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                <title>Basmati Rice - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Basmati Rice RSS Feed</description>
                
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                <title>बासमती के निर्यात से तुरंत हटाई जाए पाबंदियां: मान</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए केन्द्र से की मांग ग्रामीण विकास फंड रोकने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा | Bhagwant Mann लुधियाना (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्र सरकार द्वारा बासमती के निर्यात पर लगाई पाबंदियों को पंजाब और किसान विरोधी कदम बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Mann) ने केन्द्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/restrictions-on-export-of-basmati-should-be-removed-immediately-bhagwant-mann/article-52399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/ludhiana-news-5.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए केन्द्र से की मांग</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>ग्रामीण विकास फंड रोकने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा | Bhagwant Mann</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्र सरकार द्वारा बासमती के निर्यात पर लगाई पाबंदियों को पंजाब और किसान विरोधी कदम बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Mann) ने केन्द्र सरकार से इस मनमाने फैसले को तुरंत वापस लेने की माँग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को यहां पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय किसान मेले के आखिरी दिन बड़ी संख्या में पहुँचे किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि केन्द्र सरकार का यह बेतुका फैसला किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को आर्थिक तौर पर बड़ा नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र ने बासमती चावलों का कम से कम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन तय कर दिया है, जिससे बासमती की घरेलू कीमतों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री (Bhagwant Mann) ने कहा कि मेहनतकश किसान खेती लागतें बढ़ने और कम भाव मिलने के कारण पहले ही संकट में डूबे हुए हैं। सीएम मान ने कहा कि देश में बासमती का सबसे अधिक उत्पादन पंजाब में होता है और केन्द्र सरकार का यह फैसला हमारे किसानों के हितों को बुरी तरह से प्रभावित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य में फसलीय विविधता के अंतर्गत मूँग की दाल, बासमती और अन्य वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े प्रयास कर रही है, परन्तु दूसरी ओर केंद्र की ऐसी नीतियों से हमारी मुहिम को चोट पहुँच रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री (Bhagwant Mann) ने केन्द्र सरकार का यह कदम किसान विरोधी और पंजाब विरोधी बताया है, जिसका राज्य सरकार द्वारा जोरदार विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केंद्रीय पाबंदियों के मद्देनजर बासमती चावल पश्चिमी बंगाल, केरला जैसे राज्यों को बेचने पर भी गौर कर रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="देश भर में 31 जीएसटी अदालतें मंजूर, हरियाणा में हिसार और गुड़गांव से चलेंगी जीएसटी न्यायपीठ" href="http://10.0.0.122:1245/thirty-one-gst-courts-approved-across-the-country/">देश भर में 31 जीएसटी अदालतें मंजूर, हरियाणा में हिसार और गुड़गांव से चलेंगी जीएसटी न्यायपीठ</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Sep 2023 21:50:44 +0530</pubDate>
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                <title>Basmati Rice: बासमती धान: कम लागत में पाएं बेशुमार पैदावार</title>
                                    <description><![CDATA[देश में मॉनसून का आगाज होने वाला है। इसके साथ ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रेदश, तमिलनाडु और बिहार सहित पूरे देश में किसान धान की खेती में लग जाएंगे। ऐसे तो पूरे देश में धान की कई किस्मों की खेती की जाती है, लेकिन बासमती के क्या कहने! इसका कोई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/cultivation-of-basmati-rice/article-48125"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/cultivation-of-basmati-rice.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में मॉनसून का आगाज होने वाला है। इसके साथ ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रेदश, तमिलनाडु और बिहार सहित पूरे देश में किसान धान की खेती में लग जाएंगे। ऐसे तो पूरे देश में धान की कई किस्मों की खेती की जाती है, लेकिन बासमती के क्या कहने! इसका कोई तोड़Þ नहीं है। यह अपने स्वाद, सुगंध के लिए मशहूर है। आपको बता दें कि बासमती धान की भी कई किस्में होती हैं और सबका अपना-अपना स्वाद और फ्लेवर होता है। अगर किसान भाई बासमती धान की खेती करने का प्लान बना रहे हैं, तो उन्हें आज ऐसी किस्मों के बारे में बताया जा रहा है जिससे बंपर पैदावार मिलेगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चुकंदर, धन देने में धुरंधर ! अमीर बनना है तो फसल ऐसे उगाएं, मन माफिक मुनाफा पाएं" href="http://10.0.0.122:1245/do-sugar-beet-farming-to-become-rich/">चुकंदर, धन देने में धुरंधर ! अमीर बनना है तो फसल ऐसे उगाएं, मन माफिक मुनाफा पाएं</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">बासमती धान की किस्में | (Cultivation of Basmati Rice)</h3>
