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                <title>Reservation: मैं पिछड़ा हूँ, आप कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[Reservation: पिछला सप्ताह भारत विश्व मंच पर छाया रहा और कैसे? स्पष्टत: जी 20 शिखर सम्मेलन सफल रहा तथा प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने संपूर्ण विश्व को झुका दिया किंतु सोमवार आते-आते हम पुराने ढर्रे पर पहुंच गए। भारत बनाम इंडिया पर विवाद जिसके लिए अगले सप्ताह संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/i-am-backward-who-are-you/article-52313"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/reservation.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Reservation: पिछला सप्ताह भारत विश्व मंच पर छाया रहा और कैसे? स्पष्टत: जी 20 शिखर सम्मेलन सफल रहा तथा प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने संपूर्ण विश्व को झुका दिया किंतु सोमवार आते-आते हम पुराने ढर्रे पर पहुंच गए। भारत बनाम इंडिया पर विवाद जिसके लिए अगले सप्ताह संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है से लेकर महाराष्ट्र में चल रहे आरक्षण के बारे में जारी तमाशा शिन्दे-फडनवीस-पवार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। Reservation</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। महाराष्ट्र के जालना जिले के अनजान से आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारंगे जो पिछले दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, उन्होंने मराठाओं के लिए आरक्षण की मांग में एक नया मोड़ दे दिया है कि उनहें कुनबी अर्थात अन्य पिछड़े वर्ग का दर्जा दिया जाए। यहां तक कि मुख्यमंत्री शिन्दे भी इस आरक्षण को देना चाहते हैं किंतु वे चाहते हैं कि इससे पहले इस मुद्दे की ठोस कानूनी समीक्षा की जाए और अन्य पिछड़े वर्गों और मराठाओं में किसी तरह का टकराव पैदा न किया जाए। Reservation</p>
<p style="text-align:justify;">शिन्दे का सौभाग्य यह है कि विपक्षी दल मराठाओं के लिए आरक्षण का सम्मान करते हैं किंतु वे अन्य पिछड़े वर्ग के कोटे में सेंध लगाने से चिंतित हैं। राकांपा के शरद पवार चाहते हैं कि मराठाओं को आरक्षण देने के लिए उन्हें 15-16 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा दिया जाए और यह शर्त रखी जाए कि अन्य पिछड़े वर्ग का कोटा प्रभावित न हो। यही बात कांगे्रस और ठाकरे की शिव सेना भी कहते हैं। वस्तुत: उन्होंने केन्द्र से आग्रह किया है कि वे आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाए तथापि जारंगे अपनी बात पर अड़े हुए हैं।</p>
<h3>मराठा लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहे हैं | Reservation</h3>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह राज्य सरकार की दुविधा को समझा जा सकता है क्योंकि राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली मराठा राज्य की जनसंख्या में 20 प्रतिशत से अधिक है तथा उनका सरकारी तथा अर्ध-सरकारी सेवाओं में बहुत कम प्रतिनिधित्व है अ‍ैर वे लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसका दूरगामी प्रभाव हो सकता है। अन्य पिछड़े वर्गों के लिए नहीं अपितु यह उन्हें और अलग-थलग करेगा तथा राज्य की राजनीति में मराठाओं की पकड़ और मजबूत करेगा। आरक्षण औसत प्रतिभा की लागत पर नहीं दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सच है कि मराठाओं की इस नई राजनीतिक आकांक्षाओं का संज्ञान न लेना आत्मघाती होगा किंतु जातीय आधार पर राजनीतिक सत्ता का खेल करना खतरनाक है। निश्चित रूप से सामाजिक न्याय वांछनीय और प्रशंसनीय लक्ष्य है। इसके अलावा सरकार कानून उद्देश्य लोगों को शिक्षित करना और उन्हें समान अवसर तथा जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करना है। तथापि भारत की स्वतंत्रता के बाद के 70 वर्षों में पता चलता है कि आरक्षण प्रदान करने के लिए बनाए गए किसी भी कानून से किसी भी वर्ग, जाति, उपजाति और वंचित वर्ग का उत्थान नहीं हुआ है। उनमें से केवल कुछ लोगों को रोजगार और शैक्षणिक सस्थानों में प्रवेश ही मिल पाया है। Reservation</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों के उत्थान का एकमात्र रामबाण आरक्षण नहीं है तथा झूठे आधारों पर विभिन्न वर्गों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करना खतरनाक है कि यह दलित वंचित लोगों का उत्थान करेगा। वस्तुत: इससे पीड़ित और झूठे विजेता पैदा हुए हैं जहां पर केवल जन्म के आधार पर यह तय किया जाता है कि यह विजेता है या हारने वाला है जो गरीब पैदा हुए हैं वे कष्ट सह रहे हैं और जो उच्च जातियों में पैदा हुए हैं वे विजेता हैं। Reservation</p>
<h3>क्या आरक्षण भारत के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने का समाधान है</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बात का अध्ययन करने का कोई प्रयास नहीं किया गया कि क्या आरक्षण मिलने के बाद उन लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए कोई प्रयास किया गया है जिन्हें आरक्षण दिया गया है ताकि उन्हें मुख्यधारा में लाया जा सके जो इस बात को रेखांकित करता है कि कोटा इस बात का समाधान नहीं करता है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में क्या खामी है या यह जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान नहीं करता है। प्रश्न उठता है कि क्या आरक्षण अपने आप में एक साध्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिल्कुल नहीं। क्या कभी इस बात का आकलन किया गया है कि जिन लोगों को आरक्षण दिया गया है उन्हें लाभ हुआ है या हानि हुई है। बिल्कुल नहीं। क्या आरक्षण भारत के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने का समाधान है? बिल्कुल नहीं क्योंकि यह लोगों में मतभेद पैदा करता है और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाता है। क्या यह बात समझ में आती है कि इंजीनियंरिग में 90 प्रतिशत लाने वाला कोई छात्र दवाई बेचता है जबकि 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाला दलितत डॉक्टर बन जाता है और इन सब का कारण आरक्षण है। Reservation</p>
