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                <title>hunger - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>भुखमरी : वैश्विक चिंतन, पर सबको भोजन कैसे मिले&amp;#8230;? जवाब नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिन पहले ही जारी हुए थे वैश्विक भुखमरी सूचकांक के आंकड़े हिसार में गुजवि/हकृवि कुलपति सहित विशेषज्ञों ने जताई चिंता हिसार(सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। वैश्विक भुखमरी सूचकांक के आंकड़ों में अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल व बांग्लादेश से भी पिछड़ने के बाद भारत देश के कृषि व तकनीक से जुड़े वैज्ञानिकों ने भूख व कुपोषण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hunger-global-thought-but-how-to-get-food-for-everyone/article-27707"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/hunger.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>दो दिन पहले ही जारी हुए थे वैश्विक भुखमरी सूचकांक के आंकड़े</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हिसार में गुजवि/हकृवि कुलपति सहित विशेषज्ञों ने जताई चिंता</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार(सच कहूँ/संदीप सिंहमार)।</strong> वैश्विक भुखमरी सूचकांक के आंकड़ों में अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल व बांग्लादेश से भी पिछड़ने के बाद भारत देश के कृषि व तकनीक से जुड़े वैज्ञानिकों ने भूख व कुपोषण के उन्मूलन के लिए मंथन करना शुरू कर दिया है। इस मंथन से सुधार कितना होगा इसकी रिपोर्ट तो एक साल बाद ही मिलेगी लेकिन देश के लिए सकारात्मक सोचना सबसे बड़ी बात है। दरअसल शनिवार को विश्व खाद्य दिवस के उपलक्ष में हिसार के गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के खाद्य एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सौजन्य से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विश्व खाद्य दिवस समारोह में भूख व कुपोषण के उन्मूलन पर विशेष रूप से चर्चा हुई। हालांकि किसी भी वक्ता ने वैश्विक भुखमरी सूचकांक के आंकड़ों में भारत को मिले 101 स्थान का जिक्र नहीं किया लेकिन चुनावों में शामिल होने वाले विश्वविद्यालय के कुलपति सहित सभी विशेषज्ञों के मस्तक पर चिंता की लकीरें जरूर देखी गई। इस दौरान गुजवि के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज काम्बोज ने अपने संबोधन में देश में कुपोषण के उन्मूलन के लिए जिंक और आयरन के बढ़े हुए स्तर के साथ बायोफोटीर्फाइड खेती के महत्व पर जोर दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इस गंभीर स्थिति से निपटना होगा</h4>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान यह तो बता दिया गया कि कुपोषण के उन्मूलन के लिए जिंक और आयरन के बढ़े हुए स्तर के साथ बायोफोटीर्फाइड खेती को अपनाना चाहिए पर किसी भी वक्ता ने ऐसी तकनीक का जिक्र नहीं किया जिससे देश भर के गरीब से गरीब व्यक्ति को भोजन कैसे मिले? इस विषय पर गहनता से सोचने की जरूरत है। क्योंकि यदि भोजन के बिना किसी भी इंसान की जान चली जाती है तो इससे बड़ी गंभीर स्थिति किसी भी देश के लिए नहीं हो सकती।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वैश्विक चिंता बनी भूख</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों ने किसानों की आय को दोगुना करने, फसल के बाद के नुकसान को कम करने के लिए अच्छी तरह से प्रबंधित कृषि मॉडल बनाने का सुझाव दिया और खाद्य सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा की वैश्विक चिंता को पूरा करने के लिए सस्ती कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाले पौष्टिक भोजन पर भी जोर दिया। हमारी खंडित कृषि-खाद्य प्रणालियों को ठीक करने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि सभी के पास खाने के लिए पर्याप्त सुरक्षित और पौष्टिक भोजन हो, और पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला अधिक टिकाऊ, लचीली और समावेशी हो, जिसमें काम करने वालों के लिए अच्छी स्थिति और सामाजिक सुरक्षा हो।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पौष्टिक भोजन की बढ़ती मांग</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य वक्ता प्रो. एम.बी. बेरा ने ह्यनए उत्पाद डिजाइन के परिदृश्य को बदलने में खाद्य प्रौद्योगिकीविदों और पोषण विशेषज्ञों की भूमिकाह्ण पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। विशेषज्ञ ने कोविड-19 जैसी महामारी की स्थिति में स्वस्थ और पौष्टिक भोजन की बढ़ती मांग पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए पोषक तत्वों और फाइटोकॉन्स्टिटएंट्स की भूमिका के बारे में बताया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए शोधों को बढ़ाने की भी वकालत</h4>
