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                <title>Plastic - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Plastic RSS Feed</description>
                
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                <title>Kagzi Bottles : सौ फीसदी कागज की बोतल बनाने वाली Samiksha Ganeriwal</title>
                                    <description><![CDATA[– Kagzi Bottles – समीक्षा गनेरीवाल पेपर बॉटल्स (Kagzi Bottles) की संस्थापक हैं। उन्होंने कम्पोस्टेबल कागज के कचरे से 100 फीसदी बायोडिग्रेडेबल कागज की बोतल बनाने का समाधान ढूंढा है। एक बार जब वह टहलने गई, तो उन्होंने पानी की एक बोतल खरीदी और प्लास्टिक की पानी की बोतल को फेंकने में उन्हें बहुत असहजता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/kagzi-bottles-samiksha-ganeriwal/article-55987"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/kagzi-bottles-samiksha-ganeriwal.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Kagzi Bottles –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा गनेरीवाल पेपर बॉटल्स (Kagzi Bottles) की संस्थापक हैं। उन्होंने कम्पोस्टेबल कागज के कचरे से 100 फीसदी बायोडिग्रेडेबल कागज की बोतल बनाने का समाधान ढूंढा है। एक बार जब वह टहलने गई, तो उन्होंने पानी की एक बोतल खरीदी और प्लास्टिक की पानी की बोतल को फेंकने में उन्हें बहुत असहजता महसूस हुई। इसके बाद उन्होंने सोचा कि एक ऐसी बोतल बनाई जाए जिसे हम कहीं भी फेंक सकें और उसके सड़ने की चिंता भी न हो। करीब 6 साल पहले उन्होंने कागज से बायोडिग्रेडेबल बोतल बनाना शुरू किया था। प्लास्टिक की बोतल के विकल्प के रूप में कागज की ऐसी बोतल बनानी शुरू की, जो कोल्ड ड्रिंक, वाटर और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में प्रयोग की जा सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया भर में हर दिन 220 मिलियन प्लास्टिक बोतलों का उत्पादन होता है, जिनमें से 80 प्रतिशत लैंडफिल साइटों पर सड़ती रहती हैं। एक प्लास्टिक की बोतल को विघटित होने में 450 वर्ष लगते हैं। इसका मतलब यह है कि जिन प्लास्टिक की बोतलों का हम उपयोग करते हैं, वे किसी न किसी लैंडफिल साइट पर पहुंच जाएंगी। पानी की बॉटलिंग प्रक्रिया सालाना 2.5 मिलियन टन कार्बन डाइआॅक्साइड वातावरण में छोड़ती है। डिस्पोजेबल पानी की बोतल का कचरा समुद्र में बहने से हर साल 1.1 मिलियन समुद्री जीव मर जाते हैं। समीक्षा ने पैकेजिंग आदि में उपयोग की जाने वाली बोतलों के अंदर एक्लेयर प्राकृतिक पदार्थ की एक परत छिड़क कर उन्हें जलरोधी बनाया। हालांकि वह तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं इसलिए वह अलग-अलग लोगों की मदद से कागज की बोतल बनाने की कोशिश कर रही हैं। इस समय कई उद्योगों में उनकी कागज की बोतलों का परीक्षण चल रहा है। इस प्रक्रिया में 3 से 6 महीने लगते हैं जिसके बाद इन बोतलों का उपयोग पैकेजिंग में किया जा सकता है। समीक्षा ने बीएससी में इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई की है और इसके बाद उन्होंने एमबीए की डिग्री ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने उत्पाद को कई उद्योगों में परीक्षण के लिए दिया है और वहां उत्पाद की पैकिंग कर परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने अपनी कागज की बोतलें पानी, पेट्रोल, कॉस्मेटिक उद्योग आदि की बड़ी कंपनियों को परीक्षण के लिए दी हैं, जिस पर जल्द ही सहमति आने वाली है। कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में पेपर बोतल के परीक्षण के सकारात्मक नतीजे आए हैं और कंपनी प्लास्टिक बोतल की जगह पेपर बोतल इस्तेमाल करने पर सहमत हो गई है। उनकी कोशिश यह है कि इन पर्यावरण अनुकूल उपाय के जरिए धीरे-धीरे प्लास्टिक का उपयोग कम किया जा सके। बोतल की आयु पर समीक्षा कहती है कि इसे नौ माह तक इस्तेमाल किया जा सकता है। नष्ट हो जाने के बाद घर में रखे गमलों व क्यारी की मिट्टी में दबा सकते हैं। 19 रुपये की लागत में प्लास्टिक की बोतल तैयार होती है। फिर भी इसका दाम कम करने पर काम चल रहा है।