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                <title>Border Dispute - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>चीन के खिलाफ निर्णायक फैसले का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[भारत- चीन के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों को शहादत से देश में उबाल है। निश्चित रूप से यह घटना भारत के लिए बड़ी चुनौती है। चीन के विश्वास में आकर हमें भारी नुक्सान उठाना पड़ा है। एक कर्नल समेत 20 सैनिकों की मौत हमारे लिए बड़ी क्षति है। चालबाज चीन एक तरफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/time-for-a-decisive-decision-against-china/article-16166"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/india-china.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत- चीन के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों को शहादत से देश में उबाल है। निश्चित रूप से यह घटना भारत के लिए बड़ी चुनौती है। चीन के विश्वास में आकर हमें भारी नुक्सान उठाना पड़ा है। एक कर्नल समेत 20 सैनिकों की मौत हमारे लिए बड़ी क्षति है। चालबाज चीन एक तरफ बातचीत कर रहा था दूसरी तरफ एक सोची समझी रणनीति के तहत भारतीय फौज पर हमला किया गया। जिसका मुंहतोड़ जवाब हमारी फौज ने दिया और 43 दुश्मन फौज के जवान मार गिराए। भारतीय फौज पर हमला चीन की हताशा को दर्शाता है। कोरोना संक्रमण को लेकर चीन पूरी दुनिया के निशाने पर है। चीन में स्थापित विदेशी कम्पनियाँ भारत की तरफ रुख कर रहीं हैं जिसकी वजह से चीन सीमा जैसा विवाद छेड़कर दुनिया का ध्यान खुद से हटाना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत- चीन के बीच 45 साल बाद दोनों तरफ से हुई हिंसा में इतने सैनिक मारे गए हैं। यह चीनी सेना की एक सोची समझी रणनीति है। चीन ने भारतीय सेना पर अचानक हमला बोला। यह हमला पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में पेट्रोलिंग के दौरान हुआ। अधिकारी स्तर की मीटिंग में यह तय हुआ था कि चीनी सेना विवादित इलाके से अपने जवानों को हटा लेगी। इसी को देखने भरतीय फौज के जवान गश्त पर निकले थे जहाँ चीनी सेना ने सुनियोजित तरीके से भरतीय सेना का अपहरण कर पत्थरों से हमला बोल दिया। जिसके बाद दोनों तरफ की सेनाएं आमने- समने हो गई और चीन को भारी कीमत चुकानी पड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन अपनी विस्तारवादी नीति की वजह हमेशा पड़ोसियों के लिए बड़ा खतरा है। 23 देशों से उसका सीमा विवाद अभी तक हल नहीँ हुआ है। तकरीबन 22 हजार किलोमीटर का सीमा विवाद दूसरे देशों से है। भारत के साथ उसका सबसे बड़ा सीमा विवाद है। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिंसा की बड़ी वजह चीन का सीमा विस्तार है। भारत और चीन के मध्य गालवान घाटी का मसला कभी नहीँ था लेकिन अब चीन ने इस विवाद को सुलगाना शुरू किया है। इस इलाके में भारत अपनी सीमा में सड़क बना रहा है जिसकी वजह से चीन को यहां बात चुभ रही है। इस हिंसक झड़प में दोनों तरफ के सैनिकों की क्षति हुई है। यह उस स्थिति में हुआ है जब युद्ध जैसी परिस्थितियाँ नहीं रहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए 20 जवानों की शहादत बेहद अहम है। भारत ने एक कर्नल भी खोया है। चीन भारत के खिलाफ हमेशा से सीमा विवाद को हवा देकर एक दबाव की रणनीति बनाता रहा है। वह आए दिन भारतीय सीमा में घुसता रहा है। वह दक्षिण एशिया और ग्लोबल स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत से चिढ़ता है। विश्व स्वास्थ संगठन में भारत को मिली अहम जिम्मेदारी से भी वह जल-भुन गया है। लेकिन युद्ध दोनों देशों के लिए ठीक नहीँ है। यह वक्त युद्ध का नहीँ है लेकिन चीन अमेरिका से अपनी अनबन की भड़ास भारत पर निकालने को आतुर है। अब स्थिति बदल गई है भारत किसी के दबाव में झुकने