन यह एक बड़ा कारण जरूर है। हालांकि कांग्रेस सहित देश के अन्य विपक्षी दलों ने इस परीक्षण से पहले ही मीटिंग की और विरोध करने की रणनीति बनाई। उनका कहना है कि इस पहल से जुड़ी कई चीजें अभी साफ नहीं हैं। क्या यह हास्यास्पद नहीं कि रिमोट ईवीएम के परीक्षण और उसके प्रायोगिक उपयोग के परिणाम सामने आने के पहले ही उसका विरोध करने के लिए कमर कसी जा रही है? फिलहाल उन्होंने 25 जनवरी तक का समय दिया है, बीच के दिनों में इस पूरा मंथन करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आम तौर पर वही राजनीतिक दल ईवीएम को लेकर जनता को बरगलाने की कोशिश करते हैं, जो चुनाव में पराजित हो जाते हैं या फिर जिन्हें पराजय मिलने की आशंका होती है। बड़ी बात यह है कि किसी भी दल ने चुनाव आयोग की इस पहल के इरादों पर सवाल नहीं उठाया है। अत: सभी दल यह भी चाहते हैं कि सभी नागरिकों को अपने कामकाज के इलाकों में वोट डालने का अधिकार मिले, ऐसे में मायावती का आरवीएम परीक्षण से पहले ही हंगामा करना गलत है। यहां आवश्यकता है कि सभी दलों के मन में जो भी संदेह है, उसे भी दूर किया जाना चाहिए ताकि कोई भी नागरिक वोट के अधिकार से वंचित न रहे।</p>
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                <pubDate>Wed, 18 Jan 2023 09:48:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>केंद्रीय बलों की सुरक्षा में ईवीएम, बाहर पंजाब पुलिस का सख्त पहरा</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मीदवार के अलावा किसी को भी स्ट्रांग रूम में जाने की अनुमति नहीं | EVM 24 घंटे की हो रही वीडियोग्राफी, पार्टियों के वर्कर भी एक्टिव चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा के लिये गत 20 फरवरी को हुए चुनावों में 71.95 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और इसके बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/evm-under-the-protection-of-central-forces/article-31019"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/evm.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">उम्मीदवार के अलावा किसी को भी स्ट्रांग रूम<br />
में जाने की अनुमति नहीं | EVM</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>24 घंटे की हो रही वीडियोग्राफी, पार्टियों के वर्कर भी एक्टिव</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा के लिये गत 20 फरवरी को हुए चुनावों में 71.95 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोंिटग मशीनों <strong>(EVM)</strong> को त्रिस्तरीय सुरक्षा में स्ट्रांग रूम में रखा गया है। यह सुरक्षा व्यवस्था 24 घंटे रहेगी, स्ट्रांग रूम में उम्मीदवारों के अलावा किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है और वह भी केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में ही जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं और इनकी 24 घंटे की वीडियोग्राफी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की आशंका होने पर इसकी वीडियो चेक की जा सके। राज्य चुनाव कार्यालय से सोमवार देर रात जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 21499804 में से 15469618 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इनमें 8133930 पुरुष और 7335406 महिलाएं और 282 ट्रांसजेंडर और अन्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मतदान समाप्त होने के बाद सभी ईवीएम को केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्य पुलिस की तीन स्तरीय सुरक्षा निगरानी में 66 स्थानों पर स्ट्रांग रूम में रखा गया है। मतदान दौरान 65 बैलट यूनिट, 60 कंट्रोल यूनिट और 738 वीवीपीएटी बदली गईं। राज्य के मुख्यमंत्री चुनाव अधिकारी डा. एस. करूणा राजू ने चुनाव को सफलता और शांतिपूर्वक सम्मन्न कराने के लिये सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों, पुलिस और सशस्त्र बलों, आशा, आंगनवाड़ी और मिड-डे-मील वर्करों, गांव चौकीदारों तथा लोकतंत्र के इस महापर्व से संबद्ध लोगों का आभार व्यक्त किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी जिलों में प्रशासन द्वारा यहां पर इस तरह से सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है कि परिंदे का पर मारना भी मुश्किल है। इसकी लाइव वीडियो भी जिला प्रशासन के अधिकारी रेगूलर देख रहे हैं। सुरक्षा बलों में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, बार्डर सिक्योरिटी फोर्स के अलावा अन्य दलों के अफसरों को लगाया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">उम्मीदवार भी लगा रहे चक्कर, वर्करों का भी पहरा | EVM</h2>
<p style="text-align:justify;">हमेशा ही चुनाव के बाद ईवीएम पर सवाल उठते रहे हैं, आशंका रहती है कि प्रभावी उम्मीदवार ईवीएम मशीनों में वोटों का हेर फेर कर सकते हैं। इसी लिए उम्मीदवारों की तरफ से खुद यहां पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जा रहा है और उनके समर्थक भी यहां नजर रखे हुए हैं। इसके अलावा चुनाव आब्जर्वरों की तरफ से भी यहां पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ड्यूटी दौरान सिपाही की मौत | EVM</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विधानसभा चुनाव की डयूटी के लिए हरियाणा से आए आईटीबीपी के सिपाही की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। मृतक सिपाही की पहचान 55 वर्षीय राम नरेश निवासी पथरौली, झुंझनु, राजस्थान के रूप में हुई है। राम नरेश इंडियन तिब्बत बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) के रेवाड़ी, हरियाणा की 28 बटालियन में तैनात थे, जहां से उन्हें पटियाला में ड्यूटी के लिए भेजा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">राम नरेश की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां सोमवार देर शाम उसने दम तोड़ दिया। उनके साथी हवलदार जरनैल सिंह के बयान पर धारा 174 की कार्रवाई करते हुए थाना लाहौरी गेट पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। पोस्टमार्टम के बाद उनके साथी शव लेकर राजस्थान रवाना हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">थाना लाहौरी गेट के एएसआइ रघुबीर सिंह ने कहा कि राम नरेश की ड्यूटी पालीटेक्निक कालेज में बने स्ट्रांग रूम में लगी थी, जहां वह सोमवार सुबह तैनात थे। ड्यूटी देते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाया था।