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                <title>women - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Bribe: फिल्लौर में रिश्वत लेते महिला सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फिल्लौर में तैनात महिला उप निरीक्षक अमनदीप कौर को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/female-sub-inspector-arrested-for-taking-bribe-in-phillaur/article-86651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/female-arrest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फिल्लौर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Phillaur News: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फिल्लौर में तैनात महिला उप निरीक्षक अमनदीप कौर को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी पुलिस अधिकारी पर चौधरियां मोहल्ला, फिल्लौर निवासी राज रानी से रिश्वत लेने का आरोप है। राज रानी कथित तौर पर घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) हैप्पी की माता हैं और यह रिश्वत एक आधिकारिक मामले के संबंध में मांगी और ली गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">फिल्लौर के पुलिस उप अधीक्षक भारत मसीह ने रविवार को मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने डीएसपी विजिलेंस अश्विनी कुमार के नेतृत्व में कार्रवाई की। शिकायत और प्राप्त सूचना के आधार पर टीम ने जाल बिछाकर महिला सब-इंस्पेक्टर को कथित तौर पर रिश्वत की राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">विजिलेंस अधिकारियों ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरु कर दी है। ब्यूरो इस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इस प्रकरण में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। आरोपी महिला अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2025-04/female-arrest.jpg" alt="Female-Arrest" width="900" height="543"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 19:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब महिलाओं की स्वास्थ्य जांच और उपचार का पूरा रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं को बेहतर, व्यवस्थित और एक ही स्थान पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-complete-records-of-womens-health-checkup-and-treatment-will/article-85603"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/health-checkup.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ/पवन कुमार)।</strong> Sirsa News: महिलाओं को बेहतर, व्यवस्थित और एक ही स्थान पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। राज्य सरकार की स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार योजना के तहत अब नागरिक अस्पताल में आने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य संबंधी पूरा रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और 29 मई से योजना का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। योजना के तहत नौ वर्ष से 60 वर्ष तक की महिलाओं का स्वास्थ्य डाटा एसएनएसपी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सुरक्षित रहेगी और भविष्य में उपचार व निगरानी में आसानी होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नागरिक अस्पताल सहित प्रदेश के सात अस्पतालों में इस योजना की शुरूआत की जा रही है, जिसका शुभारंभ शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा द्वारा किया जाएगा। नागरिक अस्पताल स्थित पीपीसी कक्ष को महिलाओं की विशेष ओपीडी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस कक्ष को गुलाबी रंग की थीम में तैयार किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को सहज और अनुकूल वातावरण मिल सके। यहां महिलाओं को काउंसलिंग, स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाई जाएगी। </p>
<h4 style="text-align:justify;">महिलाओं के स्वास्थ्य स्तर में आएगा सुधार: डॉ. राजेश चौधरी </h4>
<p style="text-align:justify;">उप सिविल सर्जन डॉ. राजेश चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एसएनएसपी पोर्टल शुरू किया गया है। इसके माध्यम से अस्पताल में आने वाली महिलाओं की जांच, उपचार और स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां आॅनलाइन दर्ज की जाएंगी। उन्होंने बताया कि पीपीसी कक्ष में रोस्टर प्रणाली के तहत प्रतिदिन दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाएगी, ताकि महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">विभाग का उद्देश्य महिलाओं को अलग, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस योजना के लागू होने से महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी संभव हो सकेगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें समय रहते उचित उपचार और परामर्श भी उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य स्तर में सुधार आएगा।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/health-checkup.jpg" alt="Health Checkup" width="1280" height="720"></img>
सांकेतिक फोटो
