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                <title>income - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Income Tax Slab: ITR भरने वालों के लिए नई गाइडलाइन&amp;#8230; राहत या आफत?</title>
                                    <description><![CDATA[Income Tax Latest News Hindi: अगर आप इनकम टैक्स (Income Tax) भरते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने टैक्स पेयर्स को राहत देते हुए बताया है कि अब आपकी इनकम पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा। केंद्र सरकार (Central Government) अब ऐसी कई सुविधाएं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/fm-nirmala-sitharaman-on-income-tax-in-hindi/article-48845"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/income-tax.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Income Tax Latest News Hindi: अगर आप इनकम टैक्स (Income Tax) भरते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने टैक्स पेयर्स को राहत देते हुए बताया है कि अब आपकी इनकम पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा। केंद्र सरकार (Central Government) अब ऐसी कई सुविधाएं देने जा रही है, जिसका फायदा लेने पर आपको उस इनकम पर कोई भी टैक्स नहीं देना होगा। इसको लेकर सरकार की तरफ से गाइडलाइन जारी कर दी गई है। Income Tax Slab</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि अभी 2.5 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं होता है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसी आय के स्रोत हैं, जिस पर आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होता है। आज हम आपको उसी इनकम के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना है। Income Tax</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी जॉब करने वाला व्यक्ति अगर किसी भी संस्थान में लगातार 5 साल नौकरी करता है और 5 साल बाद वह अपनी कंपनी को छोड़ता है तो उसे ग्रेच्युटी का फायदा मिलता है। यह राशि पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है। अगर सरकारी कर्मचारी की बात करें तो इनकी 20 लाख तक की राशि टैक्स फ्री होती है। वहीं, प्राइवेट कर्मचारियों की 10 लाख तक की राशि टैक्स फ्री होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पीपीएफ और ईपीएस भी है टैक्स फ्री |Income Tax Slab</h4>
<p style="text-align:justify;">जानकारी दी जा रही है कि नौकरीपेशा व्यक्ति के पीपीएफ के पैसे पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है। इस पर मिलने वाला ब्याज, मैच्योरिटी का समय पूरा होने पर मिलने वाली रकम तीनों पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसके साथ ही लगातार 5 साल काम करने के बाद कर्मचारी अपना ईपीएफ निकालता है तो उसको इस राशि पर भी टैक्स नहीं भरना होता है। इतना ही नहीं अगर आपको अपने मां-बाप से कोई भी पारिवार प्रॉपर्टी, कैश या फिर जेवर मिलते हैं तो वह भी टैक्स से बाहर हैं। इस तरह के उपहार पर भी कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर माता-पिता से मिली हुई राशि को निवेश करता है और उससे कमाई करना चाहता है तो फिर उसे इससे होने वाली आमदनी पर टैक्स देना होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2023 15:37:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>इस तरीके से आप हर माह सैलरी के बराबर कर सकते है कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[आजकल प्राइवेट जॉब करने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा मिल जाएगी। लोग प्राइवेट जॉब में हर महीने एक फिक्स आमदनी हासिल करते हैं। हालांकि इसके बावजूद लोग चाहते हैं कि उनकी सैलरी के बराबर कहीं न कहीं से फिक्स इनकम भी होती रहे। ऐसे में आज हम एक तरीका आपको बताने वाले हैं, जिससे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/how-can-you-increase-your-income/article-40661"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/increase-your-income.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजकल प्राइवेट जॉब करने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा मिल जाएगी। लोग प्राइवेट जॉब में हर महीने एक फिक्स आमदनी हासिल करते हैं। हालांकि इसके बावजूद लोग चाहते हैं कि उनकी सैलरी के बराबर कहीं न कहीं से फिक्स इनकम भी होती रहे। ऐसे में आज हम एक तरीका आपको बताने वाले हैं, जिससे सैलरी के बराबर ही कमाई की जा सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ट्रेडिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">शेयर बाजार में हर रोज लाखों निवेशक पैसा निवेश करते हैं। हफ्ते में शनिवार और रविवार को छोड़कर अगर कोई सरकारी छुट्टी का दिन न आए तो पांच दिन शेयर बाजार में निवेश किया जा सकता है। वहीं शेयर बाजार में हर रोज ट्रेडिंग के जरीए भी पैसा कमाया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिस्क के बावजूद कमाई</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आपको सैलरी के बराबर हर महीने कमाई करनी है तो शेयर बाजार में ट्रेडिंग का रुख किया जा सकता है। ट्रेडिंग के जरिए हर कारोबारी दिन में अच्छी खासी कमाई की जा सकती है। हालांकि ट्रेडिंग करना काफी रिस्की रहता है, लेकिन इसके बावजूद अच्छी खासी कमाई की जा सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ट्रेडिंग का मौका</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं अगर आपको अपनी सैलरी के बराबर कमाई करनी है तो शेयर बाजार में एक निश्चित पैटर्न के हिसाब से काम करना होगा। तभी शेयर बाजार से पैसा कमाया जा सकेगा। महीने के 30 दिन में शनिवार और रविवार को शेयर बाजार की छुट्टी रहती है। ऐसे में महीने में 22 दिन ट्रेडिंग करने का मौका मिलेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे करनी होगी ट्रेडिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">अब ऐसे में मान लीजिए की अगर किसी की सैलरी महीने की 30 हजार रुपये है तो उसे 22 कारोबारी दिनों में हर दिन ट्रेडिंग से सिर्फ औसतन 1363 रुपये का प्रॉफिट कमाना होगा। प्रॉफिट कम ज्यादा हो सकता है, लेकिन अगर औसतन हर रोज 1363 रुपये ट्रेडिंग से निकाले जाए तो महीने के 22 कारोबारी दिनों में आराम से 30 हजार रुपये कमाए जा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">औसतन कमाने होंगे रुपये</h3>
<p style="text-align:justify;">ऐसे ही अगर आपकी सैलरी 40 हजार रुपये है तो 40 हजार रुपये को महीने के 22 कारोबारी दिनों में डिवाइड कर दीजिए। इस हिसाब से आपको 40 हजार महीने में अलग से कमाने के लिए ट्रेडिंग के जरिए हर कारोबारी दिन में औसतन 1818 रुपये कमाने होंगे। जिससे आप महीने के आखिर में अलग से 40 हजार रुपये कमा लेंगे।</p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Dec 2022 14:47:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना में आमजन की कमाई घटी, अरबपति बढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर में असमानता जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम में आॅक्सफैम की एक रिपोर्ट जारी की गई। यह बताती है कि असमानता यूं तो पूरी दुनिया में बढ़ी है, लेकिन भारत में स्थिति बहुत गंभीर है। यहां मार्च 2020 से नवंबर 2021 तक 4.6 करोड़ लोग अत्यंत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/public-income-decreased-in-corona-billionaires-increased/article-30234"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/economy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर में असमानता जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम में आॅक्सफैम की एक रिपोर्ट जारी की गई। यह बताती है कि असमानता यूं तो पूरी दुनिया में बढ़ी है, लेकिन भारत में स्थिति बहुत गंभीर है। यहां मार्च 2020 से नवंबर 2021 तक 4.6 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में चले गए। पूरी दुनिया में इस बीच जितने लोग गरीबी की दलदल में फंसे, यह संख्या उसकी आधी है। मार्च 2020 से नवंबर 2021 के बीच देश के 84 फीसदी परिवारों की कमाई में कमी आई।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 15 फीसदी से ऊपर चली गई। लेकिन इसी दौर में देश के अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई, जबकि उनकी संपत्ति 23.1 लाख करोड़ से बढ़कर 53.2 लाख करोड़ तक जा पहुंची। इस दौर में भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर पहुंच गया। भारत में आज इतने अरबपति हैं, जितने फ्रांस, स्वीडन और स्विट्जरलैंड को मिलाकर भी नहीं हैं। हालांकि, भारत सरकार अपनी अनेक जन-कल्याणकारी योजनाओं यथा प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन योजना, आयुष्मान भारत, पेंशन योजनाओं एवं ग्रामीण विकास के लिए चलाई जा रही अनेक योजनाओं के माध्यम से अत्यधिक गरीबी एवं बहुआयामी गरीबी को कम करने की लगातार कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय जनतांत्रिक राज्य ने पिछले वर्षों में राज्य द्वारा चलाए जाने वाली अनेक कल्याणकारी योजनाओं के जरिये पूरे देश में एक बड़े लाभार्थी समूह का निर्माण किया है। भारतीय जनतंत्र में वोट की शक्ति गरीबों को भी शक्तिवान बनाती है। वे अपने वोटों का सही ढंग से उपयोग कर राजसत्ता से अपनी गरीबी से मुक्ति के लिए योजनाएं व सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। जब गरीब अपने वोट की शक्ति पहचान जाता है, तब अपनी गरीबी से निजात दिलाने का वादा करने वाले एवं उन वादों पर विश्वास करा लेने वाले को सत्ता सौंपता है। लेकिन यह तभी होता है, जब उसमें राजनीतिक चेतना विकसित हो जाती है, जब वह अपनी स्वयं की राजनीति विकसित करने की शक्ति प्राप्त कर लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीब जब स्वयं एकजुट सामाजिक एवं राजनीतिक समूह के रूप में विकसित होने की स्थिति बना लेता है, तभी वह अपने जीवन में गुणात्मक परिवर्तन करने की शक्ति भी प्राप्त कर पाता है। गरीबी से संपूर्ण मुक्ति भारतीय राज्य एवं भारतीय जनतांत्रिक राजनीति, दोनों के लिए चुनौती है, और स्वप्न भी। इसे हमें पाना ही होगा।देश के नीति-निमार्ताओं को इस मुश्किल का हल निकालना होगा। उन्हें आर्थिक सुधारों के मॉडल को ऐसा बनाना होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को आर्थिक तरक्की का फायदा मिले।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jan 2022 10:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई की विदेश में 200 करोड़ की संपत्ति का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे हैं कुलदीप, पत्नी रेणुका भी विधायक बिश्नोई के हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल समेत 13 ठिकानों पर 23 जुलाई से कार्रवाई शुरू हुई थी आयकर अफसरों ने कहा- छापेमारी में मिली जानकारियां ईडी और जांच एजेंसियों के साथ साझा करेंगे पानीपत (एजेंसी)। हरियाणा के कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई के ठिकानों पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kuldeep-bishnoi-income-tax-raids/article-10102"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/kuldeep.jpg" alt=""></a><br /><h2>हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे हैं कुलदीप, पत्नी रेणुका भी विधायक</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बिश्नोई के हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल समेत 13 ठिकानों पर 23 जुलाई से कार्रवाई शुरू हुई थी</li>