<p style="text-align:justify;">2023 का भारत 1989 का भारत नहीं है जब 18 वर्षीय छात्र राजीव गोस्वामी ने सार्वजनिक रूप से स्वयं को आग लगा दी थी। उस समय राजनेताओं द्वारा उत्पन्न मंडल आग उन्हें ही सताने लगी है। हमारे नेतागणों को समझना होगा कि वे आज जनरेशन एक्स और जनरेशन वाई का सामना कर रहे हैं और जिनकी जनसंख्या 50 र्प्रतिशत से अधिक है और वे कार्यवाही में विश्वास करते हैं न कि प्रतिक्रिया में। वे भीड़भाड़ भरे रोजगार बाजार में गुणवत्ता के आधार पर रोजगार की मांग करते हैं जहां पर श्रम शक्ति में प्रति वर्ष 3 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है और रोजगार में केवल 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है जिसके चलते बेरोजगारी 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।</p>
<h3>रोजगार बाजार में प्रति वर्ष ड़ेढ करोड़ नए लोग प्रवेश कर रहे | Reservation</h3>
<p style="text-align:justify;">मोदी सरकार द्वारा हाल ही में संयुक्त सचिव के 10 पदों के दिए गए विज्ञापन के प्रत्युत्तर में 7 हजार से अधिक लोग आवेदन करते हैं। किसी ने भी इस बात पर विचार नहीं किया कि रोजगार बाजार में प्रवेश कर रहे नए लोगों को रोजगार देने की चुनौती का कैसे सामना किया जाए। रोजगार बाजार में प्रति वर्ष ड़ेढ करोड़ नए लोग प्रवेश कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में आरक्षण कहां फिट बैठता है। आरक्षण का दायरा निरंतर बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक रूप से प्रभावशाली समूह हमेशा आरक्षण प्राप्त करने के लिए आंदोलन करते रहेंगे और जिसके चलते सभी लोगों को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए यह अदूरदर्शी उपाय अपनाया जाता है और इसके चलते विभिन्न समूहों की पहचान का मुद्दा और बढ़ जाता है। फलत: ऐसी स्थिति बन गयी है जहां पर चुनावी सत्ता की राजनीति के चलते संख्या की दृष्टि से प्रभावशाली समूह अन्य समूहों की कीमत पर लाभ प्राप्त करता है। Reservation</p>
<p style="text-align:justify;">अन्याय तब बढ़ता है जब समान लोगों के साथ असमान व्यवहार किया जाता है और तब भी बढ़ता है जब असमान लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। इसके दो उदाहरण हैं। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलत है कि आईआईटी से 48 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी और आईआईएम से ऐसे छात्र 62 प्रतिशत थे क्योंकि उन्हें ये पाठ्यक्रम बहुत कठिन लगे।</p>
<h3>असमानताएं हैं और उन्हें दूर किया जाना चाहिए | Reservation</h3>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी गोहाटी का रिकार्ड बहुत खराब है। उसके बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले 25 छात्रों में से 88 प्रतिशत आरक्षित वर्ग के हैं। उसके बाद आईआईटी दिल्ली का स्थान है जहां पर ऐसे छात्रों की संख्या 76 प्रतिशत है। देश के 23 आईआईटी के 6043 शिक्षकों में से 149 अनुसूचित जाति, 21 अनुसूचित जनजाति के थे जो उन शिक्षकों में से थे जिनकी संख्या 3 प्रतिशत से कम है तथा 40 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से अधिकतर में अन्य पिछड़े वर्गों के शिक्षक न के बराबर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे नेताओं को इस बात को स्वीकार करना होगा कि असमानताएं हैं और उन्हें दूर किया जाना चाहिए। केवल शिक्षा में आरक्षण देने से या रोजगार में आरक्षण देने से उत्कृष्टता नहीं आएगी। उन्हें नए प्रयोग करने होंगे जिसके चलते वे शिक्षा और रोजगार में परीक्षाओं को पास करे और वे सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करे। हमारे नेताओं के लिए आवश्यक है कि वे सभी लोगों के लिए समान अवसर प्रदान करे क्योंकि आरक्षण विभाजनकारी है। समय आ गया है कि केन्द्र और राज्य सरकारें संपूर्ण आरक्षण नीति पर पुनर्विचार करे और उसे पुनर्निर्धारित करें और उसे आंख मूंदकर लागू न करें अन्यथा भारत शीघ्र ही अक्षम और औसत दर्जे के लोगों का देश बन जाएगा। Reservation</p>
<p style="text-align:right;"><strong>पूनम आई कौशिश, वरिष्ठ लेखिका एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार </strong><br />
<strong>(यह लेखिका के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Ayodhya Ram Mandir : खुदाई में मिले राम जन्मभूमि का सच साबित करने वाले अवशेष की फोटो जारी" href="http://10.0.0.122:1245/photo-of-the-remains-found-during-excavation-proving-the-truth-of-ram-janmabhoomi-released/">Ayodhya Ram Mandir : खुदाई में मिले राम जन्मभूमि का सच साबित करने वाले अवशेष की फोटो जारी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Sep 2023 10:45:48 +0530</pubDate>
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                <title>उत्कृष्ट खिलाड़ी खेल कोटे में दो फीसदी आरक्षण बहाली की मांग, पूर्व उपमुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[दर्जनों राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों ने उठाया कदम | Reservation जयपुर। प्रदेश में उत्कृष्ट खिलाड़ी खेल कोटे में दो फीसदी आरक्षण वापिस बहाल की मांग को लेकर राजस्थान राज्य खेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ ओपी माचरा के नेतृत्व में दर्जनों भारत सरकार से मान्यता प्राप्त राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों ने प्रदेश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/demand-to-restore-two-percent-reservation-in-outstanding-sports-quota/article-50233"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/sachin-pailot.jpg" alt=""></a><br /><h3>दर्जनों राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों ने उठाया कदम | Reservation</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> प्रदेश में उत्कृष्ट खिलाड़ी खेल कोटे में दो फीसदी आरक्षण वापिस बहाल की मांग को लेकर राजस्थान राज्य खेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ ओपी माचरा के नेतृत्व में दर्जनों भारत सरकार से मान्यता प्राप्त राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों ने प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से मिलकर ज्ञापन सौंपा और राज्य सरकार द्वारा जारी खेल नीति में भारत सरकार से मान्यता प्राप्त खेल संघों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप खेले खिलाड़ियों को राज्य सरकार की नौकरियों में दो फीसदी आरक्षण देने की मांग की गई। इसमें बहुत सारे खेल राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद से भी मान्यता प्राप्त है इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर खेल संघों की