<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/shah-mastana-ji-maharaj/tag-5668" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>shah Mastana Ji Maharaj - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/5668/rss</link>
                <description>shah Mastana Ji Maharaj RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अचानक बेपरवाह जी की दृष्टि उस कुत्ते पर पड़ी.... फरमाया ‘भाई! यह कोई बिछुड़ी हुई रूह आज चौरासी कटवाने आई है....</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी पृथ्वी राज इन्सां सुपुत्र सचखंडवासी प्रेमी फूल चंद जी, गांव धारनियां जिला फतेहाबाद से लिखते हैं कि यह दिसम्बर 1957 की बात है। उस दिन नेजिया खेड़ा गांव में बेपरवाह सार्इं मस्ताना जी महाराज का सत्संग था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/suddenly-beparvah-jis-gaze-fell-on-that-dog-and-he/article-87266"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/shah-mastana-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी पृथ्वी राज इन्सां सुपुत्र सचखंडवासी प्रेमी फूल चंद जी, गांव धारनियां जिला फतेहाबाद से लिखते हैं कि यह दिसम्बर 1957 की बात है। उस दिन नेजिया खेड़ा गांव में बेपरवाह सार्इं मस्ताना जी महाराज का सत्संग था। मैंने इससे पहले अपनी माता के साथ सुचान कोटली में बेपरवाह सार्इं मस्ताना जी महाराज के दर्शन किए तथा सत्संग सुना था। उस समय मैंने देखा कि शहनशाह जी के चेहरे पर बेअंत चमक थी। नूरानी चेहरे का रंग पूरा लाल था। उनका चेहरा बब्बर-शेर की भांति पूरा रोहबदार था। ऐसे लगता था जैसे उनके मुखड़े पर कोई अलौकिक बारिश हो रही हो। मैंने घर आकर अपनी मां को बताया तो वह बोली, बेटा! यह तो अमृत-धारा ऊपर से आ रही थी। उसने कहा कि सुना है, खुद खुदा धरती पर उतर कर आया है। हम अगली सत्संग पर नाम ले ही लेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">उस समय हम ‘सिंचाई विभाग’ के रैस्ट हाऊस में सुचान कोटली जिला सरसा में रहते थे, क्योंकि मेरे पिता जी सिंचाई विभाग में नौकरी करते थे। अगले सत्संग वाले दिन उस रेस्ट हाऊस में किसी बड़े अफसर ने आना था, इसलिए उस दिन हम डेरा सच्चा सौदा सरसा सत्संग पर कुछ देरी से पहुंचे। उस समय तक शहनशाह जी सत्संग की समाप्ति करके अपने तेरावास में ऊपर चौबारे पर चले गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही हम दरबार के अंदर प्रवेश हुए तो शाह मस्ताना जी महाराज हमारी पुकार और तड़प को देखकर एकदम चौबारे से बाहर आए और वचन फरमाया, ‘भाई, सतगुरु के प्यारे बच्चे कितनी दूर से, तड़प, प्रेम से आए हंै! हम बिल्कुल नजदीक चले गए थे। शहनशाह जी बोले, ‘बेटा, लंगर छको और भजन बंदगी करो। फिर भई शाम को सत्संग सुनना।’ घर पर जरूरी काम की वजह से उस दिन भी हम बिना नाम लिए वापिस लौट आए। कुछ दिनों बाद नेजिया में सत्संग वाले दिन हम दो साइकिलों पर घर से चले। एक साईकिल पर मेरा चाचा, मैं तथा मेरी बहन थे और दूसरी साइकिल पर मेरे पिता, मेरी माता जी तथा मेरा छोटा भाई था। हम अपने घरेलू कुत्ते को रोटी-पानी खिला पिला कर अपने घर संगली से बांधकर आए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब हम नेजिया खेड़ा गांव में सत्संग पर पहुंचे, उस समय शहनशाह मस्ताना जी महाराज सत्संग फरमा रहे थे। वहां पर बहुत लोग ऊंटों, घोड़ों, साइकिलों पर तथा बहुत लोग पैदल भी चलकर आए हुए थे। हम सत्संग सुनने के लिए सत्संग पंडाल में बैठ गए। इतने में हमें पता चला कि सेवादार एक कुत्ते को संगत के बीच में आने से रोक रहे थे और इधर-उधर भगा रहे थे। अचानक बेपरवाह जी की दृष्टि उस कुत्ते पर पड़ी। शहनशाह जी सेवादारों से पूछने लगे कि ‘क्या बला पड़ गई? एक सेवादार बोला कि सार्इं जी, यह कुत्ता अपने मालिक के पीछे संगली तुड़वा कर संगली समेत ही आ गया है और संगत में अपने मालिक की पहचान कर रहा है। मेरी माता को शंका हो गई कि कहीं हमारे वाला कुत्ता ही ना आ गया हो! उसने खड़ी होकर देखा तो अपने कुत्ते को पहचान लिया और कहा कि यह तो हमारा कुत्ता है। हम तो इसे घर में संगली से बांधकर आए थे, ये कैसे संगली तुड़वा कर आ गया! शहनशाह जी ने सेवादारों को फरमाया, ‘भाई! यह कोई बिछुड़ी हुई रूह आज चौरासी कटवाने आई है। भई, इसको भगाओ मत। इसको बूंदी का प्रशाद डालो और इसे अपने मालिक के पास बैठने दो।’ कुत्ता हमारे पास आकर चुपचाप बैठ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग की समाप्ति पर हमने नाम लेना था, इसलिए कुत्ते को हम अपने किसी जान-पहचान वाले के घर नेजिया में बांध आए थे। मैं अपनी माता, बहन व भाई के साथ अपने पिता और चाचा को बताए बिना ही नाम लेने वालों में हम तीनों बहन-भाई बैठने लगे। मेरी माता ने अंदर जाने से पहले जूते उतार दिए थे, क्योंकि खुद-खुदा सतगुरु जी के पास जाना है। उस समय शहनशाह जी सामने खड़े थे तो शहनशाह जी ने फरमाया, ‘भई किसी ने जूते नहीं निकालने। यह कोई वो चीज नहीं है। ये धुर अनामी वाली ताकत सच्चे सौदे आई है। जो आपको समेत जोड़े पार लेकर जाएगी।’ तो माता ने जूते पहन लिए और बोली, सार्इं जी ने दिल की बात बता दी। हम राम-नाम में बैठ गए। सार्इं जी ने फिर फरमाया, ‘भई वो कुत्ता जिसको तुम भगा रहे थे, यदि उसके मालिक नाम में बैठे हैं तो उस कुत्ते को भी अंदर आने दो।’ माता जी ने मुझे कहा कि कुत्ता तो हम बांधकर आए हैं। परंतु कुत्ता तो संगली तुड़वा कर वहाँ बाहर दरवाजे पर आया खड़ा था। जैसे ही बेपरवाह जी ने कुत्ते के बारे में फरमाया तो सेवादारों ने कुत्ते को अंदर आने की छूट दे दी और वह अंदर आकर सीधा हमारे पास बैठ गया। बेपरवाह जी ने सेवादारों को फरमाया, ‘भई, तुम तो कुत्ते को भगा रहे थे। कुत्ते के मालिक के भाग देखो, आज समेत कुत्ते तर रहा है। आज से इस कुत्ते की चौरासी खत्म।’ पूजनीय शहनशाह जी ने इतने रहमत भरे वचन करके हमें नाम वाले जीवों के साथ नाम बख्श दिया। उसी दिन शाम के समय ढोल नगाड़ों के साथ बेपरवाह जी पैदल चल कर रेत के ऊंचे-ऊंचे टीलों वाली जगह पर आए। उस समय काफी साध-संगत शहनशाह जी के पीछे-पीछे चल रही थी। वहाँ एक ऊंचे टिब्बे पर डंगोरी लगाकर शहनशाह जी ने फरमाया, ‘यहाँ पर ताकत अपना पूरा रंग दिखाएगी।’ इस तरह उस दिन पूजनीय शाहनशाह जी ने शाह सतनाम शाह मस्ताना जी धाम का अपने पवित्र वचनों द्वारा एक तरह से पहले ही उद्घाटन कर दिया था। पूजनीय सच्चे दाता रहबर की पावन तीसरी बॉडी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से यही प्रार्थना है कि आप जी की दया-मेहर, रहमत परिवार पर हमेशा बरसती रहे जी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/suddenly-beparvah-jis-gaze-fell-on-that-dog-and-he/article-87266</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/suddenly-beparvah-jis-gaze-fell-on-that-dog-and-he/article-87266</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:24:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/shah-mastana-ji-maharaj.jpg"                         length="32851"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>3 in 1 MSG Bhandara: ऐसे बेमिसाल वचन, जिनसे यह साफ जाहिर होता है&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/such-incomparable-words-from-which-it-becomes-abundantly-clear/article-83551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/3-in-1-msg-bhandara-26.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर का हर कदम न सिर्फ उनके श्रद्धालुओं/मुरीदों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण कायनात की भलाई के लिए होता है। 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>सच्चे सतगुरु और डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज और सच्चे दाता रहबर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने डेरे के बारे में, साध-संगत और गुरगद्दी के बारे में ऐसे बेमिसाल वचन फरमाए, जिनसे यह साफ जाहिर होता है कि तीनों बॉडियां एक ही रूहानी ज्योत हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां इसी महान परोपकार को थ्री-इन-वन और एमएसजी का नाम देते हैं। वैसे भी रूहानियत का संदेश यह है कि सतगुरु कहीं जाता ही नहीं, वह सदा है, बस चोला बदलता है, ज्योत वही काम करती है।</p>