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 19:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Women : अपराधों में महिलाओं की संलिप्तता चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[Women: विभिन्न राज्यों में मादक पदार्थों की तस्करी सहित कई अन्य अपराधों में महिलाओं की संलिप्तता, बेहद चिंता का विषय है। महिला तस्करों को गिरफ्तार कर उन पर मामला दर्ज करना कोई स्थायी समाधान नहीं है। समाज को दिशा देने व बच्चों के लालन-पालन में महिला की अहम भूमिका रहती है। यदि कोई महिला गैरकानूनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-involvement-of-women-in-crimes-is-worrying/article-49155"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/five-naxalites-including-two-women-killed-in-maharashtra.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Women: विभिन्न राज्यों में मादक पदार्थों की तस्करी सहित कई अन्य अपराधों में महिलाओं की संलिप्तता, बेहद चिंता का विषय है। महिला तस्करों को गिरफ्तार कर उन पर मामला दर्ज करना कोई स्थायी समाधान नहीं है। समाज को दिशा देने व बच्चों के लालन-पालन में महिला की अहम भूमिका रहती है। यदि कोई महिला गैरकानूनी गतिविधियों और अपराधों में शामिल है तो स्वाभाविक है कि उसका समाज व परिवार में प्रतिकुल प्रभाव पड़ता है। खुद अपराध में संलिप्त होने वाली महिलाओं के बच्चे भी आगे अपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। महिलाओं के स्वभाव में हिंसा, नम्रता और सम्मान की भावना अधिक होती है, यही भारतीय महिलाओं की महानता है। Woman smuggler</p>
<p style="text-align:justify;">स्वाभाविक रूप से, महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम अहिंसक और सहनशील होती हैं। प्राचीन काल से ही हथियारों और नशीली दवाओं का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में बहुत कम है, लेकिन बदल रही परिस्थितियों में महिलाओं का अपराधों में शामिल होना खतरनाक साबित होगा। आजकल हेरोइन तस्करी से लेकर बैंक डकैतियों में महिलाओं का नाम शुमार है। हाल के दिनों में लुधियाना में हुई करोड़ों की डकैती में एक महिला का नाम सामने आया। साइबर धोखाधड़ी में महिलाएं गिरफ्तार हो रही हैं। इसी तरह कई हत्याओं के लिए महिलाओं को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। Women</p>
<p style="text-align:justify;">अपराध में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने का एक कारण इनका मासूम चेहरा है। मासूम चेहरे के चलते इन पर किसी का शक नहीं जाता। ऐसे में इनका काम आसान हो जाता है। पुलिस के लिए भी कई बार ऐसे मामलों को खोलना चुनौती से कम नहीं रहता। दरअसल, महिला से पूछताछ करना आसान नहीं होता। कानून की भाषा में जिक्र केवल सजा तक ही सीमित है, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या समाज में इस बड़ी गिरावट के साथ भविष्य में अपराधों का ग्राफ कितना ऊपर जा सकता है, इस पर कहीं कोई चर्चा नहीं है। Woman smuggler</p>
<p style="text-align:justify;">यदि कोई महिला खुद ही अपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाती है तो वह अपने बच्चों को क्या शिक्षा देगी और इससे समाज की किस हद तक बदहाली होगी इसका भी अंदाजा लगाना मुश्किल है। यह भी सच है कि देश के नेताओं को केवल भौतिक उपलब्धियों को ही देश का विकास न मानकर समाज में सदगुणों के विकास को ही समाज की प्रगति का वास्तविक मापदंड मानना चाहिए। अपराधी महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी, फिर ही समाज सही दिशा में आगे बढ़ सकेगा। Women</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2023 14:20:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज को सोच बदलनी होगी</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह अमेरिका के न्यूयार्क से झकझोर देने वाली खबर वायरल हुई, जिसमें एक प्रवासी पंजाबी महिला मनदीप कौर ने पहले रो-रो कर अपना दर्द सुनाया और बाद में खुदकुशी कर ली। दो बेटियों की मां मनदीप अपने पति-सास व अन्य ससुरालियों से घरेलू हिंसा का शिकार होती रही, जिसमें मारपीट, बेटा नहीं होने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/society-has-to-change-the-thinking-for-the-safety-of-women/article-36437"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/atrocities-on-women.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले सप्ताह अमेरिका के न्यूयार्क से झकझोर देने वाली खबर वायरल हुई, जिसमें एक प्रवासी पंजाबी महिला मनदीप कौर ने पहले रो-रो कर अपना दर्द सुनाया और बाद में खुदकुशी कर ली। दो बेटियों की मां मनदीप अपने पति-सास व अन्य ससुरालियों से घरेलू हिंसा का शिकार होती रही, जिसमें मारपीट, बेटा नहीं होने के ताने, अपमान उसने झेला और कोशिश की कि उसकी वैवाहिक जिंदगी एक दिन सुकून भरी हो जाएगी, परन्तु आखिर वह घर में हो रही प्रताड़ना से हार गई और आत्महत्या कर ली। भारत में महिलाओं के साथ यह बड़ी त्रासदी है कि वह आए दिन घरेलू हिंसा का शिकार होकर भी अपने वैवाहिक रिश्तों को खत्म नहीं करती और जान दे देती हैं। दहेज, बेटा नहीं होना, पति द्वारा नशे करना, पति के अन्य औरतों से सम्बन्ध होना, पत्नी को घर की नौकरानी समझना, घर के बड़े-छोटे फैसलों से उन्हें दूर रखना, शादीशुदा बेटियों का अपने मायके परिवार में दखलदांजी रखना, सास द्वारा अपनी बहुओं की तुलना दूसरी औरतों से करते रहना, बहुओं को उनके मायके की छोटी-मोटी बातें सुना-सुना ताने देना जैसी घरेलू हिंसा की लम्बी फेहरिस्त है, जिसे समाज शिक्षित होकर भी अपने जीवन से हटा नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">नतीजा हर साल सैकड़ों हजारों औरतों की जान इन उत्पीड़क आदतों के चलते चली जाती है। अभी मनदीप की आत्महत्या पर पूरा समाज उबल रहा है, आत्महत्या के लिए जिम्मेवार उसके पति को जेल भेजने की कोशिशों में जुटा हुआ है। लेकिन यहां हजारों-लाखों घर अपनी बहुओं के लिए आज भी जेल बने हुए हैं, उनका सुधार किया जाना भी बेहद जरूरी है। आज के इस दौर में ही नहीं सदा से ही स्त्री एवं पुरूष समान हैं और आगे भी समान ही रहेंगे, जब तक कि मानव जीवन का अस्तित्व है परन्तु समाज की सोच ने पहले भी व अब भी स्त्री को कमजोर बनाकर रखा हुआ है। घरों में बेटियों को जितना प्यार दिया जाता है वैसा ही प्यार बहुओं को भी दिया जाए। तलाक भले ही बुरा है, लेकिन जिन घरों में बहुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं होता वहां बेहिचक, बिना सामाजिक मान-सम्मान की परवाह किए तलाक लिया जाना अच्छा है बजाय इसके कि वर्षों-वर्ष हिंसा, अपमान, भेदभाव बर्दाश्त किया जाए। मानव जीवन बेशकीमती है इसकी परवाह की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अफसोस है कि जैसे-जैसे समाज शिक्षित एवं समृद्ध हो रहा है, बच्चों व महिलाओं के साथ हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। बच्चे व महिलाएं समाज में आश्रित होने के चलते पुरूषों द्वारा या परिवार के अन्य महिला सदस्यों के द्वारा शारीरिक एवं मानसिक हिंसा को बर्दाश्त करते रहते हैं। आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज का आत्मिक विकास नहीं हो पा रहा। करूणा, प्रेम, दया, सद्भाव, सम्मान, हर प्राणी के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। समाज को आत्मिक तौर पर शिक्षित होना होगा। कमजोरों पर हिंसा कायर लोगों का काम है। हिंसा सहने वालों को भी हिम्मत सिखाई जाना जरूरी है, ताकि समाज में बराबरी व शांति की स्थापना हो सके, बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज को अपनी सोच बदलनी होगी।