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Apr 2024 11:33:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 जून से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन, उल्लंघन करना पड़ेगा महंगा</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम प्रशासन ने कर ली है पूरी तैयारी जनभागीदारी से ही मिलेगी प्लास्टिक के प्रयोग से मिलेगी निजात जिला में प्लास्टिक वेस्ट रूल्स की सख्ती होगी पालना गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। शुक्रवार एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल, भंडारण व बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। प्रशासन की ओर से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/single-use-plastic-ban-from-june-30/article-35025"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/plastic-ban.jpg" alt=""></a><br /><h3><strong>गुरुग्राम प्रशासन ने कर ली है पूरी तैयारी</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जनभागीदारी से ही मिलेगी प्लास्टिक के प्रयोग से मिलेगी निजात</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिला में प्लास्टिक वेस्ट रूल्स की सख्ती होगी पालना</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शुक्रवार एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल, भंडारण व बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। प्रशासन की ओर से आगामी एक जुलाई से प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 के तहत प्रभावी एक्शन प्लान के माध्यम से सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) से संबंधित वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगामी एक जुलाई से प्लास्टिक की डंडियों वाले इयर बड, गुब्बारा स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, लॉलीपॉप की डंडी, आइसक्रीम की डंडी, थर्मोकॉल के सजावटी सामान, प्लेट, कप, ग्लास, डोने, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रा, मिठाई के डिब्बों पर लगने वाली पन्नी, प्लास्टिक के निमंत्रण पत्र, सौ माइक्रोन से नीचे के सभी बैनर प्रतिबंधित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई व्यक्ति, पॉलिथीन का थोक विक्रेता, दुकानों पर, होटलों पर, रेहड़ियों व फड़ी पर, सब्जी मंडी आदि में सिंगल यूज प्लास्टिक का सामान प्रयोग करना वर्जित होगा। पॉलिथीन रोकथाम अभियान के दौरान यदि कोई भी व्यक्ति पॉलिथीन का प्रयोग करते हुए पकड़ा या स्टॉक करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 के तहत कार्रवाई करते हुए चालान किया जाएगा। साथ ही प्लास्टिक से संबंधित सामान जैसे प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल सामान आदि जब्त कर लिया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>500 रुपये से लेकर 25 हजार तक लगेगा जुर्माना</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि पॉलिथीन रोकथाम अभियान के दौरान 100 ग्राम या इससे कम वजन पर 500 रुपये, 101 से 500 ग्राम वजन तक 1500 रुपये, 501 से 1 किलोग्राम वजन तक 3 हजार रुपये, 1 किलोग्राम से 5 किलोग्राम वजन तक 10 हजार रुपये, 5 किलोग्राम से 10 किलोग्राम वजन तक 20 हजार रुपये तथा 10 किलोग्राम या इससे अधिक वजन पकड़े जाने पर 25 हजार रुपए जुमार्ना राशि वसूल की जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जिलावासी सिंगल यूज प्लास्टिक को कहें ना: डीसी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि केंद्र सरकार प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल को रोकने के लिए 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज वाले प्लास्टिक पर बैन लगा रही है। उन्होंने जिला के आम नागरिकों, सभी दुकानदारों, व्यापारियों, होटल ढाबा संचालकों आदि से सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करने का आह्वान करते हुए कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक मानव व जीव जगत के लिए हानिकारक है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 20:21:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीणों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों बताए</title>
