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                <title>Fever - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Viral Fever: बदलते मौसम के बीच अस्पतालों में बढ़ी ओपीडी, वायरल बुखार के मरीज सबसे ज्यादा</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ों के साथ बच्चे भी वायरल की चपेट में आ रहे हैं कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Badalta Mausam: जनवरी में मार्च जैसी गर्मी करने के बाद फरवरी में फिर से मौसम ने करवट ले ली है और सुबह शाम धुंध पड़ रही है। इस बदलते मौसम के बीच अस्पतालों में फिर से मरीजों की संख्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/opd-increased-in-hospitals-amid-changing-weather/article-67109"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-02/kaithal-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बड़ों के साथ बच्चे भी वायरल की चपेट में आ रहे हैं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। </strong>Badalta Mausam: जनवरी में मार्च जैसी गर्मी करने के बाद फरवरी में फिर से मौसम ने करवट ले ली है और सुबह शाम धुंध पड़ रही है। इस बदलते मौसम के बीच अस्पतालों में फिर से मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी की संख्या में वृद्धि हुई है, वायरल बुखार के सबसे ज्यादा मरीज अस्पताल में पहुँच रहे है। इसके अलावा खांसी, जुकाम, सर्दी, गला खराब जैसी बीमारियों के भी रोजाना 300 से 400 मरीज पहुंच रहे हैं। इलाज के लिए पहुंच रहे लोगों को डाॅक्टरों की ओर से इससे बचाव के लिए जानकारी भी दी जा रही है। Kaithal News</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ों के साथ बच्चे भी वायरल की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को सावधान बरतने की जरूरत है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में सर्दी, जुकाम और बुखार जकड़ लेता है। Kaithal News</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय वायरल बुखार और संक्रमण की बीमारियों की मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। अब खांसी, जुकाम और वायरल बुखार की ओपीडी बढ़ रही है। 20 से 25 जनवरी के बीच कुल ओपीडी 7865 थी जिनमे जनरल ओपीडी 2085 रही | वहीं 27 जनवरी से 1 फरवरी तक ओपीडी बढ़कर 7995 हो गयी जिसमे जनरल ओपीडी 2033 रही। सामान्य अस्पताल में इलाज को लेकर अभी भी प्रबंध अधूरे है। भीड़ के बीच समय पर चिकित्सक न होने से परेशानी होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों का रखें ध्यान | Kaithal News</h3>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों ने बताया कि लगातार कभी सर्द तो कभी गर्म मौसम होने के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियां लोगों को परेशान कर रही हैं। घर में एक को वायरल हो जाता है तो बाकि के सदस्य भी इसकी चपेट में आ जाते है। तापमान के उतार चढ़ाव के चलते सबसे अधिक छोटे बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। बच्चे बेहद नाजुक होते है। इस समय में उनका विशेष ध्यान रखे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये सावधानी बरतें</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लें।</li>
<li style="text-align:justify;">खानपान का विशेष ध्यान रखें, पर्याप्त पानी पीना पिएं।</li>
<li style="text-align:justify;">ठंडे पदार्थों का सेवन भी कई बार बुखार का कारण बन जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">सिरदर्द या बुखार महसूस हो तो विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से ही दवा लें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ऐसे मौसम में खानपान और रहन-सहन के मामले में खास ध्यान देने की जरूरत है। ठंड अभी गयी नहीं है, पिछले कुछ दिनों से दोबारा ठंड ने दस्तक दी है । उन्होंने बताया कि मौसम के बदलाव के कारण ओपीडी की भी संख्या बढ़ने लगी है। कुलओपीडी की लगभग 20 से 25 प्रतिशत ओपीडी वायरल बुखार और खांसी जुकाम के मरीजो की है। सभी नागरिक सावधानी बरते।<br />
<strong>                                                              -डॉ. सचिन मांडले, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल कैथल।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2025 15:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर कोरिया में एक लाख बुखार के नये मामले</title>
