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                <title>happiness - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>खुशी भरने वाला हो हर कर्म</title>
                                    <description><![CDATA[अब सवाल यह है कि विनाश की ओर बढ़ रहे समय में कोई पल उत्सव कैसे हो सकता है?
 अत: प्रत्येक जन को सृजन व संरक्षण के लिए संकल्प लेना होगा।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/every-ta-should-be-full-of-happiness/article-12135"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/happy-new-year.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नववर्ष का आगाज कड़ाके की ठंड के साथ शुरू हो रहा है। पिछली रात दुनिया भर ने जमकर जश्न मनाया और अपने-अपने तरीके से नये साल की शुरूआत की। तिथियों के इस फेरबदल से नये उत्साह का संचार होना अच्छी घटना है। बड़े स्तर पर मानवीय आबादी इस दिन पिछले साल की गलतियों व हानियों को याद करती है और अगले साल में पुरानी गलतियों को नहीं दोहराने व अपने लिए, परिवार के लिए, देश के लिए सबके लिए अच्छे संकल्प जोड़ती है, काफी अच्छा दिन गुजरता है, या यूं कहें कि कई सप्ताह उल्लास में गुजरते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बुद्धिजीवी इस दिन कई जटिल किन्तु सार्थक हो सकने वाले उद्देश्य गिनते हैं। कई दफा इन उद्देश्यों की गणना के वक्त कुछ भी नया नहीं हो सकने वाली निराशा भी व्यक्त करते हैं और महज कैलेंडर के बदल लेने तक सीमित कर लेते हैं। परंतु समय की बजाय जो लोग जीवन में विश्वास करते हैं वह निश्चित रूप से नया करने के लिए मचल पड़ते हैं। जीवन प्रतिक्षण प्रफुलित होने वाली घटना या अहसास है, स्पष्ट है जब प्रतिपल नया है फिर सैकड़ों दिनों बाद आने वाले एक दिन का कुछ खास औचित्य बखान करना काफी आडम्बरपूर्ण लगने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: नयेपन के साथ प्रत्येक जन को हर दिन ही उल्लास में जीने की कला को सिद्ध करने के लिए प्रत्यनशील होना चाहिए। अभी दुनिया भर में आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा स्वकेंद्रित उपभोग में जी जा रहा हैं, जिसके कारण पृथ्वी प्रतिपल विनाश के नजदीक पहुंच रही है। अब सवाल यह है कि विनाश की ओर बढ़ रहे समय में कोई पल उत्सव कैसे हो सकता है? अत: प्रत्येक जन को सृजन व संरक्षण के लिए संकल्प लेना होगा। पशु-प्राणी, वनस्पति, मिट्टी, जल, हवा, एवं दरिद्र मनुष्यों की सहायता कर नया साल ताजगी एवं खुशी भरने वाला बने। कर्मशील सभी हैं, लेकिन इस नव वर्ष में हर मनुष्य का कर्म हर प्राणी मात्र के उपकार में लगे। कड़ाके की ठंड में हम हर जीव जन्तु व इन्सान का सहारा बनें और यथासंभव मदद करें ताकि ठंड से किसी से प्राण न जाए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2019 20:22:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आय बढ़ने पर भी खुशहाली की गारंटी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में संयुक्त राष्टÑ की ओर से विश्व खुशहाली पर एक रिपोर्ट जारी हुई है, भारत उसमें 140वें पायदान पर है जबकि कुछ वर्ष पहले भारत 133वें पायदान पर था, हम सात पायदान नीचे गिर चुके हैं। देश में जैसे-जैसे आर्थिक तानाबाना फैल रहा है देश में खुशहाली का स्तर गिर रहा है। आखिर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में संयुक्त राष्टÑ की ओर से विश्व खुशहाली पर एक रिपोर्ट जारी