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                <title>Ram temple - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Ram Mandir: 191 फुट ऊँचे मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के समय गर्व से उठी रही सभी निगाहें</title>
                                    <description><![CDATA[Ram Mandir Updates: अयोध्या। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर में स्थित 191 फुट ऊँचे मंदिर शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज का आरोहण किया। यह ऐतिहासिक क्षण मंदिर के पूर्ण निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को “आध्यात्मिक पुनर्जागरण का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pm-modi-hoisted-the-saffron-flag-on-the-peak-of-191-feet-high-temple/article-78555"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/ram-temple-today.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ram Mandir Updates: अयोध्या। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर में स्थित 191 फुट ऊँचे मंदिर शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज का आरोहण किया। यह ऐतिहासिक क्षण मंदिर के पूर्ण निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को “आध्यात्मिक पुनर्जागरण का पर्व” बताते हुए कहा कि यह ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि सदियों के तप, संघर्ष और आस्था का प्रत्यक्ष साक्ष्य है। Ram Mandir News</p>
<p style="text-align:justify;">ध्वजारोहण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। पूरे अयोध्या धाम में इस भव्य समारोह को लेकर उत्साह का वातावरण रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर का पूर्ण होने जा रहा स्वरूप उन तमाम पीढ़ियों के धैर्य और विश्वास की जीत है जिन्होंने राम राज्य के आदर्शों को अपने जीवन का मार्गदर्शन माना। उन्होंने कहा कि भगवा ध्वज भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक ऊर्जा, सत्य, साहस, त्याग और मर्यादा के सिद्धांतों का द्योतक है। Ram Mandir News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा, “यह धर्म ध्वज मात्र कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है। यह हमारी सनातन परंपरा की अखंड धारा का प्रतीक है। इस पर अंकित सूर्यवंश का चिह्न, ‘ॐ’ का पवित्र स्वर एवं कोविदारा वृक्ष का चिन्ह राम राज्य की नैतिकता, समानता और करुणा के संदेश को धारण करता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में यह ध्वज अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान के साथ-साथ भारत के उत्थान की प्रेरणा का केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को सामूहिक प्रयासों से साकार करें।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राम केवल अयोध्या के राजा भर नहीं थे, बल्कि त्याग, न्याय, प्रेम और कर्तव्य के सर्वोच्च आदर्श हैं। आश्रमों में ऋषियों की मार्गदर्शना, भक्तों का प्रेम और मित्रों की निष्ठा ने उनके व्यक्तित्व को और परिपूर्ण बनाया। यही मूल्य आज भी भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक शक्ति के आधार हैं। Ram Mandir News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 15:43:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अयोध्या में राम मंदिर के लिये नींव की खुदाई शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या। भगवान श्रीराम के जन्मस्थल पर बनने वाले भव्य मंदिर के नींव की खुदाई का काम मंगलवार को शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 5 अगस्त को मंदिर का भूमि पूजन किया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र सोमवार की शाम यहां आ गये थे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/digging-of-foundation-for-ram-temple-in-ayodhya-begins/article-18249"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/ram-temple.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या।</strong> भगवान श्रीराम के जन्मस्थल पर बनने वाले भव्य मंदिर के नींव की खुदाई का काम मंगलवार को शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 5 अगस्त को मंदिर का भूमि पूजन किया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र सोमवार की शाम यहां आ गये थे । उन्होंने सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी। सूत्रों ने कहा कि मंदिर की नींव के लिये जमीन से एक सौ फिट गहराई तक खोदने वाली दो मशीनें निर्माण संस्था लार्सन एंड टूब्रों ने रविवार को ही मंगवा ली थी । कंपनी के इंजीनियर सोमवार को पूरा दिन उसे ठीक करने में लगे रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">मशीन से पिलर के लिये दो सौ फिट तक खुदाई की जानी है ।