<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/political-violence/tag-4982" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Political Violence - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/4982/rss</link>
                <description>Political Violence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजनीतिक हिंसा रोकी जाए</title>
                                    <description><![CDATA[बीते दिनों पश्चिमी बंगाल में हुई दिल दहला देने वाली हिंसा में दस लोगों की मौत हो गई। मीडिया में चर्चा रही कि तृणमुल कांग्रेस के एक नेता की हत्या का बदला लेने के लिए हमलावरों द्वारा इस वारदात को अंजाम दिया गया। बंगाल विधानसभा चुनावों में तो पहले ही बड़े स्तर पर ऐसी घटनाएं हुई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/stop-political-violence/article-31743"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/politics-22.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीते दिनों पश्चिमी बंगाल में हुई दिल दहला देने वाली हिंसा में दस लोगों की मौत हो गई। मीडिया में चर्चा रही कि तृणमुल कांग्रेस के एक नेता की हत्या का बदला लेने के लिए हमलावरों द्वारा इस वारदात को अंजाम दिया गया। बंगाल विधानसभा चुनावों में तो पहले ही बड़े स्तर पर ऐसी घटनाएं हुई थी, जोकि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी। दरअसल उत्तर प्रदेश के बाद बंगाल को देश का सबसे अहम राज्य माना जाता है। क्योंकि केन्द्र में सरकार बनाने के लिए बंगाल की भूमिका को कमतर नहीं आंका जा सकता है। यहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केन्द्रीय राजनीति में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरगर्म नजर आ रही हैं तथा वे अलग-अलग राज्यों का दौरा करके पार्टियों के साथ गठबंधन की गोटियां बैठा रही हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर सियासी पार्टियां कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी राजनीतिक दल जीतने के लिए तो अपनी पूरी ताकत झोंक ही रहे हैं, इसके साथ ही सियासी हथकंडों के चलते खून-खराबें की वारदातें बढ़ रही हैं। चुनावों में जीत-हार तो तय होती है लेकिन राजनीतिक शत्रुता और द्वेष भावना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती। वास्तव में राजनेताओं के सियासी लाभ के लिए दिए जाने वाले भड़काऊ भाषण ही हिंसा की ऐसी घटनाओं का कारण बनते हैं। इसके साथ ही राजनीति को धार्मिक रंगत देने का भी हर संभव प्रयास किया जा रहा है। केरल में राजनीतिक बदले के कारण पहले ही भारी नुक्सान हो चुका है। राजनीतिक पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं की यह नैतिक जिम्मेवारी है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं को संयम, शांति व भाइचारे की सीख दें। ऐसे में हिंसक घटनाओं की महज जांच की मांग से ही बात खत्म नहीं होती और न ही किसी को सजा मिलने मिलने से मसले का हल निकलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में राजनीति की तस्वीर बदलने की जरूरत है। राजनीति में सत्ता को अपनी बापौती मानने की अहंकारी व निम्न स्तरीय सोच भी इन खूनी झड़पों का भी वास्तविक कारण है। इन सियासी नेताओं को केवल जोश नहीं बल्कि होश में भी काम लेना पड़ेगा। सत्ता किसी की मलकियत नहीं है बल्कि लोगों का जनादेश है। जीत हार के लिए जनता ही निर्णायक है। जनता के फैसले के आगे सिर झुकाने से ही लोकतंत्र व राजनीतिक की परिभाषा पूरी होती है। ‘मैं ही विजेता’ की धारणा का त्याग करके लोकतंत्र का सपना सच हो सकता है। जीत जनता की सेवा से ही प्राप्त की जा सकती है, खून की नदियां बहाकर नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चाई यह है कि गरीब से गरीब उम्मीदवार बड़े से बड़ा धनाढ्यों को भी हराकर जीत हासिल कर रहे हैं। जागरूक जनता धक्केशाही को बर्दाश्त नहीं करती बल्कि साफ-सुथरी व लोक सेवा को समर्पित राजनीति को ही तवज्जो देती है। देश के बड़े नेताओं को चुप रहने की आदत बदलकर केरल व बंगाल की खूनी झड़पों को रोकने के लिए आगे आना चाहिए। अमन-शांति व भाइचारा विकास की पहली शर्त है। विकास केवल सड़कों व इमारतों का नाम नहीं बल्कि सद्भावना, प्रेम व भाइचारा ही खुशहाली की असली तस्वीर है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/stop-political-violence/article-31743</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/news-brief/stop-political-violence/article-31743</guid>
