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                <title>Crops - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>5 दिन तक बंद रहेगी सिरसा मंडी में फसलों की बोली</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सुनील वर्मा)। दिवाली (Diwali) के पर्व को देखते हुए हरियाणा के सिरसा मंडी में पांच दिन तक फसलों की बोली नहीं होगी। सिर्फ लोडिंग का काम किया जाएगा। यह निर्णय आढ़ती एसोसिएशन सिरसा की एक बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता प्रधान मनोहर मेहता ने की। Sirsa News मेहता ने बताया कि दिवाली पर्व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bidding-of-crops-will-remain-closed-for-five-days-in-sirsa-mandi/article-54705"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/mandi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> दिवाली (Diwali) के पर्व को देखते हुए हरियाणा के सिरसा मंडी में पांच दिन तक फसलों की बोली नहीं होगी। सिर्फ लोडिंग का काम किया जाएगा। यह निर्णय आढ़ती एसोसिएशन सिरसा की एक बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता प्रधान मनोहर मेहता ने की। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">मेहता ने बताया कि दिवाली पर्व को देखते हुए उन्होंने राइस मिलर्स, धान खरीददार, धान लोडिंग लेबर यूनियन के प्रधान आदि से चर्चा की। चर्चा के बाद सभी की राय से सर्वसम्मति से नौ नवंबर दोपहर 12 बजे से 13 नवंबर तक मंडी में सभी प्रकार की फसलों की खरीद-बिक्री बंद रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आढ़तियों से भी आह्वान किया है कि वे इस अवधि में कोई भी फसल न मंगवाए ताकि किसान भाईयों व आढ़तियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। प्रधान मेहता ने सभी आढ़तियों, किसानों व मंडी मजदूरों को दिवाली, विश्वकर्मा दिवस व भाईदूज की बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में उल्लास व खुशियां लेकर आए बैठक में सचिव दीपक मित्तल, उपप्रधान सुशील कस्वां, कोषाध्यक्ष कुणाल जैन, हन्नी अरोड़ा, राइस ट्रेडर्स से रमेश सुरतिया, गौरव गोयल, सुशील सर्राफ उपस्थित थे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 17:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए आई बड़ी खुशखबरी</title>
                                    <description><![CDATA[मूंग-अरहर और धान समेत 17 फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई ​हर साल 23 फसलों की तय होती है एमएसपी नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार ने बुधवार को किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी दी। केंद्र सरकार ने मूंग, अरहर, धान, मक्का और उड़द की दाल की एमएसपी (MSP) यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ा दिया है। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/msp-of-seventeen-crops-including-moong-arhar-and-paddy-increased/article-48581"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/msp.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मूंग-अरहर और धान समेत 17 फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>​हर साल 23 फसलों की तय होती है एमएसपी</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्र सरकार ने बुधवार को किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी दी। केंद्र सरकार ने मूंग, अरहर, धान, मक्का और उड़द की दाल की एमएसपी (MSP) यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ा दिया है। इस ऐलान के बाद किसान अपनी फसल बढ़ी हुई कीमतों पर बेच सकेंगे। मूंग दाल की एमएसपी सबसे ज्यादा बढ़ाई गई है। धान, मक्का, उड़द, अरहर मूंगफली जैसी फसलों की कीमत में भी अच्छी बढ़ोतरी की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर सरकार हर साल 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। एमएसपी 23 फसलों पर एमएसपी की सिफारिश जारी करता है। इसमें सात अनाज, पांच दलहन, सात तिलहन और चार कमर्शियल फसलें शामिल हैं। इन 23 फसलों में से 15 खरीफ फसलें हैं और बाकी की रबी की फसलें हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किस फसल पर कितनी एमएसपी बढ़ी | (MSP)</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">धान सामान्य- 143 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">धान ग्रेड ए – 143 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">ज्वार हाइब्रिड- 210 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">बाजरा- 150 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">रागी- 268 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">मक्का- 128 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">अरहर- 400 रुपये</li>