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Aug 2022 10:05:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अभी भी महिला को बराबरी का दर्जा नहीं मिला: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिला सशक्तीकरण पर बल देते हुए कहा है कि महिलाओं में हिम्मत और काबिलियत हैं लेकिन अभी भी उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिला हैं और देश पुरुष प्रधान माना जाता है। गहलोत रविवार को आॅनलाइन राज्य महिला नीति 2021 के लोकार्पण के अवसर पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/women-still-not-got-equal-status-gehlot/article-22830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/ashok-gehlot-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिला सशक्तीकरण पर बल देते हुए कहा है कि महिलाओं में हिम्मत और काबिलियत हैं लेकिन अभी भी उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिला हैं और देश पुरुष प्रधान माना जाता है। गहलोत रविवार को आॅनलाइन राज्य महिला नीति 2021 के लोकार्पण के अवसर पर महिला सम्मेलन को संबोधत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमरीका में संविधान बनने के 144 साल बाद महिलाओं को वोट का अधिकार मिला, इंग्लैंड में संविधान बनने के सौ साल बाद महिलाओं को मताधिकार का अधिकार मिला जबकि भारत में संविधान बनने के साथ ही महिलाओं को बराबरी के अधिकार मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में हमारा देश आगे रहा लेकिन फिर भी दुभार्ग्य है कि जिस तरह महिलाओं को आगे आना चाहिए था वैसे नहीं हो सका। हालांकि कई महिलाओं ने देश दुनियां में नाम किया, इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। आज भी महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">महिला शिक्षा पर सरकार का बड़ा जोर</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने महिला शिक्षा पर जोर दिया है। वह जब पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने तब हालात खराब थे,अब काफी आगे बढ़े हैं। सरकार ने निर्णय लिया है कि जहां स्कूल में 500 बच्चियां पढ़ती हो वहां महिला कालेज खोल दिया जाये। महिला शिक्षा पर सरकार का बड़ा जोर हैं, हम सब चाहते हैं कि महिलाओं का सशक्तीकरण हो। उन्हें प्रौत्साहन मिले,बराबरी का सम्मान मिले।</p>
<h4 style="text-align:justify;">महिलाओं को लेकर सोच बदलनी होगी</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने शिशु मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर पर जोर देने की जरुरत बताते हुए कहा कि इसमें कमी लानी होगी। सरकार इस दिशा में पूरी ताकत लगा रही। समाज से लेकर घर तक में महिलाओं को लेकर सोच बदलनी होगी। सेनेटरी नैपकिन के उपयोग को लेकर सोच बदल रही है, शहरों में माहौल ठीक है, गांव में माहौल बदलना होगा और इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ता, गैर सरकारी संगठनों एवं जागरुक महिलाओं को आगे आना होगा। घूंघट में महिला जीवनभर कैद रहे कहां तक न्यायसंगत है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">महिलाओं के प्रति भेदभाव नहीं हो</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ने देश में शासन में भी महिलाओं को भागीदारी मिली और उनमें काबिलियत भी है लेकिन अभी भी उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिला और अभी भी देश पुरुष प्रधान माना जाता है। उन्होंने कहा कि घूंघट की प्रथा के प्रति सोच बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति भेदभाव नहीं हो और वह चाहे किसी भी धर्म एवं जाति की हो, आगे आये और शासन में भागीदारी निभाये तभी महिला का सशक्तीकरण होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">लॉकडाउन में लोगों को बहुत हुई थी तकलीफ</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में हमने बालिका नीति बनाई थीं। आज की महिला नीति में बालिका नीति को एकीकृत किया गया है। इस नीति में हमारे कार्यक्रम सरकार की सोच बताते हैं और यह महिलाओं के लिए नई क्रांति जैसी होगी। उन्होंने कोरोना का जिक्र करते हुए इसके प्रति सावधानी बरतने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना टीका लगने के बाद भी कोविड हो सकता, कोरोना की रफ्तार दोगुनी और मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। लॉकडाउन में लोगों को बहुत तकलीफ हुई थी, हमने लोगों की मदद में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Apr 2021 16:22:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जब महिलाओं के हक में पास हुआ यूएन में प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 25 नवंबर को महिलाओं के विरुद्ध हिंसा खत्म करने वाले दिन के रूप में घोषित किया हुआ है। यूएन का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा मानवाधिकार का उल्लंघन है और इसके पीछे की वजह महिलाओं के साथ भेद भाव है। संयुक्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/when-the-proposal-for-un-passed-in-favor-of-women/article-20121"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/womens-equality-day-education-security-equality-and-freedom-are-the-most-important-issues.