<p style="text-align:justify;">गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने हरित प्रौद्योगिकी,बेहतर प्रसंस्करण तकनीकों और खाद्य सुरक्षा और स्थिरता के लिए उन्नत भंडारण स्थितियों को अपनाने के लिए खाद्य प्रौद्योगिकीविदों और पोषण विशेषज्ञों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने आबादी की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए आवेदन-आधारित शोधों को बढ़ाने की भी वकालत की तथा एकीकृत तरीके से काम करने के लिए कृषि और खाद्य उद्योग के बीच संबंधों को मजबूत करने का सुझाव दिया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 14:45:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>दिल्ली कूच आज , 27 को घरेंगे सीएम आवास</title>
                                    <description><![CDATA[-मानी गई मांगे लागू न किए जाने के विरोध में सफाई कर्मचारियों का धरना जारी भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। मांगों को लेकर प्रदेश भर के सफाई कर्मचारी नगर पालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जिनकी सूध लेने वाला कोई नहीं है। जिसके चलते अब इन कर्मचारियों ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">-मानी गई मांगे लागू न किए जाने के विरोध में सफाई कर्मचारियों का धरना जारी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मांगों को लेकर प्रदेश भर के सफाई कर्मचारी नगर पालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जिनकी सूध लेने वाला कोई नहीं है। जिसके चलते अब इन कर्मचारियों ने 21 फरवरी को दिल्ली में कूच करने की योजना बनाई है। इन कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले साल 24 मई को सरकार के साथ उनकी मांगों को लेकर जो फैसला किया गया था, उसे अब तक भी लागू नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके चलते उन्हे मजबूरन भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है। भिवानी नगर परिषद कार्यालय के बाहर बैठे कर्मचारी नेता कमल कांगड़ा एवं विजय ने बताया कि प्रदेश सरकार वायदा खिलाफी पर उतरी हुई है। मई में हुई सफाई कर्मचारियों की लगभग दो सप्ताह की हड़ताल के बाद उनकी मांगें प्रदेश सरकार ने मान ली थी। परन्तु उन्हें अब तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि सफाई कर्मचारियों को पक्का करने, एक्सग्रेसिया लागू करने, पुरानी पेंशन बहाली करने,</p>
<p style="text-align:justify;">ठेका प्रथा बंद करने, कर्मचारियों के ईएफ, पीएफ जमा करने, एसआई कार्ड बनाने व समय पर वेतन देने की मांगों को लेकर वे तीन दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो वे आने वाले 2019 के चुनाव में सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे। इसी को लेकर प्रदेश भर के कर्मचारी कल 21 फरवरी को दिल्ली में कूच करेंगे तथा 27 मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Feb 2019 16:48:21 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भूख से सालाना तीन हजार बच्चे तोड़ देते हैं दम</title>
                                    <description><![CDATA[भूख से 3 बच्चियों की मौत पर सियासत शुरू देश की राजधानी दिल्ली के मंडावली इलाके में भूख से 3 बच्चियों की मौत पर सियासत शुरू हो गई है। इस बीच दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। दिल्ली सरकार का कहना है यह परिवार दो दिन पहले ही मंडावली में एक मकान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/there-are-thousands-of-children-dead-every-year-from-hunger/article-5025"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/hunger.jpg" alt=""></a><br /><h2>भूख से 3 बच्चियों की मौत पर सियासत शुरू</h2>
<p style="text-align:justify;">देश की राजधानी दिल्ली के मंडावली इलाके में भूख से 3 बच्चियों की मौत पर सियासत शुरू हो गई है। इस बीच दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। दिल्ली सरकार का कहना है यह परिवार दो दिन पहले ही मंडावली में एक मकान में रह रहे किराएदार के यहां मेहमान बनकर आया था। घटना के पहले से ही बच्चियों के मजदूर पिता काम पर गए थे जो लौटे नहीं हैं, मां भी पहले से मानसिक बीमार हैं। बहरहाल सच्चाई तो जाँच के बाद ही उजागर होगी मगर नेताओं ने राजनीति की बिसात पर अपनी रोटियां सेंकनी शुरू कर दी है। सच तो यह है भारत ने तरक्की की राह पर लंबा सफर तय तो कर लिया लेकिन लोगों की भूख मिटाने में उसे अब तक कामयाबी नहीं मिली। हर दिन दो वक्त की रोटी से महरूम लोगों की तादाद में कोई कमी नहीं आई है।गरीबी, भूख, भुखमरी और बिमारी का चोली दामन का साथ है।</p>
