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                <title>generation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>युवा पीढ़ी को जागरूक होने की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[युवा देश की असली शक्ति हैं जो देश की सुरक्षा से लेकर जीडीपी तक सबसे अधिक योगदान देते हैं। युवाओं के बिना देश की तरक्की की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन यह चिंता वाली बात है कि हमारे देश की राजनीति के मंसूबे बहुत ही खतरनाक होते जा रहे हैं जो युवाओं को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-young-generation-needs-to-be-aware/article-12838"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/young-generation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">युवा देश की असली शक्ति हैं जो देश की सुरक्षा से लेकर जीडीपी तक सबसे अधिक योगदान देते हैं। युवाओं के बिना देश की तरक्की की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन यह चिंता वाली बात है कि हमारे देश की राजनीति के मंसूबे बहुत ही खतरनाक होते जा रहे हैं जो युवाओं को अपने हितों की खातिर आग में झोंकने से जरा भी संकोच नहीं कर रहे। राष्टÑीय नागरिकता शोध कानून पास हुए को आज करीब डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इस मुद्दे पर देश में धर्मों के नाम पर लड़ाई व नफरत की आग लगातार भड़काई जा रही है। कानून के हक व विरोध में दलीलें तो बहुत दी जा रही हैं लेकिन  राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को छोड़कर किसी भी पार्टी के नेता ने युवाओं को हिंसा का राह छोड़ने की अपील नहीं की। मामला इतना पेचीदा हो गया है कि दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ हिंसक कार्रवाईयां शुरू हो गई हैं। सीएए के विपक्षी व समर्थक दोनों ही राजनीतिक पार्टियों को रास नहीं आ रहे हैं। जिस बात का डर था वह होनी शुरू हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएए के समर्थक एक युवक ने दिल्ली में सीएए का विरोध करने वालों पर गोली दाग दी। कुछ दिन पहले भी एक व्यक्ति पिस्तौल लेकर सीएए विरोध के प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंच गया था। अगर युवाओं के दरमियान यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो हालात और भी खतरनाक हो सकते हैं। कांग्रेस व भाजपा सहित सभी पार्टियों के बड़े व छोटे नेता सीएए मुद्दे पर संयम अपनाने की हिम्मत नहीं कर रहे। कोई न कोई भड़काने वाला ब्यान आ ही रहा है। देश में राजनीतिक व धार्मिक नफरत का माहौल पैदा हो रहा है, जिससे निपटने के लिए निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। केवल कानूनी सख्ती ही काफ ी नहीं बल्कि सद्भावना व अहिंसा की अपील भी बहुत ही जरूरी है। किसी भी पक्ष द्वारा फैलाई जा रही भड़काहट अभी सभी राजनीतिक पार्टियों को रास आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक पार्टियां चुपचाप युवाओं की बर्बादी का तमाशा देख रही हैं। लेकिन यहां युवाओं की जिम्मेवारी बनती है कि वह राजनीतिक पार्टियों के हाथों में खेलने की बजाय अहिंसा व सद्भावना की सोच से काम लें। किसी भी मुद्दे का विरोध व समर्थन करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके ही अपनाए जाने चाहिए। देश के महान् नेता महात्मा गांधी ने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए जबरदस्त आंदोलन किए थे। संघर्ष का मतलब केवल तोड़फोड़ या गोलीबारी नहीं होता बल्कि जनता की सोच बदलना होता है। राजनीतिक पार्टियां अपने हितों का लोभ त्यागकर युवाओं की भलाई के प्रति अवश्य सोचें। हिंसा में युवाओं की ली जाने वाली बलि किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए जीत साबित नहीं होगी।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2020 21:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>वृद्धों को मिले जीने की नई दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अगस्त माह में अनेक अन्तर्राष्ट्रीय दिवस आयोजित होते हैं जैसे युवा दिवस, मित्रता दिवस, हिरोशिमा दिवस, स्तनपान दिवस, आदिवासी दिवस, मच्छर दिवस, फोटोग्राफी दिवस, मानवीय दिवस आदि-आदि उनमें एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जो 8 अगस्त को पूरी दुनिया में वृद्धों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अगस्त माह में अनेक अन्तर्राष्ट्रीय दिवस आयोजित होते हैं जैसे युवा दिवस, मित्रता दिवस, हिरोशिमा दिवस, स्तनपान दिवस, आदिवासी दिवस, मच्छर दिवस, फोटोग्राफी दिवस, मानवीय दिवस आदि-आदि उनमें एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जो 8 अगस्त को पूरी दुनिया में वृद्धों को समर्पित किया गया है। यह दिवस वरिष्ठ नागरिकों के उन्नत, स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के लिये आयोजित होता है। इस दिवस को आयोजित करने की आवश्यकता इसलिये पड़ी कि आज के वरिष्ठ नागरिक जो दुनियाभर में उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं, उनको उचित सम्मान एवं उन्नत जीवन जीने की दिशाएं मिलें।