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                <title>Ram Mandir - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>PM Modi Ayodhya Visit: प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे श्री राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या, ‘ध्वजारोहण’ समारोह में लेंगे हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[PM Modi Ayodhya Visit: अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि (Shri Ram Janma bhoomi) परिसर में आयोजित भव्य ‘ध्वजारोहण’ उत्सव में सम्मिलित होने अयोध्या पहुँचे। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। अयोध्या पहुंचने के उपरांत प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pm-modi-arrives-at-the-shri-ram-janmabhoomi-temple-in-ayodhya-and-will-participate-in-the-flag-hoisting-ceremony/article-78538"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/ayodhya-pm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">PM Modi Ayodhya Visit: अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि (Shri Ram Janma bhoomi) परिसर में आयोजित भव्य ‘ध्वजारोहण’ उत्सव में सम्मिलित होने अयोध्या पहुँचे। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। अयोध्या पहुंचने के उपरांत प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा कि वे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने आए हैं, जो उनके लिए अत्यंत पावन और हर्ष का अवसर है। Ayodhya News</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली से रवाना होकर प्रधानमंत्री महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, जहाँ से वे हेलीकॉप्टर द्वारा साकेत महाविद्यालय गए। इसके बाद उन्होंने राम मंदिर परिसर तक पहुँचने से पूर्व अयोध्या नगर में एक संक्षिप्त रोड शो भी किया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री के अयोध्या आगमन को ऐतिहासिक व आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री अनेक ऋषि-परंपरा से जुड़े पूजास्थलों पर भी दर्शन करेंगे। वे महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी को समर्पित मंदिरों में श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अतिरिक्त वे शेषावतार मंदिर तथा माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद रामलला के गर्भगृह में विशेष दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित है। Ayodhya News</p>
<h3>दोपहर लगभग 12 बजे मंदिर के शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज फहराएँगे</h3>
<p style="text-align:justify;">दोपहर लगभग 12 बजे प्रधानमंत्री श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज फहराएँगे। यह अनुष्ठान मार्गशीर्ष मास की शुभ पंचमी तथा श्रीराम–सीता विवाह पंचमी के पावन अभिजीत मुहूर्त में संपन्न होगा। ध्वज लगभग 10 फीट ऊँचा और 20 फीट लंबा त्रिकोण स्वरूप है, जिस पर तेजस्वी सूर्य की आकृति, ‘ॐ’ का दिव्य चिन्ह तथा कोविदारा वृक्ष का प्रतीक अंकित है। यह ध्वज धर्म, आदर्शों, मर्यादा और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देने वाला माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ध्वजारोहण मंदिर के नागर शैली में निर्मित शिखर पर होगा। इसके चारों ओर लगभग 800 मीटर लंबा परकोटा निर्मित है, जो भारतीय स्थापत्य की विविधता का प्रतीक है। मुख्य मंदिर की बाहरी भित्तियों पर वाल्मीकि रामायण से लिए गए भगवान श्रीराम के जीवन की 87 अद्भुत शिल्पांकित झांकियाँ उकेरी गई हैं, जबकि परकोटे की आंतरिक दीवारों पर भारतीय संस्कृति के 79 महत्वपूर्ण प्रसंग कांस्यकला के माध्यम से दर्शाए गए हैं। Ayodhya News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 10:59:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Ram Mandir Pran Pratishtha Anniversary: श्री राम की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर उत्थान संस्थान के दिव्यांग बच्चो ने प्रकट किए अपने भाव</title>
