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                <title>Satsang - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Trending News: सोशल मीडिया पर पावन भंडारे की धूम</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा अनिल कक्कड़। Trending News: 23 सितंबर का पावन भंडारा जहां शाह मस्तान-शाह सतनाम जी धाम सरसा में बड़ी श्रद्धा से मनाया गया और साध-संगत के विशाल हुजूम ने इस पावन दिवस पर अपनी हाजिरी आश्रम में आकर लगवाई। वहीं वर्चुअली भी इस पावन भंडारे का आनंद लाखों लोगों ने उठाया। सोशल मीडिया के मुख्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/pavan-bhandara-celebrated-on-social-media/article-52777"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/maha-paropkar-diwas-1-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा अनिल कक्कड़।</strong> Trending News: 23 सितंबर का पावन भंडारा जहां शाह मस्तान-शाह सतनाम जी धाम सरसा में बड़ी श्रद्धा से मनाया गया और साध-संगत के विशाल हुजूम ने इस पावन दिवस पर अपनी हाजिरी आश्रम में आकर लगवाई। वहीं वर्चुअली भी इस पावन भंडारे का आनंद लाखों लोगों ने उठाया। सोशल मीडिया के मुख्य प्लैटफॉर्म फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम इत्यादि पर पावन भंडारे संबंधित तस्वीरें एवं वीडियोज़ छाए रहे। जहां साध-संगत ने शाही दरबार के बाहर लगे पूज्य गुरू जी के बड़े बड़े पोस्टर्स संग सेल्फियां ली वहीं डेरा सच्चा सौदा के विभिन्न प्लैटफार्म्स से शेयर की गई फोटोज़-रील्ज भी साध-संगत ने खूब शेयर की।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/the-holy-bhandara-of-the-maha-paropkar-diwas-was-celebrated-in-sirsa/">पावन महापरोपकार दिवस पर उमड़ा जनसैलाब</a></p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों पर गौर करें तो इस पावन भंडारे को विश्व के कोने-कोने में यूट्यूब एवं फेसबुक लाइव के माध्यम से सुना गया। वहीं लोगों ने भी इस पावन भंडारे पर अपनी बधाईयां एवं प्रतिक्रियाएं खूब दी। एक यूज़र अश्विनी कुमार ने लिखा कि ‘‘जिधर भी देखा परमपिता परमात्मा की संगत ही संगत नजर आ रही है। वाह! क्या सुंदर नजारे हैं डेरा सच्चा सौदा के….’’। वहीं एक अन्य यूजर राज कुमार इन्सां ने लिखा कि ‘‘पूज्य गुरू जी आपके पावन वचनों के लिए तहदिल से धन्यवाद।’’</p>
<p style="text-align:justify;">खास बात यह रही कि कमेंट्स कई भाषाओं में आए। जहां ज्यादातर कमेंट्स इंग्लिश, हिंगलिश और हिंदी में आए वहीं पंजाबी एवं अन्य भाषाओं में भी कमेंट्स किए गए। एक यूजर ने लिखा कि ‘‘आई फील रिलैक्स आॅफ्टर वाचिंग दिस स्पिरिचुअल प्रोग्राम।’’ वहीं अमित मोंगा ने लिखा कि ‘‘सतगुरु जी, आप जी से अरदास है कि आप जी का प्रेम सदा हमें मिलता रहे।’’ गुरुगद्दी दिवस की बधाइयों के जबरदस्त कमेंट्स भी लोगों ने किए वहीं बहुत बड़ी तादाद में लोगों ने पूज्य गुरु जी के चरणों में अरदास की कि वे जल्द आएं और साध-संगत के बीच विराजमान होकर सत्संग फरमाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">17वीं चिट्ठी भी वायरल | Trending News</h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं पूज्य गुरू जी द्वारा भेजी गई 17वीं चिट्ठी भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। चिट्ठी को खूब शेयर किया जा रहा है और लोग चिट्ठी पढ़ कर भावुक भी हो रहे हैं साथ ही पूज्य गुरु जी का चिट्ठी भेजने के लिए धन्यवाद भी कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Sep 2023 12:44:23 +0530</pubDate>
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                <title>रूचि व लगन से लगातार सुमिरन करते रहें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा । पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि उस परमपिता परमात्मा का नाम जिसके दिलो-दिमाग में छाया रहता है, वो इन्सान पल-पल असीम शांति, परमानन्द, लज्जत हासिल करता रहता है। वो दुनिया की गंदगी की तरफ नहीं दौड़ता, वो दुनिया की गंदगी में नहीं खोता, बल्कि परमपिता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/continue-to-meditate-with-interest-and-dedication/article-25646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/continue-to-meditate-with-interest-and-dedication.