<h3>18 अप्रैल, 1960 को पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने मानवता का उद्धार करना शुरू किया</h3>
<p>18 अप्रैल, 1960 को सच्चे मुर्शिदे कामिल पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने नूरी चोला बदलकर पूजनीय बेपरवाह शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में मानवता का उद्धार करना शुरू किया और तीसरी बॉडी के बारे में भी वचन फरमाए कि सात साल (1967) बाद तीसरी बॉडी के रूप में आएंगे। गुरगद्दी की बख्शीश के बाद भी पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ”आपां” और ”आपणा” शब्द ही इस्तेमाल करते थे, न कि ”तुम” या ‘हम”! पूजनीय परम पिता जी ने चोला बदलते समय भी पूज्य हजूर पिता जी की छाती पर अपने पावन कर-कमल बार-बार लगाकर वचन फरमाए, ”हम कहीं नहीं चले, तेरे यहाँ (दिल) रहेंगे।”</p>
<p>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने थ्री-इन-वन के महान परोपकार को ”एमएसजी” का रूप दिया है। आप जी फरमाते हैं कि आज भी सब कुछ ”शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी” ही कर रहे हैं। पूज्य हजूर पिता जी इसी अभेदता को इन शब्दों के माध्यम से भी कलमबद्ध करते हैं:</p>
<h3>”खुद ही सजदा करूं, खुद ही कबूल करूं” | 3 in 1 MSG Bhandara</h3>
<p>इसी तरह, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के वचन पूज्य हजूर पिता जी की दया-मेहर के रूप में स्पष्ट नजर आ रहे हैं। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने यह भी फरमाया कि ”सरसा-नेजिया एक हो जाएगा, संगत ही संगत होगी, थाली फैंकी जाएगी तो थाली नीचे नहीं गिरेगी।” भंडारों के दौरान साध-संगत के इक्ट्ठ से वचन हुबहु पूरे होते देखे जाते हैं।</p>
<p>प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं।यह भी तथ्य हैं कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने पूज्य हजूर पिता जी को गुरगद्दी की बख्शीश से पहले ही स्पष्ट इशारा कर दिया था कि परम पिता जी ही हजूर पिता जी के रूप में काम करेंगे। पूजनीय परम पिता जी को जब यह बताया गया कि श्री गुरुसर मोडिया वाले नंबरदार का लड़का (पूज्य हजूर पिता जी) हर सत्संग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में साध-संगत को लेकर जाता है, तो पूजनीय परम पिता जी ने आप जी से बातचीत करते हुए वचन फरमाए, ”अपना तो फिर काम यही है।’ 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज के बहुत सारे वचन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में पूरे हुए और बहुत सारे वचन पूज्य हजूर पिता जी के रूप में पूरे हो रहे हैं। करोड़ों साध-संगत अपने दाता सतगुरु एमएसजी को थ्री-इन-वन दिवस पर करोड़ों बार सजदा और धन्यवाद करती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/such-incomparable-words-from-which-it-becomes-abundantly-clear/article-83551</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/such-incomparable-words-from-which-it-becomes-abundantly-clear/article-83551</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:23:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/3-in-1-msg-bhandara-26.jpg"                         length="61858"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;हर व्यक्ति यहाँ का अधिकारी नहीं, यहाँ उसी को स्थान मिलता है, जिसे ऊपर से हुक्म होता है’&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: शाम को जुलूस की वापसी पर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्वयं गेट के बाहर खड़े होकर आप जी का और शहनशाही जुलूस का स्वागत किया और साध-संगत के बीच खड़े होकर यह वचन भी फरमाया कि हरबंस सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/only-those-who-receive-orders-from-above-are-granted-a-place-here/article-81750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-mahroom1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: शाम को जुलूस की वापसी पर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्वयं गेट के बाहर खड़े होकर आप जी का और शहनशाही जुलूस का स्वागत किया और साध-संगत के बीच खड़े होकर यह वचन भी फरमाया कि हरबंस सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को आज ‘आत्मा से परमात्मा’ कर दिया है। यह इनकी बहुत बड़ी कुर्बानी है।’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी को नए-नए नोटों के हार पहनाकर पूजनीय बेपरवाह साईं जी स्वयं अपने साथ तेरावास में लेकर गए। तीन मंजिला तेरावास पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी की ही हवेली के मलबे अर्थात ईंटें, लकड़ी-बालों, गार्डरों आदि का उपयोग कर और स्वयं मिस्त्रियों के पास खड़े रहकर अपने निर्देशन में पूरी मजबूती से बनवाया था। पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने 28 फरवरी 1960 को जुलूस के बाद सुंदर तेरावास आप जी को उपहार स्वरूप भेंट की और इस संबंधी वचन फरमाए, ‘सतगुरु के हुक्म से यह गोल तेरावास बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सतनाम सिंह जी को पुरस्कार स्वरूप दी गई है।’ साथ ही फिर से स्पष्ट करते हुए फरमाया, ‘सतनाम सिंह जी का नाम पहले सरदार हरबंस सिंह जी था। यह ईश्वरी शक्ति श्री जलालआणा साहिब, जिला सरसा की रहने वाली है। राम-नाम को हासिल करने के लिए इन्होंने अपना घर-मकान तोड़ा। इसलिए यह तेरावास इन्हें इनाम में मिला है। हर व्यक्ति यहाँ स्थान लेने का अधिकारी नहीं है और यहाँ उसी को स्थान मिलता है, जिसे ऊपर से हुक्म होता है।’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/only-those-who-receive-orders-from-above-are-granted-a-place-here/article-81750</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/only-those-who-receive-orders-from-above-are-granted-a-place-here/article-81750</guid>
                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 09:38:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/param-pita-ji-mahroom1.jpg"                         length="45850"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: ‘‘यह सामान किसका है?’’</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) अपने घर का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा सामान पूजनीय साईं जी के हुक्मानुसार डेरे ले आए। अभी भी आप जी की कोई और परीक्षा होनी बाकी रह गई थी। शाम को पूजनीय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/whose-stuff-is-this/article-81601"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) अपने घर का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा सामान पूजनीय साईं जी के हुक्मानुसार डेरे ले आए। अभी भी आप जी की कोई और परीक्षा होनी बाकी रह गई थी। शाम को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ‘तेरावास’ से निकल कर सीधे आप जी द्वारा श्री जलालआणा साहिब गाँव से लाए गए सामान के पास आ गए। सामान के इतने बड़े ढेर को देखकर पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने फरमाया, ‘‘यह सामान किसका है?’’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">साध-संगत ने बताया कि साईं जी, यह सामान श्री जलालआणा साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह जी का है। पूजनीय बेपरवाह जी एकदम जोश में आकर बोले, ‘‘यह सामान डेरे में क्यों लाया गया है? किसने कहा था यहाँ लाने को? अगर कोई हमसे आकर पूछे कि भाई किसका घर तोड़ कर लाए हो, तो हम क्या जवाब देंगे? इसे अभी बाहर निकालो और सरदार हरबंस सिंह से कहो कि वह अपने सामान का आप ही पहरा दें।