वाला नहीँ है चीन को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन के मध्य हुई इस हिंसक झड़प का सीधा असर दोनों देशों की शांति वार्ता और आर्थिक गतिविधि पर पड़ेगा। चीन के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है उस हालात में वह कभी नहीँ चाहेगा कि भारत और चीन के बीच युद्ध लड़ा जाय। जबकि अमेरिका भारत की मदद की आड़ में चाहता है कि भारत-चीन के मध्य युध्द छिड़ जाय और उसे चीन को सबक सिखाने का मौका मिल जाय। यह बात खुद चीन अच्छी तरह समझता है। लेकिन हिंसक झड़प के पीछे शीनजिन पिंग का दिमाग था या पीपुल्स आर्मी का, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।लेकिन बगैर किसी जिम्मेदार का आदेश मिले इस तरह की घटना को अंजाम नहीँ दिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत- चीन को इस हिंसा पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए। चीन को अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। दादागिरी अपना कर पड़ोसी देशों पर अपना कब्जा जमाना यह ठीक नहीँ है। पंडित नेहरू के शासनकाल में जब ‘हिंदी- चीनी भाई- भाई’ का नारा लगा था तब भी चीन ने भारत के साथ धोखा दिया था। तिब्बत जैसे देश पर चीन का कब्जा है। चीन की दमनकारी नीति से तिब्बत के लोग निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। भारत को घेरने के लिए चीन पाकिस्तान और नेपाल का उपयोग कर रहा है। चीन नेपाल और पाकिस्तान को आगे कर अपनी नीति कामयाब करने में लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत- चीन जीतने जल्द सीमा विवाद को हल कर लें उतना दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा। एक तरफ चीन शांति बहाली की बात अलाप रहा है दूसरी तरह सीमा का अतिक्रमण कर घूसपैठ कर रहा है। एलओसी पर गश्त कर रहे भारतीय सैनिकों का अपहरण करवा उनकी हत्या करवा रहा यह उसकी कौन सी नीति है। जबकि आधिकारिक लेबल पर दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में यह तय हुआ था कि चीनी सेना वहां से पीछे हट जाएगी लेकिन ऐसा नहीँ हुआ। चीन और भारत की ओर से आए बयानों से लगता है कि दोनों देश इस समस्या को हल करना चाहते हैं। भारत-चीन ने अपनी-अपनी सीमा पर जरूरत से अधिक फौज और सैनिक साजो सामान की तैनाती की है। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की पहचान 1962 की लड़ाई के बाद हो गई थी लेकिन साम्राज्यवादी नीति का पोषक चीन इस बात को कभी मानने के लिए तैयार नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन भारतीय सीमा में हमेशा घुसपैठ करता चला आ रहा है 2017 में डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई की घटना किसी से छुपी नहीं है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है लेकिन ताजा तनाव की कई प्रमुख वजहें भी हैं। जिसमें भारतीय सीमा में निर्माण कार्य एक खास वजह है। भारत शियोक नदी से दौलत बेग ओल्डी में सड़क का निर्माण कर चुका है। जिसकी वजह से चीन को यह बात नागवार गुजर रहीं है। उसे लगता है कि लद्दाख के इस दुर्गम इलाके में भारत सड़कों का निर्माण कर लेता है तो उसकी सैन्य ताकत बढ़ जाएगी। इस इलाके तक सैन्य साजो सामान की पहुँच आसान हो जाएगी। उस स्थिति में भारत के खिलाफ कोई युद्ध जीतना आसान नहीं होगा। भारती फौज की निगरानी बढ़ जाएगी जिसकी वजह से भारतीय सीमा में घुसपैठ का ख्वाब अधूरा रह जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के लिए यह वक्त निर्णायक भूमिका का है। सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाएं हैं। सैन्य प्रमुखों के साथ गृहमंत्री, रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और दूसरे जिमेदार अफसरों के बीच मीटिंग भी हुई है। सरकार और सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। यह मुद्दा देश की सामरिक सुरक्षा से जुड़ा है। सभी राजनैतिक दलों को एक मंच पर आने की जरूरत है। चीन भारत की जवाबी कारवाई से घबराया है, वह भारतीय सैनिकों को निशाना बना सकता है। सेना को बेहद सतर्क और ऐतिहाद बरतने की जरूरत है। क्योंकि चीन ने 43 सैनिकों को खोया है। भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जबाब दिया है। अब वक्त आ गया है जब चीन के साथ पाकिस्तान और नेपाल के साथ भी सख्त रवैया अपनाया जाय।