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                <title>डेरे की साध-संगत ने राहगीरों के लिए लगाया प्याऊ</title>
                                    <description><![CDATA[संगरिया (सुरेंद्र जग्गा)।  पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए लोक भलाई कार्यों में अग्रसर ब्लॉक संगरिया की साध-संगत ने बढ़ती हुई गर्मी को देखते हुए राहगीरों के लिए आज दूसरे प्याऊ का उद्घाटन ग्राम चक हीरा सिंह वाला बस स्टैंड पर किया। इस दौरान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/dera-man-thristy-water-problem-solve-good-work-huminty/article-3709"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/sangria.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरिया (सुरेंद्र जग्गा)। </strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए लोक भलाई कार्यों में अग्रसर ब्लॉक संगरिया की साध-संगत ने बढ़ती हुई गर्मी को देखते हुए राहगीरों के लिए आज दूसरे प्याऊ का उद्घाटन ग्राम चक हीरा सिंह वाला बस स्टैंड पर किया। इस दौरान शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के जिम्मेवार लालचंद इन्सां ने बताया कि चकहीरा सिंह वाला बस स्टैंड पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था न होने के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। यहां पर नुकेरा जंडवाला सादुलशहर गंगानगर व संगरिया की तरफ आने जाने वाले राहगीरों की भीड़ हमेशा लगी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु पीने के पानी के लिए कोई सार्वजनिक प्याऊ आदि की व्यवस्था न होने से इस भीषण गर्मी में राहगीरों को अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा था। ऐसे में साध-संगत ने यहां पर आज प्याऊ का उद्घाटन विनती का भजन बोलने के बाद किया। पानी पिलाने के लिए नियमित सेवा प्रेमी रोशनलाल इन्सां देंगे, इस मौके पर उपस्थित मार्केट प्रधान कृष्ण लाल कस्वा ने साध-संगत द्वारा किए गए। इस कार्य की भरपूर प्रशंसा की इस सेवा कार्य में मुख्य रूप से लालचंद इन्सां ट्विंकल इन्सां, निंदी सोनी इन्सां, अमनदीप इन्सां, सुरेंद्र जग्गा इन्सां, लखबीर मिस्त्री इन्सां, धन्नाराम इन्सां, बद्रीप्रसाद इन्सां, भंगीदास पृथ्वी इन्सां, भंगीदास रज्जीराम इन्सां, साजन इन्सां, जगनंदन इन्सां, बलकरन सिंह इन्सां, अक्षितइन्सां, गुरबचन इन्सां, मदनलाल, मोहनलाल, सुदेश वर्मा व जगतार मिस्त्री ने भरपूर सहयोग किया।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 May 2018 20:35:40 +0530</pubDate>
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                <title>भलाई करने वालों को मिलती हैं खुशियां</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/happiness-comes-to-those-who-are-good/article-405"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/pitaji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong>  पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ऐसे इन्सान इस कलियुग में हैं तो सही, पर जनसंख्या के अनुसार बहुत कम हैं जिनके अंदर यह भावना रहती है कि ईश्वर जब मेरा भला कर रहे हैं वो सबका भला करें। किसी को रोता देखकर, किसी को तड़पता देखकर वो मालिक से दुआ करने बैठ जाते हैं, उसके दु:ख-दर्द में शरीक हो जाते हैं, बात करते हैं, राह दिखाते हैं और मालिक से यही मांगते हैं कि हे मालिक! जैसे तूने मुझ पर रहमो-करम किया है ये भी तेरी औलाद हंै, जाने-अनजाने में इससे कोई भयानक कर्म हुआ होगा तो उन कर्मों की सजा से इन्हें मुक्त कर दे। अपने नूरे-नजर, रहमो-करम, अपनी दया-मेहर से इसके पाप-कर्मों को हर ले। जो ऐसी भावना रखते हैं, दूसरों के प्रति हमदर्दी रखते हैं मालिक उन पर रहमत, दया-मेहर जरूर करता है, क्योंकि जैसी अपने पास हिम्मत होती है, जो करने योग्य होता है उसी के अनुसार दूसरे का भला करना चाहिए।<br />
तो भाई! इस तरह से जो मालिक के मुरीद होते हैं वो मालिक से मालिक को मांगते हैं। उसके साजो-सामान में कभी नहीं उलझते। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिनके अंदर अपने परमपिता परमात्मा को पाने की लगन होती है, जो दोनों जहां की खुशियों से एक बार रू-ब-रू हो जाते हैं, जिनको मालिक के रहमो-करम की नूरे-नजर की झलक मिल जाती है वो मालिक से दुनियावी साजो-सामान नहीं मांगते। वो ये ही मांगते हैं कि हे सतगुरु! हे अल्लाह! हे राम! तेरे रहमो-करम की नजर कभी भी मुझ पर से न उठे, तेरा साया मुझ पर पड़ा रहे। तेरे दर्श-दीदार के मैं काबिल नहीं पर तेरे रहमो-करम ने काबिल बनाया है। हे ईश्वर! हे मालिक! ऐसी रहमत, दया-मेहर करना कि तेरी औलाद का सत्कार करूं, अच्छे, नेक कर्म करूं और तेरी राह पर चलता हुआ तेरे दर्श-दीदार से मालामाल हो जाऊं।<br />
आप जी फरमाते हैं कि किसी फकीर के पास कोई गया और कहने लगा कि मैं बड़ा भाग्यशाली हूं। फकीर कहने लगा कि भाई, ऐसा क्या कर दिया तूने? वो कहने लगा कि मेरे पास दो बेटे हैं, पूरा पैसा है, घर है, आराम है, सब कुछ है। तो आगे से फकीर ने कहा कि भगवान मिला? वह आदमी कहता कि नहीं। फकीर ने कहा कि कैसा भाग्यशाली जिसे न भगवान मिला। तो तू काहे का भाग्यशाली है? भाग्यशाली तो वो होते हैं जो सुप्रीम पावर, दोनों जहां की शक्ति के दर्श-दीदार कर लिया करते हैं और जिससे फिर ऐसी खुशियां मिलती हैं, ऐसी शांति मिलती है जो लिखने-बोलने से परे की बात है। तो भाई! मालिक का सुमिरन करें, भक्ति-इबादत करें। उसके नाम का जाप करते हुए आप अपने गम, चिंता, अंदर की परेशानियों को खत्म कर सकते हैं और फिर आत्मिक शांति, परमानन्द से दोनों जहां की खुशियों से आपका जीवन महक उठेगा, आपके जीवन में बहारें छा जाएंगी।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Dec 2016 04:27:10 +0530</pubDate>
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