<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/revolution/tag-5545" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Revolution - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/5545/rss</link>
                <description>Revolution RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गुरुग्राम में एक अक्टूबर को अग्र समागम में अग्र वीरों की दिखेगी जीवन गाथा</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा के अग्र वीरों ने भी आजादी आंदोलन में तन-मन-धन से लड़ी लड़ाई किसी ने लड़कर वीरता दिखाई, किसी ने सबका मनोबल बढ़ाया तो किसी ने जीवनभर की जमा पूंजी आजादी के लिए लगाई गुरुग्राम(संजय कुमार मेहरा)। अग्रकुल जनक महाराजा अग्रसेन जी की जयंती के अवसर पर 1857 की क्रांति (Heroes of Revolution 1857) व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-life-story-of-the-fore-heroes-will-be-seen-in-gurugram-on-october-1-at-agar-samagam/article-38408"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/heroes-of-revolution-1857.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>हरियाणा के अग्र वीरों ने भी आजादी आंदोलन में तन-मन-धन से लड़ी लड़ाई</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>किसी ने लड़कर वीरता दिखाई, किसी ने सबका मनोबल बढ़ाया तो किसी ने जीवनभर की जमा पूंजी आजादी के लिए लगाई</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(संजय कुमार मेहरा)।</strong> अग्रकुल जनक महाराजा अग्रसेन जी की जयंती के अवसर पर 1857 की क्रांति (Heroes of Revolution 1857) व स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाले अग्रवीरों की जीवन गाथा आज की पीढ़ी को दिखाकर, बताकर उन्हें अपने पूर्वजों के बलिदानों से रूबरू कराया जाएगा। आगामी एक अक्टूबर को गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में होने जा रहे इस अग्रसमागम-2022 की गूंज देशभर में पहुंच चुकी है। समारोह को भव्य बनाने के लिए आयोजन समिति जुटी है। हरियाणा के जिन अग्रवीरों ने आजादी आंदोलन में अपना सहयोग दिया, उन अग्रवीरों की जीवनगाथा से आपको रूबरू कराते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>मनोहर लाल ने कलम से हिलाई अंग्रेजों की जड़ें</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के बहादुरगढ़ में जन्में लाल मनोहर लाल मनोहर का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा था। शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ वे स्वतंत्रता संग्राम में भी आगे बढ़े। शेरो-शायरी के शौकीन मनोहर लाल ने देशभक्ति पर अनेक नज्में लिखीं। उनके माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत की जमकर खिलाफत की। वर्ष 1990 में हरियाणा उर्दू अकादमी ने उन्हें प्रथम पुरस्कार से नवाजा। वे बहादुरगढ़ से गुडगांव आ गए थे। यहां रोशनपुरा में उन्होंने घर बनाया और महात्मा गांधी को भी यहां वे लेकर आए। इस चौक को आज गांधी चौक के नाम से जाना जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लाला मुरलीधर ने अंग्रेजों को लौटाई सारी उपाधियां</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पलवल में जन्में लाला मुरलीधर गुप्त भारतीय राष्ट्रीय कांगे्रस के अग्रणी नेताओं में थे। उनका जन्म 30 मई 1848 को भीकम सेन-रमा देवी के आंगन में हुआ। आपने 1870 बीए तथा 1872 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। वकालत करते हुए उन्होंने बार काउंसिल अंबाला की स्थापना की। इस बार के वे 10 साल तक अध्यक्ष भी रहे। वे 1884 में अंबाला के म्युनिसिपल कमिश्नर और बाद में नगर पिता बनें। उन्हें अंग्रेज सरकार ने राय साहब की उपाधि से सम्मानित किया। आजादी के संघर्ष में भाग लेने के कारण वे अंगे्रज सरकार की नजर में एक खतरनाक स्वतंत्रता सेनानी बन चुके थे। 