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 22:02:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव : तृणमूल कांग्रेस नेता के घर मिली ईवीएम, मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[पांच राज्यों में 232 सीटों पर मतदान जारी नई दिल्ली (एजेंसी)। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंगलवार सुबह तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुड्डुचेरी में मतदान शुरू हो गया है। तमिलनाडु में सुबह सात बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 232 सीटों पर मतदान शुरू हो गया। मतदान के शुरू होते ही भाजपा और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/assembly-election-evm-found-in-trinamool-congress-leaders-house/article-22694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/evm.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">पांच राज्यों में 232 सीटों पर मतदान जारी</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंगलवार सुबह तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुड्डुचेरी में मतदान शुरू हो गया है। तमिलनाडु में सुबह सात बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 232 सीटों पर मतदान शुरू हो गया। मतदान के शुरू होते ही भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया। तृणमूल कांग्रेस ने पोलिंग बूथ पर वोटरों को परेशान करने का आरोप लगाया है, तो भाजपा नेता का आरोप है कि एक ईवीएम टीएमसी नेता के घर के बाहर मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल उलूबेरिया उत्तर से भाजपा प्रत्याशी चिरन बेरा ने आरोप लगाया कि मतदान से पहले की रात तृणमूल कांग्रेस नेता गौतम घोष के घर से ईवीएम और वीवीपैट की मशीनें मिली हैं। भाजपा नेता ने तृणमूल पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस नेता के घर के पास ईवीएम मिलने के बाद चुनाव आयोग ने एक्शन लिया है। यहां एक सेक्टर आॅफिसर को सस्पेंड किया गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि ये एक रिजर्व ईवीएम था, जिसका वोटिंग में इस्तेमाल नहीं हो रहा था। चुनाव आयोग का कहना है कि सेक्टर आॅफिसर तपन सरकार ईवीएम के साथ अपने रिश्तेदार के घर सोने गए थे, जो नियमों का उल्लंघन है।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिलनाडु में सुबह सात बजे शुरू हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता रजनीकांत, अभिनेता अजित, राजनीतिज्ञ और मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) संस्थापक कमल हासन, उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम, विपक्षी द्रमुक के अध्यक्ष एम के स्टालिन और तेलंगाना, पुड्डुचेरी की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने सहित अन्य नेताओं ने मतदान किया। कांग्रेस नेता पी. चिंदबरम ने कंदनूर विधानसभा में मतदान किया। तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है जबकि प्रमुख विपक्षी द्रमुक के साथ मिलकर कांग्रेस चुनाव में है। क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहीं राष्ट्रीय पार्टियों के लिए इस राज्य का चुनाव भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">केरल में सुबह मतदान केन्द्रों पर लोग अपनी पारी का इंतजार करते देखे गए। यहां 27 लाख मतदाता हैं। यहां की 140 सीटों पर सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच कड़ा मुकाबला है। पुड्डुचेरी के 30 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 324 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं तथा वहां भी भाजपा नीत मोर्चा का कांग्रेस नीत गठबंधन से मुकाबला है। असम में 126 विधानसभा सीटें हैं। पिछले चुनाव में भाजपा 89 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 60 सीटें जीती थीं। असम गण परिषद ने 30 सीटों पर चुनाव लड़कर 14 सीटें और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट ने 13 सीटों पर चुनाव लड़कर 12 जीती थीं। कांग्रेस ने 122 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सिर्फ 26 सीटों पर कब्जा किया था। यहां बहुमत के लिए 64 सीटें चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पुड्डुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहां विधानसभा की कुल 30 सीटें हैं। कुछ दिन पहले ही यहां वी नारायणसामी नीत कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन की सरकार गिर गई थी। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 21 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 15 सीटें जीती थीं। आॅल इंडिया एन आर कांग्रेस ने 30 सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ आठ सीटें जीती थीं। निर्दलीय एवं अन्य के खातों में सात सीटें गई। यहां बहुमत के लिए 16 सीटें चाहिए। केरल में विधानसभा की 140 सीटें हैं। वर्तमान में यहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता पिनारायी विजयन के नेतृत्व वाले वाम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है। पिछले चुनाव में एलडीएफ को 91 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 47 सीटें मिली थीं। यहां बहुमत के लिए 71 सीटें चाहिए। चारों राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में एक साथ दो मई को वोटों की गिनती होगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Apr 2021 10:27:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आप के कार्यकर्ता ने स्ट्रांग रूम में घुसकर ईवीएम के साथ वीडियो बनाकर फेसबुक पर डाली</title>