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 25 नवंबर को महिलाओं के विरुद्ध हिंसा खत्म करने वाले दिन के रूप में घोषित किया हुआ है। यूएन का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा मानवाधिकार का उल्लंघन है और इसके पीछे की वजह महिलाओं के साथ भेद भाव है। संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मामला शिक्षा, गरीबी, एचआईवी और एड्स के अलावा सुरक्षा और शांति के साथ जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि सिर्फ गरीब और विकासशील देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों में महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं। वेबसाइट में अनुमान लगाया गया है कि विश्व की 70 फीसदी महिलाओं ने अपने जीवनकाल में कभी न कभी हिंसा का सामना किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">डोमिनिकन गणराज्य की सामाजिक कार्यकर्ता तीन मीराबल बहनों की हत्या 1960 में इसी दिन कर दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों और गैरसरकारी संगठनों से अपील की है कि वे महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करें। पिछले साल अपने संदेश में यूएन महासचिव बान की मून ने कहा, दुनिया भर में लाखों महिलाओं और बच्चियों को प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें मारा जाता है, उनका बलात्कार होता है और यहां तक कि उनकी हत्या कर दी जाती है। यह सब मानवाधिकारों का हनन है। हमें मूल रूप से भेद भाव करने वाली संस्कृति का विरोध करना चाहिए, जिससे हिंसा होती है। इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, मैं सभी सरकारों से अपील करता हूं कि वे महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हर तरह की हिंसा को खत्म करने का प्रयत्न करें। मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि इस अहम लक्ष्य को पूरा करने में वे मदद करें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Nov 2020 10:25:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं की सुरक्षा करनी होगी अन्यथा विकट होगा भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[हाथरस घटना में नित नये खुलासे हो रहे हैं। दलित युवती के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद उपजी स्थितियों ने मामले को बहुत गंभीर बना दिया है। इस घटना की आड़ में जातीय हिंसा फैलाने के षडयंत्र का खुलासा भी यूपी पुलिस ने किया है। जस्टिस फॉर हाथरस नाम की एक फर्जी वेबसाइट रातों-रात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/women-will-have-to-be-protected-otherwise-the-future-will-be-critical/article-19277"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/when-will-stop-torture-against-women.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाथरस घटना में नित नये खुलासे हो रहे हैं। दलित युवती के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद उपजी स्थितियों ने मामले को बहुत गंभीर बना दिया है। इस घटना की आड़ में जातीय हिंसा फैलाने के षडयंत्र का खुलासा भी यूपी पुलिस ने किया है। जस्टिस फॉर हाथरस नाम की एक फर्जी वेबसाइट रातों-रात बनाई गई। जिसके जरिए दिल्ली दंगों की तर्ज पर सांप्रदायिक दंगे कराने की साजिश रची जा रही थी। मीडिया के एक वर्ग ने टीआरपी और निजी हितों के चलते तमाम मनगढंत तथ्य असल घटना के साथ जोड़कर देश के सामने पेश किये। वहीं स्थानीय पुलिस और प्रशासन की लापरवाह कार्यशैली ने मामले को बिगाड़ने का काम किया। इस मामले में जमकर राजनीति हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती के साथ दुष्कर्म हुआ या नहीं ये तो जांच का विषय है। लेकिन किसी सभ्य समाज में किसी महिला का अपमान व मारपीट का कोई स्थान नहीं हो सकता। देश में महिला सुरक्षा के कई कानून हैं। जो समाज बेटियों की रक्षा नहीं कर सकता, उस समाज को अपने गिरेबान में झांककर जरूर देखना चाहिए। हाथरस में युवती के साथ जो हुआ, वो पीड़ादायक है। उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। देश में महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाएं घटने की बजाय बढ़ी हैं, ये जमीनी हकीकत है। किसी बड़े चैनल ने इस घटना को कवर नहीं किया। और न ही राजनीतिक दलों के नेताओं ने वहां जाने की जहमत ही उठाई। क्योंकि यहां अपराधी एक वर्ग विशेष का था। ऐसे में हाथरस में न्याय मांगने वाले राजनीतिक दलों को वोट बैंक के हिसाब से ये घटना रास नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में दुष्कर्म की घटनाओं को अगर आंकड़ों के आलोक में देखा जाए तो उनके अनुसार पिछले एक वर्ष में 33,658 दुष्कर्म की घटनाएं हुई। दुष्कर्म की घटनाओं के आंकड़ें इस ओर इशारा करते हैं कि बेटियों के लिये सुरक्षित माहौल हम अब तक बना नहीं पाये हैं। किसी के लिए ये आंकड़े और ब्यौरे हो सकते हैं, लेकिन हमारे लिए दरिंदगी की बारियां और गणनाएं हैं। हाथरस मामले में उप्र सरकार तथा स्थानीय पुलिस और प्रशासन जिस फजीहत का शिकार हुए उसके लिए वे खुद जिम्मेदार हैं। वास्तव में समाज को मिल बैठकर बेटियों की सुरक्षा की चिंता करनी होगी। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। वहीं मीडिया को ऐसे मामलों में टीआरपी खोजने की बजाय संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। पीड़ित को कानून के दायरे में शीघ्र न्याय मिलना चाहिए। अगर इन पर नकेल कसने के लिए अभी गंभीरता नहीं दिखाई गई तो भविष्य इससे भी विकट हो सकता है। मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Oct 2020 09:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं से दरिन्दगी और डावांडोल सरकारी प्रबंध</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक लड़की के साथ सामूहिक दुराचार और हत्या के मामले ने समाज को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। इससे खौफनाक और संवेदनहीनता का मामला तब सामने आया जब लड़की की मृत देह का अंतिम संस्कार भी पुलिस ने आधी रात को खेतों में ही कर दिया। पीड़ित परिवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/uncontrolled-government-management-for-women/article-18880"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/cruelty-against-women.