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong> । पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि उस परमपिता परमात्मा का नाम जिसके दिलो-दिमाग में छाया रहता है, वो इन्सान पल-पल असीम शांति, परमानन्द, लज्जत हासिल करता रहता है। वो दुनिया की गंदगी की तरफ नहीं दौड़ता, वो दुनिया की गंदगी में नहीं खोता, बल्कि परमपिता परमात्मा का प्यार, उसकी मोहब्बत हासिल करके वो तमाम खुशियां, लज्जतें हासिल करता है, जिसे लिख-बोल कर नहीं बताया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि आप परमपिता परमात्मा की दया-मेहर को हासिल करना चाहते हैं, तो आप मालिक के नाम के साथ जुड़ जाओ। नाम जपना न पड़े बल्कि अपने आप चलता रहे, ऐसा तब होता है, जब आदमी रूचि से, सच्ची भावना, तड़प से लगातार सुमिरन करता रहता है। उदाहरण के तौर पर, जैसे आपको कोई गीत अच्छा लगता है, आप दिलो-दिमाग में उसे बैठा लेते हैं। कहीं मौसम अच्छा है, कहीं वैसे जगह आ गई, आप खुश हुए तो एटोमैटिकली आपकी जुबान पे वो शब्द, वो गीत गूंजने लगता है। उसी तरह परमपिता परमात्मा के नाम को, गुरुमंत्र को, कलमां को आप अपनी जुबान पर चढ़ा लीजिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि कहीं भी आप अपने आपको अकेला महसूस करें, कहीं भी आपको जरा-सी उदासी आने लगे या आपको बहुत खुशी आने लगे या आप नॉर्मल जिंदगी जी रहे हैं, तो ऐसे में जब आपकी जीह्वा पर अपने आप राम-नाम चलना शुरू हो जाए तो यकीनन आपके गम, दु:ख-दर्द खत्म हो जाएंगे और जीवन में परमानन्द छा जाएगा, जो हमेशा बहारें बनाकर रखेगा, कभी भी पतझड़ नहीं आने देगा। यह तभी संभव है, जब व्यक्ति लगातार सुमिरन करे और सुमिरन में रूचि पैदा कर ले।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि जब आपने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी कि मैंने तो मालिक का नाम जपना है या आप सेवादार हैं, समय निकालते हैं, सुबह-शाम सत्संग, मजलिस सुनते हैं तो आपका फर्ज है कि सुमिरन के भी पक्के बनो, फिर देखो नजारे, फिर देखो लज्जतें। इतनी ज्यादा आएंगी कि कोई रोक नहीं पाएगा। पर आप शायद फर्ज-सा अदा कर देते हैं। ज्यादातर लोग आए, सुना, बहुत बढ़िया और बाहर निकले तो फिर से गपशप शुरू कि भई, वो समय था, अब ऐसे। वाकई वो समय लेखे में लग गया, इसमें कोई दो राय नहीं, जितना समय आप सत्संग, मजलिस में बैठते हैं, वो तो दरगाह में मंजूर होता ही होता है। लेकिन कर्म-चक्कर का दायरा इतना बड़ा है, जो ऐसे नहीं कटता। जो समय आप बैठकर जाते हैं, उस समय को फोलो करो।</p>
<p style="text-align:justify;">पीर-फकीर जो कहते हैं कि नाम जपो, बेगर्ज प्यार करो, उस पर अमल करो तो जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कटते जाते हैं और आप हमेशा सुखी बने रहते हैं। संतों का काम बताना है, मानना या न मानना आपकी मर्जी है। जो लोग मानते हैं वो सुखी रहते हैं, जो नहीं मानते वो अपने कर्मों का बोझ उठाते हैं। इसलिए नाम जपा करो, नाम से जुड़े रहो, नाम ही सुखों की खान है, नाम ही परमानन्द दिलाने वाला है। जो नाम से जुड़ते और उस पर चलते हैं, वो यकीनन दोनों जहान की खुशियां हासिल करते हैं।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Aug 2021 09:25:04 +0530</pubDate>
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                <title>नफरत छोड़ सबसे नि:स्वार्थ प्रेम करो : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अगर मालिक का नाम जपे और उसकी बनाई सृष्टि से बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्रेम करे तो वह दोनों जहान की खुशियों का हकदार बन सकता है। इन्सान को इस घोर कलियुग में मालिक का नाम जपना, भक्ति-इबादत करना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/leave-hate-and-love-most-selflessly-revered-guru-ji/article-25107"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/leave-hate.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अगर मालिक का नाम जपे और उसकी बनाई सृष्टि से बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्रेम करे तो वह दोनों जहान की खुशियों का हकदार बन सकता है। इन्सान को इस घोर कलियुग में मालिक का नाम जपना, भक्ति-इबादत करना बड़ा मुश्किल लगता है। हालांकि ऐसा करना आसान काम है लेकिन इन्सान को सबसे मुश्किल काम प्रभु का नाम लेना लगता है। मालिक का नाम जपने के लिए सिर्फ जिह्वा हिलानी होती है, लेकिन इन्सान मालिक का नाम नहीं लेना चाहता। मालिक का नाम ऐसी ताकत है जो इन्सान को अंदर से आत्मविश्वास, शक्ति देता है जिसके द्वारा इन्सान खंडों, ब्रह्मंडों को पार करता हुआ मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में ऐसी शक्ति है जो इन्सान को खस्ता कर देती है और मालिक से मिला देती है। इसलिए किसी से भी नफरत नहीं करनी चाहिए। सभी से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करना चाहिए। अगर आप एक दिल को अपने अच्छे-नेक कार्यों से खुश कर लेते हैं तो वो 100 साल की बंदगी के बराबर है। इसलिए इन्सान को सभी से प्रेम करना चाहिए। किसी से भी तकरार, निंदा और कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। मालिक के प्यार में चलते हुए आप अगर बढ़ते चलेंगे तो मालिक की कृपा-दृष्टि आप पर जरूर बरसेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपनी बातों, कर्मों से किसी का भी दिल नहीं दुखाना चाहिए। क्योंकि अगर आप किसी का बुरा करते हैं, बुरा कहते हैं तो पहले आप बुरे बन जाते हैं। इसलिए कभी किसी को बुरा न कहो और हो सके तो अपने अंदर की बुराइयों को निकालो। क्योंकि अगर आप ऐसा करोगे तो आप पर मालिक की कृपा बरसेगी और एक दिन आप उसकी दया-मेहर, रहमत को जरूर पा जाओगे। जो लोग प्रेम रूपी घोड़े पर सवार हो जाते हैं वो मालिक को इतना जल्दी पा लेते हैं जोकि खुसक भक्ति से नहीं पाया जा सकता। प्रेम में वैराग्य पैदा हो जाए और वैराग्य में ओम, हरि, अल्लाह, राम की भक्ति-इबादत हो तो इन्सान मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल जरूर बन जाता है और दया-मेहर, रहमत से हमेशा अंदर-बाहर से मालामाल बना रहता है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jul 2021 06:00:44 +0530</pubDate>