इस काम के लिये कुछ और मशीनों को जल्द ही यहां मंगवा लिया जायेगा। सूत्रों ने कहा कि पूरे परिसर में 1200 स्थानों पर पाईलिंग होनी है । पाइलिंग मशीनों से खंभो को खड़ा करने के लिये खुदाई की जायेगी । इन बारह सौ स्थानों पर एक मीटर व्यास में कुयें के आकार में पाइलिंग करा कंकरीट के पिलर खड़े किये जायेंगे । मशीने इतनी बड़ी थी कि रामजन्म भूमि स्थल के मुख्य द्वार को तोड़ना पड़ा। दूसरी ओर मंदिर निर्माण स्थल पर जर्जर मंदिरों को हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2020 13:24:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राम मंदिर शिलान्यास से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा आज का दिन : अरुण गोविल</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ में भगवान श्री राम का किरदार निभाने वाले अरूण गोविल का कहना है कि श्रीराम मंदिर के शिलान्यास से पांच अगस्त का दिन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो जायेगा। धार्मिक सीरियल रामायण में श्रीराम की भूमिका निभाने वाले कलाकार अरुण गोविल ने राम मंदिर भूमि पूजन से पूर्व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/today-will-be-written-in-golden-letters-with-ram-temple-foundation-stone-arun-govil/article-17356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/arun-govil.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ में भगवान श्री राम का किरदार निभाने वाले अरूण गोविल का कहना है कि श्रीराम मंदिर के शिलान्यास से पांच अगस्त का दिन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो जायेगा। धार्मिक सीरियल रामायण में श्रीराम की भूमिका निभाने वाले कलाकार अरुण गोविल ने राम मंदिर भूमि पूजन से पूर्व ट्वीट कर अपनी खुशी व्यक्त की है। अरुण गोविल ने लिखा, ‘इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। श्रीराम मंदिर के शिलान्यास से पूरी दुनिया के रामभक्तों का सपना साकार हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। जय श्रीराम। इससे पहले भी अरुण गोविल ने ट्वीट कर कहा था, ‘अयोध्या में राम मंदिर के लिए वर्षों तक लगातार संघर्ष करने वाले वरिष्ठजन और आगे उस लड़ाई को भूमिपूजन तक लेकर आने वाले सभी रामभक्तों को मेरा कोटि कोटि नमन। आप सबके महान प्रयासों से ही हमें ये दिन देखने का? सौभाग्य मिल रहा है। जय श्रीराम। अरूण गोविल ने एक अन्य ट्वीट कर लिखा, ‘भगवान श्रीराम के मंदिर के शिलान्यास की प्रतीक्षा समस्त मानव जाति कर रही है। अयोध्या में भूमि पूजन के साथ ही एक दिव्य युग का शुभारंभ हो जाएगा। <strong>जय श्रीराम</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2020 15:44:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राममंदिर कार्यक्रम टालने की दिग्विजय की मोदी से अपील, अशुभ मुहूर्त का दिया हवाला</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा और उत्तर प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष स्वतंत्र देव समेत भाजपा के अन्य नेताओं के कोरोना संक्रमित होने का वास्ता देते ‘अशुभ’ मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में राममंदिर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/digvijay-appeals-to-modi-to-postpone-ram-temple-program-cites-ominous-muhurta/article-17297"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/ram-temple.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कांग्रेस महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा और उत्तर प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष स्वतंत्र देव समेत भाजपा के अन्य नेताओं के कोरोना संक्रमित होने का वास्ता देते ‘अशुभ’ मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में राममंदिर का भूमि पूजन टालने की एक बार फिर अपील की है। सिंह ने सोमवार को कई ट्वीट किये जिनमें अशुभ घड़ी में राममंदिर के भूमिपूजन और भाजपा नेताओं के कोरोना संक्रमित होने का हवाला देकर इसे टालने का उल्लेख है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को नज़र अंदाज करने का नतीजा 1- राम मंदिर के समस्त पुजारी कोरोना पॉजिटिव, 2-उत्तर प्रदेश की मंत्री कमला रानी वरुण का कोरोना से स्वर्गवास, 3- उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष कोरोना पॉजिटिव अस्पताल में, 4- देश के गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पॉजिटिव अस्पताल में, 5- मध्यप्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कोरोना पॉजिटिव अस्पताल में तथा 6- कर्नाटक के भाजपा के मुख्यमंत्री कोरोना पॉजिटिव अस्पताल में।” उन्होंने आगे लिखा, “ पांच अगस्त को भगवान राम के मंदिर शिलान्यास के अशुभ मुहुर्त के बारे में विस्तार से जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने सचेत किया था। मोदी जी की सुविधा पर यह अशुभ मुहुर्त निकाला गया , यानी मोदी जी हिंदू धर्म की हजारो वर्षों की स्थापित मान्यताओं से बड़े हैं!! क्या यही हिंदुत्व।”</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2020 12:52:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर सहमति से समाधान की पहल ?</title>