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक लड़की के साथ सामूहिक दुराचार और हत्या के मामले ने समाज को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। इससे खौफनाक और संवेदनहीनता का मामला तब सामने आया जब लड़की की मृत देह का अंतिम संस्कार भी पुलिस ने आधी रात को खेतों में ही कर दिया। पीड़ित परिवार पुलिस पर दोष लगा रहा है कि पारिवारिक सदस्यों को मृतका का मुंह भी नहीं दिखाया गया। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। व्यवस्था अभी दबंग व बुरे का अंतर ढूंढने में लगी है। जातपात की जकड़ बहुत मजबूत बनी हुई है। अपराध करने का एक ही ढ़ंग बन गया है कि सबूत मिटाने के लिए हत्या कर दो और अपराधियों को भी यही डर था कि पीड़िता के बच जाने पर वह उनकी पोल खोल देगी। फिरौतियों के लिए बच्चे अगवा करने के मामलों में भी तो यही होता है ।</p>
<p style="text-align:justify;">अपहरणकर्त्ता बच्चों के आसपास के या जानकार ही होते हैं। बच्चों को समझ होती है और वह दोषियों का नाम ले सकते हैं, जिस कारण अपहरणकर्त्ता उनको मौत की नींद सुला देते हैं। एक अपराध की सजा से बचने के लिए दूसरा अपराध किया जाता है। पुलिस की कार्यवाही भी फिल्मी कहानियों की तरह चलती है। पुलिस बहुत बार समाज की आंखों में धूल झोंकने के लिए और कागजी कार्यवाही पूरी करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने का तरीका ऐसे अजमाती जैसे सब सच जान लिया है, परंतु पुलिस के सच अदालतों में अक्सर ही खुल जाते हैं। ऊपरी पहुँच वाले अपराधी अपनी मुसीबत टालने के लिए पुलिस का सहारा लेते हैं, जिस पुलिस ने अपराधियों को सजा दिलवानी होती है वही पुलिस अपराधियों का बचाव करने के लिए बहुत बार पीड़ित पक्ष के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह सख़्त से सख़्त कानून बन गए हैं लेकिन पुलिस के काम करने के तरीकों में अभी भी सुधार नहीं हो सका है।  अपराध का संबंध अपराधियों की मानसिकता के साथ होता है जिसे रोकना सामाजिक बदलावों की दरकार है परन्तु वर्तमान दौर में अपराधियों को दोष मुक्त साबित करवाना और पीड़ित की जुबान बंद करना कबीलाई युग का प्रमाण है। समाज को वहशियत से आजादी सिर्फ कानूनों से नहीं बल्कि व्यवस्था में समानता, सच्चाई और इंसानियत के संस्कार भरे जाने से ही मिल सकती है। बड़े अपराधी आजाद घूमते हैं और बेकसूरों को व्यवस्था की विडंबना की तपिश सहनी पड़ती है। हाथरस का मामला महिलाओं पर अत्याचार के साथ-साथ पुलिस की ओर से अपराधियों पर मेहरबानी का एक और काला अध्याय बन गया है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 02 Oct 2020 09:49:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ में सीएए के खिलाफ महिलाओं का धरना आज भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाओं का कहना है
 कि केंद्र सरकार के खिलाफ उनका गुस्सा एक दिन का नहीं बल्कि सालों का है जो सीएए और एनआरसी आने से फूट पड़ा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/women-protest-against-caa-in-lucknow-continues-today/article-12603"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/womencaa.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">भाजपा हिंदू मुसलमानों की एकता को तोड़ना चाहती है: प्रदर्शनकारी (protest Lucknow)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> दिल्ली के शाहीनबाग की तर्ज पर नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के घंटाघर में मुस्लिम महिलाओं का धरना आज रविवार को तीसरे दिन भी जारी है। महिलाओं के साथ काफी संख्या में बच्चे भी हैं जो रात भर ओस और पाले में धरने पर बैठे रहे । महिलाओं की मांगे है कि जब तक सरकार सीएए और एनआरसी के फैसले को वापस नहीं लेती तबतक वो वापस नहीं जायेंगी। दूसरी ओर पुलिस महिलाओं को हटाने का हर संभव प्रयास कर रही है। आरोप है कि महिलाएं सर्दी से बचने के लिए जो कंबल और सामान लाई थीं उसे शनिवार की देर रात छीना गया। कंबल छीने जाने के आरोप का पुलिस ने पूरी तरह खंडन किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश का सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी</h3>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि कुछ संगठन कंबल बांट रहे थे जिसे लेने बहुत से ऐसे पुरूष भी आ गये थे जिनका इस प्रदर्शन से लेना देना नहीं था । उन लोगों को वहां से हटाया गया । इसके अलावा प्रदर्शन स्थल को रस्से और डंडे से घेरा जा रहा था जिसे हटाया गया है। प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि केंद्र सरकार के खिलाफ उनका गुस्सा एक दिन का नहीं बल्कि सालों का है जो सीएए और एनआरसी आने से फूट पड़ा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">केंद्र सरकार जब तक इसे वापस नहीं लेती धरना और प्रदर्शन जारी रहेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">देश का सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी और महिलाओं के खिलाफ हिंसा है ।</li>
<li style="text-align:justify;">केंद्र सरकार इस पर ध्यान नहीं दे, हिंदू मुसलमानों की एकता को तोड़ना चाहती है।</li>
</ul>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 19 Jan 2020 15:45:44 +0530</pubDate>
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                <title>महिलाओं को आरक्षण का वादा निभाने में विफल रहे सभी दल</title>