हुई है, भारत उसमें 140वें पायदान पर है जबकि कुछ वर्ष पहले भारत 133वें पायदान पर था, हम सात पायदान नीचे गिर चुके हैं। देश में जैसे-जैसे आर्थिक तानाबाना फैल रहा है देश में खुशहाली का स्तर गिर रहा है। आखिर इस आर्थिक दौड़ का लाभ कौन ले रहा है? साफ है गरीबों को खुशहाली नहीं मिल रही बल्कि देश का उद्योगजगत अपनी सम्पति बढ़ाने में लगा हुआ है। अभी लोकसभा चुनाव हो रहे हैं एक बार फिर कांग्रेस ने नारा दे दिया है कि वह देश के 20 प्रतिशत गरीब परिवारों को गरीबी से मुक्त करेगी ऐसे परिवारों के न्यूनतम छह हजार रूपये महीना व 72000 रूपये वार्षिक आय गारंटी के साथ उपलब्ध करवाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा इससे बेचैन हो उठी है, भाजपा नेता एवं वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस के वादे को छोटा करने के लिए कहा है देश का हर परिवार पहले ही 106000 रूपये की निश्चित आय सब्सिडी के तौर पर ले रहे हैं। वित्तमंत्री की बात से बहुत कम लोग सहमत होंगे चूंकि ये 106000 रूपये गरीबों को नजर नहीं आ रहे। गरीबी हटाने का सर्वप्रथम नारा 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने दिया था, तब से अब तक पिछले करीब 50 साल में गरीबी बहुत ही सुस्त चाल से हटी है,</p>
<p style="text-align:justify;">बल्कि जितने परिवार गरीबी में फंस रहे हैं उसकी तुलना में बहुत कम परिवार इससे उबर पा रहे हैं। कोई भी राजनीतिक पार्टी पता नहीं क्यों उन कारणों को दूर नहीं करना चाह रही जो गरीबी को मिटने नहीं दे रहे, रह-रहकर राजनेता नगद आय या सहायता का प्रलोभन देते रहते हैं, जिससे गरीबी का एकमात्र कारण भ्रष्टाचार दिन-दोगुना रात चौगुना बढ़ रहा है। इस देश में अभी तक भी शासन व प्रशासन में भ्रष्टाचार खत्म हो इस पर कोई ईमानदार पहल नहीं हो सकी है। यही एकमात्र कारण है कि भारतीय बहुत कमा लेने के बाद भी खुशहाल नहीं हैं और यह खुशहाली भारतवासियों से सदैव दूर बनी रहेगी यदि यहां भ्रष्टाचार नहीं मिटता।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2019 20:02:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शिक्षा में नई चेतना लाएगा ‘आनंदवार’</title>
                                    <description><![CDATA[कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के लिए धीमी गति से..थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती है। हम उसे सभ्य, सुसंस्कृत, सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/education-will-bring-new-consciousness-happiness/article-6009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के लिए धीमी गति से..थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती है। हम उसे सभ्य, सुसंस्कृत, सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने का प्रशिक्षण? बचपन की मस्तियां, शैतानियां, नादानियां, किलकारियां, निश्छल हँसी, उन्मुक्तता, जिज्ञासा आदि अनेक बालसुलभ क्रियाओं को बस्ते के बोझ ने अपने वजन तले दबा दिया है। बचपन का सावन, कागज की कश्ती और बारिश के पानी के बालक केवल बातें ही सुनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का लगातार बढ़ता हुआ बोझ एक समस्या के रूप में समाज के सामने है। आजादी के बाद से ही इस पर लगातार चिंतन मनन होता रहा है और लगभग सभी शिक्षा आयोगों, समितियों ने इसकी चर्चा की है। शिक्षा बालक के सर्वांगीण विकास का आधार है। ‘सा विद्या या विमुक्तये हो या विद्या ददाति विनयम’ मन बुद्धि और आत्मा के विकास की बात हो अथवा बालक की अंतर्निहित शक्तियों के प्रकटीकरण की बात। शिक्षा मूल रूप से जीवन का आधार है, शिक्षा के बारे में मूल भारतीय चिंतन यही है।<br />
