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                <title>SukhDua Samaj - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Health Department: स्वास्थ्य विभाग ने सुखदुआ (किन्नर समाज) के साथ की विशेष बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[लिंगानुपात सुधार, मातृत्व स्वास्थ्य जागरूकता और लिंग जांच पर रोक को लेकर मांगा सहयोग समाज में लड़का-लड़की को समान समझने का दिया संदेश, जानकारी देने वालों को सुरक्षा का भरोसा घरौंडा (सच कहूँ न्यूज़)। Gharaunda News: घरौंडा के सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को सुखदुआ (किन्नर समाज) के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक का आयोजन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/health-department-held-a-special-meeting-with-sukhdua/article-72365"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/gharaunda-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">लिंगानुपात सुधार, मातृत्व स्वास्थ्य जागरूकता और लिंग जांच पर रोक को लेकर मांगा सहयोग</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>समाज में लड़का-लड़की को समान समझने का दिया संदेश, जानकारी देने वालों को सुरक्षा का भरोसा</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>घरौंडा (सच कहूँ न्यूज़)। </strong>Gharaunda News: घरौंडा के सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को सुखदुआ (किन्नर समाज) के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक सिविल सर्जन करनाल के निर्देश पर उपस्वास्थ्य केंद्र सीएचसी घरौंडा द्वारा आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य लिंगानुपात को सुधारना, गर्भवती महिलाओं का 10 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित करना, प्रसवपूर्व जांचों को बढ़ावा देना और लिंग जांच जैसी गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">मीटिंग में बताया गया कि हरियाणा सरकार की ओर से लिंगानुपात सुधार और मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए लगातार कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में केवल स्वास्थ्य विभाग नहीं, बल्कि अन्य सामाजिक संगठनों और समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी भी जरूरी मानी जा रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किन्नर समाज को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसएमओ डॉ. मुनेश गोयल ने कहा कि जब किन्नर समाज के सदस्य किसी परिवार या गर्भवती महिला से संपर्क में आते हैं तो वे उन्हें गर्भावस्था के शुरुआती 10 सप्ताह में पंजीकरण करवाने के लिए प्रेरित करें। Gharaunda News</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही समय पर प्रसवपूर्व जांच, पौष्टिक खानपान संबंधी परामर्श, संस्थागत प्रसव और लिंग जांच न करवाने जैसे विषयों पर उन्हें जागरूक करें। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किन्नर समाज के प्रतिनिधियों से यह भी अपील की कि यदि उन्हें किसी क्षेत्र में लिंग चयन या लिंग जांच संबंधी कोई जानकारी मिलती है, तो वे इसे विभाग को तुरंत सूचित करें। इसके अलावा, अगर किसी परिवार में लड़का-लड़की के बीच भेदभाव किया जा रहा है, तो उस मामले की सूचना भी स्वास्थ्य विभाग को दी जाए ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुखदुआ समाज करेगा सहयोग | Gharaunda News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस विशेष बैठक में किन्नर समाज की ओर से जोया, भावना, डिम्पल और रेशमा बाई शामिल हुईं। उन्होंने विभाग को पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिलाया और कहा कि वे अपने स्तर पर इस अभियान को सफल बनाने में हर संभव सहायता करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि किन्नर समाज समाज के हर वर्ग के संपर्क में रहता है, इसलिए वे संदेश को तेजी से फैला सकते हैं। मीटिंग में एसएमओ डॉ. मुनेश गोयल के साथ-साथ बीईई सुखदेव, ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर अभिषेक चौहान और एलएचवी कमला भी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बाइक सवार महिला का पर्स छीनकर हुए फरार" href="http://10.0.0.122:1245/bike-riders-snatched-a-womans-purse-in-preet-nagar-area/">बाइक