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                <title>Art - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अपनी बात कहना भी एक कला है</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे जीवन में बात करने या अपने पक्ष को प्रस्तुत करने के ढंग का बड़ा महत्त्व है, या यों कह लीजिये कि मनुष्य में वाक्य कौशलता एक सिद्धि है। जो मनुष्य बात करने की कला और महत्त्व को अच्छी तरह जानते-समझते हैं, वे अपनी बोलचाल की भाषा में उचित, सरल, नम्र और नपे तुले शब्द […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/speaking-is-also-an-art/article-87137"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/office.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमारे जीवन में बात करने या अपने पक्ष को प्रस्तुत करने के ढंग का बड़ा महत्त्व है, या यों कह लीजिये कि मनुष्य में वाक्य कौशलता एक सिद्धि है। जो मनुष्य बात करने की कला और महत्त्व को अच्छी तरह जानते-समझते हैं, वे अपनी बोलचाल की भाषा में उचित, सरल, नम्र और नपे तुले शब्द जोड़कर उसे इतना प्रभावशाली बना देते हैं कि सुनने वाला बरबस ही बात की सच्चाई पर विश्वास करने को मजबूर हो जाता है। हाजिर जवाबी की कला में माहिर व्यक्ति किसी को भी अपने शब्दजाल में फांसकर अपने पक्ष में करने के लिये विवश कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर ऐसा व्यक्ति जो विषय से हटकर इधर-उधर की हांकता है और जो मुंह में आये, बक देता है, वह मुंहफट कहलाता है। ऐसा व्यक्ति न तो किसी को प्रभावित कर पाता है, न ही विश्वास योग्य होता है और न ही समाज में आदर पाता है। महान मुगल सम्राट के दरबार में बीरबल उनके नौ रत्नों में से एक थे। अपने विवेक, सूझबूझ और हाजिर जवाबी के कारण ही वह बादशाह अकबर के चहेते और भरोसेमन्द थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाक कौशल का एक उदाहरण प्रस्तुत है-</strong></p>
<p style="text-align:justify;">किसी देश में नियुक्त एक राजदूत का कार्यकाल पूरा हो गया था। उसे अपने देश वापस लौटने के आदेश दिये जा चुके थे।<br />
अपने देश लौटने से एक दिन पहले राजदूत उस देश के सम्राट से विदा लेने के लिये उनके राजमहल में पहुंचा। राजदूत बड़ा चाटुकार और बातों का धनी था। उसने सम्राट से अपने कार्यकाल के दौरान उस राज्य में बिताये गये दिनों की खूब बढ़ चढ़कर बड़ाई की। तारीफों के अनेक पुल बांधे। अंत में बातों ही बातों में उसने सम्राट की बड़ाई में यहां तक कह डाला-महाराज, आप तो महान हैं। आपकी तो कोई तुलना ही नहीं है। आप तो पूर्णिमा के चांद के समान हैं।’ राजदूत के मुंह से अपनी उपमा पूर्णिमा के चांद के रूप में सुनकर सम्राट खुशी से फूला नहीं समाया। उसने राज्य की ओर से राजदूत को एक प्रशंसापत्र, उपहार और लाखों रुपए मूल्य के हीरे जवाहरात भेंट स्वरूप प्रदान किये। राजदूत अपने देश लौट आया।</p>
<p style="text-align:justify;">राजदूत के आते ही राजा के एक विश्वासपात्र अधिकारी ने उसके खिलाफ राजा के कान भर दिये। उसने राजा से कहा-‘महाराज, आपका यह दूत वापस आते समय दूसरे देश के सम्राट को पूर्णिमा के चांद की उपमा देकर आया है। इसके बदले सम्राट ने खुश होकर उसे अनेक कीमती उपहारों से नवाजा है। महाराज दूसरे देश के सम्राट को पूर्णिमा के चांद के समान कहने का तो सीधा-सीधा अर्थ यहीं हुआ कि उस सम्राट के समान और कोई दूसरा है ही नहीं। एक तरह से तो उसने अपने ही राजा को नीचा दिखाकर अपमानित किया है।’ यह सुनकर राजा क्रोधित हो उठा। उसने दूत को बुलवाया और पूछा-झ्सुना है, तुमने विदेश में अपने राजा का अपमान किया है?’</p>
<p style="text-align:justify;">राजदूत ने आश्चर्यचकित होकर कहा-‘अपमान, कैसा अपमान महाराज। अपने राजा के प्रति तो मेरे हृदय में पूरी निष्ठा और सम्मान भरा है।’ ‘क्या तुमने दूसरे देश के सम्राट को पूर्णिमा का चांद बताकर हमें नीचा दिखाया?’ राजा ने कहा।<br />
राजदूत ने अपने वाक कौशल का परिचय देते हुए बड़े धैर्यपूर्वक और विन्रम शब्दों में कहा-‘ओह महाराज, उस राजा से भला आपकी क्या तुलना। आप तो दूज के चांद के समान हैं। दूज का चांद तो प्रगति और संभावनाओं से भरा हुआ है। उसे तो हर दिन आगे ही आगे बढ़ना है। पूर्णिमा का चांद तो पतन का प्रतीक है। आपका यश तो दिन दूना और रात चौगुना बढ़ेगा, उस राजा की कीर्ति तो समाप्ति पर है।’ राजदूत की बात सुनकर राजा बड़ा प्रभावित और प्रसन्न हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>सच है, जो वाक कौशल के धनी होते हैं, वे अच्छे और लुभावने वचन बोलने में जरा भी कजूंसी नहीं बरतते। उसी का लाभ वे उठा जाते हैं। </em><br />