एक शिक्षक के रूप में मैंने इस समस्या को निकट से अनुभव किया हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं पिछले 10 वर्षों से बस्ते के बोझ की समस्या को हल करने के लिए प्रयासरत हूं और इस अवधि में समाधान के रूप में दो विकल्प देश भर के शिक्षा प्रेमियों शिक्षाविदों , शिक्षकों और अभिभावकों के सामने रखे हैं। इन प्रयासों को एक बड़ा मुकाम मिला जब पिछले वर्ष दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं एनसीईआरटी के तत्वावधान में बस्ते की बोझ की समस्या के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला में मुझे देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों और अधिकारियों के सामने अपने सुझाव रखने का अवसर मिला</p>
<p style="text-align:justify;">।समस्या ही नहीं समाधान की भी चर्चा होनी चाहिए इस बात का अनुसरण करते हुए मैंने अपने दो सुझाव प्रस्तुत किये। ये सुझाव देश भर में चर्चा का विषय बने। एक सुझाव को देश के विभिन्न राज्यो द्वारा लागू किया है। साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन ने देश भर में प्राथमिक कक्षाओं के लिए भी इस सुझाव को लागू किया है। अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने भी इस सुझाव को राज्य की स्कूल शिक्षा के लिए लागू किया है। यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा सुझाव है कि सप्ताह में एक दिन बस्ते की छुट्टी कर दी जाए। देश के विभिन्न भागों में कर्मचारियों के लिए “फाइव डे वीक” की योजना चलती है जिसमें सरकारी कार्यालय सप्ताह में 5 दिन ही खुलते हैं। यहां विद्यालय में शनिवार की छुट्टी भले न करें पर शनिवार को बस्ते की छुट्टी अवश्य कर देनी चाहिए अर्थात बच्चे एवं स्टाफ विद्यालय तो आएँ किंतु बस्ते के बोझ से मुक्त होकर व होमवर्क के दबाव के बिना। सहज प्रश्न खड़ा होता है कि यदि बच्चे बस्ता नहीं लाएँगे तो विद्यालय में करेंगे क्या? समाधान है सप्ताह में एक दिन बच्चे शरीर, मन, आत्मा का विकास करने वाली शिक्षा ग्रहण करेंगे। अपनी प्रतिभा का विकास करेंगे। शिक्षा शब्द को सार्थकता देंगे। और इस शनिवार को नाम दिया “आनंदवार” अर्थात शनिवार की शिक्षा बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आनंद उल्लास और उमंग देने वाली भी हो। यह सुझाव एक प्रयास हैं बालक को तनाव मुक्त, आनंददायी, सृजनात्मक/ प्रयोगात्मक शिक्षा देने का।</p>
<p style="text-align:justify;">सुझाव स्वरूप यह कालांश योजना प्रस्तुत है जिनके आधार पर दिनभर की गतिविधिया सम्पन्न होगीं। प्रथम कालांश – योग, आसन, प्राणायाम – व्यायाम प्रार्थना सत्र के पश्चात पहला कालांश योग-आसन, प्राणायाम, व्यायाम का रहे। बालक का शरीर स्वस्थ रहेगा, मजबूत बनेगा तो निश्चित रूप से अधिगम भी प्रभावी होगा। जीवन-पर्यंत प्राणायाम-व्यायाम के संस्कार काम आएँगे। विश्व योग दिवस का जो प्रोटोकॉल है, वह भी लगभग 40 मिनिट का है, उसका अभ्यास हो सकता है। दूसरा कालांश – श्रमदान /स्वच्छता/ पर्यावरण संरक्षण इस कालांश में विद्यालय परिसर की स्वच्छता का कार्य, श्रमदान एवं पर्यावरण संबंधित कार्यों का निष्पादन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय में वृक्षारोपण, उनकी सार संभाल, सुरक्षा, पानी