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                <title>बंद होने के कगार पर और भी कई कंपनियां</title>
                                    <description><![CDATA[बैंकों द्वारा ब्याज के दबाव से बढ़ेंगी मुश्किलें आरबीआई, वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र, नहीं मिला जवाब गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। एनसीआर चैम्बर ऑफ़ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्री के अध्यक्ष एचपी यादव ने कहा कि आज भी लघु तथा मध्यम उद्योग कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं से जूझ रहे हैं। अनेकों कम्पनियां तथा व्यवसाय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/many-more-companies-on-the-verge-of-closure/article-18849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/many-more-companies-on-the-verge-of-closure-2.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>बैंकों द्वारा ब्याज के दबाव से बढ़ेंगी मुश्किलें</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>आरबीआई, वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र, नहीं मिला जवाब</h4>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)</strong>। एनसीआर चैम्बर ऑफ़ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्री के अध्यक्ष एचपी यादव ने कहा कि आज भी लघु तथा मध्यम उद्योग कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं से जूझ रहे हैं। अनेकों कम्पनियां तथा व्यवसाय बन्द हो चुके हैं और बाकी बन्दी के कगार पर खड़ी हैं। ऐसे समय में बैकों/गैर बैंकिग संस्थानों तथा ऋण प्रदान करने वाले संस्थानों द्वारा ऋण स्थगन (मोरोटोरियम) की अवधि समाप्त होते ही लघु तथा मध्यम उद्योगों पर पहले से मार झेल रहे लघु एवं मध्यम उद्योगों पर अब ब्याज तथा किश्त के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। यह उद्योग जगत के हित में नहीं है। एचपी यादव के अनुसार कोरोना महामारी के उपरान्त सभी लघु तथा मध्यम उद्योग अपने अस्तित्व को बचाने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में स्थगन अवधि (मोरोटोरियम) को समाप्त कर बैंकों द्वारा उद्योगों (विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्योगों) पर ब्याज तथा किश्त जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में पहले से ही बदहाल उद्योगों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। अनेकों उद्योग बन्द हो जायेंगे। जिससे हमारे क्षेत्र में भारी बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत योजना के अन्तर्गत अनेकों आर्थिक सहायता संबंधित योजनाओं की घोषणा की, परन्तु सभी सरकारी गैर सरकारी बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान तथा ऋण प्रदान करने वाली संस्थाएं भारत सरकार की घोषणओं को अपने सुविधा के अनुसार परिवर्तन करके उद्योगों के हित में क्रियान्वयन नहीं कर रही हैं। एचपी यादव के मुताबिक उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, सूक्ष्म लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्रालय के मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर जानकारी मांगी। किसी ने भी जवाब नहीं दिया।</h6>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Sep 2020 20:07:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हरियाणा आएंगी दो बड़ी कंपनियां, सरकार से मांगी 350 एकड़ जमीन</title>
                                    <description><![CDATA[इलेक्ट्रानिक्स कंपनी एटीएल और ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने की तैयारी चंडीगढ़(सच कहूँ/अनिल कक्कड़)। हरियाणा में जल्द ही दो बड़ी कंपनियां निवेश करेंगी। दरअसल मशहूर इलेक्ट्रानिक्स कंपनी एटीएल और ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट हरियाणा आने की तैयारी में हैं। दोनों कंपनियों ने हरियाणा सरकार से करीब 350 एकड़ जमीन मांगी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उनके प्रधान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/two-big-companies-will-come-to-haryana-sought-350-acres-of-land-from-the-government/article-16117"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/flipkart.