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                <title>ayurveda - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>Eye Care Home Remedies: नजर कम हो रही है, नहीं दिखता बिना चश्मे के साफ, तो इस आयुर्वेदिक चीज को आजमाएं, महीनेभर में दिखने लगेगा फर्क</title>
                                    <description><![CDATA[Eye Care Home Remedies:  त्रिफला आयुर्वेद का एक लोकप्रिय उपाय है, जिसे आंखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों को स्वस्थ रखने में फायदेमंद माना जाता है। जानें त्रिफला के फायदे और इस्तेमाल का सही तरीका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/vision-is-deteriorating-and-cannot-be-seen-clearly-without-glasses/article-84435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/eye-care-home-remedies.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Eye Care Home Remedies: लैपटॉप और टीवी स्क्रीन देखने की वजह से बच्चों से लेकर युवाओं तक को चश्मा लग रहा है। ऐसे में लोग आंखों की रोशनी बढ़ाने के प्राकृतिक और असरदार उपाय तलाशते हैं। आयुर्वेद में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Triphala</span></span> को आंखों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। यह तीन आयुर्वेदिक फलों — आंवला, बिभीतक और हरड़ — का मिश्रण होता है।</p>
<h4>त्रिफला में मौजूद तीन चीजें और उनके फायदे | Eye Care Home Remedies</h4>
<h4 style="text-align:justify;">आंवला</h4>
<p style="text-align:justify;">आंवला विटामिन-C का बेहतरीन स्रोत माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके फायदे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>आंखों की थकान कम करने में मदद</li>
<li>आंखों की रोशनी सुधारने में सहायक</li>
<li>आंखों को पोषण देने में लाभकारी</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"> बिभीतक</h4>
<p style="text-align:justify;">बिभीतक आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके फायदे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>आंखों की सूजन कम करने में सहायक</li>
<li>संक्रमण से बचाव</li>
<li>दृष्टि सुधारने में मददगार</li>
</ul>
<h4> हरड़</h4>
<p style="text-align:justify;">हरड़ को आयुर्वेद में आंखों की मजबूती के लिए उपयोग किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके फायदे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाना</li>
<li>नजर तेज करने में मदद</li>
<li>आंखों को स्वस्थ बनाए रखना</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">आंखों के लिए त्रिफला के बड़े फायदे</h4>
<h4>आंखों की थकान कम करता है</h4>
<p style="text-align:justify;">नियमित सेवन से आंखों को आराम मिलता है और स्क्रीन टाइम से होने वाली थकान कम हो सकती है।</p>
<h4>नजर सुधारने में मदद</h4>
<p style="text-align:justify;">त्रिफला आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और दृष्टि बेहतर करने में सहायक माना जाता है।</p>
<h4>संक्रमण से बचाव</h4>
<p style="text-align:justify;">इसमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो आंखों को संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">त्रिफला का उपयोग कैसे करें?</h4>
<h4>त्रिफला चूर्ण</h4>
<p style="text-align:justify;">रात को सोते समय:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>1 चम्मच त्रिफला चूर्ण</li>
<li>गुनगुने पानी के साथ लें</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">यह पाचन और आंखों दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।</p>
<h4>त्रिफला काढ़ा</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li>1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी में रातभर भिगो दें</li>
<li>सुबह छानकर पी लें</li>