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार आप जी द्वारा लाया गया सारा सामान डेरे के आगे पूर्व दिशा की ओर, सड़क के बराबर में रखवा दिया गया और आप जी को उसकी निगरानी हेतु बैठा दिया गया। प्यारे सतगुरु जी के खेल को देखकर आप जी जरा भी नहीं डोले। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/whose-stuff-is-this/article-81601</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/whose-stuff-is-this/article-81601</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 09:25:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji-1.jpg"                         length="23971"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: जब साईं जी ने अपनी नूरी-नजर से सत्संगियों के दिलों में रूहानी किरणें छोड़ीं&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के समय एक दिन, हमेशा की तरह ईश्वर की भक्ति के भजन गाए जा रहे थे। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने अपनी नूरे-नजर से सत्संगियों के दिलों में ऐसी प्रेमपूर्ण रूहानी किरणें छोड़ीं कि सभी मस्ती में भाव-विभोर होकर नाचने लगे। उसी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-sai-ji-with-his-luminous-glance-released-spiritual-rays-into-the-hearts-of-his-devotees/article-81450"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-aashirwad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के समय एक दिन, हमेशा की तरह ईश्वर की भक्ति के भजन गाए जा रहे थे। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने अपनी नूरे-नजर से सत्संगियों के दिलों में ऐसी प्रेमपूर्ण रूहानी किरणें छोड़ीं कि सभी मस्ती में भाव-विभोर होकर नाचने लगे। उसी समय पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने अपने भावी गद्दीनशीन (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज) की ओर अपनी पवित्र दृष्टि डालते हुए वचन फरमाया, ये स्टेज पर बैठकर अंदर से ऐसी मस्ती छोड़ा करेंगे कि इनके आगे सौ-सौ साल के बुजुर्ग भी नाचा करेंगे। इसी संबंध में एक बार पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने यह भी वचन फरमाए, ‘तुम्हारे सामने तो झोटे भी नाचा करेंगे, अर्थात भारी शरीर वाले लोग भी नाचने लगेंगे।’ पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के उपरोक्त वचन सौ प्रतिशत सच साबित हुए और हो रहे हैं। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-sai-ji-with-his-luminous-glance-released-spiritual-rays-into-the-hearts-of-his-devotees/article-81450</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-sai-ji-with-his-luminous-glance-released-spiritual-rays-into-the-hearts-of-his-devotees/article-81450</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 09:27:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/param-pita-ji-aashirwad.jpg"                         length="31536"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: ‘‘कहां हैं भाई!’’ वो जलालआणे वाले लंबे सरदार जी?</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज लगभग तीन सालों तक पूजनीय बेपरवाह साईं मस्ताना जी महाराज के सत्संगों को सुनते रहे। 14 मार्च सन् 1954 की बात है, उस दिन सत्संग का कार्यक्रम गांव धूकांवाली (जिला सरसा) में था। अपने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज का शुभ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/where-is-he-brother-that-tall-sardar-from-jalalanas/article-81410"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज लगभग तीन सालों तक पूजनीय बेपरवाह साईं मस्ताना जी महाराज के सत्संगों को सुनते रहे। 14 मार्च सन् 1954 की बात है, उस दिन सत्संग का कार्यक्रम गांव धूकांवाली (जिला सरसा) में था। अपने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज का शुभ संदेश पाकर आप जी अपनी पूजनीय माता माता जी को साथ लेकर गांव धूकांवाली पहुंच गए। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के पश्चात जब शाह मस्ताना जी नाम शब्द देने के लिए जाने लगे तो आप जी को चबूतरे पर खड़ा देखकर दूर से ऊंची आवाज में फरमाया, ‘‘हरबंस सिंह! आप भी अंदर चलकर हमारे मूढ़े के पास बैठ जाओ। आज रात आपको भी दाता सावण शाह जी के हुक्म से नाम की दीक्षा मिलेगी।’’ आप जी उसी समय अपने सतगुरु जी की आज्ञानुसार अंदर चले गए और मूढ़े के पास स्थान खाली न होने के कारण आप जी पीछे बैठ गए।’’</p>
<p style="text-align:justify;">इतने में पूजनीय शाह मस्ताना जी कमरे के अंदर आ गए और मूढ़े पर बैठते ही, आप जी को मूढ़े के पास बैठा हुआ न देखकर बोले ‘‘कहां हैं भाई!’’ वो जलालआणे वाले लंबे सरदार जी? क्या नाम है उनका… हरबंस सिंह।’’इस पर आप जी ने खड़े होकर प्रार्थना की कि, ‘‘साई जी! मैं यहां बैठा हूं।’’ तब पूजनीय शाह मस्ताना जी ने मधुर वाणी से फरमाया, ‘‘नहीं भाई, यहां पर आगे आकर हमारे मूढ़े के पास बैठो।’’ आप जी को अपने पास बैठाते हुए पूजनीय मस्ताना जी ने यथार्थ को प्रकट करते हुए फरमाया, ‘‘आपको इसलिए बैठा कर नाम देते है कि आपसे कोई काम लेना है, आपको जिंदाराम का लीडर बनाएंगे। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/where-is-he-brother-that-tall-sardar-from-jalalanas/article-81410</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/where-is-he-brother-that-tall-sardar-from-jalalanas/article-81410</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 09:48:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/param-pita-ji.jpg"                         length="106346"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;आपको काल नहीं बुलाएगा, आप सत्संग में आते रहो’’</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज, पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के सत्संग (गुरुगद्दी से पहले) लगातार सुनते रहे। नाम शब्द प्राप्त करने के उद्देश्य से जब भी आप जी ‘नाम’ के अभिलाषी लोगों की कतार में बैठते, तो पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/death-will-not-call-you-you-should-keep-coming-to-satsang/article-81366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज, पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के सत्संग (गुरुगद्दी से पहले) लगातार सुनते रहे। नाम शब्द प्राप्त करने के उद्देश्य से जब भी आप जी ‘नाम’ के अभिलाषी लोगों की कतार में बैठते, तो पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज हर बार यह कहकर आप जी को वहाँ से उठा देते, ‘‘भाई! अभी आपको नाम का हुक्म नहीं हुआ। आपको काल नहीं बुलाएगा, आप सत्संग में आते रहो।’’  MSG Maha Rahmokaram Month</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">एक बार जब पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गांव गदराना में सत्संग फरमाने आए, तब आप जी की पूजनीय माता जी ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज जी के पावन चरण कमलों में अरदास की, ‘‘पूजनीय दयालु दातार साईं जी! आप हजारों लोगों का उद्धार करते हो, मेरे इकलौते पुत्र को भी ‘नाम’ दान बख्श दो जी।’’  पूजनीय माता जी की इस अरदास पर पूजनीय बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘बेटा! सावन शाही मौज के हुक्म से इन्हें स्वयं बुलाकर नाम देंगे। अभी हुक्म नहीं हुआ।’’ MSG Maha Rahmokaram Month</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/death-will-not-call-you-you-should-keep-coming-to-satsang/article-81366</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/death-will-not-call-you-you-should-keep-coming-to-satsang/article-81366</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 09:30:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji1.jpg"                         length="67533"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य सतगुरू जी के वचनों ने बदली शिष्य की तकदीर</title>
