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                <title>आपदा प्रशिक्षण से रोकी जा सकेगी मानव क्षति</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में बीते कुछ वर्षो से प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएं-घटनाएं बढ़ी हैं। मानवीय हिमाकत ने पिछले दिनों दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में बड़ी घटना को जन्म दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Disaster training)ने आगजनी को मानवजनित आपदाओं में अव्वल स्थान दिया है। लेकिन आपदा विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी घटनाओं को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/disaster-training-will-prevent-human-loss/article-12089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/disaster-training.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><strong><em><span style="text-decoration:underline;">भारत में बीते कुछ वर्षो से प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएं-घटनाएं बढ़ी हैं। मानवीय हिमाकत ने पिछले दिनों दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में बड़ी घटना को जन्म दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Disaster training)ने आगजनी को मानवजनित आपदाओं में अव्वल स्थान दिया है। लेकिन आपदा विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी घटनाओं को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण से रोका जा सकता है। इस क्षेत्र में एक नाम ऐसा है जो वर्षों से न सिर्फ सरकारी अधिकारियों, बल्कि आमजनों को भी आपदाओं से निपटने का गुर सिखा रही है। डॉ. अंजलि क्वात्रा अंतराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ जो स्वयंसेवी संगठन फिलांथ्रोफे की प्रमुख भी हैं। वह कहती हैं कि देश में बाढ़, भूकंप, चक्रवात व भूस्लखन कभी भी दस्तक दे देते हैं। इसलिए स्वंय के जानमाल के बचाव को प्रत्येक इंसान को आपदा प्रबंधन के हुनर सीखने चाहिए। दिल्ली की घटना को ध्यान में रखकर डॉ. अंजलि क्वात्रा से आपदा प्रबंधन मुद्दे पर रमेश ठाकुर की विस्तृत बात हुई। पेश हैं बातचीत के प्रमुख हिस्से।</span></em></strong></p>
<h3></h3>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली जैसी अचानक घटने वाली घटनाओं को आपदा प्रबंधन के जरिए कैसे बचाया जा सकता है?</h3>
<p style="text-align:justify;">घटना नि:संदेह दर्दनाक थी। लेकिन आगे ऐसी घटनाएं न घटें इसके लिए सबक लेना चाहिए। हमारी टीम पिछले 12 सालों से राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन (Disaster training) का प्रशिक्षण दे रही है। आपने पूछा दिल्ली घटना को कैसे टाला जा सकता था। दिल्ली की घटना में फायर ब्रिगेड के एक कर्मी ने अपनी जान जोखिम में डाल कर कईंयों को बचाया। हमें ऐसे ही कर्मियों की संख्या बढ़ानी है। पुलिसकर्मियों के लिए आपदा प्रशिक्षण का ज्ञान अनिवार्य कर देना चाहिए। हमारी संस्था ने कॉमनवेल्थ गेम के समय ऐसे कई वॉलेंटियर तैयार किए थे, दिल्ली, मुंबई और औरंगाबाद के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने के साथ ही हमने पांच सितारा होटल के कर्मचारियों को भी हादसों में क्षति को रोकने का प्रशिक्षण दिया है जिसका रिजल्ट बहुत अच्छा है। घटना के वक्त दोषारोपण के बजाय बचाव के विकल्प खोजने चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्राकृतिक आपदाओं के अलावा मानवजनित घटनाओं में ज्यादा इजाफा हो रहा है। कोलकाता के कोचिंग सेंटर में लगी आग और दिल्ली में शॉर्ट सर्किट होना ताजा उदाहरण है?</h3>
<p style="text-align:justify;">देखिए, प्राकृतिक आपदाएं कुदरती होती हैं। पर, मानवजनित आपदाएं रोकी जा सकती हैं। हम छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों को नजरअंदाज करते हैं, जिसका परिणाम बड़े हादसे से चुकाना पड़ता है। घर में यदि बिजली के उपकरण पुराने हो गए हैं, किसी तार से चिंगारी निकल रही है या फिर करंट आ रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। आग अधिकतर शार्ट सर्किट से लगती है जिसपर आसानी से काबू किया जा सकता है। एक अहम बात और भी है लोगों को बचाव करने की जानकारी अधूरी होती है। यूं कहें कि आपदा प्रबंधन का ज्ञान न के बराबर होता है। घटनाओं के वक्त लोग मूकबधिर बनकर तमाशा देखते हैं। हालांकि उस वक्त वह कर भी क्या सकते हैं। कई लोग बिजली से लगी आग में पानी के इस्तेमाल को गलत मानते हैं हम लगभग सभी वर्ग के लोगों में आपदा प्रबंधन की क्लास के समय यही बताते हैं कि शॉट सर्किट के वक्त पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। दिल्ली के कारखाने में जब आग लगी थी तो समय रहते अगर पानी डाला जाता तो धुंआ नहीं निकलता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कुछ घटनाएं ऐसी जगहों पर घट जाती हैं जहां आपदा के वक्त बचाव कार्य संभंव नहीं हो पाता ?