                                    <description><![CDATA[सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर राम जन्मभुमि-बाबरी मस्जिद विवाद को सभी पक्षों के बीच मध्यस्थता से सुलझाने की सलाह दी है। हालांकि न्यायालय ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा है। 5 सदस्यीय संविधान पीठ के सामने इस मामले पर जो बहस हुई उसमें न्यायालय ने कहा कि यह मसला किन्हीं दो पक्षों के बीच न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर राम जन्मभुमि-बाबरी मस्जिद विवाद को सभी पक्षों के बीच मध्यस्थता से सुलझाने की सलाह दी है। हालांकि न्यायालय ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा है। 5 सदस्यीय संविधान पीठ के सामने इस मामले पर जो बहस हुई उसमें न्यायालय ने कहा कि यह मसला किन्हीं दो पक्षों के बीच न होकर दो समुदायों का विवाद है। मसलन अदालत इसे सिर्फ भूमि के मालिकाना हक का मामला नहीं मान रही है, बल्कि इसके व्यापक प्रभाव पर भी उसकी नजर है। अदालत का यह दृश्टिकोण अपनी जगह उचित है, क्योंकि इसका प्रभाव करोड़ों देशवासियों पर पड़ेगा। न्यायालय ने यह दलील भी दी है कि बाबर द्वारा अतीत में क्या किया गया, उसे बदला नहीं जा सकता। इसलिए इस मुद्दे को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत का यह व्यावहारिक पक्ष अपनी जगह ठीक है, किंतु पहले सुलह की अनेक कोशिशों के बावजूद भी समस्या का हल नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल में जब आपसी बातचीत से इस मसले के सार्थक प्रयास हुए तब रूढ़िवादी वामपंथी इतिहासकारों ने मुस्लिम पक्ष को सुलह नहीं करने के लिए उकसाया था। इस संकीर्ण सोच के चलते जहां दस्तावेजी साक्ष्यों को नकारा गया, वहीं पुरातात्विक साक्ष्यों को भी दरकिनार किया गया। इस लिहाज से लगता है कि अदालत सुलह की कोशिश भले ही करे, सुलह होना नामुमकिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 70 साल से यह विवाद विभिन्न अदालतों से होता हुआ शीर्ष न्यायालय की दहलीज पर आकर ठिठका सा लग रहा है। राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में आयोध्या में विवादित ढांचे में स्थित राम मंदिर का ताला खोलने की अनुमति फैजाबाद अदालत ने दी थी। इसके बाद विश्व हिंदू परिशद् और बांवरी मस्जिद संघर्श समिति के बीच शुरू हुए विवाद का दुखद अंत इस ढांचे को ढहाए जाने की परिणति के रूप में सामने आया। 2010 में हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्यों व रडार तकनीक से जुटाए गए सबूतों के आधार पर विवादित स्थल के नीचे मंदिर के अवशेष होना पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस आधार पर विवादित 840 वर्ग फीट भूमि का स्वामित्व मंदिर के पक्षकारों का माना, लेकिन 3 सदस्यीय न्यायमूर्तियों की पीठ में से एक ने दोनों समुदायों के बीच समरसता बनाए रखने की पैरवी करते हुए 280 वर्ग फीट भूमि इस्लाम धर्मावलंबियों देने का आदेश दिया। नतीजतन मालिकाना हक की अस्पष्टता के चलते दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। तब से मामला लंबित है। अब फिर एक बार शीर्ष न्यायालय ने इसे आस्था का मामला बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके पहले इसी न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ एवं एसके कॉल की पीठ ने कहा था कि यह धर्म और आस्था से जुड़ा मामला होने के कारण संवेदनशील है, लिहाजा इसे अदालत के बाहर निपटाना बेहतर होगा। लेकिन परिणाम शून्य रहा। जिस वर्तमान पीठ ने समझौते से मामला सुलझाने की सलाह दी है, उसमें भी न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ शामिल हैं। चंद्रचूड़ समझौता की दलीलों से थोड़ा असहमत दिखे। उनका संदेह है कि मध्यस्थता से जो फैसला आएगा, उसे करोड़ों लोग आसानी से स्वीकार लेंगे। अलबत्ता यहां सवाल उठता है कि भूमि स्वामित्व का हक अदालत से निश्चित क्यों नहीं हो सकता ? इससे यह संदेश निकलता है कि संविधान और कानून के अनुसार काम करने वाली शीर्ष न्यायालय स्वयं को कहीं दुविधा में तो नहीं पा रही है ?</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या विवाद देश के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है। इस मुद्दे ने देश की राजनीति को भी प्रभावित किया है। विश्व हिंदू परिशद् अयोध्या में उस विवादित स्थल पर मंदिर बनाना चाहती है, जहां पहले एक कथित रूप से मस्जिद थी। जबकि मुस्लिमों का पक्ष है कि यहां मंदिर होने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। यह स्थान 1528 से मस्जिद है और 6 दिसंबर 1992 तक इसका उपयोग मस्जिद के रूप में होता आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों और लोकसाहित्य से यह प्रमाणित होता है कि 1528 में एक ऐसे स्थल पर हिंदुओं को अपमानित करने की दृष्टि से मस्जिद का निर्माण कराया गया, जहां भगवान राम की जन्मस्थली थी। 