<strong>-उर्वशी</strong></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Oct 2022 05:10:03 +0530</pubDate>
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                <title>देश का हर क्षेत्र ‘हुनर एवं कला’ की विरासत से भरपूर : जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[‘हुनर हाट’ बहुत प्रभावी भूमिका निभा रहा है | Skill and Art नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश का हर क्षेत्र हुनर एवं कला (Skill and Art) की विरासत से भरपूर है तथा यहां देश के शिल्पकार विश्वस्तरीय उत्पाद बना रहे है जिसकी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय बांडिंग की आवश्यकता है। जेटली ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>‘हुनर हाट’ बहुत प्रभावी भूमिका निभा रहा है | Skill and Art</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश का हर क्षेत्र हुनर एवं कला (Skill and Art) की विरासत से भरपूर है तथा यहां देश के शिल्पकार विश्वस्तरीय उत्पाद बना रहे है जिसकी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय बांडिंग की आवश्यकता है। जेटली ने रविवार को यहां ‘हुनर हाट’ के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते ‘हुनर हाट’ देश के ‘हुनर के उस्तादों’ की पहचान और विरासत को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मजबूती प्रदान कर रहे हैं।</p>
<p>इस अभियान में ‘हुनर हाट’ बहुत प्रभावी भूमिका निभा रहा है तथा इस तरह के कार्यक्रमों से दस्तकारी/शिल्पकारी से जुड़े लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने ‘हुनर हाट’ में देश के कोने-कोने से आये दस्तकारों-शिल्पकारों के स्वदेशी हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पादों का अवलोकन किया एवं ‘हुनर के उस्तादों’ की हौसला अफजाई की। इस मौके पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ‘हुनर हाट’, भारतीय दस्तकारों-शिल्पकारों की ‘स्वदेशी ताकत’ की प्रामाणिक पहचान है। यह देश के दस्तकारों-शिल्पकारों के ‘सम्मान के साथ सशक्तिकरण’ का विश्वसनीय ब्रांड बन गया है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jan 2019 10:40:42 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एक कला है शिशु को नहलाना</title>
                                    <description><![CDATA[नन्हा शिशु बहुत कोमल होता है। जरा सी लापरवाही उसके लिए नुकसानदेह हो सकती है। इस कला में निपुण होने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चे को नहलाते समय आपकी यही कोशिश होनी चाहिए कि वह पानी से डरने की बजाय स्नान में आनंद व प्रसन्नता का अनुभव करे। बच्चे को टब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/an-art-baby-bathing/article-3662"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/baby.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नन्हा शिशु बहुत कोमल होता है। जरा सी लापरवाही उसके लिए नुकसानदेह हो सकती है। इस कला में निपुण होने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चे को नहलाते समय आपकी यही कोशिश होनी चाहिए कि वह पानी से डरने की बजाय स्नान में आनंद व प्रसन्नता का अनुभव करे। बच्चे को टब में बैठाकर नहलायें। पानी से किलोल करने में उन्हें आनंद आता है, जिसे वे अपनी किलकारियों से प्रकट करते हैं। उसके इस आनंद में आप भी शामिल हों और अपना व अपने बच्चे का आनंद बढ़ायें। शिशु को नहलाना शुरू करने के पहले सभी आवश्यक सामान अपने पास पहले ही रख लें ताकि आपको बीच में उठना न पड़े। बच्चे को नहलाने का समय तभी निश्चित करें, जब आपके पास पर्याप्त समय हो। हडबड़ी में नहलाने से बच्चा पानी से भय खा सकता है। नहलाने से पहले बच्चे के शरीर की तेल से मालिश करें। मालिश करते समय सावधानी बरतें कि हाथ कोमलता से चलें और बच्चों के नाजुक अंगों को कोई झटका न लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मालिश के कुछ समय बाद ही नहलाना ठीक रहता हैं। सर्दी में बच्चों को धूप-स्नान देने के बाद ही नहलाना चाहिए। मालिश के बाद नहलाने से बच्चे की त्वचा स्वस्थ होती है। बच्चे की मांसपेशियों को व्यायाम व विश्राम मिलता है और बच्चा तनाव-थकान मुक्त होकर आराम की नींद सोता है। नहलाते समय आपके हाथ एकदम साफ हों। नाखून कटे हुए हों। यदि आपके