                                    <description><![CDATA[Shah Mastana ji Maharaj: प्रमुख दास गांव खजूरी (फतेहाबाद) में रहता था। उसका पहला नाम राम गोपाल शर्मा था। सन् 1952 में परम पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पहली बार जब महमदपुर रोही में सत्संग फरमाया था तो गांव में सबसे पहले राम गोपाल ने नाम-दान प्राप्त किया था। पूज्य शहनशाह जी ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-words-of-pujya-satguru-ji-changed-the-fate-of-the-disciple/article-87089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/saha-mastana-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shah Mastana ji Maharaj: प्रमुख दास गांव खजूरी (फतेहाबाद) में रहता था। उसका पहला नाम राम गोपाल शर्मा था। सन् 1952 में परम पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पहली बार जब महमदपुर रोही में सत्संग फरमाया था तो गांव में सबसे पहले राम गोपाल ने नाम-दान प्राप्त किया था। पूज्य शहनशाह जी ने अपार रहमत करते हुए राम गोपाल का नाम प्रमुख दास रख दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">राम गोपाल के दो भाई थे। वह सबसे छोटा था। उसने बताया कि उन दोनों के यहां तो अच्छी पैदावार थी परंतु मेरे घर में गरीबी थी। नाम दान मिलने के बाद वह लगभग आश्रम में ही सेवा करता रहता था। पूज्य शाह मस्ताना जी महाराज जहां भी सत्संग करने के लिए जाते वह भी साथ ही चला जाता। घर पर तो कभी-कभी ही आया करता था। घर में कई बार तो इतनी तंगी आ जाती थी कि घर में आटा तक नहीं होता था और मुश्किल से गुजारा करना पड़ता था। शहनशाह शाह मस्ताना जी महाराज, डेरा सच्चा सौदा अमरपुरा धाम, महमदपुर रोही में सत्संग करने के लिए पधारे। भक्त प्रमुख दास भी आप जी के साथ था। घर में जबरदस्त गरीबी थी। खाने को कुछ भी नहीं था। भक्त के परिवार वाले सभी सदस्य भूखे बैठे हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इतने में भक्त का एक बड़ा भाई घर पर आया और परिवारजनों को इस प्रकार भूख के कारण उदास बैठे देखकर ताना मारते हुए कहने लगा कि तुम्हारे बाप ने और बाबे (पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज) ने बाजरी इक्ट्ठी कर रखी है जाओ और लाद लाओ। बच्चों ने ताऊ की इस बात को सच समझा और वे ऊंटनी लेकर डेरा सच्चा सौदा अमरपुरा धाम में पहुंच गए। बच्चों को क्या पता था कि उनके ताऊ ने उनसे मजाक करते हुए ताना मारा है। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज स्टेज पर विराजमान थे। रू हानी सत्संग चल रहा था और ऊंटनी सहित अपने बच्चों को दरबार में आता देखकर प्रमुख दास ने उन्हें बाहर ही रोकते हुए पूछा कि वे यहां पर किस लिए आए हैं? इस पर बच्चों ने अपनी ताऊ वाली सारी बात ज्यों की त्यों ही बता दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुनकर उसको बहुत दु:ख पहुंचा परंतु उसने बच्चों को बहुत ही प्यार से समझाया कि बैठकर सत्संग सुन लें। सत्संग के बाद तुम्हारे साथ ही गांव को चलंूगा। घट-घट के जाननहार दयालु दातार जी सब कुछ समझ गए। प्रमुख दास वापिस शहनशाह जी के पास आया तो शाह मस्ताना जी ने पूछा, ‘‘प्रमुख दास! ये मुंडे (लड़के) किस लिए आए हैं?’’ उसने सच्चाई को छुपाते हुए प्रार्थना की कि सार्इं जी! यह पास के गांव बड़ोपल से आए हैं और अपने गांव जा रहे हैं जी। इस पर दातार जी ने फरमाया , ‘‘भई! तू गरीब मस्ताने से क्या छुपा रहा है, सच-सच बता क्या कहा है उन्होंने?’’ अपने मुर्शिद जी के पवित्र मुख ये यह वचन सुनते ही प्रमुख दास वैराग्य में आ गया और उसने सारी बात ज्यों की त्यों ही बयान कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर शाह मस्ताना जी  (Shah Mastana ji Maharaj) ने उन्हें अपना भरपूर प्यार बख्शते हुए पवित्र मुख से वचन फरमाया, ‘‘अच्छा! तो उन लोगों ने गरीब मस्ताने को ताना मारा है। जाओ पुट्टर! ऐसा बोलने वाले को कह देना कि इन लड़कों की गाड़ियां चलेंगी। अच्छा कारोबार होगा।’’ इसके साथ ही सच्चे पातशाह जी ने उन्हें नोटों के हार पहनाए और अपनी अलौकिक खुशियां प्रदान की। अपने मुर्शिद के ऐसे इलाही प्रेम व बेपरवाही खुशी को पाकर भक्त व उसके लड़के दाता जी के हजूरी में खूब नाचे। इस प्रकार अपने मुर्शिद का भरपूर प्यार प्राप्त कर वे अपने गांव आ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">बस! फिर क्या था? उसी दिन से ही उनके दिन फिर गए। कुल-मालिक की उन पर ऐसी अपार रहमत हुुई कि उन्होंने कारोबार शुरू कर लिया, दुकानें खोल ली। खूब आमदनी होने लगी। कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही गया। प्यारे मुर्शिद जी की कृपा से आज उनके घर में उपरोक्त वचनानुसार गाड़ियां भी हैं और अच्छा कारोबार भी है।</p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-words-of-pujya-satguru-ji-changed-the-fate-of-the-disciple/article-87089</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-words-of-pujya-satguru-ji-changed-the-fate-of-the-disciple/article-87089</guid>
                <pubDate>Tue, 21 Oct 2025 15:54:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-10/saha-mastana-ji-maharaj.jpg"                         length="18609"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Shah Mastana ji Maharaj: डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूज्य बेपरवाह साई शाह मस्ताना जी महाराज के 133वें पावन अवतार दिवस पर विशेष</title>
                                    <description><![CDATA[133वें पावन अवतार दिवस पर विशेष Shah Mastana ji Maharaj: मानवता पर महान परोपकार करने वाले बेपरवाह साई शाह मस्ताना जी महाराज ने कार्तिक पूर्णिमा सन् 1891 को अति पूजनीय पिता पिल्लामल्ल जी व अति पूजनीय माता तुलसां बाई जी के घर अवतार धारण किया। आप जी गांव कोटड़ा तहसील गंधेय, रियासत बिलोचिस्तान (अब पाकिस्तान) […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/special-on-the-133rd-holy-incarnation-day-of-venerable-beparwah-shah-mastana-ji-maharaj/article-64332"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/shah-mastana-ji-maharaj1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">133वें पावन अवतार दिवस पर विशेष</h3>
