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                <title>पूजा स्थल कानून पर केंद्र को 12 दिसंबर तक जवाब देना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[जनवरी में अगली सुनवाई नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम -1991 की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए सोमवार को 12 दिसंबर तक का समय दिया। इस अधिनियम के तहत अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल को छोड़कर देश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/center-will-have-to-respond-by-december-12-on-the-place-of-worship-act/article-39837"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/supreme-court-of-india-21.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>जनवरी में अगली सुनवाई</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम -1991 की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए सोमवार को 12 दिसंबर तक का समय दिया। इस अधिनियम के तहत अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल को छोड़कर देश के सभी धार्मिक धार्मिक स्थलों के 15 अगस्त 1947 के पूर्व की स्थिति बरकरार रखने का प्रावधान किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की गुहार स्वीकार करते हुए उसे 12 दिसंबर तक अपना जवाब दायर करने को कहा। पीठ के समक्ष मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले पर ‘उच्चतम स्तर’ पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। शीर्ष अदालत इस मामले में पिछले साल मार्च से केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मेहता ने शीर्ष अदालत को 12 अक्टूबर को बताया था कि 2019 के अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद मामले में 5 सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा दिए गए फैसले में पूजा स्थान (विशेष प्रावधान) अधिनियम-1991 की वैधता से संबंधित प्रश्न शामिल नहीं हैं। इस धार्मिक स्थल कानून को अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने चुनौती दी है। उनका पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ को बताया कि धार्मिक स्थलों की यथास्थिति बरकरार रखने संबंधी 1991 के अधिनियम पर संसद में अपर्याप्त चर्चा के बाद पारित कर दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें मामले में राष्ट्रीय महत्व से संबंधित महत्वपूर्ण सवालों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं तथा अदालत द्वारा इसका फैसला किया जाना चाहिए। अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका का विरोध करने जमीयत उलमा-ए-हिंद और आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बार फिर तर्क दिया कि याचिकाओं पर उनका रुख केंद्र सरकार द्वारा दायर जवाब पर निर्भर करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा की वह इस मामले की अगली सुनवाई अगले साल जनवरी के पहले सप्ताह में करेगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Nov 2022 15:06:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल विवाह निरोधक अधिनियम तय करता है शादी की उम्र</title>
                                    <description><![CDATA[23 सितंबर 1929 को बाल विवाह प्रतिबन्ध अधिनियम, 1929 इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल आॅफ इंडिया में पारित हुआ। लड़कियों के विवाह की आयु 14 वर्ष और लड़कों की 18 वर्ष तय की गई जिसे बाद में लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 कर दिया गया। इसके प्रायोजक हरविलास शारदा थे जिनके नाम पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-child-marriage-restraint-act-determines-the-age-of-marriage/article-18661"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/child-marriage.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">23 सितंबर 1929 को बाल विवाह प्रतिबन्ध अधिनियम, 1929 इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल आॅफ इंडिया में पारित हुआ। लड़कियों के विवाह की आयु 14 वर्ष और लड़कों की 18 वर्ष तय की गई जिसे बाद में लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 कर दिया गया। इसके प्रायोजक हरविलास शारदा थे जिनके नाम पर इसे ‘शारदा अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है। यह छह महीने बाद एक अप्रैल 1930 को लागू हुआ और यह केवल हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि ब्रिटिश भारत के सभी लोगों पर लागू होता है। यह भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन का परिणाम था। ब्रिटिश अधिकारियों के कड़े विरोध के बावजूद, ब्रिटिश भारतीय सरकार द्वारा कानून पारित किया गया, जिसमें अधिकांश भारतीय थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, इसकी ब्रिटिश सरकार से कार्यान्वयन में कमी थी, इसका मुख्य कारण ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा उनके वफादार हिंदू और मुस्लिम सांप्रदायिक समूहों से समर्थन खोना था। भारतीय विधायिका में सहमति की उम्र पर सवालों को संबोधित करने वाले विभिन्न बिल पेश किए गए थे। 