<li style="text-align:justify;">मूंग- 803 रुपये</li>
<li>उड़द- 350 रुपये</li>
<li>मूंगफली- 527 रुपये</li>
<li>सूरजमुखी बीज- 360 रुपये</li>
<li>सोयाबीन पीला- 300 रुपये</li>
<li>सनफ्लावर सीड- 360 रुपये</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">एमएसपी पर ये हैं 23 फसलें | ( Minimum Support Price)</h3>
<p style="text-align:justify;">इन फसलों में 5 दालें मूंग, अरहर, चना, उड़द और मसूर शामिल हैं। जबकि 7 अनाज मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, जौ, गेहूं व रागी हैं। इसके अलावा 7 तिलहन सोयाबीन, तिल, कुसुम, मूंगफली, सूरजमुखी, तोरिया-सरसों और नाइजर बीज है। वहीं, 4 कमर्शियल फसलें कपास, खोपरा, गन्ना व कच्चा जूट हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="लूटेरा गिरोह के 8 सदस्य हथियार सहित गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/jalandhar-police-arrested-eight-members-of-looter-gang-with-weapons/">लूटेरा गिरोह के 8 सदस्य हथियार सहित गिरफ्तार</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2023 21:18:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुछ फसलों की पैदावार घटना चिन्ताजनक: रमेश चंद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने भारत को विश्व का ‘फूड पावर’ बताते हुए आज कहा कि पिछले 8-9 साल के दौरान कुछ फसलों की पैदावार घट रही है जो चिन्ताजनक है। चंद ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 94 वीं आम सभा को सम्बोधित करते हुए कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/decreasing-production-of-some-crops-is-a-matter-of-concern-ramesh-chand/article-44367"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/ramesh-chand.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने भारत को विश्व का ‘फूड पावर’ बताते हुए आज कहा कि पिछले 8-9 साल के दौरान कुछ फसलों की पैदावार घट रही है जो चिन्ताजनक है। चंद ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 94 वीं आम सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि दुनिया के देश चाहते हैं कि उन्हें यहां से निरंतर अनाज मिलता रहे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता हो। उन्होंने कहा कि अनाज उत्पादन में आज भारत इस स्थिति में आ गया है कि वह दुनिया का ‘फूड पावर’ बना गया है। मिनरल और मैटल को छोड़कर कृषि से सब कुछ पैदा हो सकता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चेन्नई में तीसरे वनडे के लिये टिकटों की बिक्री 13 मार्च से" href="http://10.0.0.122:1245/tickets-will-go-on-sale-for-the-third-odi-in-chennai-from-march-13/">चेन्नई में तीसरे वनडे के लिये टिकटों की बिक्री 13 मार्च से</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">वर्ष 1970 में अमेरिका से सोयाबीन का जर्म प्लाज्म लाया गया था</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अनाज की पैदावार जनसंख्या की तुलना में तीन गुना अधिक हो रही है। पिछले साल देश में दुनिया का 23 प्रतिशत दूध का उत्पादन हुआ था और उसने इस मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अतित पर गर्व किया जा सकता हैऔर उससे सीखा जा सकता है लेकिन पिछले आठ-नौ साल में बारह फसलों की पैदावार में कमी आ रही है जो चिन्ताजनक है। ांद ने कहा कि पूर्व में कपास का उत्पादन तीन करोड़ साठ लाख गांठें होती थी जो अब घटकर तीन करोड़ 30 लाख गांठें हो गई है। कपास एक बड़ा क्षेत्र है जिससे टेक्सटाइल उद्योग जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कपास का उत्पादन चुनौतीपूर्ण है जिस पर ध्यान देने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि 2014-15 के बाद सोयाबीन का उत्पादन भी घट रहा है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है और एक समय इसका 130 गुना उत्पादन बढ़ा था। जर्म प्लाज्म से सोयाबीन का उत्पादन बढा था और अब समय आ गया है कि अमेरिका से जर्म प्लाज्म लाया जाये। वर्ष 1970 में अमेरिका से सोयाबीन का जर्म प्लाज्म लाया गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अरहर और उड़द में कमी</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि चना के क्षेत्र में अच्छी प्रगति हो रही है जबकि अरहर और उड़द में कमी आ रही है। इसी तरह सरसों और मूंगफली में भी बेहतर हो रहा लेकिन पिछले आठ – नौ साल में सूरजमुखी की पैदावार आधी हो गई है। मिलेट को लेकर अब लोगों में जागरुकता आई है। यह पैष्टिक है और कम पानी में होता है। उन्होंने कहा कि 1970 में 24 प्रतिशत मिलेट का उपयोग होता था जो अब घटकर छह प्रतिशत पर आ गया है। मिलेट अब अमीरों का भोजन बन गया है। इसका उत्पादन एक करोड़ 80 लाख टन से घटकर एक करोड़ 60 लाख टन हो गया है। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी बन गया है लेकिन इसे एक निजी कम्पनी ने तैयार किया है । उन्होंने आनुवांशिक रुप से संबर्धित फसलों को तैयार किये जाने पर भी जोर दिया।</p>