                                    <description><![CDATA[छछरौली (सच कहूँ/राजेन्द्र कुमार)। Chhachhrauli News: अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर में स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य मे उत्थान संस्थान में दिव्यांग बच्चो द्वारा भगवान राम के नाम का जयघोष कर पुष्प अर्पित कर अपनी भावनाएं प्रकट की। कार्यक्रम मे उत्थान संस्थान की डायरेक्टर डॉक्टर अंजू बाजपई जी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/director-dr-anju-congratulated-on-the-first-anniversary-of-the-installation-of-the-idol-of-shri-ram/article-66684"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/chhachhrauli.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>छछरौली (सच कहूँ/राजेन्द्र कुमार)।</strong> Chhachhrauli News: अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर में स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य मे उत्थान संस्थान में दिव्यांग बच्चो द्वारा भगवान राम के नाम का जयघोष कर पुष्प अर्पित कर अपनी भावनाएं प्रकट की। कार्यक्रम मे उत्थान संस्थान की डायरेक्टर डॉक्टर अंजू बाजपई जी ने सभी को श्री राम की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ की शुभकामनाएं देते हुए कहा की 500 वर्षो का वनवास पूर्ण कर हमारे राष्ट्र के गौरव, सनातन संस्कृति के प्रणेता भगवान राम बाल रूप में मंदिर कहें या भव्य महल में विराजमान हुए। प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ को त्योहार की तरह ही मनाया जा रहा है। Yamunanagar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इस दिन रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ मनाने का एक धार्मिक महत्व भी है। महान शिक्षाविद् डॉक्टर पी के बाजपई जी ने बताया कि पौष शुक्ल द्वादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस अवसर को भक्ति भाव के साथ मनाना चाहिए। अयोध्या धाम में विराजमान होने पर हर्ष एवं उल्लास के बीच श्रीराम जी की पहली वर्षगांठ मनाने का हम सभी को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है।अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का उद्घाटन एवं मंदिर में श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर स्कूल का प्रांगण भी पूरी तरह से राममय नजर आया। इस दौरान सभी में असीम उत्साह, हर्ष एवं उल्लास नजर आया। Yamunanagar News</p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान के प्रधानाचार्य रविंद्र मिश्रा जी ने कहा कि आज हमारा विद्यालय भी राममय प्रतीत हो रहा था। पूरा देश ही नहीं वरन विश्व में रह रहे सनातनी विचारधारा के परिवारों के लिए यह ऐतिहासिक अवसर है और पूरी दुनिया में श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर दिवाली मनाई जा रही है। इसी परिपेक्ष्य में आज विद्यालय प्रांगण भी राममय हो गया है। यह हम सभी के लिए परम सौभाग्य का विषय है कि हमने अपने जीवन में, अपनी आंखों से अयोध्या धाम में श्री राम मंदिर के उद्घाटन व प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देखा ।कार्यक्रम में सभी ने स्वाति ठाकुर,सुमित सोनी ,हनी तोमर,राजेश और दीपा ने श्री राम के चरणों में पुष्प अर्पण कर अपने भाव प्रकट किए। Yamunanagar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="अनाज मंडी में कछुआ चाल से चल रहा पाइप लाइन बिछाने का कार्य" href="http://10.0.0.122:1245/pipeline-laying-work-is-going-on-at-a-snails-pace-in-anaj-mandi/">अनाज मंडी में कछुआ चाल से चल रहा पाइप लाइन बिछाने का कार्य</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jan 2025 16:07:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Ayodhya Ram Mandir : खुदाई में मिले राम जन्मभूमि का सच साबित करने वाले अवशेष की फोटो जारी</title>