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                                                                 <strong>-प्रभुनाथ शुक्ल</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2020 14:12:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सीमाई विवादों के बहाने उन्माद में चीन</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और चीन के बीच अक्साई चिन को लेकर करीब 4000 किमी और सिक्किम को लेकर 220 किमी सीमाई विवाद है। तिब्बत और अरुणाचल में भी सीमाई हस्तक्षेप कर चीन विवाद खड़ा करता रहता है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/china-in-frenzy-under-the-pretext-of-borders-disputes/article-15644"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/china-in-frenzy-under-the-pretext-of-borders-disputes.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>भारत और चीन समेत जब पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझती हुई मुक्ति के उपाय ढूंढ़ रही है, तब चीन भारतीय सीमा पर न केवल खुद अतिक्रमण की कोशिश में लगा है, बल्कि नेपाल को भी ऐसी ही हरकतों के लिए उकसा रहा है। नतीजतन चीन और नेपाल से सीमा विवाद और सैन्य झड़पें शुरू हो गई हैं। लद्दाख से लेकर सिक्किम तक नियंत्रण सीमा रेखा पर दस ऐसे स्थल हैं, जहां चीन बार-बार विवाद को गरमाता रहता है। चीन की अकसर यह आक्राकता भारत पर अनुचित दबाव बनाने के लिए होती है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल कोरोना संकट के चलते भारत की सेवाभावी के रूप में वैश्विक छवि बनी है। भारत ने करीब 100 देशों को कोविड-19 पर असरकारी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा मुफ्त देकर जहां संकट में उदारता का परिचय दिया है, वहीं चीन ने कोरोना वायरस की वास्तविकता छिपाकर इस महामारी को दुनिया तक पहुंचाकर धतकर्म किया है। भारत चीनी उत्पादों का बड़ा बाजार है, लेकिन इस संकटकाल में भारत ने मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए आत्मनिर्भर भारत बनने का नारा लगाकर चीन के होश उड़ा दिए हैं। यही नहीं इस नारे पर अमल करते हुए अब भारत रोजाना दो लाख पीपीई किट और एन-5 मास्क स्वदेश में ही बना रहा है। जबकि इस संकट के पहले भारत इनके निर्माण में शून्य था। इधर दो बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने चीन से व्यापार समेटकर भारत में पैर जमाना शुरू कर दिए हैं। चीन की परेशानी अमेरिका ने अनेक व्यापरिक प्रतिबंध लगाकर भी बढ़ाई है। साफ है, चीन सीमा पर उन्मादी विवाद पैदा कर भारत की स्वावलंबी पहल को झटका देना चाहता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">चीन की सेना ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर (एलएसी) पर पैगोंगत्सो झील और गालवन घाटी में सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। खबर यह भी है कि इस भूभाग में 100 नए तंबू तान दिए हैं और बंकरों के निर्माण के लिए मशीनें लगा दी हैं। स्थिति की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि सेना प्रमुख एमएएम नरवणे को 22 मई को पूर्वी लद्दाख का अचानक दौरा करना पड़ा है। भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की पांच बैठकें भी हुईं, लेकिन बेनतीजा रही। फिलहाल विवादित स्थलों के 80 किमी दायरे में 800 से लेकर 1000 चीनी सैनिक एलएसी के ईद-गिर्द मंडरा रहे है। प्रतिक्रिया