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                <title>washington - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अमेरिका के सीनियर मिलिट्री कमांडर ने व्हाइट हाउस से ईरान के साथ टकराव खत्म करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के सीनियर मिलिट्री कमांडर ने व्हाइट हाउस से ईरान के साथ टकराव खत्म करने की अपील की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/senior-us-military-commander-appeals-to-white-house-to-end/article-89381"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/washington.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के जॉइंट चीफ्स आॅफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन कई हफ्तों से व्हाइट हाउस से ईरान के साथ टकराव खत्म करने का कोई रास्ता निकालने की अपील कर रहे हैं। सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। एक सूत्र ने कहा, "केन इस मामले से बाहर निकलने का रास्ता (आॅफ- रैम्प) ढूंढ रहे हैं।" टीवी चैनल के मुताबिक जनरल केन ने हाल के हफ्तों में कैबिनेट के अहम सदस्यों ( जिनमें वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस, सेक्रेटरी आॅफ स्टेट मार्को रुबियो और सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ शामिल हैं) के साथ कई गोपनीय बैठकें की हैं। इन बैठकों का मकसद अपनी राय में तालमेल बिठाना और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के मामले में तनाव और बढ़ाने से जुड़े जोखिमों और गतिरोध के बारे में बताना था।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेना और खुफिया समुदाय में यह समझ बढ़ रही है कि ईरान के साथ टकराव में एयरपावर (हवाई ताकत) की भूमिका सीमित है, और जनरल केन खुद भी इसी राय से सहमत हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर हवाई हमलों से ईरान घुटने नहीं टेकेगा, बल्कि इससे फारस की खाड़ी में मौजूद सहयोगियों पर जवाबी हमले भड़क सकते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ 30-60 दिनों के संघर्ष-विराम समझौते पर जल्द ही सहमति बन सकती है।<br />अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अगस्त को कहा था कि उन्होंने ईरान पर हमले इसलिए रोक दिए क्योंकि एक समझौता होने वाला है; इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:36:57 +0530</pubDate>
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                <title>'ईरान नहीं बचेगा', ट्रम्प बोले- फ्रीज किए गए अरबों डॉलर से वसूला जाएगा हर्जाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान को चुकानी होगी भारी कीमत, फ्रीज की गई संपत्ति से जहाज के नुकसान की भरपाई करेगा अमेरिका: ट्रम्प]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/iran-will-not-be-saved-trump-said-damages-will/article-88616"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/washington1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान वाणिज्यिक जहाजों या कार्गो को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई अमेरिका के कब्जे में मौजूद ईरान की जब्त की गयी संपत्ति से की जाएगी। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका तुरंत युद्धविराम करने के बजाय ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर लिखा, "जहाजों या कार्गो को हुए किसी भी नुकसान का भुगतान ईरान के उस पैसे से किया जाएगा जो अमेरिका के कब्जे और नियंत्रण में है।" उन्होंने कहा, "ये नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है, लेकिन फिर भी, यही सही और उचित कदम है।" ट्रंप का यह बयान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने के एक दिन बाद आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल हो गयी हैं। लाल सागर में जहाजों पर हुए हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों से पहले से ही पैदा हुई दिक्कतों को और बढ़ा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की अरबों डॉलर की जब्त की गयी संपत्ति का मामला लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच सबसे विवादित मुद्दों में से एक रहा है। जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते (एमओयू ) में इन संपत्तियों को जारी करना एक मुख्य बात थी, लेकिन तनाव बढ़ने और दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होने के कारण वह समझौता असल में खत्म हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ तुरंत युद्धविराम की संभावना को भी खारिज कर दिया और कहा कि लगातार सैन्य दबाव बनाए रखना जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी में पत्रकारों से बात करते हुए श्री ट्रंप ने कहा, "हम ईरान के खिलाफ बहुत अच्छा कर रहे हैं, हम बहुत ही अच्छा कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "वे कुछ करना चाहते हैं, लेकिन मेरा कहना है कि वे अभी तैयार नहीं हैं। उन्हें अभी और दबाव की जरूरत है।" श्री ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर कुछ बुरे इरादे रखने का आरोप लगाया और अपनी पुरानी बात दोहराई कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा। ये बातें तब कही गईं जब अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले किए। अमेरिका के केंद्रीय कमान (सेंटकॉम ) ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि ताजा अभियान शाम 6:45 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरान को जवाबदेह ठहराना और वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से होने वाले खतरों को कम करना था।