                                    <description><![CDATA[Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय द्वारा जारी तस्वीर से यह साबित हो रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि पर खुदाई में मिले प्राचीन मंदिर के अवशेष राम मंदिर के ही हैं। फोटो में कई मूर्तियां और पिलर दिखाई दे रहे हैं। जोकि 21 साल पहले यानी 2002 में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/photo-of-the-remains-found-during-excavation-proving-the-truth-of-ram-janmabhoomi-released/article-52310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/ram-mandir.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या।</strong> श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय द्वारा जारी तस्वीर से यह साबित हो रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि पर खुदाई में मिले प्राचीन मंदिर के अवशेष राम मंदिर के ही हैं। फोटो में कई मूर्तियां और पिलर दिखाई दे रहे हैं। जोकि 21 साल पहले यानी 2002 में एएसआई टीम को खुदाई करते समय बरामद हुए थे। अवशेषों की संख्या 50 के करीब बताई जा रही है, जिनमें 8 टूटे खंभे, 6 खंडित मूर्तियां, 5-6 मिट्टी के बर्तन और 6-7 कलश हैं। Ayodhya Ram Mandir</p>
<h3 style="text-align:justify;">जन्मभूमि के लिए किए संघर्ष को जानना हर हिंदू का अधिकार : दास</h3>
<p style="text-align:justify;">साधु-संतों के दावों से यह स्पष्ट होता है कि ये अवशेष 500 साल पुराने हैं। जोकि 21 साल पहले रामलला मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर खुदाई के दौरान बरामद हुए थे। बता दें कि जहां ये अवशेष बरामद हुए हैं, वह विवादित स्थल पहले राम मंदिर हुआ करता था। अंग्रेजों के जमाने में इसके ऊपर अन्य धार्मिक ढांचा खड़ा कर दिया गया। बाद में मामला कोर्ट पहुंचा। एएसआई सर्वे हुआ, तो उस विवादित जगह से मंदिरों के यही अवशेष मिले, जो राम जन्मभूमि के सच साबित करने का मजबूत आधार बनें।</p>
<p style="text-align:justify;">बरामद हुए इन अवशेषों में काली कसौटी के पत्थर से बने पिलर यानी खंभे, पिंक सैंड स्टोन की बनी देवताओं की मूर्तियां, मिट्टी के कलश और मंदिर में लगे नक्काशीदार पत्थरों के टुकड़े शामिल हैं। इन अवशेषों को रामलला के अस्थायी मंदिर के निकास द्वार के पास सुरक्षित रखा गया है। रामलला के दर्शन कर निकलने के बाद भक्तों को यह गैलरी मिलती है। Shri Ram Janmabhoomi</p>
<p style="text-align:justify;"> ‘हर हिंदू का यह अधिकार है कि जन्मभूमि पाने के लिए किए गए संघर्ष को जानना चाहिए’ श्रीराम वल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास ने कहा, ‘फोटो ने हम सभी को मंदिर आंदोलन के संघर्षों की याद दिला दी है। हर सनातन धर्म को मानने वाले को श्रीराम जन्मभूमि को पाने के लिए किए गए संघर्ष को जानना चाहिए।’ डॉ. भरत दास उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली के महंत डॉ. भरत दास के अनुसार, ‘हर राम भक्त के लिए राम मंदिर का इतिहास जानना जरूरी है। इससे उसे पता चलेगा कि हम लोगों के पूर्वजों ने इसके लिए कितना खून-पसीना बहाया है। यह साक्ष्य न मिलते तो हमें राम जन्मभूमि इतनी आसानी से नहीं मिलने वाली थी।’ Ayodhya Ram Mandir Update</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajouri: मुठभेड़ में कर्नल, मेजर और डीएसपी सहित 4 शहीद, दो आतंकी भी ढेर" href="http://10.0.0.122:1245/rajouri-another-terrorist-killed-in-encounter-with-security-forces/">Rajouri: मुठभेड़ में कर्नल, मेजर और डीएसपी सहित 4 शहीद, दो आतंकी भी ढेर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Sep 2023 21:55:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>&amp;#8220;Interview with सच कहूँ&amp;#8221; &amp;#8211; अयोध्या मामला : वक्त मंदिर-मस्जिद से आगे सोचने का है: इकबाल अंसारी</title>
                                    <description><![CDATA[मसले को उन्होंने हमेशा भाई-चारे से सुलझाने की वकालत की।
दरअसल, उनको मुल्क बहुत प्यारा था।