                                    <description><![CDATA[औरंगाबाद (एजेंसी) महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र की 46 विधानसभा सीटों के लिए 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के वास्ते कुल 676 उम्मीदवारों में से केवल 30 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में है जिससे साफ पता चलता है कि एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों ने महिलाओं काे 33 प्रतिशत आरक्षण देने के वादे को नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/all-parties-failed-to-keep-the-promise-of-reservation-to-women/article-10830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/women.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>औरंगाबाद (एजेंसी) </strong>महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र की 46 विधानसभा सीटों के लिए 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के वास्ते कुल 676 उम्मीदवारों में से केवल 30 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में है जिससे साफ पता चलता है कि एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों ने महिलाओं काे 33 प्रतिशत आरक्षण देने के वादे को नहीं निभाया।</p>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मराठवाड़ा इलाके के आठ जिलों के सभी 46 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मिलाकर 30 महिला उम्मीदवार अपना किस्मत आजमा रही हैं जिनमें मान्यता प्राप्त दलों की आठ उम्मीदवार भी शामिल हैं। बाकी उम्मीदवार क्षेत्रीय दलों या फिर निर्दलीय अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2019 10:32:37 +0530</pubDate>
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                <title>अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरीं अफगानी महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका, जापान व भारत जैसे महिला सशक्तिकरण प्रभाव वाले देशों से सीख लेकर अफगानी महिलाओं ने भी बंदिशों की बेड़ियों को तोड़ने का निर्णय लिया है। अफगानिस्तान दशकों तक ‘तालिबानी आतंक’ से ग्रस्त रहा था। जब उनसे आजादी मिली तो महिलाएं दूसरी आतंरिक मुसीबतों से घिर गईं। आतंकवाद के अलावा अफगानी महिलाएं रुढ़िवादी और पुरूष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/afghani-women-on-the-streets-about-rights/article-8524"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/women.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका, जापान व भारत जैसे महिला सशक्तिकरण प्रभाव वाले देशों से सीख लेकर अफगानी महिलाओं ने भी बंदिशों की बेड़ियों को तोड़ने का निर्णय लिया है। अफगानिस्तान दशकों तक ‘तालिबानी आतंक’ से ग्रस्त रहा था। जब उनसे आजादी मिली तो महिलाएं दूसरी आतंरिक मुसीबतों से घिर गईं। आतंकवाद के अलावा अफगानी महिलाएं रुढ़िवादी और पुरूष प्रभुत्व की आड़ में होने वाली घरेलू हिंसा का भी सामना कर रही हैं। पर, इस समस्या से निजात पाने का तरीका वहां के कुछ महिला संगठनों ने खोजा है। मुल्क में पहली बार ऐसा हुआ है जब एक साथ हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरी हैं जो फिर से पनपते आतंकवाद और घरेलू हिंसा के खिलाफ नारी सशक्तिकरण को हथियार बनाकर आवाज बुलंद कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अफगान में जातीय और भाषाई समूह की तकरीबन पैंतीस सौ महिलाओं के एक संगठन ने संयुक्त रूप से वहां शांति की बहाली के मकसद से सड़कों पर मोर्चा निकालना शुरू किया है। यह मोर्चा पिछले एक माह से पूरे मुल्क में घूम-घूम कर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहा है। बुराईंयों के खिलाफ सड़कों पर उतरी अफगानी महिलाओं की मुहिम उन लोगों के लिए तमाचे से कम नहीं है जो उन्हें कमतर आंकते हैं। गैर इस्लामिक देशों की देखादाखी अब मुस्लिम मुल्कों की आधी आबादी में भी अपने अधिकारोें प्रति लड़ने की ललक जगने लगी है। महिलाओं का यह मोर्चा उन महिलाओं को संबल देगा, जो सदियों से बंदिशों की बेड़ियां तोड़ना चाहती थीं। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में महिलाओं को घरेलू समस्याओं व तालिबानी क्रूरता की भयावह का सामना दोबारा न करना पड़े, इसको ध्यान में रखकर ही महिलाओं ने मोचार्बंदी शुरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला सशक्तिकरण की ताकत से इस वक्त वहां रूढ़िवादी सोच वाले लोग सहमे हुए हैं। महिलाओं का इसके पीछे एक और मकसद है। दरअसल मुल्क में तालिबान आतंकियों की आहट एक बार फिर से सुनाई देने लगी है। ऐसा न हो इसके लिए महिलाओं ने खुद आगे आकर लोहा लेने का मन बनाया है जिसका उन्हें प्रत्यक्ष समर्थन भी लोगों का मिल रहा है। अफगानिस्तान इस वक्त फिलहाल तालिबान आतंकवाद से मुक्त है। मुल्क के लोग करीब दो दशकों से खुली फिजा में स्वतंत्र होकर सांस ले रहे हैं। बदलाव की बयार बहने लगी है। लड़कियां बिना किसी पाबंदी के स्कूल आने-जाने लगी हैं, महिलाएं अब वहां किक्रेट जैसे खेल खुलेआम खेलती दिखाई पड़ती हैं। जबकि वहां ऐसा करना मात्र सपने जैसा था।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दो आम चुनावों में कई महिलाएं प्रतिनिधि बनकर संसद में पहुंची हैं। लेकिन उनकी इस आजादी पर कुछ रूढ़िवादी सोच से ग्रस्त लोग ग्रहण लगाना चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि महिलाएं यह सब करें। लेकिन ऐसे लोगों को जवाब देने के लिए महिलाओं ने अब कमर कस ली है। महिलाओं द्वारा निकाले जा रहे मोर्चे का पूरे मुल्क में जनसमर्थन मिल रहा है। महिला सशक्तिकरण की यह मुहिम तालिबानी लोगों को भी अखरने लगी है। अपने स्तर से वह भी रोकने की भरसक कोशिशें कर रहे हैं।