</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में, सेंटकॉम ने घोषणा की कि हमले रात नौ बजे खत्म हो गये। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य कमान केंद्रों , ड्रोन स्टोरेज केंद्रों , संचार नेटवर्क, तटीय निगरानी केंद्रों और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले आम नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए ईरान से होने वाले खतरे को और कम किया जा सके।" सेना ने निशाना बनाए गए ठिकानों की संख्या या नुकसान का कोई ब्योरा नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के ये ताजा अभियान एक हफ़्ते से ज्यादा समय से चल रहे लगातार हवाई हमलों के बाद हुए हैं। ये हमले तब शुरू हुए जब ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में ईरानी शिपिंग पर नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर से लागू कर दी है, जिससे संघर्ष और बढ़ गया है। इलाके में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। लाल सागर में हूती हमलों से तेल निर्यात के एक और अहम समुद्री रास्ते पर खतरा पैदा हो गया है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से पहले से ही हो रही रुकावटें और बढ़ गई हैं। इन हालात के चलते मई के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस टकराव की वजह से अमेरिका में भी राजनीतिक मतभेद पैदा हो गए हैं। अमेरिकी हाउस आॅफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। हालांकि सीनेट में ऐसा ही एक प्रस्ताव पास नहीं हो सका। भले ही ये वोट प्रशासन के लिए बाध्यकारी नहीं थे, लेकिन इनसे कुछ सांसदों के बीच ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति के युद्ध-संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता जाहिर हुई। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बावजूद, ट्रंप ने संकेत दिया कि तेहरान पर सैन्य दबाव कम नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए "तैयार नहीं" है और लगातार हमले करना ही अमेरिका का पसंदीदा रास्ता बना रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:03:07 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में तैनात किये एफ-16, एफ-35 लड़ाकू विमान : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में तैनात किये एफ-16, एफ-35 लड़ाकू विमान : रिपोर्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/america-deployed-f-16-f-35-fighter-planes-in-west-asia-amid/article-88338"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/washington.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)। </strong>ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने यूरोप से अपने पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 और एफ-16 लड़ाकू विमानों को पश्चिम एशिया भेजना शुरू कर दिया है। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दी गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, एफ-16 लड़ाकू विमानों को जर्मनी के स्पैंगडाहलेम एयर बेस से, जबकि एफ-35 विमानों को ब्रिटेन के लेकेनहीथ एयर बेस से पश्चिम एशिया भेजा जा रहा है। इसके अलावा हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमान भी क्षेत्र में तैनात किये जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि 18 जून की रात ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये थे, हालांकि आठ जुलाई से अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई हमले किये हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने दावा किया कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ईरान की गतिविधियों के जवाब में की गयी। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम संबंधी समझौते का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया। नौ जुलाई को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 11:48:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान जंग के बीच ट्रंप की टीम में दरार? सनी जॉय नेल्सन के इस्तीफे से बढ़ीं चर्चाएं</title>
                                    <description><![CDATA[Donald Trump के प्रशासन में लगातार हो रहे बदलावों और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों के बीच अब उनकी करीबी सहयोगी Sonny Joy Nelson ने भी व्हाइट हाउस छोड़ने का फैसला किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-is-a-rift-in-trumps-team-amid-iran-war/article-85716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/donald-trump.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>Donald Trump के प्रशासन में लगातार हो रहे बदलावों और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों के बीच अब उनकी करीबी सहयोगी Sonny Joy Nelson ने भी व्हाइट हाउस छोड़ने का फैसला किया है। नेल्सन राष्ट्रपति ट्रंप की स्पेशल असिस्टेंट और व्हाइट हाउस की मीडिया अफेयर्स डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने जनवरी 2025 में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p><p style="text-align:justify;">अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट के अनुसार, सनी जॉय नेल्सन अब अपनी नई मीडिया और कम्युनिकेशन कंसल्टिंग कंपनी Cornerstone Strategics शुरू करने जा रही हैं। इस फर्म का फोकस टीवी, रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए मीडिया बुकिंग और कम्युनिकेशन रणनीति तैयार करने पर रहेगा।