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                <title>decline - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>Share Market: में रही 16 महीने की सबसे बड़ी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[यह शेयर बाजारों में 16 महीने की सबसे बड़ी गिरावट है।
 इससे पहले 05 अक्टूबर 2018 को समाप्त सप्ताह में सेंसेक्स 4.96 प्रतिशत और निफ्टी 5.03 प्रतिशत टूटा था।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/the-biggest-decline-in-the-stock-market-in-16-months/article-12885"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/share-market.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">मार्किट: सप्ताह के दौरान छह कारोबारी दिवस में से पाँच में बाजार में तेजी रही (Share Market)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>सेंसेक्स एक ही दिन में करीब एक हजार अंक टूटा</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> बजट से निराश निवेशकों की बिकवाली और विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों से पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में कोहराम रहा और बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 4.51 प्रतिशत तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 5.03 प्रतिशत लुढ़क गया। यह शेयर बाजारों में 16 महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। (Share Market) इससे पहले 05 अक्टूबर 2018 को समाप्त सप्ताह में सेंसेक्स 4.96 प्रतिशत और निफ्टी 5.03 प्रतिशत टूटा था। सप्ताह के दौरान छह कारोबारी दिवस में से पाँच में बाजार में तेजी रही जबकि बुधवार को इसमें गिरावट देखी गयी। इस दौरान सेंसेक्स 1,877.66 अंक का गोता लगाकर शनिवार को 39,735.53 अंक पर और निफ्टी 616.35 अंक लुढ़ककर 11,661.85 अंक पर बंद हुआ।</p>
<h3>विदेशी बाजारों की हलचल भी घरेलू बाजार पर प्रभाव डालेगी</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मझौली और छोटी कंपनियों में भी बड़ी गिरावट रही।</li>
<li style="text-align:justify;">बीएसई का मिडकैप 702.89 अंक यानी 4.44 प्रतिशत टूटकर 15,119.65 अंक पर रही।</li>
<li style="text-align:justify;">और स्मॉलकैप 501.26 अंक यानी 3.38 प्रतिशत की गिरावट में 14,344.70 अंक पर आ गया।</li>
<li style="text-align:justify;">आने वाले सप्ताह में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के लिए आईएचएस मार्किट के आँकड़े जारी होने हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इनका असर बाजार पर देखने को मिलेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही विदेशी बाजारों की हलचल भी घरेलू बाजार पर प्रभाव डालेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">बीते सप्ताह शुरूआती पाँच दिन विदेशी बाजारों के दबाव में घरेलू बाजार टूटे।</li>
<li style="text-align:justify;">नोवल कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से विदेशों में शेयर बाजार गिरावट में रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">अंतिम कारोबारी दिवस पर शनिवार को बजट के बाद सेंसेक्स एक ही दिन में करीब एक हजार अंक टूट गया।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">लगातार 18वें सप्ताह बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार</h3>
<p style="text-align:justify;">देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार 18वें सप्ताह बढ़ता हुआ 24 जनवरी को समाप्त सप्ताह में पहली बार 466 अरब डॉलर के पार पहुँच गया। रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 24 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 4.54 अरब डॉलर बढ़कर 466.69 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। यह लगातार 18वाँ सप्ताह है जब देश के विदेशी मुद्रा के भंडार में वृद्धि हुई है। इससे पहले 17 जनवरी को समाप्त सप्ताह में यह 94.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 462.16 अरब डॉलर पर रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय बैंक के अनुसार, 24 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में 4.47 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह 432.92 अरब डॉलर पर पहुँच गया। सप्ताह के दौरान आरबीआई ने सोने की खरीद की जिससे स्वर्ण भंडार भी 15.30 करोड़ डॉलर बढ़कर 28.72 अरब डॉलर का हो गया। आलोच्य सप्ताह में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 8.5 करोड़ डॉलर घटकर 3.62 अरब डॉलर और विशेष आहरण अधिकार 30 लाख डॉलर की गिरावट के साथ 1.44 अरब डॉलर रह गया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 16:26:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब में गिरावट की ओर राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब में ब्लाक समिति व जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस ने अकाली-भाजपा के 10 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पंचायती चुनावों में मौजूदा सरकार का दबदबा व वोटर की बदलाव पसंद मानिसकता की अहम भूमिका होती है। जिस प्रकार की धक्केशाही अकाली-भाजपा सरकार के कार्याकाल में हुई उससे भी अधिक कांग्रेस सरकार में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-towards-decline-in-punjab/article-6035"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/akali-dal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब में ब्लाक समिति व जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस ने अकाली-भाजपा के 10 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पंचायती चुनावों में मौजूदा सरकार का दबदबा व वोटर की बदलाव पसंद मानिसकता की अहम भूमिका होती है। जिस प्रकार की धक्केशाही अकाली-भाजपा सरकार के कार्याकाल में हुई उससे भी अधिक कांग्रेस सरकार में हुई। राज्य में कोई भी सत्तापक्ष पार्टी उपचुनाव, लोक सभा चुनाव या पंचायती चुनावों में जीत को अपना अधिकार समझने लगी है। धक्केशाही का अंत नहीं दिखता।