1927 में, राय साहिब हरबिलास शारदा ने केंद्रीय विधान सभा में अपना हिंदू बाल विवाह विधेयक पेश किया। विश्व राय, भारत में समाज सुधारकों और राष्ट्रवादी स्वतंत्रता सेनानियों के दबाव में, सरकार ने विधेयक को एक चुनिंदा समिति के नाम से संबोधित किया, जिसे एज आॅफ कंसेंट कमेटी के रूप में नामित किया गया, और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय प्रांतों के गृह सदस्य सर मोरोपंत विश्वनाथ जोशी ने की।</p>
<p style="text-align:justify;">जोशी समिति ने 20 जून 1929 को अपनी रिपोर्ट पेश की और इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने आज ही के दिन 21 सितंबर 1929 को ये प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 23 सितंबर 1929 को पारित किया गया और 1 अप्रैल 1930 को पूरे ब्रिटिश भारत तक फैली एक कानून बन गया। इसने 14 और 18 को सभी समुदायों के क्रमश: लड़कियों और लड़कों के लिए विवाह योग्य उम्र के रूप में तय किया। बाल विवाह निरोधक कानून पहला सामाजिक सुधार मुद्दा था जिसे भारत में संगठित महिलाओं द्वारा उठाया गया था। उन्होंने तर्क के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई और सक्रिय रूप से राजनीतिक याचिका के उपकरण का इस्तेमाल किया और इस प्रक्रिया में राजनीति के क्षेत्र में योगदान दिया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2020 11:28:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को राहत, SC-ST संशोधन एक्ट को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संशोधन कानून-2018 पर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-approves-sc-st-amendment-act/article-12973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/caa-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><h2>शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और गिरफ्तारी होगी।</h2>
<p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संशोधन कानून-2018<strong> (SC-ST Amendment Act)</strong> पर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस अरूण मिश्र, जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस रवीन्द्र भट्ट की बेंच ने एससी-एसटी संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अब एससी-एसटी संशोधन कानून के मुताबिक शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और गिरफ्तारी होगी। इस मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि कोर्ट सिर्फ उन्हीं मामलों में अग्रिम जमानत दे सकती है जहां पहली नजर में केस नहीं बनता दिख रहा है।</p>
<h2>एफआईआर से पहले प्राथमिक जांच की जरूरत नहीं |SC-ST Amendment Act</h2>
<p>जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में एक बेंच ने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच जरूरी नहीं है। इसके अलावा इस कानून में एफआईआर दर्ज करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सहमति जरूरी नहीं है। हालांकि इसी बेंच के एक दूसरे जज जस्टिस रविंद्र भट ने कहा कि देश के सभी नागरिकों को समान भाव से देखा जाना चाहिए ताकि भाई चारे की भावना विकसित हो सके। जस्टिस भट ने कहा कि अदालत एक एफआईआर को रद्द कर सकती है अगर एसटी-एसटी एक्ट के तहत पहली नजर में केस बनता नहीं दिख रहा है।</p>
<h2>ये है मामला| SC-ST Amendment Act</h2>
<ul>
<li><strong> अनुसूचित जनजाति अधिनियम-1989 के हो रहे दुरूपयोग के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने  एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। </strong></li>
<li><strong>इसके बाद संसद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए कानून में संशोधन किया गया था।</strong></li>
<li><strong> इसे भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। </strong></li>
<li><strong>अब पहले के मुताबिक ही एफआईआर दर्ज करने से पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या नियुक्ति प्राधिकरण से अनुमति जरूरी नहीं होगी।</strong></li>
<li><strong> बता दें कि एससी-एसटी एक्ट के मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।</strong></li>
<li><strong> न्यायालय असाधारण परिस्थितियों में एफआईआर को रद्द कर सकते हैं।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-approves-sc-st-amendment-act/article-12973</link>