 इसलिए उनके लिए मुल्क पहले था, मंदिर-मस्जिद बाद में।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/time-has-come-to-think-beyond-ram-mandir-maszid-says-iqbal-ansari/article-11574"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/time-has-come-to-think-beyond-rammandir-maszid-says-iqbal-ansa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"><em><strong>हिंदुस्तान के सबसे नासूर मसले का फिलहाल (time has come to think beyond RamMandir Maszid says Iqbal Ansari) पटाक्षेप हो गया है। लेकिन आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उसी मसले को फिर से कुरेदना चाहता है। मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए रिव्यू पिटीशन दायर करेगा। </strong></em><em><strong>लेकिन अयोध्या केस मामले के मुख्य पक्षकार मोहम्मद इकबाल अंसारी उनके इस फैसले से ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखते। कोर्ट द्वारा सुनाए अंतिम फैसले को वह स्वीकार करके है। पूरे मसले पर सच कहूँ प्रतिनिधि रमेश ठाकुर ने उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य हिस्से।<br />
</strong></em></p>
<h3 style="text-align:justify;"> मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की फैसले के खिलाफ जब बैठक आयोजित हुई तो आप नहीं गए? | Ram Mandir</h3>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में मेरे पास जानकारी नहीं<strong>(time has come to think beyond RamMandir, Maszid says Iqbal Ansari)</strong> थी। बैठक  के  दिन मुझसे सुबह के  वक्त सुन्नी वक्फ बोर्ड के एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने संपर्क किया था। मैंने उनको बताया कि मैं कोर्ट का फैसला मान चुका हूं तो फिर दोबारा से मसले पर बात करना ठीक नहीं होगा। लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बैठक में रिव्यू पिटीशन दायर करने का निर्णय लेने वाले हैं। रिव्यू पिटीशन से संबंधित खबरें मुझे मीडिया के जरिए पता चली। मुझे लगता है इस मुद्दे पर एक बार फिर कुछ लोग राजनीति करना चाहते हैं। मुद्दे से प्रचार पाना चाहते हैं और खुद को सियासी अखाड़े में स्थापति करना चाहते हैं। लेकिन उनके बहकावे में शायद ही मुल्क के लोग अब आएं। आधुनिक आवाम बहुत समझदार है। वह बेवजह के मसलों में उलझना नहीं चाहती।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> मसले का जब एक बार निर्णय हो गया है तो दोबारा से कुरेदने का क्या मतलब?| Ram Mandir</h3>
<p style="text-align:justify;">मैं भी वैसा ही मानता हूं जैसा पूरा मुल्क। देखिए, जनाब मैं कई मर्तबा कह चुका हूं कि मैं मामले का एकलौता पक्षकार नहीं हूं और भी हैं। फैसले के बाद कौन क्या सोचता है मुझे फर्क नहीं पड़ता। पर, हां मुझे अब इस मसले से खुद को अलग रखना है जिसका फैसला मैं उसी दिन से कर चुका हूं। जब सुप्रीम कोर्ट की पंचीय बैंच ने अंतिम फैसला सुनाया था। हमनें कोर्ट का निर्णय मान लिया है। मंदिर मसले पर मेरे अलावा कई और नए पक्षकारों का उदय हो चुका है। इसलिए कोई भी पक्षकार कहीं जाए, इसमें मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है। फिलहाल हम फिर कोर्ट नहीं जा रहे हैं और दूसरे लोग जा रहे हैं इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है। बहुत समय बर्बाद कर लिया लेकिन अब मैं अपने काम-धंधे में लग गया हूं। मुद्दे को जेहन से भी निकाल दिया है।</p>
<h3 style="text-align:center;">कोर्ट ने झगड़े को सुलझाने के लिए बीच का रास्ता भी निकाला है।</h3>
<h3 style="text-align:center;">मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन भी दी जाएगी? | Ram Mandir</h3>