मांग को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा। Reservation</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान शूटिंग बॉल संघ के सचिव डॉ ओपी माचरा व प्रदेश मिडिया प्रभारी रामकिशोर प्रजापत ने बताया कि राजस्थान में खेल संघो की लंबे अरसे से यह मांग है कि खेल कोटे में दो फीसदी आरक्षण में भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त चैंपियनशिप खेले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी की भर्तियों में लाभ दिया जाए। इसी प्रकार राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, उपनेता सतीश पुनिया, विधायक बलजीत यादव,अशोक लाहोटी की भी ज्ञापन देकर प्रदेश के खिलाडिय़ों की आवाज विधानसभा में उठाने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर राजस्थान शूटिंग बॉल संघ के सचिव डॉ ओपी माचरा, बॉल बैडमिंटन के लक्ष्मीकांत भारद्वाज, शौकत अली, कोर्फ़बाल के इंद्रप्रकाश टिक्किवाल, सपक टकरा के लक्ष्मणसिंह, बेसबॉल के ओमप्रकाश महला,किक बॉक्सिंग के करणसिंह गुर्जर, सहित खेलों के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपा और खिलाड़ियों के साथ न्याय करने की बात कही। डॉ माचरा ने कहा कि सभी राज्य सरकार की भर्तियों में स्पोर्ट्स के पद खाली जा रहे है तो राज्य सरकार खेलो को फायदा देने का दिखावा क्यो कर रही है इन ग्रामीण स्तर के खिलाड़ियों को वास्तविक फायदा देके इनका मनोबल बढ़ाये वरना मजबूरन आंदोलन के राह पे उतरना पड़ेगा। Sachin Pilot former deputy CM</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस सहित अन्य सुविधाएं सीधे पहुंचेगी घर के दरवाजे तक" href="http://10.0.0.122:1245/fire-brigade-ambulance-and-other-facilities-will-reach-directly-to-the-door-of-the-house/">फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस सहित अन्य सुविधाएं सीधे पहुंचेगी घर के दरवाजे तक</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/demand-to-restore-two-percent-reservation-in-outstanding-sports-quota/article-50233</link>
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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 14:22:38 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर से पहले भी देश कई बार जल चुका है आरक्षण की आग में</title>
                                    <description><![CDATA[जब तक आरक्षण (Reservation) की आग में वोटों की रोटी सेंकते रहेंगे, तब तक मणिपुर (Manipur) जैसे हादसे होते रहेंगे। आरक्षण की मांग को लेकर मणिपुर जल रहा है। मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर हिंसा भड़की हुई है। इसमें कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। दंगाइयों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-country-has-been-scorched-many-times-in-the-fire-of-reservation/article-48509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/manipur-protest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जब तक आरक्षण (Reservation) की आग में वोटों की रोटी सेंकते रहेंगे, तब तक मणिपुर (Manipur) जैसे हादसे होते रहेंगे। आरक्षण की मांग को लेकर मणिपुर जल रहा है। मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर हिंसा भड़की हुई है। इसमें कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। दंगाइयों ने भारी संख्या में सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। मणिपुर में 16 जिले हैं। जिसमें से वैली 10 फीसदी है और यहां पर 53 प्रतिशत मैतेई समुदाय के लोग रहते हैं। इसके साथ ही 90 फीसदी पहाड़ी इलाका है और यहां पर 42 प्रतिशत कुकी, नागा के अलावा दूसरी जनजातियां रहती हैं। गैर-जनजातीय मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को दिए गए निर्देश के बाद मणिपुर में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई।</p>
<p style="text-align:justify;">1993 में भी मणिपुर में हिंसा हुई थी,तब एक दिन में नागाओं की तरफ से 100 से ज्यादा से ज्यादा कुकी समुदाय के लोगों को मार दिया गया। यह हिंसक घटना जातीय संघर्ष का परिणाम थी। अब एक बार फिर मणिपुर हिंसा से जूझ रहा है, 54 मौतें हो चुकी हैं। मणिपुर (Manipur) का मामला पहला नहीं है, जहां आरक्षण (Reservation) को लेकर देश जला है। इससे पहले भी आरक्षण को लेकर कई हिंसक आंदोलनों में देश जला है। ऐसे हिंसक आंदोलनों में देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। ओबीसी आरक्षण के खिलाफ आरक्षण की आग में देश कई बार झुलस चुका है। पहली बार मंडल कमीशन की सिफारिशों को 1990 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने लागू किया तो देश में सवर्ण समुदाय के लोग इसके विरोध में सड़क पर उतर आए। ओबीसी आरक्षण के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुआ।</p>
<h3>हरियाणा में जमकर हिंसा, आगजनी व तोड़-फोड़ हुई थी | Reservation</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके विरोध में आत्मदाह और ऐसी कई घटनाएं सामने आई। कई जगह आगजनी-तोड़फोड़ तक हुई। वर्ष 2016 में हुए जाट आंदोलन के दौरान काफी हिंसा हुई थी। आंदोलनकारियों ने जाट समुदाय को ओबीसी में शामिल करने की मांग को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन किया था। हरियाणा में जमकर हिंसा, आगजनी व तोड़-फोड़ हुई थी। इस हिंसक आंदोलन में 30 लोगों की जान चली गई। गुजरात में पाटीदार समुदाय के लोगों ने ओबीसी में शामिल करने को लेकर 2015 में सबसे बड़ा प्रदर्शन किया था। गुजरात में हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ गया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के जाट आरक्षण (Reservation) आंदोलन में करीब 34 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था। देश में अब तक आरक्षण आंदोलन से लाखों करोड़ का नुकसान हो चुका है। राजनीतिक दल इसकी भरपाई भी देश के आम लोगों से ही करते हैं। आरक्षित वर्ग भी इससे अलग नहीं है। आर्थिक नुकसान से भरपाई के लिए बढ़ाए गए टैक्स की मार उन पर भी पड़ती है। आरक्षण की मांग को लेकर राजस्थान में गुर्जर समुदाय ने काफी दिनों तक प्रदर्शन किया था। आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक रेलवे ट्रैक को जाम रखा। इसका प्रभाव भी पूरे देश पर पड़ा था। पुलिस और आंदोलनकारी आमने-सामने आ गए थे। इस आंदोलन के दौरान गोलीबारी की घटना सामने भी आई थी। इसमें 20 लोगों की जानें चली गई थीं। महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन काफी चर्चा में रहा है। आंदोलनकारियों ने हिंसक झड़प में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में निषाद आरक्षण आंदोलन के चलते एक सिपाही को अपनी जान गंवानी पड़ी।</p>
