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                <title>SYL Issue - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>SYL Issue: गहराता जा रहा एसवाईएल मुद्दा&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[एसवाईएल की कहानी: एसवाईएल पर 1966 से है विवाद SYL Issue: अप्रैल 1982 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सतलुज-यमुना लिंक नहर की आधार शिला रखी और 214 किलोमीटर लंबी नहर का 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब और 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में पड़ता है। आधार शिला रखे जाने के 40 साल बाद भी एसवाईएल का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/syl-issue/article-53499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/syl-issue.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">एसवाईएल की कहानी: एसवाईएल पर 1966 से है विवाद</h3>
<p style="text-align:justify;">SYL Issue: अप्रैल 1982 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सतलुज-यमुना लिंक नहर की आधार शिला रखी और 214 किलोमीटर लंबी नहर का 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब और 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में पड़ता है। आधार शिला रखे जाने के 40 साल बाद भी एसवाईएल का काम अधर में लटका हुआ है। एसवाईएल का मुद्दा आज का नहीं है बल्कि काफी पुराना है, साल 1976, 24 मार्च को तब केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए हरियाणा के लिए 3.5 मीट्रिक एकड़ फीट पानी तय किया। जिसके बाद 31 दिसंबर 1981 में हरियाणा में एसवाईएल का निर्माण पूरा हो गया। 8 अप्रैल 1982 तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव में नहर की नींव रखी। इसके बाद 24 जुलाई 1985 में राजीव-लौंगोवाल समझौता हुआ।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दानों राज्यों की सरकारों की बैठक | SYL Issue</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा और पंजाब राज्य की बैठक सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से हो रही है। कोर्ट ने पिछले महीने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था इस बैठक मे दोनों नेता इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान का रास्ता खोजें। दरअसल, हरियाणा ने कोर्ट को बताया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री हरियाणा के साथ बैठक को लेकर अनिच्छुक हैं। कोर्ट के कहने के बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यह बैठक हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2004 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने 12 जुलाई को विधानसभा में ‘पंजाब टर्मिनेशन आॅफ एग्रीमेंट्स एक्ट 2004’ लागू किया। संघीय ढांचा खतरे में देख राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से रेफरेंस मांगा फिर 12 साल मामला ठंडे बस्ते में रहा। 14 मार्च 2016 पंजाब विधानसभा में सतलुज-यमुना लिंक कैनाल (मालिकाना हकों का स्थानांतरण) विधेयक पास कर नहर के लिए अधिगृहीत 3,928 एकड़ जमीन वापस किसानों को वापस कर दी गई। पंजाब में रछ के लिए कुल 5,376 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी जिसमें 3,928 एकड़ पर रछ और बाकी हिस्से में डिस्ट्रीब्यूट्रीज बननी थी। पंजाब ने हरियाणा सरकार का 191 करोड़ रुपये का चेक लौटा दिया जिसके बाद स्थानीय किसानों ने नहर को पाट दिया। इसके बाद हरियाणा की मनोहर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति के रेफरेंस पर सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित करने का अनुरोध किया और 10 नवंबर 2016 में कोर्ट का फैसला हरियाणा के पक्ष में रहा लेकिन पंजाब ने अभी तक नहर का निर्माण शुरू नहीं किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा के किन जिलों को मिलेगा फायदा ?</h3>
