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                <title>Starvation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>दुनियाभर में 4.10 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैंः संरा</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने मंगलवार को चेतावनी दी कि दुनियाभर में करीब 4.10 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं। डब्ल्यूएफपी ने कहा कि चार देशों – इथियोपिया, मेडागास्कर, दक्षिण सूडान और यमन पहले से ही अकाल का सामना कर रहे हैं, जिससे 5,84,000 लोग प्रभावित हुए हैं। डब्ल्यूएफपी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/worldwide-410-million-people-could-be-starving-un/article-24644"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/poor-children.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने मंगलवार को चेतावनी दी कि दुनियाभर में करीब 4.10 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं। डब्ल्यूएफपी ने कहा कि चार देशों – इथियोपिया, मेडागास्कर, दक्षिण सूडान और यमन पहले से ही अकाल का सामना कर रहे हैं, जिससे 5,84,000 लोग प्रभावित हुए हैं। डब्ल्यूएफपी के हालिया विश्लेषणों से पता चलता है कि दुनिया के 43 देशों में 4.10 करोड़ भुखमरी के कगार पर हैं और जरा सा झटका उन्हें दलदल में धकेल देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएफपी ने बताया कि 2019 में अकाल जैसी स्थिति का सामना करने वाले लोगों की संख्या 2.7 करोड़ थी। डब्ल्यूएफपी ने कहा है कि इस साल भुखमरी में वृद्धि आवश्यक खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, पहले से मौजूद संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट की वजह से हुयी है। डब्ल्यूएफपी ने बताया कि यदि वह 2021 के लिए जरूरी छह अरब डॉलर का संग्रह करने में सफल हो जाता है, तो उसके पास जीवन रक्षक सहायता के साथ अकाल के जोखिम सामना कर रहे लोगों तक पहुंचने की विशेषज्ञता है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jun 2021 09:52:31 +0530</pubDate>
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                <title>देश में बढ़ रही भुखमरी व कुपोषण चिंता का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[देश में किसान आंदोलन की चर्चा है, सरकार अपने बिल वापिस लेने को तैयार नहीं दिख रही वहीं किसान भी रोज अपनी रणनीति बनाकर न केवल आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं वहीं भारत बंद, टोल फ्री जैसे कदम भी उठा चुके हैं। इस सबके बीच भारतीयों के लिए विचलित कर देने वाली बात है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/increasing-starvation-and-malnutrition-in-the-country-is-a-matter-of-concern/article-20611"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/persistence-of-hunger-and-malnutrition.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में किसान आंदोलन की चर्चा है, सरकार अपने बिल वापिस लेने को तैयार नहीं दिख रही वहीं किसान भी रोज अपनी रणनीति बनाकर न केवल आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं वहीं भारत बंद, टोल फ्री जैसे कदम भी उठा चुके हैं। इस सबके बीच भारतीयों के लिए विचलित कर देने वाली बात है। पहली तो वर्ष 2020 की हंगर इंडेक्स सर्वे रिपोर्ट ने भारत की हालत को बेहद खराब बताया है, जोकि चिंता का विषय है। नोटबंदी, से शुरू हुई खस्ताहालत जीएसटी व कोरोना लॉकडाउन में इतनी गंभीर हो चुकी है कि भारत भुखमरी के मामले में पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश से भी पिछड़ गया है। भुखमरी से कुपोष्ण पनपता है, भारत में हर तीन में से एक बच्चा कुपोषित है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुपोषण से भावी पीढ़ी के दिमाग, कद-काठी का विकास बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।