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                <title>मोगा : गाना बंद करने पर दूल्हे के दोस्तों ने चलाई गोलियां, डीजे संचालक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मोगा में शनिवार रात को एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। दरअसल, विवाद शादी समारोह में डीजे वाले के द्वारा गाने बंद कर देने के बाद शुरू हुआ, जिसके बाद शराब के नशे में दूल्हे के दोस्तों और रिश्तेदारों ने डीजे वाले को पीट दिया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/friends-of-the-groom-opened-fire-dj-operator-died/article-11580"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/crime.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">शराब के नशे में धुत थे गोलियां चलाने वाले युवक, परिवार एक घंटे तक शव नहीं उठाने पर अड़ा रहा | Crime</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, तीन गिरफ्तार</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नाच रहे युवकों ने पहले युवक को मारे थे थप्पड़, फिर दी गोलियां चलाने की धमकियां</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोगा/धर्मकोट (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मोगा में शनिवार रात को एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। दरअसल, विवाद शादी समारोह में डीजे वाले के द्वारा गाने बंद कर देने के बाद शुरू हुआ, जिसके बाद शराब के नशे में दूल्हे के दोस्तों और रिश्तेदारों ने डीजे वाले को पीट दिया। <strong>(</strong>Crime<strong>)</strong> इन लोगों ने गुंडागर्दी को दिखाते हुए लगभग 150 हवाई फायर भी किए और इन्हीं में से एक गोली डीजे वाले को लग गई। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि इन लोगों ने एक घंटे तक शव को भी नहीं उठाने दिया। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज करते हुए तीन को गिरफ्तार भी कर लिया है। इसके अलावा खास बात यह रही कि शादी का खाना भी गरीबों में बांटना पड़ा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यहां से छिड़ा विवाद</h2>
<p style="text-align:justify;">कस्बा कोट ईसे खां के चीमा रोड़ निवासी गुरसेवक सिंह ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि शनिवार रात को गांव मस्तेवाला में मेजर सिंह के बेटे निरवैर सिंह की शादी के चलते जागो व डीजे का प्रोग्राम बुक था। वह अपने चचेरे भाइयों जसविंदर सिंह, कर्ण सिंह उर्फ गोरा के साथ वहां गया था। रात 10 बजने के बाद उसने सरकारी आदेश अनुसार डीजे नहीं बजा सकने की बात कही तो नशे की हालत में हालत में नाच रहे युवकों ने उसे थप्पड़ मारे। साथ ही गोली मार देने की धमकी देते हुए जबरन डीजे बजवा पंजाबी गानों पर 10-15 लोग हवाई फायर करने लगे। इन लोगों ने करीब 150 फायर किए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जश्न में खलल: नहीं हुआ समझौता, भागे बाराती | Crime</h2>
<p style="text-align:justify;">दूल्हे के रिश्तेदार सुखदीप सिंह निवासी धर्म सिंह वाला ने भी दोनाली से एक गोली कर्ण सिंह की छाती पर जा लगी। इस वजह से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अब गोलियों का शोर तो थम गया था, मगर नया पंगा शुरू हो गया। आरोपी पक्ष के लोग मामले की रफा-दफा करने के लिए 5 लाख रुपए देने की बात कर रहे थे, वहीं दूसरे तरीके से भी दबाव बना रहे थे, जिन्होंने एक घंटे तक बरामदे में पड़े कर्ण के शव को नहीं उठाने दिया। आखिर समझौते की बात सिरे नहीं चढ़ते देख वो लोग मौके से भाग खड़े हुए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पुलिस