<p style="text-align:justify;">अब अगर एसवाईएल नहर बनती है तो हरियाणा के 6 जिलों को मुख्य रूप से सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। जिसमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, मेवात, गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर जिले शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़:</strong> दशकों से विवादास्पद सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 जनवरी को सुनवाई के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के उनके समकक्ष मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक बुलाई।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">दोनों राज्यों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के साथ, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्रीय मंत्री दोनों  मुख्यमंत्रियों को किसी सहमति पर पहुंचा पाते हैं या नहीं।<br />
<strong>                                                                                             -संकलन: राजेश बेनीवाल</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">एक नजर एसवाईएल | SYL Issue</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">1966: हरियाणा पंजाब से अलग हुआ</li>
<li style="text-align:justify;">1981: पानी के प्रभावी आवंटन के लिए पंजाब और हरियाणा के बीच जल-बंटवारा समझौता हुआ</li>
<li style="text-align:justify;">1981:समझौते में 214 किलोमीटर लंबी एसवाईएल नहर के निर्माण की परिकल्पना की गई थी, जिसमें से 122 किलोमीटर पंजाब में और 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाई जानी थी।</li>
<li style="text-align:justify;">1982:पंजाब के कपूरी गांव में 214 किलोमीटर लंबी एसवाईएल नहर का निर्माण शुरू किया गया जबकि हरियाणा एसवाईएल नहर के अपने हिस्से का निर्माण करता है, पंजाब ने प्रारंभिक चरण के बाद काम कर दिया था काम बंद।</li>
<li style="text-align:justify;">1996: हरियाणा ने एसवाईएल नहर पर काम पूरा करने के लिए पंजाब को निर्देश देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।</li>
<li style="text-align:justify;">2002: उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के मुकदमे पर फैसला सुनाया और पंजाब को जल-बंटवारे पर अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने का आदेश दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">2004: पंजाब विधानसभा ने रावी और ब्यास के जल बंटवारे पर 1981 के समझौते और अन्य सभी समझौतों को समाप्त करने के लिए एक कानून पारित किया।</li>
<li style="text-align:justify;">2004: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मूल मुकदमे को खारिज कर दिया और केंद्र से एसवाईएल नहर परियोजना का शेष काम अपने हाथ में लेने को कहा।</li>
<li style="text-align:justify;">2016: सुप्रीम कोर्ट ने 2004 के पंजाब कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जिसने पड़ोसी राज्यों के साथ एसवाईएल नहर जल-बंटवारा समझौते को समाप्त कर दिया था।</li>
<li style="text-align:justify;">2017: पंजाब ने जमीन मालिकों को वापिस लौटा दी थी, जिस पर एसवाईएल नहर का निर्माण किया जाना था।</li>
<li style="text-align:justify;">2020:सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एसवाईएल नहर विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच मध्यस्थता करने को कहा।</li>
<li style="text-align:justify;">2023: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलील दोनों राज्यों के बीच बातचीत विफल हो गई, पंजाब अपने हिस्से की नहर निर्माण से इंकार किया ।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">एसवाईएल की रार | SYL Issue</h3>