<h2>भारत में कुपोषित लोगों की संख्या 19.07 करोड़</h2>
<p style="text-align:justify;">सयुंक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुपोषित लोगों की संख्या 19.07 करोड़ है। यह आंकड़ा दुनिया में सर्वाधिक है। देश में 15 से 49 वर्ष की 51.4 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। पांच वर्ष से कम उम्र के 38.4 फीसदी बच्चे अपनी आयु के मुताबिक कम लंबाई हैं। इक्कीस फीसदी का वजन अत्यधिक कम है। भोजन की कमी से हुई बीमारियों से देश में सालाना तीन हजार बच्चे दम तोड़ देते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत में खाद्यान वितरण प्रणाली में सुधार और मोदी सरकार के जनकल्याण के दावों के बावजूद 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में वैश्विक भुखमरी सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स- जीएचआई) में भारत तीन पायदान नीचे उतर गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख एक गंभीर समस्या है और इस वर्ष 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर आगया है। वर्ष 2016 में भारत इस सूचकांक में 97वें स्थान पर था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में भूख से मरने वालों की संख्या घटने की बजाए और तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 25 सालों में भारत के खाना बर्बादी करने के आकड़ों में तो कोई फर्क नहीं पड़ा है। लेकिन कुपोषण की वजह से होने वाले बच्चों की मौत के आकड़ों में मामूली सुधार जरूर देखने को मिला है। नेपाल, पाकिस्तान के अलावा भारत इस मामले में सभी ब्रिक्स देशों में सबसे नीचे स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><h2 style="text-align:justify;">विश्वभर में हर 8 में से 1 व्यक्ति भूख के साथ जी रहा है</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भूख और कुपोषण की मार सबसे कमजोर पर भारी पड़ती हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">दुनिया में 60 प्रतिशत महिलाएं भूख का शिकार हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">गरीब देशों में 10 में से 4 बच्चे अपने शरीर और दिमाग से कुपोषित हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">दुनिया में प्रतिदिन 24 हजार लोग किसी बीमारी से नहीं, बल्कि भूख से मरते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इस संख्या का एक तिहाई हिस्सा भारत में आता है।</li>
<li style="text-align:justify;">भूख से मरने वाले इन 24 हजार में से 18 हजार बच्चे हैं</li>
<li style="text-align:justify;">हर साल गेहूं सड़ने से करीब 450 करोड़ रूपए का नुकसान होता है।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">जब तक अमीरी और गरीबी की खाई नहीं मिटेगी तब तक यूँ ही जारी रहेगा</h2>
<p style="text-align:justify;">दुनियां से जब तक अमीरी और गरीबी की खाई नहीं मिटेगी तब तक भूख के खिलाफ संघर्ष यूँ ही जारी रहेगा। चाहे जितना चेतना और जागरूकता के गीत गालों कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। अब तो यह मानने वालों की तादाद कम नहीं है कि जब तक धरती और आसमान रहेगा तब तक आदमजात अमीरी और गरीबी नामक दो वर्गों में बंटा रहेगा। शोषक और शोषित की परिभाषा समय के साथ बदलती रहेगी मगर भूख और गरीबी का तांडव कायम रहेगा। अमीरी और गरीबी का अंतर कम जरूर हो सकता है मगर इसके लिए हमें अपनी मानसिकता बदलनी पड़ेगी। प्रत्येक संपन्न देश और व्यक्ति को संकल्पबद्धता के साथ गरीब की रोजी और रोटी का माकूल प्रबंध करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jul 2018 03:40:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भूख से मौत और अन्न की बर्बादी</title>
                                    <description><![CDATA[भूख से न हो किसी की मौत उठाए जाएंगे विशेष कदम रीता सिंह चंद रोज पहले झारखंड राज्य के गिरिडीह जिले के मंगरगड्डी गांव में 58 वर्षीय महिला सावित्री देवी और चतरा जिले में 45 वर्षीय मीना मुसहर की भूख से तड़पकर मौत रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि खाद्यान्न वितरण प्रणाली में सुधार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/death-and-hunger-and-food-wastage/article-4382"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/bukhmari.jpg" alt=""></a><br /><div class="tw-ta-container tw-nfl" style="text-align:center;">
<h1><strong style="text-align:justify;font-family:Georgia, 'Times New Roman', 'Bitstream Charter', Times, serif;">भूख से न हो किसी की मौत उठाए जाएंगे विशेष कदम</strong></h1>
<pre class="tw-data-text tw-ta tw-text-medium" dir="ltr"><strong>रीता सिंह</strong></pre>
