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                <title>Dalai Lama - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>दलाई लामा को मिला ग्रैमी अवार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[लॉस एंजिल्स। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, दलाई लामा को यहां रविवार देररात संपन्न हुए 68वें ग्रैमी अवार्ड्स में ‘बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिर्काडिंग’ श्रेणी में विजेता चुना गया। इस श्रेणी के लिए चार अन्य लेखक भी दौड़ में थे लेकिन दलाई लामा को पुरस्कार के लिए चुना गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके ऑडियोबुक प्रोजेक्ट ‘मेडिटेशंस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/dalai-lama-received-grammy-award/article-80910"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/dalai-lama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लॉस एंजिल्स।</strong> तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, दलाई लामा को यहां रविवार देररात संपन्न हुए 68वें ग्रैमी अवार्ड्स में ‘बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिर्काडिंग’ श्रेणी में विजेता चुना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस श्रेणी के लिए चार अन्य लेखक भी दौड़ में थे लेकिन दलाई लामा को पुरस्कार के लिए चुना गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके ऑडियोबुक प्रोजेक्ट ‘मेडिटेशंस : द रिफलेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ के लिए मिला है। उनके अलावा इस श्रेणी में मशहूर कॉमेडियन और लेखक ट्रेवर नोआ ( इंटू द अनकट ग्रास) , केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन) और कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एडं मी) जैसे नाम शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक संत दलाई लामा ने अपनी चिर-परिचित सादगी और विनम्रता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। मैं इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान के रूप में देखता हूँ। मेरा मानना है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता को समझना आज दुनिया के आठ अरब लोगों की भलाई के लिए अनिवार्य है।”</p>
<p style="text-align:justify;">दलाई लामा की कृति मेडिटेशंस महज एक किताब का पाठ नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन और शांति की एक यात्रा है। इसमें उनके गहरे आध्यात्मिक चिंतन और प्रवचनों का संग्रह है। इसमें उनके द्वारा ‘निर्देशित ध्यान और करुणा के दर्शन को आवाज दी गई है। इस ऑडियो नैरेशन का उद्देश्य भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति प्रदान करना है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 12:39:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शांति और प्रसन्नता के प्रचारक दलाई लामा</title>
                                    <description><![CDATA[दलाई लामा विश्व में एक तिब्बती धर्मगुरु के रूप में जाने जाते हैं। दलाई लामा को साल 1989 में आज के ही दिन नाबेल का शांति पुरस्कार मिला था। दलाई लामा का वास्तविक नाम ल्हामो धोण्डुप है और उनका जन्म 6 जुलाई साल 1935 को तिब्बत में हुआ था। इनके पिता का नाम चोक्योंग त्सेरिंग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/dalai-lama-a-preacher-of-peace-and-happiness/article-18905"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/dalai-lama-a-preacher-of-peace-and-happiness.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">दलाई लामा विश्व में एक तिब्बती धर्मगुरु के रूप में जाने जाते हैं। दलाई लामा को साल 1989 में आज के ही दिन नाबेल का शांति पुरस्कार मिला था। दलाई लामा का वास्तविक नाम ल्हामो धोण्डुप है और उनका जन्म 6 जुलाई साल 1935 को तिब्बत में हुआ था। इनके पिता का नाम चोक्योंग त्सेरिंग और माता का नाम डिकी त्सेरिंग था। दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है जिसका मतलब होता है ज्ञान का महासागर और दलाई लामा के वंशज करूणा, अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप माने जाते हैं। मात्र दो वर्ष की अवस्था में बालक ल्हामो धोण्डुप की पहचान 13 वें दलाई लामा थुबटेन ग्यात्सो के अवतार के रूप में की गई। इसके लिए दलाई लामा को एक कड़ी परीक्षा से होकर गुजरना पड़ा था और इस प्रकार ल्हामो धोण्डुप 14वें धर्मगुरु दलाई लामा बन गये। ऐसा विश्वास है कि दलाई लामा अवलोकितेश्वर या चेनेरेजिग का रूप हैं जो कि करुणा के बोधिसत्त्व तथा तिब्बत के संरक्षक संत हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">साल 1949 में चीन ने तिब्बत पर हमला किया जिसके बाद साल 1950 में दलाई लामा से तिब्बत के लोगों ने राजनीतिक विरासत संभालने का अनुरोध किया। 