</ul>
<h4>त्रिफला आई वॉश</h4>
<p style="text-align:justify;">त्रिफला के छाने हुए काढ़े से आंखें धोने से जलन और सूजन में राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">⚠️ आंखों में कुछ भी इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जरूरी सावधानी</h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि त्रिफला आयुर्वेद में लाभकारी माना जाता है, लेकिन कमजोर नजर, आंखों में दर्द या लगातार धुंधला दिखने जैसी समस्याओं में विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। घरेलू उपाय इलाज का विकल्प नहीं होते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:49:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ayurveda :आयुर्वेद में छुपा है अनुवांशिक बीमारियों का उपचार </title>
                                    <description><![CDATA[– Ayurveda – देवीलाल बारना। आयुर्वेद (Ayurveda) में अनेकों ऐसी बीमारियों का इलाज छुपा हुआ है, जिसके लिए मरीज महंगे इलाज करवाने के बाद भी छुटकारा नहीं पा सकता। अनेकों ऐसे अनुवांशिक रोग हैं जो लाइलाज प्रतीत होते हैं, लेकिन आयुर्वेद उस बीमारी को जड़ से खत्म कर सकता है। ये रोग जन्म के साथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/genetic-diseases-treatment-by-ayurveda/article-56629"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/genetic-diseases.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3 style="text-align:center;"><strong>– Ayurveda –</strong></h3>
<p><strong>देवीलाल बारना।</strong> आयुर्वेद (Ayurveda) में अनेकों ऐसी बीमारियों का इलाज छुपा हुआ है, जिसके लिए मरीज महंगे इलाज करवाने के बाद भी छुटकारा नहीं पा सकता। अनेकों ऐसे अनुवांशिक रोग हैं जो लाइलाज प्रतीत होते हैं, लेकिन आयुर्वेद उस बीमारी को जड़ से खत्म कर सकता है। ये रोग जन्म के साथ ही व्यक्ति को लग जाते हैं। इनमें आमतौर पर गठिया रोग, गेहूं की एलर्जी, मुंह से लार का सूख जाना, आंखों से पानी सूख जाना, बालों का झड़ना, थकावट समेत 100 से भी ज्यादा ऐसे रोग हैं जिनसे बहुत से लोग परेशान हैं।</p>
<p>इसको लेकर <a href="http://10.0.0.122:1245/">सच कहूँ</a> संवाददाता ने श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजा सिंगला से विशेष बातचीत की। बता दें कि डॉ. राजा सिंगला पिछले 13 वर्षों से न्यूरोमस्कूलर, मस्कूलोस्केलेटल और ऑटोइम्यून पर काम कर रहे हैं और स्नोग्रेस सिंड्रोम जोकि एक लाइलाज ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, उसके 200 से अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके अलावा दूसरे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसे   तुपस, सोरिएसिस, मायोसिटिस आदि से पीड़ित मरीजों का भी इलाज कर चुके हैं।</p>
<h4><strong>सवाल: ओटोइम्यून डिसऑर्डर किसे कहते है?</strong></h4>
<p>जवाब : ओटोइम्यून डिसऑर्डर एक आनुवंशिक बीमारी है। हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बाहरी तत्वों से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है। आनुवंशिक बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करना शुरू कर देता है। आनुवंशिक बीमारी होने के मुख्य कारण हमारा विरूद्ध आहार विहार, खराब जीवन शैली और पर्यावरण भी हो सकता है। मुख्यत: 100 से ज्यादा प्रकार के ओटोइम्यून डिसऑर्डर पाए जाते हैं। जैसे कि स्जोग्रेन सिंड्रोम, पोलीमायो-साईड्स, लीयूपस, सीलयक डिस्सीस, रहूमटॉइड आर्थराइटिस, आंक्यलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस, इर्रिटबल बोवेल सिंड्रोम, टाइप 1 डायबिटीज व अन्य।</p>
<h4><strong>सवाल : कोविड के बाद से बढ़ते हुए आनुवंशिकी बीमारी के कारण?</strong></h4>