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                <title>सच्ची फरियाद जरूर सुनता है, वो दातार: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[परम पिता परमात्मा कण-कण, जर्रे-जर्रे में रहने वाला व सारी सृष्टि को बनाने वाला है। सारी सृष्टि में सैकड़ों त्रिलोकियां अर्थात् जहां तीन तरह के लोग रहते हैं। दिखने वाले को स्थूलकाय, न दिखने वाले को सूक्ष्मकाय व देवी-देवताओं को कारण काय कहते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/true-prayer-is-definitely-heard-by-the-supreme-power-pujya-guruji/article-24689"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा कण-कण, जर्रे-जर्रे में रहने वाला व सारी सृष्टि को बनाने वाला है। सारी सृष्टि में सैकड़ों त्रिलोकियां अर्थात् जहां तीन तरह के लोग रहते है। दिखने वाले को स्थूलकाय, न दिखने वाले को सूक्ष्मकाय व देवी-देवताओं को कारणकाय कहते हैं। ऐसी सैकड़ों त्रिलोकियां हैं, उन जहां भक्ति व सेवा-सुमिरन के अनुसार सैकड़ों आत्माओं का वास होता है और सबके साथ वो परमपिता परमात्मा होता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो परमात्मा कण-कण में मौजूद है, वो दिखने में कैसा होगा? वो परमपिता परमात्मा हर जगह मौजूद है, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि हर जगह पर होते हुए भी वह अजन्मा है, वो जन्म नहीं लेता और वो अजाप है तथा वह अवर्णननीय है। उसके बराबर किसी की तुलना नहीं हो सकती। उस तक जाने के लिए इन्सान को जाप करना पड़ता है, जो जीव उसकी धुन को पकड़ लेते है तो उसे जाप की जरूरत नहीं पड़ती।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान के अंदर कई प्रकार के रोग पैदा होते हैं, उनमें एक तो कर्म रोग व दूसरे उसे शरीर के खरीदे गए रोग होते हैं। अगर वो सच्चे दिल से परमपिता परमात्मा को याद करे तो जिस मालिक ने यह शरीर बनाया है वह उन रोगों को शरीर में से ऐसे निकाल देता है जैसे कि मक्खन में से बाल निकाल देते हैं, यानि मालूम ही नहीं पड़ता। इस प्रकार बात केवल संतों के वचनों को मानने की होती है। अगर कोई जीव उन वचनों कोे मान ले व जैसा संत, फकीर कहते हंै अगर उनके कहे अनुसार चले तो उसी समय उसका बेड़ा पार हो जाता है व असंभव शब्द भी संभव में बदल जाता है। इस कलियुग में केवल वचनों की ही भक्ति है। अगर इन्सान संतों के वचनों के अनुसार चला तो ठीक है, वरना उसे भुगतना तो पड़ता ही है। इससे संत नाराज नहीं होते, लेकिन वो दु:खी जरूर होते है कि हम तो इसके पहाड़ के समान कर्म काट रहे थे, लेकिन यह तो मानने को तैयार ही नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि वो अल्लाह, वाहेगुरु, राम इतना शक्तिशाली है कि उसे सच्चे दिल से याद करने मात्र से वो इन्सान की जायज इच्छाओं को पूरी जरूर कर देता है। आप जरा सोचिए अगर कोई जीव लगातार उस मालिक की भक्ति-इबादत करेगा तो मालिक उसके सामने क्या कोई कमी आने देगा, कभी भी नहीं आने देगा। इसलिए उसको सच्चे दिल से याद करो, फरियाद करो वो परमपिता परमात्मा दया का सागर है, वो अपने भक्तों को कोई कमी नहीं आने देगा। यदि आप उस परमात्मा की दयामेहर, रहमत के काबिल बनना चाहते हैं व उसकी कृपादृष्टि चाहते हंै तो यह जरूरी है कि आप उसके नाम का सुमिरन किया करो। इसके लिए आपको कोई दिखावे की आवश्यकता नहीं। उस मालिक को दिखावा बिल्कुल भी पसंद नहीं, दिखावे से तो समझदार आदमी भी नहीं पसीजता, उसको भी पता चल जाता है कि यह इन्सान ढोंग, पाखंड कर रहा है। इसलिए जिसने सबको बनाया है, वो इन्सान के झूठे दिखावे में कैसे आ जाएगा। वो तो केवल हकीकत में यकीन रखता है। वह सब जानता है कि आप कैसे है तथा किस तरह के है। आपके अंदर किस तरह के विचार चल रहे हंै व क्या आने वाले हैं, उसको सब मालूम है, लेकिन फिर भी आपके द्वारा लापरवाही करना अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने के समान है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए इन्सान अगर सच्चे दिल से उस परमपिता परमात्मा को याद करे व उसके नाम का सुमिरन करे और अपनी बुराइयों से तौबा करे तो आप यकीन मानिये वो वेश्याओं को भी ऐसा भक्त बना देता है, जिसका नाम दोनों जहां में अमर हो जाता है। तो भाई! उस मालिक का नाम जपा करो, वह बहुत जरूरी है। इसी एक बात को हम अरबों बार कह चुके हैं और आगे भी कहते रहेंगे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान के लिए तन, मन, धन से सेवा करने के साथ-साथ सुबह-शाम नाम का सुमिरन भी करना जरूरी है। उसे कामधंधा, लेटते, उठते-बैठते थोड़ा-थोड़ा उस मालिक को याद करते रहना चाहिए, बजाय अपनी परेशानियों या फिजूल की बातें करने के। अगर आप इन सभी बातों को छोड़कर राम-नाम का जाप करोगे