ने की यह कार्रवाई</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जानकारी मिलते ही एसएसपी अमरजीत सिंह बाजवा, एसपीडी हरिंद्रपाल सिंह परमार व अन्य पहुंचे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सुखचैन सिंह नामक युवक को असलहे के साथ पकड़ लिया और कई हथियारों को कब्जे में ले लिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पुलिस ने गुरसेवक सिंह के बयान पर सुखदीप सिंह निवासी धर्म सिंह वाला, मेजर सिंह निवासी मस्तेवाला,<br />
शरणप्रीत निवासी सैदशाह वाला, जगरूप निवासी अमरगढ़ बाणियां व सुखचैन निवासी<br />
गांव मस्तेवाला के खिलाफ धारा हत्या, दहशत फैलाने, धमकाने, असला एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दूल्हे के पिता मेजर सिंह को केस में नामजद किया गया और उसे उसके भाई व सुखचैन सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया है।</strong></li>
</ul>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2019 21:08:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ज्ञान गंगा में गोते लगाना है तो पुस्तक से कीजिये दोस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[समय परिवर्तनशील है। पुस्तकें कल की बात होगई है। आज इंटरनेट का भूत युवा पीढ़ी पर सवार है। आज का युवा प्रेमचंद को नहीं जानता। महादेवी वर्मा, दिनकर , विमल चटर्जी , मन्मथनाथ गुप्त, शरत चंद्र को नहीं पहचानता। इसका एकमात्र कारण हमारी शिक्षा प्रणाली है। स्कूल में पुस्तकालय है मगर वहां किशोर नहीं जाता। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/books-friends/article-8667"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/book.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">समय परिवर्तनशील है। पुस्तकें कल की बात होगई है। आज इंटरनेट का भूत युवा पीढ़ी पर सवार है। आज का युवा प्रेमचंद को नहीं जानता। महादेवी वर्मा, दिनकर , विमल चटर्जी , मन्मथनाथ गुप्त, शरत चंद्र को नहीं पहचानता। इसका एकमात्र कारण हमारी शिक्षा प्रणाली है। स्कूल में पुस्तकालय है मगर वहां किशोर नहीं जाता। उसे मोबाइल की लत लग गयी है। अध्यापक भी पुस्तकालय जाने को प्रेरित नहीं करता इसलिए वह किसी नामचीन लेखक को नहीं जानता। पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र थी मगर अब नहीं है। स्कूल की छोड़ों घर पर अभिभावक भी उन्हें अच्छी पुस्तकों से परिचित नहीं करवाते। युवा के लिए पाठ्यपुस्तक या कोचिंग की पुस्तकें ही सब कुछ है। कालजयी रचनाकार बाबू देवकी नंदन खत्री की पुस्तकों का ज्ञान भी नहीं है। पुस्तकें अब पुस्तकालय की शोभा बढ़ा रही है। चिंतन की बात तो यह है की पुस्तकें कैसे पुस्तकालय से बाहर निकले और युवा का रुझान इनके प्रति कैसे हो यह विचारने की बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर सच्ची दोस्ती चाहिए तो किताबों को दोस्त बना लो क्योंकि वो कभी दगा नहीं देती है और ना ही झूठ के रास्ते पर चलती। लेकिन इंटरनेट के युग में व्यक्ति किताबों से काफी दूर हो गया है इसी बात के मद्देनजर और लोगों के दिलों में किताबों के प्रति प्रेम जगाने के लिए विश्व पुस्तक दिवस की शुरूआत हुई। विश्व पुस्तक दिवस दुनिया भर में 23 अप्रैल को मनाया जायेगा। पुस्तकें हमारे जीवन को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और हमेशा हमारे साथ एक सच्चे दोस्त की तरह रहती हैं, बशर्ते हमारे अंदर पढ़ने और सीखने का जज्बा हो। एक जमाना था जब किताबें सभी की अच्छी दोस्त हुआ करती थीं। जैसे-जैसे डिजिटलाइजेशन बढ़ता गया किताबें भी हमसे दूर होती चली