</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप किसी और की जान नहीं भी बचा पा रहे तो ऐसे हादसे में सबसे जरूरी है खुद को सुरक्षित रखें। हमने बीते कुछ सालों से ऐसी संकरी बस्तियों में भी शिविर लगाए हंै। अभी दक्षिण दिल्ली के कुछ इलाकों में रोजाना आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कैंप का आयोजन किया जा रहा है, जिससे यदि संबंधित अधिकारी या अग्निशमन दल को पहुंचने में देर हो तो पहला प्रयास खुद किया जा सके। आग लगने में सबसे अधिक मौत दम घुटने की वजह से होती हैं, ऐसे में लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें, आग की लपटे क्योंकि नीचे से ऊपर की ओर उठती हैं, इसलिए सीढ़ियों से नीचे उतरने का प्रयास करें, यदि किसी को एफेक्सियां या सांस लेने में तकलीफ तो बाहर निकलने के बाद तुरंत उसे सीपीआर दें, जिससे सांस को तुरंत वापस लाया जा सकता है। इसमें हथेली के बल से मरीज की पसली पर पांच से दस मिनट तक दबाना होता है यह बहुत आसान प्रक्रिया है, जिसे हर कोई कर सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर छोटी आपदाओं से लोग कैसे अपना बचाव कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align:justify;">देखिए, हम किसी बड़ी घटना की बात न भी करें, तो हमारी जानकारी घरों में रोज होने वाली ऐसी घटनाओं के बारे में बहुत कम होती है, उदाहरण के लिए किसी की सांस नली में खाना अटक गया या फिर गाड़ी पानी में फंस गई, घरों में बच्चे अकसर बर्तन सिर में फंसा लेते हैं। ऐसे में सही जानकारी नहीं होने पर जान तक जा सकती है। सांस नली में खाना फंसने पर व्यक्ति के पीछे से कमर के हिस्से से नाभि पर मुठ्ठी रखकर उसे दो से दिन बार झटके के साथ दबाना है, जिससे तुरंत सांस नली में फंसा हुआ खाना बाहर आ जाएगा। इसी तरह चाकू से यदि हाथ कट गया है तो जिस तरफ खून का बहाव होता है उस तरफ हाथ सीधा न करके विपरित दिशा में किया जा जाए तो खून की क्षति को रोका जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकारी स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों से आप कितना संतुष्ट हैं ?</h3>
<p style="text-align:justify;">आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए अभी देश में बहुत कुछ किया जाना बाकी है, दिल्ली या सूरत या कहीं भी ऐसे हादसे न हों इसके लिए आपदा प्रबंधन के साथ ही बेसिक लाइफ सपोर्ट कोर्स भी कराया जाना चाहिए। ऐसे किसी भी हादसे में क्षति को कम करना और अपनी जान बचाना यह दो काम प्रमुख होते हैं, हालांकि विदेशी में इमारतों का निर्माण इस तरह किया जाता है कि आपात स्थिति में अधिक से अधिक लोगों को आपातकालीन मार्ग से निकाला जा सकता है, इसके लिए कई आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है, जहां वॉटर केनिन नहीं पहुंच सकते वहां वॉटर बॉल या पानी के बड़े गोलों का इस्तेमाल किया जाता है, इसके साथ ही कई ऐसी अग्निरोधक चीजों का प्रयोग आपदा प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। इमारतों का नक्शा पास करते हुए इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि इमारत में आपदा से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हों, इसके साथ ही सुरक्षा संयंत्र भी मानकों के अनुसार लगाए जाने चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आप इस बात को मानती हो, इस क्षेत्र में हमारी तैयारियां अभी भी काफी कमजोर हैं?</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक मुहिम चलानी चाहिए, जिससे प्रत्येक व्यक्ति आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण प्राप्त करें, ताकी समय पड़ने पर किसी की जान बचा सकें, हम अपने प्रशिक्षण शिविर में बेहद सामान्य तरीकों को समझाते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर कोई भी किसी और को भी यह सिखा सकता है। पिछले कई सालों में हमने मेडिकल इमरजेंसी जैसे हृदयघात या सड़क दुर्घटना आदि में इसका प्रयोग अधिक देखा है अब लोग जागरुक हो रहे हैं उन्हें अपने साथ ही दूसरों की जान की परवाह होती है। लेकिन सरकारी एजेंसियों को भी अपना काम जिम्मेदारी से करना होगा, जिससे हादसे ही न हों।</p>