तो आपको अपनी परेशानियों के बारे में बात करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। बल्कि आपके सभी गम, चिंता, परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। इसलिए सुमिरन बहुत जरूरी है। सुमिरन करना या न करना तो आपकी मर्जी है, हम तो उस मालिक के चौकीदार है। स्कूल-कॉलेज में लेक्चरार या अध्यापक तो तनख्वाह लेने की वजह से बच्चों को शिक्षा देता है, ताकि उसके चेप्टर न रह जाएं और वेतन न रूक जाए, लेकिन हमने तो अपने सभी चेप्टर पूरे करवा दिए है, और यह तो आपके हाथ में है कि आप उन पर चलते हो या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">रूहानी संत, पीर-फकीर तो उस मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन गए होते है। उनको तो उनका मालिक सभी चेप्टर पूरे करवाता है। इसलिए वह जीवों को यह चेप्टर करवाते रहते हैं। वह उन्हें कहते है कि अगर आपने अपनी जिंदगी का मुख्य चेप्टर पूरा कर लिया तो आप जरूर अव्वल आओगे तथा वो मुख्य चेप्टर वचनों पर रहना, सेवा व सुमिरन करना तीन ही तो बातें हैं। अगर आप इन पर अमल करके देख लो तो आपके पौ-बारह पच्चीस हो जाएंगे और आपके सामने किसी भी तरह की कमी नहीं रहेगी। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को उस मालिक से डरना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही आप और किसी से न डरो, लेकिन उस मालिक से डरो। वो सुप्रीम पॉवर है, वो पल में राई को पहाड़ व पहाड़ को राई में बदल सकता है। इसलिए उस मालिक के नाम का जाप करते रहो, घर में उसका नाम लेकर खाना बनाओ, कामधंधा करते हुए उस मालिक का सुमिरन करो ताकि आप जो कामधंधा कर रहे हो उसमें बरकत आए। आपके द्वारा सुमिरन किया गया खाना जो खाए वह भी उस मालिक को याद करे। अगर आप उस मालिक से खिलवाड़ करोगे तो आपकी जिंदगी खिलौना बन जाएगी। ऐसे में आप न जी सकोगे व न मर सकोगे, तो ऐसी जिंदगी का क्या फायदा इसलिए मालिक से मालिक को मांगो, अपनी बुराइयों से तौबा करते हुए सुमिरन करो, राम-नाम जपते रहो व हमेशा खुश रहो। हम मालिक से सभी के लिए यही दुआ करते है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Jun 2021 09:20:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुमिरन से ही विचारों पर नियंत्रण संभव</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान सर्वव्यापक है। भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/control-of-thoughts-is-possible-only-through-sumiran/article-24536"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/pita-ji2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong>। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं। जो दान-दक्षिणा लेते हैं वो संत ही नहीं होते, क्योंकि संत माया के लिए नहीं बल्कि राम-नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं। जब भगवान ही पैसा नहीं लेते तो संत पैसा क्यों लें? सभी धर्मों में लिखा है कि भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान हर इन्सान के अंदर समाया हुआ है। भगवान को देखने के लिए किसी जंगल, पहाड़ आदि कहीं पर भी जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है। ऐसे-ऐसे रोग जिनको डॉक्टर लाईलाज बता देते हैं, राम-नाम के द्वारा वो लाईलाज रोग भी ठीक होते हुए देखे गए हैं। भगवान सर्वव्यापक है। भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर रोज सुबह-शाम आधा-आधा घंटा राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए। जिस तरह इन्सान खाने-पीने, सोने के लिए समय निश्चित करता है, सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन खाना इन्सान नहीं भूलता उसी तरह राम का नाम भी नहीं भूलना चाहिए। भोजन तो केवल शरीर को ताकत देता है लेकिन राम का नाम आत्मा, रूह को ताकत देता है। जिस तरह मजबूत पेड़ पर लगने वाली टहनियां, फल आदि अपने आप आ जाते हैं उसी तरह जिस इन्सान की आत्मा शुद्ध होती है तो उसे सारे सुख मिल जाते हैं। जिस समय इन्सान के आत्मबल में कमी आती है तो बहुत से लोग सोचते हैं कि वो तो मरने की कगार पर है और उस पर कोई भी दवा काम नहीं करती, लेकिन उस समय अगर इन्सान राम के नाम का जाप करे तो राम-नाम एक दवा का काम करता है और वो इन्सान ठीक हो जाता है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jun 2021 09:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सुमिरन से जो कर्मों में नहीं होता वो भी मालिक बख्शते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[इन्सान सुमिरन करे, मेहनत करे, तो जो कर्मों में नहीं होता, वो भी मालिक बख्श देते हैं। इसलिए उसका सुमिरन करो, सेवा करो ताकि मालिक की तमाम खुशियों के हकदार आप बन सको।