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                <title>prevention - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>World Suicide Prevention Day : पुरुष करते हैं सबसे ज्यादा आत्महत्या</title>
                                    <description><![CDATA[WHO के एक डाटा के अनुसार हर दिन 3000 लोग दें रहे जान नई दिल्ली,एजेंसी। World Suicide Prevention Day 2019: आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है। अभी कुछ ही दिन पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/world-suicide-prevention-day/article-10404"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/world-suicide-prevention-day.jpg" alt=""></a><br /><h2>WHO के एक डाटा के अनुसार हर दिन 3000 लोग दें रहे जान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली,एजेंसी।</strong> <strong>World Suicide Prevention Day 2019</strong>: आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है। अभी कुछ ही दिन पहले एक महिला ने अपनी बच्ची के साथ इमरात से छलांग लगाकर आत्महत्या की थी। चौकाने वाली खबर तो वो थी जिसमें तीसरी क्लास में पढ़ने वाली एक छात्रा ने मिट्टी के ताल छिड़क कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्रा की उम्र महज 8 से 9 साल रही होगी। इसी तरह हर वर्ग के लोग रोजाना आत्महत्या करते हैं। भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। हर साल दुनिया में लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क ऑन सुइसाइड रिसर्च एंड प्रिवेंशन के मुताबिक हर साल 2.3 लाख लोग भारत में आत्महत्या करते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है आत्महत्या रोकथाम दिवस</h2>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती आत्महत्याओं की घटनाओं को देखते हुए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या दिवस मनाया जाता है। इस दिन आत्महत्याओं की घटनाओं को रोकने के दुनियाभर में अलग-अलग तरह के आयोजन आयोजित किए जाते हैं। ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके ती आत्महत्या समय से पहले होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हर रोज आत्महत्या कर रहे 3000 लोग</h2>
<p style="text-align:justify;">WHO के आंकड़ों के मुताबिक हर रोज करीब 3000 लोग आत्महत्या कर मर रहे हैं। साथ ही हर रोज 20 या उससे अधीक लोग अपने जीवन को समाप्त करने का प्रयास करते हैं। पहली बार विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत 10 सितंबर को की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुरुष ज्यादा करते हैं आत्महत्या विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमानों के मुताबिक 2016 में आत्महत्या से 7,93,000 लोगों की मौतें हुई थी। जिसमें से ज्यादातर पुरुष थे। NCRB के डेटा के अनुसार 2015 में 91,528 पुरुषों ने अपनी जान ली, वहीं, 2005 और 2010 में 66,032 और 87,180 पुरुषों ने आत्महत्या की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आपके मन में कभी भी इस तरह का विचार आता है तो मदद मंगने में संकोच ना करें। अपने किसी करीबी से मदद मांगे। यदि किसी करीबी से मदद नहीं मांग सकते तो डॉक्टर की मदद लें। क्योंकि ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती जिसका समाधान ना हो। इसलिए हिम्मत करें और अपनी तकलीफ साझा करें।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2019 10:23:52 +0530</pubDate>
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                <title>साइबर अपराध रोकने की चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[Challenges of Cyber Security: देश में डिजिटल लेन-देन और कैशलेश अर्थव्यवस्था को गति दिए जाने के तहत भारतीय बैंकों ने भले ही अपनी सेवाओं को काफी हद तक आॅनलाइन कर दिया है और ऐप के जरिए सेवाएं देने लगे हैं, लेकिन चिंताजनक तथ्य यह है कि बैंकों की सेवाओं को लेकर देश के लोग संतुष्ट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/challenging-the-cyber-crime-prevention/article-3305"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/cyber-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>Challenges of Cyber Security:</strong></em> देश में डिजिटल लेन-देन और कैशलेश अर्थव्यवस्था को गति दिए जाने के तहत भारतीय बैंकों ने भले ही अपनी सेवाओं को काफी हद तक आॅनलाइन कर दिया है और ऐप के जरिए सेवाएं देने लगे हैं, लेकिन चिंताजनक तथ्य यह है कि बैंकों की सेवाओं को लेकर देश