<p>जवाब : महामारी कोविड के बाद आनुवंशिक बीमारी में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि कोविड के समय में अत्यधिक स्टेरॉयड का प्रयोग करने से शरीर का इम्यून सिस्टम पर प्रभाव होता है। इम्यूनटी कम होने से आनुवंशिक बीमारियां ज्यादा देखने को मिल रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ओटो इम्यून डिसऑर्डर अधिक पाए जाते हैं।</p>
<h4><strong>सवाल: ओटोइम्यून डिसऑर्डर की पहचान कैसे करें?</strong></h4>
<p>जवाब : सबसे पहले मरीज की पूरी हिस्ट्री के साथ फिजिकल एग्जामिनेशन करनी होती है। शरीर में हिमोग्लोबिन का बार-बार कम होना ओटो इम्यून डिसऑर्डर की ओर संकेत करता है। विभिन्न प्रकार के ओटोइम्यून डिसऑर्डर का पता लगाने के लिए एक विशेष प्रकार की खून जांच एएनए टेस्ट करवाया जाता है।</p>
<h4><strong>सवाल: आयुर्वेद द्वारा ओटोइम्यून डिसऑर्डर को कैसे ठीक किया जाता है?</strong></h4>
<p>जवाब : आयुर्वेद में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले विभिन्न द्रव्यों का प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद (Ayurveda) संहिता में वर्णित विभिन्न कल्प जैसे कषाय, रस औषधियां, सत्व इनके साथ-साथ विभिन्न प्रकार के बस्ति के द्वारा ओटो इम्यून डिसऑर्डर को ठीक किया जाता है। आयुर्वेद संहिता में वर्णित दिनचर्चा, ऋतुचर्या एवं सद्युत के पालन के द्वारा आनुवंशिक बीमारियों से बचा जा सकता है।</p>
<h4><strong>सवाल: आप आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में किन-किन ओटोइम्यून डिसऑर्डर पर काम कर रहे हैं?</strong></h4>
<p>जवाब: लगभग 10-15 मरीज ओटोइम्यून से प्रसित भरी हर ओपीडी में आ रहे हंैं। इसमें मुख्यत: संधिशोथ, स्जोग्रेन सिंड्रोम, ल्यूपस, सीलिएक रोग, चिड़चिड़ा, आंत्र सिंड्रोम आदि हैं। इनमें से स्जोग्रेन सिंड्रोम का पूरे विश्व में कोई सक्षम इलाज नहीं है। हमारे पास स्जोग्रेन सिंड्रोम के 200 से भी ज्यादा केस चल रहे हैं। 40-50 मरीज का इलाज सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ है। अब उन मरीजों के मुंह में बिना दवाई के लार, आंखों में आंसू प्राकृतिक रूप से बन रहे हैं। आयुर्वेद संहिताओं में ऑटोइम्यून डिऑर्डर का सीधा सम्बन्ध नहीं पाया जाता है, पर लक्षणों के आधार पर ऑटोइम्यून डिस्आॅर्डर का वातरक्त से संबंध पाया जाता है। उसके अनुसार संहिताओं का अध्ययन किया गया है।</p>
<h4><strong>सवाल: ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में कौन सा पंचकर्म करवाना चाहिए?</strong></h4>
<p>जवाब: पंचकर्म शरीर का शोधन करने की प्रक्रिया है जिसमें मेडिकेटिड घी पिलाकर नियंत्रित दस्त लगवाए जाते हैं जिसे विरेचन के नाम से जाना जाता है और कुछ आयुर्वेद कषाय ऐसे होते हैं जिन्हें एनल रूट के द्वारा शरीर में प्रवेश कराया जाता है जैसे बस्ति प्रक्रिया। ऐसे कुछ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जिनमें विशेषत: पंचकर्म करवाया जाता है जैसे स्जोग्रेन सिंड्रोम में नेत्रधारा, नेत्र तर्पणा सोरायसिस में तक्रधारा, लयूपस में शिरोधारा आदि शामिल हैं।</p>
<h4><strong>सवाल: स्जोग्रेस सिंड्रोम के लिए महत्वपूर्ण सलाह क्या है?</strong></h4>
<p>जवाब: इसके लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जिसमें दिन के समय ना सोना। रात में देर तक न जागना। दही से बने किसी पदार्थ का सेवन ना करना। अभिष्यंदी आहार का सेवन न करना। धूम्रपान व शराब का सेवन न करना। मैदे से बने किसी भी आहार का सेवन न करना। मीठे का अधिक सेवन न करना शामिल है।</p>
<h4><strong>सवाल: क्या एक व्यक्ति में एक से अधिक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर हो सकते हैं?</strong></h4>
