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                <title>behind - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>विराट ने सचिन को पीछे छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन 123 रन बनाकर अपना 25वां टेस्ट शतक जड़ा पर्थ (एजेंसी)। भारतीय कप्तान विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 25 शतक बनाने में हमवतन सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। विराट ने आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन 123 रन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/virat-leaves-sachin-behind/article-7014"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/virat-leaves-sachin-behind.jpg" alt=""></a><br /><h1>आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन 123 रन बनाकर अपना 25वां टेस्ट शतक जड़ा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पर्थ (एजेंसी)।</strong> भारतीय कप्तान विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 25 शतक बनाने में हमवतन सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। विराट ने आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन 123 रन बनाकर अपना 25वां टेस्ट शतक जड़ा। विराट का 2018 में यह पांचवां टेस्ट शतक था और इस साल सभी फॉर्मेट में 11वां शतक था। विराट ने 127 पारियों में 25 शतक बनाए जबकि सचिन 130 पारियों में इस आंकड़े पर पहुंचे थे। आॅस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन मात्र 68 पारियों में इस आंकड़े तक पहुंच गए थे। भारतीय कप्तान का आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ 7वां और आॅस्ट्रेलिया में छठा शतक था। कप्तान के रुप में यह उनका 18वां शतक था जिनमें से 14 टेस्ट शतक तो उन्होंने भारत से बाहर जड़े हैं। विराट का यह कुल 63वां अतर्राष्ट्रीय शतक है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विराट का यह आॅस्ट्रेलिया में छठा शतक है</h2>
<p style="text-align:justify;">विराट का यह आॅस्ट्रेलिया में छठा शतक है और इस मामले में उन्होंने सचिन की बराबरी कर ली है जिन्होंने आॅस्ट्रेलिया में छह शतक बनाए हैं। विराट ने लगातार दूसरे साल एक कैलेंडर वर्ष में 11 शतक बना लिए हैं और इस मामले में उनसे आगे सचिन हैं जिन्होंने 1998 में 12 शतक बनाए थे। आॅस्ट्रेलिया में कप्तान के रुप में सबसे ज्यादा चार शतक बनाने वाले कप्तानों में अब विराट वेस्ट इंडीज के क्लायव लॉयड की बराबरी पर आ गए हैं। विराट दूसरे ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने लगातार वर्षों में 5 टेस्ट शतक जड़े हैं। उनसे पहले आॅस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग ने 2005 और 2006 में यह कारनामा किया था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Dec 2018 14:37:02 +0530</pubDate>
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                <title>गांगुली और सचिन को पीछे छोड़ सकते हैं रोहित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। हिटमैन के नाम से मशहूर और वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक का विश्व रिकार्ड अपने नाम रखने वाले भारतीय उपकप्तान रोहित शर्मा वेस्टइंडीज़ के खिलाफ वनडे सीरीज़ में सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ सकते हैं। एकदिवसीय क्रिकेट में लंबे लंबे छक्के मारने के महारथी रोहित के पास सर्वाधिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/rohit-can-leave-behind-ganguly-and-sachin/article-6310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/rohit-can-leave-behind-ganguly-and-sachin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली (एजेंसी)।</p>
<p style="text-align:justify;">हिटमैन के नाम से मशहूर और वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक का विश्व रिकार्ड अपने नाम रखने वाले भारतीय उपकप्तान रोहित शर्मा वेस्टइंडीज़ के खिलाफ वनडे सीरीज़ में सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ सकते हैं। एकदिवसीय क्रिकेट में लंबे लंबे छक्के मारने के महारथी रोहित के पास सर्वाधिक छक्के उड़ाने के मामले में गांगुली और सचिन को पीछे छोड़ने का मौका रहेगा। रोहित ने अब तक 188 मैचों में 186 छक्के मारे हैं जबकि गांगुली ने 311 मैचों में 190 और सचिन ने 463 मैचों में 195 छक्के मारे हैं। रोहित को सचिन को पीछे छोड़ने के लिए 10 छक्कों की जरुरत है। भारत ने वनडे में सर्वाधिक छक्के मारने का रिकार्ड पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम है जिन्होंने 327 मैचों में 217 छक्के मारे हैं।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Oct 2018 13:20:37 +0530</pubDate>