                                    <description><![CDATA[युवक की गिरफ्तारी के बाद आप के प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद पानीपत के सिटी थाने में पहुंचे
 उनका कहना था कि कार्यकर्ता ने अधिकारियों से ईवीएम को लेकर शिकायत की थी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/aap-worker-entered-the-strong-room-and-made-a-video-with-evm-and-put-it-on-facebook/article-10839"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/evm.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आर्य कॉलेज के स्पोर्टस कॉम्पलेक्स में बने स्ट्रांग रूम में रखी हैं ईवीएम (EVM)</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत</strong>। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता ने पानीपत के आर्य कॉलेज के स्पोर्टस (EVM) कॉम्पलेक्स में रखी ईवीएम के साथ वीडियो बनाकर फेसबुक पर वायरल कर दी। वीडियो वायरल होने के बाद इसराना विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी ने एसपी को शिकायत दी है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। युवक की गिरफ्तारी के बाद आप के प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद पानीपत के सिटी थाने में पहुंचे। उनका कहना था कि कार्यकर्ता ने अधिकारियों से ईवीएम को लेकर शिकायत की थी, उन्होंने समाधान नहीं किया तो वीडियो बना लिया। इसके बाद उस पर मामला दर्ज करवा दिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये शिकायत दी है रिटर्निंग अधिकारी है</h3>
<p style="text-align:justify;">इसराना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी एवं जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजबीर सिंह ने एसपी को शिकायत दी कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए इसराना विधानसभा क्षेत्र का कंट्रोल रूम ईवीएम स्टांग रूम आर्य कॉलेज के स्पोट्स कॉम्पलेक्स में स्थापित किया गया है। जहां पर चुनाव में प्रयोग की जाने वाली ईवीएम मशीनों को तैयार किया जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">16 अक्टूबर को ईवीएम मशीनों तैयार हो रही थी</li>
<li style="text-align:justify;">तभी अनिल पांडे अवैध तरीके से स्ट्रांग रुम मे घुस आया</li>
<li style="text-align:justify;">और ईवीएम मशीनों की वीडियो रिकॉर्डिंग बनाकर फेसबुक पर डालते हुए पकड़ा गया।</li>
<li style="text-align:justify;">पकड़े जाने पर अनिल पांडे ने खुद को आम आदमी पार्टी का एजेंट बताया,</li>
<li style="text-align:justify;">जबकि रिकॉर्ड अनुसार पार्टी के प्रत्याशी ने अमित कांत को अपना चुनाव एजेंट नियुक्त किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">स्ट्रांग रूम की गार्द ने आरोपी को पकड़कर गार्द रूम में बैठाकर रखा।</li>
<li style="text-align:justify;">इस शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 188, 353, 447 के तहत केस दर्ज करके आरोपी को हिरासत में ले लिया।</li>
</ul>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2019 20:28:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ईवीएम की ट्रैकिंग होगी, चुनाव आयोग स्क्रीन पर देख सकेगा मशीन की लोकेशन</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट पर सवाल उठने के बाद चुनाव आयोग ने इसकी ट्रैकिंग योजना पर काम शुरू किया  नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों के चुनाव के दौरान ईवीएम (Tracking EVM) के ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट पर सवाल उठने के बाद चुनाव आयोग ने इसकी ट्रैकिंग योजना पर काम शुरू किया है। योजना अमल में आई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/tracking-evm/article-7030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/evm-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट पर सवाल उठने के बाद चुनाव आयोग ने इसकी ट्रैकिंग योजना पर काम शुरू किया</h2>
<p style="text-align:justify;"> <strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों के चुनाव के दौरान ईवीएम <strong>(Tracking EVM)</strong> के ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट पर सवाल उठने के बाद चुनाव आयोग ने इसकी ट्रैकिंग योजना पर काम शुरू किया है। योजना अमल में आई तो राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग किसी भी मशीन की लोकेशन अपनी स्क्रीन पर देख सकेंगे। आयोग ने ट्रैकिंग सिस्टम सुझाने का जिम्मा अपने अंदरूनी तकनीकी ग्रुप को सौंपा है। यह तीन सप्ताह में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को रिपोर्ट सौंपेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक तकनीकी ग्रुप दो विकल्पों पर काम कर रहा है। पहला- क्या 2019 के चुनाव में इस्तेमाल होने वाली हर ईवीएम पर ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाए। दूसरा- इन्हें ले जाने वाले वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगे। वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगाना आसान और कम खर्चीला होगा।आम चुनाव में इस्तेमाल होने वाली नई मशीनों में से करीब 90% आयोग को मिल चुकी हैं। ऐसे में मशीनों पर ट्रैकिंग प्रणाली लगवाना व्यावहारिक नहीं है। तकनीकी ग्रुप की सिफारिश मिलते ही आयोग अगले एक माह में जरूरी निर्देश जारी करेगा। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता के होटल से ईवीएम मिलने, रिजर्व ईवीएम वोटिंग के तीन दिन बाद वापस किए जाने, एक महिला अधिकारी द्वारा मशीन लेकर गायब होने की घटनाएं सामने आई थीं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Dec 2018 09:05:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गड़बड़ी ईवीएम में या राजनीतिक दलों की सोच में ?</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद ईवीएम के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और ईवीएम के जरिये धांधली के प्रयासों का मामला गर्मा गया है। कांग्रेस पार्टी द्वारा मतदान के बाद ईवीएम वाले स्ट्रांग रूम के आसपास सीसीटीवी की मरम्मत के बहाने लैपटॉप और मोबाइल फोन के साथ संदिग्धों को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/think-of-the-disturbances-in-evm-or-political-parties/article-6837"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/evm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद ईवीएम के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और ईवीएम के जरिये धांधली के प्रयासों का मामला गर्मा गया है। कांग्रेस पार्टी द्वारा मतदान के बाद ईवीएम वाले स्ट्रांग रूम के आसपास सीसीटीवी की मरम्मत के बहाने लैपटॉप और मोबाइल फोन के साथ संदिग्धों को देखे जाने और ईवीएम से छेड़छाड़ की गंभीर साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं और यह भी कहा गया है कि कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें अधिकारी पिछले दरवाजे से स्ट्रांग रूम के अंदर जाते देखे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश में सागर तथा अनूपपुर में मतदान के दो-तीन बाद ईवीएम स्ट्रांग रूम में पहुंचने और भोपाल के स्ट्रांग रूम में तीन घंटे तक बिजली गुल रहने तथा उस दौरान सीसीटीवी काम न करने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। अगर ये सभी आरोप सही हैं तो निश्चित रूप से यह बेहद गंभीर मामला है। हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कांताराव द्वारा कहा गया है कि राज्य के स्ट्रांगरूम की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह पुख्ता है और स्ट्रांगरूम को सभी की उपस्थिति में सील किया गया है, सुरक्षा बलों की तैनाती है, इसलिए किसी तरह की आशंका नहीं होनी चाहिए। ईवीएम से छेड़छाड़ को लेकर उठ रहे आरोप नए नहीं हैं बल्कि अरसे से विपक्षी दल सदैव ईवीएम के विरोध में सुर बुलंद करते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा चुनावों तथा अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में ईवीएम के बजाय मतपत्रों के इस्तेमाल को लेकर 17 राजनीतिक दलों के प्रस्ताव को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए गत दिनों अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया कि ऐसी धारणा गलत है कि ईवीम के बजाय मतपत्रों के जरिये चुनाव ज्यादा विश्वसनीय है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने स्पष्ट किया कि हर मशीन के ठीक या गलत होने की संभावना रहती है और यह उपयोग करने वालों पर निर्भर करता है कि वे उसका कैसे इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत की इस टिप्पणी के बाद ईवीएम के सही इस्तेमाल की जिम्मेदारी और जवाबदेही अब चुनाव आयोग तथा संबंधित अधिकारियों की ही है। इससे पहले तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग को खारिज करते हुए कह चुके थे कि निष्पक्ष तथा पारदर्शी चुनावों के लिए देश में अत्याधुनिक वीवीपैट तथा ईवीएम मशीनों से ही मतदान कराया जाएगा। इसी वर्ष 27 अगस्त को निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव सुधार के मद्देनजर बुलाई गई मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की बैठक में सभी राष्ट्रीय व 51 राज्यस्तरीय राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया था और बैठक में आयोग द्वारा ईवीएम तथा वीवीपैट से जुड़ी समस्याओं का संज्ञान लेकर शंकाओं के संतोषजनक समाधान का आश्वासन देते हुए सकारात्मक संकेत दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही उसके बाद भी कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल ईवीएम के विरोध का राग अलापते रहे हैं किन्तु आयोग के इस तर्क को अब सुप्रीम कोर्ट ने भी पुख्ता कर दिया है कि कुछ दलों के विरोध के चलते मतपत्रों पर वापस लौटना सही नहीं होगा। दरअसल आयोग नहीं चाहता कि बूथ कैप्चरिंग का दौर वापस आए। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त रावत कह चुके हैं कि आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और लोगों को खुली चुनौती दी थी कि वे ईवीएम हैक करके दिखाएं किन्तु कोई आगे नहीं आया। उनका कहना है कि जो हारता है, वह किसी को तो जिम्मेदार ठहराता ही है, इसी तर्ज पर खेल में हारने पर रैफरी को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है और चुनाव में हारने पर ईवीएम को।</p>