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">इलेक्ट्रानिक्स कंपनी एटीएल और ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने की तैयारी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ/अनिल कक्कड़)।</strong> हरियाणा में जल्द ही दो बड़ी कंपनियां निवेश करेंगी। दरअसल मशहूर इलेक्ट्रानिक्स कंपनी एटीएल और ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट हरियाणा आने की तैयारी में हैं। दोनों कंपनियों ने हरियाणा सरकार से करीब 350 एकड़ जमीन मांगी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उनके प्रधान सचिव राजेश खुल्लर इन कंपनियों के साथ बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम जिले के सोहना में इलेक्ट्रानिक्स कंपनी एटीएल ने करीब 200 एकड़ जगह हरियाणा सरकार से मांगी है। इसी तरह ई-कामर्स कंपनी फिल्पकार्ट ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे के पास 150 एकड़ जमीन की मांग सरकार से की है, ताकि यहां निवेश किया जा सके।</p>
<h3>अब कंपनी को सरकार से इजाजत लेने की बाध्यता नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">सीएम के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने बताया कि प्रदेश में इंडस्ट्री पूरी तरह से खुल गई हैं। राज्य में अब किसी भी कंपनी, फैक्ट्री अथवा उद्योग को अपने संस्थान खोलने के लिए हरियाणा सरकार से अनुमति लेने की इजाजत नहीं है, भले ही इस कंपनी या उत्पादक इकाई ने राज्य सरकार से सीएलयू ली हुई या नहीं। प्रधान सचिव के अनुसार कंपनियां, फैक्ट्रियां तथा उद्योग धंधे पहले जिस तरह से काम कर रहे थे, ठीक उसी तरह से अपना काम आरंभ कर सकते हैं। यहां तक कि स्लम बस्तियों में छोटे-मोटे काम करने वालों को भी अपने काम धंधे दोबारा शुरू करने की इजाजत सरकार या प्रशासन से लेने की जरूरत नहीं है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2020 16:58:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिग्गज कंपनियों में लिवाली से 350 अंक चढ़ा सेंसेक्स</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.69 प्रतिशत, जापान का निक्की 0.74 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग तथा चीन का शंघाई कंपोजिट 0.87 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुये। यूरोप में शुरूआती कारोबार में ब्रिटेन के एफटीएसई 0.25 प्रतिशत और जर्मनी का डैक्स 0.63 प्रतिशत मजबूत हुआ।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/sensex-gained-350-points-due-to-buying-in-big-companies/article-13005"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/sensex.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">एफएमसीजी समूह में करीब दो प्रतिशत की तेजी रही</h1>
<h1 style="text-align:center;">(Domestic shares Market)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच बैंकिंग, ऊर्जा और एफएमसीजी समूहों की दिग्गज कंपनियों में लिवाली से बुधवार को घरेलू शेयर बाजार करीब तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुँच गये। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स मंगलवार की गिरावट से उबरता हुआ 349.76 अंक यानी 0.85 फीसदी चढ़कर 41,565.90 अंक पर पहुँच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 93.30 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की बढ़त में 12,201.20 अंक पर बंद हुआ।  यह दोनों सूचकांकों का 24 जनवरी के बाद उच्चतम स्तर है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिग्गज कंपनियों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों में निवेशक बिकवाल रहे। बीएसई का मिडकैप 0.29 प्रतिशत की गिरावट में 15,788.98 अंक पर और स्मॉलकैप 0.13 प्रतिशत लुढ़ककर 14,731.05 अंक पर बंद हुआ। कोरोना वायरस के नये मामलों में कमी आने से विदेशों में अधिकतर प्रमुख शेयर बाजार हरे निशान में रहे। एशिया में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.69 प्रतिशत, जापान का निक्की 0.74 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग तथा चीन का शंघाई कंपोजिट 0.87 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुये। (Domestic shares Market) यूरोप में शुरूआती कारोबार में ब्रिटेन के एफटीएसई 0.25 प्रतिशत और जर्मनी का डैक्स 0.63 प्रतिशत मजबूत हुआ।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एफएमसीजी समूह में करीब दो प्रतिशत की तेजी रही।</li>