                                    <description><![CDATA[सियोल। उत्तर कोरिया में पिछले चौबीस घंटो में अज्ञात बुखार एक लाख नये मामले सामने आए और इस एक व्यक्ति की इस बीमारी से मौत हो गई है। कोरियन सेन्ट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार अप्रैल के अंत से 29 मई तक पंजीकृत तेज बुखार वाले रोगियों की संख्या 35.4 लाख है। लगभग 94.68 प्रतिशत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/one-lakh-new-cases-of-fever-in-north-korea/article-33996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/coronavirus-112.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सियोल।</strong> उत्तर कोरिया में पिछले चौबीस घंटो में अज्ञात बुखार एक लाख नये मामले सामने आए और इस एक व्यक्ति की इस बीमारी से मौत हो गई है। कोरियन सेन्ट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार अप्रैल के अंत से 29 मई तक पंजीकृत तेज बुखार वाले रोगियों की संख्या 35.4 लाख है। लगभग 94.68 प्रतिशत 33.6 लाख पहले ही इस बुखार से ठीक हो चुके हैं, जबकि 188,000 का इलाज चल रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी संदिग्ध मामले कोविड-19 के हैं या नहीं। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सभी शहरों और काउंटी में लॉकडाऊन का आदेश दिया है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 May 2022 14:17:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पलवल में वायरल बुखार का कहर, जिंदगी की जंग हार रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[पलवल। उत्तर प्रदेश के बाद अब हरियाणा में भी वायरल बुखार ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। प्रदेश के पलवल जिले में बुखार से लोग जिंदगी की जंग हार रहे हैं। इन मौतों को लेकर जिले के लोगों में दहशत है। इन्हें डेंगू के कारण हुई मौतें बताया जा रहा है। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/viral-fever-havoc-in-palwal-patients-losing-the-battle-of-life/article-26713"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/dengue-fever.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पलवल।</strong> उत्तर प्रदेश के बाद अब हरियाणा में भी वायरल बुखार ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। प्रदेश के पलवल जिले में बुखार से लोग जिंदगी की जंग हार रहे हैं। इन मौतों को लेकर जिले के लोगों में दहशत है। इन्हें डेंगू के कारण हुई मौतें बताया जा रहा है। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद का कहना है कि मरीजों के सैंपल्स में डेंगू का डी2 स्ट्रेन पाया गया है। यह स्ट्रेन बहुत घातक होता है और अक्सर रक्तस्राव का कारण बनता है। इसके अलावा यह प्लेटलेट काउंट को भी प्रभावित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईसीएमआर के प्रमुख डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि मच्छरों को पनपने से रोक कर रही इससे बचाव संभव है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि डेंगू के नए स्ट्रेन का प्रकोप उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद, मथुरा और आगरा से सामने आया है जबकि मच्छर से होने वाली बीमारियां पूरे देश में बढ़ रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि जिले में डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है। जिले में डेंगू का 1 और मलेरिया के 3 मामले हैं और उनकी जांच की जा रही है। उधर, जिले की निजी लैब में डेंगू के मामलों की खूब पुष्टि हो रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग उनकी रिपोर्ट को सही नहीं मान रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">डेंगू का डी2 स्ट्रेन क्या है</h4>
