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                <title>Farmer - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Farmer RSS Feed</description>
                
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                <title>पटियाला के शक्ति विहार में जोनल स्तर पर बिजली कर्मचारियों और किसान संगठनों का प्रदर्शन  </title>
                                    <description><![CDATA[पावरकॉम की जमीनें किसी भी हालत में बिकने नहीं देंगे बिजली संशोधन बिल लागू होने से खत्म होगी क्रॉस सब्सिडी, निजीकरण का खतरा बढ़ा पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर तूर)। Patiala News: सरकार द्वारा पावरकॉम की जमीनें बेचने के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और भाईचारा संगठनों ने आर-पार का संघर्ष शुरू कर दिया है। संगठनों के नेताओं ने घोषणा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/demonstration-by-electricity-employees-and-farmers-organizations-in-shakti-vihar-patiala/article-80176"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/patiala-news-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पावरकॉम की जमीनें किसी भी हालत में बिकने नहीं देंगे</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>बिजली संशोधन बिल लागू होने से खत्म होगी क्रॉस सब्सिडी, निजीकरण का खतरा बढ़ा</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर तूर)। </strong>Patiala News: सरकार द्वारा पावरकॉम की जमीनें बेचने के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और भाईचारा संगठनों ने आर-पार का संघर्ष शुरू कर दिया है। संगठनों के नेताओं ने घोषणा की कि बिजली बोर्ड की जमीनें किसी भी हालत में बेचने नहीं दी जाएंगी। इस दौरान उन्होंने बिजली मंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार कॉपोर्रेट घरानों के दबाव में काम कर रही है। Patiala News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार पटियाला के शक्ति विहार में, जहां पावरकॉम की जमीन सरकार द्वारा बेची जा रही हैं, वहां जोनल स्तर पर धरना दिया गया। इस प्रदर्शन में कर्मचारियों के साथ-साथ किसान और अन्य भाईचारा संगठन भी शामिल हुए और बिजली कर्मचारियों के समर्थन में खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">इंजीनियर अजैपाल सिंह अटवाल, पदमजीत सिंह, जतिंदर गर्ग, दविंदर सिंह, परमहजीत सिंह खटड़ा और अमनदीप जेहलवी ने संबोधन में कहा कि पंजाब सरकार राज्य के विभिन्न शहरों में स्थित पावरकॉम की कीमती जमीनों को विशेष सरकारी योजना के तहत बेचने की राह पर है, जोकि बेहद गलत निर्णय है। उन्होंने कहा कि ये जमीनें भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत खरीदी गई थीं और इन्हें जनहित में उपयोग किया जाना चाहिए। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए इन जमीनों का इस्तेमाल नए सब-स्टेशन, आधुनिक कार्यालयों और स्टोरों के निर्माण के लिए होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार जल्दबाजी में लोकविरोधी बिजली संशोधन बिल 2025 को बजट सत्र 2026 में लागू करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद बिजली क्षेत्र पर कॉपोर्रेट का कब्जा हो जाएगा। बिजली कर्मचारी संघर्षशील मोर्चा, पेंशनर्स एसोसिएशन और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने मांग की कि जमीनों की बिक्री प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। उन्होंने कहा कि इन जमीनों को रियल एस्टेट एजेंटों के हाथों में देने की बजाय बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उसके विस्तार के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। Patiala News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हत्या की गुत्थी सुलझी, तीन आरोपी गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/three-accused-arrested-in-lehragaga-murder-case/">हत्या की गुत्थी सुलझी, तीन आरोपी गिरफ्तार</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/demonstration-by-electricity-employees-and-farmers-organizations-in-shakti-vihar-patiala/article-80176</link>
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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 21:10:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Watermelon Farming : तरबूज की मिठास ने खारियां के किसान कृष्ण कालड़ा को बनाया लखपति</title>
                                    <description><![CDATA[किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि फसल की देखरेख, अच्छी पैदावार लेने के लिए उसने पड़ोसी राज्य के जिला फाजिल्कां से बलवंत सिंह व सुनील कुमार को 20 प्रतिशत बटाई पर रखा है, जिन्होंने कृषि विभाग रानियां से एचडीओ प्रोमिला के मार्गदर्शन में तरबूज (Watermelon Farming) की अच्छी पैदावार व गुणवता के लिए समय-समय पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/beneficial-farming-of-watermelon/article-57608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/watermelon-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि फसल की देखरेख, अच्छी पैदावार लेने के लिए उसने पड़ोसी राज्य के जिला फाजिल्कां से बलवंत सिंह व सुनील कुमार को 20 प्रतिशत बटाई पर रखा है, जिन्होंने कृषि विभाग रानियां से एचडीओ प्रोमिला के मार्गदर्शन में तरबूज (Watermelon Farming) की अच्छी पैदावार व गुणवता के लिए समय-समय पर जैविक खाद-उर्वरक, पानी, स्प्रै, निराई-गुड़ाई का कार्य किया। </strong></em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुनील कुमार खारियां। </strong>ग्रीष्म ऋतु के समय में बाजार में तरबूज की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है। ऐसे में गर्मी के मौसम में किसानों के लिए तरबूज की खेती करना काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। जो कम लागत में किसान को कुछ ही समय में लखपति बना सकती है। सरसा जिले के गांव खारियां निवासी कृष्ण कुमार कालड़ा ऐसे किसान हैं जो अल्प समय में तरबूज की खेती से लखपति बन गए।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि कृष्ण कुमार करीब दो वर्ष पूर्व तक एक बिजनेसमैन थे, जो गांव में खुद के पैट्रोल पंप का संचालन करते थे। खुद की जमीन जायदाद के चलते कृष्ण कुमार ने पैट्रोल पंप बेच कर खेती करने की मन में ठानी, लेकिन पिछले वर्षों में कपास में आई गुलाबी सुड़ी ने लाखों रुपये का घाटा पहुंचा दिया। इसके बाद कृष्ण कुमार ने कपास की खेती छोड़कर कुछ अलग करने का मन बना लिया और मात्र छह महीने में तरबूज की खेती से आठ लाख की आमदनी हासिल कर ली।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे आया तरबूज की खेती का आईडिया || Watermelon Farming</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कृष्ण कुमार बताते हैं कि उसके पास कृषि योग्य भूमी काफी है, जिसमें 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी पर भूमिहीन किसानों से खेती का कार्य करवाता है। पिछले साल नरमा व कपास की फसल में आई गुलाबी सुंडी से उसे लाखों का नुकसान उठाना पड़ा। जिससे समाधान के लिए कुछ किसानों एकत्रित होकर एक सामूहिक बैठक में खेती के तरीकों, खर्चों, नए प्रयोगों व नई खेती पर मंथन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी समय उन्हें क्षेत्र के तापमान, मिट्टी, पानी, बाजार की मांग व मौसम को ध्यान में रखते हुए तरबूज की खेती का आईडिया ध्यान में आया। जिसके बाद उसने तरबूज की खेती पर रिसर्च किया और कृषि विभाग रानियां से संपर्क कर खेती के तरीके, लगाने का उचित समय, खर्चा, आमदनी, मेहनत व मार्केट का विश्लेषण कर दो एकड़ में तरबूज की खेती करने का मन बनाया। कृष्ण कुमार के अनुसार, उसने मात्र दो लाख रूपए का रिस्क उठाकर आठ लाख रूपये की आमदनी हासिल की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुछ इस तरह से तैयार होता है तरबूज  </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कृष्ण कुमार ने बताया कि तरबूज की खेती के लिए दोमट मिट्टी, नहर का पानी तथा गर्म मौसम की जरूरत होती है। उसने दो एकड़ में तरबूज की अच्छी पैदावार उठाने के लिए उन्नत किस्म का बीज चुना। दो एकड़ के लिए साढ़े 14 हजार रूपए खर्च कर 12,000 पौधों के बीजों को 40 दिन की क्लटीवेशन के लिए मांगेआना फार्म में रखा। दिसम्बर