गईं। अब किताबों की जगह मोबाइल, कंप्यूटर आदि इंटरनेट माध्यमों ने ले ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">बचपन से बुढ़ापे तक पठन पाठन का काम अनवरत चलता रहता है। पुस्तक ने एक मित्र की भांति सदा हमारा साथ निभाया है। लेकिन अब इंटरनेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी के कारण पुस्तकों से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है। आज पुस्तक के बजाय इंटरनेट हमारा साथी बन बैठा है। हमने पुस्तक के व्यावहारिक,शिक्षाप्रद, मनोरंजक और बहुमुखी ज्ञान से अपनी दूरी बनाली है। इंसान और पुस्तक के मध्य उत्पन्न हुई इस दूरी को समाप्त करने के लिए यूनेस्को ने 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।<br />
आज का युवा पुस्तक का मतलब पाठ्यपुस्तक ही समझता है। स्कूल और कॉलेज में पुस्तक लाइब्रेरी जरूर है मगर उसमें जाने का समय विद्यार्थी के पास नहीं है। कक्षा में विषयों के पीरियड अवश्य होते है खेलकूद का भी समय होता है मगर पुस्तक पढ़ने अथवा पुस्तकालय का कोई पीरियड नहीं होता। अध्यापक भी बच्चों को पुस्तक या सद साहित्य पढ़ने संबंधी कोई जानकारी नहीं देते। यही कारण है कि इन्टरनेट के इस युग में हम पुस्तक को भूल गए है।</p>
<p style="text-align:justify;">पढ़ने का मतलब इस संचार क्रांति में इन्टरनेट ही रह गया है युवा चौबीसों घंटे हाथ में मोबाइल लिए इन्टरनेट पर चैट करते मिल गाएंगे। वे पुस्तक से परहेज करने लगे है मगर मोबाइल को रिचार्ज करना नहीं भूलते। उन्हें घर या बाहर यह बताने वाला कोई नहीं है की पुस्तकों का भी अपना एक संसार है। वे प्रेमचंद की किसी पुस्तक के बारे में नहीं जानते। कॉमेडियन कपिल के शो के बारे में जरूर जानते है। शरत चंद्र या हरिशंकर परसाई की किसी शख्सियत से वाकिफ नहीं है। उन्हें पुस्तक अथवा पुस्तक की महिमा से कोई लेना देना नहीं है। वे पुस्तक मेले में जाना नहीं चाहते। वे किसी अच्छे मॉल में जरूर जाना चाहते है जहाँ उन्हें अपनी मन पसंद खाने पीने और पहनने की वस्तु मिल जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">पुस्तक या किताब लिखित या मुद्रित पेजों के संग्रह को कहते हैं।, पुस्तकें ज्ञान का भण्डार है । पुस्तकें हमारी दुष्ट वृत्तियों से सुरक्षा करती हैं। इनमें लेखकों के जीवन भर के अनुभव भरे रहते हैं। अच्छी पुस्तकें पास होने पर उन्हें मित्रों की कमी नहीं खटकती है वरन वे जितना पुस्तकों का अध्ययन करते हैं । पुस्तकें उन्हें उतनी ही उपयोगी मित्र के समान महसूस होती हैं । पुस्तक का अध्ययन मनन और चिंतन कर उनसे तत्काल लाभ प्राप्त किया जा सकता है । कहानियों के जरिये बच्चे बहुत सी नई चीजों को सीखते हैं। पुस्तकों का अध्ययन कम हो गया है। पुस्तकें ज्ञान की भूख को मिटाती है। किताबें संसार को बदलने का साधन रही हैं। जीवन में पुस्तकें हमारा सही मार्गदर्शन कराती हैं। एकान्त की सहचारी हैं । वे हमारी मित्र हैं जो बदले में हम से कुछ नहीं चाहती । वे साहस और धैर्य प्रदान करती हैं । अन्धकार में हमारा मार्ग दर्शन कराती हैं ।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2019 09:09:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पहले पिलाई शराब, फिर मार डाला, आरोपी फरार</title>