देश हालांकि खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो चुका है परन्तु खाद्यान्न के अलावा दूध, सब्जियों की देश में भारी कमी है। जो भोजन उपलब्ध है गरीब परिवारों के पास उसे खरीद पाने की क्षमता भी नहीं बची है। ये सब इस कारण भी बहुत कष्ट कर हो रहा है कि सरकार सामाजिक स्वास्थ्य की योजनाओं में बजट को घटा रही है या समय पर उसका भुगतान नहीं कर रही। लॉकडाउन के कारण स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन बुरी तरह डगमगा गया है, जहां गरीब बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन मिलता था। इसके विपरीत सरकार का जोर धार्मिक आधार पर कानून बनाने या थोपने पर ज्यादा है, कभी एनआरसी या लव-जिहाद पर सरकार फिक्रमंद है। कभी गौरक्षा की आड़ में देश में हिंसा व वर्ग विभेद हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब किसान आंदोलन को भी खालिस्तानी, विदेशी चंदे एवं वामपंथी विचारधारा की उपज बताया जा रहा है। किसानों की मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें कृषि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता रहे व कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा न दिया जाए ताकि किसान का भी पेट भरता रहे और वह देश का भी पेट भरता रह सके। भारत में करोड़ों किसान व मजदूर कृषि कार्यों से अपना जीवन-यापन करते हैं ऐसे में कृषि का व्यापारीकरण हो जाने से सीमांत किसानों व खेत-मजदूरों में भुखमरी एवं गरीबी बढ़ेगी जबकि देश पहले ही भुखमरी व कुपोषण से जूझ रहा है। सामाजिक सुरक्षा पर देश में परिस्थितियां बेहद डरावनी हो गई हैं। सरकार को जल्द ही सामाजिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर सकारात्मक निर्णय लेने चाहिए। कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भुखमरी एवं कुपोषण से सीधा संबंध है, कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा नहीं मिलेगा तो देश में सामाजिक गरीबी बढ़ेगी, बढ़ती गरीबी भुखमरी व कुपोषण को बढ़ाएगी जिससे देश का विकास ही नहीं दुनिया में प्रभाव भी घटेगा।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 17 Dec 2020 10:02:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बड़ा खुलासा: दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत नहीं हत्या!</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद खड़ा हुआ सवाल (नई दिल्ली)। पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाक़े में हुई तीन बच्चियों की मौत पर अब ये सवाल उठ रहा है कि क्या भूख से उनकी मौत हुई या उनकी हत्या की गई थी? ये शक़ इस मामले की प्रारंभिक मजिस्ट्रेट जाच रिपोर्ट सामने आने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/horror-starvation-in-delhi-three-minor-girls-dies-in-lack-of-food/article-5034"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/horror-starvation-in-delhi.jpg" alt=""></a><br /><h2>प्रारंभिक मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद खड़ा हुआ सवाल</h2>
<p><strong>(नई दिल्ली)। </strong>पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाक़े में हुई तीन बच्चियों की मौत पर अब ये सवाल उठ रहा है कि क्या भूख से उनकी मौत हुई या उनकी हत्या की गई थी? ये शक़ इस मामले की प्रारंभिक मजिस्ट्रेट जाच रिपोर्ट सामने आने के बाद खड़ा हुआ है और इस रिपोर्ट ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है <strong>।</strong> रिपोर्ट्स के अनुसार, जांचरिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चियों के पिता ने उन्हें कुछ ‘अज्ञात दवाई’ दी थी<strong>। </strong>रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पिता का आचरण संदेह पैदा करता है और इस संबंध में और गहराई से जाँच करने की ज़रूरत है <strong>। </strong>तीनों बहनें मंगलवार को मृत मिली थीं और उस समय से उनके पिता गायब हैं<strong>।</strong> रिपोर्ट में लिखा गया है कि लड़कियां दस्त और उल्टी से पीड़ित थीं<strong>।</strong></p>
<h2>पिता मंगल को नशे की भी लत</h2>
<p>पुलिस जांच में पता चला कि बच्चियों के पिता मंगल सिंह बचपन से ही दिल्ली के होटलों में बर्तन धोता था। होटल से काम छोड़ने के बाद मजदूरी करने लगा। करीब दो साल से वह रिक्शा चलाने लगा था। उसे नशे की लत भी लग गई थी।</p>