<div class="td-post-content tagdiv-type">
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</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Mar 2023 17:08:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रबी फसलों की बुआई क्षेत्र में वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि पिछले वर्ष की तुलना में रबी की फसल के क्षेत्रफल में 24.13 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रबी फसलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए तोमर ने संतोष व्यक्त किया कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के 138.35 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/increase-in-sowing-area-of-rabi-crops/article-40247"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/tomar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि पिछले वर्ष की तुलना में रबी की फसल के क्षेत्रफल में 24.13 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रबी फसलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए तोमर ने संतोष व्यक्त किया कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के 138.35 लाख हेक्टेयर की तुलना में अभी तक गेहूं की 152.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई है, क्योंकि प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में पिछले वर्ष की तुलना में गेहूं की क्षेत्रीय कवरेज में भी वृद्धि दर्ज की है। गेहूं के लिए, पिछले वर्ष की तुलना में क्षेत्रफल में 14.53 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है और यह पिछले चार वर्षों से अब तक सबसे अधिक है। गत 25 नवम्बर, 2022 तक, रबी फसलों के तहत बुवाई का कुल क्षेत्रफल 358.59 लाख हेक्टेयर (जो सामान्य रबी क्षेत्र का 57 प्रतिशत है) था, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 334.46 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार रबी क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 24.13 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने आशा जताई कि मिट्टी की नमी की अनुकूल स्थिति, बेहतर जल भंडारण और देश भर में उर्वरकों की सहज उपलब्धता के साथ आने वाले दिनों में रबी फसलों की क्षेत्रीय कवरेज में और तेजी आने और इससे अच्छी रबी फसल होने की उम्मीद की जा सकती है। देश भर के 143 महत्वपूर्ण जलाशयों में वर्तमान जल संग्रहण 149.49 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि का 106 प्रतिशत है और पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि के औसत संग्रहण का 119 प्रतिशत है। अधिकांश जिलों में 15-21 नवंबर, 2022 के दौरान मिट्टी में नमी की स्थिति इसी अवधि के पिछले 07 वर्षों के औसत से अधिक है। रबी सीजन के लिए आवश्यकतानुरूप पूरे देश में खाद की भी सहज रूप से उपलब्धता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Nov 2022 10:12:57 +0530</pubDate>
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                <title>आसमान से बरस रही आग से फसल बचाने में जुटे किसान, अपना रहे देसी तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[ट्यूबवेलों की सिंचाई हो रही नाकाफी साबित ओढा(सच कहूँ/राजू)। पिछले कुछ दिनों से तन झुलसा देने वाली गर्मी व लू ने आमजन को बेहाल कर रखा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 दिनों तक लू का प्रकोप जारी रहने की चेतावनी दी गई है। हरियाणा के उत्तरी हिस्से में येलो एवं बाकी जिलों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-engaged-in-saving-crops-from-heat/article-33459"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/save-crops-from-heat.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>ट्यूबवेलों की सिंचाई हो रही नाकाफी साबित</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढा(सच कहूँ/राजू)।