<p style="text-align:justify;">मैं पूरी तरह से सहमत हूं। पर, दी हुई पाचं एकड़ जमीन को लोग खैरात मान रहे हैं। ठीक है अगर खैरात लगती है तो उस पर मस्जिद नहीं, स्कूल या अस्पताल बना दिया जाए। मुझे लगता शायद खैरात का फितूर अपने मन में पालने वाले लोग इसे भी नकार देंगे। जिन्होंने खैरात की बात कही है उनका मैं नाम नहीं लेना चाहता। लेकिन ऐसे लोग ही कौम में मतभेद पैदा करने का काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फैसले से पहले इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि कोर्ट मुस्लिम पक्षकारों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए पांच एकड़ जमीन देने की बात कहेगी। देखिए, अब मस्जिद बनें, या मंदिर दोनों का सरकार अपनी निगरानी में निर्माण कराए। इसमें राजनीति नहीं होने दी जाए। बहुत हो गई राजनीति, अब तौबा कर लेना चाहिए। हमें अमन-शांति और भाई चारे के रास्ते पर चलना चाहिए। ऐसा करने से ही सौहार्द पैदा होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> खैरात भी बता रहे हैं और शरियत के खिलाफ भी?| Ram Mandir</h3>
<p style="text-align:justify;">शरियत में ऐसी बेफिजूल बातों का ज्रिक नहीं है। ये सभी बनावटी बातें हैं। देखिए, मैं आलिम या मौलाना तो हूं नहीं? इतनी गहराई की बातें मेरे पल्ले नहीं पड़ती। खुदा तो हर जगह वास करता है। बस, मानने और समझने की जरूरत है। फर्क समझना है तो दो जिंदा उदाहरण सामने हैं। जैसे हिंदू धर्म के लोग पत्थरों में ईश्वर को खोजते हैं, वैसे ही मुसलमान मस्जिद में दीवारों पर माथा रखकर अल्लाह के होने का एहसास करते हैं। इस लिहाज से मस्जिद कहीं भी बनें, किसी को फर्क नहीं पड़ना चाहिए। हालांकि मसला कोर्ट के अधीन हैं उनको ही तय करके सरकार को आदेश देना है। उसे भी सर्वमान्य होना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:center;">सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आप कितने खुश हैं? आपके पिता जी ने भी लंबी लड़ाई लड़ी,</h3>
<h3 style="text-align:center;">जिंदा होते तो वह भी शायद खुश होते? | Ram Mandir</h3>
<p style="text-align:justify;">बिल्कुल खुश होते। दरअसल, उनकी और मेरी सोच एक जैसी रही है। जिंदा होते तो वह भी वैसा सोचते जैसा मैं सोच रहा हूं। उनको न्याय सिस्टम पर अटूट विश्वास था। मंदिर मसले को उन्होंने कभी भी उग्रता से नहीं लिया। मसले को उन्होंने हमेशा भाई-चारे से सुलझाने की वकालत की। दरअसल, उनको मुल्क बहुत प्यारा था। इसलिए उनके लिए मुल्क पहले था, मंदिर-मस्जिद बाद में। दोनों समुदाय के प्रति समानभाव से सोचते थे। आज जिंदा होते तो निश्चित रूप से कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट होते।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> खबरें ऐसी भी हैं कि आपको न बोलने के लिए डराया भी गया?| Ram Mandir</h3>
<p style="text-align:justify;">हद है, मुझे भला कोई क्यों डराएगा? पहाड़ थोड़ी न टूट रहा है मेरे ऊपर। घुटने टेकने का सवाल ही नहीं? बहरहाल, मेरे संबंध में कोई क्या सोचता है सोचे, मुझे फर्क नहीं पड़ता। अगर मैं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ भी ठपली बजाता रहूं तो अच्छा लगेगा क्या? मुझे कुछ लोगों ने आठ नबंवर के बाद भी बरगलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा मैं मुख्य पक्षकार के तौर पर आगे भी लड़ाई जारी रखंू। पर, मैंने अपने विवके का इस्तेमाल किया और निर्णय किया कि अब आगे कुछ नहीं? फैसले पर जब पूरे मुल्क की स्वीकृति है तो मैं अलहदा होकर क्यों बेसुरा राग अलापूं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-रमेश ठाकुर</em></strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2019 19:10:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अयोध्या मामला: मुसलमानों के हिस्से की जमीन राम मंदिर के लिए दी जाए</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वास्तव में अयोध्या में विवादित भूमि में मुसलमानों के शेयर का असल दावेदार वही है क्योंकि बाबरी मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी, जो एक शिया थे। शुक्रवार को बोर्ड ने कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा मुसलमानों को दी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्रीय शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वास्तव में अयोध्या में विवादित भूमि में मुसलमानों के शेयर का असल दावेदार वही है क्योंकि बाबरी मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी, जो एक शिया थे। शुक्रवार को बोर्ड ने कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा मुसलमानों को दी गई एक तिहाई भूमि को राम मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को दान करना चाहता है। उधर, मुसलमानों और सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश सीनियर ऐडवोकेट राजीव धवन ने कहा, ‘बामियान बुद्ध की मूर्तियों को मुस्लिम तालिबान ने नष्ट किया था और बाबरी मस्जिद को हिंदू तालिबान की ओर से ध्वस्त किया गया।’</p>