                                    <description><![CDATA[दोस्त बना दोस्त की जान का दुश्मन हत्या का भेद बरकरार, जांच में जुटी पुलिस बरनाला (जीवन रामगढ़)। बीती देर रात स्थानीय 5 नंबर वार्ड में काला महिर स्टेडियम के नजदीक 42 वर्षीय परमजीत सिंह की उसके दोस्तों ने ही गोलियां मार कर हत्या कर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/first-drink-alcohol-then-murder/article-3817"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/murder-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">दोस्त बना दोस्त की जान का दुश्मन</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:left;">हत्या का भेद बरकरार, जांच में जुटी पुलिस</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला (जीवन रामगढ़)। </strong>बीती देर रात स्थानीय 5 नंबर वार्ड में काला महिर स्टेडियम के नजदीक 42 वर्षीय परमजीत सिंह की उसके दोस्तों ने ही गोलियां मार कर हत्या कर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। हत्या के कारणों का भेद अभी बरकरार है। घटना संबंधी जानकारी देते मृतक के भाई ने बताया कि ठीकरीवाल रोड पर स्थित परमजीत सिंह के घर देर रात तक उसके दोस्त जीतपाल सिंह, जरनैल सिंह व सुरेश सिंह चारों दोस्त मिलकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान ही उनकी परमजीत सिंह से थोड़ी बहुत तकरार हो गई, जिस उपरांत तीनों दोस्त परमजीत सिंह को बाहर ले गए व स्टेडियम के नजदीक लेजाकर जीतपाल सिंह ने रिवाल्वर के साथ उसके चार फायर कर दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस उपरांत परमजीत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। पीड़ितों अनुसार जब उन्होंने बाहर आ कर देखा तो आरोपी देखते ही फरार हो गए। थाना सिटी के इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरवीर सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने घटना स्थल पर जाकर जायजा लिया व शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में भेज दिया व मृतक के पुत्र सुखविन्दर सिंह के बयानों के आधार पर जीतपाल सिंह, जरनैल सिंह व सुरेश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरु कर दी है। उन्होंने कहा कि अभी तक हत्या के कारणों का कुछ भी पता नहीं चल सका, जिसका खुलासा आरोपियों को काबू करन उपरांत ही होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/first-drink-alcohol-then-murder/article-3817</link>
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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 09:22:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शर्मा जी, फेसबुक और &amp;#8216;लाइक&amp;#8217; का चक्कर</title>
                                    <description><![CDATA[आमेरे परम मित्र शर्मा जी इन दिनों बेहद खफा हैं। दरअसल, वे खफा आॅफलाइन मित्रों से नहीं, बल्कि आॅनलाइन मित्रों से हैं। भड़ककर कहते हैं-‘भला! यह भी कोई बात हुई। चार हजार फेसबुक फ्रेंड और लाइक मात्र सात सौ। भई, बहुत हो गई, अब निष्क्रिय दोस्तों को बाहर का रास्ता दिखाना ही होगा। ‘शर्मा जी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/facebook-and-like/article-3359"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/facebook.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आमेरे परम मित्र शर्मा जी इन दिनों बेहद खफा हैं। दरअसल, वे खफा आॅफलाइन मित्रों से नहीं, बल्कि आॅनलाइन मित्रों से हैं। भड़ककर कहते हैं-‘भला! यह भी कोई बात हुई। चार हजार फेसबुक फ्रेंड और लाइक मात्र सात सौ। भई, बहुत हो गई, अब निष्क्रिय दोस्तों को बाहर का रास्ता दिखाना ही होगा। ‘शर्मा जी की मनोस्थिति समझ मैंने शीतलता प्रदान करने के लिए पूछा कि आप रोजाना पोस्ट क्यों डाला करते हो? इस सवाल पर भी वे भड़क गये और बोले-रोजाना क्यूं न डालूं पोस्ट, कोई अपराध है क्या?