स्वरूप भारत ने भी चीन के सैनिकों से 300 से 500 मीटर की दूरी पर अपने जवान तैनात कर दिए हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पैगोंगत्सो झील भारत और चीन के बीच 134 किमी की लंबाई में फैली हुई है। गालवन घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच स्थित है। अभी यही विवादित स्थल बना हुआ है। गालवन नदी घाटी क्षेत्र 1962 में हुई भारत-चीन की लड़ाई में भी प्रमुख युद्ध स्थल रहा था। हालांकि इस बार चीन दावा कर रहा है कि पूरी गालवन घाटी पर उसी का अधिकार है। जबकि भारत यहां सामरिक ठिकाने बनाकर नियंत्रण रेखा पर एकतरफा बदलाव लाने की कोशिश में लगा है। इसलिए चीन ने कहा है कि इस क्षेत्र को दूसरा डोकलाम नहीं बनने देंगे। लिहाजा सफाई देते हुए ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है कि ‘भारत ने इस इलाके में अवैध निर्माण किए हैं, इस वजह से चीन को सैन्य गतिविधियां बढ़ानी पड़ी हैं।’ दरअसल चीन सोच रहा है कि भारत इस समय कोरोना महामारी के चलते, उससे छुटकारे के लिए संघर्षरत है, इसलिए आसानी से भारत को दबाया जा सकता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल चीन अर्से से इस कवायद में लगा है कि चुंबा घाटी जो कि भूटान और सिक्किम के ठीक मघ्य में सिलीगुड़ी की ओर 15 किलोमीटर की चैड़ाई के साथ बढ़ती है, उसका एक बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण के बहाने हथिया ले। चीन ने इस मकसद की पूर्ति के लिए भूटान को यह लालच भी दिया था, कि वह डोकलाम पठार का 269 वर्ग किलोमीटर भू-क्षेत्र चीन को दे दे और उसके बदले में भूटान के उत्तर पश्चिम इलाके में लगभग 500 वर्ग किलोमीटर भूमि लें ले। लेकिन 2001 में जब यह प्रस्ताव चीन ने भूटान को दिया था, तभी वहां के शासक जिग्में सिग्ये वांगचूक ने भूटान की राष्ट्रीय विधानसभा में यह स्पष्ट कर दिया था कि भूटान को इस तरह का कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं है। छोटे से देश की इस दृढता से चीन आहत है। इसलिए घायल सांप की तरह वह अपनी फुंकार से भारत और भूटान को डस लेने की हरकत करता रहता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारत और भूटान के बीच 1950 में हुई संधि के मुताबिक भारतीय सेना की एक टुकड़ी भूटान की सेना को प्रशिक्षण देने के लिए भूटान में हमेशा तैनात रहती है। मई 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कुशल कूटनीति के चलते सिक्किम भारत का हिस्सा बना था। सिक्किम ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसकी चीन के साथ सीमा निर्धारित है। यह सीमा 1898 में चीन से हुई संधि के आधार पर सुनिश्चित की गई थी। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चीन और ब्रिटिश भारत के बीच हुई संधि को 1959 में एक पत्र के जरिए स्वीकार लिया था। इस समय चीन में प्रधानमंत्री झोऊ एनलाई थे। इसके बाद भारत में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, जो नेहरू के पत्र की स्वीकरता को द्विपक्षीय संधि की तरह ढोती रहीं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जबकि चीन भारत का दोस्त बनने का दिखावा तो करता रहा, लेकिन मित्र जैसी उदारता कभी नहीं दिखाई। उसका व्यवहार हमेशा ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ जैसा रहा है। 1962 का भारत चीन युद्ध इसी का परिणाम है। क्योंकि ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे और पंचशील के गुणगान के साथ चीन ने यह हमला बोला था। जबकि नेहरू के चीन के शक्तिशाली नेता माओत्से तुंग और चाऊ एन लाई से मधुर संबंध थे, किंतु नेहरू दोस्त की पीठ में छुरा भौंकने की चीन की चाल को समझ ही नहीं पाए थे। हालांकि 1998 में चीन और भूटान सीमा-संधि के अनुसार दोनों देश यह शर्त मानने को बाध्य हैं, जिसमें 1959 की स्थिति बहाल रखनी है। बावजूद चीन इस स्थिति को सड़क के बहाने बदलने को आतुर तो है ही, युद्ध के हालात भी उत्पन्न कर देता है। भारत इस विवादित क्षेत्र डोकाला, भूटान डोकलम और चीन डोगलांग कहता है। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां आबादी का घनत्व न्यूनतम है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की जून-2016 में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें भारत को सचेत किया था कि चीन भारत से सटी हुई सीमाओं पर अपनी सैन्य शक्ति और सामरिक आवागमन के संसाधन बढ़ा रहा है। अमेरिका की इस रिपोर्ट के आधार पर भारत ने तत्काल गंभीरता से आपत्ति जताई होती तो शायद मौजूदा हालात निर्मित नहीं होते ? भारत और चीन के बीच अक्साई चिन को लेकर करीब 4000 किमी और सिक्किम को लेकर 220 किमी सीमाई विवाद है। तिब्बत और अरुणाचल में भी सीमाई हस्तक्षेप कर चीन विवाद खड़ा करता रहता है। 2015 में उत्तरी लद्दाख की भारतीय सीमा में घुसकर चीन के सैनिकों ने अपने तंबू गाढ़कर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया था। तब दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 5 दिन तक चली वार्ता के बाद चीनी सेना वापस लौटी थी। चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाकर पानी का विवाद भी खड़ा करता रहता है। दरअसल चीन विस्तारवादी तथा वर्चस्ववादी राष्ट्र की मानसिकता रखता है। इसी के चलते उसकी दक्षिण चीन सागर पर एकाधिकार को लेकर वियतनाम, फिलीपिंस, ताइवान और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ ठनी हुई है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय पंचायत में भी लंबित है। चीन द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के विरुद्ध अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र हांगकांग लगातार संघर्षरत है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल चीन ने हांगकांग को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के दायरे में लाने के लिए कानून में संशोधन-विधेयक पेश किया है। यदि यह पारित हो जाता है तो हांगकांग में चीन विरोधी गतिविधियों को रोकने के साथ ही विदेशी हस्तक्षेप पर भी रोक लग जाएगी। चीन की इस कुटिल मंशा के विरोध में अमेरिका, आस्ट्रेलिया और कनाडा भी उतर आए हैं। इसी तरह चीन ताइवान को स्वायत्त्ता आधार पर ‘एक देश दो प्रणाली’ का सिद्धांत लागू कर हड़पना चाहता है। ताईवान की महिला राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने आधिपत्य के इस प्रस्ताव को नकारते हुए स्वतंत्रता को हर हाल में बरकरार रखने की घोषणा की है। बावजूद चीन न तो अपने अड़ियल रवैये से बाज आना चाहता है और न ही विस्तारवादी नीति पर विराम लगाना चाहता हैं।</h6>
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                <pubDate>Mon, 25 May 2020 20:59:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वॉशिंगटन पोस्ट: भारत-चीन दोनों के पास एटमी हथियार, जंग का खतरा बहुत बड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। वॉशिंगटन पोस्ट ने गुरुवार को एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स के हवाले से कई जानकारियां दी गई हैं। सिक्किम के डोकलाम में भारत और चीन के बीच दो महीने से जारी विवाद के बीच अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>वॉशिंगटन पोस्ट ने गुरुवार को एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स के हवाले से कई जानकारियां दी गई हैं। सिक्किम के डोकलाम में भारत और चीन के बीच दो महीने से जारी विवाद के बीच अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच जंग का खतरा इस बार सबसे ज्यादा बड़ा है। दोनों ही देशों के पास एटमी हथियार हैं और इन दोनों के बीच एक छोटा देश भूटान भी फंस गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ‘दुनिया का ध्यान अभी नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच जारी तनाव पर ज्यादा है। चीन जिस इलाके में सड़क बना रहा है, उसे वो अपना बता रहा है जबकि भारत का करीबी दोस्त उस जमीन पर अपना दावा पेश करता है। चीन का सरकारी मीडिया भारत को रोज घुसपैठिया बताकर धमकी दे रहा है। भारत से कहा जाता है- अगर इलाके में शांति रखनी है तो भारत को डोकलाम के इलाके से फौज हटानी ही होगी।’</p>