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/almighty-bless-through-meditation-either-that-is-not-in-karma/article-23612"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/saint-dr-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। सच्चे दिल से, सच्ची भावना से जो उसे याद करते हैं, वो मालिक, वो दाता, वो रहबर, इन्सान का हर काज संवार देते हैं। मालिक इन्सान को अंदर-बाहर वो तमाम खुशियां देते हैं, जो इन्सान के लिए निश्चित हैं, अगर इन्सान सुमिरन करे, मेहनत करे तो जो कर्मों में नहीं होता, वो भी मालिक बख्श देते हैं। इसलिए उसका सुमिरन करो, सेवा करो ताकि मालिक की तमाम खुशियों के हकदार आप बन सको। मालिक का नाम सुखों की खान है। भाग्यशाली जिनके अच्छे कर्म हैं, वो मालिक का नाम लेते हैं, उनके और अच्छे कर्म बन जाया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार आदमी के दिमाग में यह बात घर कर जाती है कि मैं अभाग्यशाली हूँ, अनलक्की हूँ। ऐसे लोग कहते हैं कि मैं सोने को भी हाथ लगाऊं तो वो भी राख बन जाता है। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है तो आप प्रभु के नाम का सुमिरन करो, कड़ा परिश्रम करो। ईश्वर का नाम आपको अनलक्की से लक्की बनाएगा और जो मेहनत करेंगे उसमें बरकत डालेगा और आप दुनिया के हर अच्छे क्षेत्र में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले जाएंगे। इसलिए सुमिरन, भक्ति ऐसा उपाय है, जो अनलक्की से लक्की बना देता है, जो बिगड़े हुए कार्य को संवार देता है, रुठी हुई किस्मत को मना देता है। बस चलते, बैठकर, लेटकर, शारीरिक अवस्था कुछ भी हो आप जीभा से, ख्यालों से ईश्वर का नाम लेते रहें, प्रभु की भक्ति करते रहें, यकीनन वो मालिक की दरगाह में मंजूर होगी और इन्सान संचित कर्मों से बच जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु फरमाते हैं कि इन्सान से जाने, अनजाने में गलतियां होती रहती हैं, इन्सानियत की रहा छोड़कर कभी-कभी इन्सान हैवान बन जाता है, शैतान, दरिंदा बन जाता है। पर जब उसे होश आता है तो उसे पश्चाताप होता है, दु:ख लगता है, परेशानी होती है। सिर्फ सोचने से पश्चाताप करने से इन्सान उन पाप कर्मों के बोझ से नहीं बच सकता। अगर बचना चाहता है तो एक मात्र उपाय सुमिरन व सेवा ही है। घर, परिवार में रहते हुए सुमिरन करें, सेवा करें, मालिक की औलाद का भला कीजिए, तो पाप कर्म मिट जाएंगे और आप मालिक की कृपा पात्र बन जाएंगे।</p>
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                <pubDate>Fri, 14 May 2021 09:35:06 +0530</pubDate>
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                <title>मनमते लोगों से हमेशा सावधान रहें</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब इन्सान मनमता संग ज्यादा करता है और पीर-फकीर की सोहब्बत छोड़ देता है तो मन हावी होने लगता है। मन जीव को तरह-तरह के विचार देता है। जो अपने पीर-फकीर की बात नहीं मानते, वो हमेशा मालिक से दूर हो जाया करते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/always-beware-from-atheists/article-23052"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg4.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में हर इन्सान काल के खेल-खिलौनों में मस्त है। लोग खुदगर्जी, स्वार्थीपन की सभी हदें पार कर रहे हैं। इस भयानक दौर में लोग अल्लाह, वाहेगुरू, खुदा, रब्ब के सत्संग में आकर लाभ लेने की बजाय तरह-तरह के जाल बुनते हैं, तरह-तरह की चालाकियां करते हैं। ऐसे लोगों से हमेशा सावधान रहें। आप जी ने फरमाया कि मालिक का प्यार, उसकी मोहब्बत का रास्ता बड़ा कठिन है। इस पर चलना सूरवीर, बहादुरों का काम है। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि जो लोग दुनियावी बातों में आकर पल में मुंह मोड़ लेते हैं और सतगुरू की सालों-साल समझाई गई बातों का जिन पर असर नहीं होता। उनके कर्मों में जो लिखा होता है उन्हें वो भोगना भी पड़ता है।</p>
<h4>प्रभु के नाम का जाप करो</h4>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि पहले जब बच्चे पढ़ा करते थे, फट्टी लिखते थे, लकड़ी की फट्टी होती थी, उसे अच्छी तरह से धोकर साफ किया जाता, फिर दोमट माटी या चिकनी माटी से लेप किया जाता। फिर बच्चे कलम-दवात लेकर पूरी लगन से उस पर खूबसूरत लिखते। और जब मास्टर/टीचर चैक कर लेते उसके बाद फिर फट्टी को साफ कर दिया जाता। उसी तरह गुरू, पीर-फकीर बहुत समय लगाकर मालिक के नाम के अक्षर डालते हैं। पर मन या मनमता इन्सान, एक पल में फट्टी साफ कर देता है। और इन्सान उसकी बातों पर यकीन करता है और अपने सतगुरू, मौला से दूर होकर अपने कर्मों का बोझ उठाता रहता है। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि पीर-फकीर कभी किसी से कुछ मांगा नहीं करते। वो हर किसी के भले के लिए प्रार्थना करते हैं, हर किसी के भले के लिए दुआ करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी को दु:खी देखकर उसका दु:ख दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, मालिक से प्रार्थना करते हैं। जो उनकी बात सुनकर अमल करते हैं, यकीनन उनके दु:खों का बोझ कम होता है। आप जी ने फरमाया कि संत कहते हैं कि दु:खों से घबराने की बजाय, प्रभु के नाम का सुमिरन करो। संत कहते हैं कि अपने हृदय को शुद्ध कर लो, अपने विचारों को शुद्ध कर लो, प्रभु के नाम का जाप करो तो भगवान आपको आपके अंदर से ही मिल जाएगा। कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। कहीं