<li style="text-align:justify;">आयकर अफसरों ने कहा- छापेमारी में मिली जानकारियां ईडी और जांच एजेंसियों के साथ साझा करेंगे</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (एजेंसी)। </strong>हरियाणा के कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई के ठिकानों पर आयकर विभाग की 89 घंटे चली छापेमारी में करीब 230 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति और कर चोरी का खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि बिश्नोई की 200 करोड़ की संपत्ति विदेश में होने की जानकारी मिली है। इसकी जानकारियां जांच एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है। आयकर टीम ने बिश्नोई के हरियाणा।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली और हिमाचल समेत 13 ठिकानों पर 23 जुलाई से कार्रवाई शुरू की थी। आयकर विभाग ने प्रेस रिलीज में बताया है कि पिछले दिनों जिस समूह पर कार्रवाई की गई। उसे नियंत्रित करने वाले पड़ोसी राज्य में लंबे वक्त से राजनीतिक पदों पर काबिज हैं और करोड़ों की अघोषित संपत्ति जमा की है। अभी तक मिले सुबूतों से पता चला है कि उनके द्वारा अचल संपत्ति के लिए भारी मात्रा में अघोषित कैश से लेनदेने हुआ है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला कुलदीप बिश्नोई से ही जुड़ा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पनामा, यूके और यूएई जैसे देशों में संपत्ति</h4>
<p style="text-align:justify;">आयकर अफसरों के मुताबिक, छापेमारी में करीब 30 करोड़ की घरेलू आयकर चोरी और 200 करोड़ रुपए की अघोषित विदेशी संपत्ति का खुलासा हुआ है। यह संपत्ति ब्रिटिश आइसलैंड, पनामा, यूके और यूएई में दशकों से छिपी थी। यह जानकारी अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और जांच एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कुलदीप की पत्नी और बेटे से भी पूछताछ हुई थी</h4>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने 23 जुलाई से कुलदीप बिश्नोई के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी। 89 घंटे चली कार्रवाई में कुलदीप बिश्नोई, पत्नी रेणुका बिश्नोई, बेटे भव्य बिश्नोई से भी पूछताछ हुई थी। इसके बाद कुलदीप ने ट्वीट किया था कि फूंक मार के बुझाने की, क्या गजब कोशिश थी, जनाब.. हम वो चिराग हैं जिसे आंधियों ने पाला है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2019 15:29:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खाने को रोटी नहीं, इनकम टैक्स ने मारा छापा तो निकली 100 करोड़ की मालकिन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर दिल्ली हाईवे पर 100 करोड़ से ज्यादा की कीमत की 64 बीघा जमीन खोज निकाली नई दिल्ली, (एजेंसी)। जयपुर में इनकम टैक्स विभाग को 100 करोड़ की संपत्ति की ऐसी मालकिन मिली है जो परिवार चलाने के लिए पाई-पाई की मोहताज है।  इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर दिल्ली हाईवे पर 100 करोड़ से ज्यादा की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/income-tax-raid-2/article-9782"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/incomtax.jpg" alt=""></a><br /><h2>जयपुर दिल्ली हाईवे पर 100 करोड़ से ज्यादा की कीमत की 64 बीघा जमीन खोज निकाली</h2>
<p><strong>नई दिल्ली, (एजेंसी)</strong>। जयपुर में इनकम टैक्स विभाग को 100 करोड़ की संपत्ति की ऐसी मालकिन मिली है जो परिवार चलाने के लिए पाई-पाई की मोहताज है।  इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर दिल्ली हाईवे पर 100 करोड़ से ज्यादा की कीमत की 64 बीघा जमीन खोज निकाली है जिसकी मालकिन एक आदिवासी महिला है और उसे यह भी पता नहीं है कि उसने जमीन कब खरीदी और कहां पर है? इनकम टैक्स विभाग ने इन जमीनों को अपने कब्जे में ले लिया है।</p>
<p>जयपुर-दिल्ली हाईवे पर दंड गांव में पड़ने वाली इन जमीनों पर इनकम टैक्स के अधिकारियों ने बैनर लगा दिए हैं। बैनर पर लिखा है कि बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम के तहत इस जमीन को बेनामी घोषित करते हुए आयकर विभाग अपने कब्जे में ले रहा है। 5 गांव के 64 बीघे की जमीन पर लगे बैनरों पर लिखा हुआ है कि इस जमीन की मालकिन संजू देवी मीणा हैं। जो इस जमीन की मालकिन नहीं हो सकती हैं, लिहाजा इस जमीन को इनकम टैक्स विभाग फौरी तौर पर अपने कब्जे में ले रहा है।</p>
<h2>मुंबई के उद्योगपति आदिवासियों के फर्जी नाम पर जमीन खरीद रहे हैं।</h2>
<p>दरअसल आयकर विभाग को शिकायत मिली थी कि दिल्ली हाईवे पर बड़ी संख्या में दिल्ली और मुंबई के उद्योगपति आदिवासियों के फर्जी नाम पर जमीन खरीद रहे हैं। इनका सिर्फ कागजों में लेन-देन हो रहा है। कानून के मुताबिक, आदिवासी की जमीन आदिवासी ही खरीद सकता है। कागजों में खरीदने के बाद यह अपने लोगों के नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी साइन करा कर रख लेते हैं।  इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने इसके असली मालिक की खोजबीन शुरू की तो पता चला की जमीन की मालकिन राजस्थान के सीकर जिले के नीम के थाना तहसील के दीपावास गांव में रहती हैं।  पहाड़ियों के नीचे बसे इस गांव में पहुंचना आसान नहीं है।</p>