<p style="text-align:justify;">2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की धमाकेदार जीत हो या कुछ अन्य राज्यों के चुनावों में पार्टी की सरकार बनने का मामला, हर मौके पर ईवीएम पर संशय की उंगलियां उठाई गई लेकिन यही आवाजें उस वक्त खामोश रही, जब इन्हीं ईवीएम की बदौलत कुछ उपचुनावों में विपक्षी दलों ने प्रचण्ड जीत हासिल की। जब अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीत लीं तो ईवीएम अच्छी थी लेकिन जैसे ही पंजाब व गोवा में बुरी तरह शिकस्त हुई और दिल्ली एमसीडी व विधानसभा उपचुनाव में उनके प्रत्याशी हारे तो उनको लगने लगा कि इससे छेड़छाड़ की गई है। जब उनको न्यौता दिया गया कि वे आएं और इसमें छेड़छाड़ को साबित करें तो वे ऐसा नहीं कर पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग पर हो भरोसा: हालांकि कुछ अवसर ऐसे आए हैं, जब ईवीएम के पूरी तरह सुरक्षित होने के दावों पर सवालिया निशान लगे थे लेकिन अब चुनाव आयोग द्वारा दिए जा रहे इस भरोसे पर तो यकीन करना ही चाहिए कि ईवीएम को इस तरह बनाया गया है कि उसमें गड़बड़ी नहीं हो सकती और अब आयोग ऐसी मशीनें भी तैयार करा रहा है, जो छेड़छाड़ होते ही स्वत: बंद हो जाएंगी, साथ ही वीवीपैट के जरिये मतदाता को उसके मत की जानकारी देने वाली पर्ची मुद्रित करने की भी व्यवस्था की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग द्वारा यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि ईवीएम के फेल होने का प्रतिशत मात्र 0.6 फीसदी ही है। ऐसे में हम इस तथ्य को भी कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं कि चुनाव आयोग विभिन्न अवसरों पर तमाम राजनीतिक दलों के साथ-साथ अन्य लोगों को भी ईवीएम हैक करने की चुनौती दे चुका है और आश्चर्य की बात है कि ईवीएम पर सवाल उठाने वाला कोई भी दल या कोई भी व्यक्ति इस चुनौती को स्वीकार करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सका। ऐसे में ईवीएम की साख पर इस प्रकार के सवाल बार-बार उठाए जाने का आखिर क्या औचित्य है?</p>
<p style="text-align:right;"><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Dec 2018 08:53:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डूसू में जाली ईवीएम मशीन का इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन चुनाव की मतगणना में दिल्ली राज्य चुनाव आयोग की अधिकृत ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया। मतगणना में जिन मशीनों का प्रयोग किया गया वह किसी निजी कंपनी से कालेज प्रशासन द्वारा मंगाई गईं थी। यह खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस की ओर से राज्य चुनाव आयोग को गड़बड़ी के संबंध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/use-of-forged-evm-machine-in-dosu/article-6015"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/use-of-forged-evm-machine-in-dosu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन चुनाव की मतगणना में दिल्ली राज्य चुनाव आयोग की अधिकृत ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया। मतगणना में जिन मशीनों का प्रयोग किया गया वह किसी निजी कंपनी से कालेज प्रशासन द्वारा मंगाई गईं थी। यह खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस की ओर से राज्य चुनाव आयोग को गड़बड़ी के संबंध में लिखित शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने तत्काल खंडन किया। आयोग ने कह दिया कि डूसू चुनाव से उनका कोई हस्पक्षेप नहीं। साथ ही चुनाव में जिन मशीनों का इस्तेमाल हुआ उनसे आयोग का कोई लेना देना नहीं। उन्होंने न अपनी मशीनें भेजी और न ही उनका परिवेक्षक दल वहां गया। आयोग के इस खुलासे के बाद प्रायोजित फजीर्वाड़े की खबर आग की तरह फैल गई। दरअसल इतने बड़े फजीर्वाड़े की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। चुनाव आयोग के नाम से भी भला कोई जालसाजी कर सकता है, तो किसी से क्या कोई उम्मीद करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
अपनी पूर्णरूपी सत्यता को लेकर चुनाव आयोग की अलग पहचान है। चुनाव आयोग पर लोगों का आज भी अटूट विश्वास है। लेकिन उनके नाम से भी अब हूबहू फजीवाड़ा होने लगा। जालसाजी का पता तब चला जब डूसू चुनाव में महत्वपूर्ण पदों पर पहले कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई के उम्मीदवार आगे चल रहे थे। लेकिन उसके बाद मतगणना रोक दी गई। इस पर जीतने वाले उम्मीदवारों को कुछ शक हुआ। तभी एक घंटे बाद दोबारा मतगणना शुरू हुई तो स्थिति पूरी तरह से बदल गई। आगे चलने वाले उम्मीदवार पीछे हो गए। भाजपा समर्पित छात्र संगठन एबीवीपी के उम्मीदवारों ने बढ़त बना ली। ये देख एनएसयूआई उम्मीदवारों ने जमकर हंगामा करना शुरू कर दिया। भारी हंगामे को देख मतगणना फिर से रोक दी गई। चार-पांच घंटे तक बवाल होता रहा।<br />
दिल्ली विश्वविधालय छात्र संगठन का परिणाम वैसे शाम पांच बजे तक घोषित होना था। पर, गड़बड़ी के आरोप के चलते नही हो सका। रात आठ बजे फिर से गिनती शुरू हुई, करीब डेढ़ घंटे बाद रिजल्ट घोषित कर दिया गया। परिणाम वही आया जिसकी सबने उम्मीद की थी, रिजल्ट एबीवीपी के पक्ष में दशार्या गया। विरोध में एनएसयूआई के छात्र कुर्सियां हवा में उछालने लगे। तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस ने मोर्चा संभाल कर किसी तरह माहौल को शांत किया। लेकिन इतनी देर में फजीर्वाड़े की खबर डूसू दीवारों के बाहर भी आ गईं। चैनलों की पहली हेडलाइन बन गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">
सुबह होते ही मामले की तस्वीर साफ करते हुए चुनाव आयोग ने सच्चाई से पर्दा हटा दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि डूसू चुनाव में जिन वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल हुआ है उनकी आपूर्ति राज्य चुनाव आयोग ने नहीं बल्कि निजी कंपनी इलेक्ट्रोनिक कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) द्वारा की गई थी। अपनी जान बचाने के लिए आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन (डूसू) चुनाव में मतगणना के दौरान ईवीएम ने जो किरकिरी कराई उसे आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस बाबत ईवीएम बनाने वाली कंपनियों आनन-फानन में चिट्ठी लिखकर पूरे मामले पर सफाई मांगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रोनिक कारपोरेशन आॅफ इंडिया को सख्त निर्देश भी दिए हैं। आयोग के अंडर सेक्रेटरी के दफ्तर से भेजी गई चिट्ठी में आयोग ने दोनों