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                <title>देश में भी बढ़े देशवासियों की आय</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट आई है कि दुनिया में भारत पहला ऐसा देश है, जिसके नागरिक विदेशों में काम कर सबसे अधिक पैसा अपने देश भेजते हैं। सुनने में यह बहुत सुखद अहसास है, परंतु जो लोग भारत के लिए विदेशों में दिन-रात एक कर यह कमाई कर रहे हैं, उनमें हजारों-हजार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increased-income-of-the-countrymen-in-the-country/article-4479"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/modi-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट आई है कि दुनिया में भारत पहला ऐसा देश है, जिसके नागरिक विदेशों में काम कर सबसे अधिक पैसा अपने देश भेजते हैं। सुनने में यह बहुत सुखद अहसास है, परंतु जो लोग भारत के लिए विदेशों में दिन-रात एक कर यह कमाई कर रहे हैं, उनमें हजारों-हजार कामगार ऐसे हैं कि उनका विदेशी धरती पर शोषण भी हो रहा है, फिर भी वह अपने देश के लिए सब कुछ सहकर कमाई करते हैं। विदेशों से भारत को अपने लोगों की कमाई का करीब 69 अरब डॉलर मिल रहा है, यह पैसा भारत के कुल रक्षा बजट का डेढ़ गुणा है और यह सब भारत के गांवों में सीधे पहुंचता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके उल्ट एक घिनौना सत्य यह भी है कि बहुत से ठग व धोखेबाज किस्म के लोग देश में भ्रष्टाचार कर, बैंक धोखाधड़ी करके देश का धन विदेशों में भेज रहे हैं। वह भी सिर्फ इसलिए कि उनकी काली कमाई छिप जाए। राजनेता, उद्योगपति, अपराधी, अफसर सब तरह के लोगों की एक अच्छी खासी गिनती है जो यह अपराध कर रही है। यहां दु:खद बात यह भी है कि भारत सरकार आज तक यह पता नहीं लगा पाई कि हवाला, भ्रष्टाचार से कुल कितना पैसा है जो देश से बाहर भेजा जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी परिस्थितियों में विदेशों में कमाई कर रहे भारतीय भी भारतीय सेना जैसे गर्व का एहसास करवाते हैं। यहां दो प्रश्न भी उठते हैं कि भारत में ऐसा माहौल कब बनेगा कि किसी भारतीय को कमाने के लिए अपना देश नहीं छोड़ना पड़े? फिर कब तक देश में बैठे ठग देश को लूट कर विदेशी बैंकों को भरते रहेंगे? आज देश में भ्रष्ट जीवन शैली वाले लोग मजे में जी रहे हैं और जो ईमानदारी से कमाना चाहता है उसका जीना मंहगाई, कर्ज, बेरोजगारी ने दूभर कर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारी गिनती में इस लोकसभा में बैठी भाजपा जो सरकार चला रही है उसने वादा किया था कि वह देश का काला धन देश में वापिस लाएगी और हर भारतीय के हिस्से करीब पन्द्रह लाख रूपये आएंगे परंतु ये सरकार भी विफल हो गई। बाहर से काला धन तो क्या वापिस लाना था उल्टे देश के कई बैकों का एक नंबर का पैसा भी बाहर चला गया। सरकार को मजबूत इच्छा शक्ति से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना होगा, साथ ही देश में आर्थिक नीतियां इस तरह की बनें कि आम भारतीय की आमदन उसके खर्च से अधिक हो, तब विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की आय से देश व देशवासियों दोनों की खुशहाली बढेÞगी, जो कि अब भी दूर की कौड़ी बनी हुई है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jun 2018 09:15:31 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के अपने-अपने मायने</title>
                                    <description><![CDATA[15 अगस्त, 1947 को लाखों देशवासियों ने कुर्बानियां देकर ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त की थी। हमारे देश में आजादी के अर्थ समय के साथ बदलते रहे हैं। सबने अपने-अपने ढंग से आजादी का मतलब निकाला है। गरीब आदमी के लिए आजादी का अर्थ गरीबी से आजादी है। अशिक्षित व्यक्ति के लिए आजादी का अर्थ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-on-independence/article-3064"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/india-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">15 अगस्त, 1947 को लाखों देशवासियों ने कुर्बानियां देकर ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त की थी। हमारे देश में आजादी के अर्थ समय के साथ बदलते रहे हैं। सबने अपने-अपने ढंग से आजादी का मतलब निकाला है। गरीब आदमी के लिए आजादी का अर्थ गरीबी से आजादी है। अशिक्षित व्यक्ति