<p>जवाब: हाँ, एक व्यक्ति में एक साथ एक से अधिक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर हो सकते हैं। हमारे पास कुछ मरीज ऐसे हैं जिनको स्जोग्रेन सिंड्रोम के साथ-साथ गठिया, लुपस, सीलिएक डिसऑर्डर भी हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Apr 2024 10:30:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आयुर्वेद छात्रों को शोध के लिए मिलेंगे 50 हजार रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहन देने के लिए को आयुर्वेद स्नातक के छात्रों को 50 हजार रुपए की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की है। सीसीआरएएस ने शुक्रवार को यहां कहा कि मान्यता प्राप्त संस्थान में अध्ययन कर रहे आयुर्वेद (बीएएमएस) के छात्रों को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ayurveda-students-will-get-50-thousand-rupees-scholarship-for-research/article-37359"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/scholarship.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहन देने के लिए को आयुर्वेद स्नातक के छात्रों को 50 हजार रुपए की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की है। सीसीआरएएस ने शुक्रवार को यहां कहा कि मान्यता प्राप्त संस्थान में अध्ययन कर रहे आयुर्वेद (बीएएमएस) के छात्रों को यह वित्तीय मदद उपलब्ध होगी। आयुष मंत्रालय के विशेष सचिव प्रमोद कुमार पाठक ने राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग के अध्यक्ष वैद्य जयंत यशवंत देवपुजारी और प्रो. संजीव शर्मा की उपस्थिति में छात्रवृत्ति योजना और संबंधित पोर्टल का लोर्कापण भुवनेश्वर किया।</p>
<p style="text-align:justify;">परिषद रोमानिया, जर्मनी, इजराइल, अमेरिका, कनाडा और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख शोध संस्थानों के सहयोग से अनुसंधान और विकास परियोजनाओं पर काम कर रही है 11 देशों में आयुर्वेद पीठ की स्थापना की है। छात्रवृत्ति के लिए छात्रों को पोर्टल के माध्यम से अपने शोध प्रस्ताव भेजने की आवश्यकता होगी। प्रख्यात विशेषज्ञ और समीक्षक इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे। प्रारंभ में प्रति सत्र कुल 100 सीटें होंगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Sep 2022 07:50:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आयुर्वेद दिवस पर एक नवंबर को राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर एक नवंबर से दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसमें दो नवंबर को मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय आयुष मंत्री सरबानंद सोनोवाल, केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री डा मुंजपारा महेंद्रभाई एवं आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा शिरकत करेंगे। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/national-seminar-on-ayurveda-day-organized-on-november-1/article-28036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/yoga-and-ayurveda.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान की राजधानी जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर एक नवंबर से दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसमें दो नवंबर को मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय आयुष मंत्री सरबानंद सोनोवाल, केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री डा मुंजपारा महेंद्रभाई एवं आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा शिरकत करेंगे। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो संजीव शर्मा ने बताया कि संस्थान द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें एक नवम्बर को राष्ट्रीय स्तर की सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। कोटेचा इसके मुख्य अतिथि होंगे। इस सेमिनार का विषय- पोषण के लिए आयुर्वेद रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सेमिनार में जन सामान्य भी भाग ले सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं। इस सेमिनार में आयुर्वेदिक आहार के फ़ायदे, आहार से जुड़े तथ्य, रक्ताल्पता में आहार आदि विषय सामान्य भाषा में बताये जाएँगे । विशेषज्ञों द्वारा पोषक आहार बनाने की ज़रूरी जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दोनों दिन एक आयुर्वेदिक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें आयुर्वेद के पोषक पदार्थों का प्रदर्शन एवं बिक्री की जाएगी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दूसरे दिन दो नवम्बर के मुख्य कार्यक्रम में गहलोत, सोनोवाल, मुंजपारा एवं कोटेचा शिरकत करेंगे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Oct 2021 11:43:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जानें, आयुर्वेद के प्रति युवाओं में क्यों बढ़ रहा रुझान?