<p style="text-align:justify;">डेंगू बुखार चार प्रकार का होता है, जिसमें डी2 बेहद खतरनाक है। इसके अंदर बीमारी पैदा करने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम से जोड़कर भी देखा जाता है। इसमें मरीज को बुखार के साथ अचानक ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे मरीज की मृत्यु हो सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या लक्षण उभरते हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">इसमें फ्लू जैसे लक्षण उभरते हैं, जो 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं। डेंगू मच्छर के काटने पर बीमारी 4 से 10 दिन के भीतर सिर उठाती है। शुरूआत में सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मिचली आना, उल्टी, हड्डियों या मांसपेशी में दर्द, चकत्ते आने के लक्षण होते हैं। अगर सही से इलाज न मिला तो यही सामान्य डेंगू गंभीर बन जाता है और पेटदर्द, खून की उलटी, तेज सांस चलना, मसूड़ों से खून जैसे लक्षण आ सकते हैं। ऐसे में तुरंत अस्पताल लेकर जाना सही है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Sep 2021 11:44:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू के बढ़ते मरीजों के कारण आसमान पर पहुंचे पपीते के दाम</title>
                                    <description><![CDATA[40 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिकने वाला पपीता वर्तमान में 100 रुपए पर जा पहुंचा जोधपुर (एजेंसी)। डेंगू के डंक से आहत मारवाड़ के लोगों को राहत पहुंचाने में मददगार साबित हो रहा पपीता अब आसमान पर जा चढ़ा है  (Increase Papaya Rates)। अमूमन 30 से 40 रुपए प्रतिकिलो की दर से बाजार में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/increase-in-papaya-rates-after-dengue-fever-attack-in-rajasthan/article-10924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/papaya.jpg" alt=""></a><br /><h2>40 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिकने वाला पपीता वर्तमान में 100 रुपए पर जा पहुंचा</h2>
<p><strong>जोधपुर (एजेंसी)।</strong> डेंगू के डंक से आहत मारवाड़ के लोगों को राहत पहुंचाने में मददगार साबित हो रहा पपीता अब आसमान पर जा चढ़ा है  <strong>(Increase Papaya Rates)।</strong> अमूमन 30 से 40 रुपए प्रतिकिलो की दर से बाजार में बिकने वाला पपीता वर्तमान में 100 रुपए पर जा पहुंचा है। डेंगू रोगी की प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक पपीता आमजन की पहुंच से दूर होता जा रहा है। पपीता के दाम बढऩे का कारण इसकी आवक कम होना व डेंगू बीमारी बताई जा रही है।</p>
<h2>80 से 100 रुपए किलो तक बिक रहा है</h2>
<ul>
<li><strong> जोधपुर में प्रमुखतया जालोर व जोधपुर जिले के रामपुरा, तिंवरी व मथानिया क्षेत्रों से देशी पपीता आता है। </strong></li>
<li><strong>इन क्षेत्रों से पपीता की आवक बंद हो गई है। </strong></li>
<li><strong>गत बारिश की सीजन में अधिकांश पपीता की फसल खराब हो गई। </strong></li>
<li><strong>इसका प्रभाव गुजरात से आने वाली पपीता की फसल पर पड़ा और वर्तमान में आ रही फसल की आवक कम हो गई।</strong></li>
<li><strong> बाजार में कम आवक व ज्यादा खपत के कारण 30 से 40 रुपए बिकने वाला पपीता इन दिनों 80 से 100 रुपए किलो तक बिक रहा है।</strong></li>
</ul>
<h2>तीन गुना कम हुई आवक |Increase Papaya Rates</h2>
<p>बारिश से नष्ट हुई फसल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में पपीता की आवक तीन गुना कम हो गई है। फल विक्रेताओं के अनुसार जहां 2-3 माह पूर्व पपीता की प्रतिदिन आवक करीब 60 टन हुआ करता था, वहीं अब पपीता एक दिन छोडकऱ आ रहा है। वर्तमान में पपीता करीब 20 टन आ रहा है।</p>
<h2>डेंगू उपचार में सहायक| Increase Papaya Rates</h2>
<ul>
<li><strong>पाचन के लिए जिस फल का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है वह पपीता है।</strong></li>
<li><strong> डेंगू बीमारी जो कि एक प्रकोप के रूप में मारवाड़ में फैल रही है, उसमें भी इस फल का बहुतायत में उपयोग किया जाता है।</strong></li>
<li><strong>लेकिन पिछले करीब एक माह से इस फल के दाम आसमान छू रहे हैं। </strong></li>
<li><strong>डेंगू बीमारी के रोगियों को पपीता, पपीता के पत्तों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।</strong></li>
</ul>
<p>बारिश से पपीता उत्पादन क्षेत्रों मे फसल खराब हो गई है। आवक कम होने से पपीता के भाव तेजी पर है। दीपावली के बाद नई आवक से भावों में कमी आने की उम्मीद है।<br />