हाथ में चुभने वाली चूड़ी, घड़ी या अंगूठी है तो उसे उतार दें। शिशु को न तो दूध पिलाने के एकदम बाद नहलायें और न ही जब वह बहुत भूखा हो या किसी कारणवश रो रहा हो। स्नान के बाद उसे भली भांति पोंछकर मौसम के अनुकूल वस्त्र पहनाकर दूध की खुराक दें ताकि पेट भर जाने के बाद ता़जगी व प्रफुल्लता से शांति व आराम से देर तक सोता रहे। इस प्रकार आपकी थोेड़ी सी सावधानी व सूझबूझ बच्चों को स्वस्थ व प्रसन्नचित रखने में सहायक होगी और आप भी अपने साफ सुथरे लाडले को आराम से सोता खेलता देखकर खुश रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-मीना जैन छाबड़ा</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Mar 2018 03:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कला में राजनैतिक दखल व राजनैतिक कलाकार</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज नेहलानी ने इस्तीफे के बाद जो खुलासे किए हैं वह राजनैतिक पतन की निशानी है। राजनेता कला को अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं। कौन सी फिल्म को हरी झंडी देनी है, कौन सी फिल्म पर कितने कट लगाने हैं, यह भी मंत्रियों की मनमर्जी पर निर्भर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-interventions-and-political-artists-in-art/article-3271"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/censor-board.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज नेहलानी ने इस्तीफे के बाद जो खुलासे किए हैं वह राजनैतिक पतन की निशानी है। राजनेता कला को अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं। कौन सी फिल्म को हरी झंडी देनी है, कौन सी फिल्म पर कितने कट लगाने हैं, यह भी मंत्रियों की मनमर्जी पर निर्भर करता है। यदि कोई अधिकारी स्वतंत्र होकर काम करता है तो उसे पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। नेहलानी ने दावा किया है कि एक मंत्रालय फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को रिलीज करने की अनुमति नहीं देना चाहता था।</p>
<p style="text-align:justify;">नेहलानी की तारीफ करनी बनती है जिन्होंने अध्यक्ष रहते हुए बिना किसी राजनीतिक दबाव के स्वतंत्र रूप से फिल्मों के संबंध में निर्णय लिए, किंतु सिक्के का दूसरा पहलू काला है। यदि राजनेता कला में दखलअंदाजी करते हैं तो कलाकार भी राजनैतिक नेताओं की मंशा अनुसार फिल्मों का विषय तय करने की मानसिकता का शिकार हो रहे हैं, जो अपने आप में कला का अपमान है। ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म तब आई जब पंजाब विधानसभा चुनाव सिर पर थे। इस फिल्म में पंजाब में नशे की चपेट में आए युवाओं को दिखाया गया, जिससे शिरोमणी अकाली दल को चुनावों में नुक्सान पहुंचना तय था। अकाली दल ने अप्रत्यक्ष रूप से इसका विरोध कर फिल्म के प्रसार व सिनेमाघरों में पहुंचने पर विलम्ब करवा दिया। कलाकार राजनैतिक नेताओं के हाथों की कठपुतली बनकर चुनावों पर आधारित फिल्में बनाने लग जाते हैं। यहां कला, कला न रहकर राजनैतिक प्रचार बन जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कलाकार कला को बेचने लगता है। नि:संदेह सब पैसों का खेल बन जाता है। पैसे के बिना कुछ नहीं होता। राजनेता सत्ता में आने के लिए हर तौर-तरीके इस्तेमाल करते हैं किंतु जब किसी वस्तु को बुरी मंशा से इस्तेमाल किया जाए तो वह हथकंडा बन जाता है। सत्ता के खेल में कला का हथकंडा बनना कलाकार को बेईमान साबित करता है। कला के लिए आजादी जरूरी है, लेकिन आजादी के नाम पर किसी और के हाथ में खेलना कला का केवल प्रदर्शन है। राजनैतिक विषयों पर फिल्म बनाना गलत नहीं लेकिन राजनैतिक विचारधारा से फिल्म बनाना गलत है। अब ‘इन्दू सरकार’ की भी चर्चा हो रही है। फिल्मों की रिलीजिंग के लिए अदालतों के चक्कर भी लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घमासान में न तो राजनेता और न ही कलाकारों को क्लीन चिट दी जा सकती है। हर कला संदेश देती है लेकिन संदेश पर कला का ठप्पा लगाना कला को कमजोर करता है। कलाकार समाज की बेहतरी के लिए मानवीय जीवन को पेश करें। राजनेता फिल्मों को अपने उद्देश्य अनुसार बनवाने की बजाय कलाकारों द्वारा बनाई गई फिल्म में खुद की पहचान करें। फिल्म में दिखाए जा रहे जीवन दृश्य में से राजनेता यह जरूर देखें कि समाज कहां खड़ा है और उसे कहां ले जाने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sun, 20 Aug 2017 04:21:22 +0530</pubDate>
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