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                <title>कप्तान विराट बने नंबर वन, गावस्कर को पीछे छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[दुबई (एजेंसी)। भारतीय कप्तान विराट कोहली बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में अपने जबरदस्त प्रदर्शन की बदौलत आॅस्ट्रेलिया के स्टीवन स्मिथ को पीछे छोड़कर दुनिया के नंबर एक टेस्ट बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इसके साथ ही आॅलटाइम रेटिंग में हमवतन सुनील गावस्कर को पीछे छोड़ दिया है। विराट ने इस टेस्ट में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/captain-virat-leaves-number-one-behind-gavaar/article-5180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/captain-virat-leaves-number-one-behind-gavaskar-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>दुबई (एजेंसी)।</strong></p>
<p>भारतीय कप्तान विराट कोहली बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में अपने जबरदस्त प्रदर्शन की बदौलत आॅस्ट्रेलिया के स्टीवन स्मिथ को पीछे छोड़कर दुनिया के नंबर एक टेस्ट बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इसके साथ ही आॅलटाइम रेटिंग में हमवतन सुनील गावस्कर को पीछे छोड़ दिया है। विराट ने इस टेस्ट में 149 और 51 रन बनाए जिसकी बदौलत उन्होंने 31 अंक की लम्बी छलांग लगाई और 934 अंकों के साथ टेस्ट रैंकिंग में सर्वोच्च स्थान पर शान से विराजमान हो गए। हालांकि विराट को इस बात का थोड़ा अफसोस जरुर रहेगा कि उनके शानदार प्रदर्शन के बावजूद भारत यह टेस्ट 31 रन से हार गया। भारतीय कप्तान के सीरीज शुरु होने से पहले 903 अंक थे और वह शीर्ष पर मौजूद स्मिथ (929) से 26 अंक पीछे थे लेकिन दोनों पारियों के अपने प्रदर्शन से विराट ने स्मिथ को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया। स्मिथ इस समय बॉल टेंपरिंग मामले में एक साल का प्रतिबंध झेल रहे हैं। विराट ने टेस्ट रैंकिंग में नंबर वन पर पहुंचने के साथ ही एक और उपलब्धि भी हासिल कर ली है। उन्होंने आॅलटाइम टेस्ट रेटिंग में हमवतन और महान ओपनर सुनील गावस्कर को पीछे छोड़ दिया है। गावस्कर के 916 रेटिंग अंक हैं। विराट आॅलटाइम रेटिंग में अब 14वें स्थान पर आ गए हैं। इस क्रम में आॅस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन 961 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं।</p>
<p>स्मिथ अब दूसरे स्थान पर आ गए हैं जबकि इंग्लैंड के जो रुट का तीसरा स्थान बना हुआ है। टेस्ट रैंकिंग में अन्य भारतीय बल्लेबाजों को अपने निराशाजनक प्रदर्शन का नुकसान उठाना पड़ा है। चेतेश्वर पुजारा अपने छठे स्थान पर कायम हैं जबकि लोकेश राहुल एक स्थान गिरकर 19वें, अजिंक्या रहाणे तीन स्थान गिरकर 22वें, मुरली विजय एक स्थान गिरकर 25वें और शिखर धवन एक स्थान गिरकर 25वें स्थान पर खिसक गए हैं। हार्दिक पांड्या ने अपनी रैंकिंग में 10 स्थान का सुधार किया है और अब वह 57वें स्थान पर पहुंच गए हैं। पहली पारी में ओपनर मुरली विजय 20, शिखर धवन 26, लोकेश राहुल 4 और अजिंक्या रहाणे 15 रन बनाकर आउट हुए जबकि दूसरी पारी में मुरली विजय 6, शिखर धवन 13, लोकेश राहुल 13 और अजिंक्या रहाणे 02 रन बनाकर आउट हुए।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 14:01:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बुराड़ी में सामूहिक मौत के पीछे आध्यात्म की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीड़ित परिवार किस गुरु को मानता था (Fear of spirituality behind mass deaths in the shrine) नई दिल्ली (एजेंसी)। राजधानी दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में परिवार के आध्यात्मिक प्रवृति का होने की आशंका व्यक्त की जा रही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/fear-of-spirituality-behind-mass-deaths-in-the-shrine/article-4608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/fear-spirituality-behind-mass-deaths-shrine.jpg" alt=""></a><br /><h1>पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीड़ित परिवार किस गुरु को मानता था</h1>