पिलाना, आवश्यकता होने पर कटाई-छंटाई, कचरा निष्पादन आदि कार्य। तीसरा कालांश – संगीत अभ्यास इस कालांश में गीत अभ्यास, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, प्रतिज्ञा, प्रार्थना का अभ्यास हो। उपलब्ध हो तो वाद्ययंत्र का अभ्यास और डांस क्लास (नृत्य अभ्यास) भी हम कालांश में करवाया जा सकता है। चतुर्थ कालांश- खेलकूद कुछ खेल इनडोर हो सकते है कुछ आउटडोर हो सकते है। अत्यधिक धूप की स्थिति में कक्षा कक्ष में ही बौद्धिक खेल, छोटे समूह के खेल इत्यादि हो सकते है। आनदं वार बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करके शिक्षा को बहुआयामी बना सकता है। पांच दिन बिना भारी भरकम बस्ते के जमकर पढाई और छठे दिन शनिवार को व्यक्तित्व विकास, सजृनात्मकता अभिव्यक्ति। मौजूदा शिक्षा प्रणाली में बिना बदलाव के, बिना किसी वित्तीय भार के इस उपाय से शिक्षा को आनंददायी और विद्यालय परिसर को जीवन निर्माण केन्द्र बनाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>संदीप जोशी</strong></p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Sep 2018 09:05:41 +0530</pubDate>
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                <title>सच्ची भावना से नजर आता है भगवान</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जहां एक मालिक, वाहेगुरु की चर्चा होती है, परमपिता परमात्मा से मिलने का ढंग सिखाया जाता है, (Meditation) बुरी से बुरी आदतें छूटती हैं और भगवान खुद विराजमान होते हैं, उसी का नाम सत्संग है। इन्सान भावना से याद करे तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-will-give-you-all-happiness/article-4287"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जहां एक मालिक, वाहेगुरु की चर्चा होती है, परमपिता परमात्मा से मिलने का ढंग सिखाया जाता है, <strong>(Meditation)</strong> बुरी से बुरी आदतें छूटती हैं और भगवान खुद विराजमान होते हैं, उसी का नाम सत्संग है। इन्सान भावना से याद करे तो वो जरूर नजर आएगा, जरूर अंदर से खुशी देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के क्षेत्र में साध-संगत सुबह-शाम राम-नाम, अल्लाह, मालिक की चर्चा सुनती है। वो बहुत ही पाक-पवित्र होता है। सत्संग में आकर अगर राक्षस, बुरे कर्म करने वाला तौबा कर ले, मालिक से जुड़ जाए तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है।</p>
<h1 style="text-align:center;">दिमाग में विचारों का आना कोई बड़ी बात नहीं है | Meditation</h1>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि कोई इन्सान इसके उल्ट दुर्भावना लेकर आता है, दिमाग में बुरे विचार लेकर आता है या बुरे कर्म करता है। तो उसका हश्र बहुत ही बुरा होता है। दिमाग में विचारों का आना कोई बड़ी बात नहीं है, पर उस पर अमल करना बहुत बड़ी बात है। चाहे वो बुरे हो चाहे अच्छे। अच्छे कर्मों का दिमाग में आना और उस पर अमल करना बेमिसाल है। परमपिता परमात्मा को मिलाने वाली बात है। वहीं बुरे विचार आना और फिर उन पर अमल करने से इन्सान भयानक बीमारियों व दु:ख तकलीफों से घिर जाता है, जो कभी निकल नहीं पाता।</p>
<h2 style="text-align:center;">गलती हो गई अनजाने में और इन्सान उसे मान<br />