</div>
<p style="text-align:justify;">चंद रोज पहले झारखंड राज्य के गिरिडीह जिले के मंगरगड्डी गांव में 58 वर्षीय महिला सावित्री देवी और चतरा जिले में 45 वर्षीय मीना मुसहर की भूख से तड़पकर मौत रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि खाद्यान्न वितरण प्रणाली में सुधार और अधिक पैदावार के बावजूद भी भुखमरी का संकट टला नहीं हैं। गत वर्ष सितंबर माह में भी इसी राज्य के सिमडेगा जिले के करीमती गांव में 11 वर्षीय संतोषी और धनबाद में झरिया थाना क्षेत्र में 40 वर्षीय रिक्शा चालक की भूख से मौत हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">तब उम्मीद जताई गई था कि ऐसी हृदयविदारक घटनाओं से राज्य सरकार सबक लेगी और भविष्य में किसी की भूख से मौत न हो इसके लिए ठोस पहल करेगी। लेकिन सावित्री देवी और मीना मुसहर की मौत ने पुन: रेखांकित किया है कि राज्य सरकार भुखमरी को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा कहा गया है कि भूख से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल सच क्या है यह कहना तो मुश्किल है लेकिन गौर करें तो देश में भूख से मौत की यह कोई पहली या आखिरी घटना नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों में पहले भी भूख से होने वाली मौत सत्ता और सिस्टम की खामियों-नाकामियों को उजागर कर चुकी है। भारत किस कदर भुखमरी का शिकार है, इसी से समझा जा सकता है कि 2015 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक भारत में हर वर्ष 3000 से अधिक लोगों की मौत भुखमरी से होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मरने वालों में सर्वाधिक संख्या बच्चों की होती है। याद होगा गत वर्ष दुनिया भर के देशों में भुखमरी के हालात का विश्लेषण करने वाली गैर सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संस्था ‘इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आइएफपीआरआइ) की एक रिपोर्ट से उद्घाटित हुआ कि एशियाई देशों में भारत की स्थिति बस पाकिस्तान और बांग्लादेश से ही बेहतर है। चीन, नेपाल और म्यांमार जैसे पड़ोसी देश भारत से बेहतर स्थिति में हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">भुखमरी से निपटने का कोई ठोस रोडमैप नहीं</h2>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट से भी उद्घाटित हुआ है कि विश्व में भुखमरी के शिकार लोगों की तादाद कम होने के बजाए लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में 77 करोड़ लोग भूख पीड़ित थे जो 2016 में बढ़कर 81 करोड़ हो गए। इसी तरह 2015 में अत्यधिक भूख पीड़ित लोगों की संख्या 8 करोड़ और 2016 में 10 करोड़ थी, वह 2017 में बढ़कर 12.4 करोड़ हो गयी है। यह आंकड़ा रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य वैश्विक संस्थाओं के पास भुखमरी से निपटने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो संवेदनहीनता के कारण भूख और कुपोषण की समस्या लगतार गहरा रही हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">भुखमरी के शिकार अधिकांश लोग विकासशील देशों में रहते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">बिडंबना यह है कि अगर इस पर काबू नहीं पाया गया तो 2035 तक दुनिया की आधी आबादी भूख और कुपोषण की चपेट में होगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक भुखमरी के शिकार अधिकांश लोग विकासशील देशों में रहते हैं और इनमें से भी सर्वाधिक एशिया और अफ्रीका में रहते हैं। और इसमें भी सर्वाधिक संख्या भारतीयों की ही है। गौर करें तो भुखमरी के लिए ढ़ेर सारे कारण हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण अन्न की बर्बादी है।</p>
<h2 style="text-align:center;">देश को  अन्न की बर्बादी से तकरीबन 50 हजार करोड़ की चपत लगती</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत की ही बात करें तो अन्न बर्बाद करने के मामले में यह दुनिया के संपन्न देशों से भी आगे है। आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल उतना अन्न बर्बाद होता है जितना ब्रिटेन उपभोग करता है। भारत में कुल पैदा किए जाने वाले भोज्य पदार्थ का 40 प्रतिशत बर्बाद होता है। अर्थात हर साल भारत को अन्न की बर्बादी से तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपए की चपत लगती है। साथ ही बर्बाद भोजन को पैदा करने में 25 प्रतिशत स्वच्छ जल का इस्तेमाल होता है और साथ ही कृषि के लिए जंगलों को भी नष्ट किया जाता है।</p>