सवार महिला का पर्स छीनकर हुए फरार</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 20:42:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी की ‘सुखदुआ समाज’ के लिए की गई कोशिशें ला रही रंग&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[कोच्चि (एजेंसी)। भौतिकी में स्नातक, बीमा एजेंट के रूप में काम, कानून की पढ़ाई और फिर वकील बनने तक के सफर में विषमताओं के बावजूद हार न मानने वाली केरल की पहली किन्नर वकील पद्मा लक्ष्मी का कहना है कि उनका लक्ष्य गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित कर उनकी मदद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/respected-guru-jis-efforts-for-sukhdua-samaj-are-paying-off/article-44938"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/dera1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोच्चि (एजेंसी)।</strong> भौतिकी में स्नातक, बीमा एजेंट के रूप में काम, कानून की पढ़ाई और फिर वकील बनने तक के सफर में विषमताओं के बावजूद हार न मानने वाली केरल की पहली किन्नर वकील पद्मा लक्ष्मी का कहना है कि उनका लक्ष्य गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित कर उनकी मदद करना है। पद्मा लक्ष्मी मानती हैं कि उनकी जिंदगी का सफर आसान नहीं है लेकिन उनके सकारात्मक रवैये और नकारात्मकता को नजरअंदाज करने की उनकी आदत ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘मैं हर तरह की नकारात्मकता को नजरअंदाज करती हूं, चाहे वह लोग हो या उनकी टिप्पणियां। मैं सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करती हूं। मुझे विश्वास है कि यह मेरे फायदों में से एक है। अगर मैं नकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करती हूं, तो मेरे पास केवल उसके लिए समय होगा और जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ूंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">’’ पद्मा लक्ष्मी ने अपनी चिकित्सा और शिक्षा संबंधी खर्च को पूरा करने के लिए एक निजी बीमा कंपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के लिए एक बीमा एजेंट के रूप में भी काम किया, जिसमें कानूनी जानकारियां वालीं पाठ्यपुस्तकें भी शामिल थीं। हालांकि, वह इन किताबों और अपने कानूनी ज्ञान को किसी के साथ साझा करने के लिए बेहद उत्सुक भी हैं। पद्मा लक्ष्मी ने अपनी वरिष्ठ अधिवक्ता के वी भद्रकुमारी के पास एक प्रशिक्षु के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे एक बीमा एजेंट के रूप में काम करना बंद कर दिया, ताकि वह अपने कानून के करियर पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">पद्मा लक्ष्मी ने कहा कि उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने केरल उच्च न्यायालय में कानूनी पेशे के दिग्गज लोगों के बीच उनके लिए जगह बनाने में मदद की। उन्होंने के वी भद्रकुमारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘मेरे वरिष्ठ सहयोगियों ने हमेशा मुझे बताया है कि संविधान हमारा सबसे बड़ा हथियार है।’’ केरल में 19 मार्च को कानून के 1500 से अधिक विधि स्नातकों ने अधिवक्ता के रूप में अपना नामांकन कराया। लक्ष्मी को सबसे पहले नामांकन प्रमाण पत्र मिला। अब लक्ष्मी न तो विधि में स्नातकोत्तर करना चाहती हैं और न ही उनकी इच्छा न्यायिक सेवा के लिए प्रयास करने की है। उन्होंने कहा ‘‘मेरी प्राथमिकता ऐसे मामलों को उठाना है जिनमें मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया हो। मैं गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लड़ना चाहती हूं।’’</p>
<h3 style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा की मुहिम लाई असर</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने हमेशा देश में किन्नर समुदाय को समाज की मुख्यधारा में लाने की सफल कोशिशें की हैं। पूज्य गुरू जी ने किन्नर समाज को ‘सुख दुआ’ समाज का नाम दिया है। वहीं इन प्रयत्नों का ही नतीजा कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि देश की सर्वाेच्च अदालत ने भी किन्नर समाज को तीसरे जेंडर के रूप में मान्यता दी है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 21 Mar 2023 22:03:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुखदुआ समाज ने पूज्य गुरुजी को दी रंगों के त्योहार होली की बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ के सुखदुआ (किन्नर) समाज ने शनिवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को रंगों के त्योहार होली की अग्रिम बधाई दी। इस मौके पर सुखदुआ समाज (Sukhdua Samaj) की छन्नो बाई व मैना बाई ने पूज्य गुरुजी की ओर से शुरू किए गए मानवता भलाई के कार्यांे की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sukhdua-samaj-congratulated-respected-guruji-on-the-festival-of-colors-holi/article-43895"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/sukhdua-samaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़।</strong> हनुमानगढ़ के सुखदुआ (किन्नर) समाज ने शनिवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को रंगों के त्योहार होली की अग्रिम बधाई दी। इस मौके पर सुखदुआ समाज (Sukhdua Samaj) की छन्नो बाई व मैना बाई ने पूज्य गुरुजी की ओर से शुरू किए गए मानवता भलाई के कार्यांे की सराहना की। नशे के खिलाफ शुरू की गई डेप्थ मुहिम को वर्तमान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब की तरह हनुमानगढ़ जिले में भी नशे का कारोबार बड़ी तेजी से फैल रहा है। यहां का युवा लगातार नशे की गर्त में धंसता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे आने वाली पीढिय़ों पर संकट खड़ा होगा। उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि ऐसे हालातों में पूज्य गुरुजी की ओर से शुरू की गई डेप्थ मुहिम युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने में उपयोगी साबित होगी। छन्नो बाई व मैना बाई ने कहा कि पूज्य गुरुजी ने कई साल पहले थर्ड जेंडर किन्नरों को सुखदुआ समाज का नाम देकर बहुत बड़ा उपकार किया। सुखदुआ समाज का नाम मिलने पर आज किन्नर भी सम्मान का जीवन जी रहे हैं। इसके लिए पूरा सुखदुआ समाज पूज्य गुरुजी का आभारी रहेगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="in" dir="ltr" xml:lang="in">Sukhdua Samaj <a href="https://t.co/HBEmCTQdom">pic.twitter.com/HBEmCTQdom</a></p>
<p>— Sach Kahoon (@Sachkahoon) <a href="https://twitter.com/Sachkahoon/status/1629434626631696384?ref_src=twsrc%5Etfw">February 25, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
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]]></content:encoded>
                
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Feb 2023 16:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाजसेवा की मिसाल। जरूरतमंदों की मदद के लिए मेरे दरवाजे हमेशा खुले: दर्शना</title>
                                    <description><![CDATA[अपने समाजसेवी कार्य के लिए सुखदुआ समाज की ये महंत दूर-दूर तक चर्चा का विषय बनी हुई है। वीरवार को दर्शना महंत ने 2 परिवारों को आपस में जोड़कर शादी संपन्न ही नहीं करवाई अपितु स्वंय कन्यादान करते हुए लड़की को अपने हाथों से डोली में बैठाकर रूख्सत किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/example-of-social-service-my-doors-are-always-open-to-help-the-needy-darshana/article-16174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/example-of-social-service.-my-doors-are-always-open-to-help-the-needy-darshana.jpeg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">सुखदुआ समाज की दर्शना महंत बन रही समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>अब तक 111 गरीब लड़कियों की करवा चुकी है।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>शादी, पूरा खर्च स्वंय करती है वहन।