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                <title>Bad Condition - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Bad Condition RSS Feed</description>
                
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                <title>बठिंडा : गोनियाना मंडी की सड़कों का बुरा हाल, दो दिन पहले बनी हुई टूटनी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[गोनियाना मंडी की नई बनी सड़कों  की बीते दिन आई बारिश ने पोल खोल कर रख दी है।
सड़कों पर लगे घटिया मटीरियल के कारण सड़कें पानी के साथ टूटनी शुरू हो गई हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/bad-condition-of-the-roads-of-goniana-market/article-11820"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/road-damage.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">स्थानीय निवासियों ने ठेकेदार पर लगाया सड़क निर्माण में घटिया मटीरियल इस्तेमाल करने का आरोप | Road Damage</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा/गोनियाना(सच कहूँ/जगतार जग्गा)।</strong> गोनियाना मंडी की नई बनी सड़कों  की बीते दिन आई बारिश ने पोल खोल कर रख दी है। सड़कों पर लगे घटिया मटीरियल के कारण सड़कें पानी के साथ टूटनी <strong>(Road Damage)</strong> शुरू हो गई हैं। इन सड़कों का अभी दो दिन पहले ही निर्माण किया गया था।  विवरणों अनुसार गोनियाना मंडी की टूटीं सड़कों का मुद्दा मीडिया ने पूरी तरह उठाया हुआ था जब सड़कें बननी शुरू हुई तो अगले दिन ही बारिश शुरू हो गई, जिसके साथ ठेकेदार की पोल खुलने लगी और पूरे का पूरा मटीरियल पानी में बह चला।</p>
<p style="text-align:justify;">सड़क विभाग अनुसार जब सड़कें बनतीं हैं और जब भी ब्लैक कंक्रीट सड़क बनाई जाती है तो यह पूरी गर्मी के सीजन में ही बन सकती है परंतु गोनियाना मंडी की सड़कें गर्मी के सीजन की बजाय वोटों के सीजन दौरान बनाई जातीं हैं और आदेशों की कोई परवाह नहीं की जाती जब वोटों का सीजन आता है फिर धूप -छाया, ठंड या गर्मी नहीं देखी जाती और न ही किसी बारिश का ध्यान रखा जाता है फिर तो रातों-रात ही सड़कें बननीं शुरू हो जाती हैं। इस बार भी इसी तरह ही हुआ क्योंकि लगभग एक महीने के करीब नगर कौंसिल की वोटों में शेष समय रह गया है और नगर कौंसिल ने जल्दी -जल्दी यह काम शुरू करवा दिया कि बारिश तक को भी नहीं देखा गया और सड़कें बनते ही बारिश में बह गई।</p>
<h2>दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">जब इस पत्रकार ने गोनियाना मंडी की सड़कों पर जाकर देखा कि जो सड़क बनाई गई थी पानी की वजह से वह टूट कर बजरी की ढेरियों का रूप धारण कर चुकी थी लोगों ने मांग की कि इस सड़क पर अच्छी क्वालिटी का मटीरियल लगा कर सड़क को बनाया जाए। गोनियाना के डॉ. त्रिलोक जिन्दल,दुकानदार अमृत लाल सिंगला, कृष्ण बांसल, हरशदीप, मुकेश जिन्दल और जिता सिंह ने कहा कि लोगों की ओर से दिए गए टैक्स को नगर कौंसिल और ठेकेदार की ओर से मिलीभुगत के साथ इसी तरह पानी में बहाया जा रहा है क्योंकि बुरा मटीरियल लगाने से ही सड़कें अगले दिन ही टूट गई। उन्होंने मांग की कि सड़क की जांच एजेंसी से करवा कर इस में दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ बनती कार्रवाई करके सड़क का नव निर्माण करवाया जाना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मामले की उच्च स्तरीय जांच हो: मट्टू | Road Damage</h2>
<p style="text-align:justify;">संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश कुमार मट्टू ने कहा कि यह सड़क बिल्कुल भी सही नहीं बन रही और उन्होंने खुद जा कर सड़क बनने समय निरीक्षण किया था जो कि बारिश पड़ने के बावजूद सड़क बनाई जा रही थी। यह नियमों की सरासर उल्लंघना है। उनकी मांग है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच करवा कर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बनती कार्रवाई की जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कोताही नहीं होगी बर्दाश्त : नगर कौंसिल अध्यक्ष | Road Damage</h2>
<p style="text-align:justify;">नगर कौंसिल के अध्यक्ष प्रेम कुमार प्रेमा कहा कि उन्होंने सड़क का काम खुद पास खड़े होकर करवाया है परंतु यदि फिर भी किसी को इससे कोई शिकायत है तो इस की जांच करवाकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी और किसी को भी लापरवाही नहीं बतरने दी जायेगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सड़क बनाने में इस्तेमाल नहीं किया गया घटिया मटीरियल : जेई</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">नगर कौंसिल के जेई इंजी: गुरबखशीश सिंह ने घटिया मटीरियल के लगे दोषों को नकारते कहा कि यह सभी दोष बेबुनियाद हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने खुद के पास खड़े होकर सड़क बनवाई है।</li>
<li style="text-align:justify;">जितना तापमान सड़क बनने समय चाहिए वह तापमान भी पूरा था।</li>