और भटकने की जरूरत नहीं है। वो अल्लाह, वाहेगुरू, राम सबके दिलो-दिमाग में रहता है, वो कण-कण में, जर्रे-जर्रे में रहता है पर उसको पाने के लिए अपने विचारों का शुद्धिकरण करना जरूरी है, जिसके लिए सेवा व सुमिरन करना ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप सुमिरन करेंगे, सेवा करेंगे, तो विचार शुुद्ध होंगे और आप परमपिता परमात्मा को हासिल कर लेंगे। आप जी ने फरमाया कि दृढ़ यकीन रखें, कोई भी आकर आपको भ्रमाता है तो उसकी बात पर यकीन न करें, ऐसे लोगों का संग-सोहब्बत न करें, करना भी पड़ जाए तो उसकी बातों पर अमल न करें। क्योंकि जो इन्सान खुद हत्थे से उखड़ा होता है, वो कभी किसी को बसा नहीं सकता। इसलिए उस अल्लाह, वाहेगुरू, राम की भक्ति में बसना सीखें। उसकी इबादत में आप बस गए या उसकी इबादत आपके दिलो-दिमाग में बस गई तो समझो इस कलियुग का महापाप आपको लेश मात्र भी नहीं चूबेगा।</p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/always-beware-from-atheists/article-23052</link>
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                <pubDate>Tue, 20 Apr 2021 09:30:22 +0530</pubDate>
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                <title>दूसरों की बुराई नहीं, खुद में निगाह मारो</title>
                                    <description><![CDATA[दूसरों की गलतियां देखने की बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों की तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनकी गलतियां देखता है जबकि उसे चाहिए कि वह अपने अंदर निगाह मारकर देखे। अगर इन्सान दूसरों की बुराई करने की बजाय अपने बुरे विचारों को त्याग दे तो मालिक जरूर उसे खुशियों से मालामाल कर देता है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/look-at-yourself-not-others-evil/article-22645"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong>। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दूसरों की गलतियां देखने की बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों की तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनकी गलतियां देखता है जबकि उसे चाहिए कि वह अपने अंदर निगाह मारकर देखे। अगर इन्सान दूसरों की बुराई करने की बजाय अपने बुरे विचारों को त्याग दे तो मालिक जरूर उसे खुशियों से मालामाल कर देता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि बुराई आपको हमेशा मुश्किलों, बीमारियों, टेंशन आदि की ओर ले जाने का काम करती है। भक्तजनों को चाहिए कि वे अपनी हर बुरी आदत को त्यागें तथा मालिक से नाता जोड़ें। मालिक को प्राप्त करने के लिए भक्त अपनी हर प्रिय वस्तु को छोड़ देता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ईश्वर का नाम सुखों का खजाना है। इन्सान में इतनी ताकत है कि वह सही तरीके से ईश्वर का नाम सुमिरन कर स्वयं इन्सान से भगवान बन सकता है और यह ताकत प्रत्येक व्यक्ति के पास है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी इस रूहानी ताकत को पहचाने और ईश्वर सुमिरन में अपना ध्यान लगाए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मनुष्य को रोटी खाने में तो मेहनत करनी पड़ती है जबकि सुमिरन करने के लिए तो कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती। मन में केवल विचार आएं और जीभा को राम की तरफ हिलाएं, यही पर्याप्त है। यह नहीं हो सकता तो केवल ख्यालों से ही सुमिरन करें तो भी उत्तम है। हर भक्त को चाहिए कि वह बुराइयों को छोड़े, इसके लिए दृढ़ संकल्प की जरूरत है। एक दिन आएगा जब ईश्वर के नाम, सुमिरन से ही मनुष्य के सभी दु:ख दूर होकर वह खुशियों से मालामाल हो जाएगा।</h6>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Apr 2021 09:30:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>दिखावा नहीं, सच्ची भावना से करें प्रभु भक्ति: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को जो इन्सान देखना चाहे, उससे बात करना चाहे, तो उसे जंगल, पहाड़ों, उजाड़ों में जाने की जरूरत नहीं, कोई कपड़े बदलने की जरूरत नहीं, बल्कि जिस धर्म, मजहब में आप रहते हैं, उसको मानो। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/pujya-guru-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan-2/article-20064"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/spirituality-2.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को जो इन्सान देखना चाहे, उससे बात करना चाहे, तो उसे जंगल, पहाड़ों, उजाड़ों में जाने की जरूरत नहीं, कोई कपड़े बदलने की जरूरत नहीं, बल्कि जिस धर्म, मजहब में आप रहते हैं, उसको मानो। दिखावा मत करो। क्योंकि धर्मों में सुबह-शाम भक्ति करने का नियम है और ठगी, बेइमानी, भ्रष्टाचार करने, किसी का दिल दुखाने से, बेहद स्वार्थ में डूब जाने से रोका गया है। हर तरह के नशे, हर तरह की तकरार से निंदा-चुगली करने से रोका गया है। इसलिए अगर आप अपने-अपने धर्म को मानते हुए सच्ची भावना, श्रद्धा से मालिक का नाम जपते हैं, उसकी भक्ति करते हैं, तो हम गारंटी देते हैं कि वो आपको आपके अंदर से नजारे जरूर दिखाएगा। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मालिक हर जगह है। जो इन्सान उसे सच्ची भावना, तड़प से पुकारता है, तो वो उसे जरूर नजर आता है, लेकिन उसके लिए आपको समय देना पड़ेगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आप डिग्री, डिप्लोमा करते हैं, उसके लिए जिंदगी के 20-25 साल लगा देते हैं, तो क्या भगवान के लिए 20-25 महीने नहीं लगाने चाहिए? क्या उसके लिए थोड़ा समय नहीं देना चाहिए? क्या भगवान को पाने के लिए रिसर्च किया है? क्या आपने भगवान को पाने के लिए टाईम लगाया है? अगर टाईम नहीं लगाया, तो आप कैसे कह सकते हैं कि भगवान नहीं है। जिस प्रकार बच्चे जितनी लगन से पढ़ते हैं, उसी के अनुसार फर्स्ट डिवीजन, कोई मैरिट हासिल करता है। उसी प्रकार भगवान के लिए इतनी लगन होनी चाहिए। आपके अंदर ईश्वर के लिए तड़प, लगन, व्याकुलता होगी और आप एक घंटा सुबह-शाम मालिक की याद में लगाकर देखो, यकीनन आपके अंदर बदलाव आएगा, आपके दिलो-दिमाग में सुकून आएगा और मालिक की झलक नजर आने लग जाएगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि आप कितना भी पढ़ लेते हैं, कितने भी समझदार बन जाते हैं, लेकिन हर काम के लिए समय लगाना जरूरी है। समझ उम्र के साथ, तजुर्बे के साथ और सीखने से आती है। एकदम से किसी को समझ नहीं आया करती। जन्म से बच्चा लगभग नासमझ होता है। फिर जैसे-जैसे बड़ा होता है, तो मां जो पहला गुरु होती है, उसकी शिक्षा पे चलता है, उसके साये में रहता है तो वो समझदार बनता चला जाता है। उसी तरह फकीर एक टीचर होते हैं। वो जीवों को समझाते हैं और वो अपनी वाह-वाह नहीं बल्कि भगवान की वाह-वाह करते हैं कि सब-कुछ करने वाला वो ही है, हम तो कुछ भी नहीं। फकीर तो चौकीदार की तरह होता है, जो दिन में भी आवाज देता रहता है कि भाई जाग जाओ, होशियार हो जाओ।</h6>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Nov 2020 07:00:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रभू से मिलने के लिए संतों का सत्संग बेहद जरुरी</title>
                                    <description><![CDATA[सन्तों के सत्संग में एक अनोखा खिंचाव होता है। जो जीव को अपनी तरफ प्रभावित करता है। सन्तों के बोल-चाल इशारों, दिल, दिमाग व उनके व्यक्तित्व के असर से सत्संग का सारे का सारा वातावरण भरपूर हो जाता है जो कि सब सुनने वालों के ऊपर अमिट प्रभाव डालता है। सन्तों के आध्यात्मिक सत्संग में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/satsang-of-saints-is-very-important-to-meet-god/article-20048"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/precious-words-satsang-prevents-from-terrible-sins.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सन्तों के सत्संग में एक अनोखा खिंचाव होता है। जो जीव को अपनी तरफ प्रभावित करता है। सन्तों के बोल-चाल इशारों, दिल, दिमाग व उनके व्यक्तित्व के असर से सत्संग का सारे का सारा वातावरण भरपूर हो जाता है जो कि सब सुनने वालों के ऊपर अमिट प्रभाव डालता है। सन्तों के आध्यात्मिक सत्संग में से आध्यात्मिक शक्ति व ताज़गी को पाकर जीव धीरे-धीरे अपने दुर्गुणों का त्याग करता हुआ एक दिन नेक व पवित्र इन्सान बन जाता है। सत्संग में से दैवी गुणों को धारण करके वह देवता, महात्मा व मालिक की पदवी पर पहुँच जाता है। यह सन्तों के सत्संग की महिमा है जो कि आम जीव को कतरे से समुद्र व राई से पर्वत बना देता है। अर्थात् मालिक का ही रूप बना देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सचखण्ड दा सन्देशा भाग-2 के एक शब्द द्वारा सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि सत्संग में आने व सन्त-महात्माओं के वचनों को मानने से जीव सदा की खुशी व आनन्द को प्राप्त होता है। सत्संग के सरोवर में स्नान करने से जन्म-जन्म के पाप उतर जाते हैं और मन निर्मल हो जाता है। सन्तों का सत्संग दुनिया की क्रोधाग्नि (जलती भट्ठी) में जल रहे जीवों का आधार है और उन्हें ठण्डक व शान्ति दायक असर प्रदान करता है। प्रभु के मिलने के लिए सन्तों का सत्संग ही सबसे बड़ा साधन है। चोर, ठग, राक्षस आदि जो भी सत्संग का सहारा लेते हैं सत्संग सबको भवसागर से पार कर देता है। जीव अपना बुरा तथा भ्रष्ट जीवन त्याग कर नेक व पवित्र जीवन गुजारने लग जाते हैं, क्योंकि सत्संग हर जीव को अपना असर प्रदान करता है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Nov 2020 12:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुगली, निंदा, टांग खिंचाई में समय बर्बाद न करो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान ने सब शरीरों में से मनुष्य को बिल्कुल अलग बनाया है। इसके अंदर जितना दिमाग, सोचने समझने की शक्ति है किसी और प्राणी में नहीं। आत्मा को मनुष्य जन्म भगवान को पाने के लिए, आत्मा को आवागमन, जन्म-मरण से आजाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/do-not-waste-time-in-backbiting-censure-and-leg-pulling/article-19027"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/do-not-waste-time-in-backbiting-censure-and-leg-pulling.