निमार्ता कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोग के लिए बनाई जाने वाली मशीनों के मॉडल, रंग और अन्य डिजायन बिल्कुल अलग होने चाहिए। उनकी मशीनों से मेल नहीं खाना चाहिए। खैर, इस घटना ने छात्र संगठनों के चुनावों पर सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे चुनावों की जरूरतों को लोग नकारने लगे। दिल्ली विश्वविधालय की घटना के बाद समाज में आवाज उठने लगी है कि स्कूल-कालेज तालीम ग्रहण करने की जहग ही रहें, राजनीति का अखाड़ा न बनें। कम उम्र में बच्चे अगर फजीवाड़ा करने लगेंगे तो उनका भविष्य किस दिशा में जाएगा, इसकी तस्वीर डूसू चुनाव की कलाकारी ने पेश कर दी है। डूसू प्रशासन ने अपनी मनमर्जी से चुनाव कराया, खुद मशीनें खरीदी और मनचाहे उम्मीदवारों को विजय बनाया। सवाल उठता है डूसू प्रशासन को यह सब करने की क्या जरूरत पड़ी। ऐसा करने के लिए क्या उन्हें किसी ने निर्देश दिए थे? कौन हैं इस पूरे खेल के पीछे? डूसू घटना के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर एक सवाल उठ रहा है। विशेषकर चुनाव आयोग को अपनी विश्वसनीयता बचाने के लिए ईवीएम मशीनों को किसी और को बेचने के लिए निर्माण करने वाली कंपनियों को प्रतिबंधित करना चाहिए। ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे कंपनियां आयोग के अलावा किसी को ईवीएम मशीनें न बेचें। <strong>रमेश ठाकुर</strong></p>
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                <pubDate>Fri, 21 Sep 2018 13:02:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>तूल पकड़ता जा रहा ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ नई दिल्ली (सच कहूँ)। दिल्ली यूनिवसिर्टी छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की इन ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में भी होता रहा है। वहीं बार एसोसिएशन के एक चुनाव को इन मशीनों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/corrupt-evm-used-in-dusu-election-has-already-cancelled-election-of-bar-association/article-5936"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/evm-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> नई दिल्ली (सच कहूँ)। </strong>दिल्ली यूनिवसिर्टी छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की इन ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में भी होता रहा है। वहीं बार एसोसिएशन के एक चुनाव को इन मशीनों के चलते निरस्त भी किया गया था। हाल ही में पटियाला हाउस की नई दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में इन मशीनों का इस्तेमाल हुआ था।</p>
<h2>डीयू से किराए पर ली जाती हैं ईवीएम</h2>
<p>दिल्ली बार काउंसिल में पूर्व सचिव रह चुके राजेश मिश्रा के मुताबिक दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में इन मशीनों का लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। उन्होंने बताया कि तकरीबन 8-9 साल पहले उन्होंने ही पहली बार दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल की प्रथा शुरू की थी। मिश्रा के मुताबिक आमतौर पर बार एसोसिएशन के चुनावों में दिल्ली यूनिवसिर्टी से ही ईवीएम किराए पर ली जाती थीं। बार एसोसिएशन में तकरीबन 20 ईवीएम इस्तेमाल होती हैं। मिश्रा ने बताया कि हाल ही में 31 अगस्त को पटियाला हाउस की नई दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में इन्हीं ईवीएम का इस्तेमाल हुआ था। वहीं दिल्ली बार काउंसिल के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाते हैं।</p>
<h2>तीस हजारी बार एसोसिएशन का चुनाव हो चुका है निरस्त</h2>
<p>वहीं हाल में नई दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ चुके हरीश शर्मा के मुताबिक इस बार ईवीएम के 21 मशीनें इस्तेमाल हुई थीं। इन ईवीएम को डीयू से मंगवाया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि डीयू को ढाई लाख रुपए किराया दिया गया था। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि पांच-छह साल पहले तीस हजारी बार एसोसिएशन के चुनावों में इन ईवीएम का प्रयोग हुआ था और जिस पर काफी बवाल हुआ था। उन्होंने बताया कि तीस हजारी रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी के यहां चली इंक्वॉयरी में मशीन ऑपरेटर ने बयान दिया था कि इन मशीनों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। हालांकि दो साल की सुनवाई के बाद इन चुनावों को अमान्य करार दे दिया गया था।</p>
<h2>चुनाव आयोग ने किया था इंकार</h2>
<p>इससे पहले गुरुवार को मुख्य चुनाव आयोग ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि छात्र संघ चुनावों के लिए चुनाव आयोग ने दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन को कोई मशीनें नहीं दी हैं। आयोग का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को कोई मशीनें उपलब्ध नहीं कराई हैं। आयोग के सूत्रों ने बताया था कि जहां भी चुनाव आयोग की मशीनें इस्तेमाल होती हैं, उससे पहले इनके प्रयोग की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है, साथ ही इनके रखरखाव को लेकर जरूरी प्रोटोकॉल को भी फॉलो किया जाता है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक देश में केवल दो ही कंपनियां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ही ईवीएम मशीनों का निर्माण करती हैं।</p>
<h2>एनएसयूआई ने उठाया था मामला</h2>