<li style="text-align:justify;">ऊर्जा, बैंकिंग, आईटी, टेक और आॅटो समूहों के सूचकांक भी बढ़त में रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">सेंसेक्स की कंपनियों में हिंदुस्तान यूनिलिवर के शेयर पाँच प्रतिशत चढ़े।</li>
<li style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक में करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट रही।</li>
</ul>
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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2020 18:07:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्जमुक्त कंपनियों का बढ़ता मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी सूचकांक में शामिल कंपनियों के प्रतिफल का विश्लेषण किया गया, जिससे पता चला कि वैसी कंपनियां जो आंतरिक स्रोत से पूंजी जुटा कर कारोबार कर रही हैं, के प्रदर्शन में निरंतर सुधार आ रहा है। यह निष्कर्ष 911 कंपनियों के अंकेक्षित तुलना पत्र के विश्लेषण के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/growing-profits-of-debt-free-companies/article-6319"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/company.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी सूचकांक में शामिल कंपनियों के प्रतिफल का विश्लेषण किया गया, जिससे पता चला कि वैसी कंपनियां जो आंतरिक स्रोत से पूंजी जुटा कर कारोबार कर रही हैं, के प्रदर्शन में निरंतर सुधार आ रहा है। यह निष्कर्ष 911 कंपनियों के अंकेक्षित तुलना पत्र के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया। इस आंकलन में बैंक एवं गैर-बैंक ऋणदाता कंपनियों को शामिल नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पड़ताल में औसत आंकड़ों को सूचीबद्ध होल्डिंग कंपनियों की सूचीबद्ध सहायक कंपनियों के साथ समायोजित किया गया है, ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके। विश्लेषण के लिये कंपनियों की नकदी आवक, कर्ज के स्तर और ऋण के बजाय आंतरिक कोष से वित्त पोषित संपत्तियों के अनुपात को आधार बनाया गया। विश्लेषण से यह पता चला कि जो कंपनियां कर्जमुक्त हैं, वे बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस आकलन में वर्ष 2013 से वर्ष 2018 तक के प्रतिफल को शामिल किया गया। कंपनियाँ, जो खुद के संसाधनों पर निर्भर रही हैं, ने आलोच्य अवधि में 30 प्रतिशत से अधिक का प्रतिफल दिया है। इन कंपनियों का प्रदर्शन अप्रैल, 2018 के बाद भी बेहतर रहा है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में 2 बार नीतिगत दरों में इजाफा किया है। जून और अगस्त में बढ़ोतरी के जरिये कुल 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की गई है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण कर्ज मिलने की शर्त कड़ी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्ज के महंगे होने से कर्ज में चूक करने वाली ऋणदाता कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है। आईएलऐंडएफएस समूह के डूबने से भी स्थानीय बाजार से पूँजी जुटाना में मुश्किलें आ रही है। बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। बीते महीनों से वैश्विक बाजार से भी पूँजी इकठ्ठा करना महंगा हुआ है।<br />
बिना कर्ज वाली कंपनियों का प्रदर्शन इसलिये बेहतर है, क्योंकि उनकी कोई देनदारी नहीं है। कम कर्ज होना या कर्ज का नहीं होना हमेशा फायदेमंद होता है। ऐसी स्थिति बेहतर प्रदर्शन में मददगार होती है। कर्ज नहीं होने से शेयर बाजार से पूँजी जुटाने की जरूरत नहीं होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शेयर बाजार से पूँजी नहीं जुटाने से शेयरधारकों की इक्विटी कम नहीं होगी, प्रोमोटर का कैपिटल अक्षुण्ण बना रहेगा। आम तौर पर अच्छे कारोबारी मॉडल और शानदार वृद्धि करने वाली कंपनियों को शेयर बाजार से पूँजी जुटाने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि उनके द्वारा अच्छे प्रदर्शन करने के आसार होते हैं। फिच रेटिंग्स और उसकी भारतीय इकाई इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के 28 सितंबर के प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में हाल में बढ़़ोतरी की है और वह इस प्रक्रिया को आगे भी जारी रखेगा की प्रबल संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की इस नीति की वजह से दुनिया भर में पूँजी की उपलब्धता कम होगी। एजेंसी के मुताबिक घरेलू स्तर पर पूँजी की उपलब्धता में और भी कमी आने की संभावना है। फिलहाल, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। कमजोर रुपये से कंपिनयों के लिए विदेश से कर्ज लेना महंगा हो गया है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता की स्थिति है एवं घरेलू स्तर पर ब्याज दर ऊंचे स्तर पर है। बदले परिवेश में भारतीय कंपनियाँ अपने बैलेंस शीट को ऋणमुक्त बनाने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनियाँ राजस्व वृद्धि में सुधार के बावजूद वृद्धि पर जोर नहीं दे रही हैं। मन:स्थिति में इस बदलाव से वित्त वर्ष 2018 में भारतीय कंपनियों का शुद्ध कर्ज-इक्विटी अनुपात सुधरा है और नई परियोजनाओं में निवेश 10 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। पिछले साल कंपनियों का संयुक्त रूप से कुल ऋण सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत अधिक था, जो पिछले 10 सालों में सबसे धीमी वृद्धि है, जबकि गत वर्ष इन कंपनियों का संयुक्त राजस्व सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत अधिक था और उनका शुद्ध लाभ 3.4 प्रतिशत बढ़ा था। इधर, वित्त वर्ष 2018 में संयुक्त रूप से कंपनियों की स्थायी संपत्तियों या संयंत्रों एवं उपकरणों में निवेश 3 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले 10 सालों में सबसे कम वृद्धि है।</p>
<p style="text-align:justify;">विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नये निवेश घटने की रफ्तार और अधिक है। पिछले वित्त वर्ष में तेल एवं गैस, सूचना प्रौद्योगिकी सेवायेँ एवं फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनियों को छोड़कर अन्य कंपनियों की संयुक्त रूप से स्थायी संपत्तियां 2.8 प्रतिशत बढ़ीं, जो पिछले 10 सालों में सबसे सुस्त वृद्धि है। वित्त वर्ष 2018 में कंपनियों, जिसमें ऊर्जा शामिल नहीं है का शुद्ध कर्ज उनके शुद्ध पूँजी या शेयरधारक इक्विटी के अनुपात में सुधरकर औसतन 60 प्रतिशत पर आ गया। यह वित्त वर्ष 2016 में 68 प्रतिशत पर एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवधि में तेल एवं गैस, आईटी सेवाएं और एफएमसीजी को छोड़कर अन्य कंपनियों का कर्ज अनुपात सुधरकर 80 प्रतिशत पर आ गया था, जो वित्त वर्ष 2016 में 10 साल के सर्वोच्च स्तर 87 प्रतिशत पर था। इस तरह के संकेतों से पता चलता है कि कंपनियों की बैलेंस शीट में कर्ज का बोझ घटा है, जो बैंकरों और कर्ज में डूबी कंपनियों के शेयर बाजार मूल्यांकन के लिए सकारात्मक है।इक्नॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक और एमडी जी चोक्कालिंगम के अनुसार इक्विटी के अनुपात में कर्ज में गिरावट उपभोक्ता क्षेत्रों में ज्यादा मुनाफे या ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता के तहत कंपनी ऋण के पुनर्गठन की वजह से आई है। इससे बैंकों को इन कंपनियों में अपने ऋण का बड़ा हिस्सा छोड़ना पड़ा है। आईबीसी के तहत कंपनियों का कर्ज बैंकों का घाटा बन जाता है, जिससे कंपनियों के कर्ज में कमी दिखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल मार्च के अंत में भारतीय कंपनियों का कुल कर्ज 26.9 लाख करोड़ रुपये था, जो एक साल पहले के स्तर 25.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वित्त वर्ष 2018 की अंतिम तिमाही में कंपनियों के पास नकदी एवं इसके समान संपत्ति 8.66 लाख करोड़ रुपये थी, जो एक साल पहले के स्तर 8.73 लाख करोड़ रुपये से कम है। हालाँकि, चोक्कालिंगम के तर्क को सही नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि यह विश्लेषण अनियमित एवं नमूना आधार पर किया गया है, जिसमें कंपनियाँ बैंक की चूककर्ता हैं या नहीं का खुलासा नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिये, किसी भी तरह से ऐसे निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सकता है। कंपनियों के बैलेंस शीट से कर्ज के भार कम करने के दौरान उन्हें मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में अपने ऋण अनुपात में सुधार दर्ज किया है, लेकिन इस दौरान धातु एवं खनन, ऊर्जा एवं दूरसंचार क्षेत्रों में इक्विटी अनुपात में शुद्ध कर्ज की स्थिति बिगड़ी है। इन तीन क्षेत्रों का वित्त वर्ष 2018 में भारतीय कंपनियों के कुल बकाया