29 मई साल 2011 तक दलाई लामा तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष भी रहे। आज भी उन्हें लोग राष्ट्राध्यक्ष मानते हैं लेकिन साल 2011 के बाद इन्होंने अपनी सारी शक्तियां तिब्बत सरकार को दे दी। तिब्बत पर चीन का कब्जा रहता है लेकिन दलाई लामा इसका विरोध करते हैं इसी कारण चीन दलाई लामा के विरोध को दबाने के लिए अक्सर दलाई लामा को अलगाववादी भी करार देता है। दलाई लामा अक्सर भारत आकर यहां विभिन्न विशिष्ट लोगों और सामान्य जनता से भी मिलते हैं जिसका चीन अपने स्तर से हर मुमकिन विरोध करता है। यहां तक कि चीन की सरकारी मीडिया ये दावा भी कर चुकी है कि दलाई लामा भारत के साथ मिलकर देश विरोधी नीतियों को अंजाम देने का प्रयास करते हैं। दलाई लामा को बौद्ध धर्म के प्रचार के अतिरिक्त पूरी दुनिया में शांति के प्रचार-प्रसार और खुशियां बांटने के लिए साल 1989 में आज के दिन शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। दलाई लामा अभी तक शांति और प्रसन्नता के प्रचार-प्रसार के लिए पूरी दुनिया के 65 से भी अधिक देशों की एक से अधिक बार यात्रा कर चुके हैं। साल 1959 से लेकर अभी तक दलाई लामा को 85 से भी ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं।</h6>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Oct 2020 21:45:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>दलाईलामा का जिन्ना प्रेम क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे में तिब्बती बौद्ध गुरू दलाईलामा ने एक कार्यक्रम में कहा कि अगर जिन्ना भारत के प्रधानमंत्री बनते तब पाकिस्तान नहीं बनता। दलाईलामा अंतर्राष्टÑीय स्तर के नेता व विचारक हैं। उनकी बात को काफी गौर से सुना जाता है। परन्तु यहां एक प्रश्न चूक गया जो उस कार्यक्रम में दलाईलामा से पूछा जाना चाहिए था […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/why-dalai-lamas-jinnah-love/article-5291"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/dalai-lama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पुणे में तिब्बती बौद्ध गुरू दलाईलामा ने एक कार्यक्रम में कहा कि अगर जिन्ना भारत के प्रधानमंत्री बनते तब पाकिस्तान नहीं बनता। दलाईलामा अंतर्राष्टÑीय स्तर के नेता व विचारक हैं। उनकी बात को काफी गौर से सुना जाता है। परन्तु यहां एक प्रश्न चूक गया जो उस कार्यक्रम में दलाईलामा से पूछा जाना चाहिए था कि क्यों उन्होंने शरण के लिए नेहरू का भारत चुना? लामा जिन्ना के पाकिस्तान में शरण लेने क्यों नहीं गए? भारत का विभाजन कोई ऐसी घटना नहीं है, जिसे दो या तीन लोग मिलकर टाल सकते।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि नेहरू या जिन्ना ही भारत का विभाजन टाल सकते तब वह इसे पुन: जोड़ भी लेते। चूंकि जिन्ना ने अपने पहले ही दिन पाकिस्तान पहुंचकर देख लिया था कि जिस मुल्क के वह कायदे आजम बन रहे हैं, जिन लोगों के लिए उन्होंने पाकिस्तान बनाया उन लोगों ने भारत से पाकिस्तान पहली बार जिन्ना के पहुंचने पर एक गाड़ी तक उन्हें मुहैया नहीं करवाई, जबकि वह घोर टीबी से पीड़ित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां दलाईलामा ने महात्मा गांधी का हवाला दिया था कि वह जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे लेकिन नेहरू इस पर सहमत नहीं हुए, अगर महात्मा गांधी अधिक प्रभाव रख रहे थे तब वह जिन्ना एवं नेहरू को छोड़ किसी का भी नाम चुन देते ताकि देश एक रहता, जबकि ऐसा नहीं है। देश में नेता एक व्यक्ति द्वारा या रातोंरात नहीं बनते, पब्लिक उन्हें समर्थन देती है वही पब्लिक जो महात्मा गांधी के जिन्ना को प्रधानमंत्री नहीं बनने देती।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां सबसे कौतुहल का विषय यह है कि जिस दलाईलामा को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एक राष्टÑ प्रमुख का सम्मान दिया। उसकी पूरी सरकार को रहने की छत ही मुहैया नहीं करवाई उसका दुनिया में हर कदम पर साथ दिया और 1962 में चीन ने जिसका बदला नेहरू के भारत से चुकता किया वह लामा भारत की जमीन पर जिन्ना को भारत एकता का श्रेय दे रहा है यह हो क्या रहा है? भारत में नेता तो आज भी रूठ जाते हैं। क्या वह देश बांट लेते हैं? देश को चलाने के लिए अलग पार्टी तो नेता बना लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अलग राज्य भी बना लेते हैं लेकिन देश बांटने की बात तो कोई नहीं