</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/राजू ओढां</strong>। शादी हो या बच्चे का जन्म या घर में अन्य कोई खुशी का अवसर। ऐसे मेंं नाच-गाकर परिवार के लिए सुख-स्मृद्धि व खुशी की दुआ कर उसके बदले में बधाई के रूप में कुछ पैसे लेकर अपना जीवनयापन करने वाले सुखदुआ समाज की दर्शना महंत समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रही है। दर्शना के दरवाजे पर मदद के लिए आने वाला कोई भी व्यक्ति अब तक यहां से निराश लौटकर नहीं गया। दर्शना महंत अपनी उम्र में अब तक सैंकड़ों परिवारों को आपस में जोड़कर ये साबित कर रही है कि इन्सान दौलत से नहीं अपितु दिल से बड़ा होना चाहिए। अपने समाजसेवी कार्य के लिए सुखदुआ समाज की ये महंत दूर-दूर तक चर्चा का विषय बनी हुई है। वीरवार को दर्शना महंत ने 2 परिवारों को आपस में जोड़कर शादी संपन्न ही नहीं करवाई अपितु स्वंय कन्यादान करते हुए लड़की को अपने हाथों से डोली में बैठाकर रूख्सत किया। जी हां, हम बात कर रहे हैं ओढां मेंं रह रही सुखदुआ समाज से करीब 70 वर्षीय दर्शना महंत की। दर्शना ने सच-कहूँ संवाददाता राजू ओढां से विशेष बातचीत करते हुए अपने समाजसेवी कार्य बारे विस्तृत जानकारी दी। दर्शना महंत ने बताया कि वह करीब 50 वर्ष पूर्व पंजाब से ओढां में सुखदुआ समाज की चंप्पा महंत के पास आई थी। पूरा कार्य उसे सौंपकर चंप्पा परलोक सिधार गई। दर्शना चंप्पा महंत को अपना गुरू मानती है।</h6>
<h4>लड़की को अपने हाथों से डोली में करती है रूख्सत</h4>
<h5 style="text-align:justify;">गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी करवाने में दर्शना को आत्मिक संतुष्टि मिलती है। विशेष बात ये है कि दर्शना शादियों का पूरा खर्च ही नहीं उठाती अपितु लड़की का अपने हाथों से कन्यादान करते हुए अपने घर से ही डोली में रूख्सत करती है। दर्शना अब तक 110 गरीब लड़कियों की शादी करवा चुकी है। वीरवार को महंत के घर से 111वीं लड़की की डोली उठी। दर्शना ने बताया कि काफी वर्ष पूर्व वह गांव बीरूवाला में बधाई मांगने गई थी। इस दौरान एक महिला ने उसे 8 बेटियां होने बारे बताया। जिसके बाद उसने महिला को आश्वस्त किया कि अगर उसकी आगामी औलाद बेटी हुई तो वह उसे अपनी बेटी बनाकर उसकी शादी का पूरा खर्च स्वयं वहन करे उसे अपने घर से ही विदा करेगी। वीरवार को दर्शना ने लड़की की डोली अपने घर से ही विदा की। दर्शना ने इस शादी को पूरे रस्मों-रिवाज से संपन्न करवाकर शादी का पूरा घरेलू सामान भी दिया।</h5>
<h4 style="text-align:justify;">मदद मांगने वाला नहीं लौटता खाली</h4>
<h5 style="text-align:justify;">दर्शना महंत के दरवाजे पर मदद मांगने वाला कोई भी व्यक्ति अभी तक खाली नहीं लौटा। लड़कियों की शादी करवाने की बात हो या किसी अन्य तरह की कोई मदद। दर्शना हर समय तैयार रहती है। दर्शना ने बताया कि उसके पास पिछले करीब 25 वर्षां से रजनी महंत रह रही है। वे लोग जब भी किसी के यहां बधाई लेने जाते हैं तो किसी के साथ किसी तरह की कोई धक्केशाही नहीं करते। दर्शना अब तक अनेक लोगों की मदद कर चुकी है। दर्शना ने बताया कि इस जीवन का कोई भरोसा नहीं कब हाथ से निकल जाए। इसलिए जीते-जी जितनी नेकी हो सकती है वो करना चाहती है। दर्शना रजनी महंत को भी यही शिक्षा देती है कि नेकी का दामन कभी नहीं छोड़ना।</h5>
<h4>बेटियां बंटाती है दु:ख: दर्शना</h4>
<h5 style="text-align:justify;">दर्शना ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का भी शानदार संदेश दिया। उसने कहा कि इस पुरूष प्रधान समाज मेंं बेटियों को बेटों के समान दर्जा नहीं दिया जाता। लेकिन बेटियां बेटों से किसी क्षेत्र में कम नहीं है। पुत्र-कूपुत्र हो सकता है लेकिन बेटी कू बेटी कभी नहीं हो सकती। बेटी पराए घर जाने के बाद भी अपने मां-बाप की हमेशा फिक्र करती है। दर्शना ने अपील करते हुए कहा कि बेटियों को गर्भ में कभी न मरवाकर उन्हें दुनिया में आने का अवसर देना चाहिए। बेटियों को अगर बेटों सी परवरिश दी जाए तो वे भी माता-पिता, समाज व देश का नाम रोशन कर सकती है।</h5>
<h4 style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी ने दिया था सुखदुआ समाज का नाम</h4>
<h5 style="text-align:justify;">नाच-गाकर गलियों में घूमने वाले इन लोगों को किन्नर व हिजड़े या अन्य नामों से पुकारकर उन्हें तिरस्कृ त किया जाता था। जिसके बाद पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने इस समाज की सुध लेते हुए उन्हें सुखदुआ समाज का नया नाम दिया। क्योंकि उक्त लोग लोगों के लिए सुख की दुआ करते हैं। इस नाम के बाद इस समाज के लोगों को एक नई पहचान ही नहीं मिली बल्कि उनका सम्मान भी बढ़ा। अब इन लोगों को समाज में सुखदुआ समाज के नाम से जाना जाता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;">‘‘मुझे गरीब बेटियों की शादी करवाकर आत्मिक संतुष्टि मिलती है। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने हमारे समाज को सुखदुआ समाज का नाम देकर हमारा सम्मान बढ़ाया है। इस नए नाम के बाद लोगोंं की हमारे प्रति धारणा में बदलाव आया है और हमें समाज में सम्मान मिला है। हम पूज्य गुरू जी के आभारी हैं।</h5>