<p>आजतक की टीम जब दीपावास गांव में पहुंची तो संजू देवी मीणा ने कहा कि उसके पति और ससुर मुंबई में काम किया करते थे. उस दौरान 2006 में उसे जयपुर के आमेर में ले जाकर एक जगह पर अंगूठा लगवाया गया था। मगर उनके पति की मौत को 12 साल हो गए हैं और वह नहीं जानती हैं कि कौन सी संपत्ति उनके पास है और कहां पर है। पति की मौत के बाद ₹5000 कोई घर पर दे जाता था जिसमें से ढाई हजार रुपए फुफेरी बहन साथ रखती थी और ढाई हजार मैं रखती थी, लेकिन कई साल हो गए अब पैसे भी देने कोई नहीं आता। मुझे तो आज ही पता चला कि मेरे पास इतनी संपत्ति ।</p>
<ul>
<li><strong>संजू देवी के पति की मौत के बाद कमाई का कोई जरिया नहीं है और दो बच्चों को पालने के लिए खुद ही मजदूरी करती हैं</strong></li>
<li><strong>संजू देवी खेती के अलावा जानवर पालकर गुजारा करती हैं</strong></li>
<li><strong> इनकम टैक्स के इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है </strong></li>
<li><strong>क्योंकि गांव वालों का कहना है कि कई कंपनियों ने यहां जमीन खरीदी है जिनके बारे में कहा जाता है कि कंपनी की जमीन है मगर कोई नहीं जानता किसकी है। </strong></li>
<li><strong>पिछले कुछ सालों में इनकम टैक्स विभाग इस इलाके में 1400 करोड़ की जमीन जब्त कर चुकी है</strong></li>
<li><strong> जिनमें से 69 मामलों में कोर्ट ने फैसला देते हुए जमीन को इनाम घोषित कर सरकार को सौंप दी है। </strong></li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/income-tax-raid-2/article-9782</link>
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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2019 11:55:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट 2019: बढ़ सकती है आयकर छूट की सीमा</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इस Budget 2019 से सामान्य वेतनभोगी वर्ग को उम्मीद है कि income tax छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। देश की पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश करने जा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/budget-2019-the-limit-of-income-tax-exemption-can-increase/article-9750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/untitled-4-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इस Budget 2019 से सामान्य वेतनभोगी वर्ग को उम्मीद है कि income tax छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है।</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। </strong>देश की पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इस आम बजट से सामान्य वेतनभोगी वर्ग को उम्मीद है कि आयकर छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। बजट-पूर्व सर्वे में सलाहकार कंपनी केपीएमजी (इंडिया) ने भी कहा है कि व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आयकर छूट की मौजूदा ढाई लाख रुपये की सीमा को आम बजट में बढ़ाया जा सकता है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि 10 करोड़ रुपये सालाना से अधिक आय वाले करदाताओं पर सरकार टैक्स की दर बढ़ाकर 40 फीसद कर सकती है।</p>
<p>बजट-पूर्व सर्वे (2019-20) में केपीएमजी ने विभिन्न उद्योगों के 226 उत्तरदाताओं के विचार मांगे। इनमें से लगभग तीन-चौथाई (74 फीसद) उत्तरदाताओं का मानना था कि सरकार आगामी पूर्ण बजट में आयकर छूट की वर्तमान सीमा बढ़ा सकती है। वहीं, 58 फीसद उत्तरदाताओं का मानना था कि सरकार ‘सुपर रिच’ कैटेगरी (10 करोड़ रुपये सालाना से अधिक आय वाली) पर आयकर की सीमा बढ़ाकर 40 फीसद कर सकती है। हालांकि 53 फीसद उत्तरदाताओं का यह भी मानना है कि प्रत्यक्ष कर में किसी बड़े बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है।</p>
<h2>सर्वे में यह आया सामने</h2>
<ul>
<li>65 फीसद का मानना है कि खुद रहने के लिए जो हाउसिंग लोन लिया गया है, उसके ब्याज पर टैक्स कटौती की सीमा बढ़ाई जा सकती है।</li>
<li>46फीसद उत्तरदाताओं को यकीन है कि सभी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की सीमा घटाकर 25 फीसद पर नहीं लाई जाएगी।</li>
<li>10 फीसद उत्तरदाता मानते हैं कि संपत्ति कर का प्रावधान फिर से लागू किया जा सकता है</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/budget-2019-the-limit-of-income-tax-exemption-can-increase/article-9750</link>
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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2019 10:36:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कमलनाथ के करीबियों पर IT की रेड</title>
                                    <description><![CDATA[सीआरपीएफ और पुलिस के बीच नोकझोंक इंदौर(एजेंसी) । आयकर विभाग मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी सहित उनके कई करीबियों के घर छापेमारी कर रहा है। सबसे पहले देर रात तीन बजे कमलनाथ के ओएसडी (निजी सचीव) प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा गया। इसी के साथ उनके सलाहकार राजेंद्र मिगलानी के दिल्ली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>सीआरपीएफ और पुलिस के बीच नोकझोंक</h2>