                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 09:47:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-03/politics-22.jpg"                         length="20249"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीतिक हिंसा को रोका जाए</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब में सियासी बदलाखोरी का रुझान रुकने का नाम नहीं ले रहा। विधान सभा चुनाव के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं पर विरोधियों को सबक सिखाने के आरोप लगे हैं। ताजा घटना में मलोट के एक अकाली नेता के पुत्र पर हमला हुआ है। निम्न स्तर पर सियासी हिंसा की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पंजाब में सियासी बदलाखोरी का रुझान रुकने का नाम नहीं ले रहा। विधान सभा चुनाव के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं पर विरोधियों को सबक सिखाने के आरोप लगे हैं। ताजा घटना में मलोट के एक अकाली नेता के पुत्र पर हमला हुआ है। निम्न स्तर पर सियासी हिंसा की बहुत सारी घटनाएं घटित होती रहती हैं, जिनमें कुछ घटनाएं ही बड़ी चर्चा का कारण बनती हैं। यह घटनाएं चिंताजनक हैं व सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है। हालांकि मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह अच्छे प्रशासक माने जाते रहे हैं। पार्टी के नेताओं पर कंट्रोल रखना उन्हें अन्य सियासतदानों से अलग पहचान देता था। मुख्य मंत्री को ताजा घटनाओं के मद्देनजर जहां पार्टी नेताओं को सद्भावना भरी सियासत का पाठ पढ़ाना चाहिए, वहीं पुलिस की भूमिका को निषपक्ष बनाने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरेन्द्र सिंह ने मुख्य मंत्री बनते ही यह घोषणा की गई थी कि कांग्रेस सरकार में सियासी बदलाखोरी नहीं होगी। उच्च स्तर पर यह बात कुछ हद तक अमल में भी आई। अमरेन्द्र सिंह की बयानबाजी में विरोधियों के लिए तीखे शब्दों की बजाए संयम अधिक महसूस किया गया। सरकार बनने के बाद उन्होंने बादलों की आलोचना तो की, किन्तु रगड़े कम लगाए, जबकि निम्न स्तर पर सियासी नेता अपने निजी हितों के लिए असूलों व अनुशासन को ताक पर रख देते हैं। सिर्फ कांग्रेस सरकार में ही नहीं, बल्कि अकाली-भाजपा सरकार के समय भी सियासी बदलाखोरी चरम पर थी। कांग्रेसियों पर धड़ाधड़ मामले दर्ज किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">कई जगह हिंसा की घटनाएं भी घटी। यह मामला सिर्फ कानूनी सख्ती से हल नहीं होगा, बल्कि वरिष्ठ नेता पार्टी में असूलों को बरकरार रखने क लिए अपना विशेष योगदान भी दें। फिलहाल अभी तो यह हालात हैं कि अच्छा-बुरा देखे बिना ही दूसरी पार्टी के बड़े-छोटे नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया जाता है। चरित्र व अनुशासन राजनीति से गायब होते जा रहे हैं। किसी को पार्टी की प्रार्थमिक सदस्यता देते समय उसके चरित्र व विचारों की भी कोई जांच-पड़ताल जरूरी होनी चाहिए। बिना शक सियासी हिंसा सियासत में आई गिरावट का परिणाम है। वरिष्ठ नेताओं को निम्न स्तर नेताओं को कंट्रोल में रखने के लिए सियासत की तासीर बदलने की जरूरत है, नहीं तो इस बार का पीड़ित अगली बार का हमलावर बना रहेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-violence-should-be-stopped/article-3454</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-violence-should-be-stopped/article-3454</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Oct 2017 03:50:05 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए घातक</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात में राहुल गांधी अपनी पार्टी की ओर से बाढ़ पीड़ितों का हालचाल जानने पहुंचे तब कुछ लोगों ने उन पर पत्थर फैंके