के लोग संतुष्ट नहीं हैं। उसका एक प्रमुख कारण साइबर अपराध में लगातार हो रही वृद्धि है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में अमेरिकी कंपनी एफआईएस ने वैश्विक स्तर पर कुछ ऐसा ही खुलासा किया है। उसने अपने तीसरे वार्षिक परफार्मेंस अगेंस्ट कस्टमर एक्सपेक्टेशन सर्वेक्षण में पाया है कि देश के लोग विशेषकर 18 से 36 वर्ष के आयु वर्ग के युवा उपभोक्ता अपनी सुविधानुसार किसी भी समय कहीं से भी जुड़े रहना चाहते हैं और बैंक शाखा तक जाना पसंद नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वेक्षण में कहा गया है कि दुनिया के अन्य बैंकों की तरह भारतीय बैंक भी अपने ग्राहकों की अपेक्षाओं की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहे हैं। बैंकों की जो सबसे बड़ी समस्या साइबर अपराध रोकने की है, उसमें वह बुरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। अभी पिछले ही दिनों सरकार के आंकड़ों से उद्घाटित हुआ कि पिछले तीन वित्त वर्ष में बैंकों से जुड़े साइबर अपराध के 43,204 मामले सामने आए हैं, जिसमें अपराधियों ने 232.32 करोड़ रुपए का चूना लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर साइबर अपराध पर नियंत्रण नहीं कसा गया, तो साइबर हमलावर न्यूक्लियर प्लांट, रेलवे, ट्रांसपोर्टेशन और अस्पतालों जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर कंट्रोल कर सकते हैं, जिसके नतीजे में पावर फेलियर, वाटर पॉल्युशन, बाढ़ जैसी गंभीर समस्या उत्पन हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर है। आज भारत की बड़ी आबादी डिजिटल जिंदगी जी रही है। अधिकांश लोग बैंक खाते से लेकर निजी गोपनीय जानकारी तक कंप्यूटर और मोबाइल फोन में रखने लगे हैं। इंटरनेट उपयोग करने के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इंटरनेट पर जितनी तेजी से निर्भरता बढ़ी है, उतना ही तेजी से खतरे भी बढ़े हैं। यहीं वजह है कि हैकिंग की वारदातें भी बढ़ती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की ही बात करें, तो यहां ऐसी अनेक देशी-विदेशी कंपनियां हैं, जो इंटरनेट आधारित कारोबार एवं सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उचित होगा कि भारत सरकार ऐसी कंपनियों पर निगरानी रखने के लिए एक ऐसी निगरानी तंत्र को विकसित करे, जो इन कंपनियों के कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर रखे।</p>
<p style="text-align:justify;">उचित यह भी होगा कि जिन कंपनियों की कार्यप्रणाली संदिग्ध नजर आए उन पर शीध्र शिकंजा कस कानूनी कार्रवाई की जाए। ऐसे कंपनियों का लाइसेंस निरस्त किया जाए जो साइबर सुरक्षा से संबंधित नियमों का पालन करने में कोताही बरतती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा देश में अनेक ऐसी विदेशी कंपनियां सेवाएं दे रही हैं जिनका सर्वर अपने देश में नहीं है। ऐसी कंपनियों को निगरानी की जद में रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसा नहीं है कि भारत में साइबर अपराध रोकने के लिए कानून नहीं है। भारत में साइबर अपराध को तीन मुख्य अधिनियमों के अंतरर्गत रखा गया है। ये अधिनियम हैं-सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और राज्य स्तरीय कानून।</p>
<p style="text-align:justify;">सच कहें तो साइबर अपराध के बदलते तरीकों और घटनाओं ने भीषण समस्या का रुप ग्रहण कर लिया है। जुर्म की दुनिया में अपराधी हमेशा कानून को गुमराह करने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर लेते हैं। देखा भी जा रहा है कि साइबर अपराधी आए दिन देश में साइबर तकनीक के जरिए जहरीला माहौल निर्मित करने का काम कर रहे हैं और सरकार चाहकर भी उस पर रोक लगाने में विफल है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां ध्यान देना होगा कि साइबर अपराध के खेल में अमेरिका, रुस, चीन, ब्रिटेन, जापान बड़े खिलाड़ी है। अमेरिका की साइबर सेंधमारी की कारस्तानी का विकलीक्स द्वारा खुलासा किया जा चुका है। हैकिंग के जरिए रक्षा-सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने का मामला दुनिया में अनगिनत बार उजागर हो चुका है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में अभी भी साइबर अपराध गैर जमानती नहीं है। साथ ही इसके लिए अधिकतम सजा तीन साल है। उचित होगा कि सरकार साइबर अपराध से जुड़े कानूनों में फेरबदल कर इसे कठोर बनाए तथा सजा की दर बढ़ाए।</p>
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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2017 00:39:03 +0530</pubDate>
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