<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/religions/tag-5068" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>religions - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/5068/rss</link>
                <description>religions RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>धर्मों पर रंग का ठप्पा</title>
                                    <description><![CDATA[सूर्योदय का मनमोहक आनंद पूरी दुनिया लेती है। उगते हुए सूर्य का रंग केसरी होता है। यह मनमोहक दृश्य हिंदू, सिक्ख, ईसाई, मुस्लमान सब धर्मों के लोगों को एक जैसा दिखाई पड़ता है। सूर्य सारी दुनिया में उगता है व अस्त होता है, जिसकी लालिमा एवं केसरिया रंग पूरी दुनिया को ऊर्जा एवं जीवन प्रदान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/mark-of-color-on-religions/article-2974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/religions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सूर्योदय का मनमोहक आनंद पूरी दुनिया लेती है। उगते हुए सूर्य का रंग केसरी होता है। यह मनमोहक दृश्य हिंदू, सिक्ख, ईसाई, मुस्लमान सब धर्मों के लोगों को एक जैसा दिखाई पड़ता है। सूर्य सारी दुनिया में उगता है व अस्त होता है, जिसकी लालिमा एवं केसरिया रंग पूरी दुनिया को ऊर्जा एवं जीवन प्रदान करता है। प्रकृति का अस्तित्व नदियां, वन, पहाड़, मौसम, सागर, मरूस्थल सब सूर्य से ही हैं, फिर भी न जाने क्यों केसरी रंग को हिंदू धर्म से ही जोड़कर देखा जा रहा है। ठीक ऐसे ही पूरी वनस्पति हरीतिमा लिए हुए है, लेकिन हरे रंग को कुछ लोगों ने अपना ठप्पा लगा रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विगत दिनों एक मुस्लमान महिला ने जो कांग्रेस से जुड़ी हैं, ने केसरी रंग के वस्त्र क्या पहन लिए धर्म के ठेकेदारों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। उसके खिलाफ फतवे देने लग गए। फतवा देने वालों ने साफ-साफ धमका दिया कि केसरी रंग पहनना है तो इस्लाम छोड़ दो। किस धर्म ग्रंथ में लिखा है कि इस्लाम, हिंदु, सिक्ख धर्म वाले किस रंग को पहनें किसे नहीं। भारत के हिंदू, सिक्ख, ईसाई हर रंग को पहन लेते है, उन्हें कभी नहीं टोका जाता कि फलां-फलां रंग नहीं पहनना, चूंकि वह जानते है कि रंग से धर्म नहीं बदलता। धर्म के ठेकेदार लोगों को क्यों मिल-जुल कर नहीं रहने देना चाहते। जिस तरह प्रकृति की गोद में हरा-नीला-पीला-लाल सभी रंग रह रहे है।</p>
<p style="text-align:justify;">नदियां, नाले, पहाड़, हरियाली, मिट्टी भी एक-दूसरे के रंग के चलते अपना गुण धर्म नहीं बदलते। रंग कोई बम्ब नहीं कि पहनने से विस्फोट हो जाएगा। धर्म तो गुणों की बात करते है। इस्लाम में ईमान, दया, मुहब्बत की बातें ही इसके असली रंग हैं। फिर 21वीं सदी में पहुंच कर यदि कुछ धर्म के ठेकेदार रंगों की बात करते हैं तो यह अपने-आप में ही बेहद घृणित सोच का परिचय है। अगर किसी को रंगों से नफरत है फिर वह प्रकृति के रंगों का भी बहिष्कार करें सूर्य केसरियां रंग, फूलों का रंग इन सबकों भी बदल दें स्पष्ट है ये बदलें नहीं जा सकते।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां रंगों का विरोध सिर्फ नफरत फैलाने के लिए किया जाता है ताकि धर्म की दुकान चलती रहे। फतवा व धमकी देने वालों को चाहिए कि वह समाज में कुछ बदरंग है उन्हें मिटा दें। गरीबी, नशा,नारी-उत्पीड़न, अनपढ़ता, हिंसा, लूट, चरित्रहीनता, भ्रष्टाचार इन बदरंगों को हटाकर इनकी जगह ईमान, मुहब्बत, सहयोग, शिक्षा, खुशहाली के रंग भरे जाएं। रंग प्रकृति का हिस्सा है इनसे नफरत करने से कुछ हासिल नहीं होगा। रंगों से प्यार करने पर सबके जीवन में रंग भर जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/editorial/mark-of-color-on-religions/article-2974</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/editorial/mark-of-color-on-religions/article-2974</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 03:58:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/religions.jpg"                         length="57923"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        