</strong> पिछले कुछ दिनों से तन झुलसा देने वाली गर्मी व लू ने आमजन को बेहाल कर रखा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 दिनों तक लू का प्रकोप जारी रहने की चेतावनी दी गई है। हरियाणा के उत्तरी हिस्से में येलो एवं बाकी जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस भीषण ने सबसे ज्यादा किसानों को सांसत में डाल रखा है। किसान नरमें की फसल को बचाने के लिए खेतों में जद्दोजहद कर रहे हैं। स्थिति ये है कि नहरोंं में बंदी के चलते किसान पूरी तरह से ट्यूबवेलों पर आश्रित होकर रह गए हैंं। भीषण गर्मी का प्रकोप इस कदर देखा जा रहा है कि ट्यूबवेलों के पानी की सिंचाई मात्र 2-3 दिन ही चलती है। दूसरा लोड बढ़ने के चलते विद्युत व्यवस्था भी किसानों के लिए कोढ़ में खाज का काम कर रही है। की गई बिजाई खत्म हो रही है और दूसरा भूमि में नया बीज डालकर दोबारा सिंचाई कर जद्दोजहद की जा रही है। फसल को बचाने के लिए किसान पुराने देसी नुस्खे अपना रहे हैं। नुहियांवाली के किसान चेतराम दादरवाल, डॉ. जगदीश सहारण, देवीलाल सुथार, रविंदर वर्मा, जसराज सहारण व परमवीर वर्मा ने बताया कि खेतों में स्थिति काफी विकट हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">न ही तो ट्यूबवेल मिल रहे और न ही नहरों में पानी। उन्होंने बताया कि झुलसती फसल को देखकर खेत में जाने का भी मन नहीं करता। अगर मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो स्थिति और भी विकट हो जाएगी। किसान चेतराम ने बताया कि उन्होंने ठेके पर भूमि लेकर काश्त कर रखी है। उन्होंने गर्मी व लू के डर से नरमें की अगैती बिजाई की थी, लेकिन फिर भी फसल लू की भेंट चढ़ रही है। उन्होंने 3 एकड़ भूमि में नरमें की दोबारा बिजाई की है, लेकिन फिर भी कामयाबी मिलती नजर नहीं आ रही। फसल को बचाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तो ईश्वर के हाथ ही डोर है। उन्होंने बताया कि फसल को कामयाब करने के लिए देसी नुस्खा अपना रहे हैं। प्लास्टिक के लिफाफों में मिट्टी भरकर उनमें बीज डालकर अंकुरित किए जा रहे हैं, ताकि जले हुए पौधों की जगह उन्हेंं पुन: रोपित किया जा सके। इस कार्य में घर के सभी सदस्य लगे हुए हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 10:13:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में खराब फसलों के लिये 561.11 करोड़ रुपए मुआवजा जारी</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा सरकार ने खरीफ-2021 के दौरान राज्य में भारी वर्षा, जलभराव तथा कीट हमलों के कारण फसलों (Crops in Haryana) को हुये नुकसान के लिये राज्य के 866 गांवों के 8,95,712 किसानों को 561.11 करोड़ रुपये मुआवजा राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित करने की शुरूआत की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/rs-561-11-crore-compensation-released-for-bad-crops-in-haryana/article-30890"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/crops-in-haryana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा सरकार ने खरीफ-2021 के दौरान राज्य में भारी वर्षा, जलभराव तथा कीट हमलों के कारण फसलों (Crops in Haryana) को हुये नुकसान के लिये राज्य के 866 गांवों के 8,95,712 किसानों को 561.11 करोड़ रुपये मुआवजा राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित करने की शुरूआत की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वीरवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला उपायुक्तों के साथ एक बैठक कर उन्हें जल्द से जल्द किसानों के खातों में मुआवजा राशि का भुगतान 28 फरवरी तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल भी मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को रबी-2022 के दौरान प्राकृतिक कारणों से फसलों (Crops in Haryana) को हुए नुकसान के आकलन के लिए चल रही गिरदावरी भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए ताकि किसानों को मुआवजा राशि समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार किसान हितैषी है और किसानों को समय पर मुआवजा देने और उनके हित में कोई भी कदम उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि वे दिन गए जब किसान मुआवजा पाने के लिए सालों इंतजार करते थे। अब पूरी व्यवस्था डिजिटल हो गई है। अब किसान भी विश्वास करने लगे हैं कि उन्हें कम समय में मुआवजा मिलेगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 18:59:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के अरमानों पर मौसम की मार, फसलें बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ संवाददाता ने किया गांव का दौरा, किसान बोले मुआवजा नहीं मिला तो मर जाएंगे भूखे सच कहूँ/सुरजीत कुराली, नारायणगढ़। दो महिने से भारी बरसात के कारण जहां फसलों को हुए नुकसान (Crops Ruined) के सदमे से अभी किसान उबरे भी नहीं थे, उपर से उपमंडल के कुछ गांवों में गत दिनों हुई ओलावरिष्ट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/weather-hits-on-farmers-wishes-crops-ruined/article-30758"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/crops-ruined.