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान दौर की एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि इस समय की बुजुर्ग पीढ़ी घोर उपेक्षा और अवमानना की शिकार है। यह पीढ़ी उपेक्षा, भावनात्मक रिक्तता और उदासी को ओढ़े हुए है। इस पीढ़ी के चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, कमजोर आंखें, थका तन और उदास मन जिन त्रासद स्थितियों को बयां कर रही है उसके लिए जिम्मेदार है हमारी आधुनिक सोच और स्वार्थपूर्ण जीवन शैली। समूची दुनिया में वरिष्ठ नागरिकों की दयनीय स्थितियां एक चुनौती बन कर खड़ी है, एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय परिप्रेक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों की दशा अधिक चिन्तनीय है। दादा-दादी, नाना-नानी की यह पीढ़ी एक जमाने में भारतीय परंपरा और परिवेश में अतिरिक्त सम्मान की अधिकारी हुआ करती थी और उसकी छत्रछाया में संपूर्ण पारिवारिक परिवेश निश्चिंत और भरापूरा महसूस करता था। न केवल परिवार में बल्कि समाज में भी इस पीढ़ी का रुतबा था, शान थी। आखिर यह शान क्यों लुप्त होती जा रही है? क्यों वृद्ध पीढ़ी उपेक्षित होती जा रही है? क्यों वृद्धों को निरर्थक और अनुपयोगी समझा जा रहा है? वृद्धों की उपेक्षा से परिवार तो कमजोर हो ही रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा नई पीढ़ी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या हम वृद्ध पीढ़ी को परिवार की मूलधारा में नहीं ला सकते? ऐसे कौन से कारण और हालात हैं जिनके चलते वृद्धजन इतने उपेक्षित होते जा रहे हैं? यह इतनी बड़ी समस्या कि किसी एक अभियान से इसे रास्ता नहीं मिल सकता। इस समस्या का समाधान पाने के लिए जन-जन की चेतना को जागना होगा। इस दृष्टि से विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की आयोजना की एक महत्वपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जरूरी है कि हम बुजुर्ग पीढ़ी को उसकी उम्र के अंतिम पड़ाव में मानसिक स्वस्थता का माहौल दें, आधि, व्याधि और उपाधियों को भोग चुकने के बाद वे अपना अंतिम समय समाधि के साथ गुजार सकें ऐसी स्थितियों को निर्मित करें। नई पीढ़ी और बुजुर्ग पीढ़ी की संयुक्त जीवनशैली से अनेक तरह के फायदे हैं जिनसे न केवल समाज और राष्ट्र मजबूत होगा बल्कि परिवार भी अपूर्व शांति और उल्लास का अनुभव करेगा। सबसे अधिक नई पीढ़ी अपने बुजुर्ग दादा-दादी या नाना-नानी की छत्रछाया में अपने आपको शक्तिशाली एवं समृद्ध महसूस करेगी। एक अवस्था के पश्चात निश्चित ही व्यक्ति में परिपक्वता और ठोसता आती है। बड़े लोगों के अनुभव से लाभ उठाकर युवा पीढ़ी भी संस्कार समृद्ध बन सकती है और वृद्धजनों के अनुभवों का वैभव और ज्ञान की अपूर्व संपदा उन्हें दुनिया की रफ्तार के साथ कदमताल करने में सहायक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हावर्ड और वर्लिन के वैज्ञानिकों/मनोचिकित्सकों ने इस दिशा में गहन खोजें की हंै। जर्मन वैज्ञानिकों ने युवाओं और बुजुर्गों के समक्ष कुछ जटिल समस्याएं तथा कुछ सुविधाजनक परिस्थितियां प्रस्तुत कीं और उन्हें हल करने को कहा। देखा गया कि जीवन संबंधी समस्याओं को सुलझाने में युवाओं की अपेक्षा बुजुर्ग लोग अधिक सफल या कुशल साबित हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य अध्ययनों/विश्लेषणों से भी यह तथ्य सामने आया कि बुजुर्गों के सामने यदि कोई लक्ष्य रख दिया जाए तो वे अपने धीमे सोचने की शक्ति की क्षतिपूर्ति अपने पैने नजरिए एवं बेहतर योजनाओं के द्वारा कर लेते हैं। यह भी एक तथ्य है कि सम्यक दृष्टिकोण, पारदर्शी सोच, परिणामों का आंकलन किसी भी चीज के अच्छे-बुरे पहलुओं को तोलने/परखने की क्षमता-ये गुण वृद्धों में अपेक्षाकृत अच्छी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। अत: आॅफिसों, संस्थाओं या घरों में बुजुर्गों को उपेक्षित करने का जो प्रचलन बढ़ रहा है, उस पर गंभीरता से पुनर्विचार की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>यह पीढ़ी उपेक्षा, भावनात्मक रिक्तता और उदासी को ओढ़े हुए है। इस पीढ़ी के चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, कमजोर आंखें, थका तन और उदास मन जिन त्रासद स्थितियों को बयां कर रही है उसके लिए जिम्मेदार है हमारी आधुनिक सोच और स्वार्थपूर्ण जीवनशैली।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
<em><strong>-ललित गर्ग</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 03:45:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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