16 अगस्त 1920 को लाला मुरलीधर गुप्त ने अपनी राय साहब की उपाधि समेत सभी प्रमाण पत्र, सम्मान अंग्रेज सरकार को वापस लौटा दिए। उन्होंने गांधीजी की आवाज पर अंग्रेजों से सीधी लड़ाई का सामान किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे रामशरण मित्तल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रामशरण चंद मित्तल का जन्म नारनौल में 18 मई 1905 को हुआ था। उनके पिता श्री अयोध्या प्रसाद मित्तल पटियाला (पंजाब) यूनियन में विधानसभा स्पीकर तथा कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही प्रिंस आॅफ वेल्स की भारत यात्रा का विरोध किया। इस आंदोलन में सक्रिय सहयोगी रहे। वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ उन्होंने काले झंडे उठाकर प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया था। अंग्रेज सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया। आजादी के बाद वर्ष 1952 में पेप्सू राज्य की विधानसभा के वे सदस्य चुने गए। वहां के वे अध्यक्ष भी रहे। हरियाणा सरकार में उन्हें वित्त विभाग समेत अनेक विभागों का मंत्री भी बनाया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्रता संग्राम के महानायक शंकरलाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">नारनौल के ही रहने वाले थे लाल शंकर लाल संघी, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महानायक के रूप में काम किया। बंसल गोत्र के लाला शंकर लाल संघी का जन्म 6 मार्च 1885 को हुआ था। देशभक्ति का जज्बा उन्हें पूर्वजों से विरासत में मिला था। लाला शंकर लाल के दादाजी हरदेव सहाय नवाब झज्जर के दीवान थे। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में नवाब झज्जर के साथ हरदेव सहाय को भी फांसी दे दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन हॉकिंस जब पंजाब को जीतता हुआ नारनौल की तरफ बढ़ रहा था तो नसीबपुर में उसका मुकाबला क्रांतिवीर राव तुलाराम के साथ हुआ। नवाब झज्जर ने राव तुलाराम का साथ दिया। साथ में लाला हरदेव सहाय ने भी मोर्चा संभाला था। इस लड़ाई में हार जाने के बाद नवाब झज्जर व लाल हरदेव सहाय को फांसी दे दी गई।</p>
<hr />
<p><a title="दिल के दुश्मन हैं जंक फूड, जिमखाना और एनर्जी ड्रिंक्स" href="http://10.0.0.122:1245/junk-food-is-harmful-for-the-heart/">दिल के दुश्मन हैं जंक फूड, जिमखाना और एनर्जी ड्रिंक्स</a></p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-life-story-of-the-fore-heroes-will-be-seen-in-gurugram-on-october-1-at-agar-samagam/article-38408</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/the-life-story-of-the-fore-heroes-will-be-seen-in-gurugram-on-october-1-at-agar-samagam/article-38408</guid>
                <pubDate>Fri, 30 Sep 2022 09:37:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/heroes-of-revolution-1857.jpeg"                         length="102314"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में आयी क्रांति : Arvind Kejriwal</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों ने युद्ध स्तर पर काम करके शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की पूरे दुनिया में चर्चा हो रही है और विभिन्न देशों के लोग इसे यहां देखने आ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/revolution-in-education-in-delhi-kejriwal/article-12773"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/arvind-kejriwal-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की पूरे दुनिया में चर्चा हो रही है (Arvind Kejriwal)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। दिल्ली के मुख्?यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा कि पांच साल पहले जब आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनी थी तब दिल्ली के सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब थी लेकिन हमारी सरकार ने जनता के साथ मिलकर इन्हें दुरुस्त करके शिक्षा में क्रांति लाने का काम किया है। केजरीवाल ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दिल्ली की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए यहां के दो करोड़ लोगों के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर कार्य किया गया जिसका परिणाम सभी के सामने हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली के बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों ने युद्ध स्तर पर काम करके शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी</h3>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की पूरे दुनिया में चर्चा हो रही है और विभिन्न देशों के लोग इसे यहां देखने आ रहे हैं।  उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में 70 साल में जो नहीं हो सका, वह आप की सरकार ने पिछले पांच साल में कर दिखाया। देश को दिल्ली की शिक्षा क्रांति पर गर्व है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की पढ़ाई पर प्रश्न उठाया और यहां की शिक्षा का मजाक उड़ाया। शाह ने दिल्ली के अभिभावकों और बच्चों का जिस प्रकार मजाक उड़ा, उससे उन्हें दुख पहुंचा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> कुछ दिन पहले हमने दिल्ली के स्कूलों को दिखाने के लिए शाह को उनको न्योता दिया था।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही शिक्षक, अभिभावक से मिलवाना चाहता था।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्हें खुशी है कि अमित शाह ने भाजपा के सांसदों समेत सभी नेता स्कूलों की कमियां निकालने के लिए स्कूलों में घूमना शुरू किया</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन 1024 स्कूलों में से मात्र आठ स्कूलों में कुछ कुछ कमियां मिलीं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके लिए यहां के अभिभावकों और बच्चों को बधाई देता हूं।</li>
</ul>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/revolution-in-education-in-delhi-kejriwal/article-12773</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/revolution-in-education-in-delhi-kejriwal/article-12773</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Jan 2020 16:57:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/arvind-kejriwal-2.jpg"                         length="35095"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब एक नयी सम्पूर्ण क्रांति हो</title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के आंदोलन से हमें ऐसे बहुत से नेता मिले जिनके प्रयासों के कारण ही यह देश आज तक टिका हुआ है और उसकी समस्त उपलब्धियां उन्हीं नेताओं की दूरदृष्टि और त्याग का नतीजा है। ऐसे ही नेताओं में जीवनभर संघर्ष करने वाले और इसी संघर्ष की आग में तपकर कुंदन की तरह दमकते हुए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/now-there-is-a-whole-new-revolution/article-3383"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/leaders.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजादी के आंदोलन से हमें ऐसे बहुत से नेता मिले जिनके प्रयासों के कारण ही यह देश आज तक टिका हुआ है और उसकी समस्त उपलब्धियां उन्हीं नेताओं की दूरदृष्टि और त्याग का नतीजा है। ऐसे ही नेताओं में जीवनभर संघर्ष करने वाले और इसी संघर्ष की आग में तपकर कुंदन की तरह दमकते हुए समाज के सामने आदर्श बन जाने वाले पे्ररणास्रोत थे लोकनायक जयप्रकाश नारायण। जो अपने त्यागमय जीवन के कारण मृत्यु से पहले ही प्रात: स्मरणीय बन गये थे। अपने जीवन में संतों जैसा प्रभामंडल केवल दो नेताओं ने प्राप्त किया। एक महात्मा गांधी थे तो दूसरे जयप्रकाश नारायण। इसलिए जब सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद वे 1974 में ह्यसिंहासन खाली करो जनता आती है के नारे के साथ वे मैदान में उतरे तो सारा देश उनके पीछे चल पड़ा, जैसे किसी संत महात्मा के पीछे चल रहा हो।</p>
<p style="text-align:justify;">11 अक्टूबर, 1902 को जन्मे जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें लोकनायक के नाम से भी जाना जाता है। 1999 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल भी उनके नाम पर है।लोकनायक जयप्रकाशजी की समस्त जीवन यात्रा संघर्ष तथा साधना से भरपूर रही। उसमें अनेक पड़ाव आए, उन्होंने भारतीय राजनीति को ही नहीं बल्कि आम जनजीवन को एक नई दिशा दी, नए मानक गढ़े।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे- भौतिकवाद से अध्यात्म, राजनीति से सामाजिक कार्य तथा जबरन सामाजिक सुधार से व्यक्तिगत दिमागों में परिवर्तन।  लोकनायक जयप्रकाशजी की जीवन की विशेषताएं और उनके व्यक्तित्व के आदर्श कुछ विलक्षण और अद्भुत हैं जिनके कारण से वे भारतीय राजनीति के नायकों में अलग स्थान रखते हैं। उनका सबसे बड़ा आदर्श था जिसने भारतीय जनजीवन को गहराई से प्रेरित किया, वह था कि उनमें सत्ता की लिप्सा नहीं थी, मोह नहीं था, वे खुद को सत्ता से दूर रखकर देशहित में सहमति की तलाश करते रहे और यही एक देशभक्त की त्रासदी भी रही थी। वे कुशल राजनीतिज्ञ भले ही न हो किन्तु राजनीति की उन्नत दिशाओं के पक्षधर थे, प्रेरणास्रोत थे।</p>