1528 में मुगल बादशाह बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इस कारण इसे बाबरी मस्जिद कहा जाता है। 1853 में पहली बार इस स्थल को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों में सांप्रदायिक झड़प हुई। 1859 में चालाकी बरतते हुए ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर रोक लगा दी और विवादित परिसर क्षेत्र में दो हिस्से करके हिंदुओं और मुस्लिमों को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के बाद 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां पाई गई। एकाएक इन मूर्तियों के प्रकट होने पर मुस्लिमों ने विरोध जताया। दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। नतीजतन सरकार ने इस स्थल को विवादित घोशित कर ताला डाल दिया और दोनों सम्प्रदायों के प्रवेश पर रोक लगा दी। 1984 में विहिप ने भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करके वहां राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। इस अभियान का नेतृत्व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाला।</p>
<p style="text-align:justify;">1986 में जब केंद्र में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार थी तब फैजाबाद के तत्कालीन कलेक्टर ने हिंदुओं को पूजा के लिए विवादित ढांचे के ताले खोल दिए। इसके परिणामस्वरूप मुस्लिमों ने वावरी मस्सिद संघर्श समिति बना ली। 1989 में राम मंदिर निर्माण के लिए विहिप ने अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक मंदिर की नींव रख दी। 1990 में विहिप के कार्यकतार्ओं ने विवादित ढांचे को क्षति पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तबके प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश की, किंतु कोई हल नहीं निकला।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों, निर्मोही अखाड़े और गोपाल सिंह विशारद द्वारा मंदिर के पक्ष में जो सबूत और शिलालेख अदालत में पेश किए गए थे, उनसे यह स्थापित हो रहा था कि विंध्वस ढांचे से पहले उस स्थान पर राममंदिर था। जिसे आक्रमणकारी बाबर ने हिन्दुओं को अपमानित करने की दृष्टि से शिया मुसलमान मीर बांकी को मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने का हुक्म दिया था। मस्जिद के निर्माण में चूंकि शिया मुसलमान मीर बांकी के हाथ लगे थे, इस कारण इस्लामिक कानून के मुताबिक यह शिया मुसलमानों की धरोहर था। इसकी व्यवस्था संचालन के लिए शिया मुतवल्ली की भी तैनाती बाबर के ही समय से चली आ रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराधिकारी के रूप में जिस मुतवल्ली की तैनाती थी, उस व्यक्ति ने हिन्दू संगठनों से मिलकर बाबरी ढांचे को विवादित परिसर से बाहर ले जाकर स्थापित करने में सहमति भी जता दी थी। मालिकाना हक भी इसी मुतवल्ली का था। लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ऐसा नहीं होने दिया और मामला कचहरी की जद में बना रहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में राम की दिव्यता और उनके प्रति आस्था का जिक्र भले ही था लेकिन तीनों विद्वान न्यायाधीशों ने आखिरकार जनभावनाओं और आस्था को दरकिनार करते हुए फैसले का आधार पुरातत्वीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट और साक्ष्यों को ही माना था। ऐसे में एक बार फिर इस मुद्दे को धर्म और आस्था के बहाने पक्षकारों की सहमति पर छोड़ने का औचित्य समझ से परे है ?</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अदालतों में विचाराधीन मामलों को अदालत से बाहर बातचीत के जरिए निपटाया जाता है। कानून में कोर्ट आॅफ सिविल प्रोसिजर में इस तरह के प्रावधान हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण कानून 1987 में बना था। लेकिन 9 नबंवर 1995 को यह लागू हो पाया। इसके तहत मामलों का निपटारा आपसी सहमति से संभव है। लोक अदालतों में भी भूमि के स्वामित्व व बंटवारा से संबंधित विवाद हल किए जाते हैं। लेकिन इस मामले के बातचीत से हल की उम्मीद इसलिए कम है, क्योंकि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि विवादित स्थल राम की जन्मभूमि होने की मान्यता प्राचीन संस्कृत साहित्य और जनश्रुतियों में हजारों साल से बनी हुई है। किंतु इन मान्यताओं के आधार पर मुस्लिम पक्षकार पीछे हट जाएं ऐसा लग नहीं रहा हैं। बावजूद इस मुद्दे का बातचीत से हल निकालने की कोशिशें प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पीवी नरसिंह राव और अटल बिहारी वाजपेयी करते रहे है, परंतु सफलता नहीं मिली। इसलिए सुलह की इस अंतिम कोशिश के बाद इस मसले को लगातार सुनवाई से निपटाना जरूरी है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2019 20:33:03 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर, राफेल और राहुल ने बढ़ा दीं मोदी की मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2019 में राम, राहुल और राफेल तीन ग्रह एक साथ प्रधाानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक कुण्डली में बैठे दिखाई दे रहे हैं। चुनावी वर्ष में इन तीन ग्रहों का एक साथ एक घर में बैठना मोदी के राजनैतिक भविष्य के लिए अशुभ एवं अप्रिय स्थितियां पैदा कर सकता है। राम मंदिर, राफेल डील और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में राम, राहुल और राफेल तीन ग्रह एक साथ प्रधाानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक कुण्डली में बैठे दिखाई दे रहे हैं। चुनावी वर्ष में इन तीन ग्रहों का एक साथ एक घर में बैठना मोदी के राजनैतिक भविष्य के लिए अशुभ एवं अप्रिय स्थितियां पैदा कर सकता है। राम मंदिर, राफेल डील और राहुल गांधी तीनों परस्पर विरोधी ग्रह हैं। तीन शत्रु ग्रह अगर किसी की भी कुण्डली में एक साथ बैठ जाएं तो मुश्किलें बढ़ना तय माना जाता है। फिलवक्त नरेंद्र मोदी की राजनीतिक कुण्डली इन तीन ग्रहों के अनिष्ट दुर्योग से बुरी तरह प्रभावित दिख रही है। राम मंदिर का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालयय में लंबित है तो वहीं राफेल पर कांग्रेस चौकीदार चोर है का नारा बुलंदी से लगा रही है। राहुल गांधी पिछले एक-डेढ वर्ष में मोदी से टक्कर लेने वाले नेता के तौर पर उभरे हैं। ऐसे में राम मंदिर, राफेल डील और राहुल गांधी ने फिलवक्त मोदी की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। मोदी अशुभ ग्रहों का संकट बखूबी महसूस कर रहे हैं, और शायद वो इनकी काट भी खोज रहे हों।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी आज जिस भव्य स्वरूप और राजनीतिक हैसियत में है, उसके पीछे राम मंदिर मुद्दे का सबसे बड़ा योगदान है। दो सांसदों से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने तक जब-जब भाजपा संकट में पड़ी, उसे राम नाम ने ही सहारा दिया। भाजपा राम मंदिर मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही है। लेकिन आज ये मुद्दा ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां भाजपा को इस मामले में कोई बड़ा व ठोस कदम उठाना जरूरी हो गया है। आज केन्द्र और उत्तर प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है। भाजपा के सामने एकतरफ देश की वो जनता है जिसने उसे राम मंदिर के मुद्दे पर उसे समर्थन और वोट दी तो दूसरी तरफ वो सुप्रीम कोर्ट है जहां मामले की सुनवाई लंबित है। अर्थात् इस मुद्दे पर भाजपा की स्थिति आगे कुअां, पीछे खाई वाली है।</p>
<p style="text-align:justify;">राम मंदिर के मुद्दे पर टाल-मटोल से भाजपा के सहयोगी, हिदुंवादी संगठन और खासकर आरएसएस में भी नाराजगी का माहौल है। असल में एससी-एसटी एक्ट में अध्यादेश लाकर मोदी सरकार ने खुद अपनी मुश्किलें बढ़ायी हैं। ऐसे में राम भक्त दलील दे रहे हैं कि राम मंदिर पर भी सरकार अध्यादेश लाये। पिछले दो-तीन महीने से यह मुद्दा दोबारा चर्चा में है। साधु-सन्त, आरएसएस, वीएचपी से लेकर राम भक्त राम मंदिर निर्माण के लिये मोदी सरकार पर दबाव बना रहे हैं। राम मंदिर पर सरकार की हीला-हवाली से भाजपा के समर्थक नाराज हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अदालत के फैसले के बाद ही कोई कदम उठाएगी। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही नयी बेंच बनाकर सुनवाई तय करेगा। मामला चूंकि सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में भाजपा की हालत मशहूर फिल्म शोले के उस हाथ कटे ठाकुर जैसी है, जो चिल्ला तो सकता था, लेकिन बेचारा कुछ कर नहीं पाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">राम मंदिर की भांति राफेल डील के मामले ने मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। मोदी सरकार के अब तक कार्यकाल में कांग्रेस को राफेल डील ही एकमात्र ऐसा अस्त्र मिला है, जिससे वो मोदी सरकार को घेर पा रही है। सड़क से लेकर संसद और चुनावी मंच से लेकर चर्चार्आेंं तक में कांग्रेस राफेल-राफेल चिल्ला रही है। प्रधानमंत्री के बयान, वित्त मंत्री की फटकार और रक्षामंत्री के निर्मल ज्ञान और धुलाई के बाद भी कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी खरीद की प्रक्रिया पर सरकार को क्लीन चिट दे चुका है। राहुल का आरोप है कि देश का पैसा पीएम मोदी ने अनिल अंबानी के जरिए चोरी करवाया। एचएएल से 30 हजार करोड़ का अनुबंध तोड़कर अनिल अंबानी को दे दिया गया। जिसके चलते देश के प्रतिभाशाली नौजवानों का रोजगार छिन गया। राहुल के मुताबिक राफेल डील पर अगर मुकम्मल जांच होती है तो दो घोटालेबाजों का नाम निकलेंगे। जिनमें पीएम मोदी और अनिल अंबानी का नाम शामिल होगा। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण संसद में इस मुद्दे पर सिलसिलेवार जवाब दे चुकी है। बावजूद इसके कांग्रेस समझने को तैयार नहीं है। कांग्रेस इस मुद्दे पर जेपीसी की मांग कर रही है। वास्तव में कांग्रेस राफेल डील में भ्रष्टाचार का कीचड़ लगाकर मोदी सरकार का दामन दागदार करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले लगभग छह महीने की जीतोड़ मेहनत के बाद भी कांग्रेस इस मुद्दे पर मोदी सरकार को असरदार तरीके से घेर नहीं पा रही है। लेकिन चौैकीदार चोर है का शोर मचाकर वो देश की जनता को बरगलाने का काम बखूबी कर रही है। जिसका सियासी लाभ शायद उसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिला भी है। हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों में मिली कामयाबी से चौकीदार चोर है और राफेल-राफेल का राग कांग्रेस और जोर-शोर से बजाने लगी है। यह बात दीगर है कि कांग्रेस राफेल डील में भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण या दस्तावेज अब तक पेश नहीं कर पायी है। न ही वो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बनने की हिम्मत जुटा पायी। कांग्रेस की कोरी बयानबाजी और कागजी हवाई आरोपों के बावजूद मोदी सरकार को सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक में सफाई तो देनी ही पड़ रही है। संसद में हुई हालिया चर्चा में राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री को इस मामले में क्लीन चिट देने के साथ दोबारा सीधे तौर पर प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़े हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले एक साल से कांग्रेस की कमान संभाल रहे राहुल अपनी छवि सुधारने के लिये कैलाश मानसरोवर यात्रा से लेकर जनेऊ धारी फोटो जारी करने के तमाम प्रपंच रच रहे हैं। अपनी व पार्टी की मुस्लिम परस्त की छवि को तोड़कर वो साफ्ट हिंदुत्व की छवि गढ़ने में कामयाब होते दिखाई देते हैं। गुजरात व कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के पसीने छुड़ाने के बाद हिंदी पट्टी के तीन राज्यों की जीत ने राहुल का राजनीतिक कद और लोकप्रियता दोनों को बढ़ाया है। अब मीडिया भी उन्हें तवज्जो देने लगा है। आज राहुल गांधी एक नये ब्रांड के तौर पर उभरतते दिखाई दे रहे हैं। हां, बीच-बीच में उनकी राजनीति, विचार, बॉडी लैंग्वेज और कार्यशैली बेपटरी हो जाती है। जिससे उनकी छवि को ठेस पहुंचती है। फिलवक्त राहुल नरेंद्र मोदी का विकल्प तो नहीं बन पाये हैं, लेकिन वो स्पष्ट तौर पर मोदी के सबसे मुखर राजनीतिक विरोधी बनकर जरूर उभरे हैं। मोदी को टक्कर देने के लिये अभी उन्हें जनता से ज्यादा जुड़ाव, स्वीकार्यता हासिल करने के अलावा लगातार प्रदर्शन की जरूरत है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/ram-temple-raphael/article-7279</link>
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                <pubDate>Tue, 08 Jan 2019 19:53:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर: सरकार कानून बनाए, कोर्ट के फैसले का और इंतजार नहीं कर सकते: विहिप</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व हिंदू परिषद ने कहा- हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि राम मंदिर के मामले में न्याय प्रक्रिया (Ram Temple Government Can Not Make Law VHP) पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">विश्व हिंदू परिषद ने कहा- हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि राम मंदिर के मामले में न्याय प्रक्रिया (Ram Temple Government Can Not Make Law VHP) पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद भाजपा के समर्थक दलों और संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस मुद्दे को लेकर बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसने सरकार से मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की। इससे पहले मोदी ने कहा था कि सरकार संविधान के तहत ही काम करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “हमने राम जन्मभूमि पर (Ram Temple Government Can Not Make Law VHP) प्रधानमंत्री का बयान देखा है। यह मामला 69 साल से कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है। अब यह सुनवाई 4 जनवरी को हो रही है, लेकिन जिस बेंच को सुनवाई करनी थी, उसका गठन नहीं हुआ है। अब यह फिर से सीजेआई की कोर्ट में आ गया है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘संत तय करेंगे कि आगे क्या करना है’</h2>
<p style="text-align:justify;">आलोक कुमार ने कहा, “हमें लग रहा है कि सुनवाई अभी कोसों मील दूर है। ऐसे में विहिप का फैसला है कि हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता। हम चाहते हैं कि सरकार अध्यादेश लाकर भव्य मंदिर बनाए। इस मामले में आगे की बातचीत प्रयागराज में धर्म संसद होगी। वहां संत तय करेंगे कि हमें आगे क्या करना है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘सांसदों ने मंदिर निर्माण का समर्थन किया’</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ”हम देश के ज्यादातर सांसदों से मिले। उन्होंने संसद में कानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने का समर्थन किया है। हिंदू समाज लंबे समय से लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहा है। संत समाज हमारे साथ खड़ा है। 31 जनवरी को धर्म संसद में संत जो निर्णय लेंगे, हम उसी पर आगे बढ़ेंगे।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘कांग्रेस के वकीलों ने मामले को लटकाया’</h2>