<p><strong>इंदौर(एजेंसी) ।</strong> आयकर विभाग मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी सहित उनके कई करीबियों के घर छापेमारी कर रहा है। सबसे पहले देर रात तीन बजे कमलनाथ के ओएसडी (निजी सचीव) प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा गया। इसी के साथ उनके सलाहकार राजेंद्र मिगलानी के दिल्ली स्थित ग्रीन पार्क आवास पर भी छापेमारी जारी है।</p>
<p>ताजा जानकारी के अनुसार मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अश्‍विन शर्मा के घर के बाहर मध्‍यप्रदेश पुलिस और सीआरपीएफ के जवान उलझ गए हैं। उनके बीच तीखी बहस होने लगी। हालांकि इनकम टैक्‍स विभाग की रेड जारी है। भोपाल के सिटी एसपी एच सिंह ने बताया कि हमें इनकम टैक्‍स की रेड से कोई लेनादेना नहीं है। यह एक रेसिडेंसियल कॉम्प्लेक्स है। जिसमें रहने वाले कई लोगों को मेडिकल सुविधाओं की जरूरत है इसलिए उनलोगों ने लोकल पुलिस को बुलाया है। जबकि रेड के दौरान इन लोगों ने पूरे कॉम्प्लेक्स को बंद कर दिया है।</p>
<p>वहीं सीआरपीएफ अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि लोकल पुलिस हमें काम नहीं करने दे रही है। हमसे गलत तरीके से व्‍यवहार किया जा रहा है। हम सिर्फ अपने सीनियर अधिकारी का ऑर्डर फॉलो कर रहे हैं। सीनियर ने हमें कहा है कि हमें कोई अंदर नहीं आए। इसलिए हम कार्रवाई चलने तक आदेश का पालन कर रहे हैं। हम अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।</p>
<p>सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मिगलानी के घर नोट गिनने की मशीन और 2 बक्से लगाए गए है। IT सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक16 करोड़ रुपये बरामद किए गए है।</p>
<h2>10 फीसद आरक्षण के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवा</h2>
<p>सूत्रों के मुताबिक दिल्ली, भोपाल, इंदौर, गोवा सहित 50 ठिकानों पर ये छापेमारी की जा रही है। छापेमारी के दौरान प्रतीक जोशी के घर से भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया है। ग्रेटर नोएडा स्थित मोजर बीयर कंपनी में भी आयकर विभाग के लगभग 20 अधिकारी छापेमारी के लिए पहुंचे अभी भी अधिकारी कंपनी के अंदर मौजूद हैं।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/income-tax-department-raids/article-8415</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Apr 2019 12:24:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों की आय का हो स्थायी हल</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस को सत्ता मिलने के पीछे किसानों की कर्जमाफी की घोषणा ने अहम भूमिका निभाई। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दस दिन में कर्जमाफी का वादा किया था। शपथ ग्रहण के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/permanent-resolve-of-farmers-income/article-7044"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/kisahn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस को सत्ता मिलने के पीछे किसानों की कर्जमाफी की घोषणा ने अहम भूमिका निभाई। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दस दिन में कर्जमाफी का वादा किया था। शपथ ग्रहण के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा कर दी है। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों का 2 लाख तक का कर्जा माफ किया है, माना जा रहा है कि इस फैसले का असर करीब 30 लाख से ज्यादा किसानों पर पड़ेगा। जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दे विशेषकर किसानों की कर्जमाफी को विधानसभा चुनाव में उठाया उससे इस बात का आभास हो रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के एजेण्डे में किसान केन्द्रीय भूमिका में रहेंगे। किसानों के मुद्दे को उठाने का सियासी लाभ कांग्रेस को मिलते देख भाजपा भी सक्रिय हो गयी है, जिसकी बानगी पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रायबरेली की रैली के दौरान देखने को मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली में सेना के जवान और कर्जदार किसान के मुद्दे उठाते हुए तीखे प्रहार किए। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारें बनी हैं और जनादेश की बुनियादी वजह किसान कर्जमाफी भी रही है। भूख, गरीबी, कर्ज से किलसते आदमी को और क्या चाहिए? लिहाजा बीते दो सालों के अंतराल में जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें कर्जमाफी ही जीत का प्राथमिक और बुनियादी फार्मूला साबित हुआ है। इन चुनावों में करीब 1.40 लाख करोड़ रुपए के कर्ज माफ करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन करीब 80 हजार करोड़ के कर्ज ही अभी तक माफ किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिजर्व बैंक के मुताबिक किसानों का कर्ज माफ करने के लिए सरकार को अतिरिक्त 2.20 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। यह राशि कहां से आएगी और बजट में किस मद में उसे दिखाया जाएगा? भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी कहा कि चुनावी वादों में कृषि कर्जमाफी की घोषणा नहीं करनी चाहिए थी। खस्ता आर्थिक हालात में इतनी बड़ी रकम 10 दिन में इंतजाम करना कठिन है। साल 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा 36,000 करोड़ का कर्ज माफ करने के बाद सरकार को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा और उसे कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आखिर किसान की आमदनी जीने लायक कब होगी और वह स्थिर कैसे होगी कि किसान को कर्ज ही न लेना पड़े? किसान बरसों बरस से सियासत का मोहरा बनता रहा है, आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किसानों की समस्याओं पर पर सियासी शोर जोर-जोर से सुनाई देगा लेकिन किसानों की समस्या का स्थायी हल कौन देगा यह अभी कहीं नजर नहीं आ रहा।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/permanent-resolve-of-farmers-income/article-7044</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Dec 2018 10:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्नदाता की आय सुरक्षित करने की सार्थक पहल</title>
