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                <title>GroundWater - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>GroundWater RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत में 2080 तक भूजल को तरस जाएंगे लोग!</title>
                                    <description><![CDATA[अगले दशकों में लगभग 3 गुणा बढ़ जाएगी भूजल की कमी: अध्ययन नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत के किसानों ने यदि मौजूदा दर से भूजल (Groundwater) का दोहन जारी रखा तो 2080 तक तो भूमिगत जल में तीन गुना कमी हो जाएगी, जो देश के खाद्य और जल सुरक्षा को खतरा पैदा कर सकता है। एक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/there-will-be-a-threefold-reduction-in-underground-water/article-51892"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/delhi-news.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">अगले दशकों में लगभग 3 गुणा बढ़ जाएगी भूजल की कमी: अध्ययन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत के किसानों ने यदि मौजूदा दर से भूजल (Groundwater) का दोहन जारी रखा तो 2080 तक तो भूमिगत जल में तीन गुना कमी हो जाएगी, जो देश के खाद्य और जल सुरक्षा को खतरा पैदा कर सकता है। एक नये अध्ययन में यह कहा गया है। अमेरिका स्थित मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा किये गये एक अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु के गर्म होने के कारण भारत में किसान सिंचाई के लिए भूजल का अधिक दोहन करने के लिए मजबूर हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, नतीजतन जल की घटी हुई उपलब्धता देश की 1.4 अरब आबादी के एक तिहाई से अधिक हिस्से की आजीविका को जोखिम में डाल सकती है, जिसके वैश्विक परिणाम हो सकते हैं। अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका एवं विश्वविद्यालय के स्कूल फॉर इन्वायरोन्मेंट एंड सस्टेनेबलिटी में प्रोफेसर मेहा जैन ने कहा, ‘‘भारत के भूजल का सबसे अधिक दोहन करने वाला देश होने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक खाद्य आपूर्ति के लिए इसके (भूमिगत जल के) एक महत्वपूर्ण संसाधन होने चलते यह एक चिंता का विषय है।’’</p>
<h3 style="text-align:justify;">तापमान में वृद्धि बिगाड़ रही स्थिति | Delhi News</h3>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन में, जलवायु के गर्म होने के चलते भूजल के दोहन में हालिया बदलावों का विश्लेषण किया गया है। इसके तहत भूजल के स्तर के ऐतिहासिक आंकड़ों और भारत में भूजल में कमी के भविष्य के आंकड़ों का आकलन किया गया। शोधार्थियों ने कहा कि इसके अलावा, इसने उष्ण परिस्थितियों में सिंचाई बढ़ने की जरूरत पर भी गौर किया, जिससे जल की मांग बढ़ने की संभावना है। अध्ययन के मुख्य लेखक निशान भट्टाराई ने कहा, ‘‘हमारे मॉडल अनुमानों का उपयोग करते हुए, हमने यह अनुमान किया कि अभी जैसे परिदृश्य में तापमान बढ़ने से भविष्य में भूजल में तीन गुना कमी हो सकती है और दक्षिण एवं मध्य भारत सहित अधिक भूजल दोहन वाले क्षेत्रों का विस्तार हो सकता है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">शोधार्थियों ने कहा कि ज्यादातर मॉडल में बढ़े हुए तापमान, मानसून की बढ़ी हुई बारिश (जून से सितंबर) और आने वाले दशकों में भारत में सर्दियों के मौमस में घटी हुई मात्रा में बारिश पर गौर किया गया है। भट्टाराई ने कहा कि भूजल का संरक्षण करने की नीतियों और हस्तक्षेप के बगैर, तापमान बढ़ने से भारत में भूजल में कमी की समस्या देश की खाद्य और जल सुरक्षा को और बढ़ा सकती है। Delhi News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल से जुड़ी से जुड़ी बड़ी खबर" href="http://10.0.0.122:1245/big-news-related-to-petrol-and-diesel/">Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल से जुड़ी से जुड़ी बड़ी खबर</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Sep 2023 15:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अत्यधिक बालू खनन से गिरता भूजलस्तर</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में किसी भी देश के विकास हेतु अर्थव्यवस्था को गति देना आवश्यक होता है। अर्थव्यवस्था को गतिशीलता प्रदान करने में आधारभूत संरचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आधारभूत संरचना के अंतर्गत फ्लाईओवर, बाँँध,सेतु,सड़क आदि तत्व सम्मिलित है। ज्ञातव्य है कि सभी संरचनाओं के निर्माण में बालू की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/drops-excessive-sand-mining-groundwater-levels/article-5624"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/drops-excessive-sand-mining-groundwater-levels.