<h3>देश के आधा दर्जन राज्य 50 फीसदी आरक्षण का दायरा बढ़ाने के पक्ष में</h3>
<p style="text-align:justify;">विकास के बजाए आरक्षण (Reservation) राजनीतिक दलों के सत्ता पाने का आसान रास्ता बना हुआ है। देश में आरक्षण के हिंसक इतिहास के बावजूद राजनीतिक दल इसे खोना नहीं चाहते। देश के करीब आधा दर्जन राज्य ऐसे हैं, जो 50 फीसदी आरक्षण का दायरा बढ़ाने के पक्ष में खड़े हैं, ताकि उनका राजनीतिक और सामाजिक समीकरण मजबूत हो सके। इनमें महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं। कर्नाटक ने भी आरक्षण बढ़ाया था। इसके अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ में भी आरक्षण बढ़ाने की मांग ने जोर पकड़ा हुआ है। इतना ही नहीं राजनीतिक दल वोटों की खातिर नौकरियों में भी अपने राज्य के लोगों के लिए आरक्षण लागू करने में पीछे नहीं रहे हैं। इससे लगता है कि क्षेत्रीय पार्टी भारत का हिस्सा होने के बजाए स्वतंत्र राष्ट्र हैं। राज्यों में निवासियों के लिये रोजगार आरक्षण विधेयक लाया गया है। ऐसा करने वाला झारखंड देश का सातवां राज्य है। इससे पहले आंध्रप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार में भी यह नियम लागू किया गया है।</p>
<h3>राजनीतिक दलों का पिछड़ी और दलित जातियों की भलाई से सरोकार नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">देश की एकता-अखंडता और सौहार्द के बजाए राजनीतिक दलों की किसी भी सूरत में सत्ता पाने की महत्वाकांक्षा ने खून-खराबे, तोड़फोड़ और हिंसा को जन्म दिया है। आरक्षण आंदोलनों से न सिर्फ लाखों करोड़ की सरकारी-गैर सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है, बल्कि देश में जातिवाद की जहरीली जड़ों को सींचने का काम किया गया है। हकीकत में राजनीतिक दलों का पिछड़ी और दलित जातियों की भलाई से सरोकार नहीं है। यदि ऐसा होता तो आजादी के 75 साल बाद देश में कोई दलित और पिछड़ा नहीं रहता। इन जातियों और समुदायों के लिए विशेष योजनाएं लागू करके इन्हें देश की मुख्य धारा में शामिल करने के गंभीर प्रयास करने के बजाए राजनीतिक दलों ने आरक्षण के जरिए देश के आतंरिक विभाजन को हवा दी है। (Reservation)</p>
<p style="text-align:justify;">सत्ता के लिए यह रास्ता राजनीतिक दलों को ज्यादा आसान लगता है। जरूरतमंदों के लिए योजनाएं बना कर क्रियान्वित करना टेडी खीर है। भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ पिछड़े और दलितों तक नाममात्र का पहुंच पाता है। यही वजह भी है कि आरक्षण के साथ ही राजनीतिक दल चुनाव के दौरान धनबल से अपने राजनीतिक मंसूबे पूरे करने के प्रयास करते रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा जब्त की जाने वाली करोड़ों की राशि इसका प्रमाण है। राजनीतिक दलों ने आरक्षण के जरिए सत्ता प्राप्ति का छोटा रास्ता निकाला हुआ है। आरक्षण की बहती गंगा में हाथ धोने से किसी भी दल को गुरेज नहीं है। बेशक यह रास्ता देश में सामाजिक भेदभाव, कटुता और दूरियां बढ़ाने वाला ही क्यों न हो, किन्तु राजनीतिक दलों को यह मुफीद लगता है। यह निश्चित है कि देश के राजनीतिक दल अपने क्षुद्र स्वार्थों से ऊपर उठकर जब तक समग्र रूप से देशहित की नीतियां नहीं अपनाएंगे तब तक मणिपुर जैसे शर्मनाक हादसे होते रहेंगे।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>योगेन्द्र योगी ,देश के राजनीतिक दल</strong><br />
yogendrayogi.yogi@gmail.com</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2023 10:10:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फैसला: आर्थिक आधार पर जारी रहेगा 10 फीसदी आरक्षण, 5 में से 3 जजों ने जताई सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।  उच्चतम न्यायालय सोमवार को अनारक्षित श्रेणियों (EWS) (अगड़ी जातियों) के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को नौकरियों और उच्च शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने वाले 103वें संविधान संशोधन की वैधता को 3-2 के बहुमत के फैसले से बरकरार रखा। मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित की अध्यक्षता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-to-pronounce-verdict-on-ews-reservation-dispute-today/article-39641"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/supreme-court-of-india1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong> उच्चतम न्यायालय सोमवार को अनारक्षित श्रेणियों (EWS) (अगड़ी जातियों) के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को नौकरियों और उच्च शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने वाले 103वें संविधान संशोधन की वैधता को 3-2 के बहुमत के फैसले से बरकरार रखा। मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के इस फैसले से साफ हो गया है कि ईडब्ल्यूएस के तहत 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था जारी रहेगी। न्यायमूर्ति ललित और संविधान पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट्ट ने 103वां संविधान संशोधन से असहमति व्यक्त की, जबकि न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला ने आरक्षण के लिए 103 वां संविधान संशोधन को उचित बताते हुए उसे बरकरार रखने के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सुनवाई के दौरान तर्क | EWS</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति ललित और न्यायमूर्ति भट्ट ने 103 वां संशोधन को गैर संवैधानिक करार दिया। न्यायमूर्ति भट्ट ने संविधान संशोधन पर अपनी असहमति व्यक्त की और कहा कि यह संशोधन सामाजिक न्याय के ताने-बाने और बुनियादी ढांचे को कमजोर करता है। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने भी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के 75 सालों के बाद परिवर्तनकारी संवैधानिक की भावना से समान रूप से आरक्षण पर फिर से विचार करने की जरुरत है। न्यायमूर्ति पादरीवाला ने न्यायमूर्ति माहेश्वरी और न्यायमूर्ति त्रिवेदी के फैसलों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि आरक्षण को निहित स्वार्थ नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने जरूरतमंदों को मदद की वकालत करते हुए कहा कि जो आगे बढ़ गए हैं, उन्हें पिछड़ा वर्ग के लाभ से हटा देना चाहिए। उन्होंने पिछड़े वर्गों को निर्धारित करने के तौर तरीकों को प्रसांगिक बनाने का फैसला सुनाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जनहित अभियान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">संविधान पीठ ने ईडब्ल्यूएस को आरक्षण प्रदान करने वाले 103 वें संविधान संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) ‘जनहित अभियान’ और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं बहुमत के फैसले से खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ललित की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सात दिन की लंबी सुनवाई के बाद 27 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए ईडब्ल्यूएस को आरक्षण दिए जाने के प्रावधान का जोरदार तरीके से समर्थन किया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>केन्द्र सरकार का दावा </strong><strong>| EWS</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय के समक्ष केंद्र सरकार ने दावा किया था कि 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस आरक्षण का अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी /एसटी) अन्य पिछड़ी जातियां (ओबीसी) और सामान्य श्रेणियों को पहले से दी जा रही तय 50 फीसदी आरक्षण अलग है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मद्देनजर उसने सभी उच्च केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों को सीटों की संख्या में 25 फीसदी की वृद्धि करने का निर्देश दिया था। सरकार ने कहा था कि शिक्षण संस्थाओं में 4,315.15 करोड़ रुपये की लागत से कुल 2.14 लाख अतिरिक्त सीटों की वृद्धि की मंजूरी दी गई थी। इस प्रकार से ईडब्ल्यूएस आरक्षण से एससी /एसटी और ओबीसी को मिल रहे 50 फीसदी आरक्षण में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। याचिकाकतार्ओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने तर्क देते कहा था, ‘इंद्रा साहनी (मंडल आयोग) मामले इस अदालत ने माना था कि आर्थिक मानदंडों के आधार पर आरक्षण से संविधान के अनुच्छेद 15 (4) और 16 (4) को वास्तविक रूप से हटा दिया जाएगा। विल्सन ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया था, ‘संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव को दूर करने और समानता को बढ़ावा देने वाला सकारात्मक प्रावधान है। उन्होंने 103वां संविधान संशोधन को छलपूर्वक और पिछले दरवाजे से समाप्त करने का प्रयास करार देते हुए दावा किया था, और कहा ह्ल103वां संविधान संशोधन अनुच्छेद 15 (4) और 16 (4) द्वारा हासिल की गई वास्तविक समानता को समाप्त और नष्ट कर देता है तथा समाज में एससी, एसटी और ओबीसी को पूर्व संवैधानिक स्थिति में वापस ले जाता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Nov 2022 10:26:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खट्टर सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! हरियाणा के निजी सेक्टर में 75% आरक्षण पर रोक हटी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से फिर विचार करने को कहा नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा में निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रोक संबंधी फैसला वीरवार को रद्द दिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की अधिसूचना पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/big-relief-to-khattar-government-from-supreme-court-ban-on-75-reservation-in-private-sector-of-haryana-lifted/article-30882"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/supreme-court-of-india-13.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से फिर विचार करने को कहा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा में निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रोक संबंधी फैसला वीरवार को रद्द दिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने के उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करने के साथ ही इस मामले में उससे चार सप्ताह के भीतर फिर सुनवाई करने का अनुरोध किया। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि उच्च न्यायालय ने रोक लगाने के अपने फैसले के पक्ष में पर्याप्त कारण नहीं बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, “उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाने के लिए पारित आदेश में पर्याप्त कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है।” न्यायमूर्ति राव ने कहा, “हम मामले के गुण-दोष में नहीं पड़ना चाहते हैं। हम उच्च न्यायालय से चार सप्ताह के भीतर मामले को तय करने का अनुरोध करते हैं।” न्यायमूर्ति राव ने स्पष्ट तौर पर कहा, ”सुनवाई के दौरान पक्षकार न्यायालय के समक्ष स्थगन संबंधी किसी प्रकार की मांग नहीं करेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हाईकार्ट का क्या था फैसला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">“शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया कि वह अदालत में मामला लंबित रहने के दौरान नियोक्ताओं के विपरीत कोई कदम नहीं उठाये। हरियाणा सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अन्य उच्च न्यायालयों में चल रहे मामलों को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरण होने तक हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय द्वारा राज्य में निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण संबंधी कानून पर रोक हटाने की भी मांग की थी। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को इस दलील के साथ उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी कि मामले पर बिना गौर किए हुए खारिज कर दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राव ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि समाचार पत्रों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि झारखंड और आंध्र प्रदेश में हरियाणा की तरह ही निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण संबंधित प्रस्ताव पास किए गए थे, जहां उन्हें संबंधित उच्च न्यायालयों में चुनौती दी गई है। इन मामलों के बारे में जानकारी शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाये। हरियाणा का पक्ष रख रहे श्री मेहता ने कहा था कि वह झारखंड और आंध्र प्रदेश में लंबित मामलों के बारे में जानकारी जुटाकर अदालत में प्रस्तुत करेंगे। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चार फरवरी को राज्य सरकार के शीघ्र सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की आरक्षण लागू करने संबंधी अधिसूचना पर गत तीन फरवरी को रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय के इस फैसले को राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में अगले दिन चार फरवरी को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने तीन फरवरी को राज्य सरकार की ओर से गत 15 जनवरी 2022 को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसमें राज्य के मूल स्थानीय निवासियों के लिए निजी क्षेत्र एवं ट्रस्ट आदि की कंपनियों में प्रति माह 30,000 से कम की वेतन वाली नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरक्षण के प्रावधान के खिलाफ फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन एवं अन्य (रेवाड़ी, गुरुग्राम की विभिन्न औद्योगिक एसोसिएशनों के अलावा कई अन्य) ने सरकार की इस अधिसूचना के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकतार्ओं ने उच्च न्यायालय के समक्ष विभिन्न दलीलों के साथ कहा था कि आरक्षण दिया जाना संविधान के खिलाफ है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 15:42:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण पर लगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने आज हरियाणा सरकार के उस कानून पर अंतरिम रोक लगा दी जिसके तहत निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों को 75 फीसदी आरक्षण दिये जाने का प्रावधान किया गया था। न्यायाधीश अजय तिवारी और न्यायाधीश पंंकज जैन की खंडपीठ ने फरीदाबाद इंडस्ट्रीज ऐसोसिएशन की हरियाणा प्रदेश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ban-on-75-percent-reservation-in-private-jobs-in-haryana/article-30496"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/buying-the-votes-coming-in-reservation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने आज हरियाणा सरकार के उस कानून पर अंतरिम रोक लगा दी जिसके तहत निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों को 75 फीसदी आरक्षण दिये जाने का प्रावधान किया गया था। न्यायाधीश अजय तिवारी और न्यायाधीश पंंकज जैन की खंडपीठ ने फरीदाबाद इंडस्ट्रीज ऐसोसिएशन की हरियाणा प्रदेश स्थानीय प्रत्याशी रोजगार अधिनियम को चुनौती देती याचिका पर हरियाणा सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। हरियाणा प्रदेश स्थानीय प्रत्याशी रोजगार अधिनियम 15 जनवरी से ही लागू हुआ था। याचिका में अधिनियम को चुनौती देते हुए कहा गया है कि अधिनियम असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 19 का उल्लंघन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा अधिनियम संविधान की धारा 16 (2) का भी उल्लंघन करता है जिसके अनुसार रोजगार के संदर्भ में किसी भी नागरिक से धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, वंश, जन्मस्थान, निवास स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। प्रदेश की गठबंधन सरकार में शामिल जननायक जनता पार्टी (जजपा) का यह चुनावी वायदा था। जजपा नेता और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने प्रतिक्रिया स्वरूप ट्वीट किया, ‘हम हरियाणवी युवाओं को नौकरियों में 75 फीसदी रोजगार अवसरों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ban-on-75-percent-reservation-in-private-jobs-in-haryana/article-30496</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Feb 2022 13:52:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पदोन्नति में आरक्षण: मानदंड में छूट से सुप्रीम कोर्ट का इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिनिधित्व संबंधी वास्तविक आंकड़े जुटाये बिना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने के मानदंड में किसी प्रकार की छूट देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/reservation-in-promotion-supreme-court-refuses-to-relax-norms/article-30315"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/supreme-court-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिनिधित्व संबंधी वास्तविक आंकड़े जुटाये बिना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने के मानदंड में किसी प्रकार की छूट देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने कहा कि आरक्षण देने से पहले प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता पर मात्रात्मक आंकड़े एकत्र करने के लिए राज्य बाध्य है। शीर्ष अदालत ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने के लिए एम. नागराज (2006) और जरनैल सिंह (2018) की संविधान पीठ के फैसले में निर्धारित मानदंडों को कम करने से इनकार कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इन फैसलों में कहा गया है कि आवधिक समीक्षा के बाद प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता के आकलन के लिए मात्रात्मक आंकड़ों का संग्रह किया जाना अनिवार्य है। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से समीक्षा अवधि निर्धारित की जानी चाहिए। नागराज के फैसले ने आरक्षण देने के लिए मात्रात्मक आंकड़ों के संग्रह, प्रतिनिधित्व की पर्याप्तता और प्रशासन की दक्षता पर समग्र प्रभाव जैसी शर्तें निर्धारित की थीं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पदों के बारे में आरक्षण के लिए मात्रात्मक आंकड़ों के संग्रह के लिए कैडर को इकाई के रूप में अनुमति देना अर्थहीन होगा हालांकि, अदालत ने प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता को निर्धारित करने के लिए मापदंड का आकलन करने की जिम्मेवारी राज्यों पर छोड़ दी। पीठ ने कहा है कि विभिन्न राज्यों से संबंधित मामलों और केंद्र की याचिका पर वह आगामी 24 फरवरी को विचार करेगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jan 2022 12:57:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा-पीजी (नीट-पीजी) आरक्षण मामले में गुरुवार को कहा कि परीक्षाएं आर्थिक सामाजिक लाभ को नहीं दर्शाती हैं जोकि कुछ वर्गों को मिला है, इसलिए योग्यता को सामाजिक रूप से प्रासंगिक बनाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेडिकल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-big-decision-regarding-obc-reservation/article-30146"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/supreme-court3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा-पीजी (नीट-पीजी) आरक्षण मामले में गुरुवार को कहा कि परीक्षाएं आर्थिक सामाजिक लाभ को नहीं दर्शाती हैं जोकि कुछ वर्गों को मिला है, इसलिए योग्यता को सामाजिक रूप से प्रासंगिक बनाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेडिकल पाठ्यक्रम में स्नातकोत्तर कक्षाओं में दाखिले से संबंधित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-2021-22 (नीट-पीजी) मामले की काउंसलिंग एवं नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति देने के संबंध में विस्तृत आदेश पारित करते हुए कहा कि आरक्षण योग्यता के विपरीत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने गत सात जनवरी को दिए अपने अंतरिम आदेश के संदर्भ में विस्तृत कारण बताते हुए कहा कोरोना महामारी के इस दौर में हमें डॉक्टरों की सख्त आवश्यकता है। ऐसे में किसी भी न्यायिक हस्तक्षेप से इस साल प्रवेश प्रक्रिया में देरी होती, पात्रता योग्यता में कोई बदलाव और दोनों पक्षों की ओर से मुकदमेबाजी आगे बढ़ने से नामांकन में देरी होती।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अदालत इस मामले में मार्च के तीसरे सप्ताह में विचार करेगा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने कहा कि यह तर्क नहीं दिया जा सकता है कि जब परीक्षाओं की तारीखें तय की गईं तो ऐन वक्त पर नियमों में बदलाव किया गया। अदालत ने कहा कि आॅल इंडिया कोटा (एआईक्यू) सीटों में आरक्षण देने से पहले केंद्र को इस अदालत की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी और इस तरह उनका फैसला सही था।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवैधानिक व्याख्या के शामिल होने के मामलों में न्यायिक औचित्य हमें कोटा पर रोक लगाने की अनुमति नहीं देगा, खासकर जब मामला लंबित हो। पीठ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के कोटे के संबंध में कहा कि हमने कहा है कि याचिकाकतार्ओं की दलीलें सिर्फ एआईक्यू में हिस्सेदारी तक सीमित नहीं थी बल्कि मानदंड (परिवार की सालाना आमदनी आठ लाख रुपये तक) भी थी, इसलिए इस मामले पर विस्तार से सुनवाई की जरूरत है। अदालत इस मामले में मार्च के तीसरे सप्ताह में विचार करेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">नील आॅरेलियो नून्स के नेतृत्व में याचिकाकर्ताओं के एक समूह ने मेडिकल पाठ्यक्रम के स्नातकोत्तर कक्षाओं में अखिल भारतीय कोटा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिये 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने के संबंध में केंद्र की 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी है। अदालत ने सात जनवरी को 27 फीसदी ओबीसी कोटे की वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आठ लाख रुपये प्रतिवर्ष की आय मानदंड लंबित याचिकाओं के अंतिम परिणाम के अधीन होगा।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jan 2022 14:33:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत नौकरी आरक्षण का नियम लागू : दुष्यंत चौटाला</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने आज कहा कि प्रदेश के निजी क्षेत्र में हरियाणा के युवाओं को 75 प्रतिशत नौकरी आरक्षण का नियम लागू कर दिया गया है। वह यहां सिरसा क्लब में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने से निजी क्षेत्र में प्रदेश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-rule-of-75-percent-job-reservation-in-private-sector-is-applicable-dushyant-chautala/article-30018"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/deputy-chief-minister-dushyant-chautala.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने आज कहा कि प्रदेश के निजी क्षेत्र में हरियाणा के युवाओं को 75 प्रतिशत नौकरी आरक्षण का नियम लागू कर दिया गया है। वह यहां सिरसा क्लब में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने से निजी क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग द्वारा पोर्टल भी बनाया गया है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है और इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार है। चौटाला ने कहा कि कंपनियों को पोर्टल पर अपनी वैकेंसी भी दिखानी होगी और सरकार इसको लगातार मॉनिटर करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चौटाला यहां करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बने नवनिर्मित कर्मचारी आवास व द लाउन्ज का उद्घाटन करने आये थे। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि सिरसा में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए लेकर टेंडर जारी किया जा चुका है औैर यह कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाएगा। बढ़ते कोरोना संक्रमण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहा है लेकिन प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह स्वयं भी अपना ध्यान रखें। उन्होंने सभी नागरिकों को वैक्सीन की दोनों डोज जरूर लगवाने के लिए आह्वान किया।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jan 2022 16:00:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीजी मेडिकल आरक्षण : नई रिट याचिका पर केंद्र से जवाब तलब</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों (ईडब्ल्यूएस) को आरक्षण दिये जाने की गत 29 जुलाई की अधिसूचना के खिलाफ नयी रिट याचिका पर केंद्र सरकार को शुक्रवार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pg-medical-reservation-new-writ-petition-sought-response-from-the-center/article-26923"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/supreme-court-of-india-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों (ईडब्ल्यूएस) को आरक्षण दिये जाने की गत 29 जुलाई की अधिसूचना के खिलाफ नयी रिट याचिका पर केंद्र सरकार को शुक्रवार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की खंडपीठ ने मधुरा कविश्वर एवं अन्य की याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए पहले से लंबित समान याचिकाओं के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से कहा कि इस नयी रिट याचिका को भी पुरानी याचिकाओं के साथ सम्बद्ध किया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि गत छह सितम्बर को न्यायालय ने दो याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 20 सितम्बर की तारीख मुकर्रर की थी। अब इस याचिका की भी सुनवाई उसी तारीख को की जाएगी। गौरतलब है कि 29 जुलाई 2021 को सरकार ने एक अधिसूचना जारी करके पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ओबीसी को 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की व्यवस्था की है।