व मोदी-मोदी के नारे लगाए। स्पष्ट है पत्थरबाज लोग दर्शा रहे थे कि वह भाजपा एवं मोदी के प्रशंसक है और राहुल को नहीं चाहते। लेकिन पत्थरबाजी क्यों? केरल में मार्क्सवादी कम्युनिष्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-violence-is-deadly-for-democracy/article-2892"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/rahul-cart1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गुजरात में राहुल गांधी अपनी पार्टी की ओर से बाढ़ पीड़ितों का हालचाल जानने पहुंचे तब कुछ लोगों ने उन पर पत्थर फैंके व मोदी-मोदी के नारे लगाए। स्पष्ट है पत्थरबाज लोग दर्शा रहे थे कि वह भाजपा एवं मोदी के प्रशंसक है और राहुल को नहीं चाहते। लेकिन पत्थरबाजी क्यों? केरल में मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी पर भाजपा के आरोप हैं कि वहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकतार्ओं को कम्युनिष्ट काडर मार रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ठीक ऐसा ही किसी वक्त पश्चिम बंगाल में त्रृणमूल कांग्रेस भी कम्युनिष्ट पार्टी पर आरोप लगाती थी। पंजाब में भी एक कट्टरपंथी वर्ग जो अपने-आपको खालिस्तान का समर्थक कहता है पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के लोगों की हत्या के अंदेशे हैं। ये सारी घटनाएं एक प्रमाण हैं कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहे जाने वाले भारत में राजनीतिक हिंसा भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों देश में राष्ट्रीय चुनाव सम्पन्न हुए और मीडिया ने दिखाया कि किस तरह भारत में बड़ी शांति से सर्वोच्चय पद पर सत्ता एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को सौंप देता है परन्तु देश में बढ़ रही राजनीतिक हिंसा की घटनाएं कुछ और ही ब्यां करने लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले यह हिंसा चुनावों के वक्त ज्यादा होती थी तब बूथों पर कब्जे, राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा एक दूसरे पर जानलेवा हमले करना एवं हत्याएं हर चुनाव की कहानी थी चुनाव जितना छोटा होता हिंसा उतनी ज्यादा होती। पंचायत चुनाव, विधानसभा व लोकसभा चुनावों में हिंसा के लिए अघोषित तौर पर सत्तापक्ष का दल छूट देता एवं प्रशासन को पंगु बनाता ताकि उसके द्वारा फैलाई जा रही हिंसा में वह रक्षात्मक तौर पर बाधा नहीं बने।</p>
<p style="text-align:justify;">परन्तु चुनाव आयोग के सशक्त होने, सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा चुस्त कर लेने से, मतदाताओं द्वारा जागरूक हो जाने से अब चुनावी हिंसा में कमी आई है। लेकिन अब सत्तापक्ष के नेताओं की कृपादृष्टि पाने या अपने आपको उनकी नजरों में चढ़ाने के लिए राजनीतिक कार्यकर्ता विपक्षी दलों पर हमले करते हैं। हिंसा लोकतंत्र की घोर शत्रु है इसका समर्थन किसी भी तरह से होना देश में तानाशाही को जन्म देने जैसा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल एक नेता का नाम हो सकता है परन्तु वास्तव में यह राजनीतिक मतभिन्नता रखने वालों पर गुंडागर्दी है। देश के राजनीतिक, संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रतिष्ठानों को इसके विरुद्ध अपना निर्णय देना होगा और दोषियों पर बिना किसी बचाव के कार्रवाई होनी चाहिए। अन्यथा भाजपा नैतिक रूप से वह आधार खो देगी जिसकी दुहाई वह केरल में दे रही है। भारतीय मतदाताओं को ऐसी घटनाओं पर अपना तीव्र रोष व्यक्त करना चाहिए। हो सके तो घटनाएं याद रखी जाएं और हर उस व्यक्ति व विचारधारा को हाशिए पर धकेला जाए जो हिंसा की राजनीति में विश्वास करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-violence-is-deadly-for-democracy/article-2892</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-violence-is-deadly-for-democracy/article-2892</guid>
                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 22:51:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/rahul-cart1.jpg"                         length="32584"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        