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। आयुर्वेद आधारित हेल्थ स्टार्टअप ऑरिक ने 20 लाख डॉलर के एक प्री.सीरीज ए फंडिंग राउंड की घोषणा की। ऑरिक के संस्थापक दीपक अग्रवाल ने सफल फंड रेज के बारे में कहा,‘तीन साल पहले अपनी स्थापना के बाद से हम आयुर्वेद को 21वीं सदी के युवाओं की दैनिक जीवन शैली में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/know-why-there-is-a-growing-trend-among-the-youth-towards-ayurveda/article-25964"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/ayurved-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आयुर्वेद आधारित हेल्थ स्टार्टअप ऑरिक ने 20 लाख डॉलर के एक प्री.सीरीज ए फंडिंग राउंड की घोषणा की। ऑरिक के संस्थापक दीपक अग्रवाल ने सफल फंड रेज के बारे में कहा,‘तीन साल पहले अपनी स्थापना के बाद से हम आयुर्वेद को 21वीं सदी के युवाओं की दैनिक जीवन शैली में शामिल करने के अपने मिशन में दृढ़ रहे हैं। हम देश की नई पीढ़ी को उस प्राचीन ज्ञान के साथ सशक्त बनाने के विचार के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, जो उनके लिए लाभदायक है। इस बार जुटाई गई धनराशि वास्तव में हमें अपने आसपास के लोगों के मन, शरीर और आत्मा को फिर से जोड़ने की दिशा में एक कदम और करीब लाने में सहायक साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑरिक कंज्यूमर गुड्स और सप्लीमेंट्स के मिश्रण के क्षेत्र में बड़े-प्रीमियम सेगमेंट में काम करता है। इसके पास आयुर्वेद से प्रेरित ड्रिंक्स की एक विशिष्ट श्रृंखला उपलब्ध है, जिसमें सुंदरता और स्वास्थ्य के लिए नारियल पानी से बने पेय, स्वस्थ त्वचा, संतुलित वजन और मजबूत बालों के लिए पेय कुछ उदाहरण हैं। कंपनी ने आयुर्वेद पर आधारित गरम पेय जैसे कि मोरिंगा मसाला चाय, टर्मरिक कॉफी और अश्वगंधा हॉट चॉकलेट की भी शुरूआत की है।</p>
<p style="text-align:justify;">निवेश के बारे में बोलते हुए कैक्टस वेंचर पार्टनर्स के जनरल पार्टनर अनुराग गोयल ने कहा, ‘हम आधुनिक डिजिटल और वितरण ढांचे का लाभ उठाते हुए आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय तकनीकों को मिलेनियल्स के लिए सुलभ बनाने के दीपक के विजन से उत्साहित हैं। यह एक कोविड-19 के बाद की दुनिया में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां अब खपत स्वास्थ्य और कल्याण के लक्ष्यों से अधिक प्रेरित हो रही है। हम ऑरिक टीम के साथ इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं और हमें विश्वास है कि ऑरिक के पास विश्व स्तर पर एक अग्रणी आयुर्वेद ब्रांड बनने के लिए आधार उपलब्ध हैं।</p>
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                                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 18:15:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>योग और आयुर्वेद को शामिल किया गया कोरोना उपचार में</title>