<h2 style="text-align:center;">बर्बाद हो रहे भोजन को उगाने में 30 करोड़ बैरल तेल की भी खपत</h2>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा बर्बाद हो रहे भोजन को उगाने में 30 करोड़ बैरल तेल की भी खपत होती है। यही नहीं बर्बाद हो रहे भोजन से जलवायु प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है। उसी का नतीजा है कि खाद्यान्नों में प्रोटीन और आयरन की मात्रा लगातार कम हो रही है। खाद्य वैज्ञानिकों की मानें तो कार्बन डाइ आॅक्साइड उत्सर्जन की अधिकता से भोजन से पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं जिसके कारण चावल, गेहूं, जौ जैसे प्रमुख खाद्यान में प्रोटीन की कमी होने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों के मुताबिक चावल में 7.6 प्रतिशत, जौ में 14.1 प्रतिशत, गेहूं में 7.8 प्रतिशत और आलू में 6.4 प्रतिशत प्रोटीन की कमी दर्ज की गयी है। अगर कार्बन उत्सर्जन की यही स्थिति रही तो 2050 तक दुनिया भर में 15 करोड़ लोग इस नई वजह के चलते प्रोटीन की कमी का शिकार हो जाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:center;">2050 तक भारतीयों के प्रमुख खुराक से 5.3 प्रतिशत प्रोटीन हो जाएगा गायब</h2>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि यह दावा हार्वर्ड टीएच चान स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ ने अपनी रिपोर्ट में किया और यह एनवायरमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव जर्नल में प्रकाशित हुआ। एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक भारतीयों के प्रमुख खुराक से 5.3 प्रतिशत प्रोटीन गायब हो जाएगा। इस कारण 5.3 करोड़ भारतीय प्रोटीन की कमी से जूझेंगे। अगर भोज्य पदार्थों में प्रोटीन की मात्रा में कमी आयी तो भारत के अलावा उप सहारा अफ्रीका के देशों के लिए भी स्थिति भयावह होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए कि यहां लोग पहले से ही प्रोटीन की कमी और कुपोषण से जूझ रहे हैं। बढ़ते कार्बन डाइआक्साइड के प्रभाव से सिर्फ प्रोटीन ही नहीं आयरन कमी की समस्या भी बढ़ेगी। दक्षिण एशिया एवं उत्तर अफ्रीका सहित दुनिया भर में पांच वर्ष से कम उम्र के 35.4 करोड़ बच्चों और 1.06 महिलाओं के इस खतरे से ग्रस्त होने की संभावनाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके कारण उनके भोजन में 3.8 प्रतिशत आयरन कम हो जाएगा। फिर एनीमिया से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। यूनाइटेड नेशन के फूड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट से उद्घाटित हो चुका है कि सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद भी भारत में पिछले एक दशक में भुखमरी की समस्या में तेजी से वृद्धि हुई है।</p>
<h2 style="text-align:center;"> विश्व बैंक ने कुपोषण की तुलना ‘ब्लैक डेथ’ नामक उस महामारी से की है</h2>
<p style="text-align:center;">
देश में आज भी 30 करोड़ लोग हर रोज भूखे पेट सोने को मजबूर हैं जबकि सरकारी गोदामों में हर वर्ष हजारों करोड़ रुपए का अनाज सड़ जाता है। अगर गोदामों के अनाजों को गरीबों में वितरित किया जाए तो भूख और कुपोषण से निपटने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि विश्व बैंक ने कुपोषण की तुलना ‘ब्लैक डेथ’ नामक उस महामारी से की है जिसने 18 वीं सदी में यूरोप की जसंख्या के एक बड़े हिस्से को निगल लिया था।</p>
<h2 style="text-align:center;">भारत में कुपोषण का दर लगभग 55 प्रतिशत है</h2>
<p style="text-align:justify;">विश्व बैंक के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में कुपोषण का दर लगभग 55 प्रतिशत है जबकि उप सहारीय अफ्रीका में यह 27 प्रतिशत के आसपास है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में हर साल भूख और कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या दस लाख से भी ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दक्षिण एशिया में भारत कुपोषण के मामले में सबसे बुरी हालत में है। एसीएफ की रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुपोषण जितनी बड़ी समस्या है वैसे पूरे दक्षिण एशिया में और कहीं देखने को नहीं मिली है। अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार भूख और कुपोषण से निपटने के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन का खाका तैयार कर चुकी है जिसके तहत महिलाओं और बच्चों को पूरक पोषण दिया जाना सुनिश्चित हुआ है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/death-and-hunger-and-food-wastage/article-4382</link>
