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                <title>Goodwill - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आपसी सौहार्द व सद्भावना, चुनावी प्रक्रिया पर हावी</title>
                                    <description><![CDATA[शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थाओं में सभी पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार सच कहूँ सरसा। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं का असर न केवल करोड़ों जन मानस को प्राप्त है। बल्कि उनका व्यापक प्रभाव युवा वर्ग पर भी खासा है। करीब 22 वर्षों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process/article-6323"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थाओं में सभी पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार</h1>
<p style="text-align:justify;">सच कहूँ सरसा।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं का असर न केवल करोड़ों जन मानस को प्राप्त है। बल्कि उनका व्यापक प्रभाव युवा वर्ग पर भी खासा है। करीब 22 वर्षों बाद प्रदेश भर में जहां एक ओर तमाम शैक्षणिक संस्थाओं में नीतियों के आधार पर एक-दूसरे छात्र-संगठनों को नीचा दिखाते हुए छात्र संघ के चुनाव में मतदान की प्रकिया हुई। वहीं सरसा में एक मात्र शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान (बॉयज एंड गर्ल्ज कॉलेज) ही ऐसे संस्थान के रुप में चर्चित रहे जहां क्लास रिप्रेजेंटेटिव सहित प्रधान, उपप्रधान, सचिव व सदस्य आदि सभी पदों के लिए आवेदन करने वाले छात्र प्रतिनिधियों को निर्विरोध उनके पदों पर चुन लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीए मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष के छात्र कपिल ढाका बने प्रधान:</strong> सर्व सहमति से शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के बीए मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष के छात्र कपिल ढाका को महाविद्यालय प्रधान, एम कॉम द्वितीय वर्ष के मोहित को उप प्रधान, बीपीएड सैकिंड के सुखजिन्द्र सिंह को सचिव व बीएससी फाइनल ईयर के छात्र अमन को संयुक्त सचिव के तौर पर चयनित किया। अजय बीएससी नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष, नवदीप कम्बोज बीएससी द्वितीय वर्ष, जगमीत सोनी एमएससी ज्योग्राफी, अमर सिंह डीपीएड प्रथम, बिक्रमजीत सिंह बीए फाइनल को सर्व सम्मति से कार्यकारिणी परिषद सदस्यों के तौर पर चयनित किया गया। इसके अतिरिक्त चुने गए कक्षा प्रतिनिधियों में नरेंद्र बीए प्रथम, मुकेश जयपाल बीएएमसी प्रथम, दिनेश लाम्बा बीएएमसी द्वितीय, आशिष बीसीए प्रथम, अर्जुन बीए द्वितीय, सचिन बीकॉम प्रथम, कशिश बीकॉम द्वितीय, विक्रम बीकॉम तृतीय, संदीप सिंह एमएससी मैथ फर्स्ट, अनिल कुमार एमएसी मैथ सैकिंड, अमरदीप एमएएमसी प्रथम, संदीप कुमार एमएएमसी द्वितीय वर्ष, प्रभजोत सिंह डीपीएड प्रथम व मनीष बीएससी नॉन मेडिकल सैकिंड आदि के नाम शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में ज्योति को चुना गया निर्विरोध प्रधान:</strong> शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में एमएससी मैथ्स प्रथम वर्ष की ज्योति को कॉलेज का निर्विरोध प्रधान बीएएमसी तृतीय वर्ष की रीना को निर्विरोध ही उपप्रधान चुना गया। बीकॉम द्वितीय वर्ष की गुरप्रीत को सचिव व बीएएमसी प्रथम वर्ष की शिक्षा को सह सचिव चुना गया। इसके अलावा एमएससी मैथ्स द्वितीय वर्ष की शिवानी, बीए तृतीय वर्ष की आदेश, बीएएमसी द्वितीय वर्ष की सोनिका, बीए द्वितीय वर्ष की गरिमा व बीसीए प्रथम की ज्योति को कार्यकारी सदस्य के रुप में चुना गया। इसके अलावा रविना, गगनदीप कौर, नवनीत कैर,ममता, रमनप्रीत, तमना, पूनम, सोनिका, सोनाली, अर्शदीप, रमन, सिमरन, कोमल,अनुराधा,सोनम, कपिस्या पूनिया आदि को क्लास रिप्रेजेंटेटिव चुना गया। शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में चुनाव कमेटी में डॉ. रिशू सिंह, मोनिका, पूनम धमीजा, तुलसी व रेणू दारा शामिल थी।</p>
