<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/mind/tag-5674" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>mind - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/5674/rss</link>
                <description>mind RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वचनों पर चलने से होता है अंतकरण का शुद्धिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब हर जगह, हर पल, हर समय रहता है। कोई ऐसी जगह नहीं जहां भगवान न हो। प्रभु का रहमो-कर्म हर कोई हासिल कर सकता है, बस…, वचनों को मानें। आप वचनों पर चलें तो अंत:करण शुद्ध हो जाता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब हर जगह, हर पल, हर समय रहता है। कोई ऐसी जगह नहीं जहां भगवान न हो। प्रभु का रहमो-कर्म हर कोई हासिल कर सकता है, बस…, वचनों को मानें। आप वचनों पर चलें तो अंत:करण शुद्ध हो जाता है, विचारों पर काबू आ जाता है और मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन अंदर-बाहर से होने शुरू हो जाते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान, अल्लाह, राम को किसी से कोई दुश्मनी नहीं होती। इन्सान अपने कर्मों को हल्का नहीं करना चाहता। इसलिए वो दर्शन नहीं देता। हर जगह भगवान तो है, पर आप उसे नहीं देख पा रहे, क्योंकि आप अपने अंत:करण का शुद्धिकरण नहीं कर रहे। जरा सोचिए, क्या आप अपने शरीर के लिए खाते-पीते नहीं हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">आपको मालूम है कि अगर नहीं खाएंगे तो चल नहीं पाएंगे, कामधंधा नहीं कर पाएंगे। इसलिए आप खाते-पीते हैं। उसी तरह अंत:करण की शुद्धि के लिए सुमिरन क्यों नहीं करते? दूसरों को दोष देते रहते हैं। कभी अपने-आपके बारे में सोचा है कि आपके खुद के विचार कैसे हैं? अगर बुरे विचार आ जाते हैं तो सुमिरन करें, बुरे विचारों पर न चलो, तो यकीनन आपका पाप-कर्म उसी समय खत्म हो जाएगा और मालिक की दया मेहर रहमत से आप मालामाल होते जाएंगे। इसलिए अपने विचारों का शुद्धिकरण करना अति जरूरी है। जो विचारों का शुद्धिकरण नहीं करते, वो खुशियों से खाली रह जाते हैं। इसलिए वचनों पर अमल किया करो ताकि आपको मालिक की दया-मेहर, रहमत मूसलाधार बरसती नजर आए और आप खुशियों से मालामाल हो जाएं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/purify-the-mind-to-get-god/article-3668</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/purify-the-mind-to-get-god/article-3668</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Mar 2018 03:28:36 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिम्मत के साथ मन से लड़ते रहो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को चाहे दुनिया का कितना भी तजुर्बा आ जाए, पर वह मालिक की तरफ से तब तक नन्हा बच्चा ही रहता है, जब तक इन्सान सत्संग नहीं सुनता, अमल नहीं करता। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपने मन-जालिम की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/keep-fighting-mind-with-courage-saint-dr-msg/article-3511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/gurmeet-ram-rahim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को चाहे दुनिया का कितना भी तजुर्बा आ जाए, पर वह मालिक की तरफ से तब तक नन्हा बच्चा ही रहता है, जब तक इन्सान सत्संग नहीं सुनता, अमल नहीं करता। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपने मन-जालिम की वजह से दिखता कुछ और है, करता कुछ और है। ऐसे में इन्सान कभी सुख हासिल नहीं कर पाता। फिर वो जीव भाग्यशाली होते हैं जो मन से लड़ते हुए सत्संग में आते हैं। जीवों के कोई अच्छे संस्कार होते हैं कि जीव सत्संग में आ जाता है और मन की नहीं मानता। हालांकि मन तरह-तरह के विचार देता है, लेकिन जीव विचारों पर अमल नहीं करता तो वह विचारों के फल से बच जाता है। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने बुरे विचारों को काबू करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर इन्सान को बुरे विचार आते हैं तो उसी समय सुमिरन कर लो। फिर धीरे-धीरे ये विचार आने बंद हो जाएंगे, लेकिन मन ऐसा जादूगर योद्धा है, जो थकता नहीं है। इसलिए ऐसा नहीं है कि आपके पांच मिनट के सुमिरन से मन काबू आ जाएगा। अत: आप भी हिम्मत वाले बन जाओ कि जब मन शुरु होगा तो मैं भी शुरु हो जाऊंगा। तो यकीन मानिए कि बुरे विचारों का लेश मात्र भी असर आपकी भक्ति पर या आपकी जिंदगी पर नहीं आएगा। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने विचारों को सोच-सोचकर बीमार नहीं होना चाहिए कि अब तो मुझे खुशी नहीं, रहमत नहीं है। अब तो मैं दुखी हो जाऊंगा। अगर आप ऐसा करते रहोगे तो ये मन की चालें हैं। इसलिए मन की कभी न सुनो और मन से लड़ते रहो। सुमिरन करने से मन कंट्रोल में आ जाएगा और एक दिन आत्मा की जीत जरूर होगी। वो दिन आपके लिए सबसे सुखों भरा होगा, खुशियां लेकर आएगा। सिर्फ आपके ही नहीं बल्कि परिवारों के चेहरे भी खुशियों से लबरेज हो जाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/keep-fighting-mind-with-courage-saint-dr-msg/article-3511</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/keep-fighting-mind-with-courage-saint-dr-msg/article-3511</guid>