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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2020 13:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में NAS लगाए जाने के खिलाफ याचिका सुनने से इन्कार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जिस व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा महसूस किया जाता है, प्रशासन ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रख सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/national-security-act-nsa/article-12723"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रशासन ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रख सकता है</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Supreme Court)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लागू करने के सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने याचिकाकर्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका की सुनवाई से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘यह कानून-व्यवस्था का मसला है और हम दिल्ली में लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटाने को लेकर सरकार को कोई निर्देश नहीं दे सकते।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसी महीने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से एक अधिसूचना जारी कर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया गया था।</li>
<li style="text-align:justify;">(एनएसए) के तहत जिस व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा महसूस किया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रशासन ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रख सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली के उपराज्यपाल ने 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए।</li>
<li style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा तीन की उपधारा (3) को दिल्ली में लागू कर दिया था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार मिल गया है।</li>
</ul>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/national-security-act-nsa/article-12723</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Jan 2020 17:51:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में इस साल लागू हो जाएगा अपार्टमेंट ऑनरशिप एक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार 15 नवंबर तक एक्ट के नियम तैयार कर जारी करेगी| Apartment Honorship Act राजस्थान के जयपुर सहित उदयपुर, कोटा, जोधपुर व  बड़े शहरों में अब बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट तैयार हो रहे हैं जयपुर। राजस्थान में करीब डेढ़ दशक के इंतजार के बाद आखिर अपार्टमेंट ऑनरशिप एक्ट (Apartment Honorship Act)  इस वर्ष के अंत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/apartment-honorship-act/article-10971"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/apartment.jpg" alt=""></a><br /><h2>सरकार 15 नवंबर तक एक्ट के नियम तैयार कर जारी करेगी| <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Apartment Honorship Act</span></span></h2>
<ul>
<li><strong>राजस्थान के जयपुर सहित उदयपुर, कोटा, जोधपुर व  बड़े शहरों में अब बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट तैयार हो रहे हैं</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान में करीब डेढ़ दशक के इंतजार के बाद आखिर अपार्टमेंट ऑनरशिप एक्ट <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Apartment Honorship Act</span></span>) </strong> इस वर्ष के अंत तक लागू हो जाएगा। इस एक्ट के लागू होने से न सिर्फ अपार्टमेंट मालिक को जमीन का मालिकाना हक मिलेगा, बल्कि अन्य कई अधिकार भी प्राप्त होंगे। सरकार 15 नवंबर तक एक्ट के नियम तैयार कर जारी करेगी और जनता से आपत्तियां और सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी कर इस वर्ष के अंत तक यह एक्ट लागू कर दिया जाएगा। राजस्थान के जयपुर सहित उदयपुर, कोटा, जोधपुर व प्रदेश के कई बड़े शहरों में अब बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट व अपार्टमेंट तैयार हो रहे हैं। इसके बावजूद राजस्थान में अब तक अपार्टमेंट ऑनरशिप एक्ट लागू नहीं था।</p>
<p>हालांकि इसकी कवायद करीब 15 साल से चल रही थी और यह विधेयक तीन बार राजस्थान की विधानसभा से पारित हो चुका था, लेकिन विभिन्न कारणों से नियम कभी नहीं बनाए गए, बल्कि बार-बार इसे संशोधित रूप देकर विधानसभा में लाया जाता रहा। आखिरी बार पिछली सरकार के समय अप्रैल 2018 में इसे संशोधित रूप में पारित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस वर्ष तीन जुलाई को इस पर मंजूरी देकर इसे भेज दिया था। तीन महीने होने के बावजूद इस एक्ट के नियम नहीं बनाए जा रहे थे। नियम नहीं होने के कारण इसे लागू किया जाना संभव नहीं था।</p>
<h2>दिसंबर के पहले हफ्ते तक नियमों के साथ एक्ट लागू कर दिया जाएगा</h2>