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>सच कहूँ संवाददाता ने किया गांव का दौरा, किसान बोले मुआवजा नहीं मिला तो मर जाएंगे भूखे</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुरजीत कुराली, नारायणगढ़।</strong> दो महिने से भारी बरसात के कारण जहां फसलों को हुए नुकसान (Crops Ruined) के सदमे से अभी किसान उबरे भी नहीं थे, उपर से उपमंडल के कुछ गांवों में गत दिनों हुई ओलावरिष्ट ने किसान को बर्बाद कर दिया है। बरसात के साथ हुई ओलावरिष्ट के कारण गेहूं, सरसो, आलू, बरसीन जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है। लेकिन उपमंडल के गांव लाहा के मौजा में भारी ओलावरिष्ट से करीब 90 एकड़ पर खड़ी फसलों को व सड़को पर सफेद चादर सी बिछ गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां तक कि ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान की फसल नष्ट (Crops Ruined) होने पर व छोटे किसान जिन्होंने अपने घर के लिये अनाज व पशुओं के लिये घास लगा रखी थी, बर्बाद होने पर मोहताज नजर आये। किसानों ने सरकार से विशेष गिरदावरी करवा कर मुआवजे की मांग की है। जब सच कहूँ संवाददाता ने गांव लाहा में दौरा किया तो स्थिति सामने आई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">गेहूं व आलू की फसल का भारी नुकसान</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान मनजीत ने बताया कि उसने ठेके पर सवा दो एक्ड जमीन 70 हजार पर ठेके में ली हुई थी। जिसमें आलू व गेहूं लगा रखी थी। पहली भी बरसात से काफी नुकसान हुआ था । परन्तु खाद वगैरह डालकर ठीक की थी। लेकिन अबकि बार ओलावृष्टि होने जहां सब फसले तबाह हो गई है। सरकार से मांग है कि गिरदावरी करवाकर मुआवाजा दिया जाये।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ठेके पर लेकर सवा 7 एकड़ की लगाई गई गेहूं की फसल बर्बाद</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान हरदीप ने बताया कि सवा 7 एकड़ में जमीन ठेके पर 40 हजार रुपए पर प्रति एकड़ के हिसाब से ली हुई है। उसमें गेंहू लगा रखी थी। कल भारी ओलावृष्टि होने पर सभी फसल बरबाद हो गई है। अब तो हम सड़क पर आ गये हैं। सरकार हमारी मदद करे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अभी कोई नहीं लेने आया सुध</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान मदनलाल ने बताया कि दो एकड़ में गेहूं लगी हुई थी। लेकिन ओलावृष्टि के कारण फसल नष्ट (Crops Ruined) हो गई है। अभी सरकार का कोई भी नुमाइंदा देखने नहीं आया है। सरकार द्वारा गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिया जाये।</p>
<h4 style="text-align:justify;">खाने के लिए नहीं बचे दाने</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान गुरदीप सिंह ने बताया कि मेरी यहां लाहा मौजे में 8 एकड़ जमीन है, उसमें गेहूं लगा रखी है। पहले भी बरसात बहुत हुई थी। उससे भी नुकसान हुआ था। अब ओला इतना ज्यादा पड़ा है। जिसपर फसलें बिल्कुल बर्बाद हो गई है। न तो खाने के लिये दाने है और न कुछ और है। इस समय हम बर्बाद हो गये हैं। गेहूं की फसल बिल्कुल टुटने से नष्ट हो चुकी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सरकार हमारी मद्द करे</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान बबली ने बताया कि हमने एक छोटी सी जमीन पर लहसुन, गेहूं, सरसो लगाई हुई थी। ओले के कारण सभी फसल खराब हो गई हैं। हम सरकार से मांग करते है कि अबकी बार घर में अनाज न होने पर पर सरकार हमारी मदद करे। वहीं किसान नसीबो देवी ने बताया कि अपने घर की 6 कनाल जमीन है। उस जमीन में अपने घर के लिये गेंहू व घास लगाया हुआ था। ओलावरिष्ट के कारण सब नष्ट हो गया है। अबकी बार तो घर के लिये अनाज व पशुओ के लिये घास तक के लिये मौहताज हो गये है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">40 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन लेकर की थी बुआई</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान सत नारायण जो 30 साल से अपने परिवार के साथ गांव लाहा रह रहे हैं ने बताया कि मैने ठेके पर 40 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से 18 एकड़ जमीन ले रखी है। दो एकड़ में सरसो लगा रखी थी जो पकने पर काटनी थी। अन्य खेतों में चना, गेंहू , प्याज लगा रखा था लेकिन ओले के कारण सब बर्बाद हो गया है। अब बच्चों को क्या खिलायेगें। भूखे मरने की बात आ गई है। वहीं किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि साढ़े तीन एकड़ जमीन में गेहूं लगाई हुई थी। ओले के कारण जो खराब हो चुकी है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 21:31:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठंड अधिक हुई तो पाले से फसलों को हो सकता है नुकसान!</title>