                                    <description><![CDATA[जैतो (सच कहूँ न्यूज)। प्लास्टिक खतरनाक है। प्लास्टिक की थैलियां पर्यावरण के लिए घातक हैं। स्थानीय सिल्वर आॅक्स स्कूल ने इन्हीं विचारों को ध्यान में रखते हुए’प्लास्टिक को न कहो’अभियान का आयोजन किया। पर्यावरण और मानव पर पॉलीथिन बैग के दुष्प्रभावों के बारे में छात्रों और जनता को जागरूक करने के लिए इस अभियान का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/tell-villagers-the-side-effects-of-plastic/article-12070"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/plastic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जैतो (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्लास्टिक खतरनाक है। प्लास्टिक की थैलियां पर्यावरण के लिए घातक हैं। स्थानीय सिल्वर आॅक्स स्कूल ने इन्हीं विचारों को ध्यान में रखते हुए’प्लास्टिक को न कहो’अभियान का आयोजन किया। पर्यावरण और मानव पर पॉलीथिन बैग के दुष्प्रभावों के बारे में छात्रों और जनता को जागरूक करने के लिए इस अभियान का आयोजन किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षिका रूबल ने स्कूल छात्रों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए इसका उपयोग बंद करने और कागज उत्पादों का उपयोग करने का अनुरोध किया। इस संदेश को विशेष सभा के संचालन के साथ उजागर किया गया। स्कूल की हेड गर्ल सातवीं कक्षा की छात्रा रिया द्वारा सभी को प्लास्टिक का प्रयोग न करने की प्रतिज्ञा दिलवाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विषय से संबंधित छात्रों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को उजागर करती एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। स्कूल के सभी छात्रों, अध्यापकों तथा स्कूल में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को कपड़े के बैग का वितरण किया गया। संकलन के दौरान, छात्रों ने प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को मिटाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर देते हुए बैनर और तख्तियां प्रदर्शित कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल की मुख्य अध्यापिका धमेन्द्र कौर ने पॉलीबैग के इस्तेमाल की कमियों के बारे में बताया। उन्होंने छात्रों से अपने माता-पिता को कपड़े के थैले सौंपने का आग्रह किया। इस अभियान के प्रति शिक्षकों और छात्रों के उत्साह ने इसे और अधिक शिक्षाप्रद बना दिया। इस अवसर पर समूह स्टाफ मौजूद था।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 21:36:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्लास्टिक के विरुद्ध जागरूकता ही सबसे बड़ा माध्यम</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर केन्द्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर पाबंदी लगाकर लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया है। इससे पहले महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर देश भर में प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने संबंधी संदेश दिया गया था। भले ही इसके पीछे रोजगार समाप्त होने का भी तर्क दिया जा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/awareness-against-plastic-is-the-biggest-medium/article-10605"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/plastic_waste.