<p><strong>(Fear of spirituality behind mass deaths in the shrine)</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">राजधानी दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में परिवार के आध्यात्मिक प्रवृति का होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मौके से दो रजिस्टर मिले हैं जिससे लगता है कि परिवार के लोग किसी साधना में लगे हुए थे। इनमें से एक रजिस्टर के एक ही पेज में विस्तार से सारी बातें हिन्दी में लिखी हुई हैं। इसमें लिखा हुआ है कि परमात्मा में लीन हो रहे हैं। आंखें बंद कर रहे हैं ताकि भारी और बुरी वस्तु को न देख सकें। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीड़ित परिवार किस गुरु को मानता था। परिजनों को आध्यात्म के लिए खुदकुशी के लिए उकसाया तो नहीं गया था। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से परिवार के सदस्य लटके हुए थे उस तरीके की बातें रजिस्टर में लिखी हुई है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">पूरा परिवार बेहद धार्मिक था</h1>
<p style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों रजिस्टरों में मौत और मोक्ष के लेकर एक कहानीनुमा लंबा लेख है, जिसमें किसी आध्यत्मिक गुरु का नाम नहीं है लेकिन मौत की क्रियाओं को लेकर एक बड़ा हिस्सा है। पुलिस को कई पड़ोसियों और जानकरों से ये पता चला है कि यह पूरा परिवार बेहद धार्मिक था, इनके घर में हर दूसरे दिन शाम को कीर्तन होते थे। घर के बाहर हर रोज एक तख्ती पर श्लोक लिखे जाते थे। परिवार के सभी 11 लोग हर व्रत साथ करते थे। परिवार का एक सदस्य पिछले दो-तीन साल से मौन व्रत पर था।अब तक की जांच में किसी बाहरी शख्स के घर में आने के कोई सबूत नहीं मिले हैं।कोई लूटपाट नहीं हुई है, कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ हो पायेगी।</p>
<h1 style="text-align:justify;">क्या था मामला:</h1>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि उत्तरी दिल्ली में बुराड़ी के संत नगर इलाके में रविवार को एक साथ 11 शव मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। मरने वालों में 10 की आंखों पर पट्टी बंधी थी और वे रेलिंग से लटके मिले जबकि एक का शव जमीन पर मिला था।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 10:52:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>CMO अफिस के पीछे कुत्ते नोचते मिले मरीज का शव, मंत्री विज ने दिए जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अम्बाला। भिवानी के चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में बुधवार को मिले मरीज के शव के मामले में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जांच के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि यहां के बंसीलाल अस्पताल में 6 दिन से लापता एक मरीज का शव सीएमओ अॉफिस के पीछे मिला था, जिसे कुत्ते नोच रहे थे। इस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-body-patient-who-was-missing-dog-behind-cmo-office-inquiry-ordered-vij/article-4018"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/dedbody-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बाला। </strong>भिवानी के चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में बुधवार को मिले मरीज के शव के मामले में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जांच के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि यहां के बंसीलाल अस्पताल में 6 दिन से लापता एक मरीज का शव सीएमओ अॉफिस के पीछे मिला था, जिसे कुत्ते नोच रहे थे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने डीजी हेल्थ को मामले की जांच करने के आदेश दे दिए हैं। उनका कहना है कि सभी जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मामले में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी</h3>