<p style="text-align:justify;">Shah Mastana ji Maharaj: मानवता पर महान परोपकार करने वाले बेपरवाह साई शाह मस्ताना जी महाराज ने कार्तिक पूर्णिमा सन् 1891 को अति पूजनीय पिता पिल्लामल्ल जी व अति पूजनीय माता तुलसां बाई जी के घर अवतार धारण किया। आप जी गांव कोटड़ा तहसील गंधेय, रियासत बिलोचिस्तान (अब पाकिस्तान) के रहने वाले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चे संत अनंत, अदम्य, अकल्पनीय रहमतों के भंडार होते हैं। ऐसे संत भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का स्वरूप होते हैं। वे धरा पर अवतरित होकर इन्सान को उसके जीवन का असली मकसद समझाते हैं और प्रभु-परमात्मा से मिलने का आसान व सरल मार्ग दिखाते हैं, जिस पर चलकर हर इन्सान अपने जीवन को खुशियों से महका सकता है। संत रूहानियत के बादशाह होते हैं, जो हमेशा नि:स्वार्थ भाव से खुशियों के खजाने लुटाते हैं और बदले में किसी से कुछ भी नहीं लेते। रूहानी रहबर पूरी मानवता को नि:स्वार्थ प्रेम, एकता और भाईचारे के सूत्र में पिरोकर नफ़रत, वैर-विरोध जैसी बुराइयों को मिटा देते हैं। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने परमात्मा के सन्देश, नि:स्वार्थ प्रेम व रहमतों की ऐसी अद्भुत वर्षा की कि इन्सानियत की रोशनी से मानवता अन्दर-बाहर से प्रफुल्लित हो उठी। आमजन को अज्ञान के अंधकार से मुक्ति मिली। अंधविश्वास, भूत-पे्रतों के भ्रम-भुलेखों, ईर्ष्या, नफरत से मुक्त होकर लोग प्रभु की सच्चे हृदय से भक्ति के साथ-साथ समाज सेवा के नए कीर्तिमान स्थापित करने लगे। सच्चे रूहानी रहबर ने रूहानियत के जिस महान केन्द्र ‘डेरा सच्चा सौदा’ की स्थापना की, वह इन्सानियत का अजूबा बन गया। प्रत्येक धार्मिक स्थल की अलग पहचान व मर्यादा होती है, लेकिन बेपरवाह जी ने एक ऐसा सर्वधर्म संगम स्थापित किया जहां सभी धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर एक साथ बैठते हैं, अपने-अपने धर्म में रहते हुए और अपनी-अपनी भाषा बोलते हुए, अपने पहनावे में उस एक शक्ति भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, राम, गॉड, खुदा, रब्ब जिसके असंख्य नाम हैं, लेकिन वो ताकत एक है, उसकी भक्ति करते हैं। यहां से जन-जन तक संदेश पहुँच रहा है कि हम सब एक हैं और हमारा मालिक भी एक है। डेरा सच्चा सौदा ने हमेशा सभी धर्मों व धार्मिक स्थलों का हृदय से सत्कार-सम्मान करने की शिक्षा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानवता पर महान परोपकार करने वाले पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने कार्तिक पूर्णिमा सन् 1891 को पूजनीय पिता पिल्लामल्ल जी व पूजनीय माता तुलसां बाई जी के घर अवतार धारण किया। आप जी गाँव कोटड़ा तहसील गंधेय, रियासत बिलोचिस्तान ( यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान में है) के रहने वाले थे। कहते हैं कि संत इस दुनिया में आकर नहीं बनते, बल्कि धुर-दरगाह से ही आते हैं। इसी कारण ही उनके अन्दर बचपन से ही ऐसे अद्भुत करिश्माई गुण विद्यमान थे, जो अन्य में संभव नहीं होते। बाल स्वरूप में सच्चे रूहानी रहबर के महान गुणों से गाँव कोटड़ा महकता रहा। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी के हृदय में बचपन से ही भक्ति-भाव परिपूर्ण रहा। जरूरतमंदों की मदद करना, किसी का दु:ख देखकर उसे दूर करने का जी-तोड़ प्रयास करना, समाज की भलाई के लिए हर त्याग के लिए तत्पर रहने जैसे गुण आप जी के महान हस्ती होने का बखूबी आभास करवा रहे थे। पूज्य सार्इं जी के पूजनीय पिता जी की मिठाइयों की दुकान थी। एक बार पूजनीय माता-पिता जी ने आप जी को खोया (मावा) बेचने के लिए शहर भेजा, लेकिन आप जी ने सारा खोया (मावा) भूख से व्याकुल लोगों को खिला दिया। फिर आप जी के दिल में ख्याल आया कि यदि खाली हाथ वापिस घर लौटे तो पूज्य माता जी पूछेंगी इस पर क्या जवाब देंगे। यह सोचकर आप जी ने नजदीकी एरिया में एक जमींदार के खेत में काम करने से लेस मात्र भी संकोच नहीं किया और पूरा दिन कड़ी मेहनत की। हालांकि घर धन-धान्य से परिपूर्ण था।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनभर मेहनत के बाद सायं को आप जी घर पहुंचे और पूजनीय माता जी को मेहनत की कमाई के पैसे सौंप दिए। इसी दौरान वह जमींदार भी आपजी के पीछे-पीछे घर पहुँच गया और उसने पूजनीय माता जी को पूरी बात बताई। जमींदार ने पूजनीय माता जी को सजदा करते हुए कहा कि आपका लाडला महान है। यह जानकर पूजनीय माता जी की आँखों में खुशी के आंसू छलक आए और माता जी ने अपने इस अद्भुत लाल को सीने से लगा लिया। इतना ही नहीं, आप जी की दयालुता भी लोगों की जुबां पर हमेशा चर्चा का विषय रही थी, अकसर आपजी रास्तों में दूर-दूर तक साफ-सफाई करते ताकि राहगीरों को किसी भी तरह की मुश्किल न आए। आप जी जब जवान हुए तो प्रभु प्राप्ति के लिए सच्चे संतों की तलाश में लग गए। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">इस दरमियान बहुत से साधु-महात्माओं से मिले, लेकिन कहीं से भी दिल को तसल्ली नहीं हुई। रिद्धि-सिद्धि वाले भी मिले, लेकिन भगवान से मिलवाने की गारंटी देने वाला कोई नहीं मिला। सच्ची तड़प को देखते हुए पूजनीय सतगुरु सार्इं सावण सिंह जी महाराज ने आप जी को अपने नूरी दर्शन दिए। दिल में सतगुरु के प्रति सच्ची तड़प लिए आखिर आप जी ब्यास आ पहुँचे और पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज के पावन दर्श-दीदार करके निहाल हो गए। यहां आकर आप जी अपने प्यारे सतगुरु जी के रंग में रंग गए और उन्हें अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। मुर्शिद प्यारे को देख-देखकर खुशी में नाचना, उनके मधुर वचनों व उनके प्यारे चोजों के दीवाने हो गए। मस्ती का समुद्र हिलोरे भरने लगा, जो चाहिए था वो मिल गया, मिलने की खुशी में मस्त हो गए। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी के इस अतुलनीय प्रेम से खुश होकर पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज ने अपने प्यारे मुरीद को रूहानियत का ऐसा अनुपम तोहफा बख्शा कि धन्य-धन्य हो उठे। सच्चे सतगुरु जी ने ‘शाह मस्ताना’ का खिताब बख्श दिया व अपने प्यारे सतगुरु जी के हुक्मानुसार बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज पश्चिमी पंजाब व अन्य जगहों पर सत्संग करने लगे। चारों तरफ राम-नाम, अल्लाह, वाहेगुरु की चर्चा होने लगी। सतगुरु जी ने आप जी को बेअंत बख्शिशों से निहाल करते हुए सरसा में भेजकर बागड़ को तारने का हुक्म फरमाया। अपने सतगुरु जी के हुक्म अनुसार बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने 29 अप्रैल 1948 को सरसा में डेरा सच्चा सौदा की शुभ स्थापना की। आप जी ने जैसे ही सत्संग करने शुरु किए तो चारों तरफ प्रभु-परमात्मा के नाम की रड़ मच गई। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर सत्संगों में पहुंचने लगे। आप जी ने बिना किसी दान-चढ़ावे व पैसे के लोगों को भगवान के सच्चे नाम से जोड़ा, जो भी जीव आता आप जी के पवित्र मुखारबिंद से सीधी-साधी बोली में पवित्र वचन सुनकर व आप जी के पावन दर्शन कर धन्य-धन्य हो उठता। आप जी ने बहुत ही सरल तरीके से रूहानियत के गहन ज्ञान से सबकी झोलियां भरीं और उनके जीवन को खुशियों से महका दिया। आप जी ने भाईचारे की भावना मजबूत करते हुए सभी को हक-हलाल व मेहनत की कमाई करके खाने का सन्देश दिया। सच्चे रूहानी रहबर ने दूर-दराज के क्षेत्रों में डेरे बनाए व दिन-रात सत्संग लगाकर लोगों को भगवान के सच्चे नाम से जोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी भले ही स्वयं को अनपढ़ बॉड़ी ‘गरीब मस्ताना’ जैसे शब्दों से संबोधित करते, लेकिन आप जी के अनमोल वचन, मधुर बोली व दिलकश अन्दाज के कारण पढ़े-लिखे, अनपढ़, हर वर्ग के लोग आप जी की तरफ खींचे चले आते। पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने 28 फरवरी 1960 को पवित्र गुरगद्दी सच्चे सतगुुरु पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जीमहाराज को बख्शिश की। 18 अप्रैल 1960 को आप जी अनामी जा समाए। पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 30 साल सच्चे सतगुरु का रूहानी संदेश देशभर में फैलाया व 11 लाख से अधिक लोगों को परमात्मा के सच्चे नाम से जोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां दुनिया भर में राम-नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा की चर्चा कर रहे हैं। आज डेरा सच्चा सौदा के 7 करोड़ के करीब श्रद्धालु पूरी दुनिया में रूहानियत व 167 मानवता भलाई कार्यों के साथ समाज सेवा के नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी की अपार दया-मेहर व रहमत से डेरा सच्चा सौदा ने समाज सेवा के क्षेत्र में 79 विश्व रिकॉर्ड कायम कर भारत की शोभा को चार चांद लगाए हैं। आप जी के शुभ विचारों से प्रेरित होकर दुनिया के विभिन्न देशों ने बहुमुखी विकास के कई वैज्ञानिक प्रगतिशील निर्णय लिए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सावणशाही निवाजिशें (इलाही बख्शिशें), बागड़ का बादशाह बनाया</h2>