<p>शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसबी आनंद इन्सां व गर्ल्ज कॉलेज की प्राचार्या गीता मोंगा इन्सां ने संयुक्त रुप से बताया कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से शाह सतनाम जी गर्ल्ज व बॉयज कॉलेज में क्लास रिप्रेजेंटेटिव सहित प्रधान, उपप्रधान, सचिव व सदस्य आदि सभी पदों पर उम्मीदवारों का चयन निर्विरोध किया गया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 13:59:40 +0530</pubDate>
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                <title>किम-ट्रम्प ने बनाया सद्भावना का माहौल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और उत्तरी कोरिया के बीच ऐतिहासिक बातचीत शुरू होने से विश्वयुद्ध का एक खतरा टल गया है। अड़ियल और अहंकारी माने जाने वाले उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ने सिंगापुर में अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मीटिंग करके स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम जारी नहीं रखेगा। अमेरिका के कट्टर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/kim-trump-created-an-atmosphere-of-goodwill/article-4125"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/tarmp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका और उत्तरी कोरिया के बीच ऐतिहासिक बातचीत शुरू होने से विश्वयुद्ध का एक खतरा टल गया है। अड़ियल और अहंकारी माने जाने वाले उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ने सिंगापुर में अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मीटिंग करके स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम जारी नहीं रखेगा। अमेरिका के कट्टर विरोधी और परमाणु बम चलाने की धमकियां देने वाले किम के व्यवहार में एकदम इतना बदलाव हैरानी जनक है। यदि किम ईमानदारी से अपनी घोषणाओं को पूरा कर देते हैं तो यह दुनिया के लिए बहुत बड़ा संदेश होगा। किम-ट्रम्प की मुलाकात युद्ध के खतरों पर अमन की बड़ी जीत साबित हो सकती है। दुनिया को दो बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है, आतंकवाद और ताकतवर देशों का टकराव।</p>
<p style="text-align:justify;">ताकतवर देशों के पास परमाणु हथियार हैं और इन देशों ने गुटबंदी बना रखी है। कोरियाई देशों में 65 सालों से चले आ रहे टकराव की मुख्य वजह रूस, चीन और अमेरिका के हित थे। रूस और चीन उत्तरी कोरिया की पीठ थपथपाते आए हैं और दक्षिणी कोरिया में अमेरिका अपना प्रभाव बरकरार रखना चाहता है। वैसे यह कहा जाना भी गलत नहीं होगा कि उत्तरी कोरिया के किम जोंग को ट्रंप के रूप में सवा शेर मिल गया है। यह ट्रंप की उपलब्धि है कि वह चीन और रूस के प्रभाव के बावजूद उत्तरी कोरिया को सही राह पर लाने में कामयाब हुए हैं। ट्रंप के प्रभाव का ही असर था कि इस मुलाकात से पहले किम जोंग और दक्षिणी कोरिया के नेता ने सीमा पर सद्भावना भरी मुलाकात कर दशकों की नफरत को खत्म किया। अब यदि फायर ब्रांड नेताओं किम और ट्रंप ने सतर्कता रखी।</p>