<h2>तीन बच्चों की मौत की विस्तृत जांच हो : भाजपा</h2>
<p>मंडावली में हुई बच्चों की मौत की विस्तृतज जांच कली जानी चाहिए। यह मांग भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि मंडावली में तीन बच्चों की भूख से मृत्यु के मामले ने मुझे झकझोर दिया है। देश की राजधानी जहां राज्य सरकार हर व्यक्ति के घर पर अन्न पहुंचाने की योजनाओं का राजनीतिक प्रचार करती है। वहां उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के चुनाव क्षेत्र में इतनी दुखद घटना होना अचंभित करने के साथ ही दुखी भी करता है। उन्होंने कहा कि इस घटना की विस्तृत जांच की आवश्यकता है।</p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jul 2018 04:52:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनाज की बहुतायत बनाम भुखमरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भुखमरी के मसले पर भारत की स्थिति को अभी चिंताजनक बताया है। इस सूचि के अनुसार भारत भुखमरों में 100वें पायदान पर है, जबकि वर्ष 2000 में हालात ठीक थे, तब भारत 87वें पायदान पर था। 15 वर्ष पूर्व भारत में परिस्थितियां ठीक थी। यह मामला जिस तरह ऊपरी तौर पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/abundance-of-grain-vs-starvation/article-3442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/poor1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भुखमरी के मसले पर भारत की स्थिति को अभी चिंताजनक बताया है। इस सूचि के अनुसार भारत भुखमरों में 100वें पायदान पर है, जबकि वर्ष 2000 में हालात ठीक थे, तब भारत 87वें पायदान पर था। 15 वर्ष पूर्व भारत में परिस्थितियां ठीक थी। यह मामला जिस तरह ऊपरी तौर पर गंभीर दिख रहा है, सरकार को इस दशा की बारीकी से छानबीन करनी चाहिए कि क्यों देश में भुखमरी बढ़ रही है। देश के अनाज भण्डार इतने ज्यादा भरे हुए हैं कि देश से अनाज संभाला नहीं जा रहा। पिछले वर्षों में प्रतिवर्ष हजारों टन अनाज बर्बाद हो रहा है। यहां तक कि गत वर्ष उच्चतम न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि अनाज को सड़ने न दिया जाए, बल्कि गरीबों में बांट दिया जाए। अफसोस सरकार अदालत के निर्देशों की पालना नहीं कर पा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में केन्द्र व राज्य सरकारों ने कुपोषण मिटाने के लिए सस्ता अनाज, सस्ती दाल व भोजन उपलब्ध कराने की योजनाएं चला रखी हैं। यह प्रशासनिक विफलता ही कही जाएगी कि देश में उक्त योजनाओं व अनाज की भरपूर उपलब्धता के बावजूद भी भुखमरी की डरावनी तस्वीर बनी हुई है। स्कूलों में संचालित मिड-डे-मील योजना एवं सस्ता राशन उपलब्ध करवाने वाली योजनाओं का यदि अक्षरश: पालन हो जाता है, तब देश तेजी से भुखमरी व्यक्त करने वाले आंकड़ों से अपना पिंड छुड़ा सकता है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही भोजन उपलब्धता योजनाओं, अनाज भण्डारण की योजनाओं में खामियां रह जाती हैं, जबकि यह सब पात्र लोगों के हिस्से आना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आम नागरिकों में भी सरकार की पौष्टिक भोजन योजनाओं को लेकर गंभीरता अभी शत्-प्रतिशत नहीं बनी हैं। लाखों परिवार ऐसे हैं, जो सस्ता राशन पाने की योजनाओं, आंगनबाड़ी केन्द्र में उपलब्ध सुविधाओं, मिड-डे-मील योजनाओं की सुविधाओं से अनभिज्ञ हैं व वंचित हैं। देश में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे हैं। यहां बच्चों को राज्यवार प्रचलित भोजन दाल, चावल, चपाती उपलब्ध करवाई जा रही है, साथ ही विटामिन-ए भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लेकिन विभिन्न चरणों में नागरिकों की उदासीनता का अवैध लाभ भ्रष्ट लोग उठा रहे हैं।केन्द्रीय व राज्य प्रशासन को भोजन उपलब्ध करवाने वाली योजनाओं की कमियों को तेजी से दूर करने के प्रयास करने होंगे। अभी डिजीटल इंडिया के दौर में योजनाओं को मूर्त रूप लेने में वक्त लग रहा है। तेजी से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था के लिए यह देरी चुनौती हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 04:42:04 +0530</pubDate>
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