महीने के प्रथम सप्ताह में भूमि को सिंचाई व निराई-गुड़ाई करके तैयार किया और 4-4 फिट की मेड बनाकर उस पर प्लास्टिक की मलचिंग तथा पौधों को सर्दी से बचाने के लिए करीब 12 इंच ऊंची लॉ टनल बनाई गई, जिस पर 30 हजार रूपए खर्च आया। दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह में पौधों की रोपाई करने के बाद ड्रिप के माध्यम से हर दस दिन बाद पानी व जरूरत अनुसार लिक्विड खुराक देने की प्रक्रिया जारी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">फरवरी के अन्त में बेलों पर फूल व फल की प्रक्रिया शुरू हो गई, जो अगले 20 दिनों में शहद की मिठास से भरपूर, लाल रंग तथा वजन में लगभग 5 से 7 किलोग्राम के फल तैयार होने लगे। किसान ने बताया कि दो एकड़ में लगे तरबूज के इस खेत तैयार करने से लेकर उत्पादन तक जिसमें लेबर, किराया व मंडी की दामी भी शामिल है, करीब 2 लाख रूपए खर्च आया। उसने बताया कि दो एकड़ में लगभग 1400 क्विंटल तरबूज की पैदावार हुई जिससे मार्केट रेट के अनुसार छह महीने में लगभग 8 लाख की आमदनी हुई। हालांकि गांव के नजदीक में बड़ा बाजार या मंडी ना होने के चलते तरबूज की सप्लाई या बिक्री करना बड़ा मुश्किल है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/beneficial-farming-of-watermelon/article-57608</link>
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                <pubDate>Fri, 17 May 2024 10:03:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture: आसान हुई अब कपास की खेती, ऐसे लगाएं और लाभदायक फसल पाएं</title>
                                    <description><![CDATA[Agriculture: कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण फाइबर और नकदी फसलों में से एक है। यह सूती कपड़ा उद्योग को प्राथमिक कच्चा माल सूती फाइबर प्रदान करता है। कपास भारत में छह मिलियन किसानों को प्रत्यक्ष आय प्रदान करता है, जबकि चालीस से पचास मिलियन लोग कपास के व्यापार और इसके प्रसंस्करण में शामिल हैं। बता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/now-cotton-cultivation-has-become-easier/article-56727"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/agriculture.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Agriculture: कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण फाइबर और नकदी फसलों में से एक है। यह सूती कपड़ा उद्योग को प्राथमिक कच्चा माल सूती फाइबर प्रदान करता है। कपास भारत में छह मिलियन किसानों को प्रत्यक्ष आय प्रदान करता है, जबकि चालीस से पचास मिलियन लोग कपास के व्यापार और इसके प्रसंस्करण में शामिल हैं। बता दें कि कपास का पौधा गर्म जलवायु में पनपता है। यह 60 डिग्री फारेनहाइट से कम तापमान को संभाल नहीं सकता है। यदि आप ठंडी जलवायु में रहते हैं, तो पौधे को घर के अंदर लगाना और मौसम गर्म होने पर इसे बाहर ले जाना सबसे अच्छा है। इस लेख के माध्यम से आपको बताया जा रहा है कि कपास का बीज बोते समय आपको किन कारकों का आकलन करना चाहिए।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/summer-vacation-will-start-from-this-day-in-all-schools-of-haryana/">Haryana School Holidays: हरियाणा के सभी स्कूलों में इस दिन से शुरू होगा ग्रीष्मकालीन अवकाश</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे लगाएं कपास? Agriculture</h3>
<p style="text-align:justify;">सफल फसल सुनिश्चित करने के लिए कपास के बीज बोने के लिए सावधानीपूर्वक तैयारी और बारीकियों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। बीज बोने से पहले, सही समय चुनना, मिट्टी को ठीक से तैयार करना और सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले कपास के बीज खरीदना महत्वपूर्ण है। यहां, हम कपास के बीज कैसे बोएं, सही मिट्टी चुनने से लेकर कटाई के समय तक फसल के रखरखाव के बारे में चरण-दर-चरण बताएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहला चरण | Agriculture</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में सबसे अच्छी तरह उगती है। खेत में बेहतर अंकुरण के लिए तापमान कम से कम 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। वानस्पतिक वृद्धि के लिए सर्वोत्तम तापमान 21 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच है, लेकिन फसल 43 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन कर सकती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/prepare-matka-kulfi-at-home-to-cool-your-body-in-summers/">Kulfi For Summer: गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए घऱ पर ही तैयार करें मटका कुल्फी, स्वाद भी है लाजवाब</a></p>
<p style="text-align:justify;">फल लगने की अवधि के दौरान, गर्म दिन और ठंडी रातें कपास के बीजकोष और रेशे को अच्छी तरह बढ़ने में मदद करती हैं। यह विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगता है, जैसे उत्तर में अच्छी जल निकास वाली गहरी जलोढ़ मिट्टियाँ जैसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान, केंद्र में विभिन्न गहराई की काली चिकनी मिट्टियाँ और दक्षिण में काली और मिश्रित काली और लाल मिट्टियाँ। कपास को बहुत अधिक नमकीन या बहुत गीला होना पसंद नहीं है, और यह अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में सबसे अच्छा बढ़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भूमि की बनावट और उर्वरता बीज फसलों की आवश्यकता के अनुरूप होनी चाहिए। भूमि पर कोई भी खरपतवार, स्वयंसेवी पौधे या अन्य फसल वाले पौधे नहीं हो सकते। इसे सुनिश्चित करने के लिए आप उचित खरपतवार नाशकों का उपयोग कर सकते हैं। वही फसल पिछले वर्ष नहीं उगाई जा सकी थी। यदि ऐसा है, तो खेत में जल्दी पानी डालें और पिछले सीजन में अपने आप उग आए बीजों को सूखने दें। उपजाऊ मिट्टी और पानी के निकास के रास्ते वाली भूमि चुनें। कपास के पौधों को उगाने के लिए सबसे अच्छी स्थितियाँ बिना पाले के विकास की लंबी अवधि (लगभग 175 से 225 दिन) मानी गई है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/health-insurance/">Health Insurance : हेल्थ इंश्योरेंस: मुश्किल समय का सहारा</a></p>
<p style="text-align:justify;">बीज अंकुरित होने और बीजकोष बनने के बीच कपास को कम से कम 500 मिमी पानी की आवश्यकता होती है। इसके लिए ठोस, गर्म और नम बीज क्यारियों की आवश्यकता होती है जो अच्छी तरह से तैयार की गई हों। जब आप पौधारोपण करते हैं, तो आपको मिट्टी के तापमान और अगले महीने के मौसम के पूवार्नुमान को ध्यान में रखना होगा। बीज बोने से पहले उन पर फफूंदनाशी डालने से पौध रोगों को दूर रखने में मदद मिलती है। कवकनाशी या कोई अन्य कृषि रसायन डालने से पहले, कपास की फसल की व्यापक बीमारी का निदान करना आवश्यक है। इससे आपको सही मात्रा और प्रकार के कवकनाशी डालने में मदद मिलेगी और आपके क्षेत्र में कृषि रसायनों के अधिक उपयोग को रोका जा सकेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ध्यान रखने योग्य | Agriculture</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास के बीज बोते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप बहुत अधिक गीली, बहुत ठंडी, बहुत कठोर या बहुत अधिक रसायनों वाली मिट्टी में बहुत गहराई में न बोएं। अंकुरों और जड़ों को चोट लगने से बचाने के लिए लेबल पर बताए अनुसार शाकनाशी का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। उर्वरकों का उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि बीज और पौधों को नुकसान न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले कि आप बाहर कपास लगाएं, आपको यह सुनिश्चित करने के लिए मिट्टी थर्मामीटर का उपयोग करना चाहिए कि मिट्टी कम से कम 60 डिग्री एफ गर्म हो। और अगले तीन दिनों तक हर सुबह इसे जांचें। एक बार जब तापमान इस सीमा में रहता है, तो आप मिट्टी का काम कर सकते हैं और लगभग एक इंच खाद डाल सकते हैं। खाद पौधों के लिए नाइट्रोजन, पोटेशियम और सूक्ष्म खनिज जैसे पोषक तत्व प्राप्त करने का एक शानदार तरीका है जिनकी उन्हें अच्छी तरह से वृद्धि करने के लिए आवश्यकता होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कपास बोने के लिए दूरी ऐसी होनी चाहिए कि कपास के बीज एक इंच गहरे और तीन-तीन के समूह में चार इंच की दूरी पर हों। फिर मिट्टी को ढककर दबा दें। लगभग दो सप्ताह में, बीज उगने लगेंगे। आदर्श परिस्थितियों में, वे एक सप्ताह के भीतर बढ़ने लगेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कपास के बीज अंकुरण के लिए बीजों का चयन</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास के बीजों के गुण उनकी वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समान विकास पाने के लिए आपको अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग करना चाहिए। ताजे बीजों का ही प्रयोग करना चाहिए। पुराने बीजों का उपयोग न करें जिन्हें एक वर्ष से अधिक समय से संग्रहित किया गया हो क्योंकि उनके बढ़ने की संभावना कम होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीजों की गुणवत्ता जांचने के लिए साफ किए गए बीजों को दोगुनी मात्रा में पानी में 3 घंटे के लिए भिगो दें। बीजों को छाया में तब तक सुखाएं जब तक वे पहले जैसे सूखे न हो जाएं और फिर उन्हें वापस पानी में डाल दें। मृत बीज पानी के ऊपर तैरेंगे और बह जायेंगे। सभी अच्छे बीज सींकर्स की तली में डूब जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीज भारी होने पर कपास के अंकुरण की प्रक्रिया और पौधे की मजबूती बेहतर होगी। अच्छे, मोटे बीज अपेक्षाकृत बड़े भ्रूण के कारण होते हैं, जिसमें बहुत सारा भोजन भंडार होता है और भोजन को अच्छी तरह से इधर-उधर ले जाता है, जिससे अंकुर बड़े हो जाते हैं। Agriculture</p>
<h3 style="text-align:justify;">कपास के बीज का स्थान</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास के बीजों को ढीली, समृद्ध मिट्टी वाली जगह पर रोपें जहाँ पौधों को हर दिन कम से कम 4 या 5 घंटे सीधी धूप मिले। इसे गमले में उगाया जा सकता है, लेकिन गमला कम से कम 36 इंच गहरा होना चाहिए। पौधे लगाने से पहले, मिट्टी में एक इंच खाद डालने से मदद मिलती है। यह आपको कपास में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करेगा। जब आप बहुत जल्दी बीज बोते हैं, तो उन्हें बढ़ने में अधिक समय लगता है। कुछ देर तक तापमान 60डिग्री एफ से ऊपर रहने तक प्रतीक्षा करें। जब तापमान 60 डिग्री एफ से ऊपर हो तो कपास को बीज से फूल बनने में 65 से 75 दिन लगते हैं। फूल खिलने के बाद बीज की फली तैयार होने में 50 दिन और लगते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जड़ वृद्धि का रखें ख्याल</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास के पौधे की वृद्धि में जड़ वृद्धि सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जबकि यह अंकुरित हो रहा है और अंकुर के रूप में स्थापित हो रहा है। जब बीजपत्र बाहर आते हैं, तब तक मुख्य जड़ 10 इंच तक गहरी हो सकती है और जड़ प्रणाली के बढ़ने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण समय है। ठंडी मिट्टी, अंकुर रोग, कम मिट्टी पीएच, पानी का तनाव, हार्डपैन और शाकनाशी क्षति से जड़ों की वृद्धि और पौधों का विकास धीमा हो जाता है। हालाँकि, सावधानीपूर्वक फसल प्रबंधन से इनमें से अधिकांश तनावों को कम किया जा सकता है। पौधे की जड़ें पानी और पोषक तत्व लेती हैं जो पौधे के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। कोई भी चीज जो कपास के पौधे के जीवन के शुरूआती चरण में जड़ों को बढ़ने से रोकती है, उत्पादन के मौसम को निराशाजनक बना सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब मिट्टी गर्म और गीली होती है तो कपास सबसे तेजी से बढ़ती है। नीचे कम तापमान और मिट्टी में पर्याप्त पानी की कमी चयापचय प्रक्रियाओं को धीमा कर सकती है और बीजों के बढ़ने को कठिन बना सकती है। भौतिक बाधाएँ, जैसे पपड़ी बनना, बीजों के अंकुरण को धीमा नहीं करती हैं, लेकिन वे हाइपोकोटिल्स को बाहर आने से रोक सकती हैं। इसके कारण हाइपोकोटिल्स मोटे हो जाते हैं और इस स्थिति को बड़ी शैंक या मोटी टांगों वाली कपास कहा जाता है, जिससे अंकुर कम मजबूत हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, पौधों को बढ़ने और उत्पादन के लिए पानी की आवश्यकता होती है। जब सभी बीजकोष खुल जाएं और फूली हुई गेंदों की तरह दिखने लगें, तो कपास का पौधा तोड़ने के लिए तैयार है। ऐसा रोपण के लगभग 4 महीने बाद होता है। कपास के पौधे सूख जाएंगे और बीजकोषों के टूटने से ठीक पहले उनकी पत्तियां अपने आप गिर जाएंगी। पौधों से कपास चुनते समय सुनिश्चित करें कि आप दस्ताने पहनें ताकि आपके हाथ कटें नहीं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Apr 2024 11:50:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Moti Ki Kheti : किसान बसंत सैनी ने मोती की खेती से पौने 2 साल में कमाए 18 लाख</title>
                                    <description><![CDATA[– Moti Ki Kheti – सुरेन्द्र गिल। एक समय था जब किसान गेहूं, कपास, बाजरा व धान के अलावा और कोई खेती में रुचि नहीं दिखाते थे। लेकिन समय के साथ-साथ खेतीबाड़ी के तरीके भी बदलते जा रहे हैं। हरियाणा प्रदेश के फतेहाबाद जिले में एक ऐसा किसान भी है जो मोती की खेती करके […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/moti-ki-kheti/article-56510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/moti-ki-kheti.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Moti Ki Kheti –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेन्द्र गिल।</strong> एक समय था जब किसान गेहूं, कपास, बाजरा व धान के अलावा और कोई खेती में रुचि नहीं दिखाते थे। लेकिन समय के साथ-साथ खेतीबाड़ी के तरीके भी बदलते जा रहे हैं। हरियाणा प्रदेश के फतेहाबाद जिले में एक ऐसा किसान भी है जो मोती की खेती करके लाखों रुपए कमा रहा है। दरअसल, फतेहाबाद (हरि.) जिले के गांव सिंबलवाला (टोहाना) में किसान बसंत सैनी ने करीब 3 वर्ष पहले सिप की खेती करने का मन बनाया। बसंत सैनी को यह आइडिया कोरोना काल में आया तो इस खेती के बारे में सर्च किया और लगातार डेढ़ साल तक इस पर स्टडी की। आखिरकार सितंबर 2023 में उसने सिप की खेती (Moti Ki Kheti) का व्यवसाय शुरू कर दिया। शुरूआत में आधे कनाल में मोती की खेती शुरू की। उसने बताया कि करीब पौने 2 साल में लगभग साढ़े 4 लाख रूपए खर्च आएगा, जबकि वह 18 लाख के करीब का मुनाफा कमा चुका है। खास बात यह भी है कि किसान बसंत सैनी फतेहाबाद जिले में एक मात्र किसान है जो यह खेती कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">डबल एमए कर चुके किसान बसंत सैनी ने बताया कि बाजार में मोती के प्रोडक्ट की इतनी मांग है कि एक एकड़ से लाखों रुपए कमाया जा सकता है। फतेहाबाद जिले में मोती की खेती करने वाले इस इकलौते किसान ने बताया कि मोती की खेती बहुत ही ज्यादा मुनाफा देने वाली है, लेकिन इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है। उसने बताया कि सिप की खेती के लिए सबसे पहले सिप लाई जाती है। ये सिप हमारे यहां आसपास नहीं मिलती, अपितु इनको बाहर से लाना पड़ता है। सिप दो प्रकार की होती है जिसमें एक तो समुन्द्र में पाई जाती है और दूसरी फ्रेश पानी में तैयार होती है, यानि नहरी पानी का अधिक प्रयोग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल फ्रेश पानी वाली सिप ज्यादा प्रयोग में है, क्योंकि यह आसानी से मिल जाती है। तदोपरांत सिप के अंदर न्यूक्लियस डालकर पानी में छोड़ा जाता है। इसके लिए पानी के टैंक बनाए जाते हैं। इस दौरान साफ पानी में सिपो को रखा जाता है। इसमें बकायदा फीड डाली जाती है। यहां फीड की गुणवत्ता का भी ध्यान रखना होता है, क्योंकि अगर पानी में लाल कीड़ा पैदा हो जाए तो वह सिप को नष्ट कर सकता है। इसलिए इसकी फीड और पानी बदलने का विशेष ध्यान रखें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बहुत महत्व रखती है पानी की क्वालिटी </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">टैंक के पानी का हर हफ्ते टीडीएस, आक्सीजन व अमोनिया आदि चैक होगा। अच्छे मोती के लिए पानी की हर हफ्ते जांच आवश्यक है। मोती की खेती में पानी की गुणवता का अहम योगदान है। मोती को तैयार होने में सवा साल से 2 साल तक का समय लगता है। सवा साल में आधा मोती तैयार होता है जिसको निकाला जा सकता है। लेकिन अगर पूरा मोती लेना है तो 2 साल का समय लगता है। सार-संभाल के अलावा इसमें सर्जरी करनी होती है जिसको किसान खुद ही कर सकता है। सिप की सर्जरी के बाद मोती निकाला जाता है। इस सर्जरी में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है, अन्यथा लापरवाही से सिप मर जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कहां-कहां होता है प्रयोग:</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">एक मोती की कीमत 5 हजार से लेकर 