मो. इकबाल, फल विक्रेता</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2019 15:33:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>किकी डांस चैलेंज का बुखार</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/kiki-dance-challenge-fever/article-5171"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/kiki-dance.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इन दिनों इंटरनेट से लेकर सोशल मीडिया पर एक डांस खूब वायरल हो रहा है। यह डांस जितना मजेदार है, उतना ही जानलेवा भी साबित हो रहा है। दरअसल, इस डांस का नाम ”किकी डांस” बताया जा रहा है। इस डांस को यूट्यूब पर अब तक 8.2 करोड़ से अधिक लोग देख चुके हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग इस डांस को पूरा करने के लिए एक-दूसरे को चैलेंज दे रहे हैं। चैलेंज के मुताबिक, लोगों को 10 किलोमीटर प्रति घंटे से चल रहे अपने वाहन से नीचे उतर कर कनाडा के रैपर ड्रेक के ”किकी डू यू लव मी” गाने पर डांस करके वापस वाहन में बैठना होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान वाहन चला रहा या वाहन के अंदर बैठा एक अन्य व्यक्ति डांस कर रहे व्यक्ति का वीडियो बनाता है। इस तरह डांस का चैलेंज पूरा होता है। दुनिया भर के लोग चाहे वे बच्चे हो, बूढ़े हो, महिलाएं हो, या फिर जवान सब इस डांस के चैलेंज को पूरा करने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऐसा करना उनकी जान के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल, चुनौती बन चुका यह डांस दुनिया भर की पुलिस के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। यूएई की पुलिस ने तो इस डांस को मानव इतिहास का सबसे खतरनाक डांस का करार दे दिया है। मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, फिलिस्तीन व थाईलैंड जैसे कई देशों में इस डांस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं स्पेन, अमेरिका, मलेशिया में इस चैलेंज से खतरे का अलर्ट जारी किया है। फ्लोरिडा पुलिस ने हजार डॉलर का जुमार्ना लगाकर इस डांस को नहीं करने की अपने देश की जनता को नसीहत दी है। दुनिया के साथ-साथ इस डांस का असर भारत में भी दिखने लगा है। इस डांस ने भारत के लोगों को भी अपनी गिरफ़्त में लेना शुरू कर दिया हैं। देश के कई राज्यों में इस डांस चैलेंज को पूरा करने के चक्कर में लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने सतर्कता का संदेश देते हुए ट्वीट किया है, ”फ्लोर पर डांस करें, न कि रोड पर। किकी चैलेंज मौज-मस्ती के लायक नहीं। दिल्ली की सड़कों को सुरक्षित रखें।” पिछले दिनों पंजाब में इसी तर्ज पर युवाओं ने ‘इन माय फीलिंग्स’ गाने पर डांस वीडियो बनाकर अपलोड किए।</p>
<p style="text-align:justify;">चंडीगढ़ पुलिस ने ऐसे लोगों का चालान काटने और गिरफ़्तारी तक की बात कही है। यूपी पुलिस ने भी ट्वीट में कहा है, ”डियर पेरेंट्स, किकी आपके बच्चे से प्यार करे या नहीं। लेकिन आप जरूर करते हैं। कृपया, किकी चैलेंज को छोड़कर, जिंदगी की हर चुनौतियों में उनके साथ खड़े रहें।” लेकिन, इन सब बावजूद इस डांस चैलेंज को पूरा करने की पागलपंती लोगों के सिर पर इस कदर संवार है कि जाने का नाम ही नहीं ले रही है। क्षणिक आनंद के साथ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की आड़ में लोग भेड़चाल के रूप में अपनी जान का खतरा मौल लेने से जरा भी नहीं कतरा रहे हैं। समाज की यह कमजोरी ही रही है कि लोग गलत चीजों का जल्दी से अनुसरण करते है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व बड़ी मानहानि करने की ताक में लगे रहते है। फिर वह किकी डांस चैलेंज हो या ब्लू व्हेल गेम, लोगों को अपने मोहपाश में बांधकर सीधे जिंदगी के अंतिम स्टेशन पर ले जाने से जरा भी देरी नहीं करता है। एक ओर इस तरह चलते वाहन से उतर कर डांस करना यातायात नियमों का उल्लंघन तो है ही, दूसरी ओर वीडियो बनाकर ऐसा करने के लिए दूसरे लोगों को भी प्रेरित करना उससे भी बड़ा अपराध है। ऐसे में भारत को इस डांस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। क्योंकि हम इससे पहले भी ब्लू व्हेल गेम के कारण अपने देश के कितने ही मासूमों को गंवा चुके हैं और अब किकी डांस हमारे देश के लोगों को अपना निशाना बनाए उससे पहले ”दुर्घटना से सावधानी भली” अर्थात शीघ्र कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, सरकार को विज्ञापन चलाकर ऐसा नहीं करने की चेतावनी को सार्वजनिक करने में देर नहीं करनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 11:05:16 +0530</pubDate>
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                <title>डेंगू बुखार का फैलाव रोकें आप भी</title>