<p style="text-align:justify;">आलोक कुमार ने कहा- ”कांग्रेस के वकीलों की कोशिश है कि यह मामला कोर्ट में लटकता रहे। हमारे पास दोनों मामले खुले हैं कि संसद में कानून बने या सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई करे। प्रधानमंत्री ने भले ही हमारा समर्थन नहीं किया है, लेकिन हमें उन्हीं से उम्मीद है। हमने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">मोदी ने कहा था- तीन तलाक पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हम अध्यादेश लाए</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा। तीन तलाक पर भी हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश लाए थे। कांग्रेस के वकील खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है। न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जिम्मेदारी होगी, हम वह करेंगे।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ram-temple-government-can-not-make-law-can-not-wait-for-court-verdict-vhp/article-7170</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:54:46 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार रहे ना रहे राम मंदिर तो जरूर बनेगा : ठाकरे</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राम मंदिर का इस्तेमाल जुमले के तौर पर किये जाने का आरोप लगाते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे(Uddhav Thackeray) ने कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार रहे या ना रहे मंदिर का निर्माण हर हाल में किया जाएगा। राम की नगरी अयोध्या में रविवार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ram-temple-surely-constructed-uddhav-thackeray/article-6692"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/uddhav-thackeray-.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या ।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राम मंदिर का इस्तेमाल जुमले के तौर पर किये जाने का आरोप लगाते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे(<strong>Uddhav Thackeray</strong>) ने कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार रहे या ना रहे मंदिर का निर्माण हर हाल में किया जाएगा।</p>
<p>राम की नगरी अयोध्या में रविवार को पत्रकारों से बातचीत में श्री ठाकरे ने आरोप लगाया कि राम मंदिर का नाम लगभग हर चुनाव में इस्तेमाल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंदिर निर्माण के अपने वादे से मुकर रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि अगर मामला अदालत के पास ही जाना है तो चुनाव प्रचार के दौरान उसे इस्तेमाल ना करें और बता दे ह्ल भाइयों और बहनों हमें माफ करो। यह भी हमारा एक चुनावी जुमला था। भगवान के लिये हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ ना करें, यही कहने मैं यहां आया हूं। ह्व</p>
<p>भाजपा से सवाल करते हुए उन्होंने कहा ह्ल जब आप चुनाव के दौरान प्रचार करते हो, तब आप की निगाह सभी संभावित संवैधानिक विकल्पों पर होती है लेकिन यह दुर्भाग्य है कि पिछले साढ़े चार सालों के कार्यकाल में आपने यहां कुछ नहीं किया । अब लोग कहने लगे हैं भाई यह तो चुनावी जुमला था। ह्व</p>
<p>ठाकरे ने कहा ह्ल मैं भारतीय जनता पार्टी सरकार से पूछना चाहता हूं, राम मंदिर निर्माण की दिशा में आपके पास कितने विकल्प हैं, क्या विमुद्रीकरण पर फैसला लेने के लिए आप अदालत की शरण में गए थे जो अब आप राम मंदिर निर्माण के लिए अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हो। सरकार बहुत शक्तिशाली है मगर बहुसंख्यक समाज की उम्मीदों पर विफल साबित हुई है।ह्व</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार मंदिर निर्माण नहीं कराती है तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है मगर मंदिर हर हाल में बनेगा। उन्होंने कहा ह्ल चुनाव के दौरान लोग राम-राम कहते हैं और चुनाव होने के बाद चैन की नींद सो जाते हैं। देश इंतजार कर रहा है कि राम मंदिर कब बनेगा आप अध्यादेश लाइए हम आपका समर्थन करने के लिए तैयार हैं। ह्व</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Nov 2018 17:31:50 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर निर्माण में देरी के लिये कांग्रेस जिम्मेदार : मौर्य</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। अयोध्या में राम मंदिर (Ram temple) निर्माण में देरी के लिये कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौेर्य ने कहा कि राज्यसभा में बहुमत होने की दशा में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकती थी। मौर्य ने सोमवार को ‘यूनीवार्ता’ से बातचीत में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-responsible-for-delay-in-construction-of-ram-temple-maurya/article-5478"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/ram-temple.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> अयोध्या में राम मंदिर <strong>(Ram temple)</strong> निर्माण में देरी के लिये कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौेर्य ने कहा कि राज्यसभा में बहुमत होने की दशा में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकती थी।</p>