लेता है, उसे इन्सान कहते हैं | Meditation</h2>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि गलती करके मान ले उसे इन्सान कहते हैं। गलती हो गई अनजाने में और इन्सान उसे मान लेता है, तौबा करता है, उसे इन्सान कहते हैं, लेकिन गलती पर गलती करे तो उसे हैवान, पशु कहते हैं। गलती पर गलती करता ही चला जाए तो उसे शैतान कहते हैं। उसका हशर फिर हद से ज्यादा बुरा होता है। उसको कहीं भी न दरगाह में, न इस जहान में टिकाव नहीं मिलता। अंदर से बेचैन, दर-दर की ठोकरें, तरह-तरह की बीमारियां, परेशानियां उसे घेर लेती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान सच्चे दिल से साध-संगत के समक्ष तौबा करे तो वह दरगाह में जल्दी मंजूर होती है। कई सत्संग में पीछे जाकर खड़े हो जाते हैं और वहीं माफी ले लेते हैं कि कौन-सा किसी को पता चलता है। फिर वो परमात्मा पता लगाकर ही छोड़ता है। आप जी फरमाते हैं कि मालिक तो मालिक है उससे कोई चालाकी करेगा तो इतना तो वो भोला है नहींं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान सत्संग में पीर-फकीर के वचन सुने उस पर अमल कर ले तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं। दुर्भावना, सद्भावना हो जाती है, लेकिन अगर कोई बुरे विचार लेकर उस पर अमल करने लग जाए तो उसका हशर बहुत ही बुरा होता है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jun 2018 11:40:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सतगुरु-मालिक के प्रेम में छुपी है सारी खुशियां</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसा प्यार जिसमें कोई गर्ज नहीं। गर्जी (स्वार्थी) प्यार हमेशा कच्चा होता हैै सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्रेम के अक्षर अढ़ाई हैं, लेकिन अल्लाह, वाहेगुरु, राम ने सारी बहारें, सारी खुशियां इन अढ़ाई अक्षरों में ही छुपा रखी हैं। प्यार का मतलब जिसकी समझ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">ऐसा प्यार जिसमें कोई गर्ज नहीं। गर्जी (स्वार्थी) प्यार हमेशा कच्चा होता हैै</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्रेम के अक्षर अढ़ाई हैं, लेकिन अल्लाह, वाहेगुरु, राम ने सारी बहारें, सारी खुशियां इन अढ़ाई अक्षरों में ही छुपा रखी हैं। प्यार का मतलब जिसकी समझ में आ गया, वो दोनों जहां की खुशियां इस जहां में हासिल कर लिया करते हैं। यहां जिस प्यार का जिक्र है, वो प्यार आत्मिक प्यार है, रूहानी प्यार हैै।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा प्यार जिसमें कोई गर्ज नहीं। गर्जी (स्वार्थी) प्यार हमेशा कच्चा होता हैै, जब तक कोई आपकी गर्ज पूरी करता है, जब तक हां में हां मिलाते हैं, तो प्यार बना रहता है और जैसे ही हां में हां मिलाना बंद कर दिया, चाहे वो बाप-बेटा हो, चाहे पति-पत्नी हो, चाहे यार, दोस्त-मित्र हो, रिश्ता-नाता टूटने में ज्यादा देर नहीं लगती। लेकिन एक बात जेहन, दिमाग में रखिए कि जो ज्यादा चापलूस होते हैं, उनकी बजाय वो लोग बेहतर हैं जो आपके मुंह पर आपका सच बता देंं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई चापलूस दोस्त होते हैं, मान-बड़ाई करते रहते हैं और आदमी सोचता है कि मेरा मित्र यही है, लेकिन वो तो एक चापलूस है। उसने आपसे कोई काम लेना है या आपके पैसे से कोई चीज ले रहा है या आपसे फायदा उठा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शायद इसीलिए वह आपकी वाह-वाह कर रहा हो। इससे बढ़िया तो वो मित्र हैं, जो ज्यादा आपकी वाह-वाह तो नहीं करते, लेकिन आपमें अगर कोई कमी है तो आपके मुंह पर कह देते हैं कि तेरे में यह गंदी आदत है, इसको बदल डाल। सो हजारों मित्रों से ऐसा एक मित्र काफी है, जो आपको आपकी कमी बता दे। इसलिए चापलूस लोगों से सावधान रहो, गर्जी प्यार से बचकर रहो और सतगुरु, मालिक के प्यार से नाता जोड़ो।