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<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 29 Dec 2019 20:53:16 +0530</pubDate>
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                <title>डेंगू बुखार का फैलाव रोकें आप भी</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/prevent-the-spread-of-dengue-fever/article-3441"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/dengu-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इन दिनों डेंगू का डंक कई जानें ले चुका है। राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य स्थानों पर सैकड़ों जानें डेंगू की वजह से जा चुकी हैं और हजारों लोग डेंगू की बीमारी से पीड़ित हैं। मरने वालों में बच्चे, जवान आदि सभी शामिल हैं। मच्छर सभी स्थानों पर पाये जाते हैं। आप यदि सावधान नहीं है तो यह छोटा सा मच्छर कब आपको काटकर चला गया और डेंगू, चिकुनगुनिया, फेल्सीफेरम मलेरिया, जापानी बुखार जैसे खतरनाक रोगों के कीटाणु आपके शरीर में प्रवेश करा गया था या नहीं, आप तुरंत पता भी नहीं लगा सकते। मच्छर ने यदि काट लिया तो आप पूरी तरह भाग्य भरोसे हो जाते हैं कि मच्छर बीमारी के कीटाणु आप के शरीर में डाल गया या नहीं और यदि डाल गया तो कौन सी बीमारी के डाल गया क्योंकि हम नहीं देख पाते कि किस जाति के मच्छर ने हमें काटा है क्योंकि अलग-अलग बीमारी फैलाने के अलग अलग जाति के मच्छर होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको यह जानकर और आश्चर्य होगा कि मादा मच्छर बीमारी के कीटाणु लेकर पैदा नहीं होतीं। नर मच्छर वनस्पति पर अपना पेट पाल लेता हैै। खून की आवश्यकता केवल मादा मच्छर को ही रहती है। यदि उसने केवल स्वस्थ मानव का खून पिया है तो वह मादा मच्छर किसी अन्य को बीमारी नहीं फैला पाती लेकिन यदि उसने डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया आदि से बीमार मरीज का खून चूसा है तो ऐसा मादा मच्छर कुछ ही दिन में बीमारी फैलाने वाला खतरनाक मच्छर बन जाता है और 5-10 दिन के बचे जीवनकाल में जितनों को यह काटेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उनको बीमारी के कीटाणु अपनी लार के द्वारा मानव खून में पहुंचा देगा। मच्छर के काटने के कुछ दिनों पश्चात डेंगू के लक्षण 4 से 6 दिन में और मलेरिया के 10 से 14 दिन में उत्पन्न होते हैं। इसलिए आप अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करें। अपने क्षेत्र में निम्नलिखित अभियान अवश्य चलायें। निकटतम अस्पताल प्रबंधन से निवेदन करें कि बुखार के मरीजों को मच्छरदानी में ही रखने की व्यवस्था बनायें व अस्पताल को मच्छर विहीन रखें। ऐसे अस्पतालों में जाने से बचें जहां मच्छर हों।</p>
<p style="text-align:justify;">घर में बुखार के मरीज को भी मच्छरदानी में रखें और घर भी तुरंत मच्छर विहीन करें। सार्वजनिक स्थानों जैसे सिनेमाहाल, चेंजिंग रूम, नाट्यगृह, टैक्सी, सड़क, स्कूल आदि के मच्छरों को काटने न दें क्योंकि ये मच्छर बीमारी फैलाने वाले कीटाणु लिये हो सकते हैं। आप ऐसे स्थानों पर फुल बाहों के कपड़े, मोजे पहनें और शेष खुले अंगों पर मच्छर रोधी क्रीम या नारियल या सरसों तेल में नीम तेल मिलाकर लगाकर ही निकलें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें अथवा मच्छररोधी क्रीम लगायें। मच्छर खत्म करने के जो भी तरीके आप अपना सकते हों, अपनायें लेकिन कोई भी मच्छर, कहीं का भी मच्छर आप को न काट पाये, ऐसे तरीके अवश्य आजमायें क्योंकि अपनी और अपने प्रिय की सुरक्षा हम सभी को करनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार पुन: जान लें कि डाक्टरों की मेहनत, मरीज की रोगों से लड़ने की शक्ति और मरीज का अच्छा भाग्य ही इस बीमारी से रोगी को मौत के मुंह से निकाल पाता है, अत: मच्छरों को किसी भी हाल में काटने न दें। मच्छरों से वैसे ही डरें जैसे आप कुत्ते के काटने से डरते हैं या उसे देखते ही भगा देते हैं। ये संदेश अधिक से अधिक लोगों को पहुंचाये, तभी भारत जैसे विकासशील देश में इस बीमारी का फैलाव रोका जा सकता है। 5 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए मच्छर काटना ज्यादा घातक हो सकता है, अत: मच्छर न काट पाये, इस बात का विशेष ध्यान सभी रखें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक प्रहलाद अग्रवाल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 04:38:54 +0530</pubDate>
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