<p style="text-align:right;">–<em>दर्शना महंत</em></p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2020 21:00:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एक प्रयास और बदल गई सुखदुआ समाज &amp;#8216;किन्नर&amp;#8217; की तकदीर</title>
                                    <description><![CDATA[रंग लाया डेरा सच्चा सौदा का अभियान | SukhDua Samaj समाज की मुख्यधारा में शामिल होने व सिर उठाकर जीने का मिला कानूनी हक पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुरू की थी मुहिम सिरसा। कुदरत भले ही उनके साथ इंसाफ नहीं कर पाई, सुख की दुआ करने के बावजूद भले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/transgender-sukhdua-samaj/article-3308"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sukh-duaa-smaj.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">रंग लाया डेरा सच्चा सौदा का अभियान | SukhDua Samaj</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li>समाज की मुख्यधारा में शामिल होने व सिर उठाकर जीने का मिला कानूनी हक</li>
<li>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुरू की थी मुहिम</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिरसा।</strong> कुदरत भले ही उनके साथ इंसाफ नहीं कर पाई, सुख की दुआ करने के बावजूद भले ही वे जमाने के लिए हंसी के पात्र हों, दुनिया उन्हें कितनी ही हिकारत भरी नजरों से देखती हो, ट्रेनों बसों और घरों में उनके ताली ठोंकने पर लोग ठहाके लगाते हों लेकिन समाज के उपहास, उपेक्षा को झेलने के लिए अभिशप्त इन किन्नरों की जिंदगी के पीछे के असल दर्द को समझने व इनके जीवन को बदलने की अगर किसी ने सही मायने में पहल की तो वो मानवता भलाई के पुंज सर्व धर्म संगम डेरा सच्चा सौदा ने। किन्नरों की दशा सुधारने व उन्हें समाज की मुख्य धारा में डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन दिशा निर्देशन में पूज्य माता नसीब कौर जी इन्सां वुमेन वैल्फेयर सोसायटी ने वर्ष 2013 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका-604 दायर की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका पर सुनवाई करते हुए अप्रैल 2014 में न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति ए. के. सिकरी की खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए किन्नरों को पहचान के साथ कानूनी दर्जा देने का आदेश देते हुए थर्ड जेंडर यानि लिंग की तीसरी श्रेणी में शामिल करने का सम्मानजनक आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही न केवल किन्नरों को सदियों से मिले श्राप से मुक्ति मिल गई और अभिशप्त लाखों किन्नरों की अंधेरी जिंदगियों में उजियारा छा गया। सामाजिक व कानूनी मान्यता मिलने से किन्नर भी स्वंय को इस दुनिया का हिस्सा मानने लगे और उन्हें यकीन हो गया कि अब वे भी इस जमाने के साथ सर उठा के जी सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नियमित रक्तदान,आंखें दान व मरणोपरांत शरीरदान तक का लिया है प्रण</h3>
<p style="text-align:justify;">फैसले में वाकई हाशिये पर धकेले जाने वाले किन्नरों को समाज द्वारा कानूनी तौर पर स्वीकार करने का साहस दिखाया गया। लिंग की तीसरी श्रेणी में शामिल होने के साथ ही अब न केवल सुखदुआ समाज को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और नौकरियों में आरक्षण मिलने लगा है बल्कि सरकार उन्हें चिकित्सा व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है। केंद्र और राज्य सरकारें इनकी सामाजिक और लिंगानुगत समस्याओं का भी निवारण करने के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों व नौकरियों में पिछड़ों को दिया जाने वाला आरक्षण भी प्रदान करने लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बगैर किसी जाति-धर्म व ऊंच-नीच के भेदभाव से परे हटकर जीने वाले किन्नर समाज को कानूनी मान्यता दिए जाने के लिए बता दें कि डेरा सच्चा सौदा हमेशा ही किन्नरों को सामाजिक व कानूनी मान्यता दिए जाने का पक्षधर रहा है। पूज्य गुरु जी के आह्वान पर डेरा श्रद्धालुओं ने कई सालों तक लगातार देश-विदेश में हजारों जनजागरूकता रैलियां निकाल किन्नरों को सामाजिक हक दिलाने की मांग की थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">…जब किन्नर से बने सुखदुआ | SukhDua Samaj</h3>