50 हजार तक हो सकती है, क्योंकि इसकी कीमत इसकी सेप, वजन और गुणवत्ता के आधार पर होती है। इसका प्रयोग ज्वेलरी में तो होता ही है इसके साथ-साथ इसका प्रयोग आयुर्वेदिक दवाइयां में भी होता है। इसके अलावा महिलाओं के कॉस्मेटिक मेकअप में भी इसका प्रयोग होता है। इसके अलावा छोटी-छोटी मूर्तियां बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। बाजार में इसकी बहुत ज्यादा मांग है। जितना गुणवत्ता वाला मोती होगा, उतनी ही ज्यादा कीमत मिलेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Apr 2024 11:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Honey Bee Farming : प्रगतिशील किसान ने 14 वर्ष में लाखों तक पहुंचाया कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[मधुमक्खी पालन: शहद से जिंदगी में घुली आनन्द की मिठास || Honey Bee Farming भगत सिंह। किसान खेती के साथ अन्य सहायक कार्य करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही कार्य कर दिखाया है हरियाणा प्रदेश के गांव गिगोरानी के किसान सोमवीर ने। दरअसल सरसा जिले के गांव गिगोरानी निवासी किसान सोमवीर ने खेती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/honey-bee-farming/article-55520"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/honey-bee-farming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>मधुमक्खी पालन: शहद से जिंदगी में घुली आनन्द की मिठास || Honey Bee Farming</strong></h3>
<div style="text-align:justify;"><strong>भगत सिंह।</strong> किसान खेती के साथ अन्य सहायक कार्य करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही कार्य कर दिखाया है हरियाणा प्रदेश के गांव गिगोरानी के किसान सोमवीर ने। दरअसल सरसा जिले के गांव गिगोरानी निवासी किसान सोमवीर ने खेती के साथ मधुमक्खी पालन (Honey Bee Farming) करना शुरू किया है। उसने बताया कि पहले कभी सोचा नहीं था कि मधुमक्खी पालन से इतनी आमदनी बढ़ेगी। सोमवीर घर पर लोगों को शहद उपलब्ध करवा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर शहद खरीदने वालों की डिमांड लगातार बढ़ रही है। वह शहद बेचकर प्रतिवर्ष करीबन दस लाख रुपये की आमदनी ले रहा है। शहद के कारोबार ने सोमवीर की किस्मत ही बदल दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">किसान सोमबीर ने बताया कि पहले 12 एकड़ भूमि पर फसल बिजाई करता था। कई बार फसलों में बीमारी की वजह से अच्छी आमदनी नहीं हो रही थी। इसके बाद वर्ष 2010 में रिश्तेदार के कहने पर मधुमक्खी पालन करने का कार्य शुरू किया। खेत में 30 बाक्स से मधुमक्खी पालन शुरू किया। मधुमक्खी पालन कर कंपनियां को शहद बेचने लगा। शहद से आमदनी होने पर मधुमक्खी के बाक्से बढ़ाकर 250 कर दिए, जिससे वर्तमान में बड़े स्तर पर शहद तैयार कर रहा है। सोमबीर ने चार साल पहले अपने स्तर पर शहद बेचने का प्लान तैयार किया। जिसे अब अपने बेटे ध्रुव के नाम पर ब्रांड के रूप में पेश कर दिया है।</div>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इंटरनेट से आते हैं ऑर्डर </strong></h3>
<div style="text-align:justify;">प्रगतिशील किसान सोमवीर ने बताया कि शहद बेचने के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया। बारहवीं कक्षा तक पढ़े सोमवीर इंटरनेट मीडिया से जुड़े रहते हैं। इससे शहद खरीदने वालों के अब इंटरनेट से अलग-अलग स्थानों से आर्डर आते हैं। इसके लिए शहद को अच्छे तरीके से साफ करने व पैकिंग अपने स्तर पर ही करते हैं। किसान सोमवीर लोगों को घर पर ही 300 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से शहद उपलब्ध करवाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Mar 2024 10:32:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किसान अर्चित सिंघल ने खेती को दिया नया मुकाम</title>
                                    <description><![CDATA[मिट्टी में नहीं, सिर्फ पानी में सब्जियां उगाकर | Agriculture गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)। वैसे तो नई-नई तकनीक हमेशा से ही इजाद की जाती रही हैं, लेकिन 21वीं सदी में वह सब मुमकिन है जिसे कभी नामुमकिन या फिर एक सपना समझा जाता था। चाहे खेती (Agriculture) हो या कोई और क्षेत्र। हर जगह तकनीक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmer-archit-singhal-gave-a-new-level-to-farming/article-54318"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/gurugram-news-11.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मिट्टी में नहीं, सिर्फ पानी में सब्जियां उगाकर | Agriculture</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)। </strong>वैसे तो नई-नई तकनीक हमेशा से ही इजाद की जाती रही हैं, लेकिन 21वीं सदी में वह सब मुमकिन है जिसे कभी नामुमकिन या फिर एक सपना समझा जाता था। चाहे खेती (Agriculture) हो या कोई और क्षेत्र। हर जगह तकनीक के इस्तेमाल से देश-दुनिया के लोग ना केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि मिट्टी की घटती प्रजनन क्षमता को नया विकल्प भी दे रहे हैं। ऐसी ही एक तकनीक के इस्तेमाल से गुरुग्राम के किसान अर्चित सिंघल ने खेती के प्रति युवाओं का भी रुझान बढ़ाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्चित सिंघल ने बिना मिट्टी के सिर्फ पानी में ही सब्जियां उगाने का काम किया है। वैसे तो हाइड्रोपॉनिक नामक यह तकनीक इजराइल की है, लेकिन भारत में भी इस तकनीक को बढ़ाना मिल रहा है। कम उपजाऊ हो चुकी यहां की मिट्टी और खारे हो चुके पानी का यह तकनीक बड़ा विकल्प है। अर्चित सिंघल सामान्य खेती तो पिछले ढाई साल से कर रहे हैं, लेकिन बिना मिट्टी के खेती उन्होंने एक साल पहले शुरू की है। अर्चित बताते हैं कि इस खेती में मिट्टी का कोई काम नहीं होता। सिर्फ पाइनलाइन के जरिये यह खेती होती है। खास बात यह है कि हाईड्रोपॉनिक तकनीक से खेती करने का कोई विशेष मौसम या समय नहीं है, बल्कि यह खेती पूरे साल की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पौधे और बेल वाली सब्जियां इस तकनीक से उगाई जाती हैं। इससे 90 प्रतिशत पानी की भी बचत होती है। इसमें पानी आरओ का चाहिए होता है। उन्होंने 2000 एनपीएस का आरओ प्लांट लगाया है। अपने पिता संजय सिंघल के साथ मिलकर खेती कर रहे अर्चित सिंघल के मुताबिक यह खेती उन स्थानों के लिए बड़ी लाभकारी है, जहां की मिट्टी उपजाऊ नहीं है और पानी भी ठीक नहीं है। इस खेती को देखने के लिए पिछले दिनों हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी अर्चित सिंघल के खेत का दौरा किया। Agriculture</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोज बढ़ती फसल को देख सकते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">पारंपरिक खेती में मिट्टी पोषक तत्वों के भंडार के रूप में कार्य करती है, जबकि हाइड्रोपोनिक खेती में पानी आधारित समाधान बढ़ती फसलों को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। हम अपनी बढ़ती फसल को सीधे देख सकते हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक में विभिन्न साधन और उपकरण शामिल होते हैं, जो एक साथ काम में लिये जाते हैं। हाइड्रोपोनिक किसानों को पौधों को बढ़ने में मदद करने के लिए इस माध्यम के साथ विशेष रूप से तैयार पोषक तत्व-घने घोल को मिलाने की आवश्यकता होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">फफूंदी से बचाने के लिए पानी को नियमित रूप से बदला भी जाता है। क्योंकि पौधों की जड़ें 24 घंटे पानी में डूबी रहती हैं। एनएफटी तकनीक खेती के लिए सबसे बेहतर है। इसमें पानी की सप्लाई देने वाला पंप आमतौर पर टाइमर से जुड़ा होता है, जो सिंचाई को स्वचालित करता है। ड्रिप सिस्टम पोषक तत्व-घने पानी को सीधे पौधों तक पहुंचाता है। इसलिए यह पानी के वाष्पीकरण को कम करके पौधों की जड़ों को नम रखने में मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हाइड्रोपॉनिक खेती के हैं कई फायदे: डा. मांगेराम गोदारा | Agriculture</h3>