अफगानिस्तान में करीब उन्नीस साल पहले सत्ता से बेदखल हुई तालिबान हुकूमत फिर से अपने पैर पसारना चाहती है। लेकिन अब शायद ही वह अपने मंसूबों पर कामयाब हो। क्योंकि अब उनके लिए इतना आसान नहीं। अफगानिस्तान में अब नई सुबह का आगाज हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें भारत सरकार की अहम भूमिका है। एक वक़्त था, जब तालिबान का अफगानिस्तान पर राज था। मगर 2001 में अमरीकी हमले के बाद तालिबान सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। तालिबानी आतंकियों की अब कमर टूट चुकी है। उनका संगठन बिखर चुका है। अगर फिर भी उनका संगठन सिर उठाता है तो सवाल उठना स्वाभाविक होगा कि इतने सालों बाद आतंकी तालिबान संगठन इतना ताकतवर कैसे हुआ? इसके पीछे कौनसी शक्तियां हैं जो उन्हें ताकत देकर खड़ा करने का काम कर रही हैं। गौरतलब है कि अफगानिस्तान के नक़्शे पर सबसे पहले तालिबान का जन्म नब्बे के दशक में हुआ था। तब मुल्क में भयंकर गृह युद्ध छिड़ा हुआ था। तमाम ताकतवर कमांडरों की अपनी-अपनी सेनाएं थीं। सब देश की सत्ता में हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ रहे थे। उस दौरान सच्चाई सामने आई थी कि उन्हें पूरी शक्ति पीछे से पाकिस्तान दे रहा है। क्योंकि उस समय लड़ने के तालिबान को पाकिस्तान हथियार मुहैया करा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी ही कुछ संभावनाएं इस वक्त भी जताई जाने लगी हैं। अगर ऐसा होता है तो एकदम साफ है कि पाकिस्तान तालिबान को दोबारा से खड़ा करके भारत को घेरना चाहता है। क्योंकि भारत अफगानिस्तान को पिछले कुछ सालों से हर संभव सहयोग कर रहा है जो पाकिस्तान को अखर रहा है। खबरें कुछ ऐसी भी आई हैं कि तालिबान को पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन भी सहयोग कर रहा है। तालिबान एक कट्टरपंथी व चरमपंथी आतंकी संगठन है। उसकी सोच विभाजित करने वाली रही है। खून की नदियां बहाकर उन्होंने कभी अफगानिस्तान पर कब्जा किया था। उनके कार्यकाल में महिलाओं को घरों से निकलने की आजादी नहीं थी। लड़कियों का स्कूल जाना, महिलाओं का चुनाव लड़ना बहुत दूर की बात हुआ करती थी। उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा जुल्म महिलाओं पर हुए। तालिबानी आतंकी किसी के भी घर में घुसकर महिलाओं के साथ घिनौना कृत्य करते थे। मना करने पर सरेआम गोलियों से भून दिया जाता था। तालीम हासिल करने वाली बच्चियों को सड़कों पर नंगा करके कोड़ों से मारा जाता था। जुल्म की इंतेहां पार कर दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन उनकी सत्ता से बेदखली के बाद सबकुछ सामान्य हुआ। लड़कियां स्कूल जाने लगी, महिलाएं चुनाव लड़ने लगी। यूं कहें कि हर बंदिशों की बेड़ियों से आजाद हो गईं। तालिबानियों की दस्तक को भांपते हुए ही तमाम ‘अफगान महिला संगठनों’ ने सड़कों पर उतरने का निर्णय लिया है। तालिबान ने दो माह पहले अपनी आमदगी को लेकर ‘स्प्रिंग आॅफेंशिव’ का ऐलान कर चारों ओर खलबली मचा दी थी। तालिबान के नेता मुल्ला उमर की याद में इस आॅपरेशन का नाम ओमारी रखा गया। अफगान की मौजूदा सरकार ने इस स्थिति से लड़ने की लिए भारत से मदद की गुहार लगाई है। दरअसल अफगान दोबारा से आंतक की मंडी नहीं बनना चाहता। उसे अब खुली फिजा में सांस लेने की आदत हो गई है इसलिए वहां की आवाम फिर से बंदिशों की जंजीरों में जकड़ना नहीं चाहती।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>रमेश ठाकुर</strong></p>
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                <pubDate>Sat, 13 Apr 2019 13:54:04 +0530</pubDate>
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                <title>महिलाओं का विकास महज बातें क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[हर वर्ष की तरह इस बार भी महिला दिवस गुजर गया। महिला दिवस के दिन देश भर में महिलाओं के नाम की धूम रही। हर जगह महिला उत्थान की बातेंं होती रही। सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर महिलाओं के लिये देश भर में हर जगह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। केन्द्र व राज्यों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हर वर्ष की तरह इस बार भी महिला दिवस गुजर गया। महिला दिवस के दिन देश भर में महिलाओं के नाम की धूम रही। हर जगह महिला उत्थान की बातेंं होती रही। सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर महिलाओं के लिये देश भर में हर जगह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। केन्द्र व राज्यों की सरकार ने समाचार पत्रों में महिलाओं से सम्बन्धित बड़े-बड़े विज्ञापन देकर बताया कि सरकारें महिलाओं के विकास के लिये कितनी प्रयत्नशील हैं। राष्ट्रपति भवन सहित देश के अनेकों स्थानो पर विशिष्ठ कार्य करने वाली प्रतिभाशाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। दिन भर हर जगह महिलाओं के उत्थान की बातेंं, गाष्ठियां होती रहीं। महिला दिवस के दिन कई प्रदेशों की सरकारी बसो में महिलाओं को नि:शुल्क यात्रा करवाईं गयीं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला दिवस बीत जाने के बाद अब स्थिति पहले की तरह ही हो गयी है। आज फिर से महिलाओं को रेल, बस में वही पुरानी धक्का-मुक्की के बीच यात्रा करनी पड़ रही है। अखबारो, टेलीवीजन पर भी महिलाओं के स्थान पर पुरानी खबरें पूर्ववत छपने लगी। कल तक बढ़चढ़ कर महिला अधिकार की बातें करने वाले लोग देश अन्य मुद्दो में व्यस्त हो गये। मात्र एक दिन में ही महिला हित की बड़ी-बड़ी बातेंं करने वाले लोगों का उनके प्रति नजरिया बदल गया हैं। भारत में नारी को देवी के रूप में देखा गया है। उसके उपरान्त भी आज 21 वीं सदी में हमारे समाज में महिलाओं से भेदभाव का सिलसिला पूर्ववत जारी है। सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं को उनकी संख्या के अनुपात में नौकरियां नहीं दी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में ऐसा क्यों होता है कि हम एक दिन बड़ी-बड़ी बातें करके महिलाओं के साथ छलावा करते हैं। क्या ऐसा नही हो सकता कि महिला दिवस के दिन की जाने वाली बातें हम हर दिन करें। महिलाओं के प्रति हमारा रवैया हमेशा सकारात्मक बना रहे। हर दिन हम महिलाओं के विकास के प्रति प्रयत्नशील रहें। हम हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने में निरन्तर सहयोग करें ताकि साल में सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि साल का हर दिन महिलाओं को समर्पित हो।