                                    <description><![CDATA[किसान रहे सतर्क, समय-समय पर करें अपनी फसल का निरीक्षण बीमारी मिलने पर कृषि वैज्ञानिकों से मशवरा कर करें छिड़काव सरसा (सच कहूँ न्यूज)। जिले में करीब 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की फसल की बिजाई की गई है। शीतलहर में सरसों की फसल को बचाने के लिए किसानों को सतर्क रहना होगा। क्योंकि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/crops-may-be-damaged-due-to-extreme-cold/article-30078"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/mustard-crop1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">किसान रहे सतर्क, समय-समय पर करें अपनी फसल का निरीक्षण</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बीमारी मिलने पर कृषि वैज्ञानिकों से मशवरा कर करें छिड़काव</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिले में करीब 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की फसल की बिजाई की गई है। शीतलहर में सरसों की फसल को बचाने के लिए किसानों को सतर्क रहना होगा। क्योंकि मौसम बदलने से रात का पारा लगातार गिर रहा है। अगर पारा ज्यादा नीचे जाता है तो फसलों में कई बीमारियां फैलने का डर रहता है। इसलिए किसान सरसों सहित अन्य फसलों पर विशेष ध्यान दें और समय समय पर खेतों का निरीक्षण करके कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर छिड़काव करें। यदि सरसों की फसल में सकलैरोटीनियां गलन से बचाने के लिए काबेर्डाजिम दवाई का छिड़काव नहीं किया गया है अभी तक तो उसका छिड़काव जरूर करेंं। इसका प्रयोग 200 ग्राम दवाई 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ करें।</p>
<p style="text-align:justify;">सफेद रतुआ या डाऊनी मिल्ड्य राया के अत्यंत घातक रोग हैं। समय से बचाव करके साधन अपनाकर रोगों से बचा जा सकता है। बचाव के लिए 600 ग्राम डाइथेन एम 45 या इंडोफिल एम 45 या मैन्जेब का 250 से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव करें। इस दवाई को चेपा या अल के नियंत्रण के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली कीटनाशक में मिलाया जा सकता है। फफूंदनाशक की नित्रंयक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रति 100 लीटर घोल में 10 ग्राम सेल्वेट 99 या 50 मिली लीटर ट्राइटान अवश्य मिला दें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चेपा से बचाव के लिए यह करें उपाय</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सरसों पर चेपा का आक्रमण हो सकता है। ये कीट समूहों में पौधे के ऊपरी सभी भागों का रस चूसकर बहुत हानि करते हैं। यदि 10 प्रतिशत पुष्पित पौधों पर औसतन प्रति पौधो 13 से 15 कीट हों तब इनकी रोकथाम के लिए 250 से 400 मिली लीटर मैटाासिस्टाक्स 25 ईसी या रोगोर 30 ई सी को 250 से 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। कीटनाशक की मात्रा फसल की बढ़वार पर निर्भर करती है। जरूरत पड़ने पर 15 दिन बाद यही छिड़काव करें। इसी कीटनाशकों से पत्तों में सुरंग बनने वाला कीट भी मर जाता है। किसान मुधमक्खियों को बचाने के लिए छिड़काव दिन में दोपहर दो बजे बाद करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुनील बैनीवाल ने बताया कि इस मौसम में किसान समय समय पर सरसों की फसल का निरीक्षण करते रहे। अगर कोई बीमारी नजर आती है तो कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर छिड़काव करें।</em></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/crops-may-be-damaged-due-to-extreme-cold/article-30078</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Jan 2022 14:28:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फसलों पर लागत खर्च दोबारा जोड़े जाएं</title>