                <pubDate>Sun, 12 Nov 2017 03:23:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-11/gurmeet-ram-rahim.jpg"                         length="213897"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमात्मा को पाने के लिए मन का शुद्धिकरण करें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में, उसके प्यार-मोहब्बत में जो खुशी मिलती है, वो कहीं से नहीं खरीदी जा सकती। इन्सान की भावना जब प्रबल हो जाती है, उस परमपिता परमात्मा के लिए अंत: करण तड़प उठता है, जब इन्सान अपने परमपिता परमात्मा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/purify-the-mind-to-get-god-saint-dr-msg/article-3491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/pita-ji-blessing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में, उसके प्यार-मोहब्बत में जो खुशी मिलती है, वो कहीं से नहीं खरीदी जा सकती। इन्सान की भावना जब प्रबल हो जाती है, उस परमपिता परमात्मा के लिए अंत: करण तड़प उठता है, जब इन्सान अपने परमपिता परमात्मा के दर्श-दीदार हेतू व्याकुल हो जाता है, और उसका दर्श-दीदार होता है, तो ऐसा आभास होता है, ऐसा आनन्द आता है, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक नशा, एक नूर, एक लज्जत दिलो-दिमाग पे छा जाता है, कण-कण, जर्रे-जर्रे में परमपिता परमात्मा नजर आने लगते हैं, शरीर का रोम-रोम नशिया जाता है और इन्सान मालिक के दर्श-दीदार से निहाल हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान को उस परमानन्द की प्राप्ति होती है, जो इस जहान में भी खत्म नहीं होता और अगले जहान में भी ज्यों का त्यों बना रहता है, लेकिन उसको पाने के लिए अपनी भावना का शुद्धिकरण करना होगा। आप जी फरमाते हैं आप सुमिरन, भक्ति, इबादत करें, ताकि आपके अंदर जो बुरे, गलत विचार आते हैं, उन पर काबू हो जाए। चलो…, मन गलत विचार दे भी देता है, तो उस पर अमल न करो, उसके अनुसार न चलो, तो भी मालिक के कृपा-पात्र एक-न-एक दिन आप जरूर बन जाएंगे। जब बुरे विचारों को आप फोलो करने लगते हैं, मन की कही बातों पे अमल करने लगते हैं, तो आप दु:खी, परेशान रहते हैं, टेंशन में रहते हैं और अपने कर्मों का बोझ उठाते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए आप वचन सुनो, सुमिरन करो और अपने अंत:करण की सफाई करो। जब अंदर की सफाई हो जाएगी, जब आप अंदर से पाक-पवित्र हो जाएंगे, तो मालिक की कृपा-दृष्टि जरूर बरसेगी, उसकी दया-मेहर, रहमत से आपके जन्मो-जन्मो के पाप-कर्म धुल जाएंगे। आप जी फरमाते हैं कि आप चलते, बैठते, लेटते, काम-धंधा करते हुए सुमिरन करो। मालिक के नाम को सलाम है। ये कभी न सोचो कि आप बहुत बड़े गुणवान बन गए हो, आपकी वाह-वाह हो रही है, शायद इसलिए मालिक, अल्लाह, राम आपको मोहब्बत करते हैं! नहीं, उसको आपकी मान-बढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप वचनों पर पक्के रहो, भावना मालिक के लिए बनाकर रखो। ये न हो कि आपकी भावना हर किसी के लिए गिरती, पड़ती हो, आप हर किसी के आशिक हो जाते हो। नहीं, आप उस परमपिता परमात्मा के आशिक बनो, तो वो खुशियां देता है, दोनों जहान का परमानन्द पिला देता है। इसलिए जरूरी है सुमिरन के पक्के बनना। घंटा सुबह-शाम या आधा घंटा सुबह-शाम मालिक का नाम जपो, मालिक से मालिक को मांगो, बुरे कर्म ना करो। क्योंकि दो कश्ती पे सवार कोई वैसे ही नहीं बचता और एक कश्ती होती ही नहीं तो बचेगा कैसे? इसलिए परमपिता परमात्मा से आप आनन्द चाहते हैं, तमाम लज्जतें चाहते हैं और अपने अवगुण, पाप-गुनाह खत्म करना चाहते हैं, तो सुमिरन करो, सेवा करो और अपना प्यार-मोहब्बत मालिक के लिए दृढ़ करो, सिर्फ उसी से प्यार करो, बाकी फर्ज, कर्त्तव्य का निर्वाह करते रहो, यकीनन मालिक की कृपा-दृष्टि होगी। जो लोग सुनते हैं, मानते हैं, मालिक उन पर रहमो-कर्म जरूर बरसाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/purify-the-mind-to-get-god-saint-dr-msg/article-3491</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/purify-the-mind-to-get-god-saint-dr-msg/article-3491</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 04:25:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-11/pita-ji-blessing.jpg"                         length="79730"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        