<p style="text-align:justify;">पढ़िए क्या था पूरा मामला- जानकारी के अनुसार झज्जर जिले के गोरिया गांव के 75 वर्षिय श्योताज को शुगर की बीमारी के चलते 28 मई को चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के दौरान 30 मई की शाम श्योताज ने खाना खाया और खाना खाकर वह बैड से उठ कर घूमने के लिए बाहर गया। काफी देर तक जब श्योताज वापस अपने बैड पर नहीं आए तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरु की, कापफी तलाशने के बाद भी श्योताज का कुछ पता नहीं चला।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके चलते परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई। छह दिन बाद मिला शव- बुधवार को मृतक श्योताज का शव अस्पताल परिसर में मिला। जिसे कुत्ते नौच रहे थे। शव काफी दिनों तक पडा रहने के कारण शव से बदबू उठी तो आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन का ध्यान गया जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच की। शव के पास अस्पताल के बैड की चद्दर होने पर आशंका जताई गई कि ये मरीज है। ये कहना था सीएमओ का- सीएमओ डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता का कहना था कि सुरक्षा गार्ड आउटसोर्सिंग के तहत लगे हैं। उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 13:56:58 +0530</pubDate>
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                <title>हमारे सुपरफास्ट जीवन से परिवार पीछे छूट गया</title>
                                    <description><![CDATA[आजकल हमारा जीवन सुपर फास्ट हो गया है। अभी मनुष्य के पास तरह तरह की हवा से भी अधिकं तीव्रगति की सवारियां और तरह-तरह के यान हैं। इन सब की तेज गति से भी लोग संतुष्ट नहीं हैं। कंप्यूटर के नामं से जो मशीन विज्ञान ने निकाली है, उसकी शक्ति, स्मृति और रफ्तार नित्य प्रति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/our-superfest-life-left-the-family-behind/article-3457"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/family-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजकल हमारा जीवन सुपर फास्ट हो गया है। अभी मनुष्य के पास तरह तरह की हवा से भी अधिकं तीव्रगति की सवारियां और तरह-तरह के यान हैं। इन सब की तेज गति से भी लोग संतुष्ट नहीं हैं। कंप्यूटर के नामं से जो मशीन विज्ञान ने निकाली है, उसकी शक्ति, स्मृति और रफ्तार नित्य प्रति बढ़ती जा रही है। बटन दबाओ और सामने आ जाती हैं सारे ज्ञान-विज्ञान की चीजें। अब हमारे सारे ज्ञान-विज्ञान आसमान में बादलों की तरह विचरण कर रहे हैं। पाषाण युग से आधुनिक युग तक मानव की यात्रा में लाखों वर्ष लग गये। अब आज के मनुष्य में न वह धैर्य है और न समय। वाहनों की विकास यात्रा से हम मानव समाज की विकास यात्रा को बहुत हद तक समझ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले लोग पैदल चलते थे। फिर उन्होंने तरह तरह के जानवरों को अपना वाहन बनाया जैेसे हाथी, घोड़ा,गधा, ऊंट, याक और बैल आदि। फिर गाड़ियां बनी जिनमें इन मवेशियों को जोता गया। फिर साइकिल युग आया, रेलगाड़ी का युग आया, तरह तरह के मोटर साइकिलें व मोटर गाड़ियां सड़कों पर दौड़ने लगी मगर आदमी की भूख इनकी रफ्तार से मिटी नहीं। उन्होंने हवाई जहाज बनाया, पानी में तैरने वाले यान बनाए मगर उनसे उनका मन नहीं भरा तो वह ऐसे-ऐसे राकेट बनाने लगा हैं कि मंगल, चंद्र तक जा पहुंचे हैं। उनकी खोज जारी है। अब वे सूर्य फतह करने की तैयारी में हैं। वे ऐसे हवाई यान बनाना चाहते हैं कि ब्रह्मांड में बसी अनेकों दुनियां से हमारी पृथ्वी का संबंध ऐसा बने कि धरती आकाश घर आंगन सा हो जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">विज्ञान ने हमें अपना विस्तार करने के बहुत रास्ते दिये हैं। जब सड़कों पर चलने वाली मोटर साइकिल जहाज की तरह आसमान में उड़ेगी। अब धरती पर चलने वाली रेलगाड़ी से बहुत आगे बुलेट टेÑन भारत में चलेगी जिस पर जापान के साथ मिलकर काम हो रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि आज के मनुष्य को आवाज से भी अधिक तीव्र गति से चलने वाले वाहन भले ही प्राप्त हो जायें मगर रफ्तार के मामले में उसकी भूख प्यास मिटने वाली नहीं है। मुझे लगता है कि आने वाले वक्त में मनुष्य के शरीर में ही कोई मशीन फिट होगी जिसके बटन दबाने पर ही आदमी चिड़ियों की तरह