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                <pubDate>Fri, 22 Jun 2018 13:44:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>उपराज्यपाल के दफ्तार में भूख हड़ताल: केजरीवाल के धरने पर आप सरकार की हाईकोर्ट ने की खिंचाई</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार को केजरीवाल के धरने का आठवां दिन है नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की खिंचाई करते हुए सोमवार को पार्टी से पूछा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके कुछ मंत्रियों को उप राज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरने पर बैठने के लिए किसने अधिकृत किया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/hunger-strike-kejriwals-dharana/article-4299"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jkjk-copy-2.jpg" alt=""></a><br /><h2>सोमवार को केजरीवाल के धरने का आठवां दिन है</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की खिंचाई करते हुए सोमवार को पार्टी से पूछा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके कुछ मंत्रियों को उप राज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरने पर बैठने के लिए किसने अधिकृत किया है।</p>
<p>न्यायमूर्ति ए के चावला और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने कहा कि आम तौर पर हड़ताल किसी प्रतिष्ठान या कार्यालय के बाहर होती है अंदर नहीं। पीठ ने कहा, ‘हड़ताल और धरने (केजरीवाल का धरना) के लिए किसने अधिकृत किया। आप उप राज्यपाल के कार्यालय के अंदर धरने पर बैठे हैं। अगर यह हड़ताल है तो यह कार्यालय के बाहर होना चाहिए। उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संघ को इस मामले में पार्टी बनाया जाना चाहिए।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी इस मामले से जुड़ी दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। एक याचिका केजरीवाल के उप राज्यपाल के कार्यालय में धरने के विरोध में दायर की गयी है और दूसरी याचिका दिल्ली सरकार के मातहत काम करने वाले वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की कथित हड़ताल के विरोध में दाखिल की गई है।</p>
<p>वहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ‘कथित’ हड़ताल समाप्त कराने और घर-घर राशन आपूर्ति की स्वीकृति देने की मांग को लेकर उप राज्यपाल अनिल बैजल के आवास पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को तबीयत बिगड़ने पर सोमवार को यहां अस्पताल में भर्ती कराया गया।</p>
<h2><strong>मनीष सिसोदिया अस्पताल में भर्ती</strong><br />
<strong>आईएएस अधिकारियों की हड़ताल, केजरीवाल ने मोदी से लगायी गुहार</strong></h2>
<p>दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों की राष्ट्रीय राजधानी में हड़ताल खत्म कराने के लिए सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की। केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘मैं माननीय प्रधानमंत्री से अपील करता हूं कि वह अब आईएएस अधिकारियों को अपना हड़ताल समाप्त करने के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’ दें। केजरीवाल का यह ट्वीट आईएएस अधिकारियों को यह आश्वासन दिए जाने के बाद सामने आया है कि वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jun 2018 18:05:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भूख से मौतों पर गंभीर हो सरकारें</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ी-बड़ी खोजी संस्थाएं भारत को बेशक भारत को विश्व की सबसे तेज़ उभरती हुई अर्थव्यवस्था करार दे रही हों। बेशक विभिन्न आंकड़ों के खेल में भारत विकास के नए-नए आयाम छूह रहा हो और केंद्र व राज्य सरकारें अपनी पीठ ऐसे सर्वे आने के बाद अपनी पीठ थपथपाने में बेशक पीछे नहीं रह रही हों। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/governments-are-serious-on-deaths-from-hunger/article-3525"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/poor-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बड़ी-बड़ी खोजी संस्थाएं भारत को बेशक भारत को विश्व की सबसे तेज़ उभरती हुई अर्थव्यवस्था करार दे रही हों। बेशक विभिन्न आंकड़ों के खेल में भारत विकास के नए-नए आयाम छूह रहा हो और केंद्र व राज्य सरकारें अपनी पीठ ऐसे सर्वे आने के बाद अपनी पीठ थपथपाने में बेशक पीछे नहीं रह रही हों। लेकिन देश के राज्य झारखंड में भूख से हो रही मौतें देश में विकास के हो रहे दावों की धज्जियां उड़ा रही हैं। 