</p><p style="text-align:justify;">नेल्सन ट्रंप के 2024 चुनावी अभियान की शुरुआती कम्युनिकेशन टीम का हिस्सा थीं और बाद में व्हाइट हाउस में मीडिया अफेयर्स डायरेक्टर बनीं। उन्होंने प्रशासन की मीडिया रणनीति को मजबूत बनाने और विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। MAGA (Make America Great Again) आंदोलन में भी उन्हें प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है।</p><p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार उनका व्हाइट हाउस में आखिरी कार्य दिवस था। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर भी इस खबर की पुष्टि की। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि नेल्सन राजनीति जगत की सबसे प्रभावशाली मीडिया बुकर्स में से एक हैं और मीडिया जगत में उनके व्यापक संपर्क हैं।</p><p style="text-align:justify;">नेल्सन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन में कई बड़े बदलाव और उच्च-स्तरीय अधिकारियों के प्रस्थान की खबरें सामने आ रही हैं।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/donald-trump.jpeg" alt="Donald Trump" width="767" height="434"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 13:27:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लंबे समय तक चलने वाली मंदी की चपेट में आ सकता है वैश्विक व्यापार</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। पश्चिम एशिया का संघर्ष दुनिया भर के व्यवसायों को एक लंबे आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है। यह बात नेविगेटर प्रिंसिपल इन्वेस्टर्स कंपनी के निदेशक काइल शोस्टैक ने रूसी न्यूज एजेंसी आरआईए नोवोस्ती से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, “व्यवसायों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे खुद को अलग-अलग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/global-trade-could-be-gripped-by-a-prolonged-downturn-due-to-the-ongoing-conflict-in-west-asia/article-83872"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/washington-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> पश्चिम एशिया का संघर्ष दुनिया भर के व्यवसायों को एक लंबे आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है। यह बात नेविगेटर प्रिंसिपल इन्वेस्टर्स कंपनी के निदेशक काइल शोस्टैक ने रूसी न्यूज एजेंसी आरआईए नोवोस्ती से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, “व्यवसायों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे खुद को अलग-अलग उद्योगों में एक लंबी आर्थिक मंदी की ओर फिसलते हुए देख रहे हैं। यह संघर्ष जितना लंबा चलेगा, व्यवसायों के लिए यह उतना ही अधिक कष्टदायक होगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि एशिया और अफ्रीका के उभरते बाजारों की कंपनियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कंपनियों के पास जोखिम कम करने के लिए बहुत कम गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि वे अपनी ऊर्जा आपूर्ति, ग्राहक आधार और पूंजी के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “हालांकि, यह कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल।” गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में तेहरान सहित कई ठिकानों पर हमले किये, जिससे नुकसान हुआ और आम नागरिकों की जान गयी। ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका और ईरान सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। इस तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग ठप हो गयी है। यह फारसी खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों तक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, और इसके कारण ईंधन की कीमतें बढ़ गयी हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 11:09:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका के व्हाइट हाउस में अंधाधुंध गोलीबारी, बाल-बाल बचे ट्रम्प</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के वाशिंगट में व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बडे़ अधिकारी मौजूद थे। गोलीबारी के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप और अन्य शीर्ष नेताओं को तत्काल बाहर निकाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indiscriminate-shooting-at-the-us-white-house-trump-narrowly-escapes/article-83868"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/washington-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के वाशिंगट में व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बडे़ अधिकारी मौजूद थे। गोलीबारी के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप और अन्य शीर्ष नेताओं को तत्काल बाहर निकाल लिया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार रात घटित हुई घटना के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ की। उन्होंने लिखा उन्होंने (सुरक्षा कर्मियों) तेजी से