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                <title>Ideas - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>छात्रों के आइडिया अपनाएगा विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग</title>
                                    <description><![CDATA[ देश की किसी भी मान्य भाषा में भेज सकते हैं सुझाव  बैंक अकाऊंट में डाली जाएगी पुरस्कार राशि सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। देश व प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थी, जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच है, उनके आइडिया प्रतियोगिता से निकले दो से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/department-of-science-and-technology-will-adopt-students-ideas/article-4348"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sirsa-ok.jpg" alt=""></a><br /><h2> देश की किसी भी मान्य भाषा में भेज सकते हैं सुझाव</h2>
<h2> बैंक अकाऊंट में डाली जाएगी पुरस्कार राशि</h2>
<p><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा</strong></p>
<p><strong>सरसा।</strong> देश व प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थी, जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच है, उनके आइडिया प्रतियोगिता से निकले दो से तीन अच्छे विचारों/नई जानकारी/नवप्रवर्तनों को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘इंस्पायर अवार्ड मानक’ के लिए आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्रों के अंदर छोटी आयु में ही विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित व आकर्षित करना है।</p>
<p>इसी कार्यक्रम को लेकर बीते मंगलवार को प्रोजेक्ट के इंचार्ज डॉ. संजय मिश्रा ने दिल्ली में हरियाणा, दिल्ली व उत्तराखंड प्रदेशों के इंस्पायर अवार्ड मानक के नोडल अधिकारियों व जिला नोडल अधिकारियों की बैठक ली। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारियों में इंस्पायर अवार्ड मानक कार्यक्रम के प्रति जागरूकता और कार्यक्षमता को बढ़ाना था।</p>
<p>इंस्पायर अवार्ड मानक में आवेदन की तिथि अब 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। इस बैठक में सरसा से इंस्पायर अवार्ड मानक के नोडल अधिकारी व जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार ने शिरकत की। ेबता दें कि वर्ष 2009-10 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इंस्पायर पुरस्कार योजना की शुरुआत की थी और अब उक्त योजना में कुछ सुधार किए गए हैैं और पुरस्कार राशि को भी बढ़ाया गया है।</p>
<p>छठी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थी निर्धारित प्रारूप के तहत देश की मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में अपना आवेदन अपने विद्यालय में जमा करवा सकते है। स्कूल प्राचार्य द्वारा स्कूलों में आईडिया प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों के दो से तीन अच्छे विचारों/नवप्रवर्तनों का चयन किया जाएगा, जिसका आॅनलाइन नामांकन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की वेब पोर्टल ई-एमआईएएस पर होगा। नए विद्यालय वेब पोर्टल पर ई-एमआईएएस पर स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं।</p>
<p>देशभर से एक लाख छात्रों को मिलेगा पुरस्कार भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान द्वारा देशभर से आने वाले सर्वश्रेष्ठ एक लाख विचारों का चयन किया जाएगा। इन चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये प्रति पुरस्कार राशि उनके खाते में डाली जाएगीं। विचारों का चयन उसकी नवीनता, व्यवहारिकता, सामाजिक उपयोगिता, पर्यवरण की अनुकूलता और वर्तमान में मौजूद तकनीक से बेहतरी के आधार पर होगा।</p>
<p>इसके पश्चात पूरे भारत से जिला स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कम्पटीशन करवाकर एक लाख नवप्रवर्तनों में से 10 हजार नवप्रवर्तनों का चयन राज्यस्तरीय प्रतियोगिता और प्रदर्शनी के लिए किया जाएगा। इसके बाद राज्यस्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कम्पटीशन द्वारा 10 हजार में से एक हजार नवप्रवर्तनों का चयन होगा। चयनित 1000 प्रतिकृति को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में रखा जाएगा, जहां से श्रेष्ठ 60 को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा, जिन्हें मार्च में राष्टÑपति भवन में महामहिम राष्टÑपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा।</p>
<h2>क्या है इंस्पायर अवार्ड मानक कार्यक्रम</h2>
<p>इंस्पायर अवार्ड मानक विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों के अंदर छोटी आयु में ही विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित व आकर्षित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत छठी से दसवीं कक्षा के मेधावी छात्रों जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच होती है, को दस हजार रुपए की अवार्ड राशि प्रदान की जाती है। इस राशि का उपयोग छात्रों द्वारा विज्ञान का एक प्रोजेक्ट या मॉडल बनाने व उसे जिलास्तरीय प्रदर्शनी व प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसके तहत अवार्ड विजेता छात्र जिला, राज्य व राष्ट्रय स्तर पर हिस्सा लेता है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले प्रतिभागियों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाता है।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 08:42:36 +0530</pubDate>