21वीं सदी में भी यदि देश में किसी व्यक्ति की मौत भूख से मरने की वजह से हो रही है तो निश्चित तौर पर यह अत्यंत गंभीर समस्या है। झारखंड के सिमडेगा जिले की संतोषी कुमारी, धनबाद के बैधनाथ रविदास और देवघर के रूपलाल मरांडी की कथित तौर पर भूख से हुई मौत ने सरकार की जन वितरण प्रणाली को आधार से जोड़ने की नीति और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के कार्यान्वयन में गंभीर त्रुटियों के कारण लोगों के जीने के अधिकार के हनन को उजागर किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संतोषी कुमारी के परिवार को राशन नहीं मिल रहा था क्योंकि आधार से लिंक नही होने के कारण उनके कार्ड को रद्द कर दिया गया था। कई बार आवेदन देने के बावजूद भी बैधनाथ रविदास के परिवार का राशन कार्ड नहीं बना था। जन वितरण प्रणाली में आधार आधारित प्रमाणीकरण के बायोमेट्रिक मशीन में अंगूठे का निशान नहीं मिलने के कारण रूपलाल मरांडी को भी राशन मिलना बंद हो गया था। ये मामलें सरकार की जवाबदेही की कमी की चरम सीमा है, लेकिन राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत राशन मिलने के अधिकार का हनन रोजाना की एक हकीकत है। राज्य में कानून लागू हुए दो साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन अभी भी अनेक योग्य परिवारों को राशन कार्ड निर्गत नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका एक मुख्य कारण है कि राशन मिलने की पात्रता 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) पर आधारित है जिसमें कई प्रकार की त्रुटियां हैं- जैसे जनगणना के दौरान परिवार की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का सही से आकलन न करना, जनगणना से परिवार छूट जाना आदि। प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण भी योग्य परिवारों के आवेदनों पर समय पर कार्यवाही नहीं होती है। ऐसे में केवल मात्र आधार के लिंक न होने और राशन कार्ड न बने होने का हवाला देकर यदि किसी अत्यंत गरीब परिवार को सरकार के भ्रष्ट अधिकारी राशन नहीं देते और ऐसे में वह परिवार भोजन की किल्लत के कारण तिल-तिल कर मर जाता है तो यह कलंक पूरे देश के सिर पर लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए केवल मात्र झारखंड की सरकार जिम्मेदार नहीं है इसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। बेशक अहमदाबाद से मुंबई बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया जा रहा है लेकिन उससे भी पहले जरूरी है देश के हर नागरिक के पेट में भोजन का होना। ऐसे में भूख से हो रही मौतों पर सरकारों को तुरंत गंभीर होना होगा और सरकारी तंत्र की लापरवाही से फिर कोई गरीब आधार या राशन कार्ड के नाम पर बलि न चढ़े इसका पुख्ता इंतजाम करना होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Nov 2017 04:13:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत को भूख मुक्त करने की चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व खाद्य असुरक्षा रिपोर्ट 2015 के अनुसार भारत में कुपोषण की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। यहां पर लगभग 19.46 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं और यह संख्या चीन की तुलना में 5.58 करोड़ अधिक है। संयुक्त राष्टÑ संघ की यह वार्षिक भूख रिपोर्ट खाद्य और कृषि संगठन द्वारा तैयार की जाती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-hunger-free-challenge/article-3387"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/poor-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व खाद्य असुरक्षा रिपोर्ट 2015 के अनुसार भारत में कुपोषण की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। यहां पर लगभग 19.46 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं और यह संख्या चीन की तुलना में 5.58 करोड़ अधिक है। संयुक्त राष्टÑ संघ की यह वार्षिक भूख रिपोर्ट खाद्य और कृषि संगठन द्वारा तैयार की जाती है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि इस वर्ष सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को प्राप्त किया जाना है। इन लक्ष्यों में पहला लक्ष्य गरीबी और भूख को मिटाना है। विश्व में प्रत्येक चार भूखे लोगों में से एक भारत में है और भूख मिटाना देश की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस संबंध में अन्य प्राधिकारियों के आकलन अलग-अलग हैं। अंतर्राष्टÑीय एजेंसियों द्वारा कुपोषण का आकलन जातीय विशेषताओं को ध्यान में रखे बिना किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके कारण भारत के बारे में आंकड़े बढ़-चढ़कर सामने आते हैं। तथापि भारत में स्थिति बहुत गंभीर है और इसमें तुरंत सुधार किए जाने की आवश्यकता है और भुखमरी को समाप्त करना हमारे अपने हित में भी है। कुपोषण के दो रूप हो सकते हैं। पहले रूप में भोजन में कैलोरी की पर्याप्त मात्रा नहीं होती है और दूसरा रूप संक्रमण है जो लिए गए भोजन में कैलोरी के प्रभाव को प्रभावित करता है। भूख और कुपोषण एक नहंी हैं। भूख के कारण कुपोषण होता है क्योंिक गरीब अपने भोजन को संतुलित नहीं बना पाता है और इसका मुख्य कारण प्रोटीन युक्त भोजन का अभाव है। कुपोषण तथा भूख को सामान्यतया एक ही अर्थों में प्रयोग किया जाता है किंतु वे दोनों अलग-अलग हैं। कुपोषण भोजन में पोषक तत्वों का अभाव है जबकि भुखमरी में भोजन हीं नहीं मिल पाता है और इसके कारण अन्य