<p style="text-align:justify;">तब वह समय आ गया है कि सीरिया सहित अन्य देशों में रूस और चीन को खानाजंगी का रास्ता छोड़ अमन के रास्ते पर चलना चाहिए। आतंक समाप्ति के लिए भी इन देशों को स्पष्ट नीति अपनानी होगी। विशेषकर पाकिस्तान जो आतंकवाद की नर्सरी के तौर पर जाना जाता है, इस संबंध में कठोर नीति अपनाई जाने की आवश्यकता है। हाफिज़ मोहम्मद सईद, मसूद अजहर, ज़की उर रहमान लखवी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाक को औकात दिखाई जानी चाहिए। अमेरिका व चीन पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कह चुके हैं, रूस को इस मामले में स्पष्ट व कल्याणकारी नीति अपनाते हुए आतंक छोड़ देने की बात करनी चाहिए। युद्ध व आतंकवाद किसी भी देश के हित में नहीं। दुनिया के बदल रहे हालातों के अनुसार विवादों को सुलझाने पर जोर दिया जाए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 07:48:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कट्टरता नहीं, सद्भावना की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[‘वंदे मातरम्’ महान गीत है, जो देश को प्यार करने वाले लोगों के दिल में सहज ही उठता है लेकिन इस गीत को लेकर जो टकराव के हालात बन रहे हैं वह बेहद चिंताजनक है। इस मामले में पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी की टिप्पणी बेहद स्टीक है। उन्होंने इस्लाम के नाम पर ‘वंदे मातरम्’ का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/no-fanaticism-need-for-goodwill/article-3490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/bharat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">‘वंदे मातरम्’ महान गीत है, जो देश को प्यार करने वाले लोगों के दिल में सहज ही उठता है लेकिन इस गीत को लेकर जो टकराव के हालात बन रहे हैं वह बेहद चिंताजनक है। इस मामले में पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी की टिप्पणी बेहद स्टीक है। उन्होंने इस्लाम के नाम पर ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करने वालों को यह नसीहत दी कि ‘वंदे मातरम्’ कभी भी इस्लाम के खिलाफ नहीं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को धक्के से गंवाने वाले भी दोषी हैं। कुरैशी की बात में दम है। वैसे भी देखा जाए देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाते लेकिन इसका सम्मान करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">‘वंदे मातरम्’ का विरोध करने वाले लोग धर्म की हाल दुहाई देकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल देश भक्ति का प्रचार करने के लिए सद्भावना ही सबसे बड़ा स्त्रोत है। देश के लिए मर मिटने वाले देश भक्त सबके सांझा होते हैं। उन पर किसी धर्म का ठप्पा लगाना संकुचित सोच का परिणाम है। यह बड़ी गर्व की बात व राष्ट्रीय एकता का सबूत है कि देश के लिए मर-मिटने वालों में सभी धर्मों के लोग थे। देश भक्ति राष्ट्र के लिए समर्पण भाव है, जिसे फैलाने के लिए प्यार व भाईचारे की जरूरत है। देश के सभी नागरिकों को समानता व सम्मान की भावना से देखने के से उनमें राष्ट्र प्यार की भावना पैदा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनेताओं को इस मामले पर राजनीति करने से संकोच करना चाहिए। पिछले कुछ सालों में कुछ राजनेताओं ने राष्ट्रीय गीत के समर्थन में तो किसी ने विरोध में ऐसी शब्दावली का प्रयोग किया, जिससे वे नेता तो चर्चा में आ गए लेकिन उनकी इस बयानबाजी से समाज में टकराव वाले हालात पैदा हो गए। राजनेता विवादों को उलझाने की बजाए सुलझाने पर बल दें। नेताओं को इस प्रकार की बहस से भी संकोच करना चाहिए जो जनता को बांटने का काम करते हों। राष्ट्रीय एकता की मजबूती ही प्रत्येक राजनीतिक पार्टी का उद्देश्य होना चाहिए। जनता में फूट डालने व आपस में झगड़ा करवाने से देश कमजोर होता है। मजबूत राष्ट्र के लिए सद्भावना व प्यार जरूरी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 04:19:49 +0530</pubDate>