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Sep 2021 16:47:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिछड़ा वर्ग आरक्षण: हरियाणा सरकार नई अधिसूचना जारी करे: सैलजा</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के आलोक में पिछड़ वर्ग आरक्षण को लेकर नई अधिसूचना जारी करने की मांग की है। सुश्री सैलजा ने आज यहां जारी एक बयान में कहा कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण सम्बंधी संवैधानिक आधार समाप्त करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/backward-class-reservation-haryana-government-should-issue-new-notification-selja/article-26853"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/kumari-selja.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के आलोक में पिछड़ वर्ग आरक्षण को लेकर नई अधिसूचना जारी करने की मांग की है। सुश्री सैलजा ने आज यहां जारी एक बयान में कहा कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण सम्बंधी संवैधानिक आधार समाप्त करने की जो अधिसूचना जारी की थी, उसके कारण वर्ष 2018 में पिछड़ा वर्ग के अनेक योग्य विद्यार्थी मेडिकल और अन्य संस्थानों में दाखिला लेने से वंचित रह गए थे। अब शीष अदालत ने पिछड़ा वर्ग का हक बहाल करते हुये राज्य सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर उसे नई अधिसूचना जारी करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने राज्य सरकार ने इस सम्बंध में अब जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग की है और इस सम्बंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग क्रीमी लेयर के लिये कुल आय में कर्मचारियों की वेतन आय तथा कृषि आय को शामिल कर लिया था जिससे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का बच्चा भी आरक्षण से वंचित हो गया था। सरकार ने क्रीमीलेयर निर्धारण हेतु कुल आय सीमा छह लाख का तीन लाख और तीन से छह लाख में वर्गीकरण कर दिया था जो संवेधानिक तौर पर गलत था। शीष अदालत ने अब इसे सही करने के आदेश दिये हैं ताकि इस वर्गों के विद्यार्थी आगे समुचित लाभ ले सकें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Sep 2021 14:27:59 +0530</pubDate>
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                <title>आरक्षण नहीं रोजगार ही समस्या का हल</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/reservation-is-not-the-only-solution-employment-is-solution/article-23449"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्टÑ में मराठों के लिए जाति आधारित आरक्षण को रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि मराठे आर्थिक तौर पर पिछड़ी श्रेणी में नहीं आते बल्कि व समर्थ हैं। इस निर्णय से जाति आधारित आरक्षण का मामला फिर से चर्चा में आ गया है। आरक्षण की मांग के बढ़ते चलन को देखते हुए पिछली व्यवस्था को समझने व सुधारने की जरूरत है, जो इस मांग की मुख्य वजह हैं। आधुनिक युग में बदल रहे आर्थिक सामाजिक मूल्यों ने प्राचीन व मध्यकालीन जात-पात की कुप्रथा को कमजोर किया है। लोकतांत्रिक राजव्यवस्था व मानववादी चिंतन ने समानता व भाईचारे की सद्भावना को आगे बढ़ाया है। इसके बावजूद समाज में जाति आधारित संगठनों की सक्रियता बढ़ रही है जो जाति की सामाजिक संस्कृति की पहचान को बरकरार रखने के लिए अपनी-अपनी बिरादरी को संगठित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जातिगत चेतना इस स्तर तक पहुंच गई है कि उच्च जाति के लोगों के लिए आरक्षण से रोजगार की मांग उठ रही है। इन संगठनों के इस तर्क में पूरा दम है कि बढ़ रही बेरोजगारी व महंगाई के कारण इन वर्गों की आबादी का बड़ा हिस्सा आर्थिक तौर पर कमजोर हो गया है। इन कमजोर लोगों के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं हासिल करने की भी क्षमता नहीं रही है और भुखमरी के चलते आत्महत्याओं का दौर जारी है। नि:संदेह आर्थिक तौर पर उच्च जाति के लिए आरक्षण आवश्यक होगा, लेकिन पूरी की पूरी जाति के लिए आरक्षण किसी भी तरह से उचित नहीं। यहां यदि सरकारें रोजगार के सही अवसर पैदा करें तब आरक्षण की जाति आधारित मांग भी कमजोर पड़ सकती है। दरअसल में जाति संगठनों की यह धारणा बन चुकी है कि जिस तरह वह अपनी एकता दिखाकर राजनीतिक पार्टियों पर प्रभाव जमा लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी तरह वह आरक्षण की मांग भी मनवा लेंगे। राजनेता भी वोटों के लिए जाति संगठनों को खुले दिल से वायदा करते हैं। इसका परिणाम यह है कि अब देश में जाति आरक्षण आंदोलन भी कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने लगे हैं। हरियाणा में जाट आंदोलन और राजस्थान का गुर्जर आंदोलन इसका उदाहरण हैं। आंध्र प्रदेश का कापू समाज सक्षम माना जाता है, वह भी आरक्षण की मांग कर चुका है। पटेल समाज की भी ऐसी ही मिसाल है। राजनीतिक दलों ने आरक्षण के थोक वायदे करते हुए सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण की 50 फीसदी व्यवस्था का भी ध्यान नहीं रखा, जिस कारण महाराष्टÑ, राजस्थान सहित कई राज्य सरकारों के निर्णय बीच में ही लटककर रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला एकतरफा कार्रवाई से हल होने वाला नहीं। इसके सभी पहलुओं पर समान ध्यान देने की आवश्यकता है। जहां केन्द्र व राज्य सरकारों को मिलकर रोजगार में बढ़ोतरी के लिए काम करना चाहिए, वहीं जाति संगठनों को आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यह भी जरूरी है कि जाति भावना मजबूत करने की बजाय संयुक्तवार्त्ता, समानता व मानववादी विचारधारा को मजबूत किया जाए। पहले ही देश ने हजारों वर्ष जाति-पाति के दर्द को झेला है, जाति रहित होने से ही मानवीय गरिमा बढ़ेगी।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 07 May 2021 09:51:18 +0530</pubDate>
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