<p style="text-align:justify;">अब हाल में नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर ए सावंत ने इस बारे में एक बैठक कर इस एक्ट को लागू करने की समय सीमा तय कर दी है। इसके अनुसार 10 नवंबर तक मुख्य नगर नियोजक कार्यालय की ओर से इस विधेयक के तहत नियमों का प्रारूप तैयार किया जाएगा। 15 नवंबर तक नगरीय विकास विभाग की वेबसाइट पर नियमों का प्रारूप जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद दस दिन में आम जनता से इस पर आपत्ति या सुझाव मांगे जाएंगे। दिसंबर के पहले हफ्ते तक नियमों के साथ एक्ट लागू कर दिया जाएगा</p>
<h2 style="text-align:justify;">अपार्टमेंट मालिकों को मिलेगा ये फायदा</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>राजस्थान में इस एक्ट के लागू होने के बाद जिस जमीन पर अपार्टमेंट बने हैं, उसका मालिकाना हक भी अपार्टमेंट मालिक को मिलेगा। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जमीन पर जितने अपार्टमेंट बने है, उसके हिसाब से जमीन का हक उसे दिया जाएगा। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एक्ट के तहत बिल्डर को भूमि का मालिकाना हक देने के लिए भूमि की सब लीज अपार्टमेंट खरीददार के पक्ष में जारी करनी होगी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> अपार्टमेंट आवंटन के छह महीने के भीतर बिल्डर को डीड ऑफ अपार्टमेंट खरीदार के पक्ष में संपादित करनी होगी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों की एक आवासीय विकास समिति बनेगी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> संबंधित बिल्डर या डेवलपर उस समिति को भवन का नक्शा,वायरिंग व प्लंबिंग आदि समस्त जानकारी उपलब्ध कराएगा।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/apartment-honorship-act/article-10971</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2019 15:43:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोटर व्हीकल एक्ट पास: नाबालिग ने एक्सीडेंट किया तो पेरेंट्स को 3 साल तक की जेल</title>
                                    <description><![CDATA[नाबालिग के वाहन चलाते समय हादसा होने पर अभिभावक को 25 हजार जुर्माना भी भरना होगा नई दिल्ली (एजेंसी)। सड़क हादसे कम करने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट के सख्त प्रावधानों पर राज्यसभा ने भी मुहर लगा दी। मोटर व्हीकल संशोधन बिल राज्यसभा में 13 के मुकाबले 108 वोटों से पारित हुआ। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/motor-vehicle-act-passed-if-a-minor-causes-an-accident-parents-can-be-jailed-for-up-to-3-years/article-10137"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/untitled-2-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2>नाबालिग के वाहन चलाते समय हादसा होने पर अभिभावक को 25 हजार जुर्माना भी भरना होगा</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>सड़क हादसे कम करने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट के सख्त प्रावधानों पर राज्यसभा ने भी मुहर लगा दी। मोटर व्हीकल संशोधन बिल राज्यसभा में 13 के मुकाबले 108 वोटों से पारित हुआ। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर सख्त सजा से जुड़ा यह बिल लोकसभा में पारित हो चुका है, लेकिन टाइपिंग की गलती के कारण इसे संशोधन के लिए दोबारा लोकसभा में भेजा जाएगा। बिल में प्रावधान है कि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए एक्सीडेंट करता है, तो उसके पेरेंट्स को 3 साल तक जेल होगी। वाहन रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जाएगा। जुर्माने की रकम भी कई गुना बढ़ाई गई है।</p>
<h2>2 की बजाय 10 हजार जुर्माना</h2>
<p>शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 2 हजार की बजाय 10 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। थर्ड पार्टी बीमा भी जरूरी है। हिट एंड रन के मामले में मौत होने पर 2 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा, जो पहले 25 हजार था। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने करीब तीन घंटे चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि लोकसभा की मंजूरी के बाद इसी हफ्ते यह बिल राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक- राष्ट्रपति के दस्तखत होने के बाद अगस्त के मध्य तक बढ़ी हुई पेनाल्टी लागू हो जाएगी। इस कानून से राज्यों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी। सभी राज्य सरकारें अपनी सुविधा के अनुसार राष्ट्रीय परिवहन नीति लागू कर सकेंगी।</p>
<p><strong>बिल के मुख्य बिंदु</strong></p>
<ul>
<li>-बगैर हेलमेट या ओवरलोड दोपहिया वाहन पर 3 महीने के लिए ड्राइवर लाइसेंसअयोग्य।</li>
<li>बगैर हेलमेट पर एक हजार रुपए और ओवर लोडिंग पर दो हजार रुपए जुर्माना।</li>
<li>-नाबालिग के वाहन चलाते समय हादसा होने पर अभिभावक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना और 3 साल की सजा। जुवेनाइल एक्ट के तहत मामला चलेगा।</li>