<h2> 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच बड़ा विवाद</h2>
<p>अखबार के मुताबिक- चीन ये दावा करता है कि भारत ने उसकी सीमा में घुसपैठ की है। जबकि, भारत का कहना है कि चीन ट्राइजंक्शन में रोड बनाकर उसकी सिक्युरिटी के लिए खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ‘भारत और चीन के बीच 2220 मील लंबी बॉर्डर है और इसके ज्यादातर हिस्से पर दोनों देशों में विवाद है। हालांकि, गोलियां किसी भी तरफ से नहीं चलतीं। हाल की दिनों में दोनों देशों के रिश्ते काफी खराब हुए हैं। चीन भारत को उसकी सिक्युरिटी के लिए खतरा बताता है। इन दोनों देशों के बीच भूटान भी आता है।</p>
<p>रॉयल यूनाईटेड सर्विसेस इंस्टीट्यूट लंदन के एनालिस्ट शशांक जोशी के मुताबिक, ‘तनाव नहीं बढ़ेगा, ये कहना बेहद मुश्किल है। 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच कोई विवाद इतना बड़ा हो गया है। दोनों मुल्क दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी रखते हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2017 04:43:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>डोकलाम विवाद में भारत का रवैया अनुभवी ताकतवर देश जैसा: US एक्सपर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन। एक टॉप अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा है कि चीन के साथ सीमा विवाद में भारत का रवैया एक अनुभवी ताकतवर देश जैसा रहा है, वहीं इस मामले में चीन बचकानी हरकतें कर रहा है। 16 जून से सिक्किम के डोकलाम में भारत-चीन के बीच बॉर्डर विवाद चल रहा है। भारत का कहना है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/india-attitude-like-powerful-country-in-border-dispute-us-expert/article-3070"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/china-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन।</strong> एक टॉप अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा है कि चीन के साथ सीमा विवाद में भारत का रवैया एक अनुभवी ताकतवर देश जैसा रहा है, वहीं इस मामले में चीन बचकानी हरकतें कर रहा है। 16 जून से सिक्किम के डोकलाम में भारत-चीन के बीच बॉर्डर विवाद चल रहा है। भारत का कहना है कि बातचीत तभी हो सकती है, जब दोनों देशों की सेनाएं पीछे जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"> न्यूज एजेंसी के मुताबिक यूएस नेवल वॉर कॉलेज में डिफेंस स्ट्रैटजी के प्रोफेसर जेम्स आर. होम्स ने कहा, “पूरे विवाद में भारत का रुख एकदम ठीक है।  “भारत एक मैच्योर पावर की तरह बर्ताव कर रहा है और चीन किसी नासमझ की तरह बयानबाजी कर रहा है।” भारत-चीन सीमा विवाद पर अमेरिका चुप क्यों है, इस सवाल पर होम्स ने कहा, “हो सकता है कि नरेंद्र मोदी और उनके सलाहकार फिलहाल नहीं चाहते कि यूएस इस विवाद में शामिल हो। हालांकि इस बात की संभावना है कि विवाद बढ़ने पर अमेरिका, भारत का ही सपोर्ट करेगा।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है डोकलाम विवाद?</h2>
<p style="text-align:justify;">ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम एरिया में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है। इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली ने चीन से कहा है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 03:44:58 +0530</pubDate>
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