<p style="text-align:justify;">वे देश की राजनीति की भावी दिशाओं को बड़ी गहराई से महसूस करते थे। यही कारण है कि राजनीति में शुचिता एवं पवित्रता की निरंतर वकालत करते रहे। महात्मा गांधी जयप्रकाश की साहस और देशभक्ति के प्रशंसक थे। उनका हजारीबाग जेल से भागना काफी चर्चित रहा और इसके कारण से वे असंख्य युवकों के सम्राट बन चुके थे। वे अत्यंत भावुक थे लेकिन महान क्रांतिकारी भी थे। वे संयम, अनुशासन और मयार्दा के पक्षधर थे। इसलिए कभी भी मयार्दा की सीमा का उल्लंघन नहीं किया। विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना अध्ययन नहीं छोड़ा और आर्थिक तंगी ने भी उनका मनोबल नहीं तोड़ा। यह उनके किसी भी कार्य की प्रतिबद्धता को ही निरूपित करता था, उनके दृढ़ विश्वास को परिलक्षित करता है। मैंने जेपी को नहीं देखा लेकिन उनकी प्रेरणाएं मेरे पारिवारिक परिवेश की आधारभित्ति रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरी माताजी स्व. सत्यभामा गर्ग उनकी अनन्य सेविका थी। राजस्थान में होने वाले जेपी के कार्यक्रमों को वे संचालित किया करती थी, उनके व्यक्तिगत व्यवस्था में जुड़े होने के कारण उनके आदर्श एवं प्रेरणाएं हमारे परिवार का हिस्सा थे। मेरे आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्री तुलसी के जीवन से जुड़े एक बड़े विरोधपूर्ण वातावरण के समाधान में भी जयप्रकाश का अमूल्य योगदान है। उनकी चर्चित पुस्तक अग्निपरीक्षा को लेकर जब देश भर में दंगें भड़के, तो जेपी के आह्वान से ही शांत हुए। जेपी के कहने पर आचार्य तुलसी ने अपनी यह पुस्तक भी वापस ले ली।  जयप्रकाश नारायण को 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इन्दिरा गांधी को पदच्युत करने के लिये उन्होंने सम्पूर्ण क्रांति नामक आन्दोलन चलाया।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकनायक ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल हैं-राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है। सम्पूर्ण क्रांति की तपिश इतनी भयानक थी कि केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था। जयप्रकाश नारायण की हुंकार पर नौजवानों का जत्था सड़कों पर निकल पड़ता था। बिहार से उठी सम्पूर्ण क्रांति की चिंगारी देश के कोने-कोने में आग बनकर भड़क उठी थी। जेपी के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण घर-घर में क्रांति का पर्याय बन चुके थे। लालमुनि चैबे, लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान या फिर सुशील मोदी, आज के सारे नेता उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में आजादी की लड़ाई से लेकर वर्ष 1977 तक तमाम आंदोलनों की मशाल थामने वाले जेपी यानी जयप्रकाश नारायण का नाम देश के ऐसे शख्स के रूप में उभरता है जिन्होंने अपने विचारों, दर्शन तथा व्यक्तित्व से देश की दिशा तय की थी। उनका नाम लेते ही एक साथ उनके बारे में लोगों के मन में कई छवियां उभरती हैं। लोकनायक के शब्द को असलियत में चरितार्थ करने वाले जयप्रकाश नारायण अत्यंत समर्पित जननायक और मानवतावादी चिंतक तो थे ही इसके साथ-साथ उनकी छवि अत्यंत शालीन और मर्यादित सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति की भी है। उनका समाजवाद का नारा आज भी हर तरफ गूंज रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही उनके नारे पर राजनीति करने वाले उनके सिद्धान्तों को भूल रहे हों, क्योंकि उन्होंने सम्पूर्ण क्रांति का नारा एवं आन्दोलन जिन उद्देश्यों एवं बुराइयों को समाप्त करने के लिये किया था, वे सारी बुराइयां इन राजनीतिक दलों एवं उनके नेताओं में व्याप्त है। सम्पूर्ण क्रान्ति के आह्वान में उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, सम्पूर्ण क्रान्ति आवश्यक है। इसलिये आज एक नयी सम्पूर्ण क्रांति की जरूरत है। यह क्रांति व्यक्ति सुधार से प्रारंभ होकर व्यवस्था सुधार पर केन्द्रित हो। कुर्सी पर कोई भी बैठे, लेकिन मूल्य प्रतिष्ठापित होने जरूरी है। ऐसा करके ही हम एक महान लोकनायक को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ललित गर्ग</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/now-there-is-a-whole-new-revolution/article-3383</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/now-there-is-a-whole-new-revolution/article-3383</guid>
                <pubDate>Wed, 11 Oct 2017 04:33:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-10/leaders.jpg"                         length="29360"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        