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आखिर केन्द्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर पाबंदी लगाकर लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया है। इससे पहले महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर देश भर में प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने संबंधी संदेश दिया गया था। भले ही इसके पीछे रोजगार समाप्त होने का भी तर्क दिया जा रहा है, फिर भी इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि प्लास्टिक का प्रयोग देश को किस भयानक मोड़ पर ला खड़ा कर सकता है जिसके लिए किसी भी प्रकार की देरी घातक सिद्ध होगी। भले ही जागरूकता से इसके प्रयोग को कम किया जा सकता है लेकिन इसका समाधान केवल दिखावा करने, या आनाकानी करने से नहीं होने वाला। निर्णय सरकार को लेना होता है लेकिन आम जनता का सहयोग तब ही मिलता है जब लोग खुद किसी कार्य के लिए पहल करें। मोटर वाहन एक्ट इसका ही उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा, महाराष्टÑ सहित कई राज्यों में जहां भाजपा की सरकारें थी, ने मोटर व्हीकल एक्ट के भारी भरकम जुर्मानों को लागू न करने का निर्णय कर लिया था। आखिर राज्य सरकारों ने एक अन्य रास्ते निकालकर अघोषित रूप से चालान काटने बंद कर दिए थे। सोशल मीडिया पर मोटर व्हीकल एक्ट की नीति पर भी सवाल उठाए गए थे। जहां तक प्लास्टिक की सिंगल यूज के प्रयोग का संंबंध है इसका प्रचार इतना ज्यादा हो चुका है कि इसे झट से या एक माह के भीतर खत्म करना संभव नहीं, इसके लिए इंतजार करना होगा। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व में प्लास्टिक उत्पादन में प्रति वर्ष 320 मिलियन टन की वृद्धि हुई है जिसमें से केवल 9 प्रतिशत रिसाइक्लिंग और 12 प्रतिशत जला या फेंक दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुमानित 100 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र और महासागरों में चला जाता है और 80-90 प्रतिशत प्लास्टिक भूमि आधारित स्रोतों से आता है। भारत में हर रोज लगभग 15,000 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इसमें से ज्यादा कचरा गड्ढो और नालियों में डाल दिया जाता है। जिससे उचित रिसाइक्लिंग सुविधा के आभाव में नहर और नदियों का बहाव अवरुद्ध हो जाता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए, कई प्रदेशों ने बहुत पहले ही प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल पिछले 30 वर्षों से हम वातावरण को नजरअंदाज करते आए हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करने के सरकारी कार्यक्रमों में भी प्लास्टिक की बोतलों व डिस्पोजल गिलासों का बड़े स्तर पर प्रयोग होता रहा है। प्लास्टिक की पानी की बोतलों का प्रयोग आमजन से लेकर अफसरशाही व नेताओं के जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गई है। यदि सत्ता के उच्च पदों पर बिराजमान नेता व नौकरशाह, पहले खुद प्लास्टिक के प्रयोग न करने की मिसाल पैदा करेंगे तब जनता से परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है। अभी तक राजनीतिक रैलियों के समापन समारोह के बाद प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलासों व बोतलों के ढेर लग जाते हैं। दरअसल किसी वस्तु के हटाने से पहले उसका विकल्प तलाशने व उसके लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है। प्लास्टिक के दुष्प्रभावों का प्रचार ही इसका समाधान है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2019 21:07:40 +0530</pubDate>
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                <title>प्लास्टिक भविष्य का टाइम बम!</title>
                                    <description><![CDATA[पूरे देश से प्रतिदिन 25,940 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इसमें से 15,384 टन (60 प्रतिशत) कचरे का ही प्रतिदिन एकत्रण और पुनर्चक्रण हो पा रहा है। बाकी 40 फीसदी प्लास्टिक कचरे का अधिकांश हिस्सा जो एकत्र नहीं हो पाता है, वह नाले नालियों सहित अन्य माध्यम से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/time-bomb-of-plastic-future/article-5337"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/plastic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूरे देश से प्रतिदिन 25,940 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इसमें से 15,384 टन (60 प्रतिशत) कचरे का ही प्रतिदिन एकत्रण और पुनर्चक्रण हो पा रहा है। बाकी 40 फीसदी प्लास्टिक कचरे का अधिकांश हिस्सा जो एकत्र नहीं हो पाता है, वह नाले नालियों सहित अन्य माध्यम से जलाशयों तक पहुंच जाता है और जो कचरा एकत्र हो जाता है, वह भी गैरशोधित