ऋण में औसतन 43 प्रतिशत हिस्सा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे माहौल में बैंकों को अपने कर्ज को वसूलने में मुश्किल हो रही है। बिजली कंपनियों का कुल कंपनी ऋणों में करीब 20 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन इस क्षेत्र का कुल कंपनी लाभ में हिस्सा महज 5.9 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा कर्ज वाले क्षेत्र बिजली, धातु व खनन, निर्माण, बुनियादी ढांचा और दूरसंचार हैं। इनका कुल उधारी में करीब 53 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन वित्त वर्ष 2018 में कुल लाभ में इनका हिस्सा महज 12 प्रतिशत था। कंपनियों की खराब वित्तीय हालात के लिये सरकार को भी कुछ हद तक जिम्मेदार माना जा सकता है, जो सरकारी बैंकों का पुनर्पूंजीकरण नहीं कर पा रही है। मौजूदा समय में सरकारी बैंक ही कंपनियों को ऋण देने वाले मुख्य ऋणदाता हैं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>सतीश सिंह</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 10:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेमेंट डेटा /वीजा, मास्टरकार्ड जैसी कंपनियां विदेश में डेटा स्टोर कर भारतीय नियम तोड़ रहीं</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई,एजेंसी। वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक 16 अक्टूबर से विदेशी कंपनियों को पेमेंट से जुड़े डेटा भारत में ही स्टोर करने थे। कंपनियों को 15 अक्टूबर रात 12 बजे तक आरबीआई को इस संबंध में बताना था। लेकिन, अमेरिकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/companies-like-payment-data-visa-mastercard-breaking-the-indian-rule-by-storing-data-abroad/article-6293"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/companies-like-payment-data-_-visa-mastercard-breaking-the-indian-rule-by-storing-data-abroad-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई,एजेंसी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक 16 अक्टूबर से विदेशी कंपनियों को पेमेंट से जुड़े डेटा भारत में ही स्टोर करने थे। कंपनियों को 15 अक्टूबर रात 12 बजे तक आरबीआई को इस संबंध में बताना था। लेकिन, अमेरिकी कार्ड कंपनियों ने ऐसा नहीं किया।<br />
<strong>जुर्माना लगा सकता है आरबीआईर</strong> : न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने चेतावनी दी थी कि तय समय सीमा तक निर्देशों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी। आरबीआई ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर कहा था कि जिन कंपनियों का सर्वर विदेश में है उन्हें पेमेंट सिस्टम से जुड़ा डेटा भारत में ही स्टोर करना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिकी कंपनियों ने 12 महीने का वक्त मांगा : </strong>अमेरिकी कंपनियों ने 12 महीने का वक्त और मांगा है। कंपनियों की दलील है कि उनकी मशीनों का सिस्टम दुनियाभर में एक जैसा है। सिर्फ भारत के लिए सिस्टम को इतनी जल्दी नहीं बदला जा सकता। अमेरिका के डिप्टी ट्रे़ड रिप्रजेंटेटिव डेनिस शिया ने भी शुक्रवार को कहा कि इन्फॉर्मेशन का फ्री फ्लो सुनिश्चित करने के लिए हम डेटा का लोकलाइजेशन नहीं चाहते। शिया ने कहा कि ऐसा करने वाले देशों को फिर से सोचना चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की फाइनेंशियल कंपनियों की शिकायत के बाद वहां के अधिकारियों ने डेटा लोकलाइजेशन पर आपत्ति जताई। अमेरिकी कंपनियां डेटा लोकलाइजेशन के खिलाफ दुनियाभर में लॉबीइंग करती रही हैं। वॉट्सऐप ने नियम का पालन कियामोबाइल मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने पिछले दिनों कहा कि वह आरबीआई के निर्देश मानेगा। उसने पेमेंट संबंधी डेटा भारत में स्टोर करने का सिस्टम तैयार कर लिया है। अमेजन ने भी कहा था कि वह नियम पूरे करने के लिए काम कर रही है। जहां भी कंपनी का कारोबार है वहां के कानून का पालन करना प्राथमिकता है।</p>
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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:55:57 +0530</pubDate>