<p style="text-align:justify;">जिला उद्यान सलाहकार डा. मांगेराम गोदारा का कहना है कि हाइड्रोपॉनिक सब्जी उत्पादन की आधुनिक तकनीक है। इसमें पौधों को जमीन में ना डालकर पानी से भरे उपकरणों में लगाया जाता है। आवश्यकतानुसार पोषक तत्व प्रदान किए जाते हैं। लवणीय तथा क्षारिय भूमियों में सब्जी उत्पादन सम्भव है। नेमाटोड तथा अन्य भूमिगत कीट व रोगाणुओं से मुक्ति मिलती है। संरक्षित संरचनाओं में वर्षभर उत्पादन किया जा सकता है। कीट व रोग रहित फसल उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि उच्च मूल्य वाली सब्जियों जैसे शिमला मिर्च, चैरी टमाटर, सलाद इत्यादि को वर्षभर उगाकर उच्च वर्ग व रेस्टोरेंट्स में आपूर्ति करके अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। वर्टीकल कृषि करके अधिक पैदावार ली जा सकती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Ginger Cultivation: कैसे करें अदरक की पैदावार, कितनी है लागत और कितना है मुनाफा" href="http://10.0.0.122:1245/ginger-farming-in-india/">Ginger Cultivation: कैसे करें अदरक की पैदावार, कितनी है लागत और कितना है मुनाफा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmer-archit-singhal-gave-a-new-level-to-farming/article-54318</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 16:29:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>किसान कुलवंत सिंह ने कड़े परिश्रम से खिलाए सफलता के फूल, सालाना 10 लाख आमदन</title>
                                    <description><![CDATA[म्हारी खेती-म्हारे किसान : बेटों ने भी पढ़ाई छोड़ दिया पिता का साथ, फूलों की खेती से उठा रहे अच्छा मुनाफा | Farmer ओढ़ां (सच कहूँ/राजू)। किसान (Farmer) कुलवंत सिंह भी कभी सामान्य खेती करता था, लेकिन इसमें खर्च अधिक और मुनाफा कम होने की वजह से खेती में लगभग घाटा ही उठाना पड़ता था। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmer-kulwant-singh-is-earning-around-rs-ten-lakh-annually/article-54285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/odhan-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">म्हारी खेती-म्हारे किसान : बेटों ने भी पढ़ाई छोड़ दिया पिता का साथ, फूलों की खेती से उठा रहे अच्छा मुनाफा | Farmer</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढ़ां (सच कहूँ/राजू)। </strong>किसान (Farmer) कुलवंत सिंह भी कभी सामान्य खेती करता था, लेकिन इसमें खर्च अधिक और मुनाफा कम होने की वजह से खेती में लगभग घाटा ही उठाना पड़ता था। जब उसने सबसे हटकर खेती करनी चाही तो उसे लोगों की हंसी का पात्र भी बनना पड़ा। लेकिन कुलवंत सिंह ने मन में ठानते हुए ऐसी हटकर खेती करके दिखाई जिसके चलते अब लोग उसकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं। किसान ने धीरे-धीरे इस खेती के दायरे को बढ़ाते हुए सामान्य खेती को अलविदा कह डाला। किसान कुलवंत सिंह आज सालाना करीब 10 लाख रुपये कमा रहा है। इस बारे किसान कुलवंत सिंह से सच-कहूँ ने विशेष बातचीत की।</p>
<p style="text-align:justify;">सरसा जिला के गांव छतरियां निवासी किसान (Farmer) कुलवंत सिंह घोड़ेला ने बताया कि उसके पास 10 एकड़ भूमि है। वह भी अन्य किसानों की तरह सामान्य खेती करता था, लेकिन उसमें लाभ कम और लागत अधिक होने की वजह से प्राय: घाटा ही उठाना पड़ता था। जिसके बाद उसके मन में आया कि क्यों न खेती में कुछ अलग किया जाए। जिसके बाद उसने वर्ष 1998 में बागवानी अपनाते हुए सर्वप्रथम एक कैनाल भूमि में गेंदे के फूल की खेती की। किसान ने जब फूलों की खेती शुरू की तो लोगों ने इसका उपहास उड़ाते हुए कहा कि यहां कौन से फूल खिलेंगे, वह सामान्य खेती से भी हाथ धो बैठेगा। लेकिन कुलवंत सिंह ने किसी की न सुनते हुए खूब मेहनत की। प्रथम वर्ष उसने 10 हजार रुपये मुनाफा कमाया जोकि उस समय बड़ी आमदन थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सफलता से बढ़ा दायरा | Farmer</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रथम वर्ष जब एक कैनाल में अच्छा मुनाफा हुआ तो किसान कुलवंत सिंह की रूचि इस तरफ और बढ़ गई। जिसके बाद उसने इसका दायरा बढ़ाते हुए एक एकड़ में गेंदे के फूल की खेती की। उस वक्त फूल के दाम तकरीबन 10 रुपये प्रति किलो के आसपास थे। एक एकड़ में कुलवंत सिंह ने 40 हजार रुपये का मुनाफा कमाया। जिसके बाद किसान ने इसका दायरा 3 एकड़ से 6 एकड़ में बढ़ा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">गेंदे के साथ-साथ उसने 3 कैनाल भूमि में गुलाब की खेती भी शुरू कर दी, जिसमें उसने 60 हजार रुपये का मुनाफा कमाया। फिर उसने गुलाब का भी दायरा बढ़ाते हुए एक एकड़ में गुलाब की खेती कर 4 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। मौजूदा समय में किसान करीब 7 एकड़ में गुलाब, गेंदे व अन्य किस्म के फूलों की खेती कर रखी है। इसके अलावा उसने इस बार 2 कैनाल भूमि में खजूर की नर्सरी भी तैयार की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कठिन था शुरूआती दौर</h3>
<p style="text-align:justify;">1998 में जब पहली बार कुलवंत सिंह ने फूलों की खेती शुरू की तो उसे बिक्री करने में काफी समस्या सामने आई। कारण ये था कि एक तो मोबाइल आदि संसाधन कम थे तथा दाम व बिक्री की जगह का भी पता नहीं था। इसलिए जो दाम मिलते थे उसी दामों में फसल बेच दी जाती। किसान ने ज्यों-ज्यों दायरा बढ़ाया त्यों-त्यों उसकी इस क्षेत्र में जानकारी बढ़ी। मौजूदा समय में कुलवंत सिंह के दोनों बेटे सोशल मीडिया का सहारा लेकर अच्छी मार्केटिंग करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ग्वार की फसल से भी अच्छी आमदन</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्वार की फसल को सामान्य खेती में गिना जाता है। लेकिन अगर इसे सब्जी के तौर पर लिया जाए तो इसकी काफी डिमांड होती है। शहरी क्षेत्रों में लोग इसे बड़े चाव से खरीदते हैं। फू ल की खेती के साथ-साथ किसान कुलवंत सिंह एक एकड़ में देसी ग्वार की फसल भी बोता है। जिसे वह सब्जी के रूप में मंडियों में बेचकर अच्छा मुनाफा कमाता है। इस फसल को किसान मार्च माह में बिजाई करने के बाद जुलाई तक चलाता है। किसान कुलवंत सिंह एक एकड़ ग्वार की फसल को सब्जी के रूप में बेचकर प्रतिवर्ष करीब 1.25 लाख रुपये का मुनाफा कमाता है। क्योंकि ग्वार की फली मंडी में शुरूआती दौर में तकरीबन 100 रुपये व उसके बाद 60 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बठिंडा, डबवाली, सरसा, कालांवाली क्षेत्रों में करते हैं मार्केटिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान कुलवंत सिंह के 2 बेटे हैं, जिसमें बड़ा बेटे सुनील ने बी.कॉम कर रखी है तथा छोटे बेटे राजेश ने बी.ए व जेबीटी कर रखी है। ग्रेजुऐशन करने के बावजूद भी कुलवंत के दोनों बेटे पिता के साथ खेती में लग गए। कुलवंत खेत संभालता है तथा राजेश व सुनील दोनों हर रोज अलसुबह बठिंडा, डबवाली, सरसा, कालांवाली आदि क्षेत्रों में फूलों की मार्केटिंग के लिए जाते हैं। दोनों बेटों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस कारोबार को अच्छा बढ़ा रखा है। कुलवंत सिंह व उसके दोनों बेटे पिछले 23 वर्षांे से फूलों की खेती में अच्छी आमदन उठा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस बार और भी नया | Farmer</h3>
<p style="text-align:justify;">फूलों की खेती से किसान कुलवंत सिंह की नॉलेज और बढ़ी है। उसने अपने खेत में गुलाब व गेंदे के साथ-साथ अन्य तरह के फूलों को भी शामिल किया है। जिसमें गलेडियोलस फूल भी शामिल है। ये फूल काफी सुंदर व अलग-अलग रंगों में होने के चलते इसकी डिमांड काफी रहती है। इन फूलों को खास लोगों के लिए स्वागत के रूप में बुकों में प्रयोग किया जाता है। किसान कुलवंत सिंह ने मौजूदा समय में 3 एकड़ में गुलाब, करीब 4 एकड़ में गेंदा, 3 कैनाल में गलेडियोलस व 2 कैनाल में खजूर की खेती कर रखी है। इसके अलावा किसान फूलों की अन्य वैरायटियों को भी शामिल करेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मेहनत अधिक तो आमदन भी अच्छी :-</h3>