रूप में डंपिंग ग्राउंड में पड़े रह कर आसापास की जमीन का प्रदूषण बढ़ाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संसद में पेश प्लास्टिक कचरे के शोधन से जुड़े आंकड़ों में यह बात सामने आयी है। प्लास्टिक आज के दौर की सर्वाधिक सर्वव्यापी और जरूरी वस्तु है। प्लास्टिक हमारे दिनचर्या में यूं बस गया है कि उसके बगैर हम जीवन की कल्पना नहीं कर पा रहे। सुबह से लेकर रात में बिस्तर में जाने तक अगर हम अपनी दिनचर्या पर ध्यान से गौर करेगे तो पाएंगे कि प्लास्टिक ने किसी न किसी रूप में हमें हर पल घेर कर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">टूथब्रश से सुबह ब्रश करना हो या आॅफिस में दिन भर कम्प्यूटर पर काम, बाजार से कोई सामान लाना हो या टिफिन और वॉटर बॉटल में खाना और पानी लेकर चलना। प्लास्टिक हर जगह है, हर समय है। आज के वक्त में किसी भी ऐसे घर, संस्थान या दफ्तर की कल्पना करना मुश्किल है जो प्लास्टिक रहित हो। गांवों में भी शादी-ब्याह में प्रयुक्त होने वाले मिट्टी के बरतन और पत्तलों की जगह आज प्लास्टिक के उत्पादों ने ले ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग हर उत्पाद की पैकेजिंग में प्लास्टिक प्रयुक्त हो रहा है।बाजार से कोई भी वस्तु खरीदने जाते शायद ही किसी व्यक्ति के पास अपना थैला होता है। सब्जियों से लेकर दूसरे उपयोग का कोई भी छोटा-मोटा सामान लाने के लिए लोग बिना किसी संकोच के प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल करते हैं। विडंबना यह है कि जहां भी लोग पिकनिक के लिए जाते हैं, यहां तक कि जंगलों, पर्वतों की चोटियों, रिवर राफ्टिंग कैंपों और नदियों के किनारों तक पर प्लास्टिक का कचरा छोड़ आते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों में जगह- जगह सड़कों किनारे व गंदगीयुक्त कीचड़ में भी प्लास्टिक की थैलिया तैरती नजर आती है, जिससे पानी में विघटन के कारण ये दुर्गंध भी पैदा कर रही हैं। जिस प्लास्टिक ने हमारे जीवन को आसान और सुविधाजनक बनाया, वही आज हमारे लिए धीमा जहर बनता जा रहा है। प्लास्टिक जमीन, पानी और हवा तीनों को प्रभावित कर रहा है। सदियों तक नष्ट न होने वाला प्लास्टिक भूजल को प्रदूषित कर रहा है। प्लास्टिक के बहुत सूक्ष्म टुकड़े उसमें मिलकर उसे दूषित कर देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बोतलबंद पानी बेचने वाली कंपनियां इसी भूजल का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन उनकी प्रॉसेसिंग में वे सूक्ष्म कण खत्म नहीं हो पाते। यहीं नहीं माइक्रो प्लास्टिक हमारे नलों में आने वाले पानी या सांस ली जाने वाली हवा में भी पाए गए हैं। प्लास्टिक में कुछ जहरीले रसायनों जैसे स्टाइरीन डिमर बिस्फेनाल ए और पालीस्टेरेन के उप उत्पाद उपस्थित होते है। ये उत्पाद प्रति दिन पीने वाले पानी की गुणवत्ता खराब कर रहे है। गर्म होने पर प्लास्टिक जहरीली ग्रीनहाउस गैस का कारण भी बना हुआ है।प्लास्टिक बैग के कारण संपूर्ण पर्यावरण का चक्र प्रभावित हो रहा है और यह कचरा प्रबंधन की राह में भी बड़ी बाधा है। प्लास्टिक का कचरा आज हमारी गलियों, नालों और नदियों को जाम कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अनुमान के मुताबिक जितना प्लास्टिक प्रदूषण जमीन पर है उससे कहीं ज्यादा समुद्र के अंदर है जो जलीय जीवों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कभी ये जीव इन प्लास्टिक में उलझ कर फंसे रह जाते हैं तो कभी मुंह के जरिए वो इनके पेट में पहुंच जाता है।दुनिया के लगभग 90% समुद्री जीव-जंतु एवं पक्षी किसी-न-किसी रूप में अपने शरीर में प्लास्टिक ले रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अनुमान के मुताबिक सालाना एक लाख से अधिक जलीय जीव प्लास्टिक प्रदूषण से मर रहे हैं। केवल उत्तरी प्रशांत महासागर में ही मछलियां 12,000 से 24,000 टन प्लास्टिक निगल जाती हैं, जिससे आंतों में घाव से लेकर उनकी मृत्यु तक हो जाती है। समुद्रों में प्लास्टिक प्रदूषण यदि इसी गति से बढ़ता रहा तो 2050 तक वहां सागर में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर और गाव की गलियों से लेकर खेतों तक में मुसीबत बन चुका प्लास्टिक