<p style="text-align:justify;">1966 में पंजाब के पुनर्गठन से पहले संसाधनों को दो राज्यों के बीच विभाजित किया जाना था, तो अन्य दो नदियों, रावी और ब्यास के पानी को बंटवारे की शर्तों के बगैर फैसले के छोड़ दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, रिपेरियन सिद्धांतों का हवाला देते हुए, पंजाब ने हरियाणा के साथ दो नदियों के पानी के बंटवारे का विरोध किया। रिपेरियन वाटर राइट्स का सिद्धांत एक ऐसी प्रणाली है जिसके तहत किसी जल निकाय से सटे भूमि के मालिक को पानी का उपयोग करने का अधिकार है। पंजाब का यह भी कहना है कि उसके पास हरियाणा के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। SYL Issue</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के पुनर्गठन के एक दशक बाद, केंद्र ने 1976 में एक अधिसूचना जारी की कि दोनों राज्यों को 3.5 मिलियन एकड़-फीट (एमएएफ) पानी प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="आइस स्केटिंग के नीदरलैंड पैटर्न पर हिसार के स्केटर्स छाए" href="http://10.0.0.122:1245/hisar-ater-won-twenty-one-medal-in-off-ice-ating-championship/">आइस स्केटिंग के नीदरलैंड पैटर्न पर हिसार के स्केटर्स छाए</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Oct 2023 17:39:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एसवाईएल मुद्दा: पंजाब के पास एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं: मीत हेयर</title>
                                    <description><![CDATA[कैबिनेट मंत्री ने गांव नंगल में की 3.10 करोड़ के प्रॉजैक्टों की शुरुआत, जोहड़ के नवीनीकरण का रखा नींव पत्थर | Meet Hayer कहा, राज्य में स्थापित की जाएंगी एक हजार खेल नरर्सियां बरनाला (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। पंजाब के पास किसी भी राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं। राज्य के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjab-does-not-have-even-a-single-drop-of-extra-water-meet-hayer/article-53343"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/barnala-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कैबिनेट मंत्री ने गांव नंगल में की 3.10 करोड़ के प्रॉजैक्टों की शुरुआत, जोहड़ के नवीनीकरण का रखा नींव पत्थर | Meet Hayer</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>कहा, राज्य में स्थापित की जाएंगी एक हजार खेल नरर्सियां</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> पंजाब के पास किसी भी राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं। राज्य के रीपेरियन अधिकारों की हर हाल में रक्षा की जाएगी। उपरोक्त शब्द जल सिंचाई मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर (Meet Hayer) ने शुक्रवार को गांव नंगल में 3.10 करोड़ की लागत वाले प्रॉजैक्टों की शुरूआत के लिए आयोजित किए समारोह दौरान मीडिया से बात करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पंजाब के 78 ब्लॉक डार्क जोन में हैं, जिससे पता चलता है कि कि पानी धरती नीचे रिचार्ज कम हो रहा है, जबकि इसकी लागत ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी तरफ हरियाणा में ऐसे ब्लाकों की गिणती सिर्फ 60 है। इससे स्पष्ट है कि पंजाब के पास किसी भी दूसरे राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा खेलों के क्षेत्र में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं, इसके तहत राज्य में जल्द ही 1000 खेल नरर्सियां बनाई जाएंगी। पंजाब सरकार की खेल संस्कृति को प्रफुल्लित करने की मंशा के तहत ही सीएम भगवंत मान के नेतृत्व में खेल बजट बढ़ाकर 550 करोड़ किया गया है, जो पूर्व सरकारों में 100 करोड़ तक ही सीमित था। उन्होंने कहा कि बरनाला में खेलों की नर्सरी बनाने के लिए संघेड़ा नजदीक करीब 20 एकड़ में मल्टीपर्पज खेल प्रॉजैक्ट लाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके उन्होंने गांव में पौधे लगाने की मुहिम की शुरूआत की और विभिन्न हस्तियों को पौधे देकर सम्मानित किया और प्लासिटक का इस्तेमाल कभी भी न करने का संदेश दिया। इस मौके अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (विकास) डॉ. नरेन्द्र धालीवाल, ओएसडी हसनप्रीत भारद्वाज, एक्सईयन पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरिन्दर सिंह व अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मीत