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                <title>फोर्ब्स की लिस्ट अनुसार: दुनिया की टॉप 2,000 कंपनियों में भारत की 58 कंपनियां शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[12 महीने के आंकड़ों के आधार पर रैंकिंग, रिलायंस 83वें पायदान पर न्यूज एजेंसी। दुनिया की सबसे बड़ी लिस्टेड 2,000 कंपनियों में भारत की 58 कंपनियों को स्थान मिला है, जिसमें रिलायंस कंपनी 83वें पायदान पर आयी है। अमेरिकी बिजनेस मैग्जीन फोर्ब्स की 2018 की ‘ग्लोबल 2000’ लिस्ट से मिली जानकारी सामने आई है। यदि हम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/according-forbes-list-58-companies-india-top-2000-companies/article-4060"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/mukesh-copy.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">12 महीने के आंकड़ों के आधार पर रैंकिंग, रिलायंस 83वें पायदान पर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>न्यूज एजेंसी। </strong>दुनिया की सबसे बड़ी लिस्टेड 2,000 कंपनियों में भारत की 58 कंपनियों को स्थान मिला है, जिसमें रिलायंस कंपनी 83वें पायदान पर आयी है। अमेरिकी बिजनेस मैग्जीन फोर्ब्स की 2018 की ‘ग्लोबल 2000’ लिस्ट से मिली जानकारी सामने आई है। यदि हम पिछले साल की बात करें तो पिछले साल भी इस लिस्ट में इतनी ही भारतीय कंपनियां शामिल थीं। लिस्ट में शामिल भारतीय कंपनियों में बैंक और पेट्रोलियम कंपनियां टॉप पर हैं। टॉप-10 भारतीय कंपनियों में 3 पेट्रोलियम कंपनियां और 3 बैंक शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिलायंस नंबर-1 भारतीय कंपनी, ग्लोबल रैंकिंग में 83वां स्थान प्राप्त किया है। लिस्ट के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज 23 पायदान सुधार के साथ 83 नंबर पर रही है। पिछले साल ये 106 नंबर पर थी। आरआईएल ने सबसे मूल्यवान भारतीय कंपनी के तौर पर खुद को कायम रखा है। इसका मार्केट कैप 6.23 लाख करोड़ रुपए है। हालांकि मार्केट कैप के मामले में फिलहाल टीसीएस 6.69 लाख करोड़ के साथ भारत में सबसे ऊपर है लेकिन फोर्ब्स ने 4 पैमानों के आधार पर रैकिंग दी है। फोर्ब्स ने बिक्री, मुनाफा, संपत्ति और मार्केट वैल्यू को ध्यान में रखते हुए 12 महीने के आंकड़ों का एनालिसिस कर कंपनियों की रैंकिंग की है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jun 2018 13:20:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चीनी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध का करारा जवाब दिया जाएगा: चीन</title>
                                    <description><![CDATA[शंघाई (एजेंसी)। चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध की अमेरिकी घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए चीन सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिकी सरकार व्यापार में आ रही तनातनी को दूर करने में कोई पहल नहीं करती है तो वह भी इस बारे में पूरी तरह मुकाबले के लिए तैयार है। गौरतलब है कि कल अमेरिका ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-restrictions-on-chinese-companies/article-3854"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/chinya.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शंघाई (एजेंसी)। </strong>चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध की अमेरिकी घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए चीन सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिकी सरकार व्यापार में आ रही तनातनी को दूर करने में कोई पहल नहीं करती है तो वह भी इस बारे में पूरी तरह मुकाबले के लिए तैयार है। गौरतलब है कि कल अमेरिका ने कहा था कि वह चीन से होने वाले आयातों पर प्रतिबंध लगा सकता है अौर अमेरिकी बौद्धिक संपदा के मामले में जब तक चीन कोई कदम नहीं उठाएगा तब तक यह जारी रहेगा। इस पर प्रतिक्रिया करते हुए चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह इस घोषणा से हैरान है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बयान दोनों देशाें के बीच हाल ही में हुई सहमति के विरोध में है। संवाद समिति शिन्हुआ ने बताया कि चीन सरकार उम्मीद करती है कि अमेरिका आवेश में आकर कोई कदम नहीं उठाएगा और अगर उसका यही रूख रहता है तो चीन भी अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार है। शिन्हुआ के मुताबिक“ चीन का हमेशा से यही रूख रहा है कि हम किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं लेकिन हम किसी भी मुकाबले से पीछे हटने वाले भी नहीं है। चीन इस मामले में अमेरिका के साथ व्यावहारिक तरीके से बातचीत करेगा और उम्मीद है कि अमेरिका भी दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुरूप काम करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">”चीनी समाचार पत्र ‘ द ग्लोबल टाइम्स” के मुताबिक अमेरिका इस समय अपने बड़प्पन के मुगालते में जी रहा है लेकिन हम भी उसे बता देना चाहते हैं कि व्यापार समझौते से मुकरने के बाद वह इस खेल में अकेला ही नाचता रह जाएगा।”