<p style="text-align:justify;">पूसा 834: पूसा 834 उच्च उपज वाली बासमती धान की एक बेहतरीन किस्म है। इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है। इसमें रोग से लड़ने की क्षमता अधिक पाई जाती है। इसके ऊपर झुलरा रोग का कोई असर नहीं पड़ेगा। पूसा 834 अर्ध- बौनी किस्म है। तेज हवा और आंधी चलने पर भी इसकी फसल खेत में नहीं गिरती है। खास बात है कि यह किस्म 125 से 130 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। यानी कि 130 दिन बाद आप इसकी कटाई कर सकते हैं। अगर पैदावार की बात करें तो 6-7 टन धान आप प्रति हेक्टेयर उत्पादित कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पंत धान-12: पंत धान 12 बासमती की एक बेहतरीन किस्म है। यह कम समय में ही पक कर तैयार हो जाती है। इसकी उपज क्षमता भी अन्य बासमती किस्मों के मुकाबले अधिक है। अगर किसान भाई इसकी खेती करते हैं, तो 110 से 115 दिन में ही फसल पक कर तैयार हो जाती है। इससे प्रति हेक्टेयर आपको 7-8 टन उपज मिलेगी। पंत धान 12 को भी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने पंत यूनिवर्सिटी आॅफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर विकसित किया है। इसी लिए इसका नाम पंत दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बासमती (Cultivation of Basmati Rice) की एक उच्च उपज वाली किस्म है। इसे शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने तैयार किया है। यह भी एक अर्ध-बौनी किस्म है। ऐसे में तेज हवा का उसके ऊपर कोई असर नहीं पड़ता है। यह एक सिंचित धान की किस्म है, जिसकी सबसे अधिक खेती जम्मू- कश्मीर में की जाती है। इसकी फसल को तैयार होने में 135 से 140 दिन लग जाते हैं। इसकी उपज क्षमता प्रति हेक्टेयर 6-7 टन है। यह सूखा, जलभराव और खारे पानी का भी असानी से सहन कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूसा-1401: पूसा-1401 को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विकसित किया है। यह एक बासमती धान की अर्ध- बौनी किस्म है। इसकी फसल को आप 135 से 140 दिन बाद काट सकते हैं। इसकी खेती नॉर्थ इंडिया के सिंचित क्षेत्रों में की जाती है। इसकी उपज क्षमता प्रति हेक्टेयर 4-5 टन है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/cultivation-of-basmati-rice/article-48125</link>
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                <pubDate>Sat, 27 May 2023 15:30:33 +0530</pubDate>
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                <title>मिलावटखोरी का कालाधंधा जानलेवा</title>
                                    <description><![CDATA[मिलावटखोरी का काला व्यापार रूकने का नाम नहीं ले रहा। बिहार में नकली बासमती चावल बनाने का पर्दाफाश हुआ है। यह मिलावटखोर 30 रुपए वाले चावलों में एक पाऊडर मिलाकर उसे 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे थे। यह धंधा इतने बड़े स्तर पर हो रहा था कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/fake-basmati-rice-making-busted/article-3342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/rice.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मिलावटखोरी का काला व्यापार रूकने का नाम नहीं ले रहा। बिहार में नकली बासमती चावल बनाने का पर्दाफाश हुआ है। यह मिलावटखोर 30 रुपए वाले चावलों में एक पाऊडर मिलाकर उसे 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे थे। यह धंधा इतने बड़े स्तर पर हो रहा था कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व गुजरात तक इन चावलों की सप्लाई हो रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल मिलावटखोरी भी हाईटैक हो रहे हैं, जो वैज्ञाानिक खोजों को गलत तरीके से प्रयोग कर रहे हैं। इस साल खपतकारों (उपभोक्ताओं) की केवल जेब ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य पर भी गलत असर पड़ रहा है। अब यह सवाल भी उठता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग और खाद्य व आपूर्ति क्या कर रहा है? हजारों की संख्या में इन विभागों के कर्मचारी मिलावटखोरी को रोकने के लिए क्यों कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं? आखिर इतने बड़े व्यापार का पर्दाफाश करने में इतनी देरी क्यों हुई? मिलावटखोरों पर मुकदमें तो होते हैं पर सजा हुई तो ऐसा बहुत कम है। आखिर दोषी किसी वजह से सजा से बच जाते है। ऊपर से सिर पर त्यौहारों का सीजन हो।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल नकली खोए की बड़ी खेपें बरामद होती है लेकिन इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी। मिलावटखोरी भी नशा तस्करी से कम खतरनाक नहीं। चावलों में प्रयोग होने वाला खुशबूदार पाऊडर रसायनयुक्त होता है जो बीमारियों का कारण बनता है। मिलावटखोरी का नैटवर्क इतना बड़ा कारोबार बन गया है कि मिलावटखोर लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालकर अरबों रुपए कमा रहे हैं। हालात यह है कि त्यौहारी सीजन के दौरान जब भी सैंपल भरे जाते है उनमें अधिकतर फेल हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खाद्य व आपूर्ति विभाग द्वारा विभिन्न दुकानों से भरे 167 सैंपलों में से सभी फेल साबित हुए। इसी तरह दूध की कमी के कारण दूध से दूध बनने वाले पदार्थों में मिलावट जोरों पर है। पनीर खरीदने वाले लोग काफी दुविधा में नजर आते है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिलावटखोरी केवल छोटे-मोटे दुकानदारों तक सीमित नहीुं रही। बल्कि यह बड़े नैटवर्क का रुप धारण कर चुकी है व इसका दायरा लगतार बढ़ता जा रहा है। मिलावटखोरी रोकने के लिए भ्रष्टाचार का रोकना अति जरूरी है। जनता को इस बारे में जागरुक करने की भी जरुरत है कि वह खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता की जांच करवाएं। अधिकारी इस बात पर जरुर ध्यान दें यदि वह मिलावट प्रति गंभीर न हुए तो इसके दुष्प्रभाव से वे खुद व उनके परिवारिक सदस्य भी नहीं बच सकेंगे। मिलावटखोरी रोकना, देश को मजबूत करना है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2017 03:50:42 +0530</pubDate>
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