<li>-ओला, उबर के वाहन लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन पर कंपनियों पर 25 हजार से 1 लाख रु. जुर्माना।</li>
<li>-एंबुलेंस को रास्ता न देने पर एक हजार का जुर्माना।</li>
<li>-हादसे में घायल का फ्री में इलाज करना होगा।</li>
<li>-ड्राइवर और क्लीनर का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होगा। हादसे में मृत्यु पर 50 हजार से 5 लाख रुपए तक मुआवजे का प्रावधान है।</li>
<li>-अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत पर 25 हजार से 2 लाख और घायल होने पर साढ़े 12 से 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।</li>
<li>-मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड बनाया जाएगा, जिसमें सड़क पर चलने वाले सभी चालकों का इंश्योरेंस होगा। इसका इस्तेमाल घायल के</li>
<li>इलाज और मृत्यु होने पर परिजनों को मुआवजा देने के लिए किया जाएगा।</li>
<li>-लर्निंग लाइसेंस के लिए पहचान पत्र का ऑनलाइन वेरीफिकेशन अनिवार्य। कमर्शियल लाइसेंस 3 के बजाय 5 साल के लिए मान्य होंगे।</li>
<li>-लाइसेंस रिन्यूवल अब खत्म होने के एक साल के अंदर कराया जा सकेगा। ड्राइवरों की कमी पूरी करने के लिए ड्राइवर ट्रेनिंग स्कूल खोले जाएंगे। नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन डीलर करेगा।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/motor-vehicle-act-passed-if-a-minor-causes-an-accident-parents-can-be-jailed-for-up-to-3-years/article-10137</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Aug 2019 10:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेजुएला के खिलाफ अमेरिका करेगा कार्रवाई : पोम्पेओ</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन(एजेंसी)।अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा कि वाशिंगटन वेनेज़ुएला सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में ‘कार्रवाइयों की श्रृंखला’ तैयार कर रहा है पोम्पेओ ने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज से कहा,“आने वाले दिनों में आप वेनेज़ुएला के नेतृत्व वाले लोगों के खिलाफ उन कार्रवाइयों की एक श्रृंखला देखेंगे जो दबाव […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/america-will-act-against-nejuela/article-6024"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/america-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन(एजेंसी)।</strong>अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा कि वाशिंगटन वेनेज़ुएला सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में ‘कार्रवाइयों की श्रृंखला’ तैयार कर रहा है पोम्पेओ ने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज से कहा,“आने वाले दिनों में आप वेनेज़ुएला के नेतृत्व वाले लोगों के खिलाफ उन कार्रवाइयों की एक श्रृंखला देखेंगे जो दबाव स्तर में वृद्धि जारी रखते हैं। वेनेजुएला नेतृत्व सीधे वहां के लोगों के सर्वोत्तम हित के खिलाफ काम कर रहा है।</p>
<h2>पोम्पेओ ने हालांकि योजनाबद्ध कार्रवाई  का ब्यौरा नहीं दिया</h2>
<p style="text-align:justify;">हम यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ हैं कि वेनेज़ुएला के लोगों को उनका हक मिले। पोम्पेओ ने हालांकि योजनाबद्ध कार्रवाई की प्रकृति की विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया। वेनेजुएला सरकार ने तत्काल इसपर अपनी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। ट्रम्प प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की वामपंथी सरकार के अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंधों में लगातार वृद्धि की है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि वेनेजुएला में विपक्षी नेताओं को जेल में डालकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/america-will-act-against-nejuela/article-6024</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Sep 2018 09:21:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी-एसटी एक्ट के विरोध में राष्ट्रपति को खून से  लिखा पत्र, मांगी इच्छामृत्यु</title>
                                    <description><![CDATA[अलीगढ़(सच कहूँ)। एससी-एसटी एक्ट में ताजा संशोधन के विरोध में अखिल भारत हिंदू महासभा भी अब खुलकर सामने आ गई। संगठन की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने अपने खून से आठ पेज का पत्र लिखकर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार वोटों की खातिर हिंदू समाज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act/article-5937"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/sc-st-act.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अलीगढ़(सच कहूँ)।</strong> एससी-एसटी एक्ट में ताजा संशोधन के विरोध में अखिल भारत हिंदू महासभा भी अब खुलकर सामने आ गई। संगठन की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने अपने खून से आठ पेज का पत्र लिखकर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार वोटों की खातिर हिंदू समाज को विभाजित कर रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय पत्रकार  वार्ता</h2>