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 22:49:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम-नाम से महक उठता है जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, जो इंसान इस दवा को ले लेता है, तो यह दवा चहूं तरफ असर करती है। आंतरिक तौर पर आत्मा को वह शक्ति, वह नशा देती है जिसके द्वारा आत्मा उस भगवान के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-will-gives-you-precious-happiness/article-1095"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, जो इंसान इस दवा को ले लेता है, तो यह दवा चहूं तरफ असर करती है। आंतरिक तौर पर आत्मा को वह शक्ति, वह नशा देती है जिसके द्वारा आत्मा उस भगवान के दर्शन कर सकती है और बाहरी तौर पर ऐसी तंदुरुस्ती, ताजगी देती है जिससे इंसान को कोई भी गम, चिंता, टेंशन नहीं सताती।</p>
<h1 style="text-align:center;">नाम जपना इस कलियुग में मुश्किल लगता है</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां हैं, लेकिन नाम जपना इस कलियुग में मुश्किल लगता है। लोग और काम-धंधा कर लेते हैं, लेकिन जब राम-नाम की बात आती है, तो कन्नी खिसकाते नजर आते हैं। मालिक के नाम से पतझड़ में भी बहार आ जाती है। मालिक के नाम से सदियों से बिछड़ी आत्मा मालिक से मिलने के काबिल बन जाती है। मालिक का नाम सच्चे दिल से, तड़पसे लें, तो इंसान जरूर प्रभु की कृपा-दृष्टि के काबिल बनता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">इंसान एक बोझ की तरह जीवन गुजारता रहता है</h1>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि जीव नाम ले लेता है, लेकिन जाप नहीं करता। नाम लेकर सुमिरन करें, भक्ति-इबादत करें तो कोई गम, गम नहीं रहता कोई दु:ख, दु:ख नहीं रहता पर सुमिरन करें तो। सुमिरन करें ही न, भक्ति करें ही न तो कहां से अंत:करण में शांति आएगी, कहां से दिलो-दिमाग में खुशी आएगी। इंसान एक बोझ की तरह जीवन गुजारता रहता है। अगर आप चाहते हैं कि प्रभु की कृपा-दृष्टि हो, अगर आप चाहते हैं कि आपके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं दूर हो जाएं तो आप सच्ची तड़पसे, सच्ची लगन से चलते, बैठते, लेटके, काम-धंधा करते हुए ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को याद किया करें।</p>
<h1 style="text-align:center;">चंद रुपयों के लिए अपना दीन, ईमान, धर्म बेच देते हैं</h1>
<p>पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि चंद रुपयों के लिए अपना दीन, ईमान, धर्म बेच देते हैं। चंद रुपयों के लिए आज आदमी बिक रहा है। ये रुपये कब्र तक भी नहीं जाएंगे, श्मशान भूमि तक भी नहीं जाएंगे। आपकी पहनी हुई अंगुठियां, चेन जो कुछ भी हैं, नहलाने का बहाना बनाकर सब कुछ उतार लिए जाएंगे। और छोड़ो जो आपकी चारपाई, बैड है उससे भी धड़ाम से नीचे पटक देंगे। उस पर भी कोई लेटने नहीं देगा तो बाकी सामान तो क्या जाएगा। किस लिए अपना दीन, ईमान, धर्म, मजहब बेच देते हो? क्यों अल्लाह, राम, गॉड, खुदा, रब्ब से मुंह फेर लेते हो और माया की तरफ मुंह करके उसके दीवाने हो जाते हो। यह माया तिगड़ी नाच नचाती है। पाप, जुल्म, ठगी, बेईमानी की दौलत इंसान को ढंग से जीने नहीं देती।</p>
<h1 style="text-align:center;">मालिक का नाम वास्तव में बहार ला देता है</h1>