<p style="text-align:justify;">मुर्शिद और मुरीद अंदर-बाहर से एक हुए। सार्इं बाबा सावण शाह जी महाराज ने भी कोई पर्दा नहीं रखा। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के पवित्र मुख-वचन- असीं अपने प्यारे मुर्शिद दाता सावण शाह जी के हुक्म में उनके सामने मोटे-मोटे घुंघरू बांधकर नाचते थे। हमारा मुर्शिद अंदर आवाज देता था, ‘जा संगे जा पीर बण।’ सबके मुंह पर छिक्कड़ी चढ़ गई। कोई बोल न सका। हमारे खुदा सावण शाह ने हुक्म फरमाया,</p>
<p style="text-align:justify;">‘हमने मस्ताना शाह, तुम्हारे को सब काम करने वाला जिन्दाराम दिया। पीर भी बनाया और अपना स्वरूप भी दिया। तुम्हारे को वो राम बख्शिश में दिया जो किसी और को न दिया।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘जा मस्ताना तुझे बागड़ का बादशाह बनाया। तू बागड़-सरसा में जा, कुटिया-डेरा बना और बेधड़क होकर दुनिया को मालिक का नाम जपा। कुछ और मांगना है तो सामने आकर बोल, दोनों हाथों से देंगे। खुले दिल से मांग। हमने तुम्हें देना है, तूने लेना है।’</p>
<p style="text-align:justify;">असीं अर्ज की, ‘मेरे सोहणे मक्खण-मलाई दाता, असीं तेरे से ही मांगना है और किसी से नहीं मांगना।’</p>
<p style="text-align:justify;">असीं अपने मुर्शिद से कहा, ‘ये बॉडी अनपढ़ बॉडी है, इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं, लोगों को कैसे समझाएंगे? असीं केवल सिंधी भाषा (बोली) बोलते हैं। इधर (बागड़) के लोग हमारी भाषा कैसे समझेंगे? कैसे कोई हमारे पीछे लगेगा?’ हमारे मुर्शिद दाता सावण शाह जी ने फरमाया, ‘मस्ताना! तुझे किसी ग्रन्थ की जरूरत नहीं। तेरी आवाज मालिक की आवाज होगी। जो सुनेगा, तेरी आवाज पर मोहित हो जाएगा। तुम्हारी आवाज पर ऐसे मस्त हो जाया करेंगे, जैसे बीन पर सांप मस्त हो जाता है। जो सुनेंगे, राम का नाम लेंगे और उनका बेड़ा पार हो जाएगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">असीं अर्ज करी, ‘सार्इं जी, रूह की चढ़ाई के इस अंदरूनी रास्ते में बड़ी चढ़ाइयां, बड़ी गहराइयां हैं। कहीं त्रिकुटी, कहीं भंवर गुफा आदि अनेक मंजिलें हैं, असीं कैसे समझाएंगे? अभ्यासी तो इनमें ही फंस जाएंगे, कैसे निकलेंगे? हमें तो कुछ ऐसा नाम दो, जिसे भी हम नाम देवें, उसका एक पैर यहां और दूसरा सचखंड में हो। रास्ते के चक्करों को खत्म करो, कहीं भी उस रूह को रूकावट न हो। रास्ते में किसी स्टेशन पर गाड़ी रोकनी न पड़े। वो रूह रास्ते में किसी मंजिल, किसी पड़ाव पर न रुके, एक्सप्रेस ही बन जाए और सीधी सचखंड में जाए।’ ‘ठीक है मस्ताना, तेरी यह बात भी मंजूर है।’</p>
<p style="text-align:justify;">असीं फिर अर्ज करी, ‘मेरे मक्खण-मलाई सार्इं जी, आप हमें जिधर भेज रहे हैं वो इलाका बहुत गरीब है। वो राम-नाम जपेंगे या मजदूरी करेंगे? उनका ध्यान तो राम-नाम की बजाए पेट पालने में अटका रहेगा। हमें तो कुछ ऐसा भी दो कि जीव वचनों पर पक्का रहे, दृढ़ निश्चय, दृढ़-विश्वास रखे, हक-हलाल, मेहनत की करके खाए और थोड़ा-बहुत सुमिरन करे, तो न उसे अंदर कमी रहे न बाहर। अंदर-बाहर से उसे किसी के आगे हाथ फैलाना न पड़े। वो भक्त गरीब न रहे। लोग उसकी यह कह कर निंदा न करें कि फलां भक्त पैसे-पैसे के लिए हाथ फैलाता फिरता है। वह हाथी की तरह मस्त रहे और बिना कुछ परवाह किए अपनी मंजिल की ओर बढ़ता चला जाए।’ हमारे मुर्शिद दाता सावण शाह जी ने कहा, ‘मस्ताना, जा तेरा यह भी मंजूर है।’</p>
<p style="text-align:justify;">असीं यह भी कहा, ‘सार्इं जी, असीं कोई नया धर्म नहीं चलाना चाहते, ‘धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ नारा बोलना चाहते हैं, जिसको सभी धर्म वाले माने। हर कोई अपने मालिक का धन्य-धन्य (धन्यवाद) करे।’ हमारे दाता सावण शाह सार्इं जी ने फरमाया, ‘ठीक है मस्ताना, तुम्हारी मौज। जा मस्ताना, तुम्हारा ‘धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ दोनों जहानों में मंजूर किया। तुम्हारा यह नारा दोनों जहानों में काम करेगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">अपने सच्चे मुर्शिदे-कामिल की ऐसी और भी अनेक इलाही बख्शिशें पाकर आप जी सरसा में पधारे। पूजनीय सार्इं दाता सावण सिंह जी महाराज ने आप जी की मदद के लिए सरसा शहर के अपने पांच सत्संगी सेवादारों की ड्यूटी भी लगा दी थी। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘‘वाह! मस्ताना शाह का मुकाबला कौन कर सकता है?’’</h3>
<p style="text-align:justify;">डेरा ब्यास में रहते हुए वहां के कुछ सेवादार भाई बात-बात पर पूज्य बाबा जी के पास पूज्य शहनशाह मस्ताना जी महाराज की शिकायत कर दिया करते। पूज्य हुजूर बाबा जी उनकी बात सुनकर उनके दिखावे मात्र पर मुस्करा दिया करते। एक दिन पूज्य बाबा जी ने उन सभी सेवादार भाईयों के सामने गहरे कुएँ में कोई चीज फेंककर हुक्म फरमाया कि तुम्हारे में से कोई सेवादार उसे बाहर निकालकर ले आए। अब सभी ने ही एक दूसरे का मुँह देखना शुरू कर दिया। कोई कहे-महाराज जी! अभी किसी अन्य सेवादार को बुलवाकर निकलवा देते हैं। Shah Mastana ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">कोई कहे कि कोई खास बात नहीं, ये पचास रुपये की होगी। चली गई तो जाने दो और नई मँगवा लेंगे। यानि ऐसा कहकर वे सब लोग खिसक गए। इतने में शाह मस्ताना जी महाराज को बुलवाकर इशारा किया कि वह वस्तु निकालकर लानी है। इतना तो कहने ही नहीं दिया और झट से उस कुएं में छलाँग लगा दी। तब उन सेवादारों को बुलवाकर फरमाया कि वाह! मस्ताना शाह का मुकाबला कौन कर सकता है? सभी के चेहरे फीके पड़ गए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Source of inspiration: सच्चे सतगुुरु जी ने छुड़वाया श्रद्धालु का नशा, दिया स्वस्थ जीवन!" href="http://10.0.0.122:1245/true-satguru-ji-freed-the-devotee-from-his-addiction-and-gave-him-a-healthy-life/">Source of inspiration: सच्चे सतगुुरु जी ने छुड़वाया श्रद्धालु का नशा, दिया स्वस्थ जीवन!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/special-on-the-133rd-holy-incarnation-day-of-venerable-beparwah-shah-mastana-ji-maharaj/article-64332</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/special-on-the-133rd-holy-incarnation-day-of-venerable-beparwah-shah-mastana-ji-maharaj/article-64332</guid>
                <pubDate>Fri, 15 Nov 2024 09:59:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-11/shah-mastana-ji-maharaj1.jpg"                         length="20437"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Source of inspiration: ‘‘यह तो देने वाला फकीर है, लेने वाला नहीं।’’</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: सन् 1958, दिल्ली। एक बार जीवोद्धार यात्रा के दौरान पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज दिल्ली पधारे हुए थे। बेपरवाह जी ने कपड़े की खरीददारी करने की इच्छा व्यक्त की। कुछ सेवादारों को साथ लेकर आप जी दिल्ली के चांदनी चौक बाजार में एक दुकान पर गए। उस समय सरसा से भक्त चरण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-is-a-fakir-who-gives-not-a-taker/article-63694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/mastana-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: सन् 1958, दिल्ली। एक बार जीवोद्धार यात्रा के दौरान पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज दिल्ली पधारे हुए थे। बेपरवाह जी ने कपड़े की खरीददारी करने की इच्छा व्यक्त की। कुछ सेवादारों को साथ लेकर आप जी दिल्ली के चांदनी चौक बाजार में एक दुकान पर गए। उस समय सरसा से भक्त चरण दास भी आप जी के साथ था। दुकान पर पहुंचकर बेपरवाह जी ने गर्म कपड़ा खरीदा। कीमत पूछने पर दुकानदार ने 4000/- रूपये मांगे। बेपरवाह जी ने दुकानदार को फरमाया, ‘‘बेटा, हम किताब के पन्ने पलटेंगे तुम रूपये निकालते रहना तथा गिनते रहना।’’ Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार दुकानदार पुस्तक में से नोट निकालता रहा। जब सौ-सौ के चालीस नोट हो गए तो उसने कहा कि बस। परंतु बेपरवाह जी ने एक पन्ना और पलटा तथा सौ रूपये का वह नोट निकालकर दुकानदार को दे दिया। उसके बाद बेपरवाह जी ने उसको पुस्तक के बाकी पन्ने पलटकर दिखाए परंतु उनमें से अब कुछ नहीं निकला। दुकानदार यह सब देखकर हैरान रह गया।  आश्चर्यचकित होकर दुकानदार यह सोचने लगा कि पैसे कम करवाने की बजाय अधिक दे दिये। ये कैसा फकीर है! आज तक ऐसा कोई भी ग्राहक नहीं देखा जो कम करवाने की बजाय पैसे अधिक दे दे। दुकानदार ने ईमानदारी दिखाते हुए वो सौ रूपये का नोट आपजी को वापिस देना चाहा, परंतु बेपरवाह जी ने लेने से इन्कार कर दिया और फरमाया,</p>