और बहादुरी से काम किया। ट्रंप ने फिर से कार्यक्रम में शामिल होने का इरादा जाहिर किया लेकिन कहा कि वह सुरक्षा अधिकारियों के निदेर्शों का पालन करेंगे। ट्रम्प ने लिखा, “हमलावर को पकड़ लिया गया है और मैंने सुझाव दिया है कि हम शो जारी रहने दें, लेकिन मैं पूरी तरह से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निदेर्शों का पालन करूंगा। वे जल्द ही कोई फैसला लेंगे। उनका फैसला चाहे जो भी हो, यह शाम वैसी नहीं होगी जैसी योजना बनाई गई थी। हमें बस इसे सीधे, फिर से करना होगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया में जारी वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सीक्रेट सर्विस एजेंट ने राष्ट्रपति ट्रंप को घेर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति और वहां मौजूद लोग अपनी मेज के पीछे छिपते हुए दिखे, जबकि लोग चिल्ला रहे थे- नीचे झुक जाओ और नीचे ही रहो। इसके बाद सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स श्री ट्रंप को तेजी से मंच से दूर ले गये, जिसके बाद भारी हथियारों से लैस एजेंट्स ने स्टेज को घेर लिया। उल्लेखनीय है कि व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर एक ‘ब्लैक-टाई’ कार्यक्रम है, जिसकी मेजबानी उन पत्रकारों का संघ करता है जो अमेरिकी राष्ट्रपति को कवर करते हैं; यह कार्यक्रम हर साल वाशिंगटन हिल्टन के विशाल बॉलरूम में आयोजित किया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 10:45:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इजरायल-लेबनान ने तीन दशक बाद की सीधी बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। लेबनान और इजरायल ने तीन दशकों से अधिक समय के बाद अपनी पहली राजनयिक वार्ता की है, जो इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह समूह के बीच लड़ाई को समाप्त करने के उद्देश्य से की गई एक दुर्लभ मुलाकात है। यह जानकारी बुधवार को बीबीसी ने दी। इस वार्ता की मध्यस्थता अमेरिकी विदेश मंत्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/israel-and-lebanon-hold-direct-talks-after-three-decades/article-83459"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/washington.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> लेबनान और इजरायल ने तीन दशकों से अधिक समय के बाद अपनी पहली राजनयिक वार्ता की है, जो इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह समूह के बीच लड़ाई को समाप्त करने के उद्देश्य से की गई एक दुर्लभ मुलाकात है। यह जानकारी बुधवार को बीबीसी ने दी। इस वार्ता की मध्यस्थता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की जिन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने का यह एक ऐतिहासिक अवसर था। अमेरिका ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्ष एक निश्चित समय और स्थान पर सीधी बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। इजरायल ने कहा कि वह सभी गैर-सरकारी आतंकवादी समूहों को निरस्त्र करना चाहता है जिसका मतलब हिज्बुल्लाह से है। लेबनान ने युद्धविराम और मानवीय संकट से निपटने के उपायों की मांग की। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं और उनके बीच आखिरी सीधी उच्च स्तरीय वार्ता 1993 में हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में अमेरिकी-इजरायली हमलों के कुछ ही दिनों बाद, दो मार्च को लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। मंगलवार को वाशिंगटन में दोनों पक्षों की बैठक के दौरान हिज्बुल्लाह ने लेबनान में इजरायल और इजरायली सैनिकों पर कम से कम 24 हमलों की जिम्मेदारी ली। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने वार्ता के बाद एक बयान में कहा कि इजरायल और लेबनान दोनों हिजबुल्लाह के प्रभाव को कम करने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि लेबनानी पक्ष ने देश में “गंभीर मानवीय संकट से निपटने और उसे कम करने के लिए युद्धविराम और ठोस उपायों” की भी मांग की। हालांकि उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने हिजबुल्लाह के हमलों से खुद की रक्षा करने के इजरायल के अधिकार के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है। बैठक से पहले पत्रकारों से बात करते हुए श्री रूबियो ने कहा कि यह बैठक एक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, “इसमें समय लगेगा, लेकिन हमें विश्वास है कि यह प्रयास सार्थक होगा। यह एक ऐतिहासिक सम्मेलन है जिस पर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">एक बयान में, लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वार्ता “सामान्य रूप से लेबनानी लोगों और विशेष रूप से दक्षिण में रहने वाले लोगों की पीड़ा के अंत की शुरूआत का प्रतीक होगी”। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का एकमात्र समाधान यही होगा कि लेबनानी सशस्त्र बलों को क्षेत्र की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सौंपी जाए। उल्लेखनीय है कि हिजबुल्लाह का सामना करने की लेबनानी सरकार की क्षमता सीमित है। हालांकि वार्ता से पहले, हिज्बुल्लाह के एक वरिष्ठ सदस्य ने एपी समाचार एजेंसी से कहा कि वह वाशिंगटन में हुए किसी भी समझौते का पालन नहीं करेगा। हिज्बुल्लाह की राजनीतिक परिषद के सदस्य वाफिक सफा ने कहा कि हम उनके द्वारा सहमत किसी भी बात से बंधे नहीं हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि इस्लामाबाद में ईरान के साथ वार्ता की पुष्टि होने से एक महीने पहले ही इजरायल-लेबनान वार्ता की योजना बनाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 10:52:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने ईरान में 11,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमला किये: सेंटकॉम</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान 11,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किये है। अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) यह जानकारी दी है। सेंटकॉम द्वारा एक्स पर पोस्ट की गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अब तक 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किये है, जिसमें 150 से ज्यादा क्षतिग्रस्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-attacked-over-11000-military-targets-in-iran-centcom/article-82852"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/washington-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान 11,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किये है। अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) यह जानकारी दी है। सेंटकॉम द्वारा एक्स पर पोस्ट की गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अब तक 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किये है, जिसमें 150 से ज्यादा क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए जहाज शामिल हैं। सेंटकॉम ने दावा है कि अमरीकी वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने 11,000 से ज्यादा उड़ानें भरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमला करना शुरू किया था। ईरान, इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर भी जवाबी हमला कर रहा है। अमेरिका और इजरायल ने इस सैन्य अभियान की शुरूआत को एक ‘पहले से किया गया हमला’ बताया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से कथित खतरों का हवाला दिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 11:48:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रम्प ने ईरान के ऊर्जा संयंत्र पर हमले को 10 दिनों के लिए किया स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि ईरानी सरकार के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की प्रक्रिया को 10 दिनों के लिए रोक दिया है। ट्रम्प ने कहा कि वे इस प्रक्रिया को छह अप्रैल को पूर्वी समयानुसार रात आठ बजे तक के लिए स्थगित कर रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trump-postpones-attack-on-irans-energy-plant-for-10-days/article-82777"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/washington-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि ईरानी सरकार के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की प्रक्रिया को 10 दिनों के लिए रोक दिया है। ट्रम्प ने कहा कि वे इस प्रक्रिया को छह अप्रैल को पूर्वी समयानुसार रात आठ बजे तक के लिए स्थगित कर रहे हैं। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, “ईरानी सरकार के अनुरोध पर, मैं ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की अवधि को 10 दिनों के लिए सोमवार, छह अप्रैल को रात आठ बजे (पूर्वी समय) तक रोक रहा हूं।” उन्होंने दोहराया कि बातचीत जारी है और फर्जी मीडिया और अन्य लोगों द्वारा इसके विपरीत दिए गए गलत बयानों के बावजूद, यह बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। हालांकि ईरान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत चल रही है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:21:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका सेना एक सीटी स्कैन मशीन यूक्रेन भेजेगी</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी सेना एक सीटी स्कैन मशीन यूक्रेन को देने तथा चिकित्सा कर्मियों को इसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना बना रही है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी रिया नोवोस्ती ने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह जानकारी दी। दस्तावेजों के अनुसार, ठेकेदार को न केवल उपकरण वितरित और स्थापित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-us-military-will-send-a-ct-scan-machine-to-ukraine/article-82736"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/washington-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी सेना एक सीटी स्कैन मशीन यूक्रेन को देने तथा चिकित्सा कर्मियों को इसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना बना रही है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी रिया नोवोस्ती ने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह जानकारी दी। दस्तावेजों के अनुसार, ठेकेदार को न केवल उपकरण वितरित और स्थापित करना होगा, बल्कि इसे चलाने के लिए स्थानीय विशेषज्ञों को प्रशिक्षित भी करना होगा। इसके साथ ही सिस्टम मैनुअल भी यूक्रेनी भाषा में प्रदान करना होगा। इस परियोजना की देखरेख अमेरिकी सेना की 409वीं कॉन्ट्रैक्टिंग सपोर्ट ब्रिगेड द्वारा की जा रही है, जो जर्मनी में स्थित है। अनुबंध उस कंपनी को दिए जाने की उम्मीद है जो सभी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए सबसे कम कीमत की पेशकश करेगी और इसके लिए आवेदन