<p style="text-align:justify;">इस कानून से समानता के अधिकार का उल्लंघन तो हो ही रहा है, देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे। उनके साथ 15 अन्य पदाधिकारियों ने भी अपना खून निकाल इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर व अंगूठा लगाया। डॉ. पांडेय ने इस मौके पर पत्रकारों से भी वार्ता की। पूजा कुछ दिन पहले मेरठ में ‘हिंदू न्यायपीठ’ की जज बनाए जाने को लेकर चर्चा में आई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने पत्रकारों के समक्ष सिरिंज से खून निकालकर राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में लिखा कि हिंदू विभाजक, समाज विभाजक इस काले कानून का केवल दुरुपयोग रोक कर सुप्रीम कोर्ट ने इसको दुष्प्रभावी होने से बचाया था, लेकिन इस संशोधन के बाद सवर्ण और ओबीसी अब फिर डरकर जी रहा है। भविष्य में जाने-अनजाने इस विधेयक का शिकार होकर इन वर्गों के लोग आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। लिहाजा इस कानून पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएं अन्यथा उन्हें महासभा के कार्यकर्ताओं के साथ इच्छा मृत्यु की अनुमति दें।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act/article-5937</link>
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                <pubDate>Sat, 15 Sep 2018 08:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी/एसटी एक्ट पर पलटा जाएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी कैबिनेट ने संशोधन को दी मंजूरी नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से कमजोर हुए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार (निवारण) कानून को पुराने स्वरूप में लाने के लिए इसमें जरूरी बदलाव करने का निर्णय लिया है और इससे संबंधित विधेयक को बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। केन्द्रीय मंत्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/national-preparation-to-overturn-supreme-court-verdict-on-sc-st-act/article-5094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/no-discrimination-with-women-on-the-name-of-religion.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">मोदी कैबिनेट ने संशोधन को दी <code>मंजूरी</code></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सरकार ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से कमजोर हुए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार (निवारण) कानून को पुराने स्वरूप में लाने के लिए इसमें जरूरी बदलाव करने का निर्णय लिया है और इससे संबंधित विधेयक को बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। केन्द्रीय मंत्री एवं लोक जन शक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि विधेयक दो- तीन दिन में संसद में पेश कर दिया जायेगा। पासवान के अनुसार बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कानून के प्रावधानों को और कड़ा किया जायेगा।</p>
<h1 style="text-align:center;">सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को कुछ सख्त प्रावधानों को हटा दिया था</h1>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने गत 20 मार्च को इस कानून के कुछ सख्त प्रावधानों को हटा दिया था जिससे इससे जुडेÞ मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लग गयी थी। इसके अलावा आरोपी को अंतरिम जमानत लेने की अनुमति भी मिल गई थी। दलित संगठनों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए आगामी 9 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया था। सरकार में शामिल लोक जन शक्ति पार्टी से संबद्ध दलित सेना ने सरकार से 9 अगस्त से पहले कानून के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए विधेयक पारित करवाने या अध्यादेश लाने की मांग की थी।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Aug 2018 14:58:58 +0530</pubDate>
