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                <title>Nuclear Weapon - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंकाएं और चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[रूस एवं यूक्रेन के बीच लम्बे समय से चल रहा युद्ध भीषणतम तबाही एवं सर्वनाश का कारण बनता दिख रहा है। रूस द्वारा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल किये जाने एवं यूक्रेन द्वारा ‘डर्टी बम’ का इस्तेमाल किये जाने की धमकियां, दुनिया के लिये डर का कारण बन रही हैं। भयंकर विनाश की आशंकाओं के बीच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/concerns-of-the-use-of-nuclear-weapons/article-39540"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/putin-and-joe-biden-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रूस एवं यूक्रेन के बीच लम्बे समय से चल रहा युद्ध भीषणतम तबाही एवं सर्वनाश का कारण बनता दिख रहा है। रूस द्वारा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल किये जाने एवं यूक्रेन द्वारा ‘डर्टी बम’ का इस्तेमाल किये जाने की धमकियां, दुनिया के लिये डर का कारण बन रही हैं। भयंकर विनाश की आशंकाओं के बीच समूची दुनिया सहमी हुई है। यदि परमाणु हथियारों का उपयोग होता है तो यह मानवता के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ होगा एवं दुनिया को अशांति की ओर अग्रसर करने वाला होगा। इस मसले का हल कूटनीति और आपसी बातचीत से ही निकालने के प्रयास किये जाने की आवश्यकता भारत लगातार व्यक्त करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शांति का उजला एवं अहिंसा-सहजीवन की कामना ही भारत का लक्ष्य रहा है। इसीलिये भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार युद्ध विराम की कोशिश करते हुए दोनों ही देशों को दिशा-दर्शन देते रहे हैं। परमाणु युद्ध न हो, इसके लिये रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने यह अपील अपने रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु से बातचीत के दौरान की। यह बातचीत रूस की पहल पर ही आयोजित हुई थी। हालांकि कहना मुश्किल है कि रूस भारत की इस अपील को कितनी गंभीरता से लेगा। जब युद्ध शुरू हुआ तबसे लेकर अब तक भारत कई बार यह बात दोहरा चुका है, मगर दोनों में से किसी भी देश ने अपने रुख में लचीलापन लाने का प्रयास नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन की ओर से यूरेनियम जैसा रेडियोएक्टिव एलीमेंट से जुड़े ‘डर्टी बम’ के इस्तेमाल की आशंका जताए जाने के बाद जहां समूची दुनिया अनर्थ होने की आशंका से भयभीत एवं डरी हुई है, वहीं इस युद्ध के कहीं घातक दौर में प्रवेश करने का डर बढ़ गया है। यूक्रेन और उसके सहयोगी अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने भले ही इस आरोप को बेबुनियाद एवं बेतुका बताया हो या पश्चिमी देशों द्वारा रूस द्वारा परमाणु हथियारों के प्रयोग की संभावनाएं जताया जाना, इन दोनों ही स्थितियों ने एक ऐसा अंधेरा परिव्याप्त किया है जिससे मानवता का भविष्य धुंधलाते हुए दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा इसलिए बढ़ गया है क्योंकि यूक्रेन को इतने लंबे समय से झुकता न देख रूस का अहं चोट खा रहा है। हालांकि परमाणु हथियारों के दुष्परिणामों से दोनों देश अनजान नहीं हैं। इस युद्ध को चलते लंबा वक्त हो गया। इस तरह युद्धरत बने रहना खुद में एक असाधारण और अति-संवेदनशील मामला है, जो समूची दुनिया को विनाश एवं विध्वंस की ओर धकेलने जैसा है। ऐसे युद्ध विजेता एवं विजित दोनों ही राष्ट्रों को सदियों तक पीछे धकेल देगा, इससे भौतिक हानि के अतिरिक्त मानवता के अपाहिज और विकलांग होने का भी बड़ा कारण बनेगा। भारत इस समस्या का समाधान कूटनीति के रास्ते से देखना चाहता है। वह युद्ध का अंधेरा नहीं, शांति का उजाला चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक डर्टी बम शॉर्टहैंड है। इसे परमाणु-सुरक्षा अधिकारी रेडियोलॉजिकल डिस्पर्सल डिवाइस कहते हैं। यानी एक ऐसा उपकरण जो रेडियोधर्मी पदार्थों को फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें आमतौर पर डायनामाइट जैसे अहम विस्फोटकों के साथ किसी भी तरह के रेडियोधर्मी कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। ये विस्फोट करने पर मलिनता या गंदगी फैलाते हैं। इन्हें आतंक फैलाने के हथियार के तौर पर भी देखा जाता है। इस तरह से ये आतंक फैलाने के साथ ही आर्थिक नुकसान करने के लिए जाने जाते हैं। इसमें परमाणु हथियारों की ऊर्जा या विनाशकारी क्षमता दूर-दूर तक नहीं होती। यह संभावना भी नहीं है कि एक डर्टी बम के विकिरण की पर्याप्त मात्रा सेहत पर तत्काल असर डाले या बड़ी संख्या में लोगों की मौत की वजह बने। फिर भी विनाश के तीक्ष्ण वार के रूप में इसका इस्तेमाल घातक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विगत लम्बे दौर से दोनों देशों के बीच घातक एवं विनाशक हथियारों का लगातार प्रयोग होने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि दुनिया में आर्थिक असंतुलन बढ़ रहा है, महंगाई बढ़ रही है। करीब दो हफ्ते पहले यूक्रेन की ओर से किए गए एक बड़े हमले के जवाब में रूस जिस तरह