कचरा 10 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है। वहीं 2022 तक भारतीय प्लास्टिक उद्योग प्लास्टिक उत्पादन को दोगुना करने के प्रयास में है। ऐसे में आने वाले वक्त में प्लास्टिक कचरे का सही से निस्तारण, पुनर्चक्रण और शोधन नहीं किया गया तो यह कचरा भविष्य में देश के लिये ‘‘विषैला टाइम बम’’ साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैलाश बिश्नोई</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Aug 2018 18:54:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्लास्टिक कचरे से मुक्ति कब तक</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में प्लास्टिक कचरा बढ़ने से जिस प्रकार से प्राकृतिक हवाओं में प्रदूषण बढ़ रहा है, वह मानव जीवन के लिए तो अहितकर है ही, साथ ही हमारे स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी विपरीत स्थितियां पैदा कर रहा है। हालांकि इसके लिए समय-समय पर सरकारी सहयोग लेकर गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा जागरण अभियान भी चलाए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/how-long-do-you-get-rid-of-plastic-waste/article-3376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/plastic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान में प्लास्टिक कचरा बढ़ने से जिस प्रकार से प्राकृतिक हवाओं में प्रदूषण बढ़ रहा है, वह मानव जीवन के लिए तो अहितकर है ही, साथ ही हमारे स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी विपरीत स्थितियां पैदा कर रहा है। हालांकि इसके लिए समय-समय पर सरकारी सहयोग लेकर गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा जागरण अभियान भी चलाए जा रहे हैं, परंतु परिणाम उस गति से मिलता दिखाई नहीं देता। ऐसे में प्रश्न यह आता है कि गैर सरकारी संस्थाओं के यह अभियान अपेक्षित परणिाम क्यों नहीं दे पा रहे हैं। इसके पीछे की कहानी कहीं केवल कागज तो नहीं हैं। भारत में कागजों में काम होने की बीमारी लगातार बढ़ रही है। कागजों के आंकड़ों को वास्तविक धरातल पर उतारा जाता है, तो कहीं भी काम दिखाई नहीं देता। प्लास्टिक मुक्ति का अभियान गैर सरकारी संस्थाओं ने बलि चढ़ा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में यह भी चिंतन का विषय है कि हमारी सामाजिक चेतना के कम होने के कारण हम चैतन्यता के नाम पर शून्य की तरफ ही बढ़ते जा रहे हैं। अगर प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ने की यही गति बरकरार रही तो एक दिन हमें शुद्ध हवा से वंचित होना पड़ सकता है। हम जानते हैं कि वर्तमान में वायु प्रदूषण के चलते हमारे शरीर में कई प्रकार के विषैले कीटाणु प्रवेश कर रहे हैं, जो हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं और नई-नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। भारत में कई बीमारियां केवल गंदगी के कारण हो रही हैं, चाहे वह प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न गंदगी हो या फिर इसके कारण जाम नालियों के गंदे पानी से प्रदूषण से पैदा होने वाले वातावरण से पैदा होने वाली गंदगी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक पॉलीथिन में बहुत से लोग घर का कचरा भरकर बाहर फैंक रहे हैं, जिसे हमारी गौमाता खाती है और हम जाने-अनजाने में गौहत्या का पाप कर रहे हैं। इसके साथ ही बहुत बड़ा सच यह भी है कि प्लास्टिक पॉलीथिन और खाद्य सामग्री में उपयोग आने वाले प्लास्टिक के सामान रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के कारण हमें जहर भरे खाना खाने के लिए विवश कर रहे हैं। इसके कारण हमारा स्वास्थ्य विकरालता की ओर जा रहा है। इसमें प्लास्टिक कचरे का बहुत बड़ा योगदान है। हालांकि हमारे देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन क्या हम जानते हैं कि प्लास्टिक कचरा स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में बहुत बड़ा अवरोधक बनकर सामने आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक कचरे से मुक्ति पाने के लिए भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया है। पहले 2014 में