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                <title>Major - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Lohri festival : जानें क्यों जलाई जाती है आग और कौन था ‘दुल्ला भट्टी’</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ परिवार अपने सभी पाठकों को लोहड़ी पर्व (Lohri festival ) की शुभकामनाएं देता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-is-a-major-festival-of-punjab-and-haryana/article-12451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/happy-lohri.jpg" alt=""></a><br /><h3>नवविवाहित दंपति और नवजात शिशु के लिए के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है लोहड़ी पर्व | Lohri festival</h3>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ डेस्क।</strong> सबसे पहले तो सच कहूँ परिवार अपने सभी पाठकों को लोहड़ी पर्व <strong>(Lohri festival )</strong> की शुभकामनाएं देता है। सच कहूँ डेस्क आज पाठकों को  इस पर्व की महत्वता और इतिहास क्या है इसके बारे में बतायेगा। लोहड़ी पंजाब और हरियाणा का प्रमुख त्योहार है। हर साल 13 जनवरी को देशभर में धूमधाम से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। यह फसल से जुड़ा हुआ त्योहार है और इस दिन सिख लोग फसल पकने की खुशी मनाते हैं। यह त्योहार नवविवाहित दंपति और घर आए नवजात शिशु के लिए के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन शाम को लकड़ियों की ढेरी पर लोहड़ी जलाई जाती है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में नववधू और बच्चे की पहली लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इस दिन अग्नि के चारों ओर खड़े होकर लोकगीत गाए जाते हैं और नए धान के साथ खील, मक्का, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अग्नि में अर्पित की जाती हैं। अग्नि के चारों तरफ परिक्रमा भी की जाती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दुल्ला भट्टी से जुड़ी ये लोककथा है प्रचलित</h2>
<p style="text-align:justify;">वैसे तो लोहड़ी को लेकर दक्ष और भगवान कृष्ण से जुड़ी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। लेकिन एक और मान्यता है जो अकबर के शासन काल के दौरान की है। कहा जाता है कि अकबर के शासन काल में दुल्ला भट्टी नाम का एक शख्स था जो कि पंजाब प्रांत में रहता था। दुल्ला भट्टी बहादुर योद्धा था। संदलबार नाम की एक जगह थी जहां गरीब घर की लड़कियों को अमीरों को बेच दिया जाता था। यह जगह अब पाकिस्तान में है। यहां एक किसान सुंदरदास रहता था जिसकी दो बेटियां सुंदरी और मुंदरी थीं। गांव का ठेकेदार जो कि मुगल था, सुंदरदास को खुद से बेटियों की शादी कराने के लिए धमाकता है। जब यह बात दुल्ला भट्टी को पता चली तो उसने ठेकेदार के खेत जला दिए और सुंदरी और मुंदरी की शादियां वहां करवाई जहां उनका पिता चाहता था। तभी से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लोहड़ी पर क्यों जलाते हैं आग ?</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह आग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>निराश होकर सती ने पिता से पूछा कि उन्हें और उनके पति को इस यज्ञ में निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इस बात पर अहंकारी राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इससे सती बहुत आहत हुईं और क्रोधित होकर खूब रोईं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उनसे अपने पति का अपमान देखा नहीं गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>तब से माता सती की याद में आग जलाने की परंपरा है।</strong></li>
</ul>
<p><strong>पौराणिक कथा अनुसार</strong></p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>लोहड़ी का पावन लोक गीत </strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो,<br />
दुल्ला भट्ठी वाला हो, दुल्ले दी धी व्याही हो,<br />
सेर शक्कर पाई हो, कुड़ी दे जेबे पाई हो,<br />
कुड़ी दा लाल पटाका हो, कुड़ी दा सालू पाटा हो,<br />
सालू कौन समेटे हो, चाचे चूरी कुट्टी हो,<br />
जमीदारां लुट्टी हो, जमीदारां सदाए हो,<br />
गिन-गिन पोले लाए हो, इक पोला घट गया,<br />
जमींदार वोहटी ले के नस गया, इक पोला होर आया,<br />
जमींदार वोहटी ले के दौड़ आया,<br />
सिपाही फेर के लै गया, सिपाही नूं मारी इट्ट, भावें रो ते भावें पिट्ट,<br />