                                    <description><![CDATA[समय पर किसान द्वारा उपजाई फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाने के कारण अन्नदाता के सामने कई तरह के संकट मुंहबाए खड़े हो जाते हैं। ऐसे में वह न तो बैंकों से लिया कर्ज समय पर चुका पाते हैं और न ही अगली फसल के लिए वाजिब तैयारी कर पाते हैं। बच्चों की पढ़ाई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/meaningful-iinitiative-to-secure-income-tax/article-5933"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/jgjfgjk-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>समय पर किसान द्वारा उपजाई फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाने के कारण अन्नदाता के सामने कई तरह के संकट मुंहबाए खड़े हो जाते हैं। ऐसे में वह न तो बैंकों से लिया कर्ज समय पर चुका पाते हैं और न ही अगली फसल के लिए वाजिब तैयारी कर पाते हैं। बच्चों की पढ़ाई और शादी भी प्रभावित होते हैं। यदि अन्नदाता के परिवार में कोई सदस्य गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो उसका इलाज कराना भी मुश्किल होता है। इन वजहों से उबर नहीं पाने के कारण किसान आत्मघाती कदम उठाने तक को मजबूर हो जाते हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए ही राजग सरकार ने पिछले दिनों न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी वृद्धि की है, जिससे किसान की आमदनी दोगुनी हो जाए और अब इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय सरंक्षण नीति को मंजूरी दी है। इसके तहत अगले दो वित्तीय वर्षों के लिए 15 हजार 53 करोड़ रुपए मंजूर किए है। अब यदि बाजार में फसल का मूल्य एमएसपी से कम होगा तो राज्य सरकारें इन योजनाओं में से किसी एक का चुनाव कर किसानों को धनराशि का भुगतान कर सकती है।</p>
<p>राजग सरकार ने चार साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद अब किसानों की गंभीरता से सुध लेना शुरू कर दी है। अन्नदाता आय सरंक्षण नीति के तहत राज्य सरकारों को तीन प्रकार के विकल्प दिए गए हैं। एक, नीति के तहत राज्यों को केंद्र के साथ मिलकर फसलों की खरीद करनी होगी, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत होगी। दूसरी भावांतर भुगतान योजना और तीसरी प्रायोगिक तौर पर निजी क्षेत्रों को भी एमएसपी पर खरीद में छूट दी गई है। इसके लिए इन्हें अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। निसंदेह इन नीतियों से बाजार की सरंचना किसान के हित में मजबूत होगी। इसके साथ ही यदि फसल बीमा का समय पर भुगतान, आसान कृषि ऋण और बिजली की उपलब्धता तय कर दी जाती है तो किसान की आमदनी दूनी होने की उम्मीद बढ़ जाएगी। ऐसे ही उपायों से खेती की लागत कम करने और आय में वृद्धि के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है। ऐसा होता है तो किसान और किसानी से जुड़े मजदूरों का पलायन रुकेगा और खेती 70 फीसदी ग्रामीण आबादी के रोजगार का जरिया बनी रहेगी। खेती घाटे का सौदा न रहे इस दृष्टि से कृषि उपकरण, खाद, बीज और कीटनाशकों के मूल्य पर नियंत्रण भी जरूरी है। इन वस्तुओं के निमार्ता किसानों को नकली खाद, बीज और कीटनाशक देकर भी बर्बाद करने में लगे हैं।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया भी था। अब इसे पूरा करना इसलिए जरूरी हो गया था, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और इसके ठीक चार माह बाद मई 2019 में आम चुनाव होने हैं। हालांकि कुछ खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले से ही लागत मूल्य का डेढ़ गुना है। लेकिन धान, रागी और मूंग आदि का समर्थन मूल्य लागत की डेढ़ गुनी कीमत से कम है। इन फसलों के उत्पादक किसानों को इस मूल्य वृद्धि से सबसे अधिक लाभ होगा। एमएसपी में न्यूनतम 3.7 प्रतिशत और अधिकतम 52.5 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की गई है। इससे सरकारी खजाने पर 33000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार बढ़ेगा। इस नए मूल्य निधारण से धान की खरीद पर ही 15000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बोझ की उम्मीद है। किसानों की आमदनी में यह बढ़ोतरी व्यापक रूप से देशहित में है। दरअसल किसान की आमदनी बढ़ने से चौतरफा लाभ होता है। फसलों के प्रसंस्करण से लेकर कृषि उपकरण और खाद-बीज के कारखानों की गतिशीलता किसान की आय पर ही निर्भर है। मंडियों में आढ़त, अनाज के भरा-भर्ती और यातायात से जुड़े व्यापरियों को भी जीवनदान किसान की उपज से ही मिलता है।</p>