अप्रैल 2026 के अंत तक स्वीकार किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">खरीद की शर्तों के अनुसार, उपकरण पहले स्टुटगार्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पहुंचाए जाएंगे और फिर यूक्रेन भेजे जाएंगे। वितरण की समय सीमा अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से 90 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। रूस ने बार-बार कहा है कि यूक्रेन को पश्चिमी हथियारों की आपूर्ति सैन्य संघर्ष के समाधान में बाधा डालती है और यह नाटो देशों को संकट का एक पक्ष बनाती है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन के लिए हथियारों वाले किसी भी कार्गो को रूसी सेना के लिए वैध लक्ष्य माना जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:53:06 +0530</pubDate>
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                <title>भारत के लिए अच्छी खबर अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए कुछ समय के लिए पाबंदियों पर ढील दे दी है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने कुछ समय के लिए पाबंदियों में ढील दी है, ताकि भारत समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सके। अमेरिका के वित्त मंत्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/good-news-for-india-america-gives-approval-to-buy-oil-from-russia/article-82005"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/washington-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए कुछ समय के लिए पाबंदियों पर ढील दे दी है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने कुछ समय के लिए पाबंदियों में ढील दी है, ताकि भारत समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सके। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 30 दिन की छूट से वैश्विक बाजार में तेल की आवाजाही बनी रहेगी ईरान की वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने की कोशिश से पैदा हुए दबाव को कम किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बेसेंट ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि यह कदम एक जानबूझकर उठाया गया अल्पकालीन है जिससे रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा क्योंकि इसमें सिर्फ वही तेल शामिल है जो पहले से समुद्र में फंसा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद रूसी तेल पर पाबंदी लगा दी, जिससे खरीदारों को दूसरे विकल्प ढूंढने पड़े थे।भारत रूस ऊर्जा का एक बड़ा खरीदार है और अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला है कि वह हमले के लिए पैसे का बहाव कम करने की कोशिश में उसका (रूस) तेल खरीदना बंद कर दे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 10:43:40 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने की खाई कसम, संघर्ष तेज</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन/नयी दिल्ली, (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को चेतावनी दी कि ईरान पर सैन्य हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वाशिंगटन के सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। उन्होंने तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने की कसम खाई। ट्रंप की ये टिप्पणी ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trump-vows-to-avenge-the-deaths-of-american-soldiers-intensifying-conflict/article-81857"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/washington.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/नयी दिल्ली, (एजेंसी)।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को चेतावनी दी कि ईरान पर सैन्य हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वाशिंगटन के सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। उन्होंने तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने की कसम खाई। ट्रंप की ये टिप्पणी ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं, को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले करने के बाद शत्रुता में तीव्र वृद्धि के बीच आई है। ईरानी कार्रवाई को अमेरिका और इजरायल द्वारा पहले किए गए संयुक्त हमलों का प्रतिशोध बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने इजरायल के साथ मिलकर किए गए एक बड़े समन्वित हमले के बाद पिछले 24 घंटों में ईरान के अंदर 1,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और लगभग 40 वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारी मारे गए, जिससे ईरान के नेतृत्व ढांचे को निर्णायक झटका लगा है। इस स्थिति ने व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है, जिसके चलते खाड़ी देशों ने अपनी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधी रात के बाद अपने इजरायली समकक्ष को फोन किया और उनसे स्थिति पर चर्चा की। बाद में मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करने के लिए फोन पर बात हुई। हाल के घटनाक्रमों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। भारत ने शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने की आवश्यकता को दोहराया।”</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 10:43:40 +0530</pubDate>
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