                                    <description><![CDATA[तेल कीमतों में वृद्धि के साथ महंगाई लगातार बढ़ रही है। इन परिस्थितियों में कृषि क्षेत्र के सबसे अधिक प्रभावित होने का अनुमान है। रबी की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो चुका है, भले ही केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य अधीन सभी फसलों के दामों में वृद्धि की घोषणा की है, किंतु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/re-add-the-cost-of-crops/article-28110"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/farmer.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तेल कीमतों में वृद्धि के साथ महंगाई लगातार बढ़ रही है। इन परिस्थितियों में कृषि क्षेत्र के सबसे अधिक प्रभावित होने का अनुमान है। रबी की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो चुका है, भले ही केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य अधीन सभी फसलों के दामों में वृद्धि की घोषणा की है, किंतु इस घोषणा के बाद जिस प्रकार महंगाई बढ़ रही है, उसे वर्तमान कृषि लागत खर्चों में नहीं जोड़ा गया। हर साल केंद्र सरकार द्वारा फसलों की बिजाई से दो माह पूर्व कृषि लागत तय करने के वक्त मौजूदा खर्चों को मौजूदा रेटों को आधार बनाया जाता है, लेकिन फसल के पककर तैयार होने तक खर्चें बढ़ जाते हैं जिन्हें बाद में लागत खर्च में नहीं जोड़ा जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि में फसलों की बिजाई से लेकर कटाई और मंडी में फसल ढुलाई के लिए डीजल की खूब खपत होती है। डीजल का रेट शतक को पार कर गया है। ऐसे में सरकार द्वारा घोषित फसलों का रेट नाकाफी है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। भाव तय करने की व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक युग में फसलों के भाव को डिजीटल करना समय की आवश्यकता है। छह माह पूर्व घोषित फसलों के रेटों में समय के अनुसार परिवर्तन करने का प्रबंध हो। यह भी आवश्यक है कि बारिश-आंधी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के नुक्सान के साथ मंडी में होने वाले नुक्सान को भी जोड़ा जाए। अभी तक खेतों में खड़ी फसल के नुक्सान का ही मुआवजा दिया जाता है। ऐसा कई बार हुआ है कि जब प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण मंडियों में जलभराव की समस्या बनी है और लाखों टन फसल बर्बाद हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मंडियों में पूरे प्रबंध करने की जिम्मेवारी सरकार की है। किसान की जिम्मेवारी फसल की बिजाई कर, फिर तैयार कर मंडी में लाना है। मंडियों में व्यवस्था को लेकर प्रशासन की लापरवाही का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि कम-से-कम सरकार तैयार हुई फसल को तो संभालने की जिम्मेदारी तो ले, फसलों का मंडियों में बर्बाद होना कृषि क्षेत्र का अपमान है। यदि देश में सड़कों का जाल बिछाया जा सकता है तो अति आधुनिक मंडियों का प्रबंध इससे पहले हो जाना चाहिए। अनाज के भंडारण के लिए निजी कंपनियों ने बड़ा नेटवर्क तो बना लिया, साथ ही सरकार को मंडियों के विकास व आधुनिकीकरण के बारे में भी सोचना होगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Nov 2021 09:37:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैबिनेट: सरकार ने खरीफ फसलों का एमएसपी बढाया, धान का 1868 रुपए तय</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकार ने वर्ष 2020- 21 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा करते हुए सामान्य धान का एमएसपी 1868 रुपए, मक्का का 1850 रुपए , ज्वार का 2620 रुपए, अरहर का 7196 रुपए और बाजरा का 2150 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/cabinet-government-increases-msp-of-kharif-crops-paddy-fixed-at-rs-1868/article-15792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/peddy-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सरकार ने वर्ष 2020- 21 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा करते हुए सामान्य धान का एमएसपी 1868 रुपए, मक्का का 1850 रुपए , ज्वार का 2620 रुपए, अरहर का 7196 रुपए और बाजरा का 2150 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की सोमवार को यहां हुई बैठक में कृषि मंत्रालय के खरीफ फसलों के एमएसपी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। बैठक के बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कृषि मूल्य लागत आयोग की सिफारिश पर सामान्य धान के लागत का 50 प्रतिशत मुनाफा निर्धारित कर इसका एमएसपी 1868 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होेंने बताया कि संकर ज्वार का एमएएसपी लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत मुनाफा देकर 2620 रुपए प्रति क्विंटल तथा बाजरा के लागत मूल्य पर 83 प्रतिशत मुनाफा देकर 2150 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार से रागी के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत, मक्का में 53 प्रतिशत, अरहर में 58 प्रतिशत, मूंग में 50 प्रतिशत, उडद में 64 प्रतिशत, सूरजमुखी में 50 प्रतिशत, सोयाबीन में 50 प्रतिशत और कपास में 50 प्रतिशत की वृद्धि कर एमएसपी निर्धारित किया