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                <title>एससी/एसटी अधिनियम के तहत गिरफ्तारी से पहले होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आज व्यवस्था दी कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में बगैर उच्चाधिकारी की अनुमति के अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपों की प्रारम्भिक जांच जरूरी है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pre-investigation-must-before-arresting-under-sc-st-act/article-3617"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/sc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता) </strong>उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आज व्यवस्था दी कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में बगैर उच्चाधिकारी की अनुमति के अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपों की प्रारम्भिक जांच जरूरी है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी से पहले जमानत भी मंजूर की जा सकती है। न्यायालय ने एससी/एसटी अधिनियम 1989 के संबंध में नये दिशानिर्देश जारी किये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने गिरफ्तारी से पहले मंजूर होने वाली जमानत में रुकावट को भी खत्म कर दिया है। ऐसे में अब दुर्भावना के तहत दर्ज कराये गये मामलों में अग्रिम जमानत भी मंजूर हो सकेगी। न्यायालय ने माना है कि एससी/एसटी अधिनियम का दुरुपयोग हो रहा है। पीठ ने नये दिशानिर्देश के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी पर मुकदमा दर्ज करने से पहले पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) स्तर का अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा। किसी सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले उसके उच्चाधिकारी से अनुमति जरूरी होगी। महाराष्ट्र की एक याचिका पर न्यायालय ने यह अहम फैसला सुनाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने केंद्र सरकार और न्याय मित्र अमरेंद्र शरण की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायालय ने इस दौरान कुछ सवाल भी उठाये थे कि क्या एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय किये जा सकते हैं ताकि बाहरी तरीकों का इस्तेमाल न हो? क्या किसी भी एकतरफा आरोप के कारण आधिकारिक क्षमता में अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है और यदि इस तरह के आरोपों को झूठा माना जाये तो ऐसे दुरुपयोगों के खिलाफ क्या सुरक्षा उपलब्ध है? क्या अग्रिम जमानत मंजूर न होने की वर्तमान प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उचित प्रक्रिया है?</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Tue, 20 Mar 2018 05:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने की होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार को बनेगी रणनीति,तय होगी तारीख ShriGangaNagar, SachKahoon News:  शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई फिर शुरू होने वाली है। प्रशासन, यूआईटी व नगर परिषद जल्द ही बैठक करके अभियान की तारीख तय करेगी, साथ ही अब किस सड़क पर कार्रवाई होनी है, इसका निर्धारण किया जाएगा। तीन बार पेशियां टलने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/will-act-to-remove-identified-violations/article-389"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/01-6.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>सोमवार को बनेगी रणनीति,तय होगी तारीख</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ShriGangaNagar, SachKahoon News:</strong>  शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई फिर शुरू होने वाली है। प्रशासन, यूआईटी व नगर परिषद जल्द ही बैठक करके अभियान की तारीख तय करेगी, साथ ही अब किस सड़क पर कार्रवाई होनी है, इसका निर्धारण किया जाएगा। तीन बार पेशियां टलने के बाद अब हाईकोर्ट में 12 दिसम्बर को सुनवाई होने की उम्मीद है। ऐसे में प्रशासन अपने द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना चाहता है। बुजुर्ग वेदप्रकाश जोशी की याचिका पर हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर में सड़कों से अतिक्रमण हटाने के आदेश गत वर्ष दिए थे। अब पिछले चार महीनों से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। पिछली पेशियों में जोशी यह मामला उठाते हुए जिला प्रशासन की मंशा पर सवाल खडे किए थे। इसकी आगामी पेशी 12 दिसम्बर को होनी है। जिला प्रशासन पहले ही हाईकोर्ट में फटकार खा चुका है, अब और फजीहत नहीं चाहता। वैसे भी जिला कलक्टर बदल चुके हैं और ज्ञानाराम काफी संजीदा अफसर माने जाते हैं। उन्होंने यूआईटी व नगर परिषद को कार्रवाई के लिए पिछले दिनों कहा था। कार्रवाई कब होनी है तथा किन सड़कों पर होनी है, यह तय करना बाकी है। इसके लिए सोमवार को कलक्टेÑट में बैठक होने की उम्मीद है। नगर परिषद क्षेत्र में दो-तीन सड़कें ऐसी हैं, जिन्हें पूर्व में चिह्नित किया जा चुका है।</p>
<p><em>नगरपरिषद आयुक्त सुनीता चौधरी ने बताया कि जिला कलक्टर ने अतिक्रमण मुक्ति अभियान चलाने के लिए कहा है। इसके लिए तारीख तय की जानी है। मॉनिटरिंग कमेटी के मुखिया कलक्टर ही हैं।</em></p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Dec 2016 00:43:05 +0530</pubDate>
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