छत्तीसगढ़ की सरकार ने पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाकर इससे मुक्ति का सूत्रपात किया था और अब प्लास्टिक से निर्मित प्रचार सामग्री और खाद्य पदार्थों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली डिस्पोजल वस्तुओं पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम सभी राज्यों के लिए एक पाथेय है। हम जानते हैं कि छत्तीसगढ़ क्षेत्र लम्बे समय से पिछड़ा हुआ क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है, छत्तीसगढ़ से यह पिछड़ेपन का ठप्पा धीरे-धीरे हटने लगा है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के कारण वहां की जनता में चेतना जगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसका असर दिखाई देने लगा है। प्लास्टिक कचरे के बारे में यह सबसे बड़ा सच है कि यह वास्तव में आयातित कचरा है। हमारे देश में कागज और कपड़े के बैग ही प्रचलन में रहते थे, लेकिन विदेशियों की नकल करने के कारण हम भी प्लास्टिक का उपयोग करने की ओर प्रवृत होते चले गए। यही प्रवृति आज हमारे देश की सबसे विकराल समस्या बनकर उभर रही है। हमने एक कहावत भी सुनी है कि अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता, यह सोच किसी प्रकार से भारतीय संस्कृति का संवाहक नहीं हो सकता। यह सोच विदेशों की नकल है। आज प्लास्टिक कचरे का उपयोग भी कुछ इसी तर्ज पर किया जा रहा है। लोग अपना काम बनाने के लिए प्लास्टिक के सामानों का प्रयोग कर रहे हैं, और बाद में यही सामान कचरा बन जाता है, जो जनता के लिए गंभीर समस्याओं को पैदा कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कचरा फैंकने वाले लोगों का इतना नहीं मालूम कि यह कचरा हमारे लिए भी समस्या बन रहा है। देश के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है। इस स्थिति को और आगे बढ़ने से रोकने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाया है, लेकिन क्या सरकार के कदम उठाने मात्र से यह सफल हो सकेगा। नहीं हो सकता। इसके लिए जनता की भागीदारी भी बहुत मायने रखती है। वास्तव में जिस देश की जनता अपने देश के प्रति तादात्म्य स्थापित करते हुए कार्य करती है, वह देश बहुत सुंदर और स्वच्छ होता है। हम भारत देश के निवासी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए हमारे आचरण और कार्य में भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन होना चाहिए। हमारी संस्कृति यही कहती है कि सर्वे भवन्तु सुखिन: अर्थात सभी सुखी हों, लेकिन आज के दौर में हमें यह भी चिंतन करना होगा कि क्या हमारे कार्यों से जनता को सुख की अनुभूति होती है, हम देश को स्वस्थ बनाने के लिए अपनी ओर से कितना योगदान दे रहे हैं, अगर इसका उत्तर नहीं में है तो हमारे अंदर भारतीयता का अभाव है। लोग कितना भी कहें कि हम भारतीय नागरिक हैं, लेकिन जब तक हमारी दिनचर्या में भारतीयता दिखाई नहीं देगी, तब तक हम भारतीय नहीं हैं। आज हम देख रहे हैं कि हम भारत के नागरिक ही जाने अनजाने में एक दूसरे के लिए समस्याओं का निर्माण करते जा रहे है। यह गति लगातार बढ़ती जा रही है। देश में वातावरणीय समस्याओं का प्रादुर्भाव हमारी अपनी देन है, जो जाने या अनजाने में हमने ही पैदा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हम यह भी जानते हैं कि प्लास्टिक कचरे के कारण जिन बस्तियों में पानी भर जाता है, उसका एक मात्र कारण भी तो हम ही हैं। नालियां जाम होने की वजह से ही ऐसे हालात बन रहे हैं। स्वच्छ हवा प्रदान करने वाले पेड़ पौधे भी प्रदूषित वातावरण का शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमें ताजी हवा कैसे मिल सकती है। आज यह सबसे बड़ा सवाल है। इस सवाल का एक मात्र जवाब यही है कि हमें चैतन्य शक्ति का जागरण करके देश को स्वच्छ वातावरण देने के लिए प्लास्टिक कचरे से मुक्ति पाना है। अगर हम ऐसा कर सके तो यह तय है कि हमारा देश फिर से तरो ताजा हवा प्रदान करने वाला देश बन जाएगा। इसके लिए सरकार की योजना में हमें भी पूरी तरह से सहभागी बनना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2017 05:28:47 +0530</pubDate>
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