समाचार पत्र के मुताबिक पहले हुए समझौते से अमेरिका के पीछे हटने के बारे में चीन आवश्यक कदम उठाएगा आैर अगर अमेरिका कोई खेल ही खेलना चाहता है तो हम भी इसके लिए तैयार हैं अौर नतीजा आने तक यह खेल जारी रहेगा। दरअसल अमेरिका का आरोप है कि चीन ने विदेशी कंपनियाें पर इस बात के लिए दबाव डाला था कि वे चीनी व्यापारिक कंपनियों को तकनीकी हंस्तातरण करे। लेकिन चीन इससे इनकार कर रहा है और उसका कहना है कि ये आरोप निराधार है और अमेरिका अपने व्यापार काे संरक्षण के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/us-restrictions-on-chinese-companies/article-3854</link>
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                <pubDate>Wed, 30 May 2018 13:17:30 +0530</pubDate>
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                <title>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना : वित्त मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों संग किया करार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत छोटे उद्यमियों को लोन मुहैया करवाने के लिए दो दर्जन से ज्यादा ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार किया है, जिसमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। कर्जदाता, उद्योग और सरकार के बीत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ministry-of-finance-has-entered-into-an-agreement-with-e-commerce-companies/article-3762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/02.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत छोटे उद्यमियों को लोन मुहैया करवाने के लिए दो दर्जन से ज्यादा ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार किया है, जिसमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। कर्जदाता, उद्योग और सरकार के बीत इस त्रिस्तरीय साझेदारी का उद्देश्य छोटे व्यवसायों को लोन मुहैया करवाना है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सरकार की एक फ्लैगशिप योजना है जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का लोन मुहैया करवाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त सेवा सचिव राजीव कुमार ने बताया, “यहां पर ओला, फ्लिपकार्ट, उबर, डब्बावाला, केबल ऑपरेटर और जोमैटो जैसी कंपनियां हैं जिनमें तमाम छोटे उद्यमी साझेदार के रुप में होते हैं, जिन्हें लोन की जरूरत होती है। हम मुद्रा योजना के तहत आगे बढ़कर उनकी मदद करना चाहते हैं। बैंक अच्छे उद्यमियों की तलाश में रहते हैं, कंपनियां अपने साझेदारों की मदद करने की कोशिशें करती रहती हैं और हम सिर्फ इन डॉट्स को सिर्फ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को लॉन्च किया था जिसके अंतर्गत नॉन कार्पोरेट, नॉन फार्म (गैर-कृषि) छोटे एवं मझौले उद्योगों को 10 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध करवाया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 07:44:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल की कीमतें काबू करने के लिए सरकार ने आज बुलाई तेल कंपनियों की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एंजेसी)। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार बुधवार शाम को तेल कंपनियों के साथ मीटिंग करने जा रही है। ऐसी उम्मीद है कि इसमें एक्साइज डयूटी और वैट टैक्स को कम करने को लेकर फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/oil-companies-to-convene-today-to-control-petrol-prices/article-3742"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/patrrol.