<p>मौर्य ने सोमवार को ‘यूनीवार्ता’ से बातचीत में कहा कि राम मंदिर प्रकरण उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है और उम्मीद है कि जल्द ही इस विवाद का समाधान हो जायेगा।</p>
<p>उन्होने कहा कि कांग्रेस अपने राजनीति फायदे के लिये मंदिर निर्माण में रोड़ा अटका रही है। भाजपा के पास राज्य सभा में बहुमत होता तो मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता था।</p>
<p>उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार राम मंदिर <strong>(Ram temple)</strong> निर्माण के लिए कटिबद्ध है। राम मंदिर निर्माण तीन तरीके से हो सकता है। पहला उच्चतम न्यायालय के फैसला आने के बाद, दूसरा दोनों पक्षों में समझौते के माध्यम से या फिर यह संसद में कानून बनाकर संभव है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संतों और देश की जनता का दबाव है कि द्वारिका मंदिर की तरह ही अयोध्या में राम मंदिर <strong>(Ram temple) </strong>निर्माण के लिये कानून बनाया जाये लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार (राजग) के पास राज्यसभा में बहुमत नही है। बिना बहुमत के इस तरह के कानून को पारित नही कराया जा सकता है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Aug 2018 17:38:45 +0530</pubDate>
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                <title>सद्भावना से हो राम मंदिर के मुद्दे का समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण करने के मामले में सभी राजनीतिक दलों को तीन माह में मामला सुलझाने के लिए कह दिया है। परिस्थितियों के अनुसार अदालत का फैसला न केवल ठीक है बल्कि यह देश की सद्भावनापूर्ण संस्कृति पर केंद्रित है। 1992 में बाबरी मस्जिद गिराने के बाद देश में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/solution-to-the-issue-of-ram-temple-by-goodwill/article-3065"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/ram-mandir2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण करने के मामले में सभी राजनीतिक दलों को तीन माह में मामला सुलझाने के लिए कह दिया है। परिस्थितियों के अनुसार अदालत का फैसला न केवल ठीक है बल्कि यह देश की सद्भावनापूर्ण संस्कृति पर केंद्रित है।</p>
<p style="text-align:justify;">1992 में बाबरी मस्जिद गिराने के बाद देश में बड़े स्तर पर सांप्रदायिक दंगे हुए लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता गया देश की जनता ने शांतिपूर्वक समाधान निकालने पर जोर दिया। भले यह मुद्दा राजनैतिक रंगत ले चुका है फिर भी इससे जुड़े कुछ दल इस बात के लिए राजी थे कि धार्मिक स्थानों के नाम पर देश में तनावपूर्ण परिस्थितियां पैदा करना ठीक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन यह काफी कष्टपूर्ण है कि बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के मुद्दे पर सभी पार्टियों के नेता आपसी बातचीत से हल निकालने की जहमत भी नहीं उठा रहे। अदालती कैंपस में यह नेता इकठ्ठे बैठकर चाय-पानी भी पीते रहे। बाबरी मस्जिद के सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी के निधन पर हिंदू नेताओं ने भी दु:ख प्रकट किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि इस सद्भावना को देखा जाए तो अदालत से बाहर बातचीत से ही इस मामले को सुलझा लेना चाहिए, इसमें कोई रूकावट नहीं होनी चाहिए। राजनैतिक व सामाजिक तौर पर भी वर्तमान समय में मंदिर के मुद्दे पर कोई सार्वजनिक विरोध नहीं है। पिछले कुछ सालों में देश के कई क्षेत्रों में हिंदू-सिखों ने मस्जिदों के निर्माण में मुस्लिम भाईचारे का सहयोग किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में देश के बंटवारे दौरान बंद पड़ी एक मस्जिद को हिंदू-सिखों ने मुकम्मल करवाया है। राजनीतिक दल इस मामले में नाजायज लाभ लेने से भी संकोच कर रहे हैं। अब भी हालात यह हैं कि कुछ मुस्लिम संगठन अयोध्या-बाबरी मस्जिद वाली जगह पर राम मंदिर बनाने के लिए सहमत हैं। इस मुद्दे पर लंबे समय तक संघर्ष करने वाली भाजपा भी मंदिर के निर्माण हेतु सहमति पर जोर दे रही है। ‘</p>
<p style="text-align:justify;">अब मंदिर वहीं बनाएंगे’ की जगह पर ‘मंदिर जरुर बनाएंगे’ से सहमति की सुर और समझ सुनाई पड़ रही है। अदालत द्वारा दिए गए समय और सोच का लाभ उठाकर मुद्दे को सुलझाने में देरी नहीं की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2017 23:34:05 +0530</pubDate>
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