मैंने कहा-ऐसी बात नहीं है शर्मा जी, जिस तरह रोजाना एक ही चीज खाने से मन ऊब जाता है, उसी प्रकार हर रोज पोस्ट देखकर भी लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसा कीजिए, आप हफ्ते में एक ही दिन पूरी ऊर्जा के साथ कोई एक पोस्ट किया करें, तब आपको लोग अधिक महत्व देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना सुनने के बाद, वे फिर तपाक से बोले-ये फेसबुक वाले मित्र लिंगानुरुप भेदभाव करते हैं। मैं कितनी भी महत्व की बातें पोस्ट कर दूं, महत्वहीन हो जाता है, क्योंकि मैं एक पुरुष हूं, कुरुप हूं, इसलिए। जबकि, पड़ोसी वर्मा की वाइफ कुछ भी पोस्ट करे, तो चंद सेकेंडों में सैकड़ों लाइक पहुंच जाते हैं। शर्मा जी यहीं चुप नहीं रहते। रहस्यमयी मुद्रा बनाकर आगे कहते हैं कि ये एफबी फ्रेंड भी काफी शातिर हो गये हैं। बताते हैं कि पिछले हफ्ते की ही बात है। पत्नी के साथ एक तस्वीर पोस्ट की और 24 घंटे के भीतर करीबन बारह सौ लाइक मिल गये। जबकि, इसी इफ्ते अपनी एक सिंगल तस्वीर पोस्ट की, तो चार दिन बाद भी बमुश्किल चार सौ लोगों ने लाइक किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ अपने थे, जिन्होंने फोटो के साथ ‘नाइस’, ‘नाइस वन’, ‘वाऊ’, ‘गजब’ और ‘उम्दा’ जैसी अतिशयोक्तिपूर्ण तारीफ कर हौसला बढ़ाया था। शेष फ्रेंड मतलबी हो गये हैं। अगर उनकी पोस्ट लाइक न करो, तो वे भी अपनी उंगली पर बेवजह जोर देना नहीं चाहते। कल शाम को ही बता रहे थे कि फेसबुक पर अंध-भक्ति और अंध-विरोध भी जमकर होता है। हर दिन, सरकार के समर्थन और विरोध में दर्जनों पोस्ट किये जाते हैं। उसी पोस्ट के कमेंट बॉक्स में ‘शाब्दिक कुश्ती’ भी देखने को मिल जाते हैं। ‘गाली रुपेण घूंसा’ और ‘अमर्यादित वैचारिक पंच’ से कोई बंदा परास्त हो जाता है, तो कोई अपने आप को विजेता समझ बैठता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, कुछ लोग इस अप्रासंगिक बात-बतंगड़ से पीछे हटकर शांत हो जाते हैं। दरअसल, फेसबुक सिर दर्द, तनाव और अवसाद की गिरफ्त में ले जाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। शर्मा जी भी इन बातों को भलीभाँति समझते हैं। लेकिन, स्वीकारने से डरते हैं कि कहीं मैं उन्हें फेसबुक से दूर रहने की बिन मांगी सलाह ना दे दूं। यूं तो, हमारे शर्मा जी पढ़े-लिखे इंसान हैं। अच्छे सरकारी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। छह महीना पहले ही पोते ने उन्हें फेसबुक चलाना सिखाया था। बाद में तो जैसे शर्मा जी को इसकी लत ही लग गई। देश-विदेश में घटने वाली किसी भी छोटी-बड़ी घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया फेसबुक पर उगल देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार तो लोग उनका समर्थन करते हैं, तो कई बार उन्हें आलोचनाएं भी सहनी पड़ती हैं। बावजूद इसके, वे खुश हैं कि चलो इसी बहाने बुढ़ापा में कुछ रोमांच तो बना हुआ है। फेसबुक उनके लिए दिल लगाने का अच्छा माध्यम बन गया है। युवा पीढ़ी से आभासी दुनिया में मिलना, सीखना और सीखाना उन्हें खूब रास आ रहा है। अब वो समय भी तो नहीं रहा कि शाम को गांव के किसी चबूतरे पर बैठकर गप्पें मारी जाएं। फेसबुक पर लाइक का गुणा-भाग उनकी समझ से अबतक दूर था। इसलिए, उन्होंने अपनी परेशानी मुझसे साझा की। अब, शर्मा जी ने रोजाना की बजाय, हफ्ते में एक-दो पोस्ट करने का निर्णय लिया है। आशा है, उनके निष्क्रिय मित्र, फिर-से सक्रिय हो उठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुधीर कुमार</strong></p>
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                <pubDate>Sat, 30 Sep 2017 04:05:43 +0530</pubDate>
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