हेयर (Meet Hayer) ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा टेलों तक और खेत-खेत नहरी पानी पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत अंडर ग्राऊंड पाईपें डाली जा रही हैं, ताकि भूमिगत पानी को बचाया जा सके। इन प्रयासों का निष्कर्ष यह है कि पंजाब द्वारा इस बार 24 फीसदी अधिक नहरी पानी का इस्तेमाल किया गया है और कई गांवों में दशकों बाद नहरी पानी पहुंचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीत हेयर ने कहा कि नंगल नजदीक कस्सी को अपग्रेड करने के काम पर करीब 56 करोड़ रुपये खर्चे जा रहे हैं। पहले पड़ाव के तहत 30 करोड़ रुपये व दूसरे पड़ाव के तहत 26 करोड़ खर्चे जाएंगे। उन्होंने नंगल के जोहड़ के नवीनीकरण का नींव पत्थर रखा, जिस पर 70 लाख रूपये की लागत आएगी। उन्होंने 3.10 करोड़ की लागत से दूसरे जोहड़ के नवीनीकरण, खेल मैदान, कम्यूनिटी हाल, लाईब्रेरी, मल्टी जिम व अंडर ग्राऊंड पाईपों के प्रोजैक्टों की शुरूआत का ऐलान किया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="अबोहर में कांग्रेसी नेताओं ने फूंका पुतला" href="http://10.0.0.122:1245/life-of-common-people-is-difficult-due-to-inflation-sudhir-bhadu/">अबोहर में कांग्रेसी नेताओं ने फूंका पुतला</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjab-does-not-have-even-a-single-drop-of-extra-water-meet-hayer/article-53343</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Oct 2023 20:56:37 +0530</pubDate>
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                <title>राजनीतिक पेंच में फंसा एसवाईएल मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[एसवाईएल मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा पंजाब व हरियाणा के मुख्य मंत्रियों की आयोजित बैठक एक बार फिर बेनतीजा रही। हालांकि इस बैठक से पहले ही उम्मीद नहीं थी, क्योंकि दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं पहले ही स्पष्ट कर दी थी। जब दोनों राज्य पुराने रुख पर कायम रहे तब समाधान की उम्मीद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/syl-issue-stuck-in-political-tussle/article-41929"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/syl-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एसवाईएल मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा पंजाब व हरियाणा के मुख्य मंत्रियों की आयोजित बैठक एक बार फिर बेनतीजा रही। हालांकि इस बैठक से पहले ही उम्मीद नहीं थी, क्योंकि दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं पहले ही स्पष्ट कर दी थी। जब दोनों राज्य पुराने रुख पर कायम रहे तब समाधान की उम्मीद कैसे की जा सकती है। वास्तव में यह मामला राजनीतिक पेंच व तकनीकी उलझनें में इतना ज्यादा फंस चुका है कि इसका समाधान बहुत मुश्किल नजर आ रहा है। ये सरकार में रहने के बावजूद भी कई पार्टियां इसका समाधान नहीं निकाल सकी। वे अपने रुख पर अडिग हैं। प्रत्येक सत्ताधारी पार्टी को यही भय रहता है कि यदि वह थोड़ा सा भी नरम पड़ गए तब विपक्षी पार्टियों को बोलने का मौका मिल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का राजनीतिक समाधान होने की उम्मीद तब ही खत्म हो गई थी जब केंद्र, हरियाणा व पंजाब में एक पार्टी की सरकारें होने के बावजूद इसका समाधान नहीं निकल सका। पंजाब के मुद्दों पर सत्ता में आए शिरोमणी अकाली दल की हरियाणा ईकाई भी एसवाईएल नहर के मुद्दे पर पंजाब के खिलाफ चलती रही है। वास्तव में राष्टÑीय पार्टी की विचारधारा व प्रदेश ईकाईयों की विचारधारा में तालमेल नहीं बनाया जा सका। यदि राष्टÑीय पार्टियों की विचारधारा में अंतर न हो तब इस मामले को सुलझाने में आसानी हो सकती है। दूसरी तरफ नदियों के पानी संबंधी राष्टÑीय कानून न होना भी बड़ी समस्या है। इसीलिए अब तक यह मामला समझौते तक सीमित रह गया है। राज्यों के पुर्नगठन एक्ट की सही व्याख्या व बदलती परिस्थितियों में पुर्नगठन एक्ट की व्याख्या में फेरबदल भी इस समस्या को सुलझाने