<p>किसान, गरीब और वंचित तबकों की हैसियत बढ़ाने की दृष्टि से आवास और उज्ज्वला योजनाओं के बाद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय सरंक्षण नीति सरकार की चौथी बड़ी पहल है। हालांकि इसके पहले पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए 8,500 करोड़ का पैकेज दिया है। फसल बीमा योजना और भूमि स्वास्थ्य कार्ड भी इसी कड़ी के हिस्सा रहे हैं। ये उपाय किए जाना इसलिए जरूरी थे, क्योंकि अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसे प्राकृतिक प्रकोपों के बावजूद देश में कृषि उत्पादन चरम पर है। सरकार द्वारा पेश आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016-17 में करीब 275 मिलियन टन खाद्यान्न और करीब 300 मिलियन टन फलों व सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। बावजूद किसान सड़कों पर उपज फेंकते हुए आंदोलित थे और आत्महत्या भी कर रहे थे, लिहाजा किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए किसान चिंतनीय पहलू होना चाहिए था। गोया, इसकी पृष्ठभूमि 2018-19 के आम बजट में ही रख दी गई थी। हालांकि कृषि, किसान और गरीब को सर्वोच्च प्राथमिकता देना सरकार की कृपा नहीं बल्कि दायित्व है, क्योंकि देश की आबादी की आजीविका और कृषि आधारित उद्योग अंतत: किसान द्वारा खून-पसीने से उगाई फसल से ही गतिमान रहते हैं। यदि ग्रामीण भारत पर फोकस नहीं किया गया होता तो जिस आर्थिक विकास दर को 8 प्रतिशत तक लाया जा सका है, वह संभव ही नहीं थी। इस समय पूरे देश में ग्रामों से मांग की कमी दर्ज की गई है। निसंदेह गांव और कृषि क्षेत्र से जुड़ी जिन योजनाओं की श्रृंखला को जमीन पर उतारने के लिए 14.3 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया था, उसका उपयोग अब सार्थक रूप में होते लग रहा है। ऐसे ही उपायों से किसान की आय सही मायनों में 2022 तक दोगुनी हो पाएगी। इस हेतु अभी फसलों का उत्पादन बढ़ाने, कृषि की लागत कम करने, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने की भी जरूरत है। दरअसल बीते कुछ सालों में कृषि निर्यात में सालाना करीब 10 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं कृषि आयात 10 अरब डॉलर से अधिक बढ़ गया है। अब इस दिशा में भी सुधार होने की उम्मीद है।</p>
<p>केंद्र सरकार फिलहाल एमएसपी तय करने के तरीके में ए-2 फॉर्मूला अपनाती रही है। यानी फसल उपजाने की लागत में केवल बीज, खाद, सिंचाई और परिवार के श्रम का मूल्य जोड़ा जाता है। इसके अनुसार जो लागत बैठती है, उसमें 50 फीसदी धनराशि जोड़कर समर्थन मूल्य तय कर दिया जाता है। जबकि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश है कि इस उत्पादन लागत में कृषि भूमि का किराया भी जोड़ा जाए। इसके बाद सरकार द्वारा दी जाने वाली 50 प्रतिशत धनराशि जोड़कर समर्थन मुल्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए। फसल का अंतरराष्ट्रीय भाव तय करने का मानक भी यही है। यदि भविष्य में ये मानक तय कर दिए जाते हैं तो किसान की खुशहाली और बढ़ जाएगी। एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय आयोग ने भी वर्ष 2006 में यही युक्ति सुझाई थी। समर्थन मूल्य में की गई इन वृद्धियों से ऐसा लग रहा है कि भविष्य में कृषि भूमि का किराया भी इस मूल्य में जोड़ दिया जाएगा। इन वृद्धियों से कृषि क्षेत्र की विकास दर में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। यदि देश की सकल घरेलू उत्पाद दर को दहाई अंक में ले जाना है तो कृषि क्षेत्र की विकास दर 4 प्रतिशत होनी चाहिए। साफ है, कालांतर में इस दिशा में भी अनुकूल परिणाम निकलेंगे। प्रमोद भार्गव</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 20:12:39 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशी फामूला बनाएगा किसानों को माला-माल, बढ़ेगी आय</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सकब)। अब किसानों की माला माल करने के लिए विदेश फामूला इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में इजरायल और लंदन गए कृषि विशेषज्ञों ने जहां न्यूनतम पानी का इस्तेमाल कर अधिकतम उत्पादन लेने की तकनीकों का अध्ययन किया, वहीं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने करीब आधा दर्जन देशों का दौरा कर खेती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-income-of-farmers-by-israeli-technology/article-3749"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/kisahan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सकब)। </strong>अब किसानों की माला माल करने के लिए विदेश फामूला इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में इजरायल और लंदन गए कृषि विशेषज्ञों ने जहां न्यूनतम पानी का इस्तेमाल कर अधिकतम उत्पादन लेने की तकनीकों का अध्ययन किया, वहीं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने करीब आधा दर्जन देशों का दौरा कर खेती में सुधारों पर टिप्स लिए। अब महकमे के अफसर इन अनुभवों को हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार लागू करने के तरीकों पर मंथन में जुटे हैं।ब्राजील, अर्जेंटीना और इजरायल की मदद से गायों की नस्ल सुधारने के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनाने का प्रोजेक्ट कारगर होगा। हालैंड के सहयोग से गुरुग्राम में दुनिया की सबसे बड़ी फूल मंडी बनने से किसानों को निकट में ही बड़ा बाजार मिल जाएगा। इसके अलावा सोनीपत के गन्नौर में बन रही अंतरराष्ट्रीय फल एवं सब्जी मंडी में अर्जेंटीना की मेरकाडो सेंट्रल मंडी और स्पेन की मेरकाबारना मंडी की तर्ज पर किसानों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बूंद-बूंद का होगा इस्तेमाल</h3>
<p style="text-align:justify;">स्पेन की मदद से प्रदेश में खट्टे फलों के बाग लगाने से बागवानी किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। स्पेन ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई अन्य क्षेत्रों में भी मदद की पेशकश की है। स्पेन का प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर या नवंबर में हरियाणा का दौरा करेगा जिसके बाद नींबू-संतरे के बाग लगाने, जैतून की खेती व फूड प्रोसेसिंग को आगे बढ़ाने के लिए समझौता होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इजरायल तकनीक का होगा इस्तेमाल</h3>