करता। रेडक्लिफ या माउंटबेटन ने इस देश को नहीं बांटा। उन्होंने तो महज एक लकीर खींची है कि ईधर पाकिस्तान वाले रह लो बाकी का भारत है ही। जिन्ना प्रधानमंत्री पद के काबिल होते तो भारत का पूरा मुस्लिम समुदाय तब पाकिस्तान चला गया होता, लेकिन उन्होंने नेहरू की सरकार को ठीक समझा व भारत में ही रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">जवाहर लाल नेहरू का भारत आज जिन्ना के पाकिस्तान से बहुत आगे है। दलाई लामा को अगर लगता है कि जिन्ना भारत को एक रख सकते थे तब अब किसने रोका है, जिन्ना के पिछलग्गूआें को, एक बार कह दें, हम भारत के हैं भारत हमारा है, फूंक दे उस किताब को, जिसे वह कायदे आजम का पाकिस्तान कहते हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Aug 2018 20:36:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया को परमाणु बम से मुक्त करने का समय आ गया : दलाई लामा</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा है कि अब दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त करने का समय आ गया है। तिब्बत के धर्म गुरु एवं शांति दूत दलाई लामा ने कहा कि इसके लिए हमें विश्व स्तर पर अभियान चलाकर दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-time-has-come-to-free-the-world-from-the-atom-bomb-dalai-lama/article-3627"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/dalai-lama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)। </strong>बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा है कि अब दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त करने का समय आ गया है। तिब्बत के धर्म गुरु एवं शांति दूत दलाई लामा ने कहा कि इसके लिए हमें विश्व स्तर पर अभियान चलाकर दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त कराना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान भावनाओं पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘मैं’ और ‘तुम’ की भावना ही आज तमाम समस्याओं की जड़ है इसलिए भारत में वो शक्ति है जिससे कि वो पूरी दुनिया को शांति का संदेश दे सकता है। इस निधि का समावेश हमें आज की आधुनिक शिक्षा में करना होगा। इससे ही डर और क्रोध की जगह अहिंसा और करुणा स्थापित की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दलाई लामा सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में भारतीय विश्वविद्यालय संघ के 92वें अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परमाणु शस्त्रों से किसी भी देश का भला नहीं हो सकता। ऐसे में हमें पृथ्वी पर मानवता की रक्षा के लिए नि:शस्त्रीकरण के लिए प्रयास करना ही होगा और यह उचित शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। दलाई लामा ने भारतीय विश्वविद्यालय संघ नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित यूनिवर्सिटी न्यूज के विशेषांक तथा चार अन्य ग्रंथों का विमोचन भी किया। अधिवेशन में भारतीय विश्वविद्यालयों के तकरीबन 150 कुलपति तथा देश-विदेश के शिक्षाविद शामिल हुए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Mar 2018 06:57:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो मिलियन से कम आबादी वाले बोत्स‍वाना का चीन को करारा जवाब- हम तुम्हारे गुलाम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली । दुनिया की सुपरपावर होने का दावा करने वाली चीन को बोत्सवाना के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। बोत्सवाना ने चीन को साफ-साफ कह दिया है कि वह उसकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने दो टूक कहा है कि उनका देश चीन का गुलाम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/botswana-says-to-china-we-are-not-your-slaves/article-3272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/ian-khama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली ।</strong> दुनिया की सुपरपावर होने का दावा करने वाली चीन को बोत्सवाना के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। बोत्सवाना ने चीन को साफ-साफ कह दिया है कि वह उसकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने दो टूक कहा है कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है। हीरों की खानों के लिए मशहूर बोत्सवाना चीन की बार-बार की धौंस से तंग आकर इयान खामा ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान ने कहा कि हम चीन की धमकियों से डरते नहीं हैं, और बोत्सवाना चीन की कॉलोनी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने हाल ही में दलाई लामा के दौरे के विरोध में आई चीन की धमकी के बाद अपना सख्त रुख साफ कर दिया है। बोत्सवाना दुनिया में हीरे के लिए जाना जाता है और यहां की आबादी दो मिलियन से भी कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चीन आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे के लेकर बोत्सवाना को राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा था। दलाई लामा 17-19 अगस्त तक बोत्सवाना की राजधानी गेबोरोनी के दौरे पर जाने वाले थे। दलाई लामा का ये दौरा निजी बताया गया, इसके बावजूद चीन इस दौरे का विरोध कर रहा था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘हम आपके गुलाम नहीं हैं’</h2>