में बाधा बन रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा की वैधानिक शक्तियों व विधान सभाओं के संवैधानिक प्रावधान भी इस मामले से जुड़े हुए हैं, जिन्हें नकारना व स्वीकारना जटिलता भरा कार्य है। दूसरी तरफ एसवाईएल का सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक लटकना इस मामले में संवैधानिक व कानूनी पहलूओं की अस्पष्टता की तरफ इशारा करता है। वास्तव में इस मुद्दे का समाधान गैर-रानीतिक व वैज्ञानिक नजरिया अपनाने से ही संभव है। राज्यों के पुर्नगठन के बाद बदलती परिस्थितियों पर राष्टÑीय भावना के नजरिये से कार्य करने की आवश्यकता है।</p>
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                <pubDate>Thu, 05 Jan 2023 10:01:23 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान जा रहा सतलुज का पानी रोक दे पंजाब : बलराज कुंडू</title>
                                    <description><![CDATA[बोले-आपसी भाइचारे से पानी का मुद्दा सुलझे तो बंद हो जाएंगे राजनीतिज्ञों के मुंह रोहतक (सच कहूँ/नवीन मलिक)। पंजाब एवं हरियाणा के बीच एसवाईएल को लेकर पिछले 35 सालों से राजनितिक दलों द्वारा की रही स्वार्थ की राजनीती को दो भाइयों को बांटने वाली राजनीति बताते हुए महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने रविवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:left;">बोले-आपसी भाइचारे से पानी का मुद्दा सुलझे तो बंद हो जाएंगे राजनीतिज्ञों के मुंह</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ/नवीन मलिक)</strong>। पंजाब एवं हरियाणा के बीच एसवाईएल को लेकर पिछले 35 सालों से राजनितिक दलों द्वारा की रही स्वार्थ की राजनीती को दो भाइयों को बांटने वाली राजनीति बताते हुए महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा एवं हरियाणा व पंजाब के किसान नेताओं को एक पत्र भेजा है, जिसमें हमारे सबसे बड़े दुश्मन देश पाकिस्तान में व्यर्थ बहकर जा रहे सतलुज नदी के पानी को रोककर हरियाणा-राजस्थान की प्यासी भूमि को सिंचित करने का फार्मूला सुझाया है। साथ ही किसान नेताओं से आग्रह किया गया है कि 4 जनवरी को केन्द्र के साथ किसानों की होने वाली बैठक के एजेंडे में इस मुद्दे को शामिल किया जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">विधायक कुंडू ने कहा कि किसानों द्वारा अपने किसान नेताओं के माध्यम से यह काम करने से सभी राजनीतिक दलों के मुँह भी बंद हो जाएंगे और पंजाब-हरियाणा का भाईचारा भी हमेशा के लिए मजबूत हो जाएगा। विधायक बलराज कुंडू ने पत्र में कहा है कि आज किसान आंदोलन के चलते एक बात जो निकलकर सामने आई है तथा जिसकी चर्चा पंजाब व हरियाणा में प्रत्येक व्यक्ति की जुबान पर है वो है हरियाणा-पंजाब का छोटे एवं बड़े भाई का रिश्ता।</p>
<h4>एसवाईएल</h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा प्रदेश का किसान-मजदूर पंजाब को अपना बड़ा भाई मानते हुए पंजाब के किसानों के स्वागत व सेवा में आँखें बिछाये लगा हुआ है। हरियाणा प्रदेश की भाजपा व जजपा सरकार ने एसवाईएल का मुद्दा उछालकर इसमें दरार डालने का एक बेहूदा प्रयास किया था, लेकिन हरियाणा प्रदेश के लोगों ने उनको सिरे से नकारते हुए भाजपा व जजपा नेताओं का घेराव करके उनको करारा जवाब देकर हरियाणा-पंजाब के भाईचारे की मिसाल देने का काम किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब को अपना बड़ा भाई मानता है, लेकिन अगर हम इस मुद्दे का इतिहास देखें तो पता चलता है कि किस प्रकार यूपीए तथा एनडीए में शामिल रहे हरियाणा व पंजाब के सभी राजनितिक दल एसवाईएल पर अपनी राजनितिक रोटियां सेंकते हुए हरियाणा-पंजाब के भाईचारे में दरार पैदा करते रहे हैं। जब भी हरियाणा और पंजाब में चुनाव होते हैं तो सालभर पहले हरियाणा व पंजाब के नेता दोनों राज्यों के लोगों को बेवकूफ बनाते रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद जब कुर्सी पर बैठ जाते हैं तो सब इस मुद्दे को भूल जाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jan 2021 20:48:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>‘एसवाईएल के पानी से ही बुझेगी हरियाणा की प्यास’</title>