विकृतियां पैदा हो जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महानगरों में लोग भव्य शादियों को देखते हैं और उनमें भारी मात्रा में खाने की बर्बादी होती है। वहीं दूसरी ओर अनेक लोगों को खाना नहंी मिल पाता है। ये दोनों साथ-साथ चलते हैं और इस विषमता को देखते हुए लगता है वास्तव में हमारा देश अतुलनीय है। कृषि आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है और यह रोजगार के अवसर देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसका सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान है। भारत विश्व में सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है। यहां सबसे अधिक भैसें हैं। भारत सब्जियां, फलों उत्पादन में विश्व में सबसे बड़ा देश है। इसके बावजूद देश से भूख समाप्त नहंी की जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">अनेक रिपोर्टों में कहा गया है कि विश्व में सभी के लिए पर्याप्त खाद्यान्न है। भूख का कारण गरीबी, खराब आर्थिक प्रणाली, युद्घ, जनसंख्या वृद्घि, खाद्य नीति, खराब कृषि और जलवायु परिवर्तन है। विश्व की तरह हमारे देश में भी भूख और कुपोषण का कारण अपर्याप्त उत्पादन की बजाय खाद्यान्नों पर सबकी पहुंच और खराब वितरण प्रणाली है। भारत में भूख का एक बड़ा कारण खाद्यान्नों की बर्बादी है। तत्कालीन कृषि और खाद्य मंत्री शरद पवार ने 2013 में कहा था कि प्रति वर्ष लगभग 8.3 बिलियन डालर मूल्य के खाद्यान्नों की बर्बादी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भंडारण सुविधाओं के अभाव के कारण आस्टेÑलिया के कुल फसल उत्पादन के बराबर 21 मिलियन टन गेहूं की देश में बर्बादी होती है। संयुक्त राष्टÑ विकास कार्यक्रम ने भी खाद्यान्न क्षेत्र में बर्बादी को एक मुख्य समस्या बताया है। इसके अनुसार भारत में 40 प्रतिशत खाद्यान्न बर्बाद होते हंैं और यह मंहगाई का भी मुख्य कारण है। हमारे देश में एक ओर खाद्यान्नों की अत्यधिक बर्बादी होती है तो एक ओर भुखमरी है। खाद्यान्नों की बर्बादी तीन स्तरों पर होती है। उत्पादन, भंडारण, परिवहन और विपणन स्थान और इन सभी स्थानों पर खाद्यान्नों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल फूड बैंकिंग नेटवर्क नामक संगठन की स्थापना भूख का मुकाबला करने, पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए किया गया है। इसका उद्देश्य विश्व में खाद्यान्न बैंकों की स्थापना करना है। इंडिया फूड बैंकिंग नेटवर्क ने देश को भूख और कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है और 2020 तक प्रत्येक जिले में एक फूड बैंक बनाने का लक्ष्य रखा है। भारत के संदर्भ में परंपरागत मूल्यों को नजरंदाज नहंी किया जा सकता है जहां पर भूखे को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक स्थानों पर मुफ्त भोजन कराया जाता है। भूख से संबंधित विकृति के कारण विश्व में करोडों लोग हमेशा संकट की स्थिति में रहते हैं। कुपोषण के शिकार अमीर और गरीब दोनों बन सकते हैं और इनसे अनेक विकृतियां होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भूख मुक्त भारत का तात्पर्य है कि भोजन के अभाव में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। वर्तमान आथिक और सामाजिक दशाओं में यदि राजनीतिक इच्छा शक्ति और जनता का सहयोग हो तो भूख की समस्या से निपटा जा सकता है। कठिनाई कुपोषण का मुकाबला करने में है जिसमें भोजन उपलब्ध कराने वाले और उपभोक्ता दोनों को कुछ ज्ञान होना चाहिए। यदि लोग दो मिनट में खाना तैयार करने, अलग-अलग तरह के स्वाद आदि के प्रति आकर्षित होते हैं तो भुखमरी तो कम होगी किंतु कुपोषण बढ़ता जाएगा। भूख और कुपोषण सामान्यतया गरीबी से जुड़े हैं। हम मध्यम और उच्च वर्गों में अस्वस्थकर भोजन की आदतों के कारण कुपोषण की समस्या के प्रति उदासीन हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ये लोग अस्वस्थकर खाद्य आदतों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते हैं जिसके कारण उनमें तनाव, मधुमेह, जैसी जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां हो जाती हैं। जबकि दूसरी ओर यदि गरीब कुपोषित बच्चों को पर्याप्त और संतुलित भोजन मिले तो वे कुपोषण से बच सकते हैं। इसलिए हम आंकड़ों पर आंख मूंद कर विश्वास नहीं कर सकते हैं। आंकड़ों का वास्तविक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। कुपोषण की प्रकृति और कारणों का अलग-अलग विश्लेषण किया जाना चािहए ताकि समुचित उपाय किए जा सकें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डा. एस़ सरस्वती</strong></p>
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                <pubDate>Thu, 12 Oct 2017 04:16:13 +0530</pubDate>
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