<p>पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि यह जरूरी है कि आप मेहनत की ही करके खाएं और उस राम, अल्लाह, गॉड, खुदा, रब्ब की भक्ति-इबादत करें, उसको याद करें। मालिक का नाम वास्तव में बहार ला देता है। सूखे हुए बागों में हरियाली आ जाती है और रेगिस्तान में कोयलें बोलती हैं। कहने का मतलब है जिसने कभी सपने में भी सुखों की कल्पना न की हो, दुखों भरी जिंदगी हो, गमों से लबरेज जीवन हो तो राम का नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब की भक्ति-इबादत उसके सब गम, दु:ख, दर्दों को दूर कर देती है और सोते-जागते शांति, सुख, आनंद से जीवन महक जाता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-will-gives-you-precious-happiness/article-1095</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2017 01:43:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हादसा: शादी की खुशियां मातम में बदली</title>
                                    <description><![CDATA[बरातियों से भरी बस ट्रक में घुसी हादसे में दो महिलाओ सहित तीन की मौत हादसे डेढ़ दर्जन से अधिक घायल Ajmer, SachKahoon News: अजमेर जिले के पुष्कर में रविवार देर रात को एक बरातियों से भरी हुई बस आगे चल रहे ट्रक में जा घुसी। इस हादसे में दो महिलाओं सहित तीन की मौत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/accident-happiness-change-into-sadness/article-410"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/ansu-in-eye.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">बरातियों से भरी बस ट्रक में घुसी</li>
<li style="text-align:justify;">हादसे में दो महिलाओ सहित तीन की मौत</li>
<li style="text-align:justify;">हादसे डेढ़ दर्जन से अधिक घायल</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Ajmer, SachKahoon News:</strong> अजमेर जिले के पुष्कर में रविवार देर रात को एक बरातियों से भरी हुई बस आगे चल रहे ट्रक में जा घुसी। इस हादसे में दो महिलाओं सहित तीन की मौत हो गई, वहीं डेढ़ दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल में भर्ती कवाया। जहां कई लोगों की हालत गम्भीर होने के कारण अजमेर रेफर किया गया है।<br />
पुलिस के अनुसार हादसा देर रात करीब 12 बजे पुष्कर रोड के नेशनल हाईवे 89 के टिलौरा गांव पास हुआ था। जहां अजमेर से बरातियों से भरी एक बस बीकानेर जा रही थी।<br />
इस दौरान बस की रफ्तार तेज होने के कारण चालक नियंत्रण खो बैठा और आगे चल रहे ट्रक में जा भिड़ा। इस हादसे में विमला (50) पत्नी धन्नालाल निवासी जॉन्स गंज अजमेर , विमला (55) पत्नी दीनदयाल निवासी रामंगज अजमेर व अनवर पुत्र अब्दुल निवासी हुमाड़ा अजमेर की मौत हो गई। वहीं कमलेश, सरोज, दीपेश, राजकुमार, नेहा, मनोज, राजकुमार, शशी, मनमोहन, बन्टी उर्फ महेन्द्र , प्रदीप कुमार, कन्हैयालाल, दीनदयाल, हर्ष वर्मा, कनिष्का, गोदावरी, धन्नालाल, हरदीप सिह, परमजीत सिंह अन्य लोग घायल हो गए। जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां कुछ की हालत गम्भीर होने कारण अजमेर रैफर किया गया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/accident-happiness-change-into-sadness/article-410</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Dec 2016 00:04:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भलाई करने वालों को मिलती हैं