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान में किसी भी देश के विकास हेतु अर्थव्यवस्था को गति देना आवश्यक होता है। अर्थव्यवस्था को गतिशीलता प्रदान करने में आधारभूत संरचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आधारभूत संरचना के अंतर्गत फ्लाईओवर, बाँँध,सेतु,सड़क आदि तत्व सम्मिलित है। ज्ञातव्य है कि सभी संरचनाओं के निर्माण में बालू की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक इमारतों के निर्माण में भी बालू एक महत्वपूर्ण घटक है। दरअसल बालू एक ऐसा तत्व है जो जल में घुलनशील नहीं होता है और सीमेंट के साथ मिलकर इमारतों, फ्लाईओवर आदि को मजबूती प्रदान करता है और मौसम की मार जैसे बरसात और आंधी से भी सुरक्षित रखता है, इसलिए भारत में आधारभूत संरचना के निर्माण से लेकर व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक इमारतों का निर्माण होता है ।</p>
<p style="text-align:justify;">समस्या यह है कि बालू के दोहन का स्त्रोत तो नदियां है और नदियों से पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन कर बालू का दोहन व्यापक पैमाने पर हो रहा है। ऐसे में नदियां अपना मूलस्वरूप खोती जा रही है। इसके अलावा भी नदी का एक महत्वपूर्ण कार्य है भूजलस्तर को बनाए रखना ,लेकिन कुछ वर्षों से जिस प्रकार नदियों से बालू का दोहन जारी है उससे कुछ नदियों में बालू समाप्त हो चुका है और कुछ में समाप्त होने के कगार पर है। जैसे झारखंड के गोड्डा जिले में स्थित कझिया नदी को देखा जा सकता है। अवैध खनन से इस नदी का अस्तित्व तो संकट में है साथ ही प्राणियों का अस्तित्व भी संकट में है इसलिए कझिया को बचाने के लिए गोड्डा में लोग आंदोलन कर रहे है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल अवैध खनन के फलस्वरूप कझिया नदी बालू से महरुम हो चुकी है और सिंचाई और पेय जल के समक्ष संकट उत्पन्न हो रहा है क्योंकि भूजल स्तर भी काफी नीचे जा चुका है। ऐसे में स्थानीय लोगों के समक्ष आंदोलन के अतिरिक्त कोई मार्ग शेष नहीं है। कुछ समय पूर्व कझिया नदी का एक ऐसा दृश्य दिखाई दिया जिसमें इस नदी के पानी में केवल पीली मिट्टी दिखाई दी। ऐसा लग रहा था कि यह नदी न होकर किसी गढ्ढे में जल को एकत्रित कर दिया गया है। ऐसे में यह पानी तो इस्तेमाल लायक था ही नहीं। जैसे केरल में भीषण बाढ़ के फलस्वरूप पानी तो चारों ओर था लेकिन इस्तेमाल लायक नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">
ऐसा नहीं है कि भारत में अवैध खनन किसी एक राज्य ,एक नदी की समस्या है बल्कि लगभग सभी नदियां इसी संकट से जूझ रही हैं। यमुना नदी के संदर्भ में देखेंं तो यही स्थिति है। दिल्ली आने से पूर्व ही यमुना के पानी को बांध बनाकर रोका गया है जिसके कारण कई किलोमीटर तक यमुना में पानी ही नहीं है। ऐसे में यहाँ तो यमुना नदी के अंदर से बालू का अवैध खनन किया गया जिसके परिणामस्वरूप नदी में बालू नाममात्र भी नहीं है जिसके कारण यह इलाका पानी के संकट से जूझ रहा है और कृषि प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार के डेहरी आन सोन में सोन नदी भी अवैध खनन से प्रभावित हो रही है। ऐसा नहीं है अवैध खनन से कोई एक नदी प्रभावित है बल्कि अन्य नदियाँँ जैसे घाघरा ,गंडक ,यमुना,टोंंस आदि अवैध खनन से प्रभावित है। अवैध खनन से आश्य निर्धारित सीमा से ज्यादा बालू का खनन करना जो नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र से मनुष्यों द्वारा खिलवाड़ करना है ,लेकिन यह सोचने की आवश्यकता है कि हम नदियों को कुछ नहीं दे रहे हंै बल्कि उनसे ले रहे है। तो क्या नदियों से छेड़छाड़ कर मनुष्य अपने लिए संकट को निमंत्रण नहीं दे रहा है और साथ साथ उन पशु पक्षियों जो नदियों के जल को पेय जल के रुप में इस्तेमाल करते है उनके अस्तित्व को भी मनुष्य अपनी स्वार्थी नीति के कारण संकट में डाल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">