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                <title>ईमानदारी, सद्भावना व एकता की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[हम आज 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियों के बावजूद यदि हम फिर भी पिछड़े हुए हैं, तो इसकी मुख्य वजह नागरिकों में आपसी ईमानदारी, सद्भावना व एकता की कमी है। भारत के पास विकास के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध हैं। भारतीय लोग प्रतिभावान व मेहनती हैं। हजारों ऐसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/honesty-goodwill-and-unity-needed/article-3142"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/india1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हम आज 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियों के बावजूद यदि हम फिर भी पिछड़े हुए हैं, तो इसकी मुख्य वजह नागरिकों में आपसी ईमानदारी, सद्भावना व एकता की कमी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के पास विकास के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध हैं। भारतीय लोग प्रतिभावान व मेहनती हैं। हजारों ऐसे प्रतिभावान व्यापारी हैं जिन्होंने 40-50 हजार से अपना व्यापार शुरू किया जो आज हजारों करोड़ रुपए के आर्थिक साम्राज्य के मालिक बन चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साधारण व्यक्ति आज बड़े स्तर पर व्यापार के माध्यम से विदेशों में अरबों रूपए का निवेश कर रहे हैं। इंजीनियर, चिकित्सक व वैज्ञानिकों सहित अनेक प्रतिभावान भारतीयों का विश्व में दबदबा है। मेडिकल, इंजीनियरिंग व आईएएस परीक्षाओं में बिहार जैसे पिछड़े राज्य भी पीछे नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोचने वाली बात है कि फिर कमी कहां है? यदि कमियों की जांच की जाए तो आमजन में आपसी ईमानदारी, सद्भावना व एकता ही सबसे बड़ी कमी नजर आती है, जोकि देश को पीछे धकेल रही है। ईमानदारी का जज्बा कम हो रहा है, प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नेताओं में सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने की प्रथा बन चुकी है। यदि पूरा पैसा योजनाओं पर खर्च किया जाए, तब तरक्की का पहिया तेजी से घूमेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लोग ईमानदारी से पूरा टैक्स अदा करें। बिजली चोरी न करें तो देश के विकास में पैसे की कोई कमी नहीं रहेगी। धार्मिक सद्भावना की कमी से उपजी हिंसा को रोकने के लिए हर साल अरबों रूपए बर्बाद हो रहे हैं। छोटी सी बात को लेकर दो संप्रदायों में खूनी संघर्ष हो जाता है। पड़ोसियों से शुरू हुआ झगड़ा सांप्रदायिक दंगों का रूप धारण कर लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे खूनी संघर्ष को रोकने के लिए सरकार को कानून में संशोधन करना पड़ रहा है, सख्त धाराएं जोड़ी जा रही हैं। आजादी के 70 साल बाद भी लोग सांप्रदायिकता की संकुचित विचारधारा में जकड़े हुए हैं। दूसरी तरफ विदेशी ताकतें भी देश की तरक्की में बाधा बन रही हैं। एकता की कमी के कारण विदेशी आतंकवाद को भारत में पनाह मिल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आतंकवादियों को यही बात यहां खींच लाती है कि भारत के देश विरोधी तत्व उनका साथ देंगे। यदि प्रत्येक व्यक्ति में देश भक्ति का जज्बा पैदा हो जाए, तब आतंकवाद को देश से मिटाया जा सकता है। अमन-शांति से ही देश की तरक्की संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी देश की तरक्की वहां की महंगी मशीनरी नहीं बल्कि उन्हें चलाने वाले दिमाग व विचारधारा पर निर्भर करती है। ईमानदार नागरिक ही देश को आगे बढ़ा सकते हैं। भौतिक व आर्थिक तरक्की नैतिकता से ही संभव है। यह बात राजनेताओं से लेकर आम आदमी को अपने दिलो-दिमाग में बिठानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2017 02:26:47 +0530</pubDate>
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