<h1 style="text-align:center;">यह है पूरा मामला</h1>
<p style="text-align:justify;">राम मंदिर के लिए होनेवाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए। जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ayodhya-case/article-4823</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 14:37:20 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अयोध्या में विवादित जमीन पर बने मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा नई दिल्ली (एजेंसी)। राम जन्म भूमि मामले में शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। हलफनामे में शिया वक्फ ने कहा कि अयोध्या में विवादित जगह पर राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके अलावा मस्जिद का निर्माण पास के मुस्लिम बाहुल्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/ram-mandir-built-on-disputed-land-in-ayodhya/article-2981"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/temple.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> राम जन्म भूमि मामले में शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। हलफनामे में शिया वक्फ ने कहा कि अयोध्या में विवादित जगह पर राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके अलावा मस्जिद का निर्माण पास के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हो, जबकि शिया वक्फ बोर्ड के इस राय से सुन्नी वक्फ बोर्ड सहमत नहीं है। दरअसल शिया वक्फ बोर्ड विवादित जगह पर मंदिर बनाए जाने की बात खुले तौर कहता रहा है। मंगलवार को शिया वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए हलफनामे में बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि विवादित जगह पर मंदिर और मस्जिद दोनों का निर्माण किया जाता है, तो इससे दोनों समुदाय में संघर्ष की संभावना बनी रहेगी। इससे बचा जाना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मुस्लिम बहुल इलाके में बने मस्जिद</h2>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए विवादित जगह पर राम मंदिर का निर्माण किया जाए और विवादित जगह से छोड़ी दूर मुस्लिम बाहुल्य इलाके में मस्जिद का निर्माण किया जाए। रिजवी ने कहा कि उसके पास 1946 तक विवादित जमीन का कब्जा था और शिया के मुत्वल्ली हुआ करते थे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इस जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया था। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि वह विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है। बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद बनवाने वाला मीर बकी भी शिया था, इसीलिए इस पर हमारा पहला हक बनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त से 3 जजों की बेंच हर रोज सुनवाई करेगा। बोर्ड ने कहा कि अगर मस्जिद बनाने की वैकल्पिक जगह मिले तो हम विवादित जगह पर दावा छोड़ने को तैयार हैं। शिया वक्फ बोर्ड इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी पक्षकार था। वहां शुरूआती दौर में उसने जगह पर दावा ठोका था। हालांकि बाद में विस्तृत दलील के लिए उनकी तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इन बातों को भी जगह दी है। अब एक बार फिर शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके अपना हस्ताक्षेप पेश किया है। वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेंटी ही मुसलमानों की तरफ से पैरोकारी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 06:42:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>निराकण