<p>गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को चुनाव हुए थे। चुनाव के नतीजे अगले दिन जारी किए गए थे। मतगणना के दौरान छात्र संगठन एनएसयूआई ने ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी का आरोप लगा कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी। एनएसयूआई का आरोप था कि एक ईवीएम में 10वें नंबर के बटन पर चालीस वोट पड़े हैं। जबकि नोटा को मिलाकर कुल 9 ही उम्मीदवार थे। ऐसे में 10वें नंबर का बटन काम नहीं करना चाहिए था।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Sep 2018 08:17:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईवीएम की निगरानी का मामला: चुनाव आयोग रुख स्पष्ट करे : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का रखरखाव निजी कंपनियों के इंजीनियरों द्वारा कराए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को निर्वाचन आयोग को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। न्यायालय ने हालांकि इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है। न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/evm-monitoring-case/article-5706"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/evm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन <strong>(EVM)</strong> का रखरखाव निजी कंपनियों के इंजीनियरों द्वारा कराए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को निर्वाचन आयोग को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।</p>
<p>न्यायालय ने हालांकि इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है। न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने पत्रकार आशीष गोयल की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग से रुख स्पष्ट करने को कहा।</p>
<p>याचिककर्ता ने इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिये जाने की मांग की है। याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ता को याचिका की एक प्रति आयोग के वकील को उपलब्ध कराने को कहा।</p>
<h2>सरकारी अधिकारियों को ही इसके रखने (EVM) की हो इजाजत</h2>
<p>मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ईवीएम के रख रखाव में चुनाव आयोग निजी कंपनियों के इंजीनियरों का इस्तेमाल करता है, जिस पर रोक लगाई जानी चाहिए और सिर्फ सरकारी अधिकारियों को ही इसके रखरखाव की इजाजत दी जानी चाहिए।</p>
<p>वहीं अब तक जितने ईवीएम का निर्माण हुआ है, उनकी संख्या चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में बताई गई संख्या से कहीं ज्यादा है।</p>
<p>याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग से यह पूछा जाना चाहिए कि इतनी बड़ी संख्या में ईवीएम कहां चले गये।</p>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Sep 2018 16:14:23 +0530</pubDate>
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                <title>ईवीएम की खराबी बनाम दलों की मानसिकता</title>
                                    <description><![CDATA[देश में एक बार फिर से विद्युतीय मतदान यंत्र यानी ईवीएम के विरोध में स्वर मुखरित होते हुए दिखाई दे रहे हैं। देश के सत्रह राजनीतिक दलों के नेता ईवीएम के बारे में गड़बड़ी होने का आरोप लगा रहे हैं। वर्तमान राजनीति की वास्तविकता यही है कि जो भी राजनीतिक दल चुनाव में पराजय का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/evm-malfunction-vs-mentality-of-parties/article-5169"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/evm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में एक बार फिर से विद्युतीय मतदान यंत्र यानी ईवीएम के विरोध में स्वर मुखरित होते हुए दिखाई दे रहे हैं। देश के सत्रह राजनीतिक दलों के नेता ईवीएम के बारे में गड़बड़ी होने का आरोप लगा रहे हैं। वर्तमान राजनीति की वास्तविकता यही है कि जो भी राजनीतिक दल चुनाव में पराजय का सामना करता है, वह अपनी हार को स्वीकार न करते हुए कोई न कोई बहाने की तलाश करता है। वह ऐसा प्रमाणित करने का प्रयास करते हैं कि उनकी पराजय में ईवीएम का ही हाथ है। अगर ऐसा होता तो स्वाभाविक रुप से पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से पराजित होकर सत्ता से बाहर नहीं होती, क्योंकि वह भी ईवीएम में गड़बडी कर सकती थी। वास्तविकता यही है कि राजनीतिक दल अपनी हार को छुपाने के लिए ही इस प्रकार के आरोप लगाने की राजनीति कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में ईवीएम को हटाकर जिस प्रकार से मत पत्रों से चुनाव कराने की कवायद की जा रही है, वह निश्चित रुप से मतदान की प्रक्रिया को बहुत धीमा करने वाला प्रयास ही कहा जाएगा। देश में जब बैलेट पेपर से चुनाव की प्रक्रिया होती थी, तब अनेक स्थानों से ऐसी खबरें भी आती थीं कि अमुक राजनीतिक दल के गुंडों ने मतदान केन्द्र पर कब्जा करके पूरे मत पत्रों पर अपनी पार्टी की मुहर लगाकर मतदान कर दिया। मत पत्रों के आधार पर किए जाने वाले चुनाव लोकतंत्र पर आधारित न होकर बाहुबल के आधार पर ही किए जाते हैं। मात्र इसी कारण ही कई क्षेत्रों से बाहुबली चुनकर भी आ जाते हैं। ईवीएम से मतदान होना निसंदेह समस्त चुनावी गड़बड़ियों पर रोक लगाने का काम करता है। क्योंकि प्रत्येक मतदान पर बीप की ध्वनि निकलने के पश्चात ही मत डाला जाता है, जिससे एक व्यक्ति किसी भी हालत में कई मत नहीं डाल सकता। इसलिए यह आसानी से कहा जा सकता है कि ईवीएम के बजाय मत पत्रों के आधार पर चुनाव कराए जाने की मांग लोकतंत्र को प्रभावित करने वाली ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">विगत लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद देश की जो राजनीतिक तसवीर बनी उससे कई राजनीतिक दलों के पैरों तले जमीन ही खिसक गई। कांग्रेस, सपा व बसपा का व्यापक जनाधार पूरी तरह से खिसक गया था। इसके बाद इन दलों के साथ ही आम आदमी पार्टी ने ईवीएम को लेकर ऐसा हंगामा किया कि जैसे यह परिणाम ईवीएम का कमाल है। इस समय ज्यादा विरोध होने के बाद चुनाव आयोग ने भी इन राजनीतिक दलों के बयानों को एक चुनौती के रुप में स्वीकार