<li style="text-align:justify;">इस सड़क को बनाने के लिए किसी भी किस्म के घटिया मटीरियल का प्रयोग नहीं किया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">न ही इसे बनाने वाले स्टाफ की तरफ से कोई कोताही बरती गई है।</li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2019 20:35:02 +0530</pubDate>
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                <title>अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा प्राचीनतम भटनेर दुर्ग</title>
                                    <description><![CDATA[जितना इतिहास शानदार, उतनी ही हालत जर्जर हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। देश के सबसे पुराने किलों में शामिल हनुमानगढ़ का भटनेर किला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। 1726 साल पहले स्थापित हनुमानगढ़ का भटनेर किला देश के सबसेपुराने किलों में शामिल है। किवदंतियों के अनुसार इस किले का निर्माण श्रीराम के भाई भरत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/bad-condition-of-historic-bhatner-fort/article-3150"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bhatner-fort.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">जितना इतिहास शानदार, उतनी ही हालत जर्जर</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश के सबसे पुराने किलों में शामिल हनुमानगढ़ का भटनेर किला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। 1726 साल पहले स्थापित हनुमानगढ़ का भटनेर किला देश के सबसेपुराने किलों में शामिल है। किवदंतियों के अनुसार इस किले का निर्माण श्रीराम के भाई भरत ने करवाया था मगर ज्ञात इतिहास के अनुसार इस किले की स्थापना 291 ईस्वी में बताई जाती है। मंगलवार को जीतने के कारण इस किले का नाम भटनेर के बदलकर हनुमानगढ़ कर दिया गया था मगर सबसे पुराने और मजबूत किलों में शामिल भटनेर आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। हिन्दुस्तान पर जितने भी विदेशी आक्रांताओं ने हमले किये वो सबसे पहले इसी किले ने झेले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह किला हिन्दुस्तान का प्रवेश द्वार कहा जाता था। विलुप्त सरस्वती नदी और वर्तमान की घग्घर नदी के मुहाने पर करीब 1726 साल पूर्व स्थापित यह किला सबसे पुराना किला तो है ही साथ ही यह सबसे मजबूत किलों में भी शामिल रहा है। वैसे तो कहा जाता है कि श्रीराम के भाई भरत ने इस किले की स्थापना की थी मगर ज्ञात इतिहास के अनुसार गजनी से लाहौर होते हुए भटनेर आए भूपत भाटी ने इस किले की स्थापना की थी और इसी भाटी परिवार ने बाद में जैसलमेर में सोनार किले की नींव रखी थी। तैमूर लंग ने भी अपनी किताब में लिखा है कि उसने इससे मजबूत किला पूरे हिन्दूस्तान में नहीं देखा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सार-संभाल के अभाव में हो रही दुर्गति</h2>
<p style="text-align:justify;">इसका वर्णन उसने अपनी किताब में भी किया है। 52 बीघों में फैले 52 बुर्जांे के इस किले का इतिहास जितना शानदार है आज इसकी हालत उतनी ही जर्जर है। किले के आसपास आबादी बस चुकी है और इसके बुर्ज जर्जर होकर कभी भी गिरने की स्थिति में है और पुरातत्व विभाग भी इस किले के रख-रखाव पर करोड़ों का बजट खर्च कर चुका है जो कहीं दिखाई नहीं देता। जैसलमेर के राजा भूपत सिंह की ओर से स्थापित इस किले के साथ उन्होंने पंजाब के भटिण्डा और हरियाणा के सिरसा में भी किले स्थापित किए थे और इसी कारण भाटी राजा होने के कारण ही इस किले का नाम भटनेर और भाटी होने के कारण ही पंजाब के किले का नाम भटिण्डा पड़ा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भटनेर ने झेले सबसे पहले विदेशी आक्रमण</h3>
<p style="text-align:justify;">इस किले से पंजाब के भटिण्डा और हरियाणा के सिरसा तक एक बहुत बड़ी भूमिगत सुरंग थी और हिन्दूस्तान पर हुए प्रत्येक विदेशी आक्रमण को सबसे पहले इसी किले ने झेला था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बल्लियों का सहारा</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इस किले में देखने को कुछ भी नहीं बचा है और बल्लियों के सहारे किले की दीवारों और छतों को सहारा दिया गया है। ऐसे में अगर कोई विदेशी या देशी पर्यटक भूला-भटका यहां आ भी जाता है तो उसको निराशा ही हाथ लगती है। इसी किले के साथ ही हनुमानगढ़ शहर का इतिहास भी जुड़ा हुआ है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पर्यटन के नक्शे पर भी अनदेखी</h2>
<p style="text-align:justify;">अब इसे विडम्बना ही कहेंगे कि देश के सबसे पुराने किलों में शुमार होने के बावजूद यह किला आज तक पर्यटन के नक्शे पर उभरकर नहीं आ सका और ना ही इसकी सार-संभाल के प्रति भी कोई सरकार या पुरातत्व विभाग सजग है। ऐसे में दिन-प्रतिदिन जर्जर होती जा रही इस प्राचीन धरोहर के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2017 06:35:17 +0530</pubDate>
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