यूक्रेन के शहरों को निशाना बना कर हमले कर रहा है, उससे भारी तबाही की आशंका गहरी होती जा रही है। इन अशांत एवं युद्ध की स्थितियों से निजात दिलाने के लिये भारत लगातार प्रयासरत है। रूस ने जब यूक्रेनी शहरों पर, खासकर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए क्रूज मिसाइलें छोड़ीं तो भारत ने लड़ाई फैलने को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की थी। इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत में कहा था कि यह युद्ध का दौर नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इन सबके बावजूद तथ्य यह है कि शांति स्थापना के अब तक के सभी प्रयास नाकाम रहे हैं। आज यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध की कीमत कमोबेश पूरी दुनिया चुका रही है। इसलिए युद्ध बंद करने की कोई राह जल्द से जल्द निकालने की कोशिशों को सभी संबद्ध पक्षों द्वारा पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है। मोदी दोनों देशों के नेताओं से बातचीत करके आपसी संवाद के जरिए समाधान निकालने की सलाह दे चुके हैं। समरकंद में शंघाई शिखर सम्मेलन के दौरान जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात हुई तब भी उन्होंने यह बात कही थी। उस वक्त पुतिन ने उनकी सलाह पर अमल का भरोसा भी जताया था। मगर उसके कुछ दिन बाद ही रूस ने यूक्रेन पर भारी हमले शुरू कर दिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वयं को एक महाशक्ति मानने वाला रूस चाहता है कि यूक्रेन आत्मसमर्पण कर दे, मगर वह झुकने को तैयार नहीं। दरअसल, सोवियत संघ टूटने के बाद यूक्रेन ने रूस से अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान कायम की थी। अब वह यूरोपीय देशों के संगठन नाटो का सदस्य बन कर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। रूस को लगता है कि अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन गया, तो यूरोपीय सेनाएं उसकी सरहद पर आ खड़ी होंगी। इसलिए उसने यूक्रेन पर यह सदस्यता न लेने का दबाव बनाया। यूक्रेन नहीं माना, तो रूस ने उस पर हमला कर दिया। हालांकि इस मसले को आपस में मिल-बैठ कर भी सुलझाया जा सकता था, मगर दोनों अपनी जिद पर अड़े हुए हैं और दुनिया तबाही देख रही है। यथार्थ यह है कि अंधकार प्रकाश की ओर चलता है, पर अंधापन मृत्यु-विनाश की ओर।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन रूस ने अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य का अहसास एक गलत समय पर गलत उद्देश्य के लिये करवाया है। इस युद्ध से होने वाली तबाही रूस-यूक्रेन की नहीं, बल्कि समूची दुनिया की तबाही होगी, क्योंकि रूस परमाणु विस्फोट करने को विवश होगा, जो दुनिया की बड़ी चिन्ता का सबब है। बड़े शक्तिसम्पन्न राष्ट्रों को इस युद्ध को विराम देने के प्रयास करने चाहिए। जब तक रूस के अहंकार का विसर्जन नहीं होता तब तक युद्ध की संभावनाएं मैदानों में, समुद्रों में, आकाश में तैरती रहेगी, इसलिये आवश्यकता इस बात की भी है कि जंग अब विश्व में नहीं, हथियारों में लगे। मंगल कामना है कि अब मनुष्य यंत्र के बल पर नहीं, भावना, विकास और प्रेम के बल पर जिएं और जीते।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-ललित गर्ग(वरिष्ठ लेखक एवंस्वतंत्र टिप्पणीकार)</strong></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Nov 2022 10:01:54 +0530</pubDate>
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                <title>रूस द्वारा परमाणु हथियारों के प्रयोग का खतरा नहीं : व्हाइट हाउस</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका को डोनबास सैन्य अभियान के बीच रूस के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा बढ़ने की आशंका नहीं है। जब साकी से एक प्रेस वार्ता के दौरान पूछा गया कि क्या रूस द्वारा परमाणु हथियारों के उपयोग का खतरा है, तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/no-threat-of-russia-using-nuclear-weapons-white-house/article-31098"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/jen-psaki.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका को डोनबास सैन्य अभियान के बीच रूस के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा बढ़ने की आशंका नहीं है। जब साकी से एक प्रेस वार्ता के दौरान पूछा गया कि क्या रूस द्वारा परमाणु हथियारों के उपयोग का खतरा है, तो उन्होंने कहा, “इस समय हम इस संबंध में कोई बढ़ा हुआ खतरा नहीं देख रहे हैं।” उन्होंने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि अमेरिका यूक्रेन के शरणार्थियों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, हालांकि इनके ज्यादातर यूरोप में ठहरने की उम्मीद जताई जा रही है। एक पत्रकार द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका यूक्रेन से शरणार्थियों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, साकी ने कहा, “हम हैं, लेकिन हम निश्चित रूप से इस बात की उम्मीद जता रहे हैं कि इनमें से बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन कई आसपास स्थित यूरोपीय देशों में जाना चाहेंगे।”</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 10:50:11 +0530</pubDate>
