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                <title>Slaves - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>दो मिलियन से कम आबादी वाले बोत्स‍वाना का चीन को करारा जवाब- हम तुम्हारे गुलाम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली । दुनिया की सुपरपावर होने का दावा करने वाली चीन को बोत्सवाना के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। बोत्सवाना ने चीन को साफ-साफ कह दिया है कि वह उसकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने दो टूक कहा है कि उनका देश चीन का गुलाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/botswana-says-to-china-we-are-not-your-slaves/article-3272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/ian-khama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली ।</strong> दुनिया की सुपरपावर होने का दावा करने वाली चीन को बोत्सवाना के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। बोत्सवाना ने चीन को साफ-साफ कह दिया है कि वह उसकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने दो टूक कहा है कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है। हीरों की खानों के लिए मशहूर बोत्सवाना चीन की बार-बार की धौंस से तंग आकर इयान खामा ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान ने कहा कि हम चीन की धमकियों से डरते नहीं हैं, और बोत्सवाना चीन की कॉलोनी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने हाल ही में दलाई लामा के दौरे के विरोध में आई चीन की धमकी के बाद अपना सख्त रुख साफ कर दिया है। बोत्सवाना दुनिया में हीरे के लिए जाना जाता है और यहां की आबादी दो मिलियन से भी कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चीन आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे के लेकर बोत्सवाना को राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा था। दलाई लामा 17-19 अगस्त तक बोत्सवाना की राजधानी गेबोरोनी के दौरे पर जाने वाले थे। दलाई लामा का ये दौरा निजी बताया गया, इसके बावजूद चीन इस दौरे का विरोध कर रहा था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘हम आपके गुलाम नहीं हैं’</h2>
<p style="text-align:justify;">आंतरिक मामलों में चीन के दखल को देख इयान खामा चिढ़ गए और उन्होंने कहा कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है. पिछले कुछ हफ्तों से दलाई लामा के दौरे को लेकर चीन और बोत्सवाना के बीच राजनयिक तनाव जारी है। दलाई लामा 17 अगस्त से 19 अगस्त तक बोत्सवाना की राजधानर गाबोरोने का दौरा करने वाले थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दलाई लामा को लेकर भारत से भी भिड़ा चीन</h2>
<p style="text-align:justify;">दलाई लामा को लेकर चीन पहले भारत के साथ भी विवाद बढ़ा चुका है। इस साल अप्रैल के महीन में चीन के विरोध के बावजूद दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश पहुंचे। दलाई लामा के दौरे पर गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने चीन को नसीहत दी। रिजिजू ने चीन को दो टूक अंदाज में कहा कि वो भारत के आंतरिक मामलों में दखल न दे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Aug 2017 05:23:04 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी अपनी सोच में लायें</title>
                                    <description><![CDATA[भारत हर साल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। यह दिन जहां हमारे आजाद होने की खुशी लेकर आता है, वहीं इसमें भारत के खण्ड-खण्ड होने का दर्द भी छिपा होता है। वक्त के गुजरे पन्नों में भारत से ज्यादा गौरवशाली इतिहास किसी भी देश का नहीं हुआ, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से ज्यादा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/get-independence-in-your-thinking/article-3023"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत हर साल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। यह दिन जहां हमारे आजाद होने की खुशी लेकर आता है, वहीं इसमें भारत के खण्ड-खण्ड होने का दर्द भी छिपा होता है। वक्त के गुजरे पन्नों में भारत से ज्यादा गौरवशाली इतिहास किसी भी देश का