<p style="text-align:justify;">हारमोनल इनबायलेंस के कारण आयी एक बीमारी की वजह से हमारा समाज हमेशा ही उन्हें कौतुहल से देखता आया है। सैंकड़ो-हजारोंं वर्षों से उपेक्षित इस समाज को किन्नर, हिजड़ा, छकका और भी न जाने किन-किन नामों से पुकारा जाता रहा लेकिन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 14 नवंबर 2009 को इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने की अनोखी व ऐतिहासिक मुहिम शुरू की और इन्हें सुखदुआ समाज का सम्मानजनक नाम देकर इनकी जिंदगी पर लगा धब्बा हमेशा के लिए मिटा दिया और इसी के साथ हो गई सुखदुआ समाज की अंधेरी जिंदगी में उजाले की श्ुारूआत जो आज भी निरंतर जारी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जमाना देता है गाली, वे दुआएं | SukhDua Samaj</h3>
<p style="text-align:justify;">भला करने वाले,भला ही किए जा, बुराई के बदले भलाई किए जा…शब्द की उपरोक्त पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया है डेरा सच्चा सौदा से जुड़े किन्नर यानि सुखदुआ समाज ने। खुद को हिकारत भरी नजरों से देखने वाले जमाने के लिए आज वे किसी मिसाल से कम नहीं। दुनिया उन्हें किन्नर, छकका आदि कहकर गाली देती है लेकिन वे अपना रक्तदान, आंखें दान व मरणोपरांत शरीरदान कर उसी जमाने के मुंह पर करारा तमाचा मार रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा द्वारा मानवता भलाई के कल्याणार्थ चलाई गई मुहिमों में सुखदुआ समाज के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आश्रम की ओर से लगाए गए रक्तदान कैंपों में सुखदुआ समाज के लोग भारी तादाद में खूनदान करने आते हैं और यही नहीं पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से सुखदुआ समाज के लोगों में से किसी ने नियमित रक्तदान तो किसी ने आंखें दान व मरणोपरांत शरीरदान तक का प्रण लिया हुआ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">…बजती है राम नाम की ताली | SukhDua Samaj</h3>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं के साथ-साथ भी आमजन इन्हें घृणा भरी दृष्टि से नहीं बल्कि सम्मान की नजरों से देखने लगे हैं। यहां ये राम नाम की ताली बजाते हुए नजर आते हैं और खास बात ये कि इनकी ताली पर कोई हंसता नहीं बल्कि इनके साथ मिलकर सहयोग करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेलों व सांस्कृतिक कायज्क्रमों में भी अव्वल | SukhDua Samaj</h3>
<p style="text-align:justify;">सुखदुआ समाज के बच्चों ने खेलों व सांस्कृतिक कायज्क्रमों में भी विशेष पहचान बनाई है। खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी अब वे बगैर किसी हीन भावना के खेलते हैं और इनका प्रदशज्न भी शानदार रहता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी ये मनोरंजन के साथ ही दशज्कों को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सफाई महाभियानों में हौंसले की झाड़ू | SukhDua Samaj</h3>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई के कार्यों में भी सुखदुआ समाज के लोगों के अंदर गजब का उत्साह नजर आ रहा है। हो पृथ्वी साफ , मिटें रोग अभिशाप महाभियान में भी सुखदुआ समाज कभी पीछे नहीं रहा। अब तक जितने भी सफाई महाभियान हुए,भारी तादाद में सुखदुआ समाज के लोग हर जगह झाडू लगाते हुए दिखाई पड़ते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मानवता भलाई के लिए चलते हैं कंधे से कंधा मिलाकर</h3>
<p style="text-align:justify;">मानवता भलाई के लिए बनाई गई शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोसज् विंग में भी सुखदुआ समाज के लोगों की भारी तादाद है और यही नहीं इनमें मानवता भलाई को लेकर गजब का जोश भी है। विंग द्वारा किए जा रहे जनकल्याण के सभी कार्यों में ये बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और साध संगत के साथ कंधे से कंध मिलाकर चलते हुए नजर आते हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2017 05:16:08 +0530</pubDate>
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