के लिए आजादी का अर्थ अशिक्षा से आजादी है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों के लिए आजादी का मतलब सत्ता प्राप्ति है। समाज के सभी वर्गों और व्यक्तियों के लिए आजादी के अलग-अलग मायने हैं। इस सबके बीच असहिष्णुता बेकारी, महंगाई, कालेधन और भ्रष्टाचार से आजादी के नारे सर्वत्र बुलंद हो रहे हैं। यही नहीं, सत्ता और विपक्ष दोनों ने आजादी की परिभाषा अपने-अपने तरीके से गढ़ ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के 70 वर्षों के बाद आज हमारा देश अपने देशवासियों की अंतरआत्मा को झकझोर रहा है। हमारे देश में दूध-दही की नदियां बहती थीं। देश को सोने की खान कहा जाता था। सत्यमेव जयते हमारा आदर्श था। महापुरूषों और ग्रंथों ने सत्य की राह दिखाई थी। भाईचारा, प्रेम और सद्भाव हमारे वेद वाक्य थे। कमजोर की मदद को हम सदैव आगे रहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के आदर्श समाज और राम राज्य की विश्व में अनूठी पहचान थी। राजाओं के राज को आज भी लोग याद रखते हैं और यह कहते नहीं थकते कि उस समय की न्याय व्यवस्था काफी सुदृढ़ थी। राज्य के कर्मचारी आम आदमी को प्रताड़ित नहीं करते थे। सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में नैतिकता थी। बुराई के विरूद्ध अच्छाई का बोलबाला था।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने आजादी के बाद राम राज्य की कल्पना संजोई थी। प्रगति और विकास की ओर हमने तेजी से बढ़ने का संकल्प लिया था। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से चहुंमुखी विकास की ओर कदम बढ़ाये थे। सामाजिक क्रांति का बीड़ा उठाया था। ईमानदारी के मार्ग पर चलने की कस्में खाई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अब आजादी की आधी से अधिक सदी बीतने के बाद हमारे कदम लड़खड़ा रहे हैं। सत्यमेव जयते से हमने किनारा कर लिया है। अच्छाई का स्थान बुराई ने ले लिया है और नैतिकता पर अनैतिकता प्रतिस्थापित हो गई है। ईमानदारी केवल कागजों में सिमट गई है और भ्रष्टाचरण से पूरा समाज आच्छादित हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के बाद निश्चय ही देश ने प्रगति और विकास के नये सोपान तय किये हैं। पोस्टकार्ड का स्थान ई-मेल ने ले लिया है। इन्टरनेट से दुनिया नजदीक आ गई है। मगर आपसी सद्भाव, भाईचारा, प्रेम, सच्चाई से हम कोसों दूर चले गये हैं। समाज में बुराई ने जैसे मजबूती से अपने पैर जमा लिये हैं। लोक कल्याण की बातें गौण हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी का मतलब स्वच्छंदता नहीं है। आजादी हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। आज हमारे जीवन में अनुशासन की सख्त आवश्यकता है। अनुशासन जीवन के विकास का अनिवार्य तत्व है, जो अनुशासित नहीं होता, वह दूसरों का हित तो कर नहीं पाता, स्वयं का अहित भी टाल नहीं सकता। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का महत्व है। अनुशासन स्वतंत्रता प्रदान करता है जो व्यक्ति अनुशासित रूप से जीते हैं उन्हें स्वत ही विद्या, ज्ञान एवं सफलता प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के बाद हमने अनुशासन की भावना को तिलांजलि दे दी, जिसके फलस्वरूप देश पतन की गहरी खाई की और उन्मुख हो रहा है। हमारी कथनी और करणी विश्वसनीय नहीं रही है। जुबान काबू में नहीं है और स्वार्थ हम पर हावी हो गया है। हमें अपनी आजादी बचानी है तो अनुशासन को अपनाना ही होगा। किसी भी राष्टÑ की प्रगति तभी संभव है जब उसके नागरिक अनुशासित हों।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हम चाहते हैं कि हमारी आजादी अक्षुष्ण रहे और समाज एंव राष्टÑ प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर रहें, तो हमें अनुशासित रहना ही पड़ेगा। जब हम स्वयं अनुशासित रहेंगे, तब ही किसी दूसरे को अनुशासित रख सकेंगे। अनुशासन ही देश को महान बनाता है। प्रत्येक व्यक्ति का देश के प्रति कुछ कर्तव्य होता है, जिसका पालन उसे अवश्य करना चाहिए, क्योंकि जिस देश के नागरिक अनुशासित होते हैं, वही देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रह सकता है। यही हमारे लिए आजादी की सीख है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-बाल मुकुंद ओझा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2017 23:30:57 +0530</pubDate>
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