साहनूं दे लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी..</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 12:27:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन में नया नियम: टैक्स नहीं चुकाया तो नहीं छोड़ पाएंगे देश</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग (एजेंसी)। नए साल से चीन की टैक्स कलेक्शन अथॉरिटी ने नया नियम बनाया है। इस नियम के तहत ऐसा कोई भी बिजनेसमैन, कंपनी या व्यक्ति जिस पर किसी भी तरह का टैक्स बकाया हो, वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा। इस डेटाबेस को पुलिस, बैंक, इमिग्रेशन, पासपोर्ट, एयपोर्ट और सी-पोर्ट जैसे विभागों के साथ भी साझा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/china-major-tax-evaders-can-not-leave-country/article-7152"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/tax.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग (एजेंसी)।</strong> नए साल से चीन की टैक्स कलेक्शन अथॉरिटी ने नया नियम बनाया है। इस नियम के तहत ऐसा कोई भी बिजनेसमैन, कंपनी या व्यक्ति जिस पर किसी भी तरह का टैक्स बकाया हो, वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा। इस डेटाबेस को पुलिस, बैंक, इमिग्रेशन, पासपोर्ट, एयपोर्ट और सी-पोर्ट जैसे विभागों के साथ भी साझा किया जाएगा। ये सभी विभाग इन बकायदारों पर नजर रखेंगे। ऐसे लोगों को देश छोड़ने की इजाजत भी नहीं होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शुरू में 10 लाख से ज्यादा टैक्स के बकाएदारों पर होगी कार्रवाई</h2>
<p style="text-align:justify;">नए नियम के दायरे में शुरुआत में ऐसे कारोबारी, कंपनियां और नौकरीपेशा लोग आएंगे, जिन पर 1 लाख युआन (10.26 लाख भारतीय रुपये) का टैक्स बाकी है। ऐसे बकायदारों की सभी जानकारी मसलन आई कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर और पासपोर्ट डिटेल्स को टैक्स अथॉरिटी अपने ब्लैकलिस्ट डेटाबेस में डाल देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विदेशी कर्मचारियों और विदेश में काम कर रहे चीनी नागरिक भी दायरे में</h3>
<p style="text-align:justify;">नए कानून के तहत अगर कोई विदेशी नागरिक अपने कारोबार या फिर नौकरी के सिलसिले में चीन में 183 दिन से ज्यादा ठहरता है तो वो उसकी पूरी कमाई टैक्स के दायरे में होगी। हालांकि इस प्रावधान पर अमेरिका और हॉन्गकॉन्ग ने विरोध जताया है। इनके अलावा विदेश में नौकरी कर रहे चीनी नागरिकों को भी चीन में इनकम टैक्स देना होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चीन में सिर्फ 2 फीसदी लोग देते हैं टैक्स</h2>
<p style="text-align:justify;">चीन की आबादी 138 करोड़ है। इनमें से 2.8 करोड़ लोग ही टैक्स देते हैं। अब टैक्स डिपार्टमेंट सरकारी आय बढ़ाने के लिए टैक्स दरें बढ़ाने की बजाय टैक्स कलेक्शन बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 09:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्य मंत्री के शहर में निकाला विशाल रोष मार्च</title>
                                    <description><![CDATA[पटियाला (खुशवीर सिंह तूर)। राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के अंतर्गत लाखों बच्चों के भूखे पेट को भरने वाली कुक वर्करों ने साल के दस महीने मिलते मामूली माणभत्तों व अन्य सुविधाआें की कमी के द्वारा की जा रही आर्थिक लूट के विरुद्ध मिड-डे-मील कुक वर्कर व कार्यालयी कर्मचारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/major-rage-march-in-the-city-of-chief-minister/article-3910"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/mh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (खुशवीर सिंह तूर)। </strong>राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के अंतर्गत लाखों बच्चों के भूखे पेट को भरने वाली कुक वर्करों ने साल के दस महीने मिलते मामूली माणभत्तों व अन्य सुविधाआें की कमी के द्वारा की जा रही आर्थिक लूट के विरुद्ध मिड-डे-मील कुक वर्कर व कार्यालयी कर्मचारी यूनियन पंजाब के बैनर तले बड़ा क्षेत्रीय प्रदर्शन कर सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य मंत्री के चुनाव हलके वाले नेहरू पार्क में एकत्रित सैंकड़ों कुक वर्करों व कार्यालयी कर्मचारियों ने प्रवीण शर्मा, लखविन्दर कौर फरीदकोट व पिंकी के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की व शहर में विशाल रोश मार्च निकाला गया। इस मौके तहसीलदार प्रितपाल सिंह ने प्रशासन की तरफ से ज्ञापन प्राप्त करते मुख्य मंत्री के सलाहकार एमपी सिंह के साथ 5 जून को चण्डीगढ़ में बातचीत करवाने का लिखित न्यौता दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके नेताओं ने बताया कि स्कूलों में काम करते मिड-डे -मील व पार्ट टाईम सफाई वर्करों को कम से कम उजरतों के कानून नीचे लाकर प्रति माह क्रमवार 8403 व 7623 रुपये वेतन देना, पूर्ण सेवा शर्तों के अंतर्गत भर्ती मिड-डे-मील कार्यालयी कर्मचारियों की सेवाओं को तुरंत रेगुलर करने, 10 साल की सेवा पूरी कर चुके वर्करों को शिक्षा विभाग के कर्मचारी मान कर पक्का करने, मिड-डे-मील कुक वर्करों को साल में 10 माह का वेतन देने बजाय 12 माह का वेतन देने, वर्करोंक को नियुक्ति पत्र, ईएसआई सुविधा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राविडेंट फंड, मुफ़्त बीमा, सभी तरह की अचानक छुट्टी, मेडीकल छुट्टियां व 6 माह की प्रसूता को छुट्टी देने की मांग को अनदेखा करने के कारण राज्य में पचास हजार के करीब कुक वर्करों व कार्यालयी कर्मचारियों का गुस्सा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस मौके करमजीत कौर बठिंडा, आशा देवीगढ़, करमजीत कौर, गुलजार कौर, हरदीप सिंह, कुलदीप गोबिन्दपुरा, अमनदीप सिंह देवीगढ़, सुदेश कुमारी, चरनजीत कौर, परमजीत कौर, गुरप्रीत कौर , प्यारा सिंह, अंग्रेज सिंह, हरविन्दर, जगतार आदि उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jun 2018 12:20:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रदूषण बना एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण हमारे देश के लिए एक बड़ी व भयानक समस्या बन कर उभर रहा है। एक विश्व प्रसिद्ध सर्वे के दौरान इस बात का खुलासा होने के बाद अब सभी को इस समस्या की ओर ध्यान देना चाहिए कि 2015 में दुनिया में प्रदूषण के कारण सबसे अधिक मौतें भारत में ही हुई हैं लेकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/a-major-national-problem-making-pollution/article-3470"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/polluction.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रदूषण हमारे देश के लिए एक बड़ी व भयानक समस्या बन कर उभर रहा है। एक विश्व प्रसिद्ध सर्वे के दौरान इस बात का खुलासा होने के बाद अब सभी को इस समस्या की ओर ध्यान देना चाहिए कि 2015 में दुनिया में प्रदूषण के कारण सबसे अधिक मौतें भारत में ही हुई हैं लेकिन लगता है अभी न तो सरकारें व न ही लोग इस दिशा में अपने दृढ़-इच्छाशक्ति के साथ कोई ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हैं। अगर सरकार कोई ठोस कदम उठाती भी है तो आमजन कानूनों को कैद या अपने ऊपर बोझ समझकर इनसे किनारा कर लेते हैं। अभी तक दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित महानगरों में शुमार दिल्ली में सुधार नहीं हो पाया है, छोटे-बड़े शहरों व गांवों में इस संबंधी कोई आशा रखना बहुत ही मुश्किल है। यह भी समस्या है कि ऊंचे स्तर पर तालमेल या सांझे कार्यक्रम की बहुत बड़ी कमी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालतें कोई आदेश जारी करती हैं लेकिन सरकार मौके पर तैयार नहीं होती। सरकारों को फटकार लगती है, जवाब मांगा जाता है लेकिन परिणाम न के बराबर में ही सामने आते हैं। अब दिल्ली प्रदूषण कन्ट्रौल बोर्ड ने डीजल वाले जनरेटर चलाने पर पाबंदी लगा दी है। फैसला सराहनीय है लेकिन इसे तुरंत प्रभाव से लागू करना कोई आसान बात नहीं है। खासकर लोगों की मानसिकता व जीवन शैली इसे तुरंत प्रभाव से स्वीकार नहीं करती। इससे पहले आड-ईवन का तर्जुबा भी किया गया, लेकिन कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल बुनियादी ढ़ांचे में बड़े परिवर्तन के बिना प्रदूषण को कम करना इतना आसान नहीं है। साथ ही आमजन पर कोई आदेश थोपने की बजाए उसके लिए जन जागरूकता पैदा करनी चाहिए ताकि आमजन इसे अपनी भलाई समझ कर स्वीकार करे। संवैधानिक संस्थाओं के दरमियान प्रदूषण संबंधी अंतर-विरोधों को खत्म करना पड़ेगा। पता नहीं चल रहा कि कौनसी दिशा अपनाई जाए। राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यून के अनुसार पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही हो। दूसरी तरफ हाईकोर्ट ने किसानों के खिलाफ मुकदमेबाजी का सख्त नोटिस जारी किया है। प्रदूषण राष्ट्रीय समस्या है, जिससे निपटने के लिए संवैधानिक, सामाजिक व कानूनी स्तर पर एकीकृत मुहिम चलाने की जरूरत है। प्रदूषण रोकने के लिए सभी पहलू स्पष्ट व तैयारी में दृढ़ता से किए जाएं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/a-major-national-problem-making-pollution/article-3470</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2017 03:46:37 +0530</pubDate>
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