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एंजेसी)। </strong>पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार बुधवार शाम को तेल कंपनियों के साथ मीटिंग करने जा रही है। ऐसी उम्मीद है कि इसमें एक्साइज डयूटी और वैट टैक्स को कम करने को लेकर फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को कहा था कि इस बारे में जल्द फैसला लिया जाएगा। पिछले 10 दिन से पेट्रोल 2.54 रुपए और डीजल 2.41 रुपए महंगा हुआ है। दिल्ली में बुधवार को डीजल का दाम 26 पैसे की बढ़ोतरी के साथ 68.34 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया। वहीं, पेट्रोल में 30 पैसे की तेजी रही और 77.17 रुपए प्रति लीटर रहा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वित्त मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय से बातचीत की</h2>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार तेजी ने सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। इसके लिए कदम उठाने होंगे। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय के बातचीत चल रही है।  बता दें कि हर राज्य में वैट या स्थानीय सेल्स टैक्स की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग हैं।  बता दें कि कर्नाटक चुनाव से पहले 19 दिन तक पेट्रोल डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बता दें कि कर्नाटक में 12 मई को मतदान हुआ था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हम कीमते कम करने के लिए काम कर रहे: शाह</h4>
<p style="text-align:justify;"> भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, “सरकार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती हुई कीमतों को गंभीरता से ले रही है। पेट्रोलियम मंत्री बुधवार को तेल कंपनियों के मालिकों के साथ मुलाकात करेंगे। हम कीमतों को कम करने के लिए उपाए निकाल रहे हैं।”</p>
<h4 style="text-align:justify;">एक रुपए की कटौती पर 13,000 करोड़ का नुकसान</h4>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज डयूटी में 1-1 रुपए की कटौती करने पर सरकार को 13,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के दौरान जब क्रूड ऑयल के दाम घट रहे थे, सरकार ने 9 बार में पेट्रोल पर 11.77 रु. और डीजल पर 13.47 रु. एक्साइज बढ़ाई थी। क्रूड महंगा होने पर सिर्फ एक बार, अक्टूबर 2017 में ड्यूटी 2 रु. प्रति लीटर घटाई।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 08:23:27 +0530</pubDate>
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                <title>कर्ज में फंसी कम्पनियों को बचाना है मकसद: जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कर्ज के दबाव में फंसी कंपनियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके पुराने फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या का समाधान करने के पीछे मूल उद्देश्य कारोबार को समाप्त करना नहीं है, बल्कि उसे बचाना है। उन्होंने कहा कि नए दिवाला कानून ने उन कर्जदारों जो उसे समय पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/jaitley-trying-to-save-the-companies-trapped-in-debt/article-3246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/arun-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कर्ज के दबाव में फंसी कंपनियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके पुराने फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या का समाधान करने के पीछे मूल उद्देश्य कारोबार को समाप्त करना नहीं है, बल्कि उसे बचाना है। उन्होंने कहा कि नए दिवाला कानून ने उन कर्जदारों जो उसे समय पर कर्ज नहीं लौटा पाए और कर्ज देने वालों के रिश्तों में उल्लेखनीय बदलाव ला दिया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मूल्यवान संपत्तियों को संरक्षित करना</h2>
<p style="text-align:justify;">जेटली ने कहा कि एनपीए समस्या के समाधान के पीछे वास्तविक उद्देश्य संपत्तियों को समाप्त करना नहीं है, बल्कि उनके व्यावसाय को बचाना है। यह काम चाहे इन कंपनियों के मौजूदा प्रवर्तक खुद करें अथवा अपने साथ नया भागीदार जोड़कर करें या फिर नए उद्यमी आएं और यह सुनिश्चित करें कि इन मूल्यावान संपत्तियों को संरक्षित रखा जा सके। जेटली यहां देश के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित एक बैठक को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2017 06:00:22 +0530</pubDate>
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