ऐसे में आवश्यता है कि देश में आधारभूत संरचना और गैर आधारभूत संरचना के कंस्ट्रक्शन हेतु भारी मात्रा में बालू का प्रयोग हो रहा है । उसके स्थान पर वैकल्पिक तत्व की तलाश करनी चाहिए जिससे नदियों को बचाया जा सके। दूसरा अवैध खनन पर भी लगाम लगाना चाहिए क्योंकि इससे नदियों से कई गुना बालू निकाला जाता है। जिससें नदियों में या आसपास बालू दिखाई ही नहीं पड़ता है जिसके कारण नदी की जल को अवशोषित करने की क्षमता न के बराबर हो जाती है। इसका दुष्प्रभाव भूजलस्तर काफी नीचे चला जाता है ।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञातव्य है भारत में खेतों को जल पहुंचाने हेतु कई साधनों का प्रयोग किया जाता है जैसे तालाब ,नहर ,कुंआ,नलकूप आदि। उत्तर प्रदेश सरीखे राज्य में नलकूपों से अत्यधिक सिंचाई होती है। ऐसे में भूजल का स्तर नीचे जाने का अर्थ सूखे को निमंत्रण देगा। दूसरा भूजल के नीचे जाने का अर्थ पेयजल के समक्ष संकट उत्पन्न होना है क्योंकि आज भी भारत में ज्यादातर पेयजल हेतु जमीन के नीचे के जल को उपयोग में लाया जाता है। अत: आवश्यक है कि सरकारों और प्रशासन को इस मसले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि आने वाले संंकटो से लोगों को बचाया जा सके। अनीता वर्मा</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Aug 2018 15:01:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>25 मीटर पाताल की ओर खिसका पानी</title>
                                    <description><![CDATA[तेजी से नीचे गिर रहा भू-जल स्तर, टयूबवैल के बोर भी देने लगे जवाब, धान रोपाई पर संकट मानसून की बरसात में ही छोड़ा जाता है पानी सच कहूँ/लाजपतराय/रादौर। किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली पश्चिमी यमुनानहर लगभग 8 महीने से सूखी है। जिस कारण यह नहर अब किसानों के लिए अभिशाप बनकर रह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/groundwater-level-falling-rapidly/article-4451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/canal.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">तेजी से नीचे गिर रहा भू-जल स्तर, टयूबवैल के<br />
बोर भी देने लगे जवाब, धान रोपाई पर संकट</h1>
<ul>
<li><strong>मानसून की बरसात में ही छोड़ा जाता है पानी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/लाजपतराय/रादौर।</strong> किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली पश्चिमी यमुनानहर लगभग 8 महीने से सूखी है। जिस कारण यह नहर अब किसानों के लिए अभिशाप बनकर रह गई है। सुखी नहर के कारण खादर क्षेत्र के गांव का भू-जलस्तर तेजी से नीचे गिरते जा रहा है। गिरते जल स्तर के कारण बहुत से गांवों में किसानों के टयूबवैल के बोर ठप्प होते जा रहे हैं, जिसके चलते किसानों के लिए धान की रोपाई करना मुश्किल हो गया है।</p>
<h1 style="text-align:center;">8 माह से पश्चिमी यमुनानहर का सूखना भी बड़ी वजह</h1>
<p style="text-align:justify;">किसानों की जीवन रेखा कही जाने वाली पश्चिमी यमुनानहर के सुखी होने से रादौर क्षेत्र तेजी से डार्क जोन की ओर बढता जा रहा है। रादौर के साथ लगता लाडवा ब्लॉक पहले से ही सरकार डार्क जोन घोषित कर चुकी है। ऐसे में अब सूखी नहर के कारण जल स्तर अचानक 20 से 25 फुट नीचे चले जाने के कारण किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो गया है। जिसको लेकर किसानों ने सरकार व सिंचाई विभाग से पश्चिमी यमुनानहर में जल्द से जल्द पानी छोडे जाने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव खुर्दबन निवासी कर्मवीर खुर्दबन व धौलरा निवासी दलबीरसिंह ने बताया कि कई महीनों से पश्चिमी यमुनानहर सूखी पडृी है। नहर के सुखा होने का असर उनके टयूबवैल के पानी पर पड़ने लगा है। नहर के कारण पानी का जल स्तर बना रहता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से नहरी विभाग ने पश्चिमी यमुनानहर में पानी छोड़ना बंद कर दिया है। मात्र मानसून के दौरान ही बारिश होने पर नहर में पानी छोड़ा जाता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">इन गांवों में तेजी से खिसक रहा पानी</h1>