<p style="text-align:justify;">फूल की खेती में कुलवंत सिंह व उसके दोनों बेटे अलसुबह फूल तोड़ने पहुंच जाते हैं। जब तक अन्य किसान खेतों में पहुंचते है तब तक फूल की तुड़ाई व पैकिंग होकर मार्केटिंग के लिए निकल जाती है। इस कार्य में मेहनत अधिक होने के चलते अन्य किसान अपनी सामान्य खेती को नहीं छोड़ रहे। किसान ने कहा कि भले ही इस खेती में मेहनत अधिक है, लेकिन आमदन भी तो काफी अच्छी है। किसान को फूलों की ही नहीं, बल्कि सब्जियों की खेती व किन्नु की बागवानी भी अपनानी चाहिए। किसान कुलवंत सिंह ने कहा कि जिला में फूलों का मंडीकरण न होने की वजह से बिक्री में थोड़ी परेशानी आती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जून में लड्डू गेंदा,</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सर्दी में जाफरी:-</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">किसान कुलवंत सिंह फूलों की करीब 7 वैरायटियां बोता है। कुलवंत सिंह जून में लड्डू गेंदे के फूल की बुआई करता है। ये पौधा 45 दिन में फूल देना शुरू कर देता है। ये फसल 100 दिन की है और मार्च माह तक चलती है। इन फूलों की बाजार में अच्छी-खासी डिमांड है। वहीं गेंदे में जाफरी वैरायटी की भी अच्छी मांग है। ये फूल सर्दी की फसल है। जाफरी का पौधा दिसंबर में फूल देना शुरू करता है जो मार्च तक चलता है। मार्च माह के बाद गर्मियों के लड्डू गेंदे की फसल शुरू हो जाती है। किसान कुलवंत सिंह ने बताया कि बाजार में उसका गुलाब का फूल 100 रुपये व गेंदा 60 से 70 रुपये बिक रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बागवानी अपनाकर फूलों की खेती में किसान कुलवंत सिंह अच्छा मुनाफा कमा रहा है। इस खेती में खर्च कम और आमदन अधिक है। इसका जिला में मंडीकरण न होने व कुछ मेहनत अधिक होने की वजह से किसान फूलों की खेती कम करते हैं। फूलों के साथ-साथ किसान बागवानी में अन्य फसलें भी उगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।<br />
<strong>– महावीर भादू, खंड उद्यान, विकास अधिकारी (बडागुढ़ा)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Share Market: इजराइल-हमास संघर्ष और आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर" href="http://10.0.0.122:1245/market-will-keep-an-eye-on-israel-hamas-conflict-and-economic-data/">Share Market: इजराइल-हमास संघर्ष और आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmer-kulwant-singh-is-earning-around-rs-ten-lakh-annually/article-54285</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Oct 2023 16:32:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Farmer Suicide in Anupgarh: मुकदमा दर्ज नहीं करने पर रेल से कटा किसान! बवाल-प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[Farmer Suicide in Anupgarh: श्रीगंगानगर (सच कहूँ/लखजीत)। अनूपगढ़ जिले में एक किसान ने कृषि भूमि की खरीद में कुछ शातिर लोगों द्वारा धोखाधड़ी करने और पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं करने पर रेलगाड़ी से कटकर आत्महत्या कर ली। इस घटना को लेकर आज बड़ी संख्या में लोगों ने रायसिंहनगर में पुलिस थाना का घेराव किया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/farmer-cut-off-from-train-for-not-filing-case-riotous-protest/article-53984"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/farmers-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Farmer Suicide in Anupgarh: श्रीगंगानगर (सच कहूँ/लखजीत)।</strong> अनूपगढ़ जिले में एक किसान ने कृषि भूमि की खरीद में कुछ शातिर लोगों द्वारा धोखाधड़ी करने और पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं करने पर रेलगाड़ी से कटकर आत्महत्या कर ली। इस घटना को लेकर आज बड़ी संख्या में लोगों ने रायसिंहनगर में पुलिस थाना का घेराव किया। किसान को करने के लिए मजबूर करने वाले शातिर व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। Sri Ganganagar News</p>
<h3>एसपी और थाना प्रभारी को दिए थे मृतक ने प्रार्थना पत्र | Sri Ganganagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">मृतक किसान की डेड बॉडी श्रीविजयनगर के सरकारी अस्पताल के मुर्दा घर में रखी हुई है। आज देर शाम तक लाश का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था। किसान को करने के लिए मजबूर करने के आरोपियों के खिलाफ आज देर शाम को रामसिंहपुर थाना मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इस घटना को लेकर मृतक के परिवारजनों तथा ग्रामीणों में पुलिस के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने मृतक किसान द्वारा दी गई रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज कर लेती तो वह खुदकुशी नहीं करता। Sri Ganganagar News</p>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार कल शाम को सूरतगढ़-अनूपगढ़ रेल सेक्शन पर रामसिंहपुर के समीप एक व्यक्ति ने रेलगाड़ी के आगे पटरी पर गर्दन रख कर खुदकुशी कर ली। उसकी गर्दन धड़ से अलग हो गई। मृतक की पहचान देशराज बावरी निवासी 17-एसएडी तहसील रायसिंहनगर, जिला अनूपगढ़ के रूप में हुई।सूचना मिलने पर रामसिंहपुर थाना पुलिस और जीआरपी पुलिस मौके पर पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">घटनास्थल को लेकर दोनों थानों की पुलिस में लगभग 3 घंटे तक विवाद चला रहा। बाद में इस घटना को लेकर रामसिंहपुर थाना पुलिस ने कार्यवाही की। लाश को श्रीविजयनगर के सरकारी अस्पताल के मुर्दाघर में सुरक्षित रखवा दिया गया। घटना को लेकर आज बड़ी संख्या में लोगों ने इकट्ठे होकर रायसिंहनगर में पुलिस थाने का घेराव तथा प्रदर्शन किया। तब देशराज द्वारा खुदकुशी करने के कारण का पता चला। मौके पर पुलिस को देशराज द्वारा लिखा एक सुसाइड नोट भी मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों के अनुसार देशराज ने 17 अक्टूबर को 33 लाख 25 हजार रुपए में कृषि भूमि खरीदी थी। उसे नहरी भूमि दिखाई गई जबकि बारानी भूमि बेच दी गई। देशराज को अगले ही दिन 18 अक्टूबर को धोखाधड़ी होने का पता चला तो रायसिंहनगर थाना में प्रार्थना पत्र दिया। उसे पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।अगले दिन 19 अक्टूबर को अनूपगढ़ में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इस पर भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो उसने शाम को सुसाइड नोट लिखकर खुदकुशी कर ली।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले को लेकर हंगामा तथा प्रदर्शन होने पर रामसिंहपुर थाना में धारा 306 के तहत 5-6 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी मिली है। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर ग्रामीण तथा परिवारजन पोस्टमार्टम न करवाने पर अड गए, जिसके चलते आज देर शाम तक पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया। जानकारी के मुताबिक इस सारे घटनाक्रम की जांच रायसिंहनगर के थाना प्रभारी महावीर प्रसाद बिश्नोई करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नहरी जमीन दिखाकर बेची बंजर भूमि | Sri Ganganagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">मृतक देशराज बावरी ने जमीन खरीद में हुई धोखाधड़ी के रायसिंहनगर थाना और पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में पूरे मामले का विस्तार से खुलासा किया है। देशराज के अनुसार वह कृषि भूमि खरीदना चाहता था। बाजूवाला के पास ढाणी में रहने वाले बीरबलराम, चक 6- एनजैपीडी के सुल्तानराम मेघवाल, चक 6-जेकेएम के विजयपाल, जेतसर के पास रहने वाले बॉक्सर तथा अमरजीतसिंह मानेवाला नामक दलालों से वह मिला। उन्होंने उसे चक 11-एसएडी में भूमि दिखाई और बताया कि यह जमीन बलबीरकौर बाजीगर निवासी मानेवाला,तहसील सूरतगढ़ की है।</p>
<p style="text-align:justify;">वही इस जमीन पर कब्जा काश्त है। देशराज के अनुसार उसने अपने धर्म भाई बलराज के साथ एक-दो बार जाकर जमीन को देखा। जमीन पसंद आने पर खरीदने का करार कर लिया। विगत 17 अक्टूबर को रजिस्ट्री करवाने के लिए रायसिंहनगर में सब रजिस्ट्रार के यहां अप्लाई कर दिया गया। उसने अपने और अपने बेटों अमरजीत व हेमंत के नाम से 17 अक्टूबर को 33 लाख 25 हजार रुपए में रजिस्ट्री करवा ली।उसी दिन ही इंतकाल दर्ज करने के लिए पटवारी को अप्लाई कर दिया। देशराज के अनुसार अगले दिन वह जमीन देखने गया तो वहां कुछ लोग काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मुरब्बा नंबर 4 की यह जमीन उनकी है। Anupgarh News</p>