किया। चुनाव आयोग ने दिनांक तय करके कहा कि ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित हैं, किसी में दम हो तो ईवीएम को हैक करके दिखाए। इसके बाद इन सभी राजनीतिक दलों की बोलती बंद हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ईवीएम हैक करने के लिए कोई भी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसका मतलब साफ था कि ईवीएम को लेकर जो हंगामा किया गया था, वह पूरी तरह से देश की जनता को गुमराह करने के लिए खेला गया ऐ नाटक ही था। जो दल चुनाव आयोग के बुलाने पर पहुंचे थे, उनके द्वारा कहा गया कि ईवीएम तो सही है, हम केवल ईवीएम का प्रदर्शन देखने आए थे। आज जो राजनीतिक दल ईवीएम पर सवाल उठाकर मत पत्रों से चुनाव कराने की बात कह रहे हैं, उन्होंने भी उस समय कुछ नहीं बोला, जब चुनाव आयोग ने बुलाया था। दिल्ली राज्य की सत्ता संभालने वाली आम आदमी पार्टी ने भी ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर खूब हंगामा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने तो ताल ठोकने वाले अंदाज में कहा था कि हम ईवीएम को हैक करके दिखाएंगे, इतना ही नहीं आप के विधायक सौरभ भारद्वाज ने यह प्रदर्शित करने का प्रयास किया था कि ईवीएम को हैक कैसे किया जा सकता है, लेकिन बाद में उनकी भी हैकड़ी निकलती हुई दिखाई दी। वह भी इतना पीछे हट गए कि बाद में स्वर ही नहीं निकले।दिल्ली राज्य में व्यापक सफलता प्राप्त करने वाली आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को उस समय ईवीएम में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं दिखाई दी, जब दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को छप्पर फाड़ समर्थन दिया था। उसे वह जनता की जीत बताते हुए नहीं थक रहे थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि लोकसभा के चुनावों में ईवीएम खराब हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तविकता यही है कि ईवीएम में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है और हो भी नहीं सकती, क्योंकि अगर गड़बड़ी होती तो आज प्रत्येक राजनीतिक दल के पास आईटी विशेषज्ञ हैं, जो कंप्यूटरी कृत मशीनों को हैक करना भी जानते हैं। उनके ये विशेषज्ञ ईवीएम को भी हैक करके दिखा सकते थे, लेकिन चूंकि ईवीएम में कोई गड़बड़ी थी ही नहीं तो फिर हैक कैसे की जा सकती थी।आज जिस प्रकार से मत पत्रों के आधार पर चुनाव कराए जाने की बात हो रही है, वह पराजित मानसिक अवस्था का ही प्रदर्शन माना जा रहा है। लोकसभा और विधानसभा में हारे हुए राजनीतिक दलों को मत पत्रों से चुनाव कराए जाने की मांग के बजाय उन बातों पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है, जिनके कारण वे पराजित हुए हैं। कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक स्थिति उसकी स्वयं की देन है, क्योंकि उसके शासनकाल में जिस प्रकार प्रतिदिन भ्रष्टाचार करने की खबरें आ रही थीं, उसके कारण देश की जनता व्यापक परिवर्तन करने का मन बना चुकी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा कांग्रेस ने देश में तुष्टिकरण का भी खेल खेला। लेकिन इसका लाभ भी कांग्रेस को नहीं मिल सका, क्योंकि देश में कई राजनीतिक दल आज भी खुलेआम तुष्टिकरण की भाषा बोलने में सिद्ध हस्त हो चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता ने समझदारी दिखाई, और उसी के हिसाब से परिणाम सामने आए। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती की पार्टी लोकसभा में खाता भी नहीं खोल पाई थी, इसका मलाल उनकी बातों में दिखाई देता है। उत्तरप्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के बाद बसपा की जो राजनीतिक स्थिति बनी, उसने बसपा के जनाधार को जमीन सुंघाने का काम किया। लेकिन बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी हार ठीकरा ईवीएम पर फोड़ दिया। इसी प्रकार 2014 में उत्तरप्रदेश में कांग्रेस और सपा केवल एक परिवार की पार्टी बनकर ही रह गई।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के विरोधी राजनीतिक दलों द्वारा सुनियोजित तरीके से मत पत्रों के आधार पर चुनाव कराए जाने की मांग की जा रही है। लोकसभा चुनाव के चार साल बाद भी वे देश की जनता का विचार नहीं जान पाएं हैं। जितना वे ईवीएम के लिए चिल्ला रहे हैं, उतना अपनी कार्यशैली में सुधार करने की कार्यवाही करते तो संभवत: जनता के मन में स्थान बना पाने में समर्थ होते। हार की समीक्षा की जानी चाहिए थी, लेकिन हमारे देश के राजनीतिक दलों ने समीक्षा न करके बहाने तलाशने प्रारंभ कर दिए। ईवीएम में गड़बड़ी का बहाना भी ऐसा ही है। जबकि सच यह है कि मत पत्रों के आधार पर होने वाले चुनावों में गड़बड़ी की संभावना अधिक रहती है, जिसे जनता भी जानती है और राजनीतिक दल भी जानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईवीएम पर संदेह व्यक्त करने वाले राजनीतिक दलों का भ्रम दूर हो सके, इसके लिए चुनाव आयोग ने अब मतदान के बाद ऐसी पर्ची प्राप्त करने की सुविधा भी जोड़ दी है, जिसके आधार पर पता चल सके कि उसने किस पार्टी को मत दिया है। इसके बाद राजनीतिक दलों को संदेह समाप्त हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि इन राजनीतिक दलों द्वारा मत पत्र से चुनाव कराए जाने के पीछे कुछ और ही मंशा है। यह भी हो सकता है कि इसके माध्यम से मतदान केन्द्रों पर कब्जा करने जैसी कार्यवाही को अंजाम दिया जा सके। मतदाताओं को डरा, धमकाकर भगा दिया जाए और बाहुबल के सहारे एक राजनीतिक पार्टी के पक्ष में मतदान कराया जा सके। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि ईवीएम में खराबी नहीं है, खराबी तो राजनीतिक दलों की मानसिकता में है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 10:24:33 +0530</pubDate>
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