की ओर राम मंदिर विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल विवाद का मुद्दा लगता है अब निराकरण की ओर बढ़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त से इस विवाद की नियमित सुनवाई का निर्णय लिया है। तीन न्यायमूर्तियों की पीठ राम मंदिर बाबरी ढांचा शीर्षक विवाद का हल निकालेगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ram-mandir-dispute-towards-cancellation/article-2972"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल विवाद का मुद्दा लगता है अब निराकरण की ओर बढ़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त से इस विवाद की नियमित सुनवाई का निर्णय लिया है। तीन न्यायमूर्तियों की पीठ राम मंदिर बाबरी ढांचा शीर्षक विवाद का हल निकालेगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता एवं भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पहल की थी। तब मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने जल्दी सुनवाई का भरोसा दिया था। हालांकि छह साल से लंबित इस विवाद को पक्षकारों की आपसी सहमति से सुलझाने के लिए भी न्यायालय ने आग्रह किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही अदालत ने यह भरोसा भी दिया था कि अदालत के बाहर मामला सुलझाने के लिए वादी-प्रतिवादी बैठते हैं तो अदालत मध्यस्थता करने को तैयार है। इस टिप्पणी का मंदिर आंदोलन से जुड़े सभी हिंदू सर्मथकों ने समर्थन किया था, लेकिन मुस्लिम समुदाय विभाजित दिखा था। पिछले 68 साल से यह विवाद विभिन्न अदालतों से होता हुआ शीर्ष न्यायालय की दहलीज पर आकर ठिठक गया था, जो अब आगे बढ़ता नजर आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या विवाद देश के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है। इस मुद्दे ने देश की राजनीति को भी प्रभावित किया है। विश्व हिंदू परिषद् अयोध्या में उस विवादित स्थल पर मंदिर बनाना चाहती है, जहां पहले एक कथित रूप से मस्जिद थी। जबकि मुस्लिमों का पक्ष है कि यहां मंदिर होने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों और लोक साहित्य से यह प्रमाणित होता है कि 1528 में एक ऐसे स्थल पर हिंदुओं को अपमानित करने की दृष्टि से मस्जिद का निर्माण कराया गया, जहां भगवान राम की जन्मस्थली थी। 1528 में मुगल बादशाह बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इस कारण इसे बावरी मस्जिद कहा जाता है। 1859 में चालाकी बरतते हुए ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर रोक लगा दी और विवादित परिसर क्षेत्र में दो हिस्से करके हिंदुओं और मुस्लिमों को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के बाद 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां पाई गई। एकाएक इन मूर्तियों के प्रकट होने पर मुस्लिमों ने विरोध जताया। दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। नतीजतन सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला डाल दिया और दोनों संप्रदाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी। इसके परिणामस्वरूप मुस्लिमों ने बावरी मस्जिद संघर्ष समिति बना ली। 1989 में राम मंदिर निर्माण के लिए विहिप ने अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक मंदिर की नींव रख दी। 1990 में विहिप के कार्यकतार्ओं ने विवादित ढांचे को क्षति पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तबके प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश की, किंतु कोई हल नहीं निकला। अतत: 1992 में भाजपा, विहिप और शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को विवादित ढांचे को ढहा दिया। इस समय केंद्र में कांग्रेस के पीवी नरसिंहराव प्रधानमंत्री थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों, निर्मोही अखाडे़ और गोपाल सिंह विशारद द्वारा मंदिर के पक्ष में जो सबूत और शिलालेख अदालत में पेश किए गए थे, उनसे यह स्थापित हो रहा था कि विध्वंस ढांचे से पहले उस स्थान पर राममंदिर था। जिसे आक्रमणकारी बाबर ने हिन्दुओं को अपमानित करने की दृष्टि से शिया