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                <title>एक दूसरे के पूरक हैं विचार और साहित्य</title>
                                    <description><![CDATA[विचार और साहित्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं। विचार आत्मा है और साहित्य शरीर।विचार अपंग होता है तो साहित्य अंधा। विचार बीज है तो साहित्य हवा, पानी, खाद, दवा। यदि साहित्य और विचार को एक-दूसरे का सहारा न मिले तो अलग-अलग रहकर दोनों अपना महत्व खो देते हैं। दोनों के गुण भी बिल्कुल अलग-अलग होते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ideas-and-literature-are-complementary-to-each-other/article-3450"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/thoughts.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विचार और साहित्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं। विचार आत्मा है और साहित्य शरीर।विचार अपंग होता है तो साहित्य अंधा। विचार बीज है तो साहित्य हवा, पानी, खाद, दवा। यदि साहित्य और विचार को एक-दूसरे का सहारा न मिले तो अलग-अलग रहकर दोनों अपना महत्व खो देते हैं। दोनों के गुण भी बिल्कुल अलग-अलग होते हैं और प्रभाव भी।</p>
<p style="text-align:justify;">विचार मक्खन रूपी तत्व होता है तो साहित्य मठा। विचार मस्तिष्क को प्रभावित करता है तो साहित्य हृदय को। विचार तर्क प्रधान होता है तो साहित्य कला प्रधान। विचारों का प्रभाव बहुत देर से शुरू होता है और देर तक रहता है तो साहित्य का प्रभाव तत्काल होता है और अल्पकालिक होता है। साहित्य विचारों की कब्र होता है। साहित्य विचारों को कब्र में पहुंचाकर लंबे समय तक के लिए सुरक्षित रखता है दूसरी ओर साहित्य विचारों को देश काल परिस्थिति के आधार पर होने वाले नये-नये संशोधनों से भी दूर कर देता है। विचार व्यक्ति के ज्ञान का विस्तार करता है तो साहित्य भावना का। दोनों का प्रभाव समाज पर अलग-अलग होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विचारक चाहे जितना गंभीर निष्कर्ष निकाल ले किंतु जब तक उसे साहित्य का सहारा नहीं मिलता तब तक वह आगे नहीं बढ़ पाता। या तो वह वहीं पड़ा-पड़ा सड़ जाता है या साहित्य से संयोग की प्रतीक्षा करता रहता है। इसी तरह साहित्य को जब तक विचार न मिले तब तक वह निष्प्राण निष्प्रभावी प्रदर्शन मात्र करता रहता है। साहित्यकार और विचारक भी अलग ही होते हैं। न कोई विचारक साहित्य से शून्य होता है न कोई साहित्यकार विचार से। किंतु साहित्यकार और विचारक में कोई एक गुण प्रधान होता है और दूसरा आंशिक। प्रधान गुण ही उसे विचारक या साहित्यकार होने की पहचान दिलाता है। विचारक को अधिकतम सम्मान तथा न्यूनतम सुविधाएं मिलती हैं जबकि साहित्यकार को सामान्य सम्मान तथा सामान्य सुविधाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">विचारक आमतौर पर व्यावसायिक मार्ग में नहीं जा पाता जबकि साहित्यकार आमतौर पर व्यावसायिक दिशा में बढ़ता है। राम मनोहर लोहिया, मधुलिमये, दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहरी वाजपेयी आदि को भी हम आंशिक रूप से इस लाइन में जोड़ सकते हैं। यद्यपि इनमें मौलिक विचार के साथ-साथ कुछ साहित्यिक क्षमता भी थी। अन्य भी अनेक लोग विचारक के रूप में रहे किंतु उन्हें साहित्यकारों कलाकारों का सहारा नहीं मिलने से वे अप्रकाशित ही रहे। धीरे-धीरे स्थिति यह आई कि मौलिक चिंतन का अभाव हुआ और साहित्यकारों कलाकारों की बाढ़ आनी शुरू हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">साहित्यकार कलाकार कथाकार नाटककार ही स्वयं को विचारक घोषित करने लगे और समाज भी उन्हें विचारक मानने की भूल करने लगा। इन सबमें मौलिक चिंतन करने और निष्कर्ष निकालने की तो क्षमता थी नहीं और कला के माध्यम से विचार समाज तक पहुंचाना इनकी मजबूरी थी। अत: वास्तविक विचार और विचारकों के अभाव में इन सबने राजनेताओं के ही विचारों और निष्कर्षों को अपनी कला के माध्यम से समाज तक पहुंचाना शुरू कर दिया। विचार तो पूरी तरह स्वतंत्र होता है। न तो विचार कभी प्रतिबद्ध हो सकता है न होता है। प्रतिबद्धता की बीमारी वामपंथ से शुरू हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">साहित्य मीडिया, कला, राजनीति, समाज सेवा आदि की प्रतिबद्धता व्यावसायिक होने के साथ-साथ विकृत भी हुई किंतु विचारक और विचार इस बीमारी से अछूते रहे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सरकारों से तो खतरा हमेशा ही रहा है किंतु अब तो संगठित गुण्डों से भी उसे खतरा बढ़ता जा रहा है। मैंने पश्चिम के देशों में तो सुना था कि किसी ने लीक से हटकर कुछ कह दिया तो उसे फांसी दे दी गई अथवा आज भी इस्लामिक देशों में तो यह व्यवस्था है जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है किंतु भारत में तो ऐसी स्थिति पिछले कुछ वर्षों से ही दिख रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक बजरंग</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2017 04:24:53 +0530</pubDate>
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