                                    <description><![CDATA[सहारनपुर। आखिरकार आठ माह बाद सरकार को योग व आयुर्वेद को कोविड 19 के उपचार के प्रोटोकॉल में शामिल करने का ध्यान आ ही गया । सारी दुनिया भारत में उपजे योग से प्रभावित है । योग शरीर को शक्ति, उर्जा, स्फूर्ति, सकारात्मक्ता , ओजस्विता प्रदान करता है व स्वास्थ्य को नयी दिशा देता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/yoga-and-ayurveda-are-included-in-corona-treatment/article-22278"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/yoga-and-ayurveda.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सहारनपुर।</strong> आखिरकार आठ माह बाद सरकार को योग व आयुर्वेद को कोविड 19 के उपचार के प्रोटोकॉल में शामिल करने का ध्यान आ ही गया । सारी दुनिया भारत में उपजे योग से प्रभावित है । योग शरीर को शक्ति, उर्जा, स्फूर्ति, सकारात्मक्ता , ओजस्विता प्रदान करता है व स्वास्थ्य को नयी दिशा देता है । योग गुरु गुलशन कुमार ने आज यहां कहा कि यही ख्याल देश कॆ स्वास्थ्य मंत्रालय व आयुष विभाग का उस समय आ जाता जब भारत में कोविड 19 की शुरुआत हुई थी। अगर उसवक्त योग व आयुर्वेद को कोरोना के प्रोटोकॉल में शामिल किया जाता है तो परिणाम अधिक सकारात्मक होते। उन्होंने कहा कि भारत के योग को पूरे विश्व में सराहा जाता रहा है । इस कोविड 19 काल में भारत दुनिया में एक मिसाल बन कर उभरकर आ सकता था यदि योग को अनिवार्य रूप से करने की बात कही जाती ।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जितना मास्क लगाने का प्रचार प्रसार पर जोर दिया गया उतना योग कराने पर जोर दिया जाता , प्रकृति के बारे में बताया जाता कि सुबह उठ कर उपासना कनी है ,सूर्य की किरणों का स्नान करना है, शरीर की आन्तरिक शुद्धि करनी है तो परिणाम ज्यादा सकारात्मक होते । मंत्र उच्चारण करते हुए सूर्य नमस्कार, यौगिक सूक्ष्म क्रियाएँ, आसन, प्राणायाम व ध्यान आदि करने के पश्चात आयुर्वेद का काढा दिया जाता तो शायद कोरोना से लडने की क्षमता अधिक बेहतर होती। योगी ने कहा कि यदि कोराना से लड़ने के लिए भारत अपना प्रोटोकॉल विश्व को दे तो तो पूरे विश्व में योग ,ध्यान व आयुर्वेद से लोगों में नयी आशा का संचार होगा। विश्व भारत की आध्यात्मिकता, आयुर्वेद ,योग के प्रति आस्थावान है। आखिर ऐसा क्यो हैं कि हमारा देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के थोपे प्रोटोकॉल को मानने के लिए बाध्य है।</h6>
<h6></h6>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Mar 2021 16:04:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आयुर्वेद को वैज्ञानिक रुप से प्रमाणिक बनाना होगा: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद(Ayurveda) को वैज्ञानिक रुप से प्रमाणिक बनाने पर बल देते हुए रविवार को कहा कि भारत ने अपनी संस्कृति के अनुरुप ही कोरोना महामारी के इस वैश्विक संकट में दुनिया के हर जरुरतमंद देश को दवाईयां उपलब्ध करायी हैं। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ayurveda-will-have-to-be-scientifically-certified-modi/article-14781"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/ayurved.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद(Ayurveda) को वैज्ञानिक रुप से प्रमाणिक बनाने पर बल देते हुए रविवार को कहा कि भारत ने अपनी संस्कृति के अनुरुप ही कोरोना महामारी के इस वैश्विक संकट में दुनिया के हर जरुरतमंद देश को दवाईयां उपलब्ध करायी हैं। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दूसरे खंड की 11 वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुुए कहा कि भारत ने अपने संस्कारों और सोच के अनुरूप विदेशों को दवा भेजने का फैसला किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होेंने कहा, “ संकट की इस घड़ी में, दुनिया के लिए भी, समृद्ध देशों के लिए भी, दवाईयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है। एक ऐसा समय है की अगर भारत दुनिया को दवाईयां न भी दे तो कोई भारत को दोषी नहीं मानता। हर देश समझ रहा है कि भारत के लिए भी उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों का जीवन बचाना है। लेकिन भारत ने, प्रकृति, विकृति की सोच से परे होकर फैसला लिया। भारत ने अपने संस्कृति के अनुरूप फैसला लिया।”