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong>। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान ने सब शरीरों में से मनुष्य को बिल्कुल अलग बनाया है। इसके अंदर जितना दिमाग, सोचने समझने की शक्ति है किसी और प्राणी में नहीं। आत्मा को मनुष्य जन्म भगवान को पाने के लिए, आत्मा को आवागमन, जन्म-मरण से आजाद करवाने के लिए मिला। मनुष्य शरीर में अगर जीवात्मा प्रभु-परमात्मा का नाम ले, ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु की भक्ति-इबादत करे तो बहुत से भयानक कर्म कट जाते हैं। इन्सान सफलता की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता है। सफलता इन्सान के कदम चूमती है। लेकिन यह तभी संभव है अगर इन्सान सत्संग में आकर अमल करे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को चुगली, निंदा, टांग खिंचाई, किसी का बुरा सोचने, करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। काम वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया में पड़कर मनुष्य जन्म को तबहा नहीं करना चाहिए बल्कि इन बुराइयों से अपने-आपको बचाना चाहिए। जैसे आप गाड़ी चला रहे हैं व आगे एक तरफ दलदल हो एवं दूसरी तरफ खड्डे हों तो आप बड़ा आराम से, ध्यान से गाड़ी चलाते हैं कि गाड़ी न तो गड्डे में जाएं और न ही दलदल में फंसे। अगर ध्यान से चलाएंगे तो आप सही-सलामत निकल जाएंगे। अगर लापरवाही से, इधर-उधर की बातें करते जाएंगे तो गाड़ी या तो गड्डे में गिर जाएगी या दलदल में धंस जाएगी। तो उसी तरह मन और माया काल ने बनाए हैं और जिन्दगी रूपी गाड़ी पर अगर मन सवार है तो इन्सान इनमें गिर जाएगा। काम वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया रूपी दलदल में आपकी आत्मा फंस जाएगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अगर आप ध्यान से यानि सुमिरन, भक्ति-इबादत करेंगे, गुरु, पीर-फकीर जैसी ट्रेनिंग देता है वैसे ड्राइवर बनकर अगर आप जीवन जीएंगे तो आप न तो दलदल में फंसेंगे और न ही कभी खड्डों में गाड़ी अटकेगी। क्योंकि पीर-फकीर इन रास्तों के माहिर होते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि फकीरों के वचनों पर चलना बड़ा मुश्किल भी है क्योंकि मन बड़े रोड़े अटकाता है। ऐसे-ऐसे लोग जो भक्ति में लगते हैं, बड़े भक्त लगते थे, लेकिन जब मन दांव चलाता है तो भक्ति धरी-धराई रह जाती है। क्योंकि निंदा-चुगली, व्यर्थ, फिजूल की बातें इन्सान को कहीं का नहीं छोड़ती। ऐसा जो करते हैं वो कभी भी रूहानियत में मालिक, सतगुरु की दया-मेहर के काबिल नहीं बन पाते। तो मन से लड़ो और सेवा-सुमिरन करो।</h6>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 07 Oct 2020 06:00:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>संत, पीर-फकीर के वचनों पर अमल करना सीखो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्रेम जिन जीवों के हिस्से में आता है वो लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं और प्रेम की यह दौलत भगवान की भक्ति के द्वारा ही संभव है। जो लोग मालिक की भक्ति और सृष्टि से नि:स्वार्थ भावना से प्यार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/learn-to-follow-the-words-of-saint-peer-fakir/article-18598"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/learn-to-follow-the-words-of-saint-peer-fakir.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong>। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्रेम जिन जीवों के हिस्से में आता है वो लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं और प्रेम की यह दौलत भगवान की भक्ति के द्वारा ही संभव है। जो लोग मालिक की भक्ति और सृष्टि से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करते हैं उन्हीं पर मालिक का रहमो-कर्म बरसता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर अल्लाह, मालिक के वचन बताते रहते हैं। जो लोग अमल कर लेते हैं वो दोनों जहान की खुशियों के हकदार बन जाते हैं और जो अमल नहीं करते, वो अपने कर्मों की मार सहते रहते हैं। संतों का अपना कोई वचन नहीं होता। भगवान जो ख्याल देते हैं, संत, पीर-फकीर वैसा ही प्रचार करते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर पहले से कोई भाषण तैयार नहीं करते यानि मौके पर ही अल्लाह, मालिक जो ख्याल देते हैं पीर-फकीर सारी साध-संगत के सामने वो ख्याल रख देते हैं। जिस तरह के लोग बैठे होते हैं, वैसी ही बातें होती हैं। इसलिए इन्सान को यह चाहिए कि संतों के वचन सुनकर अमल करे। जो इन्सान वचनों को मानता है फिर चाहे कोई नजदीक हो या दूर हो, दूरी से कोई मतलब नहीं होता और वही इन्सान मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बनता है। इसलिए वचनों पर अमल करना सीखो।</h6>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2020 06:00:14 +0530</pubDate>
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