गया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2020 16:58:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धान , दलहन और मोटे अनाजों के बुआई क्षेत्र में वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन के बावजूद ग्रीष्मकालीन फसलों के बुआई क्षेत्र में वृद्धि नई दिल्ली (एजेंसी)। लॉकडाउन के बावजूद इस बार जमीन में नमी की अच्छी मात्रा के कारण पिछले साल की तुलना में ग्रीष्मकालीन फसलों की अधिक बुआई की गई है। कृषि मंत्रालय के जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस बार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/increase-in-sowing-area-of-%E2%80%8B%E2%80%8Bpaddy-pulses-and-coarse-grains/article-14751"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/government-can-soon-grant-package-for-relief-to-farmers.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन के बावजूद ग्रीष्मकालीन फसलों के बुआई क्षेत्र में वृद्धि</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> लॉकडाउन के बावजूद इस बार जमीन में नमी की अच्छी मात्रा के कारण पिछले साल की तुलना में ग्रीष्मकालीन फसलों की अधिक बुआई की गई है। कृषि मंत्रालय के जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस बार पिछले साल की तुलना में धान , दलहन और मोटे अनाजों के बुआई क्षेत्र में वृद्धि हुई है । पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान ग्रीष्मकालीन धान की बुआई 25.22 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस बार लगभग 34.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है । दलहन की बुआई इस बार 5.07 हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान दलहन की बुआई 3.82 लाख हेक्टेयर में हुई थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2020 13:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉकडाउन के दौरान रबी फसलों की कटाई पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ज्यादातर राज्यो में गेंहू की कटाई का काम लगभग पूरा हो गया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/harvesting-of-rabi-crops-completed-during-lockdown/article-14720"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/crop-donate1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> लॉकडाउन की एक माह की अवधि के दौरान न केवल रबी फसलों की कटाई का काम लगभग पूरा हो गया है बल्कि इस दौरान करीब नौ करोड़ किसान परिवारों को पीएम किसान योजना से लाभान्वित भी किया गया है । गत 24 मार्च से अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत लगभग 8.938 करोड़ किसान परिवारों को लाभान्वित किया गया है और अब तक 17,876.7 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किश्तों में दी जाती है । रबी सीजन के दौरान बीस राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन और तिलहन की खरीद लगभग पूरी कर ली गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक लाख 74 हजार से अधिक किसानों को करीब 1313 करोड़ रुपये का भुगतान</h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय खाद्य निगम और नैफेड द्वारा 1,67,570.95 टन दलहन और 1,11,638.52 टन तिलहन की खरीद की गई है । इसके लिए एक लाख 74 हजार से अधिक किसानों को करीब 1313 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है । मानसून का लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन से संबंधित गतिविधियों की शुरुआत कर दी गई है । उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में श्रमिकों को मास्क, भोजन आदि देने के साथ ही बांस नर्सरी की तैयारी शुरू कर दी गई है। गुजरात के साबरकांठा और वांसदा जिलों में नर्सरी बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">असम में कामरूप जिले के दिमोरिया ब्लॉक में 520 किसानों को मिलाकर 585 हेक्टेयर क्षेत्र में किसान उत्पादक संगठनों ने वृक्षारोपण शुरू किया है। देश के 2587 मुख्य कृषि बाजारों में से 1091 बाजार लॉकडाउन की अवधि की शुरुआत के बाद 26 मार्च को कार्यरत थे, जिनकी संख्या 21 अप्रैल तक बढ़कर 2069 बाजार हो गई है । मंडियों में प्याज, आलू और टमाटर जैसी सब्जियों की आवक 16 मार्च की तुलना में 21 अप्रैल तक बढ़कर क्रमशः 622 प्रतिशत , 187 प्रतिशत और 210 प्रतिशत हो गई है।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/harvesting-of-rabi-crops-completed-during-lockdown/article-14720</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2020 14:47:10 +0530</pubDate>
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