<p style="text-align:justify;">खेतों में न्यूनतम लागत से अधिकतम पैदावार लेने में इजरायल का कोई जवाब नहीं। इजरायल ने खासकर सूक्ष्म सिंचाई विधि से पानी बचाने, पानी के पुनर्भरण और जल संरक्षण की तकनीक साझा करने के साथ ही प्रदेश में कुछ और उत्कृष्टता केंद्र बनाने की पेशकश की है। वहां की कई कंपनियां जल संरक्षण और कृषि उद्देश्य के लिए पानी के पुनर्भरण में नवीनतम तकनीक हरियाणा के अफसरों से साझा करेंगी। वैज्ञानिक तरीके से तालाबों का पानी खेती के काम आएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक में दक्ष होंगे किसान</h3>
<p style="text-align:justify;">विदेश दौरे पर गए प्रतिनिधिमंडलों में शामिल रहे कृषि सचिव अभिलक्ष लिखी और मार्केटिंग बोर्ड के प्रशासक मंदीप बराड़ के मुताबिक खेती को लेकर विदेश में काफी काम हुआ है। दौरे के दौरान टीम ने कई नवीनतम तकनीकें जानी। यह निश्चित रूप से किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होंगी। हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार इन तकनीकों को अपनाया जाएगा। किसानों को फसल उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक में दक्ष बनाने पर विभाग का फोकस है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 10:35:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए मांगे 700 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों की आय को दोगुनी करना चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की पहल की है तथा इस कड़ी में सिंचाई परियोजनाओं व नहरी तंत्र के जीणोद्धार के लिए विश्व बैंक को सहयोग करने की 700 करोड़ रूपए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-demands-rs-700-crore-for-irrigation-projects/article-3214"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/drought-india-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">किसानों की आय को दोगुनी करना</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की पहल की है तथा इस कड़ी में सिंचाई परियोजनाओं व नहरी तंत्र के जीणोद्धार के लिए विश्व बैंक को सहयोग करने की 700 करोड़ रूपए की मांग भेजी गई है। इसके अलावा, कृषि की मृदा शक्ति बनाए रखने के लिए आरंभ किए गए सोयल हैल्थ कार्ड के तहत पुरस्कार आरंभ भी किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओपी धनखड़ को विभाग के प्रधान सचिव अभिलक्ष लिखी ने पंचकूला में कृषि संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए बुलाए गए एक दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ में चर्चा के दौरान दी। उन्होंने इस बात से भी अवगत करवाया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं की सब्सीडी संबंधित जानकारी के लिए अलग से नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 08:05:42 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों की आय के लिए 6,339 अरब की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार की एक समिति ने अपने ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2022..23 तक किसानों की वास्तविक आय को दोगुना करने की स्थिति बनाने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से 6,339 अरब रुपए के अतिरिक्त निवेश किए जाने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में असम, केरल, उत्तर प्रदेश, मध्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/need-6339-billion-for-the-income-of-the-farmers/article-3131"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/plastic-note.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सरकार की एक समिति ने अपने ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2022..23 तक किसानों की वास्तविक आय को दोगुना करने की स्थिति बनाने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से 6,339 अरब रुपए के अतिरिक्त निवेश किए जाने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में असम, केरल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, पंजाब और ओडिशा जैसे राज्यों में सार्वजनिक निवेश का स्तर राष्ट्रीय औसत से कम है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कम विकसित राज्यों का पिछड़ापन बरकरार</h3>
<p style="text-align:justify;">इसमें कहा गया है कि निजी निवेश के मामले में पूर्वी क्षेत्र के कम विकसित राज्यों का पिछड़ापन बरकरार है जो वित्तीय एवं अन्य आधारभूत ढांचों के विकास की बड़ी आवश्यकता को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकार के सीईओ अशोक दलवी की अगुवाई वाले किसानों की आय दोगुना करने के लिए बनी समिति द्वारा सार्वजनिक टिप्पणी के लिए जारी किए गए रिपोर्ट के पहले चार खंड में सुझाए गए कुछ उपायों में से हैं। रिपोर्ट के शेष आठ खंड अभी भी जारी किए जाने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी राज्यों में मौजूदा निवेश आवश्यकताओं में भारी अंतर को देखते हुए समिति ने कहा है, संसाधनों का आवंटन इस तरह होना चाहिए ताकि संतुलित विकास हासिल करने में मदद मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2017 08:10:10 +0530</pubDate>
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