<p style="text-align:justify;">सूखी नहर के कारण गांव खुर्दबन, धौलरा, धनौरा रतनगढ, कांजनू, जुब्बल, दामला, खुर्दी सांगीपुर, घेसपुर, रादौर, भगवानगढ, भगवानपुर, पोटली, आदि गांव में जल स्तर तेजी से नीचे गया है। इसका असर उनकी खेती पर पडा है। जब तक पश्चिमी यमुनानहर में पानी रहा तब तक उनका जल स्तर नीचे नहीं गया और उनकी खेती भी ठीक हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अब ऐसा नहीं है। नहर के सूखने का असर पूरे क्षेत्र के गांव में पड़ रहा है। इसके बावजूद नहरी विभाग नहर में पानी छोड़ने को लेकर गंभीर नहीं है। यदि समय रहते सरकार ने पश्चिमी यमुनानहर में पानी नहीं छोडा तो क्षेत्र को डार्क जोन में जाने से कोई नही रोक पाएगा जिसको लेकर किसानों ने सरकार व सिंचाई विभाग से पश्चिमी यमुनानहर में जल्द से जल्द पानी छोडेÞ जाने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहंीं नहरी विभाग के एसडीओ राजेश कुमार यादव ने बताया कि पानी की कमी के कारण नहर में पानी नहीं छोडा जा सका है। बरसात होने पर नहर में पानी छोडा जाएगा। 30 जून को विभाग की ओर से नहर में पानी छोडे जाने की योजना है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/groundwater-level-falling-rapidly/article-4451</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 09:00:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण हरियाणा में भूमिगत जल में होगी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[भालोट व झज्जर सब-ब्रांच की री-माडलिंग को मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी दक्षिणी हरियाणा को सिंचाई के लिए मिलेगा पानी ChandiGarh, SachKahoon News: भालोट व झज्जर सब-ब्रांच की क्षमता बढ़ाने और री-माडलिंग करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वापकोस द्वारा दी जाने वाली परामर्श सेवाओं हेतु अपनी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित परियोजना मुख्यमंत्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/south-haryana-will-rise-in-the-groundwater/article-398"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/manoharlalkhattar1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>भालोट व झज्जर सब-ब्रांच की री-माडलिंग को मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दक्षिणी हरियाणा को सिंचाई के लिए मिलेगा पानी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ChandiGarh, SachKahoon News: </strong>भालोट व झज्जर सब-ब्रांच की क्षमता बढ़ाने और री-माडलिंग करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वापकोस द्वारा दी जाने वाली परामर्श सेवाओं हेतु अपनी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित परियोजना मुख्यमंत्री के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और विशेषतौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अभिलक्षित विजन का एक भाग है। भालोट और झज्जर सब-ब्रांच की क्षमता बढ़ने से मानसून के दौरान यमुना नदी के पानी के प्रयोग को सुनिश्चित किया जाएगा और इससे दक्षिणी हरियाणा को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा तथा भूमिगत जल में बढ़ोतरी होगी।<br />
उन्होंने बताया कि इस उद्देश्य के लिए भालोट सब-ब्रांच की क्षमता को हैड पर आरडी 0 से 156014 और 2052 क्यूसिक से 2596 क्यूसिक तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे झज्जर सब-ब्रांच के माध्यम से आरडी 0 से 160986 तक बढ़ाया जाएगा।<br />
इन सब-ब्रांचों की क्षमता बढ़ाने तथा री-माडलिंग के लिए वापकोस द्वारा कार्य किया जाएगा, जिसमें एल-सैक्शन का डिजाइन, भालोट सब-ब्रांच के लिए खुबरू हैड पर हैड रैग्युलेटर और अंदरूनी स्ट्रक्चर, वर्तमान संचालित हैड की सुरक्षा का कार्य और झज्जर सब-ब्रांच के अंत में पम्प हाउस के डिजाइन का कार्य शामिल है।</p>
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                <pubDate>Sun, 04 Dec 2016 01:42:31 +0530</pubDate>
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