<h3>‘‘हम जो देते हैं, वापिस नहीं लेते”</h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘हम जो देते हैं, वापिस नहीं लेते। यह तो देने वाला फकीर है, लेने वाला नहीं।’’ उस दिन दिल्ली में सत्संग का कार्यक्रम था। बेपरवाह जी ने यह कपड़ा सेवादार भाईयों को ‘दातें’ देने के लिए खरीदा था। बातों-बातों में दुकानदार को भी सत्संग के कार्यक्रम के बारे में पता चला। वह आप जी से इतना प्रभावित हुआ कि साथ चलने को तैयार हो गया। उसने उसी समय अपनी दुकान बंद की व आप जी की जीप में बैठ गया। रास्ते में एक खुली छत वाली कार मिली, जिसमें बढ़िया नस्ल के दो सुंदर कुत्ते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">बेपरवाह जी ने उस कार की ओर इशारा करके दुकानदार से कहा, ‘‘देखा भाई! ये कुत्ते अपने पिछले जन्म में बहुत रईस थे। इन्होंने बहुत दान किया था और उसके बदले में इनको ऐसी जगह जन्म मिला कि आदमी इनकी सेवा करते हैं परंतु संत-महापुरूषों के मिलाप के बिना चौरासी नहीं कट सकती।’’ ऐसे रूहानी वचन सुनकर दुकानदार आपजी का दीवाना हो गया तथा सत्संग के बाद उसने ‘नाम-शब्द’ ले लिया। बाद में उसके साथ सैकड़ों लोग आप जी के दर्शन करने के लिए आए और नाम-शब्द लेकर मोक्ष के अधिकारी बने। Shah Mastana Ji</p>
<p><a title="इंसानियत की खातिर मासूम की जिंदगी बचाने को युवा भाई-बहन दे रहे सैंपल" href="http://10.0.0.122:1245/for-the-sake-of-humanity-young-brother-and-sister-are-giving-samples-to-save-the-life-of-an-innocent/">इंसानियत की खातिर मासूम की जिंदगी बचाने को युवा भाई-बहन दे रहे सैंपल</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-is-a-fakir-who-gives-not-a-taker/article-63694</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-is-a-fakir-who-gives-not-a-taker/article-63694</guid>
                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 12:22:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-10/mastana-ji-2.jpg"                         length="57244"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Shah Mastana Ji : ‘तहसीलदार को हुआ गलती का अहसास’, हाथ जोड़कर मांगी माफी!</title>
                                    <description><![CDATA[Shah Mastana Ji : शाह मस्तान शाह सतनाम जी धाम व मानवता भलाई केन्द्र, डेरा सच्चा सौदा, सरसा में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा था। सेवादार भाई पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार पूरी तन्मयता से सेवा में जुटे हुए थे। नई दीवारों पर टीप करने के लिए 50 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-tehsildar-realized-his-mistake-asked-for-forgiveness-with-folded-hands/article-60760"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/mastana-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shah Mastana Ji : शाह मस्तान शाह सतनाम जी धाम व मानवता भलाई केन्द्र, डेरा सच्चा सौदा, सरसा में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा था। सेवादार भाई पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार पूरी तन्मयता से सेवा में जुटे हुए थे। नई दीवारों पर टीप करने के लिए 50 बोरी सीमेंट की आवश्यकता थी। उन दिनों सीमेंट बाजार में बहुत ही कम मिलता था। सीमेंट का परमिट प्रशासन से आवश्यकतानुसार लेना होता था। परमिट देने का कार्य तहसीलदार के जिम्मे था। आप जी ने सरसा शहर के ही एक भक्त खुशी राम की ड्यूटी लगाई कि वह सीमेंट प्राप्त करने की अर्जी लिखवार कर तहसीलदार के पास जाए और उसे सीमेंट का परमिट देने के लिए कहे। उसने तहसील कार्यालय जाकर तहसीलदार को सीमेंट पाने की अर्जी दी। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">तहसीलदार ने अर्जी पढ़कर उससे पूछा कि क्या यह वही सच्चा सौदा है, जहां मकान बनाते और गिराते हैं? सेवादार के ‘हां जी’ कहने पर तहसीलदार ने अर्जी को फैंकते हुए कहा सीमेंट का परमिट नहीं मिलेगा। भक्त खुशी राम उठकर वापिस चलने लगा तो तहसीलदार बोला कि पांच बोरियों का परमिट तो ले जाओ। सेवादार ने कहा हमें तो पचास बोरियों का ही परमिट चाहिए। फिर तहसीलदार ने बिल्कुल ही मना कर दिया और वह वापिस दरबार आ गया। आप जी ने पूछा, ‘‘परमिट लाए हो?’’ वह बोला कि आपजी ने दिलवाया ही नहीं है? आप जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर ! सब्र रख।’’</p>
<h3>एक-दो अफसर शहनशाह के प्रति श्रद्धा भाव रखते थे | Shah Mastana Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">तहसीलदार ने अपने साथी अफसरों के साथ उक्त घटना की चर्चा की और बताया कि मुझसे ऐसा हुआ है। उनमें से एक-दो अफसर शहनशाह के प्रति श्रद्धा भाव रखते थे। उन्होंने अपने साथी तहसीलदार को कहा कि तुझसे भारी गलती हुई है। इसी रविवार को हम सभी एकत्रित होकर पूजनीय बेपरवार साँईं शाह मस्ताना जी महाराज के पास डेरे में दर्शनों के लिए चलेंगे और इस गलती की माफी मांगेेंगे। रविवार को दो जीपों में सवार होकर अधिकारीगण सरसा डेरे में आ पहुुंचे। उन्होंने आदरपूर्वक दाता जी को बताया कि हम गलती की माफी मांगने आए हैं। आप जी ने उन सभी अफसरों को सम्मानपूर्वक चाय पिलवाई। फिर उन्होंने आप जी से डेरे दिखाने की इच्छा प्रकट की। इस पर आप जी उन्हें डेरा दिखाने लगे। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी उन सभी को वहाँ ले गए जहाँ मकान बनाने की सेवा चल रही थी। तहसीलदार बोला कि बाबा जी, कुछ बात सुनाइए। आप जी उन्हें एक साखी सुनाने लगे। एक किसान की एक शेर के साथ दोस्ती हो गई। जब मित्रता गहरी हुई तो किसान ने शेर से कहा कि मेरे घर रोटी खाने के लिए चल। शेर बोला कि मैं जगली जानवर हूँ, मेरे मुँह से बदबू आती है। तेरी पत्नी मुझे ताना न मारे इसलिए घर जाकर पहले पूछकर आ। किसान ने घर जाकर अपनी पत्नी से सलाह की। उसकी पत्नी बोली कि आपके यार ने रोटी खानी है मैं ताना क्यों मारूंगी? जो दिन तय हुआ, उस दिन किसान अपने दोस्त शेर को अपने घर ले आया।</p>
<h3>शेर को जो भी खाने को मिला, सब खा गया | Shah Mastana Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">शेर को जब खाना खिलाया जाने लगा तो उसे जो भी खाने को मिला, सब खा गया। किसान की औरत से यह सहन न हुआ और बोली कि कैसे जानवरों से दोस्ती की है। सब कुछ ही खा गया। शेर उठकर वापिस चला गया। किसान को डर पड़ गया कि शेर को क्या मुँह दिखाऊँगा? कुछ दिनों बाद जब किसान शेर से मिला तो शेर ने कहा कि तू कूल्हाड़ा ला और मुझे मार। मैं लहूलुहान हो जाऊँगा फिर तू चले जाना और सात दिन बाद मेरा पता लेने आना। किसान ने वैसा ही किया। थोड़े दिनों में जख्म ठीक हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शेर बोला कि यह जख्म तो ठीक हो गया परंतु तेरी पत्नी के ताने का जख्म जो अंदर हो गया है, वह सारी उम्र दिल से नहीं भूलूंगा। पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज ने फरमाया कि कड़वा बोलने से जो जख्म बन जाते हैं, वह जल्दी भरते नहीं। तहसीलदार को अपनी गलती का पूरी तरह अहसास हो चुका था। उसने पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज से हाथ जोड़कर माफी मांगी। Shah Mastana Ji</p>