बड़ी तीव्र गति से आसमान में उड़कर अपने गन्तव्य स्थान में पहुंच जाएगा। उस समय हम एक नई दुनियां के नये आदमी होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आदमी के विकास की रफ्तार में इतनी तेजी आई है कि दुनियां उसकी मुट्ठी में आ गई है। वह पलक मारते ही एक बटन दबाने पर जिस देश को देखना चाहे, जिस व्यक्ति से मिलना चाहे, अपने बिछावन पर पड़े पड़े अपने मोबाइल के स्क्रीन पर सब कुछ देख लेते हैं। विज्ञान ने लोगों के हाथ में मोबाइल पकड़ा दिया है। हम भले ही घर बैठे बैठे अपने मोबाइल या टीवी पर भले ही सारा ब्रह्यांड देख लें मगर एक ही छत के नीचे रहने वाले अपने माता-पिता को देख नहीं पाते। उनके मोबाइल पर भले ही उनके यार-‘ दोस्त आ जाये। उनके घरों के जश्नों के दृश्य उनके मोबाइल पर भले ही आ जायें मगर उनके माता-पिता के चित्र न उनके हृदय में हैं और न उनके मोबाइल पर।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले परिवार का अर्थ होता था- दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन मगर अब सारी दुनियां को अपनी मुट्ठी में लेकर चलने वालों का यह बड़ा परिवार कहां खो गया, पता नहीं चलता है। अब परिवार का मतलब है मियां-बीवी और दो बच्चे बस। सरकार कहती है छोटा परिवार, सुखी परिवार मगर आप अखबारों के पन्ने उलट कर देखिये और अपने पड़ोस में रहने वाले पड़ोसियों के घर देखिये तो मालूम पड़ेगा कि छोटे परिवारों में भी आग लगी है। वहां भी कलह-क्लेश का ऐसा तांडव होता है कि कोर्टं में तलाक के ढेर बढ़ते जा रहे हैं। इस वैज्ञानिक युग में मानवता, नैतिकता, विश्वास, बंधुत्व, विश्व शांति आदि की बड़ी आवश्यकता है क्योंकि आज विज्ञान ने ऐसे ऐसे विध्वंसक बमों और हथियारों का जखीरा बड़े -बड़े देशों के पास लगा दिया है कि यदि वे आपस में कभी भिड़ गये तो सारी दुनिया जलकर राख हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आइंस्टीन ने सच ही कहा था कि यदि कभी तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो आदमी उसी पाषाण युग में पहुंच जाएगा जहां उसने अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ की थी इसलिए हम विज्ञान के विरोध में खड़े नहीं हैं। उनकी उपलब्धियों के प्रति अनुग्रहीत हैं मगर विज्ञान के भौतिकीय विकास और विस्तार के साथ साथ मानवता और उसके गुण ,प्रेम, सहानुभूति, करूणा, श्रद्धा, बंधुत्व,अपनत्व, उत्सर्ग, राष्टÑ प्रेम, समाज प्रेम, परिवार प्रेम एक दूसरे के प्रति सेवा सहयोग और उत्तदायित्व का भी विस्तार होना चाहिए जो हमारी फास्ट लाइफ में लुप्त होता जा रहा है। हम अतीत की मर्यादा और वर्तमान के उत्तरदायित्व से विमुख होने लगे हैं। आप टेÑन में कहीं यात्रा कर रहे हैं तो खिड़की से बाहर नजर दौड़ाइये तो देखियेगा कि रेलगाड़ी हवा की तरह आगे उड़ी जा रही है और उसी रफ्तार में पीछे की दुनियां पीछे छूटती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के जीवन के दर्शन और चिंतन मनन ने आधुनिकता के नाम पर एक ऐसे बौने आदमी का अवतरण हो रहा है जिसमें आदमियत और नैतिकता का अभाव है, उसमें स्वार्थ और नफरत की बारूद भरी है। कहने का तात्पर्य यह है कि विज्ञान जिस नये आदमी की परिकल्पना साकार करना चाहता है, उसमें हमारे प्राचीन मूल्यों और मर्यादाओं का कोई मेल नहीं है। संयुक्त परिवार से लघु परिवार निकला और लघु परिवार पानी के बुलबुले की तरह विलुप्त होने लगा है। पति अमेरिका में काम कर रहा है। पत्नी लंदन में काम कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेटा कनाडा में पढ़ रहा है। बेटी स्विटजरलैंड में पढ़ रही है। अब बतलाइये इसको हम कैसा परिवार कहें। जिस तरह विज्ञान रोज नये-नये अनुसंधान कर रहा है। वैसा अनुसंधान मानव शास्त्र और समाज शास्त्र में नहीं हो रहा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारा सुपर फास्ट लाइफ जिस रफ्तार से चाहे बढ़े मगर, उसका संबंध घर’-परिवार, समाज और देश व दुनियां से बना रहे क्योंकि इस संबंध से टूटा हुआ आदमी कुछ भी बन जाये मगर वह आदमी बनकर नहीं रह पायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ज्योत्सना निधि</strong></p>
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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2017 03:10:58 +0530</pubDate>
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