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि कल को राज्य में किसी अन्य पार्टी की सरकार सत्ता में आती है तब धक्केशाही और भी बढ़ सकती है। यह बिल्कुल उसी तरह है जैसे एक राजनेता को उसके वर्करों ने जानकारी दी कि विरोधी पार्टी ने सुबह 11 बजे बूथ पर कब्जा कर लिया तो नेता कहने लगा ‘घबराओ ना, अपनी सरकार आने पर सुबह 9 बजे ही कब्जा कर लूँगा’। अब अकाली दल यह वायदा नहीं कर रहा कि वह अपनी सरकार आने पर धक्केशाही वाला माहौल नहीं पैदा होने देगा, बल्कि समय आने पर सबक सिखाने व र्इंट का जवाब पत्थर से देने वाली सोच काम कर रही है। एक उम्मीदवार के विजेता घोषित किए जाने पर दोबारा गिनती करवाने का सीधा सा मतलब उसकी जीत की जिद्द को दर्शाता है। इस बार की धक्केशाही बहुत घातक रही।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक चुनाव में कांग्रेस व अकाली दल में मुकाबले का सवाल है, अकाली दल ने अपनी खिसक रही जमीन को संभाला है और असल अर्थों में विपक्ष व अन्य दूसरी बड़ी पार्टी की भूमिका निभाई है। पंंजाब का वोटर लहर को छोड़कर पारंपरिक पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है। विधानसभा में दूसरी बड़ी पार्टी आम आदमी पार्टी हंसी का पात्र बन गई है। चार लोक सभा सदस्यों व 20 विधायकों वाली इस पार्टी ने कांग्रेस को टक्कर नहीं दी। चुनाव में विभिन्न पार्टियों की सरगर्मियां इस बात का पुख्ता संकेत हैं कि लोक सभा चुनाव में मुकाबला अकाली-भाजपा व कांग्रेस के बीच होने के आसार हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पंचायती चुनाव कांग्रेस व अकाली दल के राजनीतिक मुकाबले का मैदान साबित हुआ। विभिन्न मोर्चों पर बुरी तरह से संकट में घिरे लाचार, बीमार पंजाब के लिए दर्द, इन चुनावों में कहीं भी महसूस नहीं किया जा सका।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Sep 2018 15:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में बढ़ता नैतिक पतन</title>
                                    <description><![CDATA[आज हमारा समाज जिस दौर से गुजर रहा है उसका चित्रण प्रत्येक दिन अखबारों एवं टीवी के समाचारों द्वारा दिखाया जा रहा है। लोग ईमानदारी और सदाचार का मार्ग छोड़कर छोटे-छोटे लालचों में फंसे दिखते हैं। लालच प्रमुखत: धन प्राप्ति का है परंतु साथ ही कामचोरी का भी दिखाई देता है। धन प्राप्ति के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/growing-moral-decline-in-the-country/article-3380"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/media.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज हमारा समाज जिस दौर से गुजर रहा है उसका चित्रण प्रत्येक दिन अखबारों एवं टीवी के समाचारों द्वारा दिखाया जा रहा है। लोग ईमानदारी और सदाचार का मार्ग छोड़कर छोटे-छोटे लालचों में फंसे दिखते हैं। लालच प्रमुखत: धन प्राप्ति का है परंतु साथ ही कामचोरी का भी दिखाई देता है। धन प्राप्ति के लिए लालच, घूस, भ्रष्टाचार, लूट के मामले सामने आते हैं। छोटे व्यक्तियों की बात तो क्या ऊंचे पदों पर आसीन व्यक्ति भी नियम-कायदों की घोर उपेक्षा कर मन-माफिक धन संचय के लिए कुछ भी गलत करने में नहीं हिचकते। बड़ों में राजनेता और उच्च पदस्थ वे अधिकारी भी हैं, जिन्हें समाज को मार्गदर्शन देना चाहिए और आदर्श उदाहरण बनकर देश की प्रगति के लिए सहायक बनना चाहिए। चूंकि बड़ों का अनुसरण समाज प्राचीन काल से करता आया है इसलिए आज समाज का छोटा वर्ग भी इसी चारित्रिक गिरावट में दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार हर जगह सामान्य हो चला है। जिसे जहां मौका मिलता है वहीं वह घोटाला कर बैठता है। घूंस स्वीकार कर नियमविरुद्ध कार्य करने को हर कोई तैयार है। अपने कर्त्तव्य और अपने उत्तरदायित्वों के प्रति लोगों की निष्ठा जैसे समाप्त हो चली है। आये दिन खबरें छपती हैं कि शिक्षक अपने छात्रों को शिक्षित करने में रुचि न लेकर कार्यस्थल से ड्यूटी की अवधि में अनुपस्थित रहते हैं। डाक्टर समय पर अस्पतालों में नहीं पहुंचते, मरीजों के दुख-तकलीफों को दूर करने में रुचि नहीं लेते। ध्यान केवल पैसों पर और अपनी कमाई पर रखते हंै। अधिकारी तक जो ऊंचे तनख्वाह पाते हैं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाह हैं। धन के अपव्यय या घोटाले के प्रसंग उजागर होने पर जांच कमीशन नि:युक्त कर दिये जाते हैं जो समय और धन के व्यय के बाद भी शायद वांछित परिणाम विभिन्न कारणों से नहीं दे पाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीह जन साधारण अपने अधिकारों से वंचित किये जा रहे हैं। बेरहमी देश में ताण्डव नृत्य कर रही है। इन सबका सबसे बड़ा कारण धार्मिक मान्यताओं की घोर उपेक्षा और शासन के कानूनों की अवहेलना है। धार्मिक मान्यतायें ही नैतिक चरित्र का निर्माण और परिपालन कराती है। जिनसे मनुष्य स्वानुशासित होता है। समाज में शांति सुरक्षा और व्यवस्था स्वत: ही बनी रहती है। किंतु आज प्राचीन तानाबाना विभिन्न कारणों से छिन्न-भिन्न हो गया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Oct 2017 04:32:54 +0530</pubDate>
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