खुशियां</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa:  पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ऐसे इन्सान इस कलियुग में हैं तो सही, पर जनसंख्या के अनुसार बहुत कम हैं जिनके अंदर यह भावना रहती है कि ईश्वर जब मेरा भला कर रहे हैं वो सबका भला करें। किसी को रोता देखकर, किसी को तड़पता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/happiness-comes-to-those-who-are-good/article-405"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/pitaji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong>  पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ऐसे इन्सान इस कलियुग में हैं तो सही, पर जनसंख्या के अनुसार बहुत कम हैं जिनके अंदर यह भावना रहती है कि ईश्वर जब मेरा भला कर रहे हैं वो सबका भला करें। किसी को रोता देखकर, किसी को तड़पता देखकर वो मालिक से दुआ करने बैठ जाते हैं, उसके दु:ख-दर्द में शरीक हो जाते हैं, बात करते हैं, राह दिखाते हैं और मालिक से यही मांगते हैं कि हे मालिक! जैसे तूने मुझ पर रहमो-करम किया है ये भी तेरी औलाद हंै, जाने-अनजाने में इससे कोई भयानक कर्म हुआ होगा तो उन कर्मों की सजा से इन्हें मुक्त कर दे। अपने नूरे-नजर, रहमो-करम, अपनी दया-मेहर से इसके पाप-कर्मों को हर ले। जो ऐसी भावना रखते हैं, दूसरों के प्रति हमदर्दी रखते हैं मालिक उन पर रहमत, दया-मेहर जरूर करता है, क्योंकि जैसी अपने पास हिम्मत होती है, जो करने योग्य होता है उसी के अनुसार दूसरे का भला करना चाहिए।<br />
तो भाई! इस तरह से जो मालिक के मुरीद होते हैं वो मालिक से मालिक को मांगते हैं। उसके साजो-सामान में कभी नहीं उलझते। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिनके अंदर अपने परमपिता परमात्मा को पाने की लगन होती है, जो दोनों जहां की खुशियों से एक बार रू-ब-रू हो जाते हैं, जिनको मालिक के रहमो-करम की नूरे-नजर की झलक मिल जाती है वो मालिक से दुनियावी साजो-सामान नहीं मांगते। वो ये ही मांगते हैं कि हे सतगुरु! हे अल्लाह! हे राम! तेरे रहमो-करम की नजर कभी भी मुझ पर से न उठे, तेरा साया मुझ पर पड़ा रहे। तेरे दर्श-दीदार के मैं काबिल नहीं पर तेरे रहमो-करम ने काबिल बनाया है। हे ईश्वर! हे मालिक! ऐसी रहमत, दया-मेहर करना कि तेरी औलाद का सत्कार करूं, अच्छे, नेक कर्म करूं और तेरी राह पर चलता हुआ तेरे दर्श-दीदार से मालामाल हो जाऊं।<br />
आप जी फरमाते हैं कि किसी फकीर के पास कोई गया और कहने लगा कि मैं बड़ा भाग्यशाली हूं। फकीर कहने लगा कि भाई, ऐसा क्या कर दिया तूने? वो कहने लगा कि मेरे पास दो बेटे हैं, पूरा पैसा है, घर है, आराम है, सब कुछ है। तो आगे से फकीर ने कहा कि भगवान मिला? वह आदमी कहता कि नहीं। फकीर ने कहा कि कैसा भाग्यशाली जिसे न भगवान मिला। तो तू काहे का भाग्यशाली है? भाग्यशाली तो वो होते हैं जो सुप्रीम पावर, दोनों जहां की शक्ति के दर्श-दीदार कर लिया करते हैं और जिससे फिर ऐसी खुशियां मिलती हैं, ऐसी शांति मिलती है जो लिखने-बोलने से परे की बात है। तो भाई! मालिक का सुमिरन करें, भक्ति-इबादत करें। उसके नाम का जाप करते हुए आप अपने गम, चिंता, अंदर की परेशानियों को खत्म कर सकते हैं और फिर आत्मिक शांति, परमानन्द से दोनों जहां की खुशियों से आपका जीवन महक उठेगा, आपके जीवन में बहारें छा जाएंगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Dec 2016 04:27:10 +0530</pubDate>
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