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                <title>परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है भारत : श्रृंगला</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को कहा कि उनका देश परमाणु हथियार मुक्त विश्व का पक्षधर है और परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध भी है। श्रृंगला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘सामूहिक विनाश के हथियारों का अप्रसार: व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि’ विषय पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/india-committed-to-the-goal-of-complete-abolition-of-nuclear-weapons/article-27265"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/harsh-vardhan-shringla.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को कहा कि उनका देश परमाणु हथियार मुक्त विश्व का पक्षधर है और परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध भी है। श्रृंगला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘सामूहिक विनाश के हथियारों का अप्रसार: व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि’ विषय पर अपने संबोधन में कहा कि भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में वैश्विक प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाई है तथा वह पहला देश है , जिसने 1954 में परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लगाने और 1965 में परमाणु हथियारों के अप्रसार पर एक गैर-भेदभावपूर्ण संधि का आह्वान किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत परमाणु हथियार मुक्त विश्व के लक्ष्य और परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि इस लक्ष्य को एक सार्वभौमिक प्रतिबद्धता और एक सहमत वैश्विक और गैर-भेदभावपूर्ण बहुपक्षीय ढांचे के तहत चरणबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया जा सकता है, जैसा कि 2006 में परमाणु निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत प्रपत्रों में इसका उल्लेख है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों में प्रमुख भागीदार भारत ने वैश्विक परमाणु सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में सक्रिय रूप से समर्थन और योगदान दिया है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 28 Sep 2021 09:54:09 +0530</pubDate>
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                <title>वॉशिंगटन पोस्ट: भारत-चीन दोनों के पास एटमी हथियार, जंग का खतरा बहुत बड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। वॉशिंगटन पोस्ट ने गुरुवार को एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स के हवाले से कई जानकारियां दी गई हैं। सिक्किम के डोकलाम में भारत और चीन के बीच दो महीने से जारी विवाद के बीच अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>वॉशिंगटन पोस्ट ने गुरुवार को एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स के हवाले से कई जानकारियां दी गई हैं। सिक्किम के डोकलाम में भारत और चीन के बीच दो महीने से जारी विवाद के बीच अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच जंग का खतरा इस बार सबसे ज्यादा बड़ा है। दोनों ही देशों के पास एटमी हथियार हैं और इन दोनों के बीच एक छोटा देश भूटान भी फंस गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ‘दुनिया का ध्यान अभी नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच जारी तनाव पर ज्यादा है। चीन जिस इलाके में सड़क बना रहा है, उसे वो अपना बता रहा है जबकि भारत का करीबी दोस्त उस जमीन पर अपना दावा पेश करता है। चीन का सरकारी मीडिया भारत को रोज घुसपैठिया बताकर धमकी दे रहा है। भारत से कहा जाता है- अगर इलाके में शांति रखनी है तो भारत को डोकलाम के इलाके से फौज हटानी ही होगी।’</p>
<h2> 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच बड़ा विवाद</h2>
<p>अखबार के मुताबिक- चीन ये दावा करता है कि भारत ने उसकी सीमा में घुसपैठ की है। जबकि, भारत का कहना है कि चीन ट्राइजंक्शन में रोड बनाकर उसकी सिक्युरिटी के लिए खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ‘भारत और चीन के बीच 2220 मील लंबी बॉर्डर है और इसके ज्यादातर हिस्से पर दोनों देशों में विवाद है। हालांकि, गोलियां किसी भी तरफ से नहीं चलतीं। हाल की दिनों में दोनों देशों के रिश्ते काफी खराब हुए हैं। चीन भारत को उसकी सिक्युरिटी के लिए खतरा बताता है। इन दोनों देशों के बीच भूटान भी आता है।</p>
<p>रॉयल यूनाईटेड सर्विसेस इंस्टीट्यूट लंदन के एनालिस्ट शशांक जोशी के मुताबिक, ‘तनाव नहीं बढ़ेगा, ये कहना बेहद मुश्किल है। 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच कोई विवाद इतना बड़ा हो गया है। दोनों मुल्क दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी रखते हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2017 04:43:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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