                                    <description><![CDATA[एसवाईएल के पानी पर हमारा हक है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे हक में: किरण महापंचायत: लोहारू की अनाज मंडी में किसान, मजदूर, व्यापारी आक्रोश महापंचायत में पहुंची किरण चौधरी लोहारू (सच कहूँ न्यूज)। कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने कहा है कि हरियाणा की धरती की प्यास एसवाईएल के पानी से ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kiran-choudhry-speaks-on-syl-issue/article-3084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/syl-issue.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">एसवाईएल के पानी पर हमारा हक है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे हक में: किरण</h2>
<ul>
<li><strong>महापंचायत: लोहारू की अनाज मंडी में किसान, मजदूर, व्यापारी आक्रोश महापंचायत में पहुंची किरण चौधरी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>लोहारू (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने कहा है कि हरियाणा की धरती की प्यास एसवाईएल के पानी से ही बुझेगी और एकाध बार दिखावे के लिए नहरों में जो पानी दिया जा रहा है, उसका कोई फायदा नहीं है। किरण चौधरी शनिवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीशराम मेचू के संयोजन में आयोजित किसान, मजदूर, व्यापारी जन आक्रोश महापंचायत को संबोधित कर रही थी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि एसवाईएल के पानी पर हमारा हक है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे हक में आ चुका है। यदि मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से कहकर एसवाईएल का निर्माण करवाते हैं तो हम सब न केवल उसका स्वागत करेंगे अपितु साथ भी देंगे। पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी, पूर्व विधायक धर्मपाल सांगवान, पूर्व मंत्री वासुदेव शर्मा ने भी महापंचायत को संबोधित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर पूर्व सांसद श्रुति चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने अथक प्रयासों से भिवानी में स्व. चौ. बंसीलाल के नाम पर 400 करोड़ की लागत से बनने वाले मैडिकल कालेज मंजूर करवाया था, जिसका शिलान्यास इस सरकार ने राजकीय मैडिकल कालेज के नाम पर किया है। इसी प्रकार उन्होंने पूरे भिवानी-महेन्द्रगढ लोकसभा क्षेत्र को एनसीआर में शामिल करवाया था मगर भाजपा सरकार ने यहां एक भी नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया। उन्होंने कहा कि आज किसान, मजदूर, व्यापारी व कर्मचारी सहित हर वर्ग के लोग सरकार की नीतियों से दु:खी हैं। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग और एसवाईएल का कहीं जिक्र नहीं है, एसवाईएल पर कोर्ट का फैसला आने के बाद भी सरकार चुप है। पूर्व सांसद ने कहा कि हर मामले में सरकार की यह चुप्पी आने वाले चुनावों में उनको बहुत भारी पड़ने वाली है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भाजपा से हर वर्ग त्रस्त: किरण</h2>
<p style="text-align:justify;">पत्रकारों से बात करते हुए सीएलपी लीडर किरण चौधरी ने कहा कि भाजपा के शासन से हर वर्ग के लोग त्रस्त हैं। कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है और रोज घिनौने कांड हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी और नोटबंदी के बाद हरियाणा में 44 उद्योग बंद हो चुके हैं। नौकरियों के बिना युवा वर्ग हताश है तथा महंगाई की मार ने सबका जीना मुश्किल कर दिया है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज, डीजल सहित हर चीज महंगी हो चुकी है और किसान को फसल का उचित भव नहीं मिल रहा है। श्रीमती चौधरी ने कहा कि बिजली के दाम बढ़ा दिए गए और अब किसानों को छापेमारी कर लूटा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 09:00:57 +0530</pubDate>
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