नहीं हुआ, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से ज्यादा सांस्कृतिक राजनैतिक सामरिक और आर्थिक हमले भी इतिहास में शायद किसी देश पर नहीं हुए। और कदाचित किसी देश के इतिहास के साथ इतना अन्याय भी कहीं नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">वो देश जिसे इतिहास में ‘विश्व गुरु’ के नाम से जाना जाता हो, उस देश के प्रधानमंत्री को आज “मेक इन इंडिया” की शुरूआत करनी पड़ रही है। ‘सोने की चिड़िया’ जैसा नाम जिस देश को कभी दिया गया हो, उसका स्थान आज विश्व के विकासशील देशों में है। शायद हमारा वैभव और हमारी समृद्धि की कीर्ति ही हमारे पतन का कारण भी बनी। भारत के ज्ञान और सम्पदा के चुम्बकीय आकर्षण से विदेशी आक्रांता लूट के इरादे से इस ओर आकर्षित हुए। वे आते गए और हमें लूटते गए। जो देश अपने खुद की गलतियों से नहीं सीख पाता, वो स्वयं इतिहास बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें भी शायद अपनी इसी भूल की सजा मिली, जो हमारी वृहद सीमाएं आज इतिहास बन चुकी हैं। वो देश जिसकी सीमाएं उत्तर में हिमालय, दक्षिण में हिन्द महासागर, पूर्व में इंडोनेशिया और पश्चिम में ईरान तक फैली थीं, आज सिमट कर रह गई हैं और इस खंडित भारत को हम आजाद भारत कहने के लिए विवश हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अखंड भारत का स्वप्न सर्वप्रथम आचार्य चाणक्य ने देखा था और काफी हद तक चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर इसे यथार्थ में बदला भी था। तब से लेकर लगभग 700 ईसवी तक भारत ने इतिहास का स्वर्णिम काल अपने नाम किया था। लेकिन 712 ईस्वी में सिंध पर पहला अरब आक्रमण हुआ, फिर 1001 ईस्वी से महमूद गजनी, चंगेज खान, अलाउद्दीन खिलजी, मुहम्मद तुगलक, तैमूरलंग, बाबर और उसके वंशजों द्वारा भारत पर लगातार हमले और अत्याचार हुए। 1612 ईस्वी में जहाँगीर ने अंग्रेजों को भारत में व्यापार करने की इजाजत दी। यहाँ इतिहास ने एक करवट ली और व्यापार के बहाने अंग्रेजों ने पूरे भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इतने विशाल देश पर नियंत्रण रखना इतना आसान भी नहीं था, यह बात उन्हें समझ में आई 1857 की क्रांति से। इसलिए उन्होंने “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाते हुए धीरे-धीरे भारत को तोड़ना शुरू किया। 1857 से 1947 के बीच अंग्रेजों ने भारत को सात बार तोड़ा-1876 में अफगानिस्तान, 1904 में नेपाल, 1906 में भूटान, 1914 में तिब्बत, 1935 में श्रीलंका, 1937 में म्यांमार, 1947 में बांग्लादेश और पाकिस्तान। लेकिन हम भारतवासी अंग्रेजों की इस कुटिलता को नहीं समझ पाए कि उन्होंने हमारे देश की भौगोलिक सीमाओं को ही नहीं तोड़ा, बल्कि हमारे समाज, हमारी भारतीयता, इस देश की आत्मा को भी खण्डित कर गए।</p>
<p style="text-align:justify;">हम भारत के लोग 15 अगस्त को किस बात का जश्न मनाते हैं? आजादी का? लेकिन सोचो कि हम आजाद कहाँ हैं? हमारी सोच आज भी गुलाम है! हम गुलाम हैं अंग्रेजी सभ्यता के, जिसका अन्धानुकरण हमारी युवा पीढ़ी कर रही है। हम गुलाम हैं उन जातियों के, जिन्होंने हमें आपस में बांटा हुआ है और हमें एक नहीं होने देती। हम गुलाम हैं अपनी सरकार की उन नीतियों के, जो इस देश के नागरिक को उसके धर्म और जाति के आधार पर आंकती हैं, उसकी योग्यता के आधार पर नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: अब वक्त आ गया है कि हम अपनी आजादी को भौगोलिक अथवा राजनैतिक दृष्टि तक सीमित न रखें। हम अपनी आजादी अपनी सोच में लाएं, जो सोच और जो भौगोलिक सीमाएं हमें अंग्रेज दे गए हैं उनसे बाहर निकलें। विश्व इतिहास से सीखें कि जब जर्मनी का एकीकरण हो सकता है, जब बर्लिन की दीवार गिराई जा सकती है, तो भारत का क्यों नहीं? चन्द्रशेखर आजाद, भगतसिंह, सुखदेव महारानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, रामप्रसाद बिस्मिल, सुभाष चंद्र बोस, ने अपनी जान अखंड भारत के लिए न्योछावर की थी खण्डित भारत के लिए नहीं। जिस दिन हम भारत को उसकी खोई हुई अखंडता लौटा देंगे उस दिन हमारी ओर से हमारे वीरों को सच्चे श्रद्धांजलि अर्पित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-डॉ. नीलम महेंद्र</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2017 03:30:34 +0530</pubDate>
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