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में आज महिला हर क्षेत्र में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। देश के विकास में महिलाओं की भी उतनी ही भागीदारी है जितनी पुरूषों की है। केन्द्र सरकार में छ: महिला मंत्री हैं जो देश के विदेश, रक्षा सहित अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों को पूरी कुशलता के साथ संचालित कर रही हैं। देश की लोकसभा के संचालन की जिम्मेवारी भी महिला के पास हैं। देश की बेटियां सेना में लड़ाकू जहाज उड़ाने लगी है। सेना के तीनो अंगो सहित पुलिस व विभिन्न सुरक्षा बलो में महिलायें पूरी हिम्मत के साथ अपने दायित्व का निर्वहन कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तक देश के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अवसर नहीं मिलेगा तब तक देश में महिला शक्ति का समुचित उपयोग नहीं हो पायेगा। हमारे देश में महिलाओ को जब भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलता है तब वह पुरूषों से कहीं कम नहीं रहती हंै। हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम में महिलाओं का पुरूषों के बराबर ही योगदान है। पिछले कामनवेल्थ, एशियाड सहित अन्य अन्तरराष्ट्रीय खेलों में हमारे देश की महिला खिलाडिय़ों ने पुरूष खिलाडिय़ो के बराबर पदक जीत कर अपनी खेल क्षमता का परिचय दिया था। देश में महिलायें रेल, बस, ट्रक, टैक्सी, हवाई जहाज चलाते देखी जा सकती है। शिक्षा,स्वास्थ्य के क्षेत्र में तो महिलाओं का कार्य उल्लेखनीय है। इतना कुछ होने के बाद भी महिलाओं को अभी भी अपने अधिकारो के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाओं के हित की बातें तो सभी खूब करते हंै मगर उनको अधिकार देने की बात आते ही सभी पीछे खिसकने लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संसद व विधानसभाओ में महिलाओं को आरक्षण देने का बिल वर्षों से लम्बित पड़ा है। कोई भी राजनीतिक दल नहीं चाहता कि महिलाओं को संसद व विधानसभाओ में आरक्षण मिले। दस वर्षो के यूपीए नीत कांग्रेस सरकार व पांच वर्ष में एनडीए नीत भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास करवाकर लागू करवाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इससे पता चलता है कि महिलाओं को लेकर राजनीतिक दल कितने गम्भीर है। सभी दलो के नेताओ को इस बात का डर सताता है कि यदि महिलाओं को संसद में आरक्षण मिल गया तो उनका क्या होगा। इसी डर के कारण किसी भी दल के नेता महिला आरक्षण बिल को पास करवाने में रूची नहीं दिखाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक पैरामिलिट्री फोर्स के वार्षिक समारोह में इस बात को स्वीकार करते हुये अश्वासन भी दिया था कि देश के आन्तरिक सुरक्षा बलों में महिलाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी की जायेगी। निजी क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की संख्या भी कोई उत्साहजनक नहीं हैं। निजी क्षेत्रो की संस्थानो में काम करने वाली महिलाओं को पुरूषों की तुलना में कमतर आंका जाता है। आज यदि कोई महिला हवाई जहाज, रेल बस, कार चलाती है तो वह समाचारपत्रों में सुर्खियां बन जाती है। इसका कारण एक ही है कि इन क्षेत्रो में काम करने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश की अधिकांश महिलाओं को आज भी इस बात का पता नहीं है कि महिला दिवस कब आता है व इसका मतलब क्या होता है। हमारे देश की अधिकतर महिलायें तो अपने घर-परिवार में इतनी उलझी होती हैं कि उन्हे दुनियादारी से मतलब ही नहीं होता है। कहने को तो इस दिन सम्पूर्ण विश्व की महिलाएं देश, जाति, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से परे एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं। मगर हकीकत में यह दिन बड़ी-बड़ी बातें करने तक ही सिमट कर रह जाता है। अब हमें महिलाओं के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। महिलाओं को सिर्फ घर का काम करने से आगे लाकर उन्हे परिवार के हर निर्णय, सलाह, मशविरा में शामिल कर परिवार के प्ररक की भूमिका देनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर अधिकार है। वे देश की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती है तथा विकास में भी आधी भागीदार है। इस बात को कतई नहीं नकारा जा सकता की आज के आधुनिक युग में महिला पुरुषों के साथ ही नहीं बल्कि उनसे दो कदम आगे निकल चुकी है। महिलाओं के बिना दिनचर्या की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारतीय संविधान के अनुसार महिलाओं को भी पुरुषों के समान जीवन जीने का हक है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं के लिए नियम-कायदे और कानून तो खूब बना दिये हैं किन्तु उन पर हिंसा और अत्याचार की घटनाओ में अभी तक कोई कमी नहीं आई है। भारत में 70 फीसदी महिलाएं किसी न किसी रूप में कभी न कभी हिंसा का शिकार होती हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार, हिंसा की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। देश को आजाद हुये कई वर्ष बीत जाने के उपरान्त भी महिलायें अभी तक स्वंय को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है। महिलायें आज भी अपनी मान मर्यादा की रक्षा को लेकर संघर्षरत नजर आती है। जब तक देश के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अवसर नहीं मिलेगा तब तक देश में महिला शक्ति का समुचित उपयोग नहीं हो पायेगा। हमारे देश में महिलाओ को जब भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलता है तब वह पुरूषों से कही कम नहीं रहती है। अब महिलाओं को समझना होगा कि आज समाज में उनकी दयनीय स्थिति समाज में चली आ रही परम्पराओं का परिणाम है। इन परम्पराओं को बदलने का बीड़ा स्वयं महिलाओं को ही उठाना होगा। जब तक महिलायें स्वयं अपने सामाजिक स्तर व आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं करेगी तब तक समाज में उनका स्थान गौण ही रहेगा।<br />
<strong>रमेश सर्राफ धमोरा</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 12 Mar 2019 20:14:36 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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