<p><a title="Sahara Group News : सहारा समूह के निवेशकों को दी वित्त मंत्री ने बड़ी खुशखबरी!" href="http://10.0.0.122:1245/finance-minister-gives-great-news-to-sahara-group-investors/">Sahara Group News : सहारा समूह के निवेशकों को दी वित्त मंत्री ने बड़ी खुशखबरी!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-tehsildar-realized-his-mistake-asked-for-forgiveness-with-folded-hands/article-60760</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-tehsildar-realized-his-mistake-asked-for-forgiveness-with-folded-hands/article-60760</guid>
                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 11:22:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-08/mastana-ji-2.jpg"                         length="57244"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Source of Inspiration : देखते ही देखते मृत बच्चे ने आंखें खोल दीं, सच्चे सतगुरू जी ने उसे जीवित कर दिया!</title>
                                    <description><![CDATA[Source of Inspiration : सन् 1957, बुधरवाली, राजस्थान राजस्थान के गांव बुधरवाली में 27 सिंतबर, 1957 की रात को शहनशाह शाह मस्ताना जी सत्संग फरमा रहे थे। काफी संख्या में साध-संगत बड़े प्रेम व मस्ती से सत्संग सुन रही थी। इस गांव का माड़ू राम नामक व्यक्ति मेहनत-मजदूरी कर हक-हलाल की खाने वाला श्रद्धापूर्वक सत्संग […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-true-satguru-brought-him-back-to-life/article-60534"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/shah-mastana-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of Inspiration : सन् 1957, बुधरवाली, राजस्थान</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के गांव बुधरवाली में 27 सिंतबर, 1957 की रात को शहनशाह शाह मस्ताना जी सत्संग फरमा रहे थे। काफी संख्या में साध-संगत बड़े प्रेम व मस्ती से सत्संग सुन रही थी। इस गांव का माड़ू राम नामक व्यक्ति मेहनत-मजदूरी कर हक-हलाल की खाने वाला श्रद्धापूर्वक सत्संग सुन रहा था। उसका इकलौता लड़का कुछ समय पहले ही पैदा हुआ था। घर के पड़ोसी द्वारा सत्संग के दौरान माड़ू राम के पास एक संदेश आया कि तेरा लड़का बहुत ही बीमार है। तो माड़ूू राम ने उस आदमी को यह कहकर वापिस भेज दिया कि मेरे लड़के को दवा दिलवा दो। मैं अभी थोड़ी देर में आ रहा हूं, क्योंकि उसे अंदर से आप जी के दर्श-दीदार का सच्चा रस आ रहा था। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">थोड़ी देर बाद फिर से समाचार आया कि तेरा लड़का मर गया है और तुझे तुरंत घर बुलाया गया है। यह सुनकर माडू राम ने उसे यह कहकर फिर से वापिस भेज दिया कि मेरा लड़का तो मर ही गया है तो अब मैं क्या कर सकता हूं? तुम घर चलो और मैं अब पूरा सत्संग सुनकर ही घर आऊंगा। सचमुच ही उसे ईलाही सत्संग का इतना आनंद आ रहा था, जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं था। इकलौते लड़के की मौत की दुखदायी खबर सुनकर भी वह सत्संग से नहीं उठा। सत्संग की समाप्ति पर साध-संगत उठकर अपने-अपने घरों को जाने लगी तो किसी सेवादार भाई ने माड़ू राम के लड़के की मृत्यु की खबर पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज को भी बता दी।</p>
<h3>‘‘माड़ू राम, सुना है तेरा लड़का चल बसा है” | Shah Mastana Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">पूरी बात सुनकर पूजनीय दातार जी ने फरमाया, ‘‘माड़ू राम, सुना है तेरा लड़का चल बसा है और तू उठकर अपने घर क्यों नहीं गया?’’ उसने बताया कि बाबा जी, आपके प्रेम में इतना रस आ रहा था कि इसे छोड़कर कैसे चला जाता? मैं इसमें कर ही क्या सकता था? यह तो आप जी की ही अमानत है। आपजी का वचन ही सत्य वचन है। आप जी ने अपनी तवज्जोह (भरपूर दृष्टि) भक्त माड़ू राम पर डालते हुए फरमाया, ‘‘पुट्टर, घबराना नहीं। ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा बोलकर बच्चे को हिला-डुलाकर देख लेना, जल्दबाजी बिल्कुल भी नहीं करना। क्या पता उसके श्वास कहीं रूके हुए हों।’’ सच्चे पातशाह जी का आशीर्वाद प्राप्त करके जब वह अपने घर पहुंचा तो घर में कोहराम मचा हुआ था। लोग तरह-तरह की बातें करने व ताने देने लगे। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">तब तक उसके लड़के को मरे हुए तीन घंटे बीत चुके थे। माड़ू राम अपने लड़के के पास ही बैठकर रोने लगा। तभी उसे शहनशाह जी के ईलाही वचन याद आ गए। वचनानुसार उसने ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा लगाकर बच्चे को हिलाया-डुलाया और बेपरवाह जी के आगे विनती की कि सांईं जी, आप जी हमारे यहां जीवों के उद्धार के लिए पधारे हैं परंतु मेरा यह अभागा लड़का आपजी के दर्शन भी नहीं कर सका। तभी बच्चे की टांग थोड़ी सी हिली। अचानक उसके शरीर में कुछ हरकत महसूस होती देखकर सभी की आंखें उस बच्चे के शरीर पर टिक गई। धीरे-धीरे लड़के का रंग भी बदलने लगा और थोड़ी देर के बाद सभी के देखते ही देखते बच्चे ने आंखें खोल दीं।</p>
<h3>सभी ने प्रसन्नतापूर्वक ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा लगाया</h3>
<p style="text-align:justify;">अपने सतगुरू जी की इस रहमत को प्रत्यक्ष में देख सभी ने प्रसन्नतापूर्वक ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा लगाया तथा मुर्शिद-ए-कामिल का धन्यवाद करने लगे। गांव के घर-घर में यह खबर फैल चुकी थी। चारों और आपजी की महिमा हो रही थी। सुबह-सुबह ही माड़Þू राम अपने पूरे परिजनों एवं कई गांववासियों के साथ प्यारे सतगुरू जी का धन्यवाद करने आश्रम में आ गया। भगत तो खुशी के मारे बोल भी नहीं पा रहा था। आप जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर कैसे आए हो?’’ सेवादारों ने बताया कि बाबा जी, माड़ू राम का लड़का रात को शरीर त्याग गया था। आप जी की दया-मेहर रहमत से अब वह फिर से जिंदा हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये आपके दर्शनों के लिए आए हैं। अंतर्यामी दातार जी ने फरमाया, ‘‘यह सब झूठ है। मरा हुआ भी कभी दोबारा जिंदा हो जाता है?’’ माड़ू राम के साथ आए सभी भक्तों ने बताया कि लड़का आपजी की रहमत से ही जिंदा हुआ है। इस पर पूज्य शहनशाह जी ने मुस्कुराते हुए फरमाया, ‘‘सभी की एक ही राय है? पुट्टर, तेरी सेवा व सच्ची भक्ति के कारण ही सच्चे पातशाह दाता सावण शाह जी महाराज जी ने तेरे बच्चे को जिंदगी बख्शी है। इसका यह नया जन्म हुआ है। अब असीं इसका नाम गंगा राम रखते हैं।’’ इस अद्भुत करिश्में को देखकर सारी साध-संगत बहुत ही खुश हुई। Shah Mastana Ji</p>
<p><a title="Maharashtra : महाराष्ट्र, ब्लॉक धनौरा के गणेश इन्सां की मानवता भलाई कार्य में गजब की शिद्दत!" href="http://10.0.0.122:1245/ganesh-insan-of-block-dhanaura-maharashtra-has-amazing-dedication-towards-his-humanitarian-work/">Maharashtra : महाराष्ट्र, ब्लॉक धनौरा के गणेश इन्सां की मानवता भलाई कार्य में गजब की शिद्दत!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-true-satguru-brought-him-back-to-life/article-60534</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-true-satguru-brought-him-back-to-life/article-60534</guid>
                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 11:13:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-07/shah-mastana-ji-maharaj.jpg"                         length="20691"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        