<p style="text-align:justify;">आंतरिक मामलों में चीन के दखल को देख इयान खामा चिढ़ गए और उन्होंने कहा कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है. पिछले कुछ हफ्तों से दलाई लामा के दौरे को लेकर चीन और बोत्सवाना के बीच राजनयिक तनाव जारी है। दलाई लामा 17 अगस्त से 19 अगस्त तक बोत्सवाना की राजधानर गाबोरोने का दौरा करने वाले थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दलाई लामा को लेकर भारत से भी भिड़ा चीन</h2>
<p style="text-align:justify;">दलाई लामा को लेकर चीन पहले भारत के साथ भी विवाद बढ़ा चुका है। इस साल अप्रैल के महीन में चीन के विरोध के बावजूद दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश पहुंचे। दलाई लामा के दौरे पर गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने चीन को नसीहत दी। रिजिजू ने चीन को दो टूक अंदाज में कहा कि वो भारत के आंतरिक मामलों में दखल न दे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Aug 2017 05:23:04 +0530</pubDate>
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                <title>चीन और भारत एक-दूसरे को हरा नहीं सकते: दलाई लामा</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉर्डर पर मौजूदा तनाव को लेकर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे को नहीं हरा सकते। दोनों देश सैन्य तौर पर ताकतवर हैं। दोनों तरफ से फायरिंग की घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। दोनों को अच्छे पड़ोसी बनकर रहना होगा। पत्रकारों के सवालों पर दलाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/dalai-lama-speaks-on-doklam-issue/article-3129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/dalai-lama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> बॉर्डर पर मौजूदा तनाव को लेकर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे को नहीं हरा सकते। दोनों देश सैन्य तौर पर ताकतवर हैं। दोनों तरफ से फायरिंग की घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। दोनों को अच्छे पड़ोसी बनकर रहना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्रकारों के सवालों पर दलाई ने कहा, ”1951 में तिब्बत में शांति के लिए चीन के साथ 17 प्वाइंट का एग्रीमेंट हुआ था। आज चीन बदल रहा है और बौद्ध धर्म को मानने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। वहां कम्युनिस्ट सरकार है, लेकिन बौद्ध धर्म को आगे बढ़कर स्वीकार किया। भारत और चीन को फिर से हिंदी-चीनी भाई भाई के रास्ते पर चलना होगा।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है डोकलाम विवाद?</h2>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि सिक्कम सेक्टर के डोकलाम इलाके में करीब 2 महीने से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा है। ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम एरिया में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है।<br />
इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चीन के लिए तीर्थयात्रा का सेंटर हो सकता है भारत</h3>
<p style="text-align:justify;">दलाई ने सुझाव दिया, ”भारत चीन में बौद्ध धर्म के लोगों के लिए तीर्थयात्राएं शुरू करे। हमें यह भी समझना चाहिए कि वहां बौद्ध धर्म को मानने वाले असल में भारतीय बौद्ध धर्म की लाइन पर चल रहे हैं, जो नालंदा और संस्कृत से निकला हुआ है। भारत चीन के लिए तीर्थयात्रा का सेंटर हो सकता है। भारत में धर्मनिरपेक्षता पर दलाई ने कहा, ”सभी धर्म को मानने वाले और नहीं मानने वालों का भी सम्मान करो। भारत के लिए यही धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा है।</p>
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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2017 05:37:37 +0530</pubDate>
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