<p style="text-align:justify;">उसने जो जमीन खरीदी है,वह मुरब्बा नंबर 3 की है, जो की चक 18-एसएडी में आती है। दोनों जमीनी साथ-साथ हैं। देशराज ने प्रार्थना पत्र में बताया कि यह पता चलने पर उसने रजिस्ट्री के समय नगद दिए 13 लाख 95000 उक्त लोगों से वापस मांगे।साथ ही बाकी रकम के भुगतान के लिए दिए हुए चार चेक कैश होने से बैंक में फोन करके रुकवा दिया। यह राशि ट्रांसफर करवाली। साथ ही 5 लाख रुपए जो इकरारनामा खरीदशुदा भूमि पर केसीसी करवा कर 8 जनवरी 24 को लौटने थे,वह भी बलवीर कौर, उसके पति जीतसिंह तथा उक्त लोगों से वापस मांगे। देशराज के अनुसार उसे इन लोगों ने नहरी भूमि दिखाकर बंजर भूमि बेच दी। उससे नगद लिए 13 लाख 95 हजार रुपए वापस करने से इनकार कर दिया। उसने बताया कि उसे जो बंजर जमीन बेची गई, उसकी कीमत 5 लाख रुपए से ज्यादा नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुसाइड नोट लिखा सारा हिसाब किताब | Sri Ganganagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">देशराज ने सुसाइड नोट में पूरा हिसाब किताब लिखा है। उसने सुसाइड की शुरुआत नोट पत्र लिखकर की है।नोट पत्र के दोनों तरफ स्वास्तिक चिन्ह भी बना है।तत्पश्चात लिखा- मेरे सहपरिवार सदस्यों मेरा किसी भी प्रकार का पीछा ना करें अथवा ना ही मिलने वाला हूं। जिसका मुझे मेरे परिवार के एक भी सदस्य से मुझे को आपत्ति नहीं। मैं मेरा काम अपनी मर्जी से कर रहा हूं और शंकरलाल 4-एनजैडपीडी से 1लाख 10000 बकाया के लेने हैं। 1लाख 30000 रुपए रामस्वरूप पुत्र रामाराम निवासी चक 33-एच से लेने हैं और बलराज भाई ने जो काम गलत किया है वह पूरा नहीं किया तो वह बलराज आप खुद जिम्मेवार होगा ताकि आगे से किसी भी प्रकार का काम गलत करने का अंजाम क्या होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बलराज की जमीन के बारे में जो जमीन 11-एसएडी की दिखाई गई और रजिस्ट्री चक 3-आईएसडब्ल्यू की कार्रवाई, उसका 15 लाख 50 हजार रुपए बलराज अगली पार्टी से लेकर दे या खुद 15 लाख 50 हजार रुपए का भुगतान करें क्योंकि मैं बलराज को पूरा सोच समझकर सौदा करना, वरना कहीं यह महंगा न पड़े की। इसकी कीमत आपको चुकानी पड़ेगी।आज दिनांक 2010 को मैंने मेरे खाते में से अपनी पत्नी को 12 लाख 45 हजार रुपए देवली देवी के खाते में डाल दिए हैं। आरएमजीबी बैंक में 1000 हजार रुपए बाकी हैं। पीएनबी बैंक में 1700 की कुछ बाकी है और 65000 आरएमजीबी से निकलवा कर इस थैले में डाल दिए हैं।मैं बिना किसी नशे पत्ते के होश हवास में अपने बयान लिख रहा हूं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Gold Silver Price Today: आगे और बढ़ सकते हैं सोने-चांदी के दाम" href="http://10.0.0.122:1245/gold-and-silver-prices-may-increase-further/">Gold Silver Price Today: आगे और बढ़ सकते हैं सोने-चांदी के दाम</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/farmer-cut-off-from-train-for-not-filing-case-riotous-protest/article-53984</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 21:57:48 +0530</pubDate>
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                <title>पशु से टकराकर किसान यूनियन सदस्य की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[टक्कर में बाद सेमनाले में गिरा व्यक्ति | Abohar News अबोहर (सच कहूँँ न्यूज)। गांव दीवानखेड़ा (Diwankhera) निवासी और किसान यूनियन के सदस्य की बीती रात सड़क पर अचानक पशु आने से उसमें टकराने के कारण मौत हो गई। घटना के समय मृतक पशु में टकराकर सेमनाले में गिर गया, जिसे आसपास के लोगों ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/farmers-union-member-dies-after-colliding-with-animal/article-52918"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/abohar-news-2-5.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">टक्कर में बाद सेमनाले में गिरा व्यक्ति | Abohar News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँँ न्यूज)।</strong> गांव दीवानखेड़ा (Diwankhera) निवासी और किसान यूनियन के सदस्य की बीती रात सड़क पर अचानक पशु आने से उसमें टकराने के कारण मौत हो गई। घटना के समय मृतक पशु में टकराकर सेमनाले में गिर गया, जिसे आसपास के लोगों ने बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला था। मृतक दो बच्चों का पिता था। जानकारी के अनुसार करीब 45 वर्षीय नीरज गगनेजा पुत्र दिवानचंद कल रात बाईक पर सवार होकर शहर से अपने घर जा रहा था कि जब वह सैदवांली के निकट पहुंचा तो सड़क पर अचानक पश्ुा आने से उसमें टकराकर सीधा सेमनाले में जा गिरा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान पीछे से आ रही एक कार में सवार लोगों ने उसे सेमनाले में गिरता देख तुरंत आसपास के लोगों की मदद से बाहर निकाला तो देखा कि वह बुरी तरह से चोटिल था, उन्होंने तुरंत उसे सरकारी अस्पताल दाखिल करवाया, जहां उसकी हालत गंभीर होने पर रैफर कर दिया गया, जिस पर परिजन उसे श्रीगंगानगर ले गए, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। Abohar News</p>
<p style="text-align:justify;">इधर मृतक नीरज की मौत पर विभिन्न किसान यूनियनों के पदाधिकारियों किसान नेता गुणवंत सिंह, सुखविंदर सिंह राजन, कुलदीप सिंह, सुधीर भादू व बबल बुटटर ने गहरा शोक व्यक्त करने के साथ ही स्थानीय प्रशासन से आवारा पशुआें की समस्या का हल करने की मांग की है, जिनके कारण आए दिन हादसे होते हैं। उन्होनें चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शीघ्र ही प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो वे संघर्ष करने को मजबूर होंगे। गौरतलब है कि कुछ समय पहले शहर में जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया पशु पकड़ने का अभियान ठंडे बसते में डाल दिया गया है। कभी कभार 1-2 पशुआें को पकड़कर केवल खानापूर्ति की जा रही है। Abohar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="महापोषण दिवस मनाकर महिलाओं को दी संतुलित खुराक की जानकारी" href="http://10.0.0.122:1245/information-about-balanced-diet-given-to-women/">महापोषण दिवस मनाकर महिलाओं को दी संतुलित खुराक की जानकारी</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2023 21:41:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नरमे पर गुलाबी सुंडी की मार, बेबस किसान दे रहे कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[किसान बोले : सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर नहीं हो रहा दवा का असर ओढां (सच कहूँ/राजू)। विगत वर्ष की बजाय इस बार नरमे की फसल बेहद अच्छी दिख रही है, लेकिन गुलाबी सुंडी किसानों को दोहरी चपेट मार रही है। किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु कीटनाशकों के छिड़काव पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/gulabi-sundi-in-cotton/article-51825"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/gulabi-sundi.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किसान बोले : सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर नहीं हो रहा दवा का असर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां (सच कहूँ/राजू)।</strong> विगत वर्ष की बजाय इस बार नरमे की फसल बेहद अच्छी दिख रही है, लेकिन गुलाबी सुंडी किसानों को दोहरी चपेट मार रही है। किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर दे रहे हैं, लेकिन सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर असर न के बराबर हो रहा है। परेशान किसानों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्या किया जाए। गांव नुहियांवाली, रत्ताखेड़ा, जंडवाला जटान, चोरमार खेड़ा, मलिकपुरा व ओढां सहित अन्य गांवों में नरमे की फसल पर गुलाबी सुंडी का काफी प्रकोप देखा जा रहा है। Gulabi Sundi</p>
<p style="text-align:justify;">गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए किसान एक सप्ताह के भीतर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन फिर भी निजात नहीं मिल रही। नुहियांवाली के किसान डॉ. जगदीश सहारण व चेतराम दादरवाल, ओढां के किसान कौर सिंह कुंडर, गुरचेत सिंह आदि ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने व पर्याप्त बरसात होने के चलते फसल पूर्व ही अपेक्षा बेहद अच्छी है, लेकिन गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु महंगे कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन फिर भी नियंत्रण नहींं हो पा रहा। सुंडी मर नहीं रही और टिंडे गलकर खराब हो रहे हैं। ऐसे में उत्पादन पर काफी विपरीत असर पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने बताया कि सुंडी की रोकथाम के लिए वे एक सप्ताह के भीतर छिड़काव कर रहे हैं। वे 8 से 10 बार छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सुंडी का ख्रात्मा नहीं हो रहा। उन्होंने बताया कि छिड़काव में प्रति एकड़ करीब 2 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। ऊपर से इस बार मजदूर भी एक हजार रुपये क्विंटल चुगाई मांग रहे हैं। विगत वर्ष 850 रुपये का रेट था। ऐसे में किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। किसान जगदीश सहारण ने बताया कि वह अब से पहले 10 बार नरमे में छिड़काव कर चुका है तथा 2 छिड़काव और होंगे। लेकिन फिर भी सुंडी का खात्मा नहीं हो पा रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये करें उपचार :-</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि विभाग ओढां के कार्यवाहक खंड कृषि अधिकारी पवन यादव ने बताया कि अपने खेतों में नरमे के 100 फूलों का निरीक्षण करें। यदि इनमें करीब 10 फूल गुलाबी सुंडी से ग्रसित मिलते हैं या फिर 20 टिंडों को फाड़कर देखने पर कुछ टिंडों में गुलाबी सुंडी मिलती है तो कीटनाशक के छिड़काव की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि गुलाबी सुंडी का प्रकोप फलीय भागों पर 5 से 10 प्रतिशत तक होने पर रोकथाम के लिए प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 3 मिलीलीटर मात्रा प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इसके बाद अगला छिड़काव जरूरत पड?