मुसलमान मीर बांकी को मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने का हुक्म दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय में अपील किए जाने के बाद अदालत में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला दिया था। दरअसल, विवादित भूमि 2.77 एकड़ के एक हिस्से पर इस्लाम के दावे को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मंजूर किए जाने से जो मतांतर सामने आया था, वह असंतोष व शीर्ष न्यायालय में अपील का प्रमुख आधार था। इसी बिना पर स्थगन देते हुए न्यायमूर्ति आफताब आलम और आरएम लोढ़ा की संयुक्त पीठ ने कहा था कि किसी भी पक्ष ने जब विवादित भूमि बंटवारे की मांग नहीं की थी, फिर यह अजीब व चकित कर देने वाला हाईकोर्ट ने आदेश क्यों दिया ? जबकि फैसला भूमि के मालिकाना हक पर केंद्रित रहना था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वजह से इस फैसले को एक नया आयाम मिला और यह विचित्रता की श्रेणी में आ गया। हालांकि न्यायाधीश धर्मवीर शर्मा ने जरूर संपूर्ण विवादित भूमि हिन्दुओं को सौंपने का फैसला दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन देते समय विवादित भूमि के अह्म पहलू को रेखांकित कर यह जाहिर कर दिया था कि अब जो फैसला आएगा वह भूमि के मालिकाना हक को तय करते हुए, एक सर्वमान्य फैसला होगा और भूमि का बंटवारा संप्रदायों के अनुसार नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विवादित परिसर ढांचे से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि किसी मंदिर अथवा धार्मिक स्थल को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी अथवा नहीं ? इसे हाईकोर्ट के फैसले का संयोग कहिए या विलक्षणता कि तीनों न्यायमूर्तियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट व जुटाये साक्ष्यों के आधार पर निर्विवाद रूप से यह माना है कि राम के बाल रूप में जिस स्थल पर राम की मूर्ति स्थापित है, वही स्थल रामजन्म भूमि है। विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद बाबरी संघर्ष समिति की भी यही प्रमुख मांग थी कि पहले यह तय किया जाए कि यही स्थल रामजन्म भूमि है। यह भी सुनिश्चित हो कि बाबरी मस्जिद के वजूद में आने से पहले यहां कोई मंदिर था और यह भी तय किया जाए मस्जिद निर्माण के लिए मंदिर तोड़ा गया था ?</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में इस सर्वेक्षण की जिम्मेवारी एएसआई को सौंपी गई। इसने विवादित रामजन्म भूमि, बाबरी मिस्जद परिसर के नीचे उत्खनन का कार्य कराया और 5 अगस्त 2003 को खुदाई की 574 पन्ने की रिपोर्ट न्यायालय को सौंप दी। इस खुदाई में जो पुरातत्वीय साक्ष्य मिले उनसे तय हुआ कि तोड़े गए ढांचे के नीचे ग्यारहवीं सदी के हिन्दुओं के धार्मिक स्थल से जुड़े साक्ष्य बड़ी संख्या में मौजूद हैं। अनेक शिलालेख और भगवान शंकर की मूर्ति मिलने के सबूत भी न्यायालय में पेश किए गए। परिसर का राडार सर्वेक्षण भी कराया गया। इसी से तय हुआ कि ढांचे के नीचे एक और ढांचा है। इन्हीं साक्ष्यों के बूते हाईकोर्ट के तीनों न्यायमूर्तियों ने बहुमत से माना कि विवादित स्थल का केंद्रीय स्थल रामजन्म भूमि है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों और लोक साहित्य से यह प्रमाणित होता है कि 1528 में एक ऐसे स्थल पर हिंदुओं को अपमानित करने की दृष्टि से मस्जिद का निर्माण कराया गया, जहां भगवान राम की जन्मस्थली थी। 1528 में मुगल बादशाह बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इस कारण इसे बावरी मस्जिद कहा जाता है। 1859 में चालाकी बरतते हुए ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर रोक लगा दी और विवादित परिसर क्षेत्र में दो हिस्से करके हिंदुओं और मुस्लिमों को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।</em></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></em></p>
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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 03:33:17 +0530</pubDate>
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