                                    <description><![CDATA[इन दिनों डेंगू का डंक कई जानें ले चुका है। राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य स्थानों पर सैकड़ों जानें डेंगू की वजह से जा चुकी हैं और हजारों लोग डेंगू की बीमारी से पीड़ित हैं। मरने वालों में बच्चे, जवान आदि सभी शामिल हैं। मच्छर सभी स्थानों पर पाये जाते हैं। आप यदि सावधान नहीं है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/prevent-the-spread-of-dengue-fever/article-3441"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/dengu-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इन दिनों डेंगू का डंक कई जानें ले चुका है। राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य स्थानों पर सैकड़ों जानें डेंगू की वजह से जा चुकी हैं और हजारों लोग डेंगू की बीमारी से पीड़ित हैं। मरने वालों में बच्चे, जवान आदि सभी शामिल हैं। मच्छर सभी स्थानों पर पाये जाते हैं। आप यदि सावधान नहीं है तो यह छोटा सा मच्छर कब आपको काटकर चला गया और डेंगू, चिकुनगुनिया, फेल्सीफेरम मलेरिया, जापानी बुखार जैसे खतरनाक रोगों के कीटाणु आपके शरीर में प्रवेश करा गया था या नहीं, आप तुरंत पता भी नहीं लगा सकते। मच्छर ने यदि काट लिया तो आप पूरी तरह भाग्य भरोसे हो जाते हैं कि मच्छर बीमारी के कीटाणु आप के शरीर में डाल गया या नहीं और यदि डाल गया तो कौन सी बीमारी के डाल गया क्योंकि हम नहीं देख पाते कि किस जाति के मच्छर ने हमें काटा है क्योंकि अलग-अलग बीमारी फैलाने के अलग अलग जाति के मच्छर होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको यह जानकर और आश्चर्य होगा कि मादा मच्छर बीमारी के कीटाणु लेकर पैदा नहीं होतीं। नर मच्छर वनस्पति पर अपना पेट पाल लेता हैै। खून की आवश्यकता केवल मादा मच्छर को ही रहती है। यदि उसने केवल स्वस्थ मानव का खून पिया है तो वह मादा मच्छर किसी अन्य को बीमारी नहीं फैला पाती लेकिन यदि उसने डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया आदि से बीमार मरीज का खून चूसा है तो ऐसा मादा मच्छर कुछ ही दिन में बीमारी फैलाने वाला खतरनाक मच्छर बन जाता है और 5-10 दिन के बचे जीवनकाल में जितनों को यह काटेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उनको बीमारी के कीटाणु अपनी लार के द्वारा मानव खून में पहुंचा देगा। मच्छर के काटने के कुछ दिनों पश्चात डेंगू के लक्षण 4 से 6 दिन में और मलेरिया के 10 से 14 दिन में उत्पन्न होते हैं। इसलिए आप अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करें। अपने क्षेत्र में निम्नलिखित अभियान अवश्य चलायें। निकटतम अस्पताल प्रबंधन से निवेदन करें कि बुखार के मरीजों को मच्छरदानी में ही रखने की व्यवस्था बनायें व अस्पताल को मच्छर विहीन रखें। ऐसे अस्पतालों में जाने से बचें जहां मच्छर हों।</p>
<p style="text-align:justify;">घर में बुखार के मरीज को भी मच्छरदानी में रखें और घर भी तुरंत मच्छर विहीन करें। सार्वजनिक स्थानों जैसे सिनेमाहाल, चेंजिंग रूम, नाट्यगृह, टैक्सी, सड़क, स्कूल आदि के मच्छरों को काटने न दें क्योंकि ये मच्छर बीमारी फैलाने वाले कीटाणु लिये हो सकते हैं। आप ऐसे स्थानों पर फुल बाहों के कपड़े, मोजे पहनें और शेष खुले अंगों पर मच्छर रोधी क्रीम या नारियल या सरसों तेल में नीम तेल मिलाकर लगाकर ही निकलें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें अथवा मच्छररोधी क्रीम लगायें। मच्छर खत्म करने के जो भी तरीके आप अपना सकते हों, अपनायें लेकिन कोई भी मच्छर, कहीं का भी मच्छर आप को न काट पाये, ऐसे तरीके अवश्य आजमायें क्योंकि अपनी और अपने प्रिय की सुरक्षा हम सभी को करनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार पुन: जान लें कि डाक्टरों की मेहनत, मरीज की रोगों से लड़ने की शक्ति और मरीज का अच्छा भाग्य ही इस बीमारी से रोगी को मौत के मुंह से निकाल पाता है, अत: मच्छरों को किसी भी हाल में काटने न दें। मच्छरों से वैसे ही डरें जैसे आप कुत्ते के काटने से डरते हैं या उसे देखते ही भगा देते हैं। ये संदेश अधिक से अधिक लोगों को पहुंचाये, तभी भारत जैसे विकासशील देश में इस बीमारी का फैलाव रोका जा सकता है। 5 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए मच्छर काटना ज्यादा घातक हो सकता है, अत: मच्छर न काट पाये, इस बात का विशेष ध्यान सभी रखें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक प्रहलाद अग्रवाल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 04:38:54 +0530</pubDate>
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