े पर क्यूनालफॉस 20 एफ की 4 मिलीलीटर या थियोडिकार्ब 75 डबल्यूपी की 1.5 ग्राम मात्रा प्रतिलीटर की दर से 10-12 दिनों बाद करें। उन्होंने कहा कि एक ही कीटनाशक का बार-बार छिड़काव न करें। Gulabi Sundi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’" href="http://10.0.0.122:1245/one-nation-one-election-news/">जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 16:14:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>भाकियू द्वारा की समस्याओं को लेकर तहसील कार्यालय में की गई पंचायत</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सनी किसने की समस्याएं बुलन्दशहर/स्याना (सच कहूँ न्यूज)। भारतीय किसान (Indian Farmer) यूनियन टिकैत गुट द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर तहसील कार्यालय में पंचायत का आयोजन किया गया। वहीं पंचायत में पहुंच कर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनी। शुक्रवार को भाकियू तहसील अध्यक्ष केडी त्यागी के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/panchayat-done-in-tehsil-office-regarding-the-problems-of-bhakiyu/article-51591"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/bulandshahr-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सनी किसने की समस्याएं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बुलन्दशहर/स्याना (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारतीय किसान (Indian Farmer) यूनियन टिकैत गुट द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर तहसील कार्यालय में पंचायत का आयोजन किया गया। वहीं पंचायत में पहुंच कर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनी। शुक्रवार को भाकियू तहसील अध्यक्ष केडी त्यागी के नेतृत्व में दर्जनों किसान व कार्यकर्ता ट्रैक्टरों में सवार होकर जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। Bulandshahr News</p>
<p style="text-align:justify;">जहां कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं को लेकर पंचायत का आयोजन किया। भाकियू प्रांतीय उपाध्यक्ष कैप्टन यशवीर सिंह ने कहा कि आवारा पशुओं के आतंक से किसान पूरी तरह परेशान है। आवारा पशु लगातार खेतों में खड़ी फसलों को नष्ट कर रहे है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का किसानों की इस जटिल समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं है। चौधरी तेजवीर सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा बिजली माफी के बाद भी विद्युत विभाग द्वारा लगातार किसानों के नलकूपों के बिल भेजे जा रहे है। वहीं नलकूपों पर नए विद्युत भी मीटर भी लगाए जा रहे है। कहा कि भाकियू किसानों की परेशानी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। Bulandshahr News</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं पंचायत के दौरान सीओ भास्कर मिश्रा व तहसीलदार चंद्रप्रकाश पांडे व विद्युत एसडीओ नितिन वर्मा आदि अधिकारियों ने पंचायत में मौजूद किसानों की समस्याएं सुनकर जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया। जिसके बाद भाकियू कार्यकर्ताओं ने जल्द से जल्द किसानों की समस्त समस्याओं के निस्तारण को लेकर सीओ व तहसीलदार को संयुक्त रूप से ज्ञापन भी सौंपा। पंचायत की अध्यक्षता दयाचंद त्यागी व संचालन कैप्टन विशन सिंह ने किया। इस दौरान केडी त्यागी, चौधरी तेजवीर सिंह, कैप्टन यशवीर सिंह, कप्तान बिशन सिंह, दयाचंद त्यागी, वीरेंद्र यादव, वेदपाल सिंह चौधरी व अरव सिंह कार्यकर्ता मौजूद रहे। Bulandshahr News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मोटरसाइकिल चोर गिरोह का पर्दाफाश, 4 आरोपी काबू" href="http://10.0.0.122:1245/four-accused-of-stealing-motorcycle-including-stolen-seven-motorcycle-arrested/">मोटरसाइकिल चोर गिरोह का पर्दाफाश, 4 आरोपी काबू</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 20:18:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Farmer killed in clash: किसानों और सरकार में टकराव कोई समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[Farmer killed in clash: पंजाब और हरियाणा के किसानों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तीव्र कर दिया है। इसी बीच संगरूर जिले में एक किसान की मौत की भी दुखद खबर है। किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने के लिए पुलिस ने किसान नेताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ किसानों को चंडीगढ़ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/farmer-killed-in-clash-in-sangrur/article-51501"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/farmers.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farmer killed in clash: पंजाब और हरियाणा के किसानों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तीव्र कर दिया है। इसी बीच संगरूर जिले में एक किसान की मौत की भी दुखद खबर है। किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने के लिए पुलिस ने किसान नेताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने के लिए दिल्ली की तरह नाकाबंदी की गई है। किसानों और सरकार दोनों को मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई रास्ता निकालना चाहिए। टकराव किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं है। सरकारें बातचीत की बजाए किसानों को रोकने पर जोर दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेहतर होगा कि सरकार बातचीत का माहौल बनाए और इस टकराव भरे माहौल को खत्म करे। किसान संगठन भी विरोध-प्रदर्शन करें लेकिन टकराव से बचें। शांतिपूर्ण विरोध से मांगों को मनवाया जा सकता है। देश में कई शांतिपूर्ण आंदोलन ऐसे हुए, जब सरकारों को झुकना पड़ा। यह भी ध्यान दिया जाए कि धरने से आम जनता को कोई नुकसान न हो। स्कूल जाने वाले बच्चों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यूं भी यह सवाल गंभीर है कि आजादी के 76 साल बाद भी किसान आंदोलन करने को क्यों मजबूर हैं। Farmer killed in clash</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि नीतियों में कहां खामियां हैं, इन नीतियों की दोबारा जांच की आवश्यकता है। सब्सिडी, कृषि बीमा सहित कई अन्य योजनाओं के बावजूद कृषि में मूलभुत परिवर्तन क्यों नहीं आ सका। कृषि जिंसों के दाम कभी एकदम गिर जाते हैं तो कभी आसमान पर पहुंच जाते हैं। किसान, उपभोक्ता और व्यापारी के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है। यह किसान आंदोलन तब हो रहा है जब प्याज के आयात पर 40 फीसदी शुल्क लगा दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं को सस्ता प्याज उपलब्ध कराने के लिए यह कदम सही हो सकता है, लेकिन किसानों के हितों को भी देखना होगा। किसान फसलों के वर्तमान रेटों से संतुष्ट नहीं। निर्यात शुल्क बढ़ने से निर्यात रुक जाता है और किसान को लाभ नहीं मिल पाता। सरकार को संतुलित नीतियां बनाने पर बल देना होगा ताकि कृषि लाभदायक धंधा बना रहे और किसान पर बोझ न पड़े। Editorial</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Himachal Pradesh: हिमाचल में भयंकर तबाही, 227 लोगों की मौत, 280 सड़कें ठप" href="http://10.0.0.122:1245/himachal-news-today/">Himachal Pradesh: हिमाचल में भयंकर तबाही, 227 लोगों की मौत, 280 सड़कें ठप</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 15:46:04 +0530</pubDate>
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