</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस समय दुनिया-भर में भारत के आयुर्वेद और योग के महत्व को भी लोग बड़े विशिष्ट-भाव से देख रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">हर तरफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भारत के आयुर्वेद और योग की चर्चा हो रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">कोरोना की दृष्टि से, आयुष मंत्रालय ने प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सुझाव दिये हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">गर्म पानी, काढ़ा और अन्य दिशा-निर्देश से बहुत लाभ होगा।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">उन्होेंने कहा, “ वैसे ये दुर्भाग्य रहा है कि कई बार हम अपनी ही शक्तियाँ और समृद्ध परम्परा को पहचानने से इंकार कर देते हैं। लेकिन, जब विश्व का कोई दूसरा देश ठोस साक्ष्यों के आधार पर वही बात करता है। हमारा ही गुर हमें सिखाता है, तो हम उसे हाथों-हाथ ले लेते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2020 14:47:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जन-जन समझे आयुर्वेद की महत्ता Importance of Ayurveda in Hindi</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार ने धनवंतरी जयंती (28 अक्तूबर) को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है, जोकि एक सराहनीय कदम है। धनवंतरी आयुर्वेद (Ayurveda) के प्रवर्तक थे। उन्होंने ब्रह्मा जी के द्वारा अवतरित आयुर्वेद के ज्ञान को इंद्र देवता से प्राप्त किया और सृष्टि में फैली अनेक प्रकार की बीमारियों के अंत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/understanding-the-importance-of-ayurveda/article-3464"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/ayurved.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने धनवंतरी जयंती (28 अक्तूबर) को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है, जोकि एक सराहनीय कदम है। धनवंतरी आयुर्वेद (<strong>Ayurveda</strong>) के प्रवर्तक थे। उन्होंने ब्रह्मा जी के द्वारा अवतरित आयुर्वेद के ज्ञान को इंद्र देवता से प्राप्त किया और सृष्टि में फैली अनेक प्रकार की बीमारियों के अंत का रास्ता बनाया। आयुर्वेद जोकि सास्वत सत्य व अनादि है तथा स्वयं ब्रह्मा जी ने प्राणी मात्र के कल्याण के लिए इसको मृतलोक में देवताओं के माध्यम से भेजा था। लेकिन आज ये चिकित्सा पद्धति उपेक्षा का शिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय प्राचीन संस्कृति का लोहा पूरा विश्व मानता था। विशेषकर भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को सीखने के लिए पूरे विश्व से यहां पर चिकित्सक आते थे। चीन से महर्षि पैंगी, यूरोप से महर्षि हरियाण्क्ष इसके प्रमुख उदाहरण हैं। उस समय आयुर्वेद के द्वारा ही असाध्य से असाध्य बीमारियों को बड़ी आसानी से ठीक कर दिया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">धनवंतरि के शिष्य महर्षि सुश्रुत ही शल्य चिकित्सा के जनक थे तथा आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी उन्हें स्पष्ट रूप से शल्य चिकित्सा के प्रथम स्त्रोत व पितामह के रूप में पूजता है। जिस प्लास्टिक सर्जरी पर हम आज काम करके इतराते हैं, आज से हजारों साल पहले महर्षि सुश्रुत ने प्लास्टिक सर्जरी में बहुत बड़े-बड़े चमत्कार करके दिखाए थे। जहां अभी तक आधुनिक चिकित्सा विज्ञान नहीं पहुंच पाया।</p>
<h2>आयुर्वेद कैसे काम करता है? How Ayurveda Works?</h2>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद महाविज्ञान है। इसमें प्रतिपादित सिद्धांत शाश्वत, सत्य व सर्वभोमिक है। इसमें परिवर्तन की कोई गुंजाइश नहीं है। जिस प्रकार आयुर्वेद पंच महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश) के सिद्धांत पर काम करता है तथा त्रिदोष (वात, पित व कफ) के माध्यम से प्राणी मात्र की चिकित्सा करता है, वह आज के आधुनिक विज्ञान से कहीं ज्यादा वैज्ञानिक व सफल है।</p>
<h2>Ayurved Ke Fayde</h2>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद न केवल बीमार व्यक्ति का इलाज करता है, अपितु यह स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करके उसे बीमार ही न होने दिया जाए, इस बात पर ज्यादा जोर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में जिस प्रकार अनेक असाध्य बीमारियां जैसे मधुमेह, कैंसर, एड्स, जोड़ों का दर्द, ब्लड प्रेशर, हदय रोग आदि का यदि हम स्थायी हल चाहते हैं, तो यह केवल आयुर्वेद से ही संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद के आठ विभागों में काया चिकित्सा, बाल चिकित्सा, गृह चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, शालाक्य चिकित्सा, विष चिकित्सा, जरा चिकित्सा, वाजीकरण चिकित्सा में हजारों संस्कृत के श्लोकों के माध्यम से विभिन्न असाध्य रोगों की चिकित्सा का विवरण दिया गया है। आज उस पर शोध करना अति जरुरी है, ताकि बढ़ती बीमारियों का स्थाई हल हो सके। भारत सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुर्वेद पद्धति में लगातार शोध करने की दिशा में प्रयास किया है, लेकिन हमें इससे कहीं आगे बढ़कर सोचना व काम करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ समय के लिए तत्काल आराम पहुंचाने वाली चिकित्सा प्रणाली एलोपैथी का अपना महत्व है। परंतु उससे होने वाले दुषप्रभावों की उपेक्षा करना अपने-आपको धोखे में रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार में मिलने वाली एंटीबायोटिक दवाइयां इंजेक्शन, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुक्सान पहुंचाते हैं तथा रोगों के कारणों को मिटाने की बजाए उनको दबाने व अन्य रोगों के रूप में प्रकट करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं, इनके अधिक प्रयोग से कभी भी भविष्य में अधिक घातक परिणाम होने की संभावना बनी रहती है। ये दवाइयां रोगी के लिए जीवन का अंग बन जाती हैं। इनके छोड़ते ही बीमारी अपना उग्र रूप धारण कर लेती है।</p>
<h2>आयुर्वेद किसी भी प्रतिकूल प्रभाव के बिना इलाज कर सकता है</h2>
<p style="text-align:justify;">वहीं आयुर्वेद व योग के माध्यम से असाध्य बीमारियों को भी बिना किसी दुष्परिणाम के आसानी से ठीक किया जा सकता है, लेकिन जन-साधारण की ऐसी मान्यता हो गई है कि जितना महंगा उपचार होता है, चिकित्सक की फीस जितनी ज्यादा होती है, उतना ही उपचार को प्रभावशाली मानते हैं। वास्तव में एलोपैथी चिकित्सा प्रणाली का आधार वैज्ञानिक तो है ही, साथ ही विज्ञापन पर ज्यादा केंद्रित है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मुनाफाखोरों का ऐसा सुगम व सस्ता व्यवसाय बन चुका है, जिसमें रोगी को मात्र ग्राहक समझकर उससे पैसा कमाना ही अपना ध्येय समझते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल देश में जहां विभिन्न वनस्पति प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, यहां पर आयुर्वेद के फलने-फूलने की असीम संभावनाएं हैं। विविधताओं से भरे हमारे देश में केवल आयुर्वेद व योग के माध्यम से ही लोगों को स्वस्थ रखा जा सकता है। जिस प्रकार प्राचीन समय में भारतीय चिकित्सा आयुर्वेद पद्धति का डंका बजता था, वो आज भी संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सरकार इस दिशा में जोर-शोर से कदम उठाए तो भारत सरकार आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करके ज्यादा से ज्यादा बजट आयुर्वेद को देकर देश व समाज का भला करने में कोई विलंब न करे।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में आयुर्वेद दिवस का प्रयोजन तभी सफल माना जाएगा